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  • देश छोड़कर भाग गया स्वामी नित्यानंद, गुजरात पुलिस ने दर्ज किया था अपराध

    देश छोड़कर भाग गया स्वामी नित्यानंद, गुजरात पुलिस ने दर्ज किया था अपराध

    अहमदाबाद। आश्रम चलाने के लिए बच्चों को अगवा कर श्रद्धालुओं से चंदा जुटाने के काम में लगाने के आरोप से घिरा स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है. मीडिया रिपोट्स के मुताबिक नित्यानंद के खिलाफ बुधवार को एक दंपति ने अपनी दो बेटियों को छुड़ाने के लिए केस दर्ज कराई थी।

    केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने बाबा की दो महिला अनुयायियों साध्वी प्राण प्रियानंद और प्रियातत्व रिद्धि किरण को गिरफ्तार किया गया था. दोनों पर चार बच्चों को कथित तौर पर अगवा कर उन्हें एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का आरोप है।अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एसवी अंसारी ने बताया कि नित्यानंद विदेश भाग गया है. नित्यानंद कर्नाटक में अपने खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने के बाद ही देश छोड़कर भाग गया था और उसे यहां ढूंढना समय की बर्बादी होगी. उसके भारत आने के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है।

    आश्रम में सर्च ऑपरेशन,  43 टैबलेट और कई मोबाइल जब्‍त

    पुलिस ने नित्‍यानंद के आश्रम में सर्च ऑपरेशन चलाया है. आश्रम से चार लैपटॉप, 43 टैबलेट, पेन ड्राइव और कई मोबाइल जब्‍त किये गए. पुलिस ने कहा कि फिलहाल नित्‍यानंद की तलाश नहीं कर रहे हैं. पहले हम गिरफ्तार की गईं अनुयायियों से पूछताछ करेंगे. सुबूत जुटाएंगे, फिर आगे की कार्रवाई करेंगे।

  • अंजलि जैन 9 महीने बाद सखी सेंटर हुई रिहा, चेहरे में दिखी मुस्कान, पिता से जान को खतरा बताकर की सुरक्षा की मांग

    अंजलि जैन 9 महीने बाद सखी सेंटर हुई रिहा, चेहरे में दिखी मुस्कान, पिता से जान को खतरा बताकर की सुरक्षा की मांग

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की चर्चित अंजलि-इब्राहिम मामले में आखिरकार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सखी सेंटर से अंजलि जैन की रिहाई की गई है. सखी सेंटर में रह रही अंजली जैन के बाहर निकलते ही उसके चेहरे में मुस्कान नजर आई. अंजली के मर्जी के अनुसार उसे पति आर्यन आर्य को सौंपा गया. लेकिन अंजलि ने अपनी को जान को पिता से खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। दरअसल 19 मार्च से 9 महीने तक अंजलि सखी सेंटर में रह रही थी. अंजलि को बाहर निकालने से पहले सखी सेंटर के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लगा दी गई थी. सखी सेंटर आने जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैरिकेड लगा रखा है. जिससे कोई अनहोनी न हो. सेंटर से रिहाई के वक्त एसएसपी आरिफ शेख और एसडीएम प्रणव सिंह मौजूद रहे.सखी सेंटर से बाहर निकलने के बाद अंजलि जैन ने कहा कि मैं अपनी मर्जी से पति के साथ जा रही हूं. थोड़े टाइम के लिए मुझे सुरक्षा की जरूरत है. मुझे अपनी पिता से खतरा है. मेरे परिवार वालों से अपील करती हूं वो इन चीजों को स्वीकार कर ले. जो हुआ वो गया इन चीजों को अब जल्द खत्म करे. जिस प्रकार से लड़ते आई हूं आगे भी अपनी लड़ाई उसी प्रकार लड़ूंगी और जीतूंगी. यह सब होगा ऐसा नहीं सोची थी, पर अब ऐसा हो रहा है. मेरे पिता मुझे आशीर्वाद देकर इसे स्वीकार कर ले. मैं माँ-बाप से रिश्ता नहीं तोड़ी हूं. उन्हें मनाने की कोशिश करूंगी। हाईकोर्ट ने 15 नवंबर को अंजलि के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अंजली जैन को अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ और अपनी मर्ज़ी की जगह में रह सकती है. अदालत ने ज़िले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष अंजलि जैन को सखी सेंटर से मुक्त कराए जाने के निर्देश भी दिए थे. जिसके बाद अंजलि जैन ने पति आर्यन आर्य उर्फ मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी के साथ रहने का निर्णय लिया है। क्या है पूरा मामला ? 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी मुस्लिम परिवार से आते हैं और 23 वर्षीय अंजलि जैन जैन परिवार से आती है. दोनों छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के रहने वाले है. दो साल पहले इनकी आपस में जान-पहचान हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया. फिर 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में दोनों ने शादी कर ली थी. शादी के बाद इब्राहिम ने दावा किया था कि उन्होंने शादी से पहले हिंदू धर्म अपना लिया था. इसके बाद अपना नाम आर्यन आर्य रखा था. शादी के बाद से ही मामले में कई पेंच फंसते गए और मामला स्थानीय अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चला।
  • सखी सेंटर से आज होगी अंजली जैन की रिहाई

    सखी सेंटर से आज होगी अंजली जैन की रिहाई

    रायपुर। दूसरे धर्म में शादी के बाद अंजली जैन और इब्राहिम खान को परिवार के दबाव की वजह से अलग होना पड़ा था। शादी के डेढ़ साल बाद तक साथ रहने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे इस जोड़े और पिछले नौ माह से सखी सेंटर में रह रही अंजली को अब सखी सेंटर से रिहाई मिलने जा रही है। अंजली ने सोमवार को सखी सेंटर से रिहाई न होने पर भूख हड़ताल का एलान किया था, जिसके बाद उसे छोड़े जाने का समय अधिकारियों ने बताया है। बुधवार को अंजली को यहां से आजादी मिलने वाली है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अंजली को खुद की मर्जी से अपने भविष्य का चुनाव करने की आजादी दी है। अपने पति का साथ पाने के लिए अपने पिता से संघर्ष कर रही अंजली अब खुद की मर्जी से अपनी जिंदगी जी सकेगी।शादी के बाद अपनी पत्नी से अलग कर दिए गए इब्राहिम ने पत्नी का साथ पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इस जोड़े के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस फैसले से करीब 9 माह पूर्व से अंजली सखी वन स्टॉप सेंटर में कैदियों की तरह रह रही थी।सोमवार को आमरण अनशन के ऐलान के बीच प्रशासन ने अंजली को सखी वन स्टॉप सेंटर से रिहा करने का समय निर्धारित कर दिया।

    अधिकारियों के मुताबिक कोर्ट के आदेश के परिपालन में अंजलि को छोड़ने का समय 20 नवंबर को सुबह 11 निर्धारित किया गया है।इब्राहिम खान और अंजली जैन ने 25 फरवरी, 2018 को रायपुर में आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। जैसे ही अंजली के परिजनों को इस बात की जानकारी हुई, वे उसे अपने साथ घर ले आए। इसके बाद उसे कैद रखा और पति से मिलने नहीं दिया। पति ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी पत्नी की वापसी की गुहार लगाई थी, लेकिन हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।इसके बाद इब्राहिम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इब्राहिम ने कोर्ट में लगाई याचिका में कहा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज कर अपना फैसला दिया है। इसी दलील के आधार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। इस याचिका में कहा गया है कि लड़का और लड़की बालिग हैं, दोनों पढ़े-लिखे हैं और एक-दूसरे को चाहते हैं। ऐसे में किसी को कानूनन क्या आपत्ति हो सकती है।

    क्या था मामला

    छत्तीसगढ़ के धमतरी के रहने वाले 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी और 23 वर्षीय अंजलि जैन ने दो साल की जान-पहचान के बाद 25 फऱवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में शादी की थी। इब्राहिम का दावा है कि उन्होंने शादी से पहले हिंदू धर्म अपना लिया था। इसके बाद उन्होंने अपना नाम आर्यन आर्य रखा था। मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीकी उर्फ़ आर्यन आर्य के अनुसार, “शादी की ख़बर जैसे ही मेरी पत्नी अंजलि के परिजनों को मिली, उन्होंने मेरी पत्नी को घर में क़ैद कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें घर से मुक्त कराया और रायपुर के सखी सेंटर में उन्हें रखा गया। जहां वे पिछले आठ महीने से रह रही थी।

  • महाकवि कालिदास पंडो का जन्म महोत्सव मनाया गया

    महाकवि कालिदास पंडो का जन्म महोत्सव मनाया गया

    खरसिया। आदिवासी महाकवि कालिदास पंडों का जन्मदिवस उनकी जन्मस्थली मृगाडाँड़ में भारत पंडो आदिवासी समाज के तत्वाधान में आदिवासी परंपरा के अनुसार मनाया गया। इस अवसर पर नंदकुमार साय अध्यक्ष राष्ट्रीय जनजाति आयोग भारत सरकार नई दिल्ली मुख्य अतिथि थे तथा डॉ. रामविलास शर्मा तहसीलदार चांपा ने समारोह की अध्यक्षता की । मुख्य अतिथि ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडों के जन्म महोत्सव का शुभारंभ आदिवासी महाकवि कालिदास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर तथा पूजा अर्चना कर किया। मुख्य अतिथि नंदकुमार साय ने अपने उद्बोधन में बताया कि महाकवि कालिदास ने अनेक ग्रंथों की रचना की और उनके सात प्रमुख ग्रंथ हैं, उनमें ऋतुसंहार, मेघदूत, अभिज्ञान, शाकुंतलम्, रघुवंशम्, कुमारसंभव, मालविकाग्निमित्रम् और विक्रमोर्वशीय शामिल है। उन्होंने बताया कि ऋतुसंहार और मेघदूत में वर्णित स्थल पहाड़ फूल पेड़ पौधे आदि के वर्णन मृगाडाँड़ स्थित रामगढ़ पहाड़ी से मेल खाता है और मृगाडाँड़ को उनकी जन्मस्थली प्रमाणित करता है, कोई भी साहित्यकार अपने प्रारंभिक रचना में अपने जन्म स्थल के प्राकृतिक परिवेश का वर्णन करता है, उन्होंने ऋतुसंहार और मेघदूत के कई पदों का संस्कृत में पाठन किया तथा प्रमाणित किया। उन्होंने बताया कि रामटेक में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे कालिदास का वहां से संबंध जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करने के लिए महाकवि कालिदास ने जो उपदेश हमें दिए है उनका प्रचार-प्रसार किए जाने की आवश्यकता है, हमें देखना होगा कि पहाड़ को कोई तोड़ ना सके और जंगलों को कोई काट ना सके, क्योंकि आदिवासी समाज का भरण पोषण तथा अर्थव्यवस्था पूरी तरह से जंगलों और पहाड़ों पर निर्भर हैं।
    समारोह की अध्यक्षता कर रहे तहसीलदार विजय शर्मा ने कहा कि महाकवि कालिदास पंडो जनजाति के थे, तथा मृगाडाँड़ के निवासी थे। उन्होंने आदिवासी समाज को वनचर समाज के रूप में मेघदूत में उल्लेख किया है।उड़ीसा के झारसुगुड़ा में दिनांक 10 अगस्त 2019 को हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी में भी भारत के विद्वानों ने एकमत से महाकवि कालिदास को पंडो आदिवासी तथा मृगाडांड का निवासी बताया है, तथा संकल्प पारित किया है। उन्होंने आगे बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास की जयंती असम, नागालैंड, नॉर्थ ईस्ट, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बालाघाट, ऋषिकेश, खंडवा 15 नवंबर को उनका जन्म महोत्सव मनाया जाता है। डॉ राम विजय शर्मा ने अपने शोध पत्र में बताया है कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्म 15 नवंबर 350 ईसवी तथा स्वर्गवास 15 मार्च 450ईस्वी को हुआ था। उनके पिता का नाम शिवदास पंडो तथा माता का नाम तारा देवी था। उनका एकमात्र पुत्र था जिसका नाम भरत पंडो था। राम विजय शर्मा ने आगे महाकवि कालिदास की जीवनी के संबंध में भी श्रोताओं को बताया इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि राधेश्याम जी, अखंड विधायक श्याम नारायण, पुरातत्व विद चारुचंद्र, प्रबोध सिंह, श्याम लाल जायसवाल, राजू तिवारी, लवकेश राजवाड़े, नवल सिंह, भगतराम, महिपाल, बुध मोहन सिंह, सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे। मंच संचालन अखंड विधायक श्याम नारायण ने किया। तथा आभार प्रदर्शन भारत पंडो समाज के राष्ट्रीय सचिव शिवचरण पंडों के द्वारा किया गया।
  • टॉमसन रात्रे ने किया सीमओ का पदभार ग्रहण

    टॉमसन रात्रे ने किया सीमओ का पदभार ग्रहण

    खरसिया। खरसिया नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में टॉमसन रात्रे ने पदभार ग्रहण कर लिया है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने नगर भ्रमण कर साफ सफाई तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया। खरसिया नगरपालिका परिषद में तेज तर्रार सीएमओ की पदस्थापना से उम्मीद जगी है कि नगर के शासकीय भूमि पर हो रहे अतिक्रमण करने वालों पर कार्यवाही किये जाने के साथ साथ जनहित के कार्यों में तेजी आयेगी।

    चर्चा के दौरान नवागत सीएमओ टॉमसन रात्रे ने कहा कि नगर की मूलभूत आवश्यकता, नगर पालिका परिषद तथा जनता की सुविधा के अनुरूप कार्य किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि नागरिकों को शासन द्वारा दी जाने वाली हर सुविधा का लाभ अविलम्ब दिया जायेगा, साथ ही नगर की प्रकृति के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यो को अंजाम दिया जायेगा। सीएमओ ने कहा सफाई और पेयजल व्यवस्था दुरूस्त कराने के साथ साथ जनहित के रूके हुये विकास कार्यों को पूर्ण कराना उनकी प्राथमिकता है।

  • अंजली जैन प्रकरण-सखी सेंटर से कल सुबह 11 बजे होगी अंजली की रिहाई, कानूनी पेंच को सुलझाने में जुटी पुलिस

    अंजली जैन प्रकरण-सखी सेंटर से कल सुबह 11 बजे होगी अंजली की रिहाई, कानूनी पेंच को सुलझाने में जुटी पुलिस

    रायपुर। हाईकोर्ट के आदेश की वजह से उलझी पुलिस अब इस पेंच को सुलझाने में जुटी हुई है।खबरें हैं कि आज देर शाम तक यह पेंच सुलझ जाएगा। पेंच सुलझते ही अंजली की रिहाई हो जाएगी.. और यह रिहाई यदि सब ठीक रहा तो कल सुबह ग्यारह बजे हो जाएगी।दरअसल हाईकोर्ट का आदेश स्पष्ट करता है कि“अंजली जैन को सखी सेंटर से रिहा किया जाए और 24 घंटे पूर्व उसके पिता को सुचित किया जाए, इसके लिए दूरभाष की व्यवस्था का उपयोग शामिल है”अब ये जो सशर्त रिहाई है,इसी ने पुलिस के लिए पेंच फंसा दिया है। पुलिस को इस शर्त को पूरा करने के लिए अंजली के पिता से संवाद करना है, और अंजली के पिता का मोबाईल बंद है और ना ही अपने निवास पर वे उपलब्ध हैं।

    पुलिस ने इसके लिए नोटिस चस्पा करने और ईश्तहार जारी करने की “आईपीसी-तकनीक” अपनाई है, लेकिन यह तकनीक हाईकोर्ट के इस आदेश का पालन सुनिश्चित करेगी इसे लेकर विधि के जानकारों की राय जुदा है।पुलिस इस संवेदनशील मामले में खुद को मोहरा बनाने की किसी भी संभावना को बनने ही देना नहीं चाहती। हालाँकि अभी तक की ही कार्यवाही पर पुलिस को मामले से जुड़े दोनों पक्ष आरोप लगा रहे हैं।पुलिस इस मसले को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्र ने देर रात यह संकेत दिए हैं कि, रिहाई में आई पेंच का समाधान आज पुलिस निकाल लेगी।कप्तान आरिफ़ शेख़ ने NPG से इस मसले पर संक्षिप्त लेकिन अहम जवाब दिया

    “अंजली जैन की कल सुबह 11 बजे रिहाई हो जाएगी”

  • अच्छे दिनों के इंतजार में गर्भवती महिलाएं, प्रसव खर्च के लिए 30 फीसदी परिवारों को बेचनी पड़ी संपत्ति

    अच्छे दिनों के इंतजार में गर्भवती महिलाएं, प्रसव खर्च के लिए 30 फीसदी परिवारों को बेचनी पड़ी संपत्ति

    विदेश में यह बताने के बाद कि भारत में सब अच्छा है और सब बेहतर है, एक सर्वे ऐसा सामने आया है जो बताता है कि यहां सब ठीक नहीं है। देश के छह राज्यों के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली गर्भवती और हाल ही में मां बनी माताओं के बीच हुए एक सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस सर्वे के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की स्थिति निराश करने वाली है।यह सर्वे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों और आंगनबाड़ी में जून 2016 में कराया गया था। इसके अनुसार 30 फीसदी परिवारों को प्रसव का खर्च उठाने के लिए अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी, वहीं 63 फीसदी महिलाएं डिलिवरी के दिन तक खेतों या घरों में काम करती रहीं। कई महिलाओं का डिलिवरी के दिन तक वजन 40 किलो से भी कम था।

    उत्तर प्रदेश में हालात सबसे खराब

    सबसे ज्यादा निराशाजनक तस्वीर उत्तर प्रदेश की है। यहां गर्भावस्था के दौरान की जरूरतों पर बेहद कम ध्यान दिया गया। यूपी में 48 फीसदी गर्भवतियों को यह जानकारी भी नहीं थी कि इस दौरान उनका वजन बढ़ा या घटा। बच्चे को जन्म दे चुकीं 39 फीसदी माताओं को अपने वजन घटने या बढ़ने की जानकारी नहीं थी। वहीं, केवल 12 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्हें पौष्टिक भोजन मिल रहा है।

    13 से 18 किलो वजन बढ़ना चाहिए, बढ़ा सिर्फ सात

    सामान्यत: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का वजन बढ़ता है। लेकिन अगर खानपान में लापरवाही होने पर इसमें कमी भी आ जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान आम तौर पर महिला का वजन 13 से 18 किलोग्राम तक बढ़ना चाहिए। लेकिन, सर्वे में शामिल महिलाओं की औसत वजन वृद्धि केवल सात किलो ही थी। वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा केवल चार किलो है।

    आधी महिलाओं को मिला ही नहीं मातृत्व लाभ

    बता दें कि 31 दिसंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया था कि पूरे देश में गर्भवती महिलाओं को छह हजार रुपये का मातृत्व लाभ प्रदान किया जाएगा। लेकिन, हकीकत देखें तो इसका लाभ कुछ को ही मिल पा रहा है। प्रधानमंत्री के एलान के बाद 2018-18 बजट में मातृत्व लाभ योजना के लिए 2700 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था।हालांकि, अगर जरूरत को देखें तो यह राशि काफी कम है और आंकड़े देखें तो हर महिला को थह हजार रुपये देने के लिए सालाना जरूरत होगी लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की। वहीं, एक आरटीआई का जवाब बताया है कि साल 2018-19 में इस योजना की पात्र महिलाओं में आधी आबादी को ही राशि मिली, वह भी थोड़ी-थोड़ी। वहीं, पहले बच्चे के जीवित होने की शर्त के चलते 55 फीसदी महिलाएं अपात्र हो गईं।

  • इंसान तो इंसान अब बन्दर ने भी की ऑनलाइन शॉपिंग…

    इंसान तो इंसान अब बन्दर ने भी की ऑनलाइन शॉपिंग…

    गलती से बंदर के हाथ एक लड़की का फोन लग जाने के बाद उसने ऐसी हरकत की जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। मामला चीन के जिंगसू प्रांत स्थित येंगचेंग चिड़ियाघर का है। यहां जू-कीपर के तौर पर काम कर रही एक लड़की का फोन गलती से जू के ही एक बंदर के हाथ लग गया। इस चालाक बंदर ने लेव मेंगमेंग नाम की इस लड़की के फोन से ऑनलाइन शॉपिंग कर डाली।दरअसल कुछ दिनों पहले जब लेव मेंगमेंग बंदरों के लिए खाना लेने गई तो अपना फोन वहीं भूल गई। डेली मेल की खबर के मुताबिक लेव ने बताया कि खाना लेने जाने से पहले वह ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अपनी रोजमर्रा की चीजें तलाश रही थी।

    https://youtu.be/rShvtdYOGko

    जितनी देर में वह खाना लेकर वापस आई उतनी देर में बंदर ने धड़ा-धड़ मोबाइल के बटन दबा दिए। जब महिला वापस आई तो उसने देखा कि उसे ऑनलाइन शॉपिंग साइट से नोटिफिकेशन आए हुए थे। सभी में लिखा था कि आपके ऑर्डर सफलतापूर्वक प्लेस हो चुके है। जबकि लेव ने ये ऑर्डर किए भी नहीं थे। पहले तो महिला को लगा कि उसका फोन हैक हो गया है और किसी ने उससे शॉपिंग कर ली है।लेकिन इसके बाद लेव मेंगमेंग ने चिड़िया घर में लगे सीसीटीवी फुटेज चैक किए तो हैरान रह गई। वीडियो फुटेज में दिखा कि उसका मोबाइल फोन बंदर के हाथ में था तथा और वो ही स्क्रीन पर कुछ कर रहा था।

  • चेक बाउंस हुआ तो होगी 2 साल की जेल, संसद में पारित हुआ बिल

    चेक बाउंस हुआ तो होगी 2 साल की जेल, संसद में पारित हुआ बिल

    अब अगर आपके बैंक खाते में पैसा नहीं है और इसके बावजूद आप चेक जारी करते हैं तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि गुरुवार को संसद से एक ऐसा विधेयक पारित हुआ है जिसमें इस मामले में जुर्माने का प्रावधान है. इस बिल के तहत चेक बाउंस के आरोपी को इसकी राशि का 20 फीसदी हिस्सा अदालत में अंतरिम मुआवजे के तौर पर जमा कराना होगा.विधेयक में चेक बाउंस मामलों के दोषियों को 2 साल तक की सजा का प्रावधान है.

    चेक बाउंस होने की स्थिति में चेक प्राप्तकर्ता को और अधिक राहत प्रदान करने वाला ‘परक्राम्य लिखत (संशोधन) विधेयक, 2017 (नेगोशियेबिल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट बिल) को आज राज्यसभा में चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी गई जबकि यह बिल लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है.

    विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि समय-समय पर संबंधित कानून में संशोधन होता रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसा होगा. उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि चेक बाउंस होने की स्थिति में आरोपी की तरफ से पहले ही चेक पर अंकित राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी.बिल में प्रावधान है कि अगर निचली अदालत में फैसला आरोपी के खिलाफ आता है और वह ऊपरी अदालत में अपील करता है तो उसे फिर से कुल राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी. मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस प्रावधान की वजह से चेक बाउंस के मामलों पर अंकुश लगेगा और अदालतों पर चेक बाउंस के मुकदमों का बोझ कम होगा.

    बैंकों की साख का सवाल

    वित्त राज्य मंत्री शुक्ल ने सदन को बताया कि मौजूदा समय में देश भर की निचली अदालतों में चेक बाउंस के करीब 16 लाख मुकदमे चल रहे हैं जबकि 32,000 मामले उच्च अदालतों तक गए हैं. इससे पहले विधेयक पेश करते हुए मंत्री ने कहा था कि चेक प्राप्तकर्ता को राहत देने के मकसद से इस विधेयक में पर्याप्त उपाय किये गये हैं. इससे चेक की विश्वसनीयता और साख बढ़ेगी.इससे पूर्व विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री सहित कई सदस्यों ने मौजूदा विधेयक को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें सजा के प्रावधान को 2 से बढ़ाकर 4 साल करने और अंतरिम मुआवजा की राशि को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत करने की मांग की ताकि चेक की वित्तीय साख को मजबूत किया जा सके और गलत मंशा से चेक जारी करने वालों पर रोक लगाई जा सके

  • पर्यावरण संरक्षण मंडल का आदेश, छत्तीसगढ़ में 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक पटाखे फोड़ने पर लगा प्रतिबंध

    पर्यावरण संरक्षण मंडल का आदेश, छत्तीसगढ़ में 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक पटाखे फोड़ने पर लगा प्रतिबंध

    रायपुर। पर्यावरण विभाग ने राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी शहरों में 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है. अब क्रिसमस और न्यू ईयर के दिन भी पटाखे फोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी. इससे जश्न बनाने वालों को जरूर थोड़ी परेशानी होगी, लेकिन प्रदूषण को देखते हुए ये फरमान जारी किया गया है।

    छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फरमान जारी करते हुए कहा कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जश्न मनाते समय पटाखे न फोड़े जाए. इसके साथ ही पराली और लकड़ी जलाने पर भी रोक लगाई गई है. ठंड में बनने वाले प्रदूषण को देखते हुए छत्तीसगढ़ में 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है.इस प्रतिबंध के बाद नगरीय निकाय चुनाव जीतकर आने वाले प्रत्याशी भी पटाखा फोड़ कर अपनी जीत का जश्न नहीं मना पाएंगे. शादी ब्याह का जश्न भी पटाखा फोड़कर नहीं मना पाएंगे।

    पर्यावरण विभाग ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाया है. अधिनियम 1081 की धारा 19-5 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करके बैन लगाया गया है. ठंड के मौसम में औद्योगिक शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने, नियंत्रित रखने और पर्यावरण को स्वच्छ व स्वास्थ्य वर्धक रखने के लिए पटाखों पर बैन लगाया गया है.