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  • घर बैठे डाउनलोड कर पाएंगे डिजिटल वोटर आईडी,जानिए प्रोसेस…

    घर बैठे डाउनलोड कर पाएंगे डिजिटल वोटर आईडी,जानिए प्रोसेस…

    मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण यानी इलेक्ट्रॉनिक इलेक्टोरल फोटो पहचान पत्र (Electronic Electoral Photo Identity Card) की शुरुआत हो गई है. अब किसी भी व्यक्ति को Voter ID Card की हार्ड कॉपी रखने की जरूरत नहीं होगी. सरकार द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के तहत कोई भी वोटर अपना वोटर कार्ड की सॉफ्ट कॉपी मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकता है।

    वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card)

    कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा शुरू किए गए वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card) के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण के तहत अब भारत के नागरिक आधार कार्ड जैसे ही डिजिटल वोटर आईडी कार्ड भी डाउनलोड कर सकेंगे. कानून मंत्री द्वारा इस सुविधा की शुरुआत आज 25 जनवरी को यानी ‘राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस’ (National Voters’ Day) के मौके पर की गई. आइए जानते हैं डिजिटल वोटर आईडी को डाउनलोड करने के तरीके और उससे जुड़ी सभी जानकारी के बारे में।

    पहचान पत्र का डिजिटल संस्करण (Digital version of identity card)

    चुनाव आयोग (Election Commission) के मुताबिक ई-इलेक्टर फोटो पहचान पत्र (डिजिटल वोटर आईडी) निर्वाचक फोटो पहचान पत्र का डिजिटल संस्करण है और इसे डिजिटल लॉकर जैसे माध्यमों से सुरक्षित रखा जा सकता है. इस डिजिटल वोटर कार्ड को पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट (PDF) में सेव किया जा सकता है.

    आयोग ने कहा है कि इस सुविधा (e-EPIC) की शुरुआत इसलिए की गई है, क्योंकि Physical card को प्रिंट करने और मतदाताओं तक पहुंचने में समय लगता है. इस पहल से दस्तावेज को तेजी से और आसानी से पहुंचाने का विचार है. अभी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस डिजिटल मोड में मौजूद हैं.

    कहां से करें डाउनलोड ? (Where to download?) 

    ई-ईपीआईसी को वोटर पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन मोबाइल ऐप या एनवीएसपी वोटर पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।

    ऐसे करें डाउनलोड (How to download digital voter id) 

    Applicant को सबसे पहले voterportal.eci.gov.in पर खुद को रजिस्टर करना होगा. 

    इसके बाद voterportal.eci.gov.in पर लॉग इन करना होगा.     

    लॉग इन के बाद EPIC नंबर या फार्म रेफरेंस नंबर डालना होगा. 

    इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिसे वेबपोर्टल पर डालना होगा.

    इसके बाद वेबसाइट पर कई विकल्प नजर आएंगे. जिसमें से डाउनलोड ई-एपिक (Download e-EPIC) के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. 

    इसके बाद आपका डिजिटल वोटर आईडी पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड हो जाएगा. 

    अगर आपको किसी भी तरह की दिक्कत हो तो आप टॉल फ्री नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।

  • प्राइवेसी और डेटा सेफ्टी का ‘खेल’, जानें किसने मारी बाजी….

    प्राइवेसी और डेटा सेफ्टी का ‘खेल’, जानें किसने मारी बाजी….

    वॉट्सऐप (WhatsApp) के नए नियम-कायदे आ रहे हैं। यूजर्स इन्हें लेकर फिक्र में हैं। इस साल 8 फरवरी से ये वजूद में आ जाएंगे। इससे पहले ही, वॉट्सऐप ने अपने 2 अरब से ज्यादा यूजर्स को ‘अल्टीमेटम’ देना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि सोशल नेटवर्क के साथ अपना पर्सनल डेटा साझा करने के लिए हामी भरनी होगी या अपना वॉट्सऐप अकाउंट डिलीट करना होगा। यानी, शर्तें न मानने पर आप वॉट्सऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। हालांकि, अब खबर है कि नए कायदे यूरोप और यूके में यूजर्स पर लागू नहीं होंगे। लेकिन, नोटिफिकेशन हर किसी को भेजा गया है।

    मस्क के ट्वीट के बाद Signal ने पकड़ी रफ्तार
    वॉट्सऐप के पॉलिसी अपडेट ने यूजर्स के बीच हलचल मचाई। डेटा और प्राइवेसी को लेकर फिक्रमंद लोग दूसरे विकल्प तलाशने लगे। तभी, दुनिया के सबसे ज्यादा दौलतमंद बने टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के एक ट्वीट में लोगों को ‘सहारा’ नजर आया। 50 साल के मस्क ने ट्वीट करके अपने फॉलोअर्स से Signal यूज करने को कहा। Signal अचानक से सुर्खियों में आ गया। पिछले एक हफ्ते में लाखों नए यूजर्स Signal से जुड़े। साथ ही, बड़ी संख्या में लोगों ने मेसेजिंग ऐप Telegram डाउनलोड किया।         


    स्नोडेन भी कर चुके हैं Signal को एंडोर्स
    व्हिस्लब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन भी Signal की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया है कि वह इसका हर दिन इस्तेमाल करते हैं। सिग्नल की वेबसाइट में भी कहा गया है कि वह सभी कन्वर्सेशन को सुरक्षित रखने के लिए एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करता है। कहा गया है, ‘हम न तो आपके मेसेज पढ़ सकते हैं और न ही आपकी कॉल्स सुन सकते हैं। कोई दूसरा भी ऐसा नहीं कर सकता है।’ हालांकि, इजरायल की सिक्योरिटी फर्म Cellebrite ने Signal की हाइली सिक्योर चैट डीक्रिप्ट करने का दावा किया है। अब सवाल उठता है कि इतने दावों के बीच वॉट्सऐप, सिग्नल और टेलिग्राम में कौन ज्यादा सेफ है। हमने ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की है तो आइए जानते हैं कि कौन सा ऐप यूजर्स को ज्यादा प्राइवेसी देता है। साथ ही, उनका डेटा सेफ रखता है।  
     

    किसका एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन ज्यादा सुरक्षित
    वॉट्सऐप (WhatsApp) के हर कम्युनिकेशन मोड पर एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन मिलता है। वॉट्सऐप पर शेयर किए जाने वाले आपके मेसेज, विडियो कॉल्स, वॉइस कॉल्स, फोटो और दूसरी चीजें एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होती हैं। मतलब यह है कि आप और रिसीपिएंट (मेसेज पाने वाला), इकलौते व्यक्ति होते हैं जो कि भेजे गए मेसेज को पढ़ सकते हैं। WhatsApp आपके मेसेज, कॉल्स, फोटो और दूसरी चीजों के कंटेंट को डीक्रिप्ट नहीं कर सकता है, जिससे आपके कंटेंट की सिक्योरिटी और प्राइवेसी सुनिश्चित होती है।    


    …तो इसलिए होती है वॉट्सऐप के सिक्योरिटी मॉडल की आलोचना
    खास बात यह है कि WhatsApp, ओपन ह्विस्पर सिस्टम्स के डिवेलप किए गए एंड-टू-एंड प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है। वॉट्सऐप पर आपके हर कम्युनिकेशन में एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कंपनी बैकअप्स (क्लाउड और लोकल) को एनक्रिप्ट नहीं करती है। इसके अलावा, वॉट्सऐप मेटाडेटा (metadata) को भी एनक्रिप्ट नहीं करता है। यह वॉट्सऐप के सिक्योरिटी मॉडल की आलोचना की मुख्य वजह में से एक है। मेटाडेटा किसी को आपके मेसेज पढ़ने की इजाजत नहीं देता है। लेकिन, इसकी मदद से अथॉरिटीज यह पता कर लेती हैं कि आपने किसको और कब मेसेज किया। 


    वॉट्सऐप में ऐंड्रॉयड और iOS दोनों ही ऐप्स में बिल्ट-इन ऐप लॉक फीचर दिया गया है। ऐसे में आप अपने वॉट्सऐप चैट्स को बायोमीट्रिक से लॉक कर सकते हैं। इसके अलावा, आपको टू-फैक्टर ऑथेन्टिकेशन (2FA) भी मिलता है।
     

    टेलिग्राम में मिलता है सीक्रेट चैट्स फीचर
    Telegram एक क्लाउड चैट सर्विस है। इसका मतलब है कि वॉट्सऐप से अलग इसे आप कई डिवाइसेज में इस्तेमाल कर सकते हैं और आपकी चैट्स हमेशा सिंक्ड होती है। Telegram ऐप क्लाइंट-टू-सर्वर एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करता है। आपकी रेगुलर चैट्स एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड नहीं होती हैं। Telegram के सर्वर्स तक पहुंच रखने वाला कोई भी व्यक्ति आपकी चैट्स पढ़ सकता है। हालांकि, कोई आपकी चैट्स न पढ़े, इसे सुनिश्चित करने का इकलौता तरीका है कि आप टेलिग्राम के ‘सीक्रेट चैट फीचर’ का इस्तेमाल करें। इस फीचर में एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन मिलता है। आप सीक्रेट चैट में जो भी भेजते हैं, वह प्रोटेक्टेड होता है। 


    सिक्योरिटी रिसर्चर्स वैरिफाई नहीं कर सकते टेलिग्राम का सिस्टम
    अगर आप सीक्रेट चैट फीचर का इस्तेमाल करते हैं तो Telegram आपके मेसेज एनक्रिप्ट करने के लिए खुद के एनक्रिप्शन प्रोटोकॉल MTProto का इस्तेमाल करता है। हालांकि, यह क्लोज्ड-सोर्स प्रोटोकॉल है। सिक्योरिटी रिसर्चर्स इसे वैरिफाई नहीं कर सकते  हैं। Telegram का कहना है कि वह अपने मेसेज स्टोरेज और डिस्क्रिप्शन कीज (Keys) को इस तरह मैनेज करता है कि किसी भी व्यक्ति को आपके डेटा तक पहुंचने के लिए कई लीगल सिस्टम्स से कोर्ट ऑर्डर्स की जरूरत पड़ेगी। कंपनी का कहना है कि उसने अभी तक थर्ड पार्टीज और गवर्नमेंट्स के साथ जीरो (0) बाइट्स डेटा शेयर किया है। 


    एडमिन बनने पर बॉट पढ़ लेता है आपके मेसेज
    टेलिग्राम (Telegram) का एक बेहद खास फीचर यह है कि इसमें लोगों को ऐड करने के लिए आप अपना फोन नंबर देने से बच सकते हैं, इस काम के लिए केवल अपने यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकते हैं। कंपनी अपने प्लैटफॉर्म पर आपसे इंटरैक्ट करने के लिए बॉट्स को इजाजत देती है। इसमें बाय डिफॉल्ट प्राइवेसी मोड को इनेबल कर दिया जाता है, जिससे वो आपकी चैट न पढ़ सकें। लेकिन, अगर किसी बॉट को ग्रुप के एडमिन के तौर पर ऐड किया जाता है तो यह आपके मेसेज पढ़ लेगा। 

    वॉट्सऐप की तरह Telegram भी बिल्ट-इन ऐप लॉक का इस्तेमाल करता है। लेकिन, ऐप का एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन बहुत दमदार नहीं है। टेलिग्राम ग्रुप्स एनक्रिप्टेड नहीं होते हैं, क्योंकि सीक्रेट चैट्स केवल सिंगल-यूजर कम्युनिकेशन को सपोर्ट करते हैं।

    सिक्योरिटी की रेस में कहीं आगे है Signal
    जब सिक्योरिटी की बात आती है तो Signal कहीं आगे है। एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के लिए Signal ओपन-सोर्स सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है। जहां वॉट्सऐप यूजर्स के मेसेज और कॉल्स को एनक्रिप्ट करता है। वहीं, Signal एक कदम आगे जाकर metadata को भी एनक्रिप्ट करता है। हर मोर्चे पर यूजर्स की प्राइवेसी को प्रोटेक्ट करने के लिए Signal ने सेंडर और रिसीपिएंट (मेसेज पाने वाले व्यक्ति) के बीच बातचीत के लिए एक नया तरीका निकाला है, इसका नाम Sealed Sender है। सील्ड सेंडर में कोई भी यह नहीं जान पाएगा कि कौन-किसे मेसेज कर रहा है। खुद Signal को भी इसका पता नहीं होगा।   


    केवल रजिस्ट्रेशन के लिए यूज होता है आपका फोन नंबर
    ऐप, सभी फीचर्स के लिए एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन को सपोर्ट करता है। मतलब है कि कोई आपकी चैट्स नहीं पढ़ सकता है और न ही आपकी कॉल्स सुन सकता है। सिग्नल की प्राइवेसी पॉलिसी बताती है यह केवल रजिस्ट्रेशन के लिए आपने फोन नंबर का इस्तेमाल करता है। और इसके बाद इसे आपके अकाउंट के बारे में कुछ पता नहीं होता है। कॉन्टैक्ट डिस्कवरी के लिए ऐप ट्रंगकेटेड क्रिप्टोग्रैफिकली हैश्ड फोन नंबर भेजता है। कॉन्टैक्ट्स के नाम या किसी दूसरी इंफॉर्मेशन को न तो ट्रांसमिट किया जाता है और न ही ऐप के सर्वर पर रखा जाता है। 


    ओपन-सोर्स सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल 
    Signal एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के लिए ओपन-सोर्स सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है। सिग्नल, सभी लोकल फाइल्स को 4 डिजिट पासफ्रेज से एनक्रिप्ट करता है। सिग्नल, ओपन व्हिस्पर सिस्टम (Open Whisper System) का इस्तेमाल करता है। यह आपकी सारे कंवर्सेशन को खुद-ब-खुद एंड-टू-एंड एनक्रिप्ट कर देता है। एनक्रिप्शन की, यूजर के फोन और कंप्यूटर्स पर ही स्टोर होते हैं, जिससे आप निगरानी रखने का रिस्क कम हो जाता है। इसके अलावा, अगर आपके कॉन्टैक्ट्स की एनक्रिप्शन की में बदलाव होता है तो आपको नोटिफाई किया जाएगा। 


    यूजर्स, एक-दूसरे को पासकोड के नंबर्स या QR कोड स्कैन करते हुए वैरिफाई कर सकते हैं। इसका मतलब है कि सिग्नल के पास आपका कोई डेटा नहीं होता है। सिग्नल ऐप मेटाडेटा, लॉग्स या अपने  यूजर्स की इंफॉर्मेशन को स्टोर नहीं करता है। Signal को आप पासकोड या बायोमीट्रिक्स से लॉक कर सकते हैं। इसके अलावा, सिग्नल में टू-फैक्टर अथॉन्टिकेशन, ऐप में स्क्रीनशॉट्स ब्लॉक करने का ऑप्शन दिया गया है। हाल में Signal ने इमेज भेजने से पहले ऑटोमैटिकली फेस ब्लर करने का नया फीचर दिया गया है।


    आपका कौन-कौन सा डेटा करते हैं कलेक्ट
    अगर यूजर डेटा कलेक्शन की बात करें तो WhatsApp आपकी डिवाइस ID, ऐडवर्टाइजिंग डेटा, परचेज हिस्ट्री, लोकेशन, फोन नंबर, ई-मेल, कॉन्टैक्ट्स, पेमेंट इंफो समेत कई डेटा कलेक्ट करता है। वहीं, टेलिग्राम आपका फोन नंबर, कॉन्टैक्ट इंफो और यूजर ID कलेक्ट करता है। जबकि Signal फोन नंबर के अलावा आपका कोई पर्सनल डेटा कलेक्ट नहीं करता है।   


    सिग्नल के डाउनलोड्स में 4200% का उछाल
    वॉट्सऐप (WhatsApp) के पॉलिसी अपडेट से मचे बवाल के बाद सिग्नल (Signal) और टेलिग्राम (Telegram) को बड़ा फायदा हुआ है। ऐप एनालिटिक्स फर्म सेंसर टावर के डेटा के मुताबिक, ‘6 से 10 जनवरी के बीच दुनिया भर में ऐप स्टोर और गूगल प्लेस्टोर में Signal के 75 लाख के करीब डाउनलोड्स रहे हैं। इससे पिछले हफ्ते के मुकाबले सिग्नल ऐप के डाउनलोड्स में 4,200 फीसदी का उछाल आया है।


    500 मिलियन के पार हुए टेलिग्राम के सब्सक्राइबर्स
    वहीं, 6 से 10 जनवरी के बीच टेलिग्राम (Telegram) के साथ 90 लाख नए यूजर्स जुड़े हैं। इससे पिछले हफ्ते के मुकाबले 91 फीसदी की तेजी आई है। यह गूगल और ऐपल के ऐप स्टोर्स में अब दूसरे नंबर पर है। Telegram के सब्सक्राइबर्स की संख्या 500 मिलियन (50 करोड़) को पार कर गई है। पिछले कुछ दिनों में मेसेजिंग ऐप के साथ 25 मिलियन नए ग्राहक जुड़े हैं। सिग्नल और टेलिग्राम दोनों ही ऐप्स के डाउनलोड्स के लिए भारत बड़ा सोर्स रहा है।

  • गूगल पर पब्लिक हो चुकी हैं ढेरों ग्रुप चैट लिंक, कोई भी सर्च कर इसमें जुड़ सकता है; प्रोफाइल पर भी खतरा

    गूगल पर पब्लिक हो चुकी हैं ढेरों ग्रुप चैट लिंक, कोई भी सर्च कर इसमें जुड़ सकता है; प्रोफाइल पर भी खतरा

    वॉट्सऐप प्राइवेसी से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वॉट्सऐप ग्रुप की लिंक अब दोबारा गूगल सर्च रिजल्ट पर दिखाई दे रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ गूगल पर सर्च करके प्राइवेट वॉट्सऐप ग्रुप को ढूंढ सकता है और उसमें शामिल हो सकता है। इससे पहले 2019 में भी यह सामने आया था, जिसके बाद कंपनी ने इसे खामी को ठीक कर दिया था। एक और पुराना मुद्दा जिसे पहले फिक्स किया जा चुका है, वो भी सामने आ रहा है जिसमें वॉट्सऐप प्रोफाइल अब सर्च रिजल्ट पर दिखाई दे रही हैं। इस खामी के कारण लोगों के फोन नंबर और प्रोफाइल फोटो सिर्फ एक साधारण गूगल सर्च से सामने आ सकते हैं।

    फोन नंबर और प्रोफाइल फोटो भी एक्सेस कर सकते हैं
    ग्रुप चैट इनवाइट्स की इंडेक्सिंग की अनुमति देकर, वॉट्सऐप अब वेब पर कई प्राइवेट ग्रुप उपलब्ध करा रहा है, क्योंकि उनके लिंक गूगल पर एक सिंपल सर्च क्वेरी का उपयोग करके एक्सेस किया जा सकते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जिसे भी यह लिंक मिलती है, वो ग्रुप में न सिर्फ शामिल हो सकते हैं बल्कि मेंबर्स और द्वारा ग्रुप में शेयर किए जा रहे हैं पोस्ट के साथ उनके फोन नंबर भी देख सकते हैं।

    कुछ ग्रुप पोर्न शेयर करने वाले थे
    साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया ने गूगल पर वॉट्सऐप ग्रुप चैट इनवाइट के इंडेक्सिंग की जानकारी दी। खबर लिखते समय तक, सर्च रिजल्ट्स में लगभग 1,500 से अधिक ग्रुप इनवाइट लिंक उपलब्ध थे।
    गूगल द्वारा इंडेक्स की गईं कुछ लिंक पोर्न शेयर करने वाले वॉट्सऐप ग्रुप को लीड करते हैं। कुछ अन्य मामलों में, कुछ खास समुदाय या इंटरेस्ट वाले वॉट्सऐप ग्रुप्स के लिंक थे। इसके अलावा बंगला और मराठी यूजर्स के लिए मैसेज शेयर करने वाले ग्रुप्स मिले। इस लिंक के साथ, जिन लोगों को इनवाइट नहीं किया गया था, वे भी आसानी से ग्रुप्स में शामिल हो सकते हैं।

    पहली बार 2019 में सामने आया था मामला
    यह पहली बार नहीं है कि जब इस तरह की खामी सामने आई है। नवंबर 2019 में, वॉट्सऐप ग्रुप चैट इनवाइट गूगल सर्च रिजल्ट पर पाए गए थे। एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने इस मुद्दे को फेसबुक को बताया था, हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद कंपनी ने इसे तुरंत ठीक भी कर दिया था।
    रिवर्स इंजीनियर जेन मानचुन वोंग ने बताया कि वॉट्सऐप ने चैट इनवाइट लिंक पर ‘नो-इंडेक्स’ मेटा टैग जोड़कर ग्रुप चैट इंडेक्स को फिक्स किया था। हालांकि, ताजा लिंक में नो-इंडेक्स मेटा टैग शामिल है। हालांकि, 2019 में पाए गए ग्रुप चैट लिंक गूगल पर दिखाई नहीं देते थे, इसलिए यह एक अलग मुद्दा हो सकता है जिससे समान परिणाम हो सकते हैं, या यह पुरानी समस्या को वापस ला सकता है।

    एक सबडोमेन के कारण पब्लिक हुई ग्रुप चैट लिंक
    राजहरिया ने बताया कि वॉट्सऐप ने खास तौर पर chat.whatsapp.com सबडोमेन के लिए robots.txt फाइल को शामिल नहीं किया था, जिसके कारण गूगल और अन्य सर्च इंजन पर ग्रुप चैट इनवाइट की इंडेक्सिंग हुई है। वेब डेवलपर्स सामान्यतः सर्च इंजन क्रॉलर को बताने के लिए robots.txt फाइल का उपयोग करते हैं कि वे किन पेजों या फाइलों को क्रॉल कर सकते हैं और किन्हें नहीं।

    यूजर्स की प्रोफाइल भी गूगल पर पब्लिक हुईं
    ग्रुप चैट इनवाइट लिंक के साथ लगता है कि वॉट्सऐप ने गूगल को फिर से यूजर्स की प्रोफाइल इंडेक्स करने की अनुमति दी है ताकि कोई भी यूजर्स के साथ चैट कर सके या उसकी प्रोफाइल फोटो देख सके। वॉट्सऐप के डोमेन पर कंट्री कोड की खोज करके, लोगों के प्रोफाइल के यूआरएल सामने आ सकते हैं, जिसमें फोन नंबर और प्रोफाइल फोटो शामिल थे। यह मुद्दा पिछले साल जून में वॉट्सऐप द्वारा फिक्स किया गया था। कंपनी ने उस समय इसे लेकर कोई सफाई नहीं दी थी लेकिन कई रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि हुई थी।

    गूगल पर लगभग 5000 प्रोफाइल दिखाई दे रही हैं
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रुप चैट इंडेक्सिंग की तरह वॉट्सऐप यूजर्स की प्रोफाइल भी पिछले कुछ घंटों से गूगल पर फिर से उपलब्ध हैं। सर्च इंजन पहले से ही 5,000 प्रोफाइल लिंक पर इंडेक्स है। राजहरिया ने गूगल पर वॉट्सऐप यूजर्स प्रोफाइल की इंडेक्सिंग की खोज की। उन्होंने देखा कि जैसा ग्रुप चैट इनवाइट में देखा गया था, प्रोफाइल के मामले में वैसा कोई api.whatsapp.com सबडोमेन के लिए कोई विशेष robots.txt फाइल नहीं है, जो सर्च इंजन क्रॉलर को अपने संबंधित लिंक क्रॉल नहीं करने के लिए कहता है।

  • ATM से पैसे निकालते हुए क्या आप भी हुए हैं ठगी के शिकार? जानें शिकायत करने का तरीका….

    ATM से पैसे निकालते हुए क्या आप भी हुए हैं ठगी के शिकार? जानें शिकायत करने का तरीका….

    एटीएम (ATM) से पैसे निकालने को लेकर हुई धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं. पैसे निकालने के दौरान कई बार लोगों के अकाउंट से ज्यादा पैसे उड़ जाते हैं।

    आए दिन अखबार और न्यूज वेबसाइट्स में पढ़ने को मिलता है कि फलाने ने एटीएम मशीन से पैसे निकाले और कुछ देर बाद ही उसके अकाउंट से बाकी के पैसे भी गायब हो गए. बावजूद इसके कि उस आदमी ने बड़ी सावधानी से हर नियम का पालन किया. फिर गलती कहां हुई? दरअसल गलती नहीं बल्कि वो आदमी फ्रॉड (ATM Machine fraud) का शिकार हुआ।

    एटीएम से पैसे निकालने को लेकर हुई धोखाधड़ी (ATM fraud) के कई मामले सामने आए हैं. पैसे निकालने के दौरान कई बार लोगों के अकाउंट से ज्यादा पैसे उड़ जाते हैं. दरअसल एटीएम मशीनों में छोटी स्कीमर डिवाइस या पतली फिल्म लगाई जाती है जो कार्ड का सारा डाटा कॉपी कर लेती है. बचा-कुचा काम एटीएम के आस-पास छुपे कैमरा कर देते हैं. कैमरे में यूजर द्वारा इंटर की गई पासवर्ड डिटेल कैप्चर कर ली जाती है।

    एक बात और इस काम में बैंको का कोई हाथ नहीं होता, सारा कारनामा जालसाजों का होता है. इसके बाद जैसे ही यूजर उस ATM मशीन से पैसे निकालता, उसकी डिटेल्स को कॉपी करके जालसाज यूजर के अकाउंट से बाकी के पैसे भी उड़ा देते हैं।

    अकाउंट से पैसे उड़ने पर क्या करें

    अब बात आती है कि आप गलती से ऐसे किसी फ्रॉड के शिकार हो ही जाएं तो क्या करें ? इसके लिए एक नंबर है 9212500888. शिकायत दर्ज करने के लिए फोन पर ‘Problem’ टाइप करें और इस नंबर पर भेज दें. साथ ही साथ अपना डेबिट कार्ड ब्लॉक करवा दें. इसके अलावा @SBICard_Connect पर ट्वीट भी कर सकते हैं. ध्यान देने वाली बात यह भी है कि शिकायत तीन दिनों (वर्किंग डे) के अंदर दाख़िल हो जानी चाहिए।

  • आइये आपको बताते है 4जी और 5जी में खास अंतर, सिर्फ 10 प्वाइंट में….

    आइये आपको बताते है 4जी और 5जी में खास अंतर, सिर्फ 10 प्वाइंट में….

    वो वक्त ज्यादा दूर भी नहीं गया है जब अपने पसंदीदा गाने सुनने और वीडियो देखने के लिए मैमोरी कार्ड को भरवाया जाता था। टेक्नोलॉजी ने ऐसी करवट बदली कि आज ऑनलाईन यू-ट्यूब के मजे लिए जाते हैं और नेटफ्लिक इत्यादि पर पूरी फिल्म ही इंटरनेट के जरिये देख ली जाती है। लेकिन आने वाला समय और भी फास्ट होने वाला है। आज 4G सर्विस इंडिया में एक्टिव है और हम लोग इतने सारे काम इंटरनेट के जरिये कर पाते हैं। ज़रा सोचिए आने वाले दिनों में जब 5G की शुरूआत अपने देश में हो जाएगी तो ​कैसा होगा। उम्मीद है कि नए साल में हमें 5G चलाने के मिल जाएगा और मोबाइल सेवाएं भी पूरी तरह से बदल जाएगी। देश में 5जी शुरू होने से पहले चलिए जानते हैं मौजूदा 4जी और आने वाले 5जी में कितना फर्क है।

    1. क्या है 4G

    यहां 4जी से मतलब है फोर्थ जेनरेशन यानि चौथी पीढ़ी। 2जी और 3जी से होते हुए 4जी की शुरूआत हुई थी जो मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में सबसे उन्नत मौजूदा तकनीक है। आज देश की सभी टेलीकॉम कंपनी 4जी सर्विस प्रदान कर रही है जिसके चलते स्मार्टफोन पर कम्प्यूटर जैसे कार्यों को करना संभव हो पाया है।

    2. क्या है 5G

    जैसा कि नाम से ही पता चलता है 5जी का मतलब है पांचवी जेनरेशन। यह वर्तमान 4G सर्विस का एडवांस वर्ज़न होगा जिसमें 4जी के सभी फीचर्स को विकसित करके शामिल किया जाएगा। 5G Super High-Frequency Spectrum पर काम करेगा। स्मार्टफोंस में 5जी की स्पीड पर इंटरनेट चल सके इसके लिए क्वॉलकॉम, मीडियाटेक और बायोनिक जैसी टेक कंपनियों ने अपने चिपसेट व प्रोसेसर्स को भी लॉन्च कर दिया है।

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    3. स्पीड

    5G और 4G में जो पहला और सबसे बड़ा अंतर होगा, वह होगी इंटरनेट की स्पीड। फिलहाल 4जी नेटवर्क पर मैक्सिमम आइडल स्पीड 100 मेगाबाइट प्रति सेकेंड (Mbps) की दी जाती है वहीं 5जी में यह स्पीड 10 गीगाबाइट प्रति सेकेंड (Gbps) होगी। यानि 5G नेटवर्क 4G नेटवर्क की तुलना में 100 गुना ज्यादा फास्ट होगा।null

    4. स्ट्रॉग इन्फ्रस्ट्रक्चर

    भारत पूरी दुनिया में सबसे बड़े मोबाइल बाजारों में से एक हैं। अपने देश में तेजी से स्मार्टफोन यूजर्स की गिनती बढ़ती जा रही है और सभी लोगों के पास इंटरनेट मौजूद है। तेजी से बढ़ते मोबाइल यूजर्स और इंटरनेट की बढ़ती खपत के हिसाब से मौजूदा 4जी इन्फ्रस्ट्रक्चर कमजोर पड़ रहा है जिसका असर मोबाइल सर्विसेज पर पड़ रहा है। लेकिन 5जी इन्फ्रस्ट्रक्चर न सिर्फ मौजूद हालात बल्कि आने वाले भविष्य में भी करोड़ो लोगों के बोझ झेल पाएगा।

    5. लैटेंसी

    सबसे पहले तो आपको लैटेंसी का मतलब बता दें कि जब आप किसी दोस्त को कोई मैसेज भेजते हैं तो आपके फोन से मैसेज सेंड होने से लेकर उसके फोन में मैसेज रिसीव होने तक के बीच के समय को लैटेंसी से मापा जाता है। यह समय बेहद ही कम यानि मिलीसेकेंड का होता है। यूं तो 4G में भी लैटेंसी महसूस नहीं होती। लेकिन ज़रा सोचिए 5G में यह कितनी तेज हो जाएगी।

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    6. बफरिंग

    कोई वीडियो प्ले करते हैं तो शुरू होने से पहले वह सभी फ्रेम्स को एक लाईन में लगाती है फिर उसके बाद चलती है, इसे ​बफरिंग कहा जाता है। ऑनलाईन वीडियोज़ देखने के दौरान जब वह बीच में रुकती है और चक्कर-सा घूमता नज़र आता है, वह नेटवर्क की कमजोरी को दर्शाता है। 5G के आने के बाद शायद ‘बफरिंग’ शब्द भी इतिहास बन जाएगा।

    7. लोडिंग

    इंटरनेट पर कोई चीज सर्च करने के दौरान जैसे ही कीवर्ड को लिखकर एंटर किया जाता है और फिर जो पेज खुलकर सामने आता है, इसके बीच का कुछ समय लोडिंग में लगता है। 5G में यह लोडिंग समय और भी कम हो जाएगा। यानि एंटर मारते ही रिजल्ट सामने। 4जी एलटीई में लोडिंग टाईम अमूमन 20ms/सेंकेंड का बताया गया है जो 5जी में 2ms/सेकेंड का हो जाने का दावा है।

    8. नेटवर्क कंजेशन

    जैसा कि हमनें उपर भी बताया कि देश में स्मार्टफोन उपभोक्ता और इंटरनेट यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। 4जी स्टेक्ट्रम सीमित है और लगातार नए यूजर्स जुड़ने से एक ही नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है। उदाहरण के तौर पर पहले जहां एक टॉवर पर 50,000 लोगों के फोन सिग्नल पकड़ते थे। वहीं अब उस टॉवर पर 1,50,000 लोगों के फोंस को सिग्नल दिया जा रहा है। इस वजह से नेटवर्क कंजेशन बढ़ रहा है। लेकिन 5जी में यह स्थित रिफ्रेश हो जाएगी और बिना रूकावट सेवा मिलेगी।

    5g-vs-4g-know-what-is-the-difference

    9. ऑनलाईन गेमिंग लैग

    पबजी तो शायद आप सभी ने खेला होगा। कई बार ऐसा भी हुआ होगा कि आपने फायर का बटन दबाया, लेकिन गेम में फायर थोड़ा देर बाद हुआ। यानि बटन दबाने से लेकर उसका रिस्पांस मिलने के बीच का जो समय है, वह गेम लैग है। 4जी की तुलना में 5जी में यह लैग बेहद ही कम हो जाएगा। ऑनलाईन गेमिंग में यह वक्त 1 माइक्रो सेकेंड से भी कम हो जाएगा।

    10. क्लाउड गेमिंग

    यू-ट्यूब से लेकर नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम का मिर्जापुर शो, यह सब हम इंटरनेट के जरिये ऑनलाईन देखते हैं। लेकिन ज़रा सोचिए फिल्मों की तरह ही गेम्स को भी ऑनलाईन स्ट्रीमिंग के जरिये खेला जाए तो, कैसा हो। 5G क्लाउड गेमिंग को आसान बना सकता है। इंडिया में ऐसा सफल हुआ तो, आपको न ही फोन या ​कम्प्यूटर में गेम की ऐप को डाउनलोड करना पड़ेगा और न ही पीएस, एक्सबॉक्स तथा महंगे गेम्स को खरीदने की जरूरत पड़ेगी।

  • एटीएम लेनदेन फेल होने पर करें ये काम, आरबीआई ने बताए रास्ते

    एटीएम लेनदेन फेल होने पर करें ये काम, आरबीआई ने बताए रास्ते

    एटीएम की खराबी की वजह से एटीएम लेनदेन फेल हो सकता है या एटीएम मशीन कैश बाहर नहीं आ सकती है। चिंता करने या घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि बैंक एक निर्धारित समय के भीतर आपके आकाउंट में राशि जमा कर देगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक सार्वजनिक जागरूकता कदम उठाया है ताकि लोगों का एटीएम से कैश निकासी को लेकर चिंतित न होना पड़े। 

    if ATM transaction fails, Do this work, RBI told the way 

    एटीएम लेनदेन फेल होने पर क्या करें आरबीआई ने सुझाए रास्ते

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ट्वीट किया कि अगर आपका एटीएम लेनदेन फेल होता है और आपका बैंक एक निर्दिष्ट समय अवधि के भीतर आपके अकाउंट से डेबिट किए गए धन को वापस नहीं लौटता है, तो आपका बैंक आपको देरी की भरपाई करेगा। आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों’ में एटीएम से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए।

    फेल एटीएम ट्रांजेक्शन रिफंड के बारे में जाने मुख्य बातें-

    1. आरबीआई ने कहा कि बैंकों को इस तरह के लेनदेन को अपने हिसाब से करना चाहिए।
    2. केंद्रीय बैंक ने कहा कि कार्ड जारी करने वाले बैंक या एटीएम मालिक बैंक से जल्द से जल्द शिकायत दर्ज करना एक अच्छा अभ्यास है।
    3. आरबीआई के अनुसार, एटीएम लेनदेन फेल होने के मामले में बैंकों को 5 कैलेंडर दिनों के भीतर ग्राहक के खाते को फिर से क्रेडिट करने के लिए अनिवार्य किया गया है।
    4. एटीएम लेनदेन फेल होने के 5 दिन के भीतर ग्राहक को राशि क्रेडिट नहीं होती है तो फिर से जमा करने में देरी के लिए बैंक को प्रतिदिन 100 रुपए मुआवजा देना पड़ेगा। ग्राहक अपने बैंक से संपर्क कर सकता है और उनके साथ मामले को उठा सकता है।
    5. बैंक से उत्तर प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर या 30 दिनों के भीतर बैंक से उत्तर न मिलने की स्थिति में ग्राहक बैंकिंग लोकपाल के पास मामले को ले जा सकता है।
  • Microsoft ने एंड्रॉयड फोन यूजर्स को दी चेतावनी, जानिए क्या है मामला

    Microsoft ने एंड्रॉयड फोन यूजर्स को दी चेतावनी, जानिए क्या है मामला

    दिल्ली। अमेरिकी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने एंड्रॉयड यूजर्स को बड़ी चेतावनी दी है. कंपनी ने एक नए रैनसमवेयर का पता लगाया है जो एंड्रॉयड स्मार्टफोन को टारगेट कर रहा है. यह रैनसमवेयर मैलिशस एंड्रॉयड ऐप्स में छिपा रहता है और ऑनलाइन फोरम और वेबसाइट के जरिए फैल रहा है. कंपनी ने कहा है कि किसी वेबसाइट से ऐप्स डाउनलोड करते समय सावधानी बरतें।

    स्क्रीन को कर देता है लॉक

    कंपनी ने बताया कि यह रैनसमवेयर एंड्रॉयड यूजर्स को फोन स्क्रीन को ऐक्सिस करने से रोकता है. यह डिवाइस को इनक्रिप्ट नहीं करता. यह स्क्रीन को एक संदेश के साथ फ्रीज कर देता है. यह ‘कॉल’ नोटिफिकेशन का फायदा उठाते हुए इनकमिंग कॉल के समय सक्रिय हो जाता है. इसके अलावा यूजर जब होम बटन या रीसेंट ऐप बटन दबाता है तो स्क्रीन लॉक हो जाती है।

    ब्लॉक कर देता है डिवाइस का एक्सिस
    माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, ”ज्यादातर एंड्रॉयड रैनसमवेयर से अलग यह नया थ्रेट फाइल्स को इनक्रिप्ट करके उनके एक्सिस को ब्लॉक नहीं करता. बल्कि यह रैनसमवेयर स्क्रीन पर मैसेज के साथ डिवाइस का एक्सिस ही ब्लॉक कर देता है. यह स्क्रीन हर विंडो में दिखती है, यानी यूजर फोन में कुछ और कर ही नहीं सकता. स्क्रीन पर एक थ्रेट मैसेज होता है और रैनसम को पैसे चुकाने के दिशा-निर्देश रहते हैं।”

    माइक्रोसॉफ्ट ने दी थी चेतावनी, हैकर्स के निशाने पर है अमेरिकी चुनाव
    हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने एक चेतावनी जारी कर कहा था कि रूस, चीन और ईरान से संबंध रखने वाले हैकर्स अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी के मुताबिक, ये हैकर्स चुनावी प्रक्रिया से जुड़े लोगों और समूहों की जासूसी कर रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट का दावा है कि साल 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में चुनाव प्रचार को प्रभावित करने वाले रूसी हैकर्स ग्रुप एक बार फिर से एक्टिव हो गए हैं।

  • WhatsApp के चैट सिक्योर हैं तो कैसे सामने आ रहे हैं Drugs से जुड़े उनके वॉट्सऐप चैट्स? यहां समझें

    WhatsApp के चैट सिक्योर हैं तो कैसे सामने आ रहे हैं Drugs से जुड़े उनके वॉट्सऐप चैट्स? यहां समझें

    WhatsApp चैट एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं तो बॉलीवुड स्टार्स के Drugs से जुड़े चैट्स लीक कैसे हो रहे हैं? ये सवाल इन दिनों चर्चा में है. इसी बीच WhatsApp का एक स्टेटमेंट भी आया है।



    WhatsApp ने अपने स्टेटमेंट में कुछ ऐसा नहीं कहा है जो नया हो. पहले भी कंपनी ये बात कहती आई है और ये शायद आप सब को भी पता होगा कि एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड है. लेकिन फिर भी आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि डायरेक्ट नहीं, बल्कि इनडायरेक्टली WhatsApp के चैट्स कैसे हासिल किए जा सकते हैं।



    ताज़ा स्टेटमेंट में कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा है, ‘WhatsApp आपके मैसेजों को एंड टु एंड एन्क्रिप्शन से प्रोटेक्ट करता है, ताकि आप और आप जिसे मैसेज सेंड कर रहे हैं वही मैसेज को देखे, इसके अलावा कोई भी मैसेज का ऐक्सेस नहीं कर सकता है, WhatsApp भी नहीं’

    WhatsApp की तरफ़ से ये भी कहा गया है कि ये याद रखना ज़रूरी है कि WhatsApp सिर्फ फ़ोन नंबर से ही साइन अप किया जा सकता है और WhatsApp के पास आपके मैसेज के कॉन्टेंट का ऐक्सेस नहीं होता है।



    WhatsApp चैट तो सिक्योर हैं, लेकिन क्या बैकअप सिक्योर है?
    WhatsApp के मुताबिक़ जो चैट बैकअप क्लाउड स्टोरेज पर बैकअप रखे जाते हैं या सेव किए जाते हैं वो एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होते हैं. आम तौर पर यूज़र्स अपने WhatsApp चैट का बैकअप गूगल ड्राइव पर रखते है. WhatsApp में चैट के ऑटो बैकअप का भी ऑप्शन है जिसके तहत ख़ुद से ही चैट्स क्लाउड पर स्टोर होते हैं।



    अगर आपका WhatsApp चैट को ऐक्सेस नहीं कर पा रहा है तो अगर वो चाहे तो आपकी जीमेल आईडी के ज़रिए गूगल ड्राइव से आसानी से तामाम पुराने चैट्स निकाल कर पढ़ सकता है. क्योंकि यहां रखा गया WhatsApp चैट का बैकअप एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होता है।



    सिक्योरिटी या जांच एजेंसी क्लोनिंग करती हैं
    WhatsApp के एन्क्रिप्टेड डेटा को ऐक्सेस करने के लिए सिक्योरिटी और जांच एजंसियां यूज़र्स के फ़ोन को लेकर उसकी क्लोनिंग करती हैं. क्लोनिंग दूसरे डिवाइस पर किया जाता है।

    क्लोनिंग के बाद एजेंसियों को मिरर इमेज के ज़रिए डिलीटेड मैसेज का ऐक्सेस मिलता है. इसके लिए प्रोफेशनल टूल्स यूज किए जाते हैं और ये अलग डिवाइस पर किया जाता है।

    मिरर इमेज

    अब चूँकि फ़ोन की क्लोनिंग कर ली गई तो इससे एजेंसियों को फ़ोन के मैसेज, फ़ोटोज़, कॉल रिकॉर्ड्स और इसके साथ क्लाउड ऐप्स पर रखा डेटा का भी ऐक्सेस मिल जाता है. अब यहां से WhatsApp के चैट्स आसानी से रिकवर किए जा सकेत हैं।

    बैकअप

    कुल मिला कर ये कहा जा सकता है कि WhatsApp पर चैटिंग तो एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड है, लेकिन इसका बैकअप सिक्योर नहीं है. अगर बैकअप का ऐक्सेस मिल गया तो फिर चैट रिकवर हो जाएँगे. जांच एजेंसियाँ भी सीधे तौर पर WhatsApp से चैट्स हासिल नहीं कर रही हैं।

  • डिजिटिलाइजेशन का नुकसान, 80% पढ़े-लिखे लोग साइबर अपराध का शिकार…

    डिजिटिलाइजेशन का नुकसान, 80% पढ़े-लिखे लोग साइबर अपराध का शिकार…

    रायपुर। देश आज भले ही तेजी से डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन ऑनलाइन संसाधन आसान होने से साइबर क्राइम भी चरम पर है. क्योंकि बदलते समय और ऑनलाइन बैंकिग संसाधनों के बीच खाताधारकों की राह आसान होने का फायदा साइबर ठग उठाते हैं. ऑनलाइन साइबर अपराध का शिकार सबसे ज्यादा युवा और पढ़े-लिखे लोग हो रहे हैं. ठग कभी केवाइसी अपडेट करने के नाम पर, तो कभी ऑफर देकर अपने झासे में लेते हैं. पुलिस भले ही जागरूकता अभियान चलाती है, लेकिन इसका असर एडवांस युवाओं में ज्यादा दिखता नहीं है. आज स्थिति यह हो गई कि घर बैठे अपराधी ऑनलाइन अपराधों को सहज तरीके से अंजाम दे रहे है. यदि आपने जामताड़ा वेब सीरीज देखी होगी, तो साइबर अपराध से भलिभांति परिचित होंगे।

    2 महीने में 92 साइबर अपराध

    बात करें छत्तीसगढ़ की राजधानी की, तो रायपुर लॉकडाउन के दौरान साइबर अपराध का एक गढ़ बनकर उभरा है. यहां पिछले 2 महीने में ऑनलाइन ठगी के 92 केस सामने आए हैं. यह संख्या बताने को काफी है कि क्राइम मास्टरों ने राजधानी को अपना नया अड्डा चुन लिया है. जब किसी राज्य में लोग आसानी से बेवकूफ बनने लगते हैं, तो इन्हीं इलाकों में ये अगला शिकार ढूंढने लगते हैं. यही वजह है कि दिनों-दिन रायपुर में ऑनलाइन अपराध के आंकड़े भी तेजी से बढ़ने लगे हैं।

    80% पढ़े-लिखे लोग हुए शिकार

    इन दो महीने में हुए 92 केसों में एटीएम फ्रॉड, ओएलएक्स फ्रॉड, पेटीएम से रिलेटेड फ्रॉड समेत कई तरह के सायबर फ्रॉड के केस शामिल है. दिलचस्प बात ये है कि जितने लोगों के साथ ठगी हुई है उसमें 80 प्रतिशत लोग पढ़े लिखे है. क्योंकि ये लोग ज्यादा सोशल साइड्स का उपयोग करते हैं और किसी न किसी तरह से ठग उन्हें अपने झासे में ले लेता है. ऐसे लोगों को गूगल से नंबर निकालकर कॉल किया जाता है और ठगी करते हैं. इसके अलावा लोन लेने के नाम पर, पेटीएम अपडेट कराने के नाम पर ओटीपी नंबर लेकर और हर बार नए-नए तरीके से अपराधी ठगी करते हैं. आज अधिकतर लोग ऑनलाइन पेमेंट करते हैं. इसलिए अपराध भी पढ़ा है. दो महीने में साइबर ठगों ने 6 लाख 13 हजार रूपए की ठगी की है. जिसमें से पुलिस ने 18 मामले में 2 लाख 81 हजार से अधिक की रकम रिफंड भी करवाया है।

    जल्द दूसरे राज्यों में जाएगी टीम

    क्राइम एडिशनल एसपी अभिषेक माहेश्वरी बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण पुलिस की टीम दूसरे राज्यों में नहीं जा पा रही है. जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही है, टीम भी बाहर भेजना शुरु कर रहे हैं. बहुत जल्द अलग-अलग राज्यों में टीम भेजकर आरोपियों की शिनाख्त कर गिरफ्तारी की जाएगी. माहेश्वरी आगे बताते हैं कि साइबर क्राइम को लेकर लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है. जिससे वो किसी के साथ भी अपना पर्सनल इन्फॉर्मेशन शेयर न करें. क्योंकि जैसे ही ऑप गोपनीय जानकारी सामने वाले व्यक्ति को साझा करते हैं, वो आपके खाते से पैसे निकाल लेता है।

    साल भर से पेंडिंग पड़े हैं मामले

    एसएसपी अजय यादव कहते हैं कि साइबर क्राइम की जिनती भी शिकायतें थाने में लंबित है उसकी समीक्षा करने के लिए सभी सीएसपी को निर्देश दिए गए हैं. थाने में आईं सभी शिकायतें भी सहीं पाई गई है. उन्होंने कहा कि ठगी चाहे एक रुपए की ही क्यों न हो उसमें पहले मुकदमा दर्ज करें. अभी कई केसेस मैंने देखा है कि साल भर से पेंडिंग पड़े हुए है. जिसमें लोगों ने केस रजिस्टर्ड नहीं किया है. केस रजिस्टर्ड करने के लिए निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

    इन शहरों में बैठें हैं ठग गैंग

    एसएसपी ने आगे बताया कि कई अपराधों में यह पाया गया है कि एक ही लोकेशन से इसे ऑपरेट किया जा रहा है. ऐसे तीन-चार लोकेशन मिले है. जहां से ज्यादा ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. झारखंड का जामताड़ा एरिया, वेस्ट बंगाल के कुछ हिस्से और राजस्थान के कुछ एरिया नए हब के रूप में डेवलप होते दिख रहे हैं. इसलिए यह तय किया गया है कि इन जगहों पर पुलिस की टीम भेजी जाएगी. हमने कुछ केस आइडेंटिफाई भी किया है।

    बिलासपुर में ‘साइबर मितान’ अभियान

    बिलासपुर जिले में भी लगातार बढ़ रहे साइबर मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है. इसके लिए 1 सितंबर से 8 सितंबर तक ‘साइबर मितान’ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जिसमें पुलिस ने डोर टू डोर अभियान के तहत गांव से लेकर वार्डों में लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

    ठगी से बचने जागरूकता जरूरी

    पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल कहते हैं कि हमारा उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस अभियान के जरिए जागरूक करना है. जिससे लोग ठगी का शिकार न हो, क्योंकि ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही एक मात्र उपाय है. जिले भर में ज्यादा से ज्यादा गांव, कस्बों, वार्डों तक इस अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए जिले के सभी थाना प्रभारी सहित पुलिस कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिग दी गई है कि वो कैसे इस साइबर अपराध से लोगों जागरूक कर सकते हैं. जिले के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है और हम इसका निर्वाहन कर रहे हैं।

    कैसे बचे साइबर अपराध से ?

    साधारण सा गेम या एप भी डाउनलोड करते समय आप बिना पढे़ ही उसके नियम और शर्तो को मानते हुए बटन दबाते रहते है. यह गलत होता है. यहां तक कि वाट्सएप को भी हैक कर लिया जाता है. पलक झपकते ही आपके पैसे खाते से गायब हो सकता है. इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है. अगर किसी वेबसाइट पर कोई पॉपअप खुले और आपको कुछ आकर्षक गिफ्ट या इनाम ऑफर करे, तब आप अपनी पर्सनल जानकारी या बैंक अकाउंट नंबर या बैंक से संबंधित कोई भी जानकारी न भरें. अगर आप किसी ऑफर का लाभ लेना चाहते हैं, तो आप सीधे रिटेलर के वेबसाइट, रीटेल आउटलेट या अन्य जायज साइट से संपर्क करें. अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन आने पर किसी भी प्रकार की ओटीपी और पर्सनल जानकारी साझा न करें. आज के दौर में इंटरनेट हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इंटरनेट पर जरा सी ना समझी स्कैमर्स को साइबर क्राइम के लिए खुला निमंत्रण देता है. अगर आप इन बातों को गौर करते हैं, तो आप साइबर क्राइम के शिकार होने से बच सकते हैं।

  • आपके बैंक के नाम से आए ईमेल तो हो जाएं सावधान! लिंक खोलते ही खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

    आपके बैंक के नाम से आए ईमेल तो हो जाएं सावधान! लिंक खोलते ही खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

    डिजिटलीकरण के इस जमाने में ज्यादातर सेवाएं ऑनलाइन हो गई हैं। बैंकिंग से संबंधित ज्यादातर कामकाज ईमेल के जरिए हो रहे हैं। खाता खोलने से लेकर आपके खाते से हो रही हर लेनदेन की हर जानकारी आपको ईमेल से सूचित की जा रही है। किसी फ्रॉड से बचने के तौर-तरीकों की जानकारी भी बैंक आपको इन्हीं माध्यमों से दे रहे हैं।
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    ऐसे में अगर आपके ही बैंक से कोई विशेष ईमेल आएगी तो स्वाभाविक तौर पर आप भी उसे चेक किए बिना नहीं रह सकेंगे। लेकिन सावधान रहें, यह बैंक फ्रॉड का नया तरीका है, जिसे साइबर अपराधी इस समय खूब आजमा रहे हैं। ऐसे ईमेल के लिंक खोलते ही आपके खाते में जमा रकम गायब हो सकती है।


    क्यों धोखा खा रहे हैं लोग?
    दरअसल, एसबीआई हो या एचडीएफसी, एक्सिस हो या आईसीआईसीआई, सभी बैंक अपनी विशेष आईडी वाली ईमेल से ही संदेश भेजते हैं। इस आईडी के नाम में बैंक का नाम भी अवश्य जुड़ा रहता है। कंपनी का लोगो भी बहुत स्पष्ट तौर पर दिखता है। लेकिन ईमेल सर्विस प्रोवाइडिंग सर्विसेज पर आईडी बनाते समय अक्षरों के चयन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
     
    इसी बात का लाभ उठाते हुए साइबर अपराधी बैंक के नाम के साथ कुछ अन्य अक्षरों को जोड़कर ईमेल आईडी बना लेते हैं। पहली नजर में ये बैंक के आधिकारिक मेल की तरह लगते हैं, इससे वे इन्हीं बैंकों के ग्राहकों को ईमेल भेजकर किसी योजना या फर्जी लेनदेन की जानकारी देते हैं या स्वयं ही किसी फ्रॉड से बचने की जानकारी देते हैं।

    इस जानकारी को पाने के लिए लोगों से ईमेल के नीचे दिए गए लिंक को खोलने के लिए कहा जाता है। इस लिंक में वायरस होता है, जिसे खोलते ही आपके मोबाइल या लैपटॉप की सारी जानकारी साइबर अपराधी तक पहुंच जाती है।

    कैसे बचें
    दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के शीर्ष अधिकारी अनीश राय कहते हैं कि आप जिस भी बैंक की सेवा लेते हैं, उसकी कुछ चुनिंदा ईमेल से ही आपसे संवाद किया जाता है। आप शुरुआत में ही इन ईमेल को अपनी प्राथमिकता में शामिल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी अन्य मेल से जानकारी आती है तो उसे सीधे खोलने से बचें।

    यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। जरा सा भी संदेह होने पर पहले बैंक के कस्टमर केयर को फोन करके सुनिश्चित कर लें कि क्या इस तरह की जानकारी बैंक से दी गई है या नहीं? अपनी ईमेल सेवा और आवश्यक जानकारी को हमेशा डबल लॉक से सुरक्षित रखना चाहिए।

    बैंक ऐसे करते हैं सुरक्षित
    एचडीएफसी बैंक के शीर्ष अधिकारी संजय ओझा के मुताबिक, बैंक स्टेटमेंट जैसी कोई आधिकारिक जानकारी देते समय अगर लिंक्स खोलने को कहा जाता है, लेकिन यह पासवर्ड से सुरक्षित होता है। अकसर यह पासवर्ड आपकी व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा होता है, जिसकी सूचना आपको या बैंक को ही होती है। ऐसे में जब तक आपसे कोई बिना पासवर्ड वाली फाइल खोलने को कही जाती है, तो यह फ्रॉड हो सकती है। ऐसे मामलों में आपको सावधान रहना चाहिए।