Author: Sunil Agrawal

  • सरायपाली विधायक किस्मत लाल नंद की सुपुत्री का सिविल जज परीक्षा में चयन…

    सरायपाली विधायक किस्मत लाल नंद की सुपुत्री का सिविल जज परीक्षा में चयन…

    सरायपाली। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं सरायपाली विधायक किस्मत लाल नंद की सुपुत्री मीनू नंद का व्यवहार न्यायाधीश परीक्षा वर्ष 2019 में पूरे छत्तीसगढ़ में 7 वें स्थान पर चयन हुआ है,उक्त चयन से समाज, गांव, परिवार,शुभचिंतकों एवं विधानसभा क्षेत्र में खुशी का माहौल है।


    बता दें कि 07 नवम्बर 2020 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा व्यवहार न्यायाधीश 2019 के अभ्यर्थीयों को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंको के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी कर दिया गया है. छत्तीसगढ़ शासन विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत व्यवहार न्यायाधीश के कुल 39 पदों पर विज्ञापित किया गया है।

    मीनू नंद ने बताया की वे बेहद खुश हैं, अपनी इस सफलता का श्रेय पिता किस्मत नंद के मार्गदर्शन एवं माता सादवती नंद के आशीर्वाद को देतें है, मीनू नंद को पिता के द्वारा हमेशा मार्गदर्शन दिया जाता था, पिता पूर्व में पुलिस विभाग में सेवा दे चुके होने की वजह से न्यायाधीश की मान-सम्मान बेहतर ढंग से समझते थे, यही शिक्षा एवं मार्गदर्शन मीनू नंद को इस कामयाबी के लिए हमेशा प्रेरित करता है, मीनू नंद काननू की पढ़ाई करने के पश्चात छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के छत्तीसगढ़ शासन विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत व्यवहार न्यायाधीश की परीक्षा उतीर्ण की हैं, सरायपाली विधानसभा का नाम रोशन करने पर शुभचिंतकों द्वारा मीनू नंद की उज्जवल भविष्य की कामना की जा रही है।

  • चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा की प्रतिमूर्ति थे स्व. डॉ. राजेंद्र अग्रवाल..

    चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा की प्रतिमूर्ति थे स्व. डॉ. राजेंद्र अग्रवाल..

    नगर के चिकित्सको,पत्रकारों, सामाजिक संगठनों राजनेताओ गणमान्य नागरिकों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    खरसिया। नगर के प्रतिष्ठित फर्म संत रामकुमार क्लिनिक के संचालक डॉक्टर राजेन्द्र अग्रवाल का 1 नवम्बर की रात को निधन हो गया, सामाजिक धार्मिक कार्यों में अग्रणी डॉक्टर राजेन्द्र एक कुशल चिकित्सक थे, उनके असमय निधन की खबर से पूरे नगर में शोक की लहर फैल गयी, मिलनसार डॉक्टर राजेन्द्र अपने पीछे एक पुत्र, दो पुत्री,नाती,पोतों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ कर ब्रम्हलीन हो गए हैं। उनका अंतिम संस्कार 2 नवम्बर को रायगढ़ में किया गया, कोरोना काल को देखते हुए घर पर बैठक स्थगित कर दी गयी है और स्नेहीजनों को अपने घरों से ही श्रद्धांजलि देने का आग्रह किया गया है।। डॉ राजेंद्र अग्रवाल अपने कुशल चिकित्सक के साथ-साथ लायंस क्लब खरसिया के सम्माननीय सदस्य के रूप में माध्यम से भी अपनी जनहित की सेवा लंबे समय तक किए हैं साथ ही डॉ अग्रवाल ने करीबन 2 दशकों पहले अग्रसेन जयंती समारोह के अध्यक्ष के कार्यकाल बखूबी से संभाल कर अग्रसेन जयंती समारोह बड़ी धूमधाम से खरसिया नगर में उनके नेतृत्व में बनाई गई थी समय-समय पर डॉ राजेंद्र द्वारा अपने क्लीनिक में अपने पुत्र आकाश अग्रवाल एवं पुत्रवधू पूजा अग्रवाल व अन्य जिलों के डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य कैंप के माध्यम से भी जनता की सेवा में हमेशा तत्पर रहे हैं उनके निधन को भूल पाना संभव नहीं उन्होंने सभी आवश्यक कार्यों के निष्पादन के दौरान उन्होंने सेवा के भाव को सदा अहमियत दी दिवंगत डॉ राजेंद्र अग्रवाल का स्मरण करते हुए पूर्व नगरपालिका के अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरधर गुप्ता पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग, अग्रसेन जन कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष बजरंग अग्रवाल, ऑफ कॉमर्स एवं पत्रकार संघ के अध्यक्ष मुकेश मित्तल, पत्रकार संघ के सचिव सुनील अग्रवाल रोटरी क्लब के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल मोंटी श्री श्याम कुटुंब के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, कॉन्वेंट स्कूल के अध्यक्ष बाबूलाल गर्ग, राइस मिल एसोसिएशन के कमल बसंती, सुनील सुल्तानिया, अग्रवाल युवा मंच के अध्यक्ष महेश मित्तल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेश अग्रवाल दवाई, कैलाश अग्रवाल दवाई, नगर कांग्रेस अध्यक्ष रणधीर शर्मा, भाजपा नेता  हनुमान अग्रवाल, बंटी सोनी, संजय दीपक, सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राम सराफ, गणमान्य नागरिक, रामचरण अग्रवाल, ऋषि अग्रवाल, बजरंग जिंदल, बजरंग सपोस, नटवर अग्रवाल ए ए, रमेश कबूलपुरिया, डॉ. आर सी अग्रवाल, डॉक्टर सजन अग्रवाल आदि ने उन्हें अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोके सप्तम परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति दे।

  • समंदर के विशाल ह्रदय का दर्शन करने वाला संकुचित और नफ़रतों से भरा एंकर….

    समंदर के विशाल ह्रदय का दर्शन करने वाला संकुचित और नफ़रतों से भरा एंकर….

    मैं आज क्यों लिख रहा हूं, अर्णब की गिरफ्तारी के तुरंत बाद क्यों नहीं लिखा?

    आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला संगीन है लेकिन सिर्फ नाम भर आ जाना काफी नहीं होता है। नाम आया है तो उसकी जांच होनी चाहिए और तय प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। एक पुराने केस में इस तरह से गिरफ्तारी संदेह पैदा करती है। महाराष्ट्र पुलिस को कोर्ट में या पब्लिक में स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रमाण होने के बाद भी इस केस को बंद किया गया था? क्या राजनीतिक दबाव था? तब हम जान सकेंगे कि इस बार राजनीतिक दबाव में ही सही, किसी के साथ इंसाफ़ हो रहा है। अदालतों के कई आदेश हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने के ऐसे मामलों में इस तरह से गिरफ्तारी नहीं होती है। कानून के जानकारों ने भी यह बात कही है। इसलिए महाराष्ट्र पुलिस पर संदेह के कई ठोस कारण बनते हैं। जिस कारण से पुलिस की कार्रवाई को महज़ न्याय दिलाने की कार्रवाई नहीं मानी जा सकती।

    भारत की पुलिस पर आंख बंद कर भरोसा करना अपने गले में फांसी का फंदा डालने जैसा है। झूठे मामले में फंसाने से लेकर लॉक अप में किसी को मार मार कर मार देने, किसी ग़रीब दुकानदार से हफ्ता वसूल लेने और किसी को भी बर्बाद कर देने का इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। पेशेवर जांच और काम में इसका नाम कम ही आता है। इसलिए किसी भी राज्य की पुलिस हो उसकी हर करतूत को संंदेह के साथ देखा जाना चाहिए। ताकि भारत की पुलिस ऐसे दुर्गुणों से मुक्त हो सके और वह राजनीतिक दबाव या अन्य लालच के दबाव में किसी निर्दोष को आतंकवाद से लेकर दंगों के आरोप में न फंसाए।

    अर्णब गोस्वामी के केस में कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की पुलिस बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। ग़लत नहीं कहा जा रहा है। क्या दिल्ली पलिस और यूपी की पुलिस बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करती है? अर्णब गोस्वामी ने कभी अपने जीवन में हमारी तरह ऐसा पोज़िशन नहीं लिया है। मुझे कुछ होगा तो अर्णब गोस्वामी एक लाइन नहीं बोलेंगे। अगर पुलिस किसी को दंगों के झूठे आरोप में फंसा दे तो अर्णब गोस्वामी पहले पत्रकार होंगे जो कहेंगे कि बिल्कुल ठीक है। पुलिस पर संदेह करने वाले ही ग़लत हैं। फिर भी एक नागरिक के तौर आप भी अर्णब के केस में पुलिस के बर्ताव का सख़्त परीक्षण कीजिए ताकि सिस्टम दबाव और दोष मुक्त बन सके। इसी में सबका भला है।

    डॉ कफ़ील ख़ान पर अवैध रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा कर छह महीने बंद रखा गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि अवैध रूप से रासुका लगाई गई है। उक्त अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अर्णब गोस्वामी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर तमाम मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ने इस नाइंसाफी पर कुछ नहीं कहा। भारत में किनके राज में प्रेस की स्वतंत्रता अभी खत्म होकर मिट्टी में मिल चुकी है यह बताने की ज़रूरत नहीं है। आपको एक लाख बार बता चुका हूं। प्रेस की स्वतंत्रता की बात करने वाले मंत्रियों के प्रधानमंत्री ने आज तक एक प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है।

    बिल्कुल अन्वय नाइक और कुमुद नाइक की आत्महत्या के मामले में इंसाफ मिलना चाहिए। अन्वय नाइक की बेटी की कहानी बेहद मार्मिक है। इस बात की जांच आराम से हो सकती है कि अर्णब गोस्वामी ने अन्वय नाइक से स्टुडियो बनाकर पैसे क्यों नहीं दिए? 80 लाख से ऊपर का काम है तो कुछ न कुछ रसीदी सबूत भी होंगे। अन्वय नाइक की बेटी का कहना सही है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए लेकिन कानून को भी मर्यादा से ऊपर नहीं होना चाहिए। जांच की निष्पक्षता की मर्यादा अहम है। तभी लगेगा कि पारदर्शिता के साथ न्याय हो रहा है। राजनीतिक दबाव में केस का खुलना और केस का बंद होना ठीक नहीं है।

    जब एनडीटीवी पर छापे पड़ रहे थे और एक चैनल को डराया जा रहा था तब अर्णब का कैमरा बाहर लगा था और लिंचमैन की तरह कवर किया जा रहा था। उनके कवरेज में एक लाइन प्रेस की स्वतंत्रता पर नहीं थी। एन डी टी वी की सोनिया वर्मा सिंह ने ट्विट कर अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। एनडीटीवी के अन्य सहयोगियों ने अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। ये फर्क है। जब 2016 में एन डी टी वी इंडिया को बैन किया जा रहा था तब प्रेस क्लब में पत्रकार जुटे थे। आप पूछ सकते हैं कि अर्णब और उनके बचाव में उतरे मंत्री लोग क्या कर रहे थे। जब विपक्ष के नेताओं पर छापे की आड़ में हमले होते हैं अर्णब हमेशा जांच एजेंसियों की साइड लेते हैं।

    अर्णब ने मोदी सरकार पर क्या सवाल उठाए हैं,बेरोज़गारी से लेकर किसानों के मुद्दे कितने दिखाए गए हैं यह सब दर्शकों को पता है। उल्टा अर्णब गोस्वामी सरकार पर उठाने वालों को नक्सल से लेकर राष्ट्रविरोधी कहते हैं। भीड़ को उकसाते हैं। झूठी और अनर्गल बाते करते हैं। वे कहीं से पत्रकार नहीं हैं। उनका बचाव पत्रकारिता के संदर्भ में करना उनकी तमाम हिंसक और भ्रष्ट हरकतों को सही ठहराना हो जाएगा।

    अर्णब की पत्रकारिता रेडियो रवांडा का उदाहरण है जिसके उद्घोषक ने भीड़ को उकसा दिया और लाखों लोग मारे गए थे। अर्णब ने कभी भीड़ की हिंसा में मारे गए लोगों का पक्ष नहीं लिया। पिछले चार महीने से अपने न्यूज़ चैनल में जो वो कर रहे हैं उस पर अदालतों की कई टिप्पणियां आ चुकी हैं। तब किसी मंत्री ने क्यों नहीं कहा कि कोर्ट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कर रहा है? जबकि मोदी राज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को जिनती बार उभारा गया है उतना किसी सरकार के कार्यकाल में नहीं हुआ। हर बात में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा बताई और दिखाई जाती है।

    एक बार अर्णब हाथरस केस में योगी की पुलिस को ललकार कर देख लेते, मुख्यमंत्री योगी को ललकार कर देख लेते जिस तरह से वे मुख्यमंत्री उद्धव को ललकारते हैं तो आपको अंतर पता चल जाता कि कौन सी सरकार संविधान का पालन कर रही है। उद्धव ठाकरे ने प्रचुर संयम का परिचय दिया है और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओ ने भी जिनकी एक छवि मारपीट की भी रही है। कई हफ्तों से अर्णब बेलगाम पत्रकारिता की हत्या करते हुए हर संवैधानिक मर्यादा की धज्जियां उड़ा रहे थे। पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्विट किया है कि यूपी में पत्रकारों के खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। क्या अर्णब में साहस है कि वे अब भी योगी सरकार को ललकार दें इस मसले पर। जो आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं वो सीमा की बात करने लगेंगे और अर्णब पर रासुका लगा दी जाएगा डॉ कफील ख़ान की तरह। गौरी लंकेश की हत्या के मामले को अर्णब ने कैसे कवर किया था? या नहीं किया था?

    द वायर के संस्थापक हैं सिद्धार्थ वरदराजन। अर्णब गोस्वामी सिद्धार्थ वरदराजन के बारे में क्या क्या कहते रहे हैं आप रिकार्ड निकाल कर देख सकते हैं मगर सिद्धार्थ वरदराजन ने उनकी गिरफ्तारी में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। निंदा की है। उसी तरह से कई ऐसे लोगों ने की है। अर्णब के पक्ष में उतरे बीजेपी की मंत्रियों और समर्थकों की लाचारी देखिए। वे सुना रहे हैं कि कहां गए संविधान की बात करने वाले। पत्रकार रोहिणी सिंह ने एक जवाब दिया है राकेश सिन्हा को। संविधान की बात करने वालों को आपने जेल भेज दिया है। कुछ को दंगों के आरोप में फंसा दिया है। इनकी समस्या ये है कि जिन्हें नक्सल कहते हैं, देशद्रोही कहते हैं उन्हीं को ऐसे वक्त में खोजते हैं। इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि कई लोगों ने एक नागरिक के तौर पर अर्णब की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह फर्क साफ रखा है कि अर्णब पत्रकार नहीं है और न ही यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है।

    न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन ने भी निंदा की है जबकि अर्णब इसके सदस्य तक नहीं है। अर्णब ने हमेशा इस संस्था का मज़ाक उड़ाया है। क्या न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन किसी ऐसे छोटे चैनल के पत्रकार की गिरफ्तारी पर बोलेगा जो उसका सदस्य नहीं है? ज़ाहिर है केंद्र सरकार अर्णब के साथ खड़ी है। अर्णब केंद्र सरकार के हिस्सा हो चुके हैं। अर्णब पत्रकार नहीं हैं। इसे लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता के हर पैमाने को ध्वस्त किया है। जिस तरह से पुलिस कमिश्नर को ललकार रहे थे वो पत्रकारिता नहीं थी।

    मैंने कल इस मामले पर कुछ नहीं लिखा क्योंकि प्राइम टाइम के अलावा कई काम करने पड़ते हैं। मैं लंबा लिखता हूं इसलिए भी टाइम चाहिए होता है। जब गिरफ्तारी की ख़बर आई तो मैं व्हाट्स एप पर था। फिर तुरंत कपड़े धोने चला गया। नील डालने के बाद भी बनियान में सफेदी नहीं आ रही थी। उससे जूझ रहा था तभी किसी का फोन आया कि चैनल खोलिए अर्णब गिरफ्तार हुए हैं। मैंने कहा कि उन्हीं जैसौं के कारण तो मेरे घर में न्यूज़ चैनल नहीं खुलता है। ख़ैर जब बनियान धोने के बाद पंखे की सफाई के लिए ड्राईंग रूम में आया तो चैनल खोल दिया। पंखे पर जमी धूल आंखों में गिर रही थी और मीडिया पर जमी धूल चैनल पर दिखने लगी। वैेसे कुछ दिन पहले फेसबुक पर रिपब्लिक चैनल के मामले में एडिटर्स गिल्ड की प्रतिक्रिया पोस्ट की थी कि किसी एक पर आरोप है तो आप पूरे गांव पर मुकदमा नहीं कर सकते।

    लेकिन मैं अर्णब का घर देखकर हैरान रह गया। रोज़ 6000 शब्द टाइप करके मैं गाज़ियाबाद के उस फ्लैट में रहता हूं जिसमें कुर्सी लगाने भर के लिए बालकनी नहीं है। अर्णब का घर कितना शानदार है। ईर्ष्या से नहीं कह रहा। मुझे किसी का भी अच्छा घर अच्छा लगता है। एक रोज़ किसी अमीर प्रशंसक ने घर आने की ज़िद कर दी और आते ही बच्चों के सामने कह दिया कि बस यही घर है आपका। हम तो सोचे कि आलीशान फ्लैट होगा। एक मोहतरमा तो रोने लगीं कि मेरा घर ले लीजिए। कोरोना के कारण जब घर से एंकरिंग करने लगा तो मेरे घर में झांकने लगे। उन्हें लगा कि रवीश कुमार शाहरूख़ ख़ान है। जल्दी उन्हें मेरे घर की दीवारों से निरशा हो गई। मुझे अपना घर बहुत अच्छा लगता है। मेरी तेरह साल पुरानी कार को देखकर कई बार लोगों को लगा कि किसे बुला लिया अपनी महफिल में। वैसे ईश्वर ने सब कुछ दिया है। लोगों ने इतना प्यार दे दिया कि सौ फ्लैट कम पड़ जाएं उसे रखने के लिए। मैं अर्णब के शानदार घर के विजुअल के सामने असंगठित क्षेत्र के एक मज़दूर की तरह सहमा खड़ा रह गया। मैं क्या बोलता, मेरे बोले का कोई मोल है भी या नहीं। एक अदना सा पत्रकार एक चैनल के मालिक के लिए बोले, यह मालिकों का अपमान है।

    मैं तो बस अर्णब के घर की ख़ूबसूरती में समा गया। कल्पनाओं में खो गया। ड्राईंग रूम की लंबी चौड़ी शीशे की खिड़की के पार नीला समंदर बेहद सुंदर दिख रहा था। अरब सागर की हवाएं खिड़की को कितना थपथपाती होंगी। यहां तो क़ैदी भी कवि हो जाए। मुझे इस बात की खुशी हुई कि अर्णब के दिलो दिमाग़ में जितना भी ज़हर भरा हो घर कैसा हो, कहां हो, कैसे रहा जाए इसका टेस्ट काफी अच्छा है। उसमें सौंदर्य बोध है। बिल्कुल किसी नफ़ीस रईस की तरह जो अपने टी-पॉट की टिकोजी भी मिर्ज़ापुर के कारीगरों से बनवाता हो। मैं यकीन से कह सकता हूं कि अर्णब के अंदर सुंदरता की संभवानाएं बची हुई हैं। लेकिन सोचिए रोज़ समंदर के विशाल ह्रदय का दर्शन करने वाले एंकर का ह्रदय कितना संकुचित और नफ़रतों से भरा है।

    अर्णब गोस्वामी जब भी जेल से आएं, अव्वल तो पुलिस उन्हें तुरंत रिहा करे, मैं यही कहूंगा कि कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने इस सुंदर घर को निहारा करें। इस सुंदर घर का लुत्फ उठाएं। सातों दिन कई कई घंटे एंकरिंग करना श्रम की हर अवधारणा का अश्लील उदाहरण है। अगर इस घर का लुत्फ नहीं उठा सकते तो मुझे मेहमान के रूप में आमंत्रित करें। मैं कुछ दिन वहां रहूंगा। सुबह उनके घर की कॉफी पीऊंगा। वैसे अपने घर में चाय पीता हूं लेकिन जब आप अमीर के घर जाएं तो अपना टेस्ट बदल लें। कुछ दिन कॉफी पर शिफ्ट हो जाएं। और हां एक चीज़ और करना चाहता हूं। उनकी बालकनी में बैठकर अरब सागर से आती हवाओं को सलाम भेजना चाहता हूं और बॉर्डर फिल्म का गाना फुल वॉल्यूम में सुनना चाहता हूं। ऐ जाते हुए लम्हों, ज़रा ठहरो, ज़रा ठहरो….मैं भी चलता हूं… ज़रा उनसे मिलता हूं… जो इक बात दिल में है उनसे कहूं तो चलूं तो चलूं…. और हां पुलिस की हर नाइंसाफी के खिलाफ हूं। चाहें लिखू या न लिखूं।

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  • बढ़ते महिला सम्बंधित अपराध के ग्राफ को कम करने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये IG एवं SP से अपराधों का लिया जायजा,कहा अवैध शराब की शिकायत मिली तो एसपी,राजपत्रित अधिकारी होंगे जिम्मेदार….

    बढ़ते महिला सम्बंधित अपराध के ग्राफ को कम करने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये IG एवं SP से अपराधों का लिया जायजा,कहा अवैध शराब की शिकायत मिली तो एसपी,राजपत्रित अधिकारी होंगे जिम्मेदार….

    बिलासपुर। प्रदेश के डीजीपी डीएम अवस्थी ने बुधवार को प्रदेश के सभी आईजी एवं पुलिस अधीक्षकों की बैठक ली। यह मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।

    पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार को आयोजित हुई विशेष बैठक में कई प्रकार के मुद्दों पर चर्चा एवं विचार विमर्श किया गया ।इसके साथ ही आवश्यक दिशा निर्देश भी पुलिस अधीक्षको को दिए गए।

    आपको बता दें कि डीजीपी महिला संबंधित अपराध को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे है,,सायद यही वजह है कि वे इसकी स्वयं मोनिटरिंग कर रहे है।इसी कड़ी में वे हर कुछ दिनों में छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिलों की मॉनिटरिंग करके महिला संबंधित अपराधों का जायजा ले रहे है।इसी कड़ी में बुधवार को प्रदेश के डीजीपी सभी आईजी एवं पुलिस अधीक्षकों से मुखातिब हुए ।इस मौके पर महिलाओं की सुरक्षा ,लगातार बढ़ रहे बलात्कार के मामलों और इन पर अंकुश लगाने के बारे में आपस में रायशुमारी की गई और उन्हें निर्देशित किया गया।कहा गया कि महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए ताकि वह सुरक्षित और निडर होकर सड़कों पर चल सके ।

    इसके साथ ही थानों में पड़े पेंडिंग मामलों पर भी पुलिस प्रशासन की मुखिया ने चिंता जाहिर करते हुए ऐसे सभी मामलों की जल्द से जल्द रोकथाम करने और इनके निराकरण करने के लिए आईजी एवं पुलिस कप्तानों को कहा गया ।

    डीजीपी का सख्त फरमान अगर अवैध शराब की खबर मिली तो टीआई और राजपत्रित अधिकारी होंगे दोषी

    डीजीपी ने अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने पुलिस अधीक्षको को कड़े शब्दों में कहा है। इसके बाद भी अगर राज्य के किसी जिले से शिकायत आई तो डीजीपी ने स्पष्ट कहा है कि इसकी जवाबदेही एसपी की होगी और राजपत्रित अधिकारी की विभागीय जांच कर क्षेत्र के थानेदार को निलंबित किया जाएगा। वही महिला संबंधी अपराध की जांच कार्रवाई में तेजी लाने के साथ डीजीपी ने विभाग में अपराधिक प्रवित्ति के पुलिस कर्मियों की कोई जगह नही होने की बात वीडियो कांफ्रेंसिंग में कही है।

    डीजीपी के वीडियो कांफ्रेंसिंग में आईजी दीपांशु क़ाबरा,,एसपी प्रशांत अग्रवाल,,एडिशनल एसपी सिटी उमेश कश्यप,,एडिशनल एसपी ग्रामीण संजय ध्रुव,,डीएसपी स्नेहिल साहू समेत अन्य शामिल हुए।

  • नहीं रहे डॉक्टर राजेंद्र अग्रवाल

    नहीं रहे डॉक्टर राजेंद्र अग्रवाल

    खरसिया। नगर के प्रतिष्ठित फर्म संत रामकुमार क्लिनिक के संचालक डॉक्टर राजेन्द्र अग्रवाल का 1 नवम्बर की रात को निधन हो गया, सामाजिक धार्मिक कार्यों में अग्रणी डॉक्टर राजेन्द्र एक कुशल चिकित्सक थे, उनके असमय निधन की खबर से पूरे नगर में शोक की लहर फैल गयी, मिलनसार डॉक्टर राजेन्द्र अपने पीछे एक पुत्र, दो पुत्री,नाती,पोतों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ कर ब्रम्हलीन हो गए हैं। उनका अंतिम संस्कार 3 नवम्बर को रायगढ़ में किया गया, कोरोना काल को देखते हुए घर पर बैठक स्थगित कर दी गयी है और स्नेहीजनों को अपने घरों से ही श्रद्धांजलि देने का आग्रह किया गया है।

  • पानी की बर्बादी करने पर अब होगी 5 साल की सजा, देना होगा 1 लाख रुपए का जुर्माना…

    पानी की बर्बादी करने पर अब होगी 5 साल की सजा, देना होगा 1 लाख रुपए का जुर्माना…

    नई दिल्ली। देश में पानी की बर्बादी करने वालों को अब सचेत रहने की जरूरत है। दरअसल, अब कोई भी व्यक्ति और सरकारी संस्था यदि भूजल स्रोत से हासिल होने वाले पीने योग्य पानी (पोटेबल वाटर) की बर्बादी या बेवजह इस्तेमाल करता है तो यह एक दंडात्मक अपराध माना जाएगा। इससे पहले भारत में पानी की बर्बादी को लेकर दंड का कोई प्रावधान नहीं था। घरों की टंकियों के अलावा कई बार टैंकों से जगह-जगह पानी पहुंचाने वाली नागरिक संस्थाएं भी पानी की बर्बादी करती है। 

    सीजीडब्ल्यूए (Central Ground Water Authority) के नए निर्देश के अनुसार पीने योग्य पानी का दुरुपयोग भारत में 1 लाख रुपए तक के जुर्माना और 5 साल तक की जेल की सजा के साथ दंडनीय अपराध होगा। सीजीडब्ल्यूए ने पानी की बर्बादी और बेवजह इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए 08 अक्तूबर, 2020 को पर्यावरण (संरक्षण) कानून, 1986 की धारा पांच की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्राधिकरणों और देश के सभी लोगों को संबोधित करते हुए दो बिंदु वाले अपने आदेश में कहा है :

    • इस आदेश के जारी होने की तारीख से संबंधित नागरिक निकाय जो कि राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में पानी आपूर्ति नेटवर्क को संभालती हैं और जिन्हें जल बोर्ड, जल निगम, वाटर वर्क्स डिपार्टमेंट, नगर निगम, नगर पालिका, विकास प्राधिकरण, पंचायत या किसी भी अन्य नाम से पुकारा जाता है, वो यह सुनिश्चित करेंगी कि भूजल से हासिल होने वाले पोटेबल वाटर यानी पीने योग्य पानी की बर्बादी और उसका बेजा इस्तेमाल नहीं होगा। इस आदेश का पालन करने के लिए सभी एक तंत्र विकसित करेंगी और आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक उपाय किए जाएंगे।
    • देश में कोई भी व्यक्ति भू-जल स्रोत से हासिल पोटेबल वाटर का बेवजह इस्तेमाल या बर्बादी नहीं कर सकता है। 


    एनजीटी में दाखिल की गई थी याचिका
    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजेंद्र त्यागी और गैर सरकारी संस्था फ्रैंड्स की ओर से बीते वर्ष 24 जुलाई, 2019 को पानी की बर्बादी पर रोक लाने की मांग वाली याचिका पर पहली बार सुनवाई की थी। बहरहाल इसी मामले में करीब एक साल से ज्यादा समय के बाद 15 अक्तूबर, 2020 के एनजीटी के आदेश का अनुपालन करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने आदेश जारी किया है।

  • कॉल रिसीव करने से पहले ही पता चलेगा, कोई क्यों कर रहा आपको फोन,जानिए कैसे

    कॉल रिसीव करने से पहले ही पता चलेगा, कोई क्यों कर रहा आपको फोन,जानिए कैसे

    जरा सोचिए, यदि आपको कॉल रिसीव करने से पहले ही पता चल जाए कि आपको कोई फोन क्यों कर रहा है? अभी तक यह मुमकिन नहीं था लेकिन अब ऐसा हो सकता है। Truecaller ने एक ऐसा फीचर पेश किया है जो पहले ही बता देगा कि आपके दोस्त आपको क्यों कॉल कर रहा है।

    टूकॉलर ने अपने “कॉलर आईडी” फंक्शन को अपडेट किया है और उसमें “कॉल रीजन” फीचर को जोड़ा है। नए फीचर के साथ यूजर्स अपनी कॉल के साथ उसकी वजह भी सेट कर सकते हैं। इससे कॉल रिसीव करने वाले को पहले ही पता चल जाएगा कि कोई उसे किस कारण से फोन कर रहा है।

    आसान शब्दों में कहें तो जैसे ही कोई कॉल करेगा तो डिस्प्ले में कॉलर के नाम के नीचे कॉल करने की वजह भी टेक्स्ट के तौर पर लिखी आएगी, हालांकि यह तभी संभव है जब कॉल करने वाला कॉल करने की वजह के बारे में बताना चाहे।

    टूकॉलर ने अपने मैसेजिंग एक्सपीरियंस को भी अपग्रेड किया है। एसएमएस ट्रांसलेशन फीचर और शेड्यूल्ड एसएमएस को इसमें जोड़ा गया है। यह फीचर हर यूजर के लिए उपलब्ध होंगे। एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ये फीचर आने शुरू हो गए हैं।

    आईओएस यूजर्स को इसका फायदा अगले साल से नोटिफिकेशन के तौर पर मिल सकेगा। ट्रूकॉलर का यह फीचर काफी हद तक गूगल वेरिफाइड कॉल की तरह है, हालांकि इसकी फिलहाल टेस्टिंग हो रही है, लेकिन एप के आने के बाद ट्रूकॉलर की मुसीबत बढ़ जाएगी, क्योंकि गूगल का एप डिफॉल्ट रूप से फोन में मिलेगा।

    ट्रूकॉलर का कहना है साल 2020 में यह सबसे ज्यादा अनुरोध किया जाने वाला फीचर है। लोगों की मांग को देखते हुए इस फीचर को जारी किया गया है। ऐसे में यदि कोई चाहता है कि वह जिसे फोन कर रहा है उसे फोन करने की वजह का पहले ही पता चल जाए तो उसे फोन करने से पहले एक टेक्स्ट मैसेज लिखना होगा।

  • महिला अपराधों की पुलिस मुख्यालय से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग, गूगल स्प्रेडशीट में सभी जिलों को देना होगा ब्योरा….

    महिला अपराधों की पुलिस मुख्यालय से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग, गूगल स्प्रेडशीट में सभी जिलों को देना होगा ब्योरा….

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर महिला विरूद्ध अपराधों की सतत् निगरानी के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर अभिनव पहल की जा रही है। डीजीपी डीएम अवस्थी ने बताया कि महिला विरूद्ध अपराधों की निगरानी एवं समीक्षा गूगल स्प्रेडशीट के माध्यम से की जायेगी। इसके लिए प्रत्येक जिले को गूगल स्पे्रडशीट की एक लिंक भेजी जायेगी। लिंक को खोलते ही निर्धारित फार्मेट में प्रतिदिन की महिला विरूद्ध अपराध एवं कार्यवाही की जानकारी भरनी होगी। मॉनिटरिंग के लिए पुलिस मुख्यालय में विषेष महिला सेल का गठन किया गया है। महिला विरूद्ध अपराधों की मॉनिटरिंग के लिए मती भावना गुप्ता, एआईजी को स्टेट नोडल अधिकारी बनाया गया है। उक्त मॉनिटरिंग सिस्टम 01 नवम्बर से लागू किया जा रहा है।

    डीजीपी अवस्थी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी आईजी और एसपी को उक्त निर्देश जारी किये। डीजीपी अवस्थी पुलिस मुख्यालय से स्वयं महिला विरूद्ध अपराधों पर की गई कार्यवाही पर नजर रखेंगे। गूगल स्प्रेडशीट में अपराधों पर कार्यवाही नहीं होने पर तीन तरह के अलर्ट दिखेंगे। अपराध दर्ज करने के दिनांक से 15 दिन में गिरफ्तारी ना होने पर संबंधित जिले के कॉलम में येलो अलर्ट, गिरफ्तारी दिनांक से 15 दिन में चालान पेश नहीं करने पर रेड अलर्ट और गिरफ्तारी दिनांक से 60 दिनों में चालान पेश नहीं करने पर ब्लेक लिस्ट दिखेगा। उक्त अवधि में महिला विरूद्ध अपराधों पर कार्यवाही ना होने पर संबंधित पुलिस अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।

    पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाना उद्देश्य: पुलिस मुख्यालय स्तर पर गूगल स्प्रेडशीट के माध्यम से महिला विरूद्ध अपराधों पर निगरानी रखने का मूल उद्देश्य पीड़िताओं को त्वरित न्याय दिलाना है।

    इसके साथ ही ऑनलाईन मॉनिटरिंग सिस्टम होने से पेपर लेस रियल टाईम मॉनिटरिंग हो सकेगी।

    सुपर इन्वेस्टिगेटर का मिलेगा ईनामः ऐसे पुलिस अधिकारी महिला विरूद्ध अपराधों पर तेजी से काम करके अपराधियों को सजा दिलायेंगे उन्हें पुरस्कृत भी किया जायेगा। डीजीपी अवस्थी ने कहा कि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाने वाले पुलिस अधिकारियों को सुपर इन्वेस्टिगेटर के खिताब से नवाजा जायेगा। वे स्वयं ऐसे पुलिस अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे।

  • अगर ज्यादा दाम पर बिकते मिले शराब तो तुरंत कीजिये इन नंबरों पर शिकायत…

    अगर ज्यादा दाम पर बिकते मिले शराब तो तुरंत कीजिये इन नंबरों पर शिकायत…

    रायपुर। आबकारी मंत्री  कवासी लखमा के निर्देशानुसार राज्य सरकार के आबकारी विभाग द्वारा मदिरा दुकानों से ओव्हर रेटिंग पर मदिरा के विक्रय की शिकायत प्राप्त करने के लिए वाट्सएप मोबाइल नंबर 9424102102 जारी किया गया है। इस सुविधा के माध्यम से ग्राहक द्वारा मदिरा दुकान से उचित दर पर मदिरा विक्रय न किया जाना पाए जाने पर उस दुकान का वीडियो बनाकर वाट्सएप मोबाइल नम्बर 9424102102 पर भेजा जा सकता है। वीडियो प्राप्त होने पर उक्त नंबर के नाम पर आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज की जाएगी। विभाग के द्वारा उक्त वीडियो की जांच कर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। साथ ही की गई कार्यवाही से उक्त मोबाइल नंबर पर सूचित किया जाएगा।

    वाट्सएप के माध्यम से वीडियो प्राप्त होने पर विभाग को कार्यवाही करने में आसानी होगी तथा प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्यवाही की जा सकेगी। वाट्सएप मोबाइल नंबर 9424102102 पर आबकारी अपराध जैसे अवैध मदिरा परिवहन, धारण एवं विक्रय तथा अन्य नशीले पदार्थाें के विक्रय एवं धारण से संबंधित वीडियो भी भेजे जा सकते हैं जिस पर भी कार्यवाही की जाएगी।
    विभाग में पूर्व से ही टोल फ्री नंबर 14405 कार्यरत है उक्त नंबर पर शिकायत ग्राहकों के द्वारा मुफ्त में की जा सकती है। उक्त नंबर पर आनेवाली शिकायतों पर विभाग द्वारा निरंतर कार्यवाही की जा रही है एवं आबकारी अधिनियम के तहत अपराध कायम किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 700 शिकायतें टोल फ्री नंबर पर प्राप्त हुई हैं। जिनकी जांच कर कार्यवाही आबकारी विभाग द्वारा की गई है।
    मदिरा दुकानों के निरीक्षण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने तथा मास्क लगाए जाने के लिए ग्राहकों को हिदायतें दी जा रही हैं।

  • निगम आयुक्त ने जेएसपीएल के विरुद्ध जारी किया वारंट…

    निगम आयुक्त ने जेएसपीएल के विरुद्ध जारी किया वारंट…

    39 करोड़ का टैक्स जमा नहीं करने पर ईई को दिया कुर्की करने का आदेश

    नगर निगम आयुक्त ने टैक्स वसूली को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नोटिस के बाद भी 39 करोड़ का टेक्स जमा नही करने वाले जेएसपीएल के विरुद्ध वारंट जारी किया गया है। ईई को जारी किए गए आदेश में तय समय मे टेक्स जमा नहीं करने की स्थिति में जेएसपीएल की अचल सम्पति को कुर्क करने को कहा गया है।
    मिली जानकारी के अनुसार जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने नगर निगम रायगढ़ को टैक्स का भुगतान नहीं किया है नगर निगम ने लगभग 39 करोड़ रुपए का टैक्स जमा करने जीएसपीएल को नोटिस दिया है लेकिन नोटिस के बाद भी जेएसपीएल प्रबंधन उक्त टैक्स की राशि को जमा नहीं कर रहा है। ऐसे में नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे ने बड़ा फैसला लेते हुए जिंदल के विरुद्ध वारंट जारी कर दिया है ।

    नगर निगम ईई को जिंदल से टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी दी गई है। जिंदल को टैक्स जमा करने 12 नवंबर तक का समय दिया गया है इसके बाद टैक्स की राशि वसूलने जेएसपीएल की अचल संपत्ति की कुर्की करने का आदेश आयुक्त द्वारा जारी किया गया है। टैक्स की वसूली में ईई नगर निगम को जीएसपीएल की खिड़की और दरवाजे तक को तोड़कर संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया गया है। यह बता दें की टैक्स को लेकर जिंदल प्रबंधन और नगर निगम के बीच कई सालों तक न्यायालय में मामला चलता रहा है लेकिन अब नगर निगम को टैक्स वसूली का अधिकार मिल गया है यह पहली बार है जब जेएसपीएल जैसे बड़े संस्थान की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया है। निगमायुक्त ने जारी किए गए वारंट में साफ कहा है कि जेएसपीएल को टैक्स की राशि अदा करनी पड़ेगी।