Author: Sunil Agrawal

  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदेश में रेस्टोरेंट और कैफे  हुक्का बार के संचालन पर लगाई रोक….

    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदेश में रेस्टोरेंट और कैफे  हुक्का बार के संचालन पर लगाई रोक….

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश में हुक्का बार पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह किसी भी रेस्टोरेंट व कैफे में हुक्का बार चलाने की अनुमति न दी जाए. साथ ही उनसे 30 सितंबर तक इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश की प्रति मुख्य सचिव व प्रदेश के सभी डीएम को अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि छात्र हरगोविंद पांडेय के पत्र पर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट ने अधिवक्ता विनायक मित्तल को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है. कोरोना संक्रमितों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है.हाईकोर्ट ने इसके फैलाव को रोकने के लिए मुख्य सचिव को रोड मैप तैयार करने का निर्देश दिया है और टिप्पणी भी की कि बिना लॉकडाउन के कोई मदद नहीं मिलने वाली।

    कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन के बावजूद कोरोना जंगल की आग की तरह फैलता जा रहा है. यह मानव जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है. हम घने अंधेरे जंगल के बीच खड़े हैं. कल क्या होगा, इसका पता नहीं है. यदि रेस्टोरेंट व कैफे में हुक्का बार पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो यह सामुदायिक संक्रमण का रूप ले लेगा.विधि छात्र ने अधिकारियों को पत्र लिखा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. कोर्ट ने भी मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए, लेकिन कोई जवाब नहीं दाखिल किया गया. इस पर कोर्ट ने हुक्का बार की अनुमति न देने का समादेश जारी कर इसका पालन करने का निर्देश दिया है।

  • नान घोटाले के आरोपी अनिल टुटेजा को लगा सुप्रीम कोर्ट से झटका

    नान घोटाले के आरोपी अनिल टुटेजा को लगा सुप्रीम कोर्ट से झटका

     दिल्ली। नाना घोटाले के मुख्य आरोपीयों के ऊपर सरकारी गवाह बने गिरीश शार्मा ने सुप्रीम कोर्ट में गवाहों को डराने-धमकाने को लेकर एक याचिका लगाया है ,जिसकी सुनवाई करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ शासन , एस आई टी , अनिल टूटेजा , आलोक शुक्ला व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

  • रायपुर में दो व्यक्तियों ने कोरोना संक्रमित होने के बावजूद जिला-प्रशासन को किया भ्रमित…देते रहे झूठी जानकारी, FIR दर्ज

    रायपुर में दो व्यक्तियों ने कोरोना संक्रमित होने के बावजूद जिला-प्रशासन को किया भ्रमित…देते रहे झूठी जानकारी, FIR दर्ज

    रायपुर। कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने कोरोना वायरस संकमण के नियंत्रण और रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि, वर्तमान में जिले में कोरोना पॉजिटिव प्रकरणों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।  रोकथाम और नियंत्रण में रखने के लिए सभी संबंधित उपाय अमल में लाया जाना उचित और आवश्यक हो गया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के उल्लंघन करने पर एपीडेमिक डिसीज एक्ट और विधि अनुकुल नियमानुसार अन्य धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश के पालन में मंगलवार को जोन 5 के इंसिडेंट कमांडर संदीप अग्रवाल ने दो व्यक्तियों के विरुद्ध एपेडेमीक एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है। पहली फुटबाल हाउस के पास सुंदर नगर निवासी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कराई गई है। व्यक्ति की 18 अगस्त को रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसी तरह न्यू चंगोराभाठा गिट्टी खदान के पास निवासी व्यक्ति 21 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव  मिला था। दोनों से निरंतर संपर्क कर हॉस्पटिल में भर्ती होने कहा गया था, परंतु वे शासन के आदेश की अवहेलना करते हुए अपना पता छुपा कर मोबाइल में झूठी जानकारी देते रहे। प्रशासन की ओर से उनके निवास पर होम आईसोलेशन का स्टीकर और रिबन भी लगाया गया था। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को निर्देश दिए जाने के बाद भी प्रशासन का सहयोग ना करने और संक्रमण फैलाने का कार्य किया जा रहा है। इन दोनों मामले में  एपिडेमिक एक्ट का उलंघन कर जानबूझकर संक्रामक बीमारी फैलाने के अपराध में धारा 188, 269, 270 आईपीसी के तहत अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ACB की रेड…पूर्व निदेशक इंश्योरेंस मेडिकल सर्विसेज के ठिकानों से 4.47 करोड़ रुपये बरामद….

    ACB की रेड…पूर्व निदेशक इंश्योरेंस मेडिकल सर्विसेज के ठिकानों से 4.47 करोड़ रुपये बरामद….

    हैदराबाद। तेलंगाना के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूर्व निदेशक इंश्योरेंस मेडिकल सर्विसेज (आईएमसी) देविका रानी और उनकी सहयोगी नागा लक्ष्मी से बेहिसाब नकदी में 4.47 करोड़ रुपये जब्त किए हैं। हैदराबाद में एक रियल एस्टेट कंपनी से आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच के दौरान पैसे जब्त किए गए थे। एंटी-ग्राफ्ट एजेंसी ने कहा कि पैसा यहां साइबराबाद क्षेत्र में वाणिज्यिक और आवासीय स्थान खरीदने के लिए निवेश किया गया था। देविका रानी, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी मेडिकल बिल के माध्यम से 9 करोड़ रुपये की सरकार को धोखा दिया था, ने 3.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि नागा लक्ष्मी, एक फार्मासिस्ट, ने संपत्ति खरीदने के लिए 72 लाख रुपये का भुगतान किया था। एसीबी ने कहा, “दोनों आरोपी अधिकारियों ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर 6 आवासीय फ्लैट और लगभग 15,000 वर्ग फुट की व्यावसायिक जगह खरीदने के लिए इस बेहिसाब धन का निवेश किया था।”

    देविका रानी ने ‘बेनामी’ में 22 लाख रुपये का निवेश किया था। जांचकर्ताओं ने संपत्ति खरीदने के लिए विभिन्न स्रोतों के माध्यम से चेक और ऑनलाइन स्थानांतरण के माध्यम से भुगतान किए गए 2.29 करोड़ रुपये की पहचान की। एक अधिकारी ने कहा कि यह जब्ती की प्रक्रिया में है। दोनों आरोपी अधिकारियों को पहले से ही अनुपातहीन संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें एक अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया था।

    यह पिछले साल सितंबर में एसीबी ने तत्कालीन निदेशक देविका रानी और छह अन्य लोगों को कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना के तहत औषधालयों और अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति में घोटाले में गिरफ्तार किया था। निदेशक और अन्य अधिकारियों ने कथित तौर पर 2017-18 के दौरान ‘दर अनुबंध’ फर्मों के बजाय विशेष चिकित्सा दवा वितरण इकाइयों के माध्यम से दवाओं की खरीद से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया।

    देविका रानी ने कथित रूप से आपातकाल की आड़ में अनधिकृत फर्मों से ड्रग्स और सर्जिकल किट खरीदकर कई करोड़ रुपये डकार लिए। आरोपियों पर झूठे संकेत बनाने, रिकॉर्ड को गलत ठहराने और दवाओं की खरीद में नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। एंटी-ग्राफ्ट एजेंसी ने राज्य सरकार के निर्देशों के बाद घोटाले की जांच शुरू की थी। सतर्कता और प्रवर्तन विंग ने पहले आरोपों की जांच की थी कि देविका रानी ने दवाओं की आपूर्ति के लिए फर्मों के चयन में पात्रता मानदंडों का पालन नहीं किया था। जांच में पाया गया कि दवाओं को अत्यधिक कीमतों पर लाया गया था, खरीद प्रक्रियाओं और ई-टेंडर प्रक्रिया के उल्लंघन में। अक्टूबर में राज्य सरकार ने घोटाले के सिलसिले में देविका रानी और छह अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।

  • हॉस्पिटल में नवजात बच्चे का सौदा…स्वास्थ्य विभाग ने किया सील

    हॉस्पिटल में नवजात बच्चे का सौदा…स्वास्थ्य विभाग ने किया सील

    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. शहर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद गरीब दंपती 35 हजार रुपये शुल्क जमा नहीं कर सका तो उसके नवजात बच्चे का सौदा कर दिया. आरोप है कि चिकित्सक ने जबरन उससे कागज पर अंगूठा लगवा लिया और बच्चा ले लिया. उधर महिला गिड़गिड़ाती रह गई, पति भी कुछ न कर सका क्योंकि वो बेबस था. पीड़ित परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की फीस न दे पाने पर चिकित्सक ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो बच्चा देना पड़ेगा. इसके बाद दंपती से जबरन एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और नवजात लेकर 65 हजार रुपये देकर भगा दिया. बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने बच्चे का सौदा एक लाख रुपये में कर दिया. 35 हजार रुपये अस्पताल का बकाया बिल जमा कराने के बाद पीड़ित रिक्शा चालक को 65 हजार रुपये देकर भगा दिया. दंपती का आरोप है कि चिकित्सक ने बच्चे को एक लाख रुपये में बेच दिया है. शुल्क काटकर 65 हजार रुपये दंपती को दिए।

    बता दें कि शंभु नगर निवासी शिव नारायण रिक्शा चालक है. उसने बताया कि चार महीने पहले कर्ज में उसका घर चला गया था. 24 अगस्त को उसकी पत्नी बबिता को प्रसव पीड़ा हुई. उसे पास के ही जेपी अस्पताल में भर्ती करा दिया. बबिता ने बेटे को जन्म दिया. 25 अगस्त को डिस्चार्ज कराने की बारी आई तो अस्पताल ने 35,000 रुपये का बिल थमा दिया. रिक्शा चालक इतनी रकम चुकाने में असमर्थ था. उसके पास सिर्फ पांच सौ रुपये थे।

    आरोप है कि अस्पताल की फीस न दे पाने पर चिकित्सक ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो बच्चा देना पड़ेगा. इसके बाद दंपती से जबरन एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और नवजात लेकर 65 हजार रुपये देकर भगा दिया. मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त अस्पताल पर छापा मारा. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि अनियमिताएं मिलने पर अस्पताल को सील किया गया है. नवजात बच्चे को बेचने जाने की सूचना मिली है. इसकी जांच पुलिस करेगी. मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है।

  • बिफरे रेंज IG रतन लाल डांगी का सभी कप्तानों को सख्त पत्र “उचित समस्या है तो बताईए, नंबर उपलब्ध हैं ..

    बिफरे रेंज IG रतन लाल डांगी का सभी कप्तानों को सख्त पत्र “उचित समस्या है तो बताईए, नंबर उपलब्ध हैं ..

    अंबिकापुर। अमूमन शांत और सरल रेंज आईजी रतन लाल डांगी ने रेंज के सभी कप्तानों को एक पत्र जारी किया है। पत्र की भाषा ने ज़ाहिर किया है कि, रेंज आईजी बेहद नाराज़ हैं।बेहद संक्षिप्त लेकिन बेहद कड़े अपने पत्र में रेंज आईजी ने सभी कप्तान को निर्देश दिया है कि अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं है और जो कर्मचारी ऐसा करते दिखे उस के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही सुनिश्चित करें।


    आईजी डांगी का यह पत्र ऐसे समय आया है जबकि देर रात एक कोविड संक्रमित टीआई का वीडियो वायरस हुआ है जिसमें उसने कोरोना काल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के व्यवहार को लेकर आलोचना की और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया।
    I.G. रतन लाल डांगी ने पत्र में लिखा है
    “समस्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा रेंज,सभी अधीनस्थ कर्मचारियों अधिकारियों को स्पष्ट रूप से अवगत करावे कि यदि उनकी कोई उचित समस्या है जो विभाग से संबंधित है,अपने अधिकारियों को अवगत कराएं वो यथोचित समाधान निकालेंगे।किसी प्रकार की आपदा या महामारी के समय पुलिस की न केवल वैधानिक ड्यूटी है बल्कि मानवीय दायित्व भी है कि आम लोगों की मदद करे।


    विभाग में माननीय डीजीपी महोदय ने एवम् मैने स्वयं भी अपने नंबर सबको उपलब्ध कराया है जिससे कोई भी कर्मचारी अपनी उचित बात कह सकता है।यदि उसकी मांग उचित होती है तो उसका निराकरण भी किया जाता है।

    यह देखने में आया है की अधिकतर लोग अपनी पोस्टिंग अपने ही गृह नगर में घर से सबसे नजदीक वाले थाना या मनपसंद जगह में चाहते है।यह संभव भी नहीं हो सकता।इसलिए दबाव बनाने अपने परिवार, अन्य लोगों के माध्यम से या सोशल मीडिया का भी सहारा लेते है जो कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग के लिए कतई उचित नहीं है।
    ऐसे अनुशासनहीन कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित करें”

  • पद्मनाभ स्वामी मंदिर हैं विश्व का सबसे अमीर मंदिर….

    पद्मनाभ स्वामी मंदिर हैं विश्व का सबसे अमीर मंदिर….

    केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थापित भगवान विष्णु का  ‘पद्मनाभ स्वामी मंदिर’ को विश्व का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है. इस मंदिर की कुल संपत्ति करीब 2 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है. दुनिया के सबसे अमीर के मंदिर होने के साथ-साथ इसकी गिनती विश्व के  रहस्यमयी मंदिरों में होती है. माना जाता है कि भारत तो क्या दुनिया के किसी भी कोने में ऐसा महान पुरुष नहीं मिल पाया है जो इस मंदिर से जुड़े रहस्य की गुत्थी को सुलझा सके.

    इस मंदिर का निर्माण 6वीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने करवाया था, जिसके बारे में 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में काफी जानकारी हैं. इसके बाद 18वीं सदी में त्रावणकोर के शाही परिवार ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण भी कराया था. राज परिवार ने 1947 तक भारतीय संघ में विलय से पहले साउथ केरल और उससे सटे तमिलनाडु के कुछ हिस्सों पर राज किया था. आज़ादी के बाद भी मंदिर का सुचारू संचालन और मैनेजमेंट शाही परिवार के नियंत्रण वाला ट्रस्ट ही कर रहा है.

    माना जाता हैं कि यदि इस मंदिर को किसी भी तरह से खोला गया तो ये नष्ट हो सकता है या किसी प्रकार का प्रलय भी आ सकता है. मंदिर के जानकर बताते हैं कि  इस मंदिर में कुल 7 तहखाने बने हुए हैं और  हज़ारों वर्ष  पहले त्रावणकोर के महाराज ने इन तहखानों बेशकीमती ख़ज़ाना छुपा रखा था. तब से अब तक किसी ने भी इन रहस्यमय दरवाज़ों को खोलने का प्रयास नहीं किया हैं.

    मंदिर का सातवें दरवाजें का रहस्य क्या हैं?

    इस मंदिर का 7वां दरवाज़ा आज भी वहां के लोगों के लिए बड़ा रहस्य बना हुआ है. माना जाता है हज़ारों वर्ष पहले ख़ज़ाने की खोज में कुछ लोगों ने 7वें दरवाजे को खोलने का प्रयास किया था, हालाँकि ज़हरीले सांपों के काटने से सब लोगों की मौत हो गई थी. मंदिर का ये दरवाज़ा स्टील का बना हुआ है. इस पर 2 सांप बने हुए हैं, जोकि इस रहस्यमय दरवाजें की रक्षा करते हैं. हैरानी वाली बात ये हैं कि द्वार में कोई नट-बोल्ट या कब्ज़ा नहीं लगा हुआ हैं. जबकि इसे केवल कुछ विशेष मंत्रों के उच्चारण से ही खोला जा सकता है. इसे ‘नाग बंधम’ या ‘नाग पाशम’ मंत्रों का इस्तेमाल करके बंद किया गया है.


    15वीं शताब्दी में जब पुर्तगाली बिजेनस के लिए भारत में आये थे तो त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने पुर्तगाली समुद्री बेडे और उसके खजाने पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था. इस दौरान यूरोपीय भी मसालों के बिजनेस के सिलसिले में भारत आया करते थे. इस बीच त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने भी इस व्यवसाय को अजमा लिया था और उन्हें मसालों के बिजनेस से काफ़ी फ़ायदा भी होता था. इस दौरान उन्होंने अपनी व पूरे राज्य की सभी संपत्ति को ही मंदिर के तहखानों में रख दिया था.

    तहखाने से मिल चुके हैं एक लाख करोड़ के गहने

    वर्ष 1991 में त्रावणकोर के आखिरी महाराजा बलराम वर्मा के निधन के बाद 2007 में सुंदरराजन नाम के एक पूर्व आईपीएस ऑफिसर ने कोर्ट में याचिका दाख़िल कर राज परिवार के अधिकार को चुनौती दी थी. इसके बाद साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी तहखाने खोलकर ख़ज़ाने का मसौदा तैयार करने के आर्डर दिए थे. 27 जून 2011 को तहखाने खोलने का कार्य शुरू भी किया गया था. इस दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपये के हीरे और गहने बरामद हुए थे. इसी दौरान जब टीम ने मंदिर के 7वें द्वार को खोलने का प्रयास किया तो दरवाजे पर बने कोबरा सांप के फोटो को देखकर काम रोक दिया गया.

    इतिहासकारों का मानना है कि वर्तमान में इस मंदिर के रहस्यमय खजाने में करीब 2 लाख करोड़ का सोना मौजूद है. हालाँकिर असल में इसकी अनुमानित राशि इससे 10 गुना ज़्यादा बताई जाती है. इस ख़ज़ाने में सोने-चांदी के गहने, हीरा, पन्ना, रूबी, कीमती पत्थर, सोने की मूर्तियां, जैसी कई बेशकीमती चीजें हैं.  जिनकी असली कीमत का आंकलन करना बेहद कठिन है.

    इस अद्भुत मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन के लिए महिलाओं को मुंडु यानी कि एक विशेष तरह की धोती पहननी होती हैं. भगवान विष्णु के दर्शन के लिए सलवार कमीज पहनकर आने वाली महिलाओं को अपने ऊपर धोती पहनकर मंदिर में एंट्री करने दिया जाता है. धोती पहनें बिना किसी महिलाओं व पुरुषों की मंदिर एंट्री वर्जित हैं.

    कोरोना महामारी के बीच 5 महीने से बंद पड़े ‘पद्मनाभ मंदिर’ को 26 अगस्त से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है. हालाँकि मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों को 1 दिन पहले बुकिंग करानी होगी.

  • डॉ योगेश गवेल की कोरोना से हुए मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग….

    डॉ योगेश गवेल की कोरोना से हुए मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग….

    प्रांतीय गवेल समाज द्वारा डा.योगेश गवेल को विनम्र श्रद्धांजलि

    गवेल समाज मे रोष व्याप्त
    अपने होनहार को खोने से समाज मे शोक की लहर

    खरसिया। प्रांतीय गवेल समाज छत्तीसगढ़ द्वारा ग्राम ठाकुरदिया (खरसिया) जिला रायगढ़ के श्री गिरधारी गवेल (प्रांतीय गवेल समाज कार्यकारी अध्यक्ष) के भतीजे युवा डा .योगेश गवेल पिता श्री बुंदकुमार गवेल घर परिवार को छोड़कर हजारों किलोमीटर दूर घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के शासकीय जिला चिकित्सालय बीजापुर में विगत डेढ़ वर्ष से पदस्थ रहे हैं। इनकी अभी अभी जून 2020 में शादी हुई है वे बहुत ही मृदुभाषी, मिलनसार और कर्तव्य निष्ठ रहे हैं जिन्होंने कोरोना काल में अस्पताल में सेवा करते हुए सतलोक वासी हो गये हैं इनका यह सतलोक वासी साधारण मौत नहीं लगता है इसमें अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही नजर आतीं है इन्होंनेे कोरोना अस्पताल में ड्यूटी करते हुए संक्रमित हुए तो इनको अस्पताल में रखा जाना चाहिए था परन्तु डा.योगेश को घर में आइसोलेशन में रखा गया था जिसके कारण ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाया है यही मौत का कारण बना है
    प्रांतीय गवेल समाज इस घोर लापरवाही की निष्पक्ष जांच की मांग माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी और माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस.सिंहदेव जी को करते हैं ताकि इन्हें न्याय मिल सके। प्रांतीय गवेल समाज की ओर से सादर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ईश्वर इनकी आत्मा को सतलोक में स्थान दें तथा इनके शोक संतप्त परिवार को जो अपार दुख आ पड़ा है उसे सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
    प्रांतीय गवेल समाज द्वारा हम राज्य शासन और केन्द्र शासन से मांग करते हैं इनके परिवार के किसी एक सदस्य को शासकीय सेवा में लिया जाये ,साथ ही साथ डा.योगेश गवेल को शहीद का दर्जा दिया जाये तथा शासन के नियमानुसार इनके परिवार आर्थिक मदद प्रदान की जाये ।
    श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में सर्वश्री कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष श्री गिरधारी गवेल, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष_ श्री मेदिनी प्रसाद गवेल नवापारा,श्री दिनेश गवेल डोंगिया, प्रस्तावित प्रांतीय अध्यक्ष श्री हजारी लाल गवेल कोरबा, विशिष्ट व्यक्तियों में श्री प्रीतम सिंह गवेल सक्ति, श्री नोवेल वर्मा (पूर्व मंत्री छ ग शासन ) सक्ति, श्री झाडूराम गवेल नवापारा, प्रांतीय महामंत्री नोहर साय गवेल डूमरभांठा, प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री हरिवंश गवेल फगुरम, प्रांतीय उपाध्यक्ष_ दादूलाल कोरबा, श्रीमती मालतीदेवी ढोलनार, श्री सुरेश गवेल तिऊर, प्रांतीय मंत्री ,_ श्री रामकुमार गवेल सक्ति, श्री राजेश गवेल मुंगेली, श्री धर्मीप्रसाद सुकलीपाली, श्री मती पुष्पा गवेल सर्जुनी, एवं खंड अध्यक्षों में _सर्वश्री कवि वर्मा सुलौनी, श्री वीरसिंह गवेल पोता, श्री जयसिंह गवेल फगुरम, श्री भोगी लाल गवेल पुरेना, श्री कमलेश गवेल औरदा, श्री दुरूपसाय गवेल तिऊर, श्री शंकर लाल गवेल जाजंग, श्री देवप्रसाद वर्मा बुंदेली, श्री रेवालाल गवेल धसकामुडा, श्री आजूराम गवेल मुंगेली, श्री उदय सिंह गवेल कोरबा,श्री दिग्विजय सिंह( रिट.जिला अभियोजन अधिकारी,) श्रीमती रश्मि गवेल पूर्व मंडी अध्यक्ष , श्री रबिन्द्र गवेल( पूर्व लोक सभा अध्यक्ष युवा कांग्रेस रायगढ़ ), श्रीमती हरिप्रिया रुपेश गवेल जिला पंचायत सदस्य, श्री टिकश्वर गवेल जिला पंचायत सदस्य, श्री प्रमोद गवेल जनपद पंचायत सदस्य, श्री रेशमलाल गवेल पार्षद, श्री कैलाश गवेल पूर्व पार्षद, श्री प्रकाश गवेल (भाई), श्री गोपाल गवेल (भाई) श्री अयोध्या गवेल, श्री भुवनेश्वर गवेल देवारी, श्री साधेश्वर गवेल जाजंग श्री ननकीदाऊ गवेल, श्री योगेन्द्र गवेल, सरपंच श्री चन्द्र विजय गवेल, श्री अमित गवेल परसा, समाज के भारी संख्या में लोगों ने डाक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित किए ।

  • स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक जाएंगी छुट्टी पर… इनकी ज़िम्मेदारी मिली इस अनुभवी IAS को, राज्य सरकार ने सौंपी हेल्थ की बागडोर

    स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक जाएंगी छुट्टी पर… इनकी ज़िम्मेदारी मिली इस अनुभवी IAS को, राज्य सरकार ने सौंपी हेल्थ की बागडोर

    रायपुर। रेणु जी पिल्ले स्वास्थ्य विभाग की नयी ACS होंगी। रेणु पिल्ले अब निहारिका बारिक के स्थान पर स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी। रेणु पिल्ले अभी तक एसीएस चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के डीजी का एडिश्नल चार्ज संभाल रही थी। अब उन्हें स्वास्थ्य विभाग के एसीएक की भी जिम्मेदारी दे दी गयी है।

    1991 बैच की IAS रेणु पिल्ले जिस दिन स्वास्थ्य विभाग के एसीएस का जिम्मा संभालेंगी, उसी दिन से निहारिका बारिश सचिव स्वास्थ्य विभाग के प्रभार से मुक्त हो जायेगी। आपको बता दें कि हेल्थ सिकरेट्री निहारिका बारिक  दो साल के चाइल्ड केयर लीव पर जा रही है। वो अपनेहसबैंड के साथ जर्मनी जा रही हैं।

  • प्रशांत भूषण 1 रुपये चुकावें, नहीं तो तीन महीने की जेल

    प्रशांत भूषण 1 रुपये चुकावें, नहीं तो तीन महीने की जेल

    प्रशांत भूषण से जुड़े अवमानना मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर सांकेतिक रूप से एक रुपये का जुर्माना लगाया है. प्रशांत भूषण को 15 सितंबर तक यह एक रुपया भरना है. अगर तय समय तक जुर्माना नहीं भरा गया तो प्रशांत भूषण को तीन महीने की जेल हो सकती है, इसके साथ ही उन्हें तीन साल तक वकालत नहीं करने दी जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले (Prashant Bhushan Case Decision) में बार-बार प्रशांत भूषण से माफी मांगने को कहा था, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया था कि वह सजा के लिए तैयार हैं लेकिन माफी नहीं मांगेंगे।

    कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमने अटॉर्नी जनरल द्वारा अदालत को दी गई सलाह को सही माना है, मौजूदा समय यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।

    हमने मौका दिया, प्रशांत भूषण ने नहीं मांगी माफी: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने प्रशांत भूषण द्वारा खेद व्यक्त करने के बाद अवमानना वापस लेने की मांग की, हमने उनको खेद व्यक्त करने के लिए अवसर और प्रोत्साहन दिया, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। ऐसे में अदालत प्रशांत भूषण के द्वारा किए गए ट्वीट को लेकर अवमानना मामले में यह आदेश देती है कि प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है. जुर्माने की रकम 15 सितंबर तक जमा करनी होगी. वर्ना 3 महीने के लिए जेल और 3 साल के लिए प्रैक्टिस पर बैन रहेगा।

    क्या है अवमानना का मामला

    सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को न्यायलय की अवमानना करने कि लिए दोषी माना था. दरअसल 27 जून को वकील प्रशांत भूषण ने सीजेआई पर “लोकतंत्र के विनाश में भूमिका निभाने” का आरोप लगाया था. 29 जून को, उन्होंने वर्तमान CJI पर “भाजपा नेता की 50 लाख रुपये की बाइक की सवारी” और “ACC को लॉकडाउन (Lockdown) में रखने से नागरिकों को उनके न्याय के मौलिक अधिकार से वंचित रखने” का आरोप लगाया था।