Author: Sunil Agrawal

  • कैश में लेन-देन कर रहे हैं? कहीं घर न आ जाए इनकम टैक्स का नोटिस, ऐसे ट्रांजैक्शन पर रहती है टैक्स अथॉरिटी की नजर

    कैश में लेन-देन कर रहे हैं? कहीं घर न आ जाए इनकम टैक्स का नोटिस, ऐसे ट्रांजैक्शन पर रहती है टैक्स अथॉरिटी की नजर

    आईटी डिपार्टमेंट एक खास लिमिट के ऊपर के वैल्यू के ट्रांजैक्शन पर नजर रखता है. इसमें बैंक डिपॉजिट, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री से जुड़ा लेन-देन, म्युचुअल फंड में निवेश या फिर शेयरों की ट्रेडिंग सहित कई अन्य ऐसे ट्रांजैक्शन हैं, जिनमें एक लिमिट के ऊपर का ट्रांजैक्शन नोटिस को बुलावा दे सकता है.

  • अवैध बेजा कब्जा हटाने को लेकर ग्राम पतरापाली के ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन…

    अवैध बेजा कब्जा हटाने को लेकर ग्राम पतरापाली के ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन…



    खरसिया । आज ग्राम पतरापाली के सैकड़ों ग्रामीण अवैध बेजा कब्जा हटाने की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय खरसिया पहुंचे, जहाँ उन्होंने खरसिया एसडीएम को ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने बताया की ग्राम पतरापाली स्थित खसरा नं. 322 / 2 व 322 / 1 उक्त भूमि (चुरैल झौरखा) श्मशान घाट के नाम से सुरक्षित हैं, जिसे अवैध रूप से कोई बाहरी व्यक्ति द्वारा ढावा (होटल) बनाकर चलाया जा रहा है । जिसे तत्काल हटाया जाये ताकि वहां ग्रामीणों के लिए मुक्तिधाम बनाया जा सके। वही
    ग्राम पतरापाली में (कोटवारी) सेवाभूमि जमीन पर अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा कब्जा करके होटल बनाकर संचालन किया जा रहा है। जिसे ग्रामवासियों के द्वारा पुछताछ किये जाने पर उक्त व्यक्ति द्वारा क्रय किया हूं बोला गया, जबकि सेवा भूमि को क्रय विक्रय या मद् परिवर्तन करने का अधिकार नही है तथा ग्राम पतरापाली में आदिवासियों को आंवटन के तहत शासन के द्वारा खेती करने के लिये दिया गया था, जिसे गैर आदिवासियों द्वारा खरीदी कर आदिवासियों के नाम से किया गया है। जिसे गैरआदिवासियों द्वारा कब्जा किया जाकर फलाईएस मिटटी मूरुम पाटा गया है। जिसे 170 ख के अंतर्गत कार्यवाही किया जाकर, गैरआदिवासियों द्वारा हो रहे, अतिक्रमण को हटाया जाए, ग्राम पतरापाली में ऐसा कई मामला है। जो आदिवासियों की जमीन को खरीदकर, अपन किसी परिचित आदिवासी व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कर अवैध रूप से कब्जा किया गया है, जिसे रोकना अति आवश्यक है। वही दिनांक 20.09.2022 को अन्य व्यक्ति के द्वारा ईटा गिराकर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

    उपरोक्त प्लाट पर बन रहे अवैध कालोनी होटल पर अगर उचित कार्यवाही नही किया गया तो ग्रामीण दिनांक 29.09.2022 को एन. एवं 49 राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करेगे। इसके बाद भी अवैध प्लाट वालों के विरूद्ध कार्यवाही नही होता है। तो 1.10.2022 से एन.एच 49 राष्ट्रीय राजमार्ग को चक्का जाम किया जावेगा।

  • डॉ राम विजय शर्मा के शोधपत्र की सराहना…

    डॉ राम विजय शर्मा के शोधपत्र की सराहना…


    खरसिया। विगत दिनों संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व छत्तीसगढ़ शासन के तत्वाधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 16 सितंबर से 18 सितंबर 2000 तक रायपुर में किया गया। संगोष्ठी का विषय छत्तीसगढ़ की संस्कृति संवाहक सरिताए था। तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, असम आदि राज्यों के इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, शोधकर्ता एवं विद्वान शरीक हुए। इस संगोष्ठी में इतिहासकार एवं पूर्व तहसीलदार डॉ. राम विजय शर्मा भी शामिल हुए और उन्होंने अपना शोधपत्र इंद्रावती नदी और उसका ऐतिहासिक धार्मिक एवं आर्थिक महत्व प्रस्तुत किया इंद्रावती नदी पर प्रस्तुत शोध पत्र के विद्वानों ने सराहना की। उल्लेखनीय है कि डॉ राम विजय शर्मा ने इंद्रावती नदी और महानदी पर बहुत अच्छा काम किया है उन्होंने 1 मार्च 2010 को विश्व इंद्रावती सेवक समाज तथा 14 जनवरी 2012 को भारत महानदी सेवक समाज का गठन किया था।

  • रायगढ़ एडिशनल एसपी सहित राज्य के 39 पुलिस अधिकारियों का तबादला…

    रायगढ़ एडिशनल एसपी सहित राज्य के 39 पुलिस अधिकारियों का तबादला…

    राज्य सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के 39 अधिकारियों का तबादला किया है। इसमें कुछ एडिशनल एसपी हैं तो कई डीएसपी भी हैं। रायगढ़ जिला के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले का तबादला कर दिया गया है और उनकी जगह दुर्ग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय ध्रुव को रायगढ़ लाया गया है।



    इसके अलावा रायगढ़ के खाली CSP पद पर अभिनव उपाध्याय को लाया गया है। यहां पर अभी तक धर्मजयगढ़ एसडीओपी दीपक मिश्रा इस पद के प्रभारी के बतौर कार्य कर रहे थे। इस पद के लिए आ रहे अभिनव उपाध्याय बीजापुर में पदस्थ थे।

  • पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग ,यात्रियों में मची अफरा तफरी…

    पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग ,यात्रियों में मची अफरा तफरी…

    रायगढ़ से बिलासपुर जाने वाली मेमू पैसेंजर के इंजन में आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही रेल प्रशासन ने इंजन के उपर लगी आग को बुझाकर उसे बोगी से अलग किया और दूसरे इंजन के साथ ट्रेन को बिलासपुर की तरफ रवाना किया। आगजनी की इस घटना से यह यात्री ट्रेन लगभग दो घंटे तक स्टेशन में खड़ी रही।



    रेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह 9 बजे रायगढ़ से बिलासपुर जाने वाले रायगढ़ बिलासपुर मेमू लोकल के इंजन में आग लगने की जानकारी मिलते ही ट्रेन को तत्काल रोक लिया गया। यह घटना खरसिया स्टेशन में घटी। आगजनी की जानकारी मिलने के बाद कुछ देर तक यात्रियों में मची अफरा तफरी का माहौल बना रहा।



    जानकारी मिलने के बाद रेल विभाग के अधिकारियों ने मेमू के इंजन को अलग करके दूसरा इंजन पैसेंजर ट्रेन में लगाया तब कहीं जाकर ट्रेन को बिलासपुर रवाना किया गया। रेल इंजन में आगजनी की घटना समय पर मिल जाने से बड़ी घटना टल गई और इस दुर्घटना से करीब दो घंटे तक इस यात्री ट्रेन को रोके रखने के बाद दूसरा इंजन लगाकर आखिरकार आगे रवाना किया गया।

  • हेलीकप्टर से धार्मिक यात्रा कराने के नाम पर धोखाधड़ी….

    हेलीकप्टर से धार्मिक यात्रा कराने के नाम पर धोखाधड़ी….

     

    रायगढ़ । सुभाष चौक रायगढ़ में रहने वाले अनिल अग्रवाल (50 वर्ष) द्वारा दिनांक 16.09.2022 को थाना सिटी कोतवाली में आवेदन देकर नितिन कुमार नाम के व्यक्ति पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कराया गया है ।

    रिपोर्टकर्ता बताया कि बीते 24 अगस्त को गुगल वेबसाईड पर एक ऐड देखा जिसमें हेलीकप्टर सर्विस कंपनी चारधाम की यात्रा के लिए टिकिट बुकिंग किया जा रहा है । उस वेबसाईड पर दिये मोबाइल नम्बर से बात करने पर कॉलर नितीन कुमार नाम के व्यक्ति से बात हुआ जिससे दिनांक 04/09/2022 की यात्रा उत्तराखण्ड के फट्टा से केदारनाथ (उत्तराखण्ड ) के लिए 4 टिकिट बुक किये । टिकिट के लिए चारों व्यक्तियों का आधार कार्ड और 18,880 रुपये सीएससी सेंटर के माध्यम से संजीब ग्वाला नाम व्यक्ति के SBI अकाउंट पर भेजा गया । तब वाट्सअप के जरिए दिनांक 14/09/2022 की टिकिट प्राप्त हुई । टिकिट देखकर कॉलर से सम्पर्क कर कहा गया कि टिकिट निरस्त कर दिनांक 04/09/2022 की टिकिट दें, तब कॉलर बोला कि पुन: उसी खाता नम्बर पर 18,880 रुपये भेज दें । पुनः उसी खाते में 18,880 रुपये भेजा गया । कॉलर द्वारा इंटरनेट फेल होने का कारण बताते हुये दूसरे व्यक्ति का खाता नम्बर भेजकर उसमें 18,880 रूपये भेजने के लिये बोला । तब फिर से दिये गये खाते में 18,880 रूपये भेजा गया । उसके बाद पूर्व में भेजे गये रकम की मांग करने पर 12,000 रुपये इंश्योरेंस के नाम पर मांगा गया । टिकिट नहीं मिलने पर दिनांक 03/09/2022 को सम्पर्क करने पर कॉलर मय इंश्योरेंस की राशि सहित 31,000 रुपये मांग जिसे सीएससी सेंटर के माध्यम से रूपये भेजा गया, तब टिकिट प्राप्त हुआ । दिनांक 03/09/2022 को सभी यात्रा के लिए फट्टा ( उत्तराखण्ड ) टिकिट कांउटर पहुंचे, जहां भेजे गये टिकिट दिखाने पर उनके द्वारा टिकिट को फर्जी होना बताया गया । उसके बाद कॉलर के मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क करने पर वह फोन नहीं उठाया, वाट्सअप कल करने पर कॉल काट दिया । सभी स्वयं के व्यय से व्यवस्था कर रायगढ़ पहुंचे । थाना सिटी कोतवाली में रिपोर्टकर्ता अनिल अग्रवाल द्वारा कुल 99,640 रूपये की ठगी के दिये गये आवेदन पर नितीन कुमार नाम के व्यक्ति पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया है ।

  • सोशल मीडिया के अनसोशल नशे में कहीं आप भी तो नहीं फंसते जा रहे हैं…. जानिए कैसे

    सोशल मीडिया के अनसोशल नशे में कहीं आप भी तो नहीं फंसते जा रहे हैं…. जानिए कैसे

    दिल्ली। दुनियाभर में सबसे अधिक आबादी वाले देशों की फेहरिस्त में भारत नंबर 2 पर है, लेकिन सोशल मीडिया के मामले में सबसे आगे है. अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के ही अकेले यहां पर 40 करोड़ अकाउंट हैं, वहीं वाट्सऐप के तो तकरीबन 53 करोड़ यूजर हैं.

    बात नब्बे के दशक के शुरुआत की है, जब लेखक को भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी से इंटरनेट और सर्च इंजन (Internet And Search Engine) जैसी किसी चीज़ के बारे में पता चला. इसका इस्तेमाल विदेशों में वहां की पुलिस कर रही थी, जिससे पुलिस को कई तरीके से मदद मिल रही थी. ये दिलचस्प जानकारी थी और साथ ही उन दिनों इसे दिल्ली पुलिस (Delhi Police) भी इस्तेमाल करने पर विचार कर रही थी. तभी पता चला कि ये कोई ऐसी तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर के एक क्लिक से ज्ञान का भंडार खुल जाता है. जो चाहो जानकारी झट से पा लो और फटाफट किसी को भी टाइप करके भेज दो.

    सूचना (Information Technology) लेने देने के लिए तब तक की सबसे आधुनिक तकनीक मॉडेम थी जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर के नेटवर्क के ज़रिए ही होता था. इसके अलावा , चलते फिरते कहीं भी संदेश पाने के लिए पेजर तक चुनिंदा पेशेवर लोगों की पहुंच हो चुकी थी. इससे कुछ साल पहले ही यानि 80 के दशक में रंगीन टेलीविज़न, कंप्यूटर और फैक्स का आगमन भारत में हो चुका था, ये भारत में सूचना क्रांति से कम नहीं था. लेकिन ऐसे में इंटरनेट तो एक कदम क्या, कितने ही कदम आगे की चीज़ थी

    थोड़े बहुत इल्म के साथ इस बारे में लेखक ने बतौर रिपोर्टर एक खबर लिखी, जो अखबार में प्रकाशित हुई. लिखने से लेकर, इसके छपने और छपकर घरों तक पहुंच जाने की प्रक्रिया में जिस-जिस की नज़र से ये जानकारी गुजरी, किसी को भी इस सच्चाई पर आसानी से यकीन नहीं हो रहा था कि ‘इंटरनेट’ और ‘सर्च इंजन’ जैसी कोई बला हो सकती है. वैसे भी उस ज़माने की जनता को इसका यकीं होता भी कैसे जब उसे घर में लैंड लाइन फोन लगवाने के लिए सालों इंतज़ार करने की आदत पड़ी हुई हो. तब फोन तो बहुत बड़े अधिकारियों या मंत्रियों को भी आसानी से नहीं मिलते थे.

    तब किसने सोचा था कि जिंदगी को रफ्तार देने वाले ‘इंटरनेट’ और ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ सोशल नेटवर्किंग सर्विस के नाम पर ऐसे उत्पाद बना देंगे जो अच्छे खासे आदमी और संस्थाओं की चाल और चरित्र दोनों ही बदल देंगे. जब तक स्मार्ट फोन नहीं थे, तक तक तो काफी हद तक उन कम्प्यूटरों की स्क्रीन के ज़रिए सोशल मीडिया बहुत हद तक दुनिया भर के समाज को सकारात्मकता के साथ जोड़ता रहा जो स्क्रीन इस्तेमाल करने वाले के बगल में बैठे शख्स को भी नज़र आती थी. ज़्यादातर डेस्कटॉप कम्प्यूटर थे. इन कम्पूटरों के साथ समस्या यह थी कि अक्सर एक आदमी के इस्तेमाल करने के बाद कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले को भी पहले वाली गतिविधियां पता चल जाती थीं.

    पासवर्ड हर एक के पास नहीं होता था और तब जायज़ वजह से भी पासवर्ड क्रिएट करना या पूछना भी संदेह का कारण बन जाता था. लेकिन जब से स्मार्ट फोन की आसानी से उपलब्धता हुई और सोशल मीडिया प्लेटफार्म छोटी सी स्क्रीन पर भी छा गए तब से सोशल मीडिया ने ज्यादा खुद को अन सोशल बना लिया. छोटी स्क्रीन होने के कारण, दूसरों की नज़र उस पर नहीं पड़ती यानि आसानी से छिपाकर कोई नभी गतिविधि की जा सकती है. इसके साथ ही आधुनिक दौर में समाज में ‘प्राइवेसी’ नाम के शब्द ने ऐसी जगह बना ली कि ये लोकतांत्रिक व्यवस्था में मिले मौलिक अधिकार से भी ज़्यादा ‘पवित्र’ विचार बन गया. कारोबार वाली जगह से लेकर परिवार में भी इस विचार ने ऐसी पैठ बनाई कि एक ही बेडरूम शेयर करने वाले पति पत्नी भी मोबाइल फोन के इस्तेमाल के मामले में ‘प्राइवेसी’ के कारण तुनक मिजाज़ होने लगे.

    वैसे तो ये लोकतांत्रिक देश में मिले स्वतंत्रता से जीने और अभिव्यक्ति के अधिकार जैसे तोहफों का मामला है, लेकिन प्राइवेसी के नाम पर ऐसे-ऐसे टेक्स्ट और ऑडियो, वीडियो शेयर होने लगे जिनको सार्वजनिक रूप से या ज़िम्मेदारी लेकर साझा नहीं किया जा सकता. उस पर सोशल मीडिया पर नकली आईडी बना कर ‘कुछ भी और कभी भी’ साझा करने के बढ़े चलन ने तो हालात और खतरनाक बनाए. खैर जब तक ये कंटेंट व्यक्ति तक या छोटे से गुट तक सीमित रहे तो इसका इतना प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन जब ये काफी लोगों तक पहुंच जाएं तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है.

    सोशल मीडिया के इस असर को सबसे ज्यादा और पहले भुनाया प्रचार प्रसार के काम के ज़रिये रोज़ी रोटी चलाने वालों ने. कंटेंट लिखने से लेकर विज्ञापन बनाने वालों ने अपनी विधा से इसका इस्तेमाल उत्पादों को बेचने, बिकवाने के लिए किया. अपनी बात झट से पहुंचाने और फट से फैलाने वाले गुणों वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म (भारत के सन्दर्भ में फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सएप, यू-ट्यूब और इन्स्टाग्राम ख़ास हैं) कितने ही लोगों के लिए मददगार भी साबित हुए और एक बड़ी ज़रूरत बना लिए गए. वहीं , जहां तक मनोरंजन की बात है तो भी इसका इस्तेमाल कुछ हद तक समझ आता है, लेकिन जब कोई चीज़ जीवन के हरेक पहलू को प्रभावित करने लगे तो वो मानवीय चरित्र को भी बदलने लगती है.

    भारतीय समाज पर इसके लक्षण अब बहुत साफ़-साफ़ दिखाई देने लगे हैं. इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म कई व्यवस्थाओं के शानदार विकल्प बनके सामने आए. इस दौरान जबरदस्त तरीके से बढ़े इंटरनेट, आईटी, मोबाइल फोन के चलन के साथ सोशल मीडिया ईलाज करने और करवाने से लेकर, समाज सेवा, स्कूल कॉलेज की पढ़ाई तक में मददगार बना. एप्स के तौर पर कई नए उत्पाद आए, जिनके जरिए सरकारी बैठकों से लेकर, वेबिनार, कांफ्रेंस और यहां तक की दुख सुख को साझा करने के कार्यक्रम भी किये गए.

    इन सब में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म की भी अहम भूमिका रही, चाहे आपसी बातचीत का ऑडियो-वीडियो प्रसारित करना हो या उसकी पूर्व सूचना या रिकार्डेड संस्करण बाद में लोगों तक पहुंचाना हो. कोई शक नहीं कि मानव जाति के लिए खड़े हुए कोरोना के संकटकाल में सोशल मीडिया एक अवतार की तरह भी सामने आया और इसकी लोकप्रियता भी बड़ी. इस दौरान ऐसे बहुत से लोगों को सोशल मीडिया की खूबियां पता चलीं, जिन्होंने पहले इसका इस्तेमाल नहीं किया. यानि साथ ही इसके उपभोक्ताओं की तादाद भी ज़बरदस्त तरीके से बढ़ी. लेकिन इन तमाम खूबियों के कारण ही सोशल मीडिया तरह-तरह के खतरे भी बढ़ाता गया. भारतीय पर्यावरण में तो ये परिलक्षित हो गया है.

    दुनियाभर के देशों में भारत सबसे ज्यादा विविधता और विभिन्नताओं वाला देश है. अलग-अलग तरह के खान पान, रहन सहन, पहनावे, परम्पराएं, भाषाएं, बोलियां तो हैं ही, हर तरह की भौगोलिक परिस्थितियों में भी यहां की आबादी रहती है. ऐसे में सबकी ज़रूरतें भी अलग-अलग होना स्वाभाविक है. उस पर सैंकड़ों साल की गुलामी का असर, पूजा पाठ के अलग अलग तौर तरीके, विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े दलों का होना विचारों में टकराव और मत भेद तो पैदा करेगा ही. अभिव्यक्ति समेत विभिन्न प्रकार की आजादी के मौलिक अधिकारों का मिलना अक्सर इस टकराव को बढ़ावा भी देता है. लोग और विभिन्न संस्थाएं इसका बेजा इस्तेमाल भी करती हैं.

     

    सोशल मीडिया के ज़रिए कही जाने वाली कई बातें और उनकी प्रतिक्रिया ‘अपराध’ के तत्व से भरपूर भी होती हैं, लिहाज़ा ऐसे मामलों में पुलिस या कानून का पालन कराने वाली विभिन्न एजेंसियों की भूमिका सामने आती है. सोशल मीडिया के कंटेंट को लेकर आए दिन पुलिस में केस दर्ज होते हैं. यही नहीं इसमें भी पुलिस एजेंसियों पर पक्षपात या भेदभाव वाला रवैया अख्तियार करने को लेकर विवाद होने लगे हैं. ये सब सामाजिक सद्भाव, भाई चारे और आज़ाद लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कई अपरिपक्व टीवी चैनलों ने उत्तेजना फैलाकर हालात और बिगाड़े हैं. इसी साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और उसके बाद धार्मिक अवसरों पर हुई घटानाओं की जानकारी समाज में बड़ी कड़वाहट का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया ही है. कर्नाटक, यूपी, पंजाब से लेकर राजधानी दिल्ली समेत कई स्थानों पर इस सिलसिले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. ये सिलसिला अब भी चल रहा है. इन हालात ने पुलिस और अदालतों पर भी काम का बोझ बढ़ाया है.

    दुनियाभर में सबसे अधिक आबादी वाले देशों की फेहरिस्त में भारत नंबर 2 पर है, लेकिन सोशल मीडिया के मामले में सबसे आगे है. अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के ही अकेले यहां पर 40 करोड़ अकाउंट हैं, वहीं वाट्सऐप के तो तकरीबन 53 करोड़ खाते हैं, जबकि एक अन्य ऐप ट्वीटर के भारत में तकरीबन 23 करोड़ से ज्यादा अकाउंट हैं. भारत से खूब धन कमा रही इन ऐप्स की विश्वसनियता और अन्य गड़बड़ियों के कारण विवाद भी होते रहते हैं. कई देशों ने तो अपने यहां विभिन्न कारणों से ऐसी ऐप्स पर रोक भी लगा रखी है. गूगल की 2004 में लांच हुई ऑरकुट को लेकर कई केस और विवाद हुए. इस सोशल नेटवर्किंग सर्विस को खुद गूगल ने 10 साल में बंद कर दिया था. भारत समेत कई देशों ने भी बीच-बीच में इन पर रोक लगाई और हटाई है.

    ये तो व्यवस्था पर प्रभाव की बात है, लेकिन सोशल मीडिया का असर और भी खतरनाक हालात पैदा कर रहा है. हर उम्र , तबके और पेशे से जुड़ा आम व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सोशल मीडिया के असर में इस कदर आ रहा है कि इसने उसके रहन सहन, खान पान के तरीके से लेकर दूसरों के प्रति सोच तो बदली ही, अपने प्रति भी अजीब तरीके सोचने लगा है. अकेले होने पर ही किसी भी सार्वजनिक स्थल पर भी पहली फुर्सत में हर शख्स अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हुए दिखाई दे जाएगा. नहीं तो ईयर फोन या हेड फोन लगाए मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो में आंखें गड़ाए देखा जा सकता है. ये ज़्यादातर सोशल मीडिया पर चैट करते हुए, टेक्स्ट पढ़ रहे या वीडियो देख रहे मिलेंगे. रिश्तेदारों, दोस्तों के साथ सुख दुख साझा करने के लिए सामूहिक तौर पर भी मिलेंगे तो वहां भी नज़रें और उंगलियां मोबाइल स्क्रीन पर होंगी.

    शादी, समारोह, मेले या कहीं सैर सपाटे पर जाना हो तो ज़्यादातर की पहली प्राथमिकता मोबाइल से तस्वीरें, सेल्फी खींचना होती है. ताकि इस स्थान पर अपनी उपस्थिति को सोशल मीडिया पर दर्ज करा सकें. सोशल मीडिया पर अपनी तरफ ध्यान खींचने की इस कवायद में उस शख्स का उस स्थान पर आने का महत्व ही खत्म हो जाता है. इसका उसे अहसास भी नहीं होता. कुछ तो कार्यक्रमों में आते ही वीआईपी के साथ फोटो या सेल्फी लेने की फिराक में ही रहते हैं. और तो और धार्मिक स्थलों में पूजा पाठ से लेकर अंतिम संस्कार जैसे मौकों पर भी लोग बाग सोशल मीडिया के मोहपाश से अलग नहीं हो पाते. कुल मिलाकर ये आदत एक गंभीर खतरनाक नशा बन चुकी है. मां बाप अपने उस उम्र के नाबालिग बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट खोल कर देने लगे हैं, जिनमें अच्छे-बुरे की तो क्या, अपने बारे में भी ठीक से सोच पाने की ज़हनी ताकत पैदा नहीं हुई है. सोशल मीडिया पर आने वाला खराब कंटेंट इन बच्चों में स्वाभाविक रूप से उनकी संवेदनाओं को प्रभावित करके विकार भी बढ़ा रहा है.

     

    कुल मिलाकर ये भी कहा जा सकता है कि शो ऑफ़ यानि दिखावे की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया का असर ऐसे नशे में तब्दील हो रहा है, जिसकी चपेट में फंसते लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है. इस नशे का मज़ा लेने वाला शख्स इसे उन लोगों तक भी पहुंचा देता है, जिनको भले ही उसकी ज़रूरत न हो. कंटेंट शेयर करने वाला ये भी नहीं सोचता कि जो टेक्स्ट या वीडियो वो औरों के साथ साझा कर रहा है, वो सही भी है या नहीं. न ही ज्यादातर लोग उसके पीछे के तर्क का आंकलन कर पाते हैं. लोगों की इसी प्रवृत्ति का फायदा न सिर्फ विज्ञापन बनाने वाले उठाते हैं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक विचारधारा और पूजा पद्धति के विभिन्न तरीकों को धर्म मानने वाले लोग भी उठाते हैं. अब तो अपनी सोच को ही सही और सर्वश्रेष्ठ समझने वाले ऐसे लोगों के समूह अपने हिसाब से कंटेंट बनाने और बनवाने लगे हैं. इसके लिए बाकायदा उन्होंने टीमें बना रखी हैं. अपनी सोच दूसरों के जहन में ठूंसने के लिए लोगों को वेतन और भारी भरकम फीस देकर सेवा में रखा जाता है. यानि लोगों की सोचने समझने की ताकत को प्रदूषित और क्षीण करना ही नहीं इनका मकसद है ताकि अपने हित साधने में वो इसका इस्तेमाल कर सकें.

  • क्या होगी 5G सर्विस की कीमत, क्या लेना होगा नया 5G SIM कार्ड, जानें सबकुछ….

    क्या होगी 5G सर्विस की कीमत, क्या लेना होगा नया 5G SIM कार्ड, जानें सबकुछ….

    इंटरनेट स्पीड को लेकर आने वाला समय जबरदस्त होने वाला है। भारत में 5G Service तकनीक को लेकर जोर-शोर से काम चल रहा है। बीते 26 जुलाई से 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी भी शुरू हो चुकी है। इस नीलामी में भारत की जानी-मानी कंपनियां हिस्सा ले रहीं हैं, जिसमें Reliance Jio, Airtel, Vodafone Idea, Adani Data Network प्रमुख तौर पर शामिल है। बताया जा रहा है कि आने वाले सितंबर- अक्टूबर महीने में 5G सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी यानी कि भारत में 5G अब दूर नहीं है, वहीं सभी लोग इस बात पर गौर कर रहे हैं कि यह सेवाएं यूजर्स को कितने रुपये में मिलेंगी। क्या यह सेवा 4जी सेवाओं के बराबर होगी या फिर इसके लिए ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा। साथ ही, इसके लिए नई 5G Sim लेनी होगी या फिर यह सेवा पुरानी सिम में ही चल पाएगी। आज हम आपको इस पोस्ट में इन सभी बातों के बारे में विस्तार से जानकारी बताने वाले हैं।

    5G SIM कार्ड के बारे में जानें

    5जी की शुरुआत होने से पहले आपको बता दें कि 5G सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए आपको नई सिम लेनी होगी या नहीं यह आपके टेलीकॉम ऑपरेटर पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, मोबाइल के सिम में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होता है। जिसमें सिर्फ एक यूनिक आईडी की मदद से आपके नंबर पर प्लान एक्टिवेट किया जाता है। इसके बारे में यह भी कहा जा रहा है कि आपको आपकी 4G सिम में ही 5जी सर्विस इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा यानी कि आप अपने 4G सिम की मदद से ही 5जी सर्विस का इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि इसके लिए आपको 5G डिवाइस यानी 5G Smartphone की जरूरत जरूर होगी। वहीं अगर यूजर्स नया 5G सिम कार्ड खरीदेंगे, तो एक बात साफ है कि 5G सिम का साइज और शेप बिल्कुल पुरानी 4G सिम की तरह होगा। इसमें कोई बदलाव की बात सामने नहीं आई है।

    कितने में मिलेगी 5G सेवा

    भारत में 5G सेवा सितंबर या अक्टूबर के महीने में शुरू की जा सकती है। यह सेवाएं भारत के प्रमुख शहरों में शुरू होंगी। सबसे बड़ा सवाल यह आ रहा है कि इन सेवाओं के लिए कितना शुल्क देना होगा। क्या यह 4जी सेवाओं की तरह होगा या फिर 5जी के लिए ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा। इस सवाल के लिए आपको बता दें कि सभी टेलीकॉम कंपनियां 5G सेवाओं के लिए 4G से थोड़ा ज्यादा पैसा वसूल करेंगी। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 5G प्लान 4G प्लान से 10 से 12 गुना महंगे होंगे। जिसका कारण यह है कि टेलीकॉम कंपनियां कीमत बढ़ाकर एवरेज रेवेन्यू पर यूजर यानी अपना मुनाफा बढ़ाने की सोच रही है। हालांकि कीमत बढ़ने के साथ-साथ ग्राहकों को 4G के मुकाबले 10 गुना तेज स्पीड भी मिलेगी। उदाहरण के रूप में समझा जाए तो अगर यूजर किसी फिल्म को डाउनलोड करना चाहें, तो 5G स्पीड से कुछ सेकंड में ही फिल्म आसानी से डाउनलोड हो जाएगी।

    बताते चलें कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी प्रक्रिया फिलहाल जारी है। इस नीलामी में 4.3 लाख करोड़ रुपये की नीलामी होने वाली है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ महीनों में आने वाला भविष्य 5G सेवाओं से भरपूर होगा।

  • 1 अगस्त से नहीं मिलेगी हरे रंग की बोतल, जानें क्यों गायब होने वाला है 61 साल पुराना रंग

    1 अगस्त से नहीं मिलेगी हरे रंग की बोतल, जानें क्यों गायब होने वाला है 61 साल पुराना रंग

    पॉपुलर सॉफ्ट ड्रिंक स्प्राइट के शौकीनों के लिए खास खबर सामने आ रही है जहां पर हरे रंग की आपकी पहले वाली बोतल अब आपको नहीं मिलेगी, जी हां जल्द ही 1 अगस्त से ये अपने रंग में आ जाएगी जहां पर हरे रंग की बजाय सफेद रंग या ट्रांसपेरेंट बोतलों में बेचने का फैसला किया है। बताते चलें कि, कंपनी ने यह फैसला 61 साल बाद लिया है।

    जानें क्या है कोका कोला कंपनी का फैसला

    आपको बताते चलें कि, इस सबसे पॉपुलर सॉफ्ट ड्रिंक को कोका कोला कंपनी ने 1961 में पहली बार अमेरिका में लॉन्च किया था जिस समय ये हरे रंग में मिलती थी जिसमें अब बदलाव किया जा रहा है जिसके बदले रंग से हरा रंग गायब होने वाला है। यहां पर कोका कोला ने 27 जुलाई को जारी अपने एक बयान में घोषणा की थी कि, 1 अगस्त से स्प्राइट को हरे रंग की बोतल में नहीं बेचेगी। जिसे लेकर कारण बताया कि, उसका ये कदम पर्यावरण के प्रति ज्यादा जिम्मेदार बनने के उसके प्रयासों का हिस्सा है। यहां पर यह फैसला केवल स्प्राइट ही नहीं अन्य ड्रिंकिंग प्रोडक्ट्स को भी क्लियर बोतल में पेश करेगी, जो हरे रंग की बोतल में आते हैं। इनमें फ्रेसका, सीग्राम्स और मेलो यलो शामिल है। वही पर 2022 के फैसले से पहले ही नया बदलाव पहले भी हो चुका है जहां पर 2019 में ही यूरोपीय देशों और कुछ साउथ एशियाई देशों में स्प्राइट की हरे रंग की बोतल की जगह ट्रांसपेरेंट बोतलों का इस्तेमाल किया गया था।

    हर घर ब्रैंड बन गया था हरा कलर

    आपको बताते चलें कि, सन् 1961 में इस पॉपुलर ड्रिंक्स के लॉन्च होने के बाद उस समय ये ब्रांड हर लोगों की पसंद और हर घर की पहचान बन चुका था। जहां पर धीरे-धीरे भारत समेत दुनिया भर में हरे रंग की बोतलों को क्लियर बोतल से रिप्लेस करने की तैयारी हो चुकी है। जैसा कि, आप जानते है स्प्राइट कोका कोला का ब्रांड है तो वही पर तीसरी सबसे ज्यादा और कोक के बाद कोका कोला का दूसरा सबसे ज्यादा बिकने वाली सॉफ्ट ड्रिंक कहलाता है।

  • सीएम के दौरे से पहले अधिकारियों का वीडियो हुआ वायरल, कार्यक्रम को बताया prescripted, प्रशासन ने कहा – उन्हें दिया जा रहा …

    सीएम के दौरे से पहले अधिकारियों का वीडियो हुआ वायरल, कार्यक्रम को बताया prescripted, प्रशासन ने कहा – उन्हें दिया जा रहा …

    रायगढ़। छत्तीसगढ सीएम भूपेश बघेल के रायगढ़ दौरे से पूर्व एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में अधिकारी आमजनता को मुख्यमंत्री से मिलने के पूर्व बात कैसे करनी है इसकी तैयारी करवा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि भेंट मुलाकात कार्यक्रम में आने वाले सभी लोग और सवाल क्या पहले  से तय होते हैं।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  लगातार छत्तीसगढ़ के  विधानसभाओं  में दौरा कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने रायगढ़ विधानसभा के दो गांवों में जाकर भेंट मुलाकात कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस बार वे दोबारा रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा में दौरे पर आ रहे हैं। आज दोपहर दो बजे वे लैलूंगा पहुंच जाएंगे। लैलूंगा में वे शाम तक रहने वाले हैं। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हो रहा है। जिस वीडियो में लैलूंगा जनपद के सीईओ ग्रामीणों से सवाल जवाब करते नजर आ रहे हैं। भेंट मुलाकात कार्यक्रम में वे मुख्यमंत्री से कैसे बात करेंगे इसकी बकायदा कोचिंग क्लास ली जा रही है। मुनादी की टीम ने भेंट मुलाकात कार्यक्रम में जाकर अनुभव लिए हैं। हम आपके साथ अपना अनुभव बांट रहे हैं।

    लोगों के व्यवहार की ट्रेनिंग या कुछ और

    रायगढ़ में कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दौरा किया था। ये बात सही है की अफसर पहले से तैयारी करते हैं। लोइंग के कार्यक्रम में कुछ चुनिंदा लोगों को कॉलर माइक भी पहनाई गई थी।  लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे सवाल नहीं किया वे सीधे अपने मनमुताबिक किसी को भी भीड़ से उठाकर सवाल कर रहे थे। हां ये बात अलग है अफसर माइक को अपने अनुसार घुमाने की कोशिश करते हैं।

    जिला प्रशासन ने दिया स्पष्टीकरण

    सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को अपने मन की बात पूरी कहने की ट्रेनिंग देने की बात कही और इसपर चल रही खबरों को भ्रामक बताया।