Category: स्वास्थ्य

  • 216 दिनों तक कोरोना से संक्रमित रही HIV पॉजिटिव महिला, शरीर में बने 32 खतरनाक वायरस…

    216 दिनों तक कोरोना से संक्रमित रही HIV पॉजिटिव महिला, शरीर में बने 32 खतरनाक वायरस…

    दक्षिण अफ्रीका में वैज्ञानिकों को HIV से जूझ रही एक 36 वर्षीय महिला में कोरोनावायरस के खतरनाक म्यूटेशन मिले हैं. महिला के शरीर में 216 दिन तक कोविड-19 वायरस मौजूद रहा. इस दौरान वायरस ने 30 ज्यादा म्यूटेशन पैदा किए. इस मामले की रिपोर्ट को मेडिकल जर्नल में प्रीप्रिंट के रूप में प्रकाशित किया गया. वायरस के इतने म्यूटेशन का पता लगाने के बाद से वैज्ञानिक हैरान रह गए हैं. इसमें खतरनाक अल्फा वेरिएंट भी शामिल है.
    रिपोर्ट के मुताबिक, महिला 2006 में HIV से संक्रमित हुए थी. समय के साथ महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर होता चला गया. सितंबर 2020 में महिला कोविड-19 से भी संक्रमित हो गई. इसके बाद वायरस ने स्पाइक प्रोटीन में 13 म्यूटेशन किए और 19 अन्य जेनेटिक परिवर्तन भी किए. इसकी वजह से वायरस का व्यवहार बदल गया. कुल मिलाकर महिला के शरीर में वायरस के 32 म्यूटेशन पैदा हो गए. इनमें से कुछ वेरिएंट्स वायरस के ‘वेरिएंट्स ऑफ कंसर्न’ (चिंता वाले वेरिएंट्स) हैं।

    HIV संक्रमित लोग बन सकते हैं वेरिएंट्स की फैक्ट्री!
    वैज्ञानिकों ने कहा कि ये शायद कोई संयोग नहीं है कि अधिकांश नए वेरिएंट्स दक्षिण अफ्रीका के क्वाजुलु नटाल जैसे क्षेत्रों से सामने आए हैं, जहां 4 में से 1 वयस्क HIV पॉजिटिव है. हालांकि, HIV संक्रमित लोगों के कोरोना से संक्रमित होने और खतरनाक मेडिकल कंडीशन में जाने की संभावना को लेकर बेहद ही कम सबूत हैं. लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि HIV संक्रमित मरीजों में अगर ऐसे ही मामले सामने आते रहे, तो ये पूरी दुनिया के लिए वेरिएंट्स की फैक्ट्री बनकर उभर सकते हैं।

    कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज में ज्यादा समय तक मौजूद रह सकता है वायरस
    डरबन में क्वाजुलु-नताल यूनिवर्सिटी (University of KwaZulu-Natal) के एक जेनेटिसिस्ट और स्टडी के लेखक ट्यूलियो डी ओलिवेरा ने बताया कि कम इम्युनिटी वाले मरीज के शरीर में कोविड-19 वायरस दूसरों की तुलना में अधिक समय तक मौजूद रह सकता है. इस महिला के मामले को लेकर डी ओलिवेरा ने कहा, शुरुआती लक्षणों के दौरान महिला में कोविड के हल्के लक्षण दिखाई दिए, जबकि उसके शरीर में कोरोनावायरस मौजूद था।

  • वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना वायरस, भारत के वैज्ञानिकों ने खोली चीन की पोल…

    वुहान लैब से लीक हुआ कोरोना वायरस, भारत के वैज्ञानिकों ने खोली चीन की पोल…

    दिल्ली। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन दुनियाभर में निशाने पर है। अब भारतीय वैज्ञानिक दंपत्ति ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान लैब से लीक हुआ था। पुणे के रहने वाले वैज्ञानिक दंपत्ति डॉ. राहुल बाहुलिकर और डॉ. मोनाली राहलकर ने दुनिया के अलग-अलग देशों में बैठे अनजान लोगों के साथ मिलकर इंटरनेट से इस संबंध में सबूत जुटाए हैं। जिन लोगों ने इंटरनेट से सबूत एकत्रित किए हैं वे अनजान लोग हैं, जिनका मुख्य स्रोत ट्विटर और दूसरे ओपन सोर्स हैं। इन लोगों ने अपने समूह को ड्रैस्टिक (डीसेंट्रलाइज्ड रेडिकल ऑटोनॉमस सर्च टीम इनवेस्टिगेटिेंग कोविड-19) का नाम दिया है। इन लोगों का मानना है कि कोरोना चीन के मछली बाजार से नहीं बल्कि वुहान की लैब से निकला है। इनकी इस थ्योरी को पहले षड्यंत्र बताकर खारिज कर दिया गया था। लेकिन इसने अब दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। ये लोग चीनी दस्तावेज का अनुवाद कर अपने स्तर पर इसकी जांच कर रहे हैं। चाइनीज एकेडमिक पेपर और गुप्त दस्तावेजों के अनुसार इसकी शुरुआत साल 2012 से होती है। उस समय छह खदान श्रमिकों को यन्नान के मोजियांग में उस माइनशाफ्ट को साफ करने भेजा गया था जहां चमगादड़ों का आतंक था। उन श्रमिकों की वहां मौत हो गई। साल 2013 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. शी झेंगली और उनकी टीम माइनशाफ्ट से सैंपल को अपने लैब लेकर आ गई। शी का कहना है कि श्रमिकों की मौत गुफा में मौजूद फंगस की वजह से हो गई। इसके उलट ड्रैस्टिक का दावा है कि शी को एक अज्ञात कोरोना स्ट्रेन मिला जिसे उन लोगों ने आरएसबीटीकोव/4491 का नाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार वुहान वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के साल 2015-17 के पेपर में इस का विस्तार से जिक्र किया गया है। ये बहुत ही विवादित प्रयोग थे जिन्होंने वायरस को बहुत अधिक संक्रामक बना दिया। यह थ्योरी बताती है कि एक लैब की गलती कोविड-19 के विस्फोट का कारण बनी। एक चीनी वायरोलॉजिस्ट ने कहा है कि अमेरिका के शीर्ष कोरोनावायरस सलाहकार एंथनी फाउची के ई-मेल साबित करते हैं कि कोरोना की उत्पत्ति वुहान के लैब से ही हुई थी। डॉक्टर ली-मेंग यान जो उन लोगों में से थीं, जिन्होंने सबसे पहले कोरोना के वुहान की लैब से लीक हुए होने की बात कही थी। डॉक्टर ली-मेंग यान कोरोना पर शोध करने वाले पहले लोगों में से एक थीं और उन्होंने खुलासा किया था कि बीजिंग पर इस मामले को छुपाने का आरोप लगाने के बाद उन्हें छिपने के लिए मजबूर किया गया।

  • कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी वैक्सीन की प्राइवेट अस्पताल के लिए कीमत तय, जानें नई दर

    कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी वैक्सीन की प्राइवेट अस्पताल के लिए कीमत तय, जानें नई दर

    प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना वैक्सीन की कीमतों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इसके मुताबिक ऑक्सफओर्ड-एस्ट्राजेनिका की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की तरफ से तैयार की गई कोवैक्सीन और रूस में बनी स्पूतनिक-V वैक्सीन के लिए प्राइवेट अस्पताल जीएसटी और सर्विस टैक्स मिलाकर भी उस निश्चित रकम से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकता है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि कोविशील्ड के लिए अधिकतम 780 रुपये, कोवैक्सीन के लिए 1410 रुपये और स्पूतनिक वैक्सीन के लिए 1145 रुपये चार्ज किया जा सकता है.

    150 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता सर्विस चार्ज
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए संशोधित गाइडलाइस 8 जून को जारी गई है. इसमें कहा गया कि सभी वैक्सीन निर्माताओं की तरफ से प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत की घोषणा करनी होगी. अगर इसमें किसी तरह का बदलाव किया जाएगा तो उसे एडवांस में बताना होगा. प्राइवेट अस्पताल अधिकतम 150 रुपये सर्विस चार्ज के तौर पर सिंगल डोज का ले सकते हैं. राज्य सरकारें इन कीमतों पर निगरानी रख सकती हैं।

    आगे बताया गया कि कोविशील्ड पर निर्माता कंपनी की तरफ से 600 रुपये का ऐलान किया गया है. इसके साथ ही 30 रुपये जीएसटी और सर्विस चार्ज 150 रुपये जोड़कर कुल इसकी कीमत 780 रुपये बनती है. इसी तरह कोवैक्सीन निर्माता ने 1200 रुपये इसकी कीमत का एलान किया है. 5 प्रतिशत की दर से 60 रुपये जीएसी और 150 रुपये सर्विस चार्ज मिलाकर इसकी कीमत 1410 बनती है. तो वहीं स्पूतनिक-वी के लिए निर्माता ने 948 रुपये कीमत रखी है. 47.40 रुपये जीएसटी और 150 रुपये सर्विस चार्ज मिलाकर कुल कीमत 1145 रुपये बनती है।

    कोविशील्ड और कोवैक्सीन की 44 करोड़ खुराक के लिए आर्डर
    केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसने कोविड-19 रोधी टीकों – कोविशील्ड और कोवैक्सीन की 44 करोड़ खुराक के लिए आर्डर दिया है. एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि केंद्र राज्यों के खरीद कोटे को अपने हाथों में ले लेगा तथा 18 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए राज्यों को टीके मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि निर्माताओं द्वारा कोविड टीकों की इन 44 करोड़ खुराकों की आपूर्ति अगस्त और दिसंबर के बीच की जाएगी।

    एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों में बदलाव की कल प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा किए जाने के बाद केंद्र ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को कोविशील्ड की 25 करोड़ खुराक तथा भारत बायोटेक को कोवैक्सीन की 19 करोड़ खुराक के लिए आर्डर दिया है. उन्होंने कहा, “इसके अतिरिक्त, दोनों कोविड टीकों की खरीद के लिए 30 प्रतिशत अग्रिम सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को जारी कर दिए गए हैं.’’
    अधिकारी ने कहा कि केंद्र इस साल 16 जनवरी से “सरकार के समग्र दृष्टिकोण” के तहत प्रभावी टीकाकरण अभियान के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रयासों का समर्थन कर रहा है. केंद्र को मिले विभिन्न ज्ञापनों के के आधार पर, टीकाकरण रणनीति के तीसरे चरण 18 साल से अधिक आयु के सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण एक मई से शुरू किया गया था. अधिकारी ने कहा, “अब देश भर में टीकाकरण अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के मकसद के बीच, 18 साल से अधिक आयु के सभी नागरिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कोविड टीके की खुराक मुफ्त में ले सकते हैं।”

  • “आपके पास वैक्सीन नहीं तो घोषणाएं क्यों करते हैं”, हाई कोर्ट ने लगाई केंद्र को फटकार…

    “आपके पास वैक्सीन नहीं तो घोषणाएं क्यों करते हैं”, हाई कोर्ट ने लगाई केंद्र को फटकार…

    दिल्ली। ब्लैक फंगस और वैक्सीनेशन के मामले पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की कड़ी फटकार लगाई. दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिपणी करते हुए केंद्र से पूछा सवाल कि अगर आपके पास वैक्सीन नहीं है तो घोषणाएं क्यो करते हैं. हाई कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह नीति तैयार करे कि दवाइयों की कमी के समय किसे प्रतिकमिकता दी जाएगी? हाई कोर्ट ने युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए कहा है. ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले और इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं पर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर किया है, जिस पर कोर्ट भड़क गया. कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट को अस्पष्ट और सरकार को नॉन कमिटल कहा।

    दरअसल, सेंट्रल गवर्मेंट ब्लैक फंगस पर दायर स्टेटस रिपोर्ट के आंकड़ों पर फंस गई और हाई कोर्ट ने सवाल खड़ा कर दिया. स्टेटस रिपोर्ट में दवाइयों का प्रोजेक्टेड आंकड़ा 2 लाख 30 हज़ार बताया गया था? इस पर कोर्ट ने सीधे सवाल करते हुए कहा कि कितनी दवाइयां किसे दी गई यानी मिलीं. ये जानकारी कहां से मिली गई? कोर्ट की यह जानने में बिल्कुल रुचि नहीं है कि ये दवाइयां कहा से खरीदी गईं।

    कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वो नीति तैयार करे कि दवाइयों की कमी के समय किसे प्रतिकमिकता दी जाएगी? यही नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने वैक्सीन की कमी पर केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वैक्सीन की कमी है तो घोषणाएं क्यों की जाती हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि अगर वैक्सीन की कमी है तो प्राथमिकता तय की जाए. पहले 60 प्लस को वैक्सीन देने के बारे में क्यों फैसला लिया गया. कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने कितने युवाओं को खो दिया है और आप ऐसे लोगों को बचाने में लगे हुए हैं जो अपनी जीवन जी चुके हैं।

    कोर्ट ने ये भी स्पस्ट किया है कि वो यह नहीं कह रहा कि सीनियर सिटीजन को वैक्सीन मत दीजिए लेकिन अगर वैक्सीन कम है तो आप प्राथमिकता तय करिए. कोर्ट ने केंद्र की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आप पीएम को एसपीजी सुरक्षा इसलिये देते है क्योंकि उन्हें उसकी जरूरत है. आज देश को युवाओं की जरूरत है, इसलिए युवाओ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आज उनके जानकारी में आया है कि अनाथ बच्चों के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं लेकिन, आखिरकार इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी. बच्चो को उनके अभिभावकों से जो स्नेह मिल सकता है, वो और कहीं से नहीं मिल सकता।

  • ब्लैक और वाइट से भी ज्यादा खतरनाक अब येलो फंगस की दस्तक, गाजियाबाद में मिला पहला मामला…

    ब्लैक और वाइट से भी ज्यादा खतरनाक अब येलो फंगस की दस्तक, गाजियाबाद में मिला पहला मामला…

    कोरोना महामारी से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि ब्लैक और व्हाइट फंगस ने भी दस्तक दे दी। इस बीमारी से अब तक यूपी में कई लोगों की मौत हो चुकी है। ब्लैक और व्हाइट फंगस के बाद अब येलो फंगस की इंट्री ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। गाजियाबाद में येलो फंगस के एक मरीज में पुष्टि की गई है। डॉक्टरों ने बताया कि 45 वर्षीय जिस मरीज में येलो फंगस मिला है वह पहले कोरोना संक्रमित हो चुका है और इस समय डायबिटीज से भी पीड़ित है। डॉक्टरों के मुताबिक ब्लैक फंगस मरीज का इलाज करने के लिए ओटी में सफाई चल रही थी, इसी दौरान जांच में पता चला कि मरीज येलो फंगस से भी संक्रमित हो चुका है। हालांकि मरीज की हालत में पहले से सुधार है। गाजियाबाद के इएनटी स्पेशलिस्ट डॉ.बीपी त्यागी ने बताया कि रविवार को संजय नगर से मेरे पास एक मरीज आया था। एंडोस्कोपी टेस्ट में पता चला कि उसे ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस है। येलो फंगस रेप्टाइल्स में पाया जाता है। उन्होंने बताया कि पहली बार मैंने इसे इंसानों में देखा है।

    कितना खतरनाक है येलो फंगस

    ब्लैक और व्हाइट फंगस के बाद येलो फंगस की पुष्टि ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी को म्यूकर स्पेक्टिक्स कहा जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि येलो फंगस ब्लैक और व्हाइट फंगस से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। यह इस हद तक खतरनाक हो सकता है कि मरीज की जान भी जा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह येलो फंगस छिपकली और गिरगिट जैसे जीवों में पाया जाता था। इतना ही नहीं यह जिस रेपटाइल को फंगस होता है वह जिंदा नहीं बचता, इसलिए इसे बेहद खतरनाक और जानलेवा माना जाता है।

    यह हैं येलो फंगस के लक्षण

    • नाक का बंद होना
    • शरीर के अंगों का सुन्न होना
    • शरीर में टूटन होना और दर्द रहना
    • शरीर में अत्यधिक कमजोरी होना
    • हार्ट रेट का बढ़ जाना
    • शरीर में घावों से मवाद बहना
    • शरीर कुपोषित सा दिखने लगना
  • बेड खाली होने पर भी मरीजों को बोला बेड नहीं, CMHO ने थमाया नोटिस…

    बेड खाली होने पर भी मरीजों को बोला बेड नहीं, CMHO ने थमाया नोटिस…

    रायपुर। कोरोना संक्रमण के बीच राजधानी रायपुर के दो बड़े अस्पतालों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि बेड खाली होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी। मामले में संज्ञान लेते हुए रायपुर सीएमएचओ ने दोनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    मिली जानकारी के बालाजी और हेरिटेज हॉस्पिटल ने मरीजों को बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी थी, जबकि अस्पताल में बेड खाली थे। गलत जानकारी देने के चलते रायपुर सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

  • राज्यों के लिए अच्छी खबर, 300 रुपए में मिलेगी ‘कोविशील्ड’ वैक्सीन….

    राज्यों के लिए अच्छी खबर, 300 रुपए में मिलेगी ‘कोविशील्ड’ वैक्सीन….

    दिल्ली। राज्यों के लिए कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड की कीमत में 25 प्रतिशत तक कम करने का फैसला लिया है. सीरम के सीईओ अदार पूनावाला ने रेट कम करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए कोविशील्ड की कीमत 300 रुपए कर दिया गया है।

    सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड को 70 प्रतिशत तक प्रभावी बताया गया है, लेकिन ये 90 प्रतिशत से भी ज्यादा असरदार हो सकती है. देश में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है. जिससे कोरोना को जल्द से जल्द मात दिया जा सके. क्योंकि कई देश वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना को हराने में सफल हुए हैं।

    बता दें कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण भयावह रूप ले चुका है. संक्रमण की रफ्तार से हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं. भारत अब तक महामारी में अपने सबसे कठिन क्षण से गुजर रहा है. रोजाना कोविड-19 मामलों में रिकॉर्ड उछाल देखा जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में भारत में जानलेवा वायरस की वजह से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि पिछले करीब एक हफ्ते से लगातार देश में 3 लाख से ज्यादा कोरोना के नए मरीज मिल रहे हैं. बिगड़ते हालातों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें चिंतित हैं।

  • कोरोना के लक्षण के साथ निगेटिव रिपोर्ट लिए आ रहे मरीजों के इलाज के लिए क्या है व्यवस्था जानिए…

    कोरोना के लक्षण के साथ निगेटिव रिपोर्ट लिए आ रहे मरीजों के इलाज के लिए क्या है व्यवस्था जानिए…

    रायपुर। राज्य के शासकीय डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों, कोविड केयर सेंटर और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में ऐसे मरीजों के लिए भी बेड की व्यवस्था की गई है. जिनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है या जिनके पास कोरोना जांच की रिपोर्ट नहीं है. फिर भी उनमें कोविड के लक्षण नजर आ रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए राज्य के सभी जिलों में कुल 1322 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गई है. आवश्यकतानुसार मरीज़ों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक और कोविड प्रबंधन के ट्रीटमेंट वर्टिकल की प्रभारी डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में कुल 1322 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गई है. जिनकी निगेटिव रिपोर्ट है और उनमें कोरोना के लक्षण है, उनका इलाज किया जाएगा।

    • दुर्ग जिले में 263 बेड
    • बेमेतरा में 200 बेड
    • रायपुर में 158 बेड
    • बस्तर में 141 बेड
    • कोरिया में 75 बेड
    • राजनांदगांव में 66 बेड
    • धमतरी में 55 बेड
    • रायगढ़ में 46 बेड
    • नारायणपुर में 30 बेड
    • जांजगीर चांपा में 30 बेड
    • मुंगेली में 28 बेड
    • कबीरधाम में 25 बेड
    • कोंडागांव में 20 बेड
    • बिलासपुर में 20 बेड
    • कोरबा में 18 बेड
    • बलोदाबाजार में 16 बेड
    • बलरामपुर में 15 बेड
    • जशपुर में 14 बेड
    • दंतेवाड़ा में 12 आइसोलेशन बेड रखे गए हैं.
    • बालोद, बीजापुर, गरियाबंद, गौरेला पेंड्रा मरवाही, कांकेर, महासमुंद, सुकमा सूरजपुर और सरगुजा जैसे प्रत्येक ज़िले में 10-10 आइसोलेशन बेड रखे गए हैं।
  • अब डबल मास्क लगाएंगे पुलिस जवान, एसएसपी का फरमान….

    अब डबल मास्क लगाएंगे पुलिस जवान, एसएसपी का फरमान….

    अब कोरोना से बचाव करने ड्यूटी पर तैनात जवानों को डबल मास्क लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए एसएसपी-डीआईजी अजय कुमार यादव ने फरमान जारी किया है। यही नहीं पुलिस जवानों को कोरोना के कहर से बचाने थानों में रस्सी का घेरा बनाकर सुरक्षा की जा रही है।

    मुंशी टेबल से पहले इंट्री गेट पर रस्सी लगा दी गई है। बाहर टेबल पर सेनेटाइजर और टेंप्रेचर मशीन रखकर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। थानों पर आने वाले फरियादी से पहले रस्सी घेरा के पास उनके आने का कारण पूछा जा रहा है। इसके बाद फरियादी का टेंप्रेचर मापने और हाथाें को सेनेटाइज करने के बाद थाने में प्रवेश दिया जा रहा है। यह घेराबंदी सिर्फ एक थाने में नहीं बल्कि जिलेभर के थानों में की गई है। इससे अब थाना परिसर में संक्रमण फैलने का खतरा कम होने की संभावना है।

    40 से अधिक जवान पॉजिटिव

    जानकारी के मुताबिक रायपुर जिलेभर में करीब 3 हजार जवान शहर, ग्रामीण और महिला थाने पर तैनात हैं। महीनेभर में ड्यूटी के दौरान जिलेभर के थानों के करीब 40 से अधिक जवान संक्रमित हो चुके हैं और चार पुलिस जवानों की मौत हो चुकी है। संक्रमित होने वालों में थाना प्रभारी भी शामिल हैं। करीब 25 से अधिक पुलिस जवान अभी कोविड सेंटर या फिर होम आइसोलेशन में हैं। यही वजह है कि थानों में रस्सी का घेरा बनाकर जवानों की सुरक्षा की जा रही है।

    आरोपी से पूछताछ से पहले कोरोना जांच

    जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी का कहर बढ़ने के साथ ही गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ करने में पुलिसकर्मी कतराने लगे हैं। अब थाने में आरोपी से पूछताछ से पहले उसका कोविड-19 का टेस्ट किया जाता है। इसके लिए उन्हें कोविड सेंटर भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उससे पूछताछ की जा रही है और कोर्ट में पेश किया जा रहा है।

    सुरक्षित रहने निर्देश

    सभी पुलिस जवानों को मास्क लगाने और सेनेटाइजर रखने समेत तरीके से सुरक्षित रहने के निर्देश दिए गए हैं। थानों को सेनेटाइज करने के साथ ही रस्सी का घेरा बनाकर आने वालों की प्रारंभिक जांच की जा रही है।

  • एक नई दवा जो करेगी कोरोना से लड़ने में मदद, पहले हेपेटाइटिस सी का उपचार करने में होता था प्रयोग, जानिए क्या है ये दवाई ओर कैसे करती है असर….

    एक नई दवा जो करेगी कोरोना से लड़ने में मदद, पहले हेपेटाइटिस सी का उपचार करने में होता था प्रयोग, जानिए क्या है ये दवाई ओर कैसे करती है असर….

    नई दिल्ली। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को विराफिन दवा के कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। जाइडस कैडिला ने हाल ही में डीसीजीआई से Pegylated Interferon alpha-2b (विराफिन) दवा के लिए मंजूरी की मांग की थी, जिसके आज प्रदान कर दी गई है। इस दवा को कोरोना के मध्यम लक्षण वाले मरीजों के इस्तेमाल के लिए इमरजेंसी अप्रवूल दिया गया है।
    जाइडस कैडिला की यह दवा एक सिंगल डोज दवा है, जिसकी वजह से कोरोना मरीजों के इलाज में काफी हद तक मदद मिलेगी। रेग्युलेट्री फाइलिंग के दौरान कंपनी ने बताया है कि कोरोना होने के बाद जल्द विराफिन देने से मरीज काफी जल्दी रिकवर हो सकेगा और कई तरह की जटिलताएं भी दूर होंगी। विराफिन दवा अस्पताल/संस्थागत सेटअप में इस्तेमाल के लिए मेडिकल स्पेशिलिस्ट के पर्चे के बाद उपलब्ध हो सकेगी।

    पहले हेपेटाइटिस सी के उपचार के काम आती थी

    जायडस के जिस विराफिन इंजेक्शन को मंजूरी मिली है, उसका पूरा नाम पेगिलेटेड इंटरफेराॅन अल्फा-2 बी है। इसे मूल रूप से लीवर के रोग हेपेटाइटिस सी के उपचार के लिए 10 साल पहले मंजूरी मिली थी। अब इसे कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए प्रस्तावित किया गया है।

    20-25 सेंटरों पर विराफिन का ट्रायल किया गया

    देशभर के 20-25 सेंटरों पर विराफिन का ट्रायल किया गया था। जायडस ने दावा किया कि विराफिन देने के बाद कोविड-19 मरीजों को ऑक्सीजन देने की जरूरत बहुत कम पड़ी। इससे स्पष्ट है कि यह संक्रमित व्यक्ति को सांस होने वाली तकलीफ व सांस उखड़ने की समस्या को नियंत्रित करने में कारगर है। देश में जारी मौजूदा कोरोना लहर में अधिकांश रोगी इन समस्याओं के सर्वाधिक शिकार हो रहे हैं।

    कैसे काम करेगा विराफिन

    जायडस के अनुसार विराफिन इंजेक्शन के एक डोज से ही कोरोना रोगियों के इलाज में बहुत मदद मिलेगी। कोविड रोगियों को संक्रमण के बाद ही यदि इसे लगा दिया गया तो उनकी तेजी से रिकवरी हो सकेगी और उन्हें अन्य परेशानियों का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।

    कोरोना के इलाज में मिलेगी बड़ी राहत

    जायडस के इस इंजेक्शन को मंजूरी ऐसे समय मिली है, जब कोरोना पीड़ितों के इलाज में काम आ रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन व ऑक्सीजन की देश में भारी किल्लत हो गई है। रेमडेसिविर की कालाबाजारी तक हो रही है। ऐसे में विराफिन से बड़ी राहत मिल सकती है। कई अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने से अनेक रोगियों की मौत हो चुकी है। आए दिन ऐसी मौतों की खबरें आ रही हैं।

    कितनी कारगर है दवा

    दवा बनाने वाली कंपनी जायडस ने दावा किया है कि वीराफिन के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट 7 दिन बाद निगेटिव आई है। ऐसा कोरोना के 91.15 प्रतिशत मरीजों के साथ हुआ है। कंपनी ने बताया कि इस दवा से कोरोना के मरीजों को वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है। अगर वायरस से संक्रमण के शुरुआती लक्षणों के बाद यह दवा मरीज को दी जाए तो उसे कोरोना से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।