मुंगेली। नगरीय निकाय चुनाव में घोषित प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी ने कार्रवाई करते हुए 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
मुंगेली जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्रिय ने मुंगेली नगर पालिकासे गांधी वार्ड से चुनाव लड़ रहे गौरव जैन और सुभाष वार्ड से चुनाव लड़ रहे असलम खान के निष्कासन की कार्रवाई की है. इसके अलावा लोरमी नगर पंचायत से कमल साहू, त्रिभुवन यादव, धनेंद्र राजपूत, चंद्रप्रकाश सेन, शुभम केशरवानी, सरिताथान बघेल, पथरिया नगर पंचायत से सुखराम गोड़, रविंद्र गेंदले, सुखदेव साहू, सरगांव नगर पंचायत सतीश साहू, दुखहरण साहू, निरंजन साहू, भुनेश्वरी साहू, रिजवान खान, राधेश्याम मार्कण्डेय पर भी कार्रवाई की गई है.
रायपुर। रेप की बढ़ती घटनाओं के बीच भूपेश सरकार के मंत्री ताम्रध्वज साहू का संस्कारी उपदेश जरा सुनिए. मंत्री कह रहे हैं कि अगर लड़के घर में रहने लग जाएं, तो लड़कियां रातभर घूमेंगी. इससे वह सुरक्षित रहेंगी. संस्कार देने की जरूरत लड़कों को है. यदि लड़की देर रात घर आती है, तो उसे सब डांटते हैं, वहीं जब लड़का बाहर रहता है, कोई सवाल नहीं उठाता. लिहाजा सुधार की जरूरत लड़कों को है. मंत्री के इस बयान के मायने आप खुद ढूंढिए इस सवाल के साथ की लड़कियों को सुरक्षित रखने के उनके इस नजरिए से आप कितने सहमत हैं? आप को यहां बताते चले कि मंत्री ताम्रध्वज साहू सूबे के गृहमंत्री हैं. लाॅ एंड आर्डर की बड़ी जिम्मेदारी उनके मजबूत कंधों पर ही है।गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर राजभवन के दरबार हाल में आयोजित सबका विकास राष्ट्रीय सम्मेलन में यह संस्कारी उपदेश दिया है. इस सम्मेलन का उद्देश्य महात्मा गांधी की शिक्षा लोगों तक पहुंचाना है. सम्मेलन के दौरान अपने भाषण में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि ऐसे आयोजन से राष्ट्र को नई दिशा मिलेगी।
गृहमंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि वर्तमान में 21वीं सदी का स्वरूप हमारे संस्कृति के लिए घातक साबित हो रहा है. उदाहरण के रूप में देख लीजिए फटा जीन्स मार्केट में आ जाता है, उसे दूसरे दिन हम सब उसको अपना लेते हैं. संस्कार के बिना धर्म संस्कृति की सुधार नहीं किया जा सकता. वर्तमान शिक्षा पद्धति सिर्फ़ डिग्री दे रही है. नौकरी योग्य बना रही, न कि ज्ञानवान. संस्कार बिना आप कलेक्टर, मंत्री, मुख्यमंत्री बन जाओ, बिना संस्कार यह सब व्यर्थ है. महंगे स्कूलों में शिक्षा देने से ज्यादा संस्कार देने की जरूरत है.शांति दूत आचार्य लोकेश जी ने कहा कि देश से विश्व से हिंसा को भगाना है शांति राष्ट्रीय का निर्माण है तो यह गांधी शिक्षा उनके विचार से संभव है. राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि संगोष्ठी के माध्यम से समाज को नई दिशा देने कोशिश है. मेरा सौभाग्य है कि मैं एसे कार्यक्रम में शामिल हूं. जिस इंसान अपने मानवीय संवेदना लेकर समाज देश के लिए काम करता है, चाहे कोई भी काम करता है, वो इतिहास बनाता है।
राज्यपाल ने कहा कि जब से मैं राजभवन आई हूं, सभी लोगों के लिए दरवाजे खोल रखी हूं. लोगों में मन में ये भावना थी कि राज्यपाल से नहीं मिला जा सकता, लेकिन आज हर व्यक्ति राजभवन आ रहा है. तभी मुझे पता चला कि यहां के लोग सरल सीधे है. मानवीय संवेदना है. उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचार बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली हैं, अहिंसा के राह पर चलकर देश को आजाद कराया. इस प्रयास से देश अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त करेगा।
रायपुर। नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को समझाने के लिए भारतीय जनता पार्टी अगले 10 दिन तक व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसके लिए बीजेपी घर-घर जाएगी और लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में बताएगी।
बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी के नेता नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए 250 प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। साथ ही हर जिले में नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में रैली और कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
दिल्ली। इस समय देश में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है. लेकिन आमतौर पर किसी को घबराने की जरूरत नहीं है. कई ऐसे दस्तावेज हैं, जो या तो आपके पास होंगे या आसानी से मिल सकते हैं, जो आपकी इस देश में नागरिकता को पुख्ता करते हैं।
सरकार द्वारा सिटीजनशिप एमेंडमेंट एक्ट (Citizenship Amendment Act) बनने के बाद अब देशभर मेंं नागरिकता को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत सरकार के सभी मंत्रियों ने नागरिकता कानून और एनआरसी से नहीं घबराने की सलाह दी है. आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर आपके पास ये नौ आसान दस्तावेज होंगे तो यकीनन आप भारत के नागरिक हैं और आपका नाम NRC (The National Register of Citizens) यानि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में होगा।
इस समय नागरिकता का सवाल पूरे देश में उठाया जा रहा है कि अगर कल को अगर नागरिकता का सबूत देना पड़े तो कैसे देंगे. वास्तव में ये दस्तावेज आसान दस्तावेज हैं, लिहाजा जो भी भारत में पैदा हुआ है और यहां रह रहा है, उसके पास इनमें से कोई ना कोई दस्तावेज भी जरूर होगा.संविधान में विभिन्न अनुच्छेदों के जरिए नागरिकता को पारिभाषित किया गया है. इन अनुच्छेदों में वक्त-वक्त पर संशोधन भी हुए हैं. संविधान का अनुच्छेद 5 से लेकर 11 तक नागरिकता को पारिभाषित करता है. इसमें अनुच्छेद 5 से लेकर 10 तक नागरिकता की पात्रता के बारे में बताता है, वहीं अनुच्छेद 11 में नागरिकता के मसले पर संसद को कानून बनाने का अधिकार देता है.नागरिकता को लेकर 1955 में सिटीजनशिप एक्ट पास हुआ. एक्ट में अब तक चार बार 1986, 2003, 2005 और 2015 में संशोधन हो चुके हैं.संविधान में भारतीय नागरिकता को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश हैंइसके अनुसार अगर ये दस्तावेज आपके पास होंगे तो आप इस सूची में शामिल हो सकते हैं.1) जमीन के दस्तावेज जैसे- बैनामा, भूमि के मालिकाना हक का दस्तावेज.2) राज्य के बाहर से जारी किया गया स्थायी निवास प्रमाणपत्र.3) भारत सरकार की ओर से जारी पासपोर्ट.4) किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस/प्रमाणपत्र.5) सरकार या सरकारी उपक्रम के तहत सेवा या नियुक्ति को प्रमाणित करने वाला दस्तावेज.6) बैंक/डाक घर में खाता.7) सक्षम प्राधिकार की ओर से जारी किया गया जन्म प्रमाणपत्र.8) बोर्ड/विश्वविद्यालयों द्वारा जारी शिक्षण प्रमाणपत्र.9) न्यायिक या राजस्व अदालत की सुनवाई से जुड़ा दस्तावेज.कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं?संविधान में भारतीय नागरिक को स्पष्ट तौर पर पारिभाषित किया गया है।
संविधान का अनुच्छेद 5 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति भारत में जन्म लेता है और उसके मां-बाप दोनों या दोनों में से कोई एक भारत में जन्मा हो तो वो भारत का नागरिक होगा. भारत में संविधान लागू होने के 5 साल पहले यानी 1945 के पहले से रह रहा हर व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा.हालांकि जब असम में NRC प्रक्रिया को लागू किया तो उसमें ये माना गया कि वो शख्स NRC के तहत, भारत का नागरिक होने के योग्य है, जो साबित करते हैं कि या तो वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में थे. ये प्रक्रिया बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर करने के लिए शुरू की गई थी. बता दें कि 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था.नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद ये चर्चा काफी ज्यादा है कि अब देशभर में एनआरसी लागू होगा. हालांकि भारत में पैदा हुए या लंबे समय से रह रहे लोगों के लिए इसमें घबराने की कोई बात नहीं हैअगर कोई भारत में नहीं भी जन्मा हो, लेकिन वो यहां रह रहा हो और उसके मां-बाप में से कोई एक भारत में पैदा हुए हो तो वो भारत का नागरिक माना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति यहां पांच साल तक रह चुका हो तो वो भारत की नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकता है।
संविधान का अनुच्छेद 6संविधान का अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से भारत आए लोगों की नागरिकता को पारिभाषित करता है. इसके मुताबिक 19 जुलाई 1949 से पहले पाकिस्तान से भारत आए लोग भारत के नागरिक माने जाएंगे. इस तारीख के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को नागरिकता हासिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. दोनों परिस्थितियों में व्यक्ति के मां-बाप या दादा-दादी का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
संविधान का अनुच्छेद 7संविधान का अनुच्छेद 7 पाकिस्तान जाकर वापस लौटने वाले लोगों के लिए है. इसके मुताबिक 1 मार्च 1947 के बाद अगर कोई व्यक्ति पाकिस्तान चला गया, लेकिन रिसेटेलमेंट परमिट के साथ तुरंत वापस लौट गया हो वो भी भारत की नागरिकता हासिल करने का पात्र है. ऐसे लोगों को 6 महीने तक यहां रहकर नागरिकता के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. ऐसे लोगों पर 19 जुलाई 1949 के बाद आए लोगों के लिए बने नियम लागू होंगे.एनआरसी में वो सभी लोग पात्र हैं जो या तो भारत में पैदा हुए, या 1949 के बाद भारत आए या फिर वो लोग, जिन्होंने देश की नागरिकता हासिल कर ली हो।
संविधान का अनुच्छेद 8संविधान का अनुच्छेद 8 विदेशों में रह रहे भारतीयों की नागरिकता को लेकर है. इसके मुताबिक विदेश में पैदा हुए बच्चे को भी भारतीय नागरिक माना जाएगा अगर उसके मां-बाप या दादा-दादी में से से कोई एक भारतीय नागरिक हो. ऐसे बच्चे को नागरिकता हासिल करने के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क कर पंजीकरण करवाना होगा।
संविधान का अनुच्छेद 9संविधान का अनुच्छेद 9 भारत की एकल नागरिकता को लेकर है. इसके मुताबिक अगर कोई भारतीय नागरिक किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाएगी।
संविधान का अनुच्छेद 10संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता को लेकर संसद को अधिकार देता है. इसके मुताबिक अनुच्छेद 5 से लेकर 9 तक के नियमों का पालन करने वाले भारतीय नागरिक होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार के पास नागरिकता को लेकर नियम बनाने का अधिकार होगा. सरकार नागरिकता को लेकर जो नियम बनाएगी उसके आधार पर किसी को नागरिकता दी जा सकेगी।
संविधान का अनुच्छेद 11संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने का अधिकार देता है. इस अनुच्छेद के मुताबिक किसी को नागरिकता देना या उसकी नागरिकता खत्म करने संबंधी कानून बनाने का अधिकार भारत की संसद के पास है।
दिल्ली। नागरिकता कानून को लेकर पूरे देश में बवाल चरम पर है. लाखों करोड़ों रुपयों की संपत्ति इस बवाल की भेंट चढ़ गई है. अब सरकार एक दूसरा शिगूफा छोड़ने जा रही है।
को लेकर सफाई देती फिर रही है लेकिन लोग उसे मानने के लिए कतई तैयार नहीं हैं. अब मोदी सरकार देशव्यापी एनआरसी के बाद पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने की योजना में जुट गई है।
मोदी सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम सरकार का कहना है कि वो पूरे देश के लिए सिर्फ एक पहचान पत्र बनाएगी. जो कि पूरे देश में काम करेगा और वो कई सारे डाक्यूमेंट्स को वैरिफाई करने के बाद जारी किया जाएगा. उसके न होने की दशा में लोगों के सामने पहचान का संकट भी खड़ा हो जाएगा. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने गुपचुप तरीके से इसपर काम शुरु कर दिया है. सरकार का अगला कदम यही होगा. उधर जानकारों का कहना है कि सरकार के इस कदम से एक और बवाल की भूमिका तैय्यार हो गई है।
दिल्ली। एनआरसी और कैब को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुए। वहीं मुस्लिम समाज के अलावा छात्र छात्राओं, हिन्दू समाज और कई अधिवक्ता संगठन भी विरोध करने सड़कों पर उतर आए हैं, दिनों दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं और देश के कई सामाजिक संगठन भी विरोध दर्शाने सामने आते जा रहे हैं, साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर हो रही है। इसके चलते ही केंद्रीय सरकार ने इसमें संशोधन करने एवं कई अन्य सुझावों को शामिल करने के लिए तैयार हो गया है। लेकिन विरोध प्रदर्शन कम होने की बजाए और अधिक बढ़ता जा रहा है, आज दिन में देश भर में हुए प्रदर्शन ने केंद्रीय सरकार को भयभीत कर दिया जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हालात को काबू में करने के लिए नया बयान दिया है, जोकि राहत भरा है। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर गृह मंत्रालय की ओर से को बयान आया।
मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत में जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ या जिनके माता-पिता 1987 से पहले जन्मे हैं, वे कानूनन भारतीय नागरिक हैं। नागरिकता कानून 2019 के कारण या देशभर में एनआरसी लागू होने पर उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।’’नागरिकता जन्म तिथि या जन्म स्थान से साबित की जा सकेगी –उन्होंने कहा, ‘‘भारत की नागरिकता जन्मतिथि या जन्मस्थान या दोनों से संबंधित कोई भी दस्तावेज देकर साबित की जा सकती है। आने वाले समय में गृह मंत्रालय नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए काम कर रहा है।’’एक सूची में कई आम दस्तावेज शामिल करने की संभावना –अधिकारी ने कहा, ‘‘भारतीय नागरिकों को माता-पिता या दादा-दादी के जन्म प्रमाणपत्र जैसे 1971 के पहले के दस्तावेजों से विरासत साबित नहीं करनी होगी। एक सूची में कई आम दस्तावेजों को शामिल करने की संभावना है, ताकि यह तय किया जा सके कि कोई भी भारतीय नागरिक बेवजह परेशान न हो।’’
असम का मामला अलग है –नागरिकता कानून के 2004 के संशोधनों के मुताबिक, असम में रहने वालों को छोड़कर देश के बाकी हिस्से में रहने वाले ऐसे लोग जिनके माता या पिता भारतीय नागरिक हैं, लेकिन अवैध प्रवासी नहीं हैं, उन्हें भी भारतीय नागरिक ही माना जाएगा। असम के मामले में भारतीय नागरिक होने की पहचान के लिए 1971 को आधार वर्ष बनाया गया है।
खरसिया। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के लिए शनिवार को सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हो चुका था। मतदान शुरू होने से पहले ही मतदाताओं की लंबी कतार लग गई थी। प्रदेश के 10 नगर निगमों, 38 नगर पालिकाओं और 103 नगर पंचायतों के 2840 वार्डों में पार्षद के लिए चुनाव आज संपन्न हुए हैं।
वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी लाइन में लग कर मतदान किया गया। कुछ एक मतदान केंद्रों में विवाद की स्थिति भी निर्मित होने की खबर आई परन्तु विवाद की स्थितियों से निपटने प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद थी।
मतदाताओं ने शाम 5 बजे तक वोट डाला। मतदान को लेकर सुबह से ही लोगों में काफी उत्साह देखा गया। लोग अपने पूरे परिवार के साथ मतदान करने पहुंचे। और ज्यादातर लोगों के द्वारा अपनी फोटोज सोशल मीडिया पर डाली गयीं।
बुजुर्गों में भी दिखा मतदान के लिए उत्साह
खरसिया नगर क्षेत्र की 88 वर्षीय मतदाता श्रीमती नान्ही देवी सपोसवाल ने मतदान कर लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लिया।
गरियाबंद। जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के सेंदर पंचायत में 1 करोड़ 65 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होना था, लेकिन इससे पहले एसडीएम ने शिलालेख को जब्त कर लिया. जबकि इस कार्यक्रम के मुख्य तिथि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह थे. इस कार्रवाई को रमन सिंह ने ओछी मानसिकता का परिचायक बताया है. उन्होंने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज कराएंगे।
सेंदर पंचायत के सरपंच रामाधार साहू के नेतृत्व में पंचायत में हुए 165 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से कराया जाना था. आयोजन शाम 4 बजे थी. अतिथियों के आने से पहले गरियबंद एसडीएम जीडी वाहिले वहां पहुंच कर सभी शिलालेखों को उठाकर अपने साथ तहसील मूख्य्यालय ले आए. तहसील कार्यालय में शिलालेखों को बंद कमरे में रखा गया. अचानक हुए इस कार्यवाही के बाद ग्रामीणों ने जमकर हंगामा मचाया. हालांकि तय समय पर अतिथियों के आते ही उनका गुस्सा शांत हो गया।
रामाधार साहू के नेतृत्व में 200 ग्रामीणों ने बीजेपी प्रवेश कर इस हरकत का राजनीतिक जवाब दिया है. पूरे आयोजन में इस प्रशासनिक हरकत की चर्चा जम कर होती रही. आयोजन के समाप्ति के बाद रमन सिंह ने कहा कि यह ओछी मानसिकता का परिचायक है. इस तरह के हरकत अशोभनीय है. मामले में एफआईआर करवाई जाएगी।
बता दें कि इस मामले में जिले के आला अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया
हाई कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में संज्ञान लेने से भ्रष्ट शासकीय सेवकों में हड़कंप
बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच को लेकर हाईकोर्ट में लगी याचिका पर संज्ञान लेने के बाद तात्कालिक सीएचएमओ व स्वास्थ्य विभाग की कद्दावर अफसर मधुलिका सिंह को बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय में दवा खरीदी, भर्ती, सहित अन्य मामलों में ढाई करोड़ के घोटाले में लिप्त होना पाए जाने के बाद बुधवार को प्रार्थी पक्ष और एडवोकेट द्वारा सरकंडा थाना पहुंच आरोपित पूर्व सीएमएचओ डॉ मधुलिका सिंह के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई गई। मामले में सरकंडा थाना टी आई द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर शिकायत दर्ज कर ली गई है।
उक्त मामले में चीफ जस्टिस पीआर राम चंद्र मैनन वह जस्टिस पीपी साहू के युगल पीठ में सुनवाई हुई थी, कोर्ट ने इस मामले से संबंधित दस्तावेज पुलिस महकमे के आला अफसरों आईजी और एसपी को देने कहा गया था। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया है कि राज्य शासन भी इस मामले में दोषी के खिलाफ विभागीय जांच, वसूली व अन्य कार्रवाई करें। इसके अलावा याचिकाकर्ता को अपराधिक और सर्विस मेटर दायर करने की भी छूट हाईकोर्ट ने दी है।
यह है मामला
बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय की तत्कालीन सीएमएचओ मधुलिका सिंह के ऊपर 4 करोड़ 90 लाख का घोटाला करने का आरोप था, जिसमें 6.9.2019 को याचिकाकर्ता एस संतोष कुमार और दिलीप यादव द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी, जिसमें डॉक्टर मधुलिका सिंह पर दवा खरीदी, मितानिनों की नियुक्ति समेत बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने का आरोप था।
हाईकोर्ट में ढाई करोड़ का घोटाला हुआ सिद्ध
बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय में हुए घोटाले को लेकर दायर याचिका में योगेश्वर शर्मा ने याचिकाकर्ता के पक्ष से पैरवी की जिसमें तत्कालीन सीएमएचओ मधुलिका सिंह दवा खरीदने, मितानिनों की नियुक्ति करने सहित अन्य कामों में 4.90 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप था। जिसमें हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान ढाई करोड़ का घोटाला सिद्ध होना पाया। साथ ही कोर्ट में यह भी बताया गया कि वह कई सालों से यहां 2-2 पदों में पदस्थ रही है।
उल्लेखनीय है कि शासकीय विभागों में कथित अफसरों द्वारा धड़ल्ले से शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर करोड़ों की लूट की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, सहित अन्य शासकीय विभागों में शासकीय राशि की बंदरबांट सुनियोजित तरीके से की जा रही है। शिष्टाचार का रूप ले चुके भ्रष्टाचार की जड़े शासकीय विभागों में काफी गहरी जम चुकी है, अनेकों शिकायतों के बाद भी वक्त पर कार्यवाही के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ते रहे हैं।
बहरहाल हाई कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में संज्ञान लेने से भ्रष्ट शासकीय सेवकों में हड़कंप मच गया है।
सरिया। नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 06 के कांग्रेस पार्षद प्रत्याशी नेम चंद अग्रवाल की चुनाव प्रचार के दौरान अचानक तबियत बिगड़ने से परिजनों सहित इनके चाहने वालो में मायूसी छा गई है, अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाने वाले नेम चंद इस बार कुछ नए सबसे अलग एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में उतरे है। नेमचंद अग्रवाल का सपना है कि वे अपने वार्ड सहित पूरे नगर पंचायत में हर वो सुविधा चाहते है जिसकी हम कल्पना भी नही कर सकते। अपने वार्डवासियो के लिए नेमचंद स्वच्छ, सुंदर, विकसित और व्यवस्थित हो शहर अपना का नारा है उनका और उनकी ये सोच सहित संकल्प अपने आप मे नई बात है।
जानकारी के मुताबिक नेमीचंद अग्रवाल सम्भवतः आज स्वस्थ्य होकर वापिस मोर्चा संभाल सकते है उन्होंने मीडिया से होस्पिटलाइज होने के दौरान कहा है कि जल्द ही चुनाव मैदान में फिर से वापसी करेंगे और जनता से समर्थन मांगेगे।