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  • छत्तीसगढ़ स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: एनईपी-2020 के तहत अब 5वीं, 7वीं और 8वीं का बदलेगा सिलेबस, स्थानीय संस्कृति को मिलेगी प्रमुखता…

    छत्तीसगढ़ स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: एनईपी-2020 के तहत अब 5वीं, 7वीं और 8वीं का बदलेगा सिलेबस, स्थानीय संस्कृति को मिलेगी प्रमुखता…

    रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत छत्तीसगढ़ में अब कक्षा 5वीं, 7वीं और 8वीं की किताबें और पाठ्यक्रम बदले जाएंगे। पहली से तीसरी और 6वीं की नई किताबों के बाद अब इस चरण का काम शुरू हो गया है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने 7 जुलाई से 30 सितंबर तक तीन महीने का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है।
    नई किताबें एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी, लेकिन इनमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भूगोल, लोकजीवन, जनजातीय इतिहास और स्थानीय महापुरुषों से जुड़ी सामग्री भी शामिल की जाएगी। पूरे काम के लिए सेवानिवृत्त प्राचार्यों और विषय विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी गई है। मालूम हो कि इस संबंध में पूर्व में छत्तीसगढ़ से संबंधित पाठ हटाने पर काफी विरोध हुआ था। बाद में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने एससीईआरटी उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सकारात्मक पहल करने को कहा। छत्तीसगढ़ी, संस्कृति, रिती-रिवाज, पर्यटन, तीज त्योहारों, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी कोर्स में शामिल करने के निर्देश दिए थे। अब उस पर काम शुरू हो रहा है।
    एससीईआरटी संचालक रितुराज रघुवंशी ने 7 जुलाई से 30 सितंबर तक विषयवार कार्यशालाएं लगाने का टाइम-टेबल बनवाया है। इस दौरान पाठ्यक्रम की समीक्षा, विषय सामग्री का चयन, अध्याय लेखन, अभ्यास प्रश्न तैयार करना, ग्राफिक डिजाइन, प्रूफ रीडिंग, ले-आउट और अंतिम संशोधन जैसे सभी काम पूरे किए जाएंगे। सितंबर के अंत में किताबों का अंतिम मसौदा शिक्षा स्थायी समिति के सामने रखा जाएगा। पहले पहली से तीसरी और 6वीं की किताबें हो चुकीं हैं तैयार एससीईआरटी इससे पहले कक्षा 1, 2, 3 और 6 की 23 पाठ्यपुस्तकें (हिंदी और अंग्रेजी माध्यम) तैयार कर चुका है। इन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू करने की मंजूरी मिल चुकी है। इसी के तहत राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एससीएफ) भी तैयार की गई थी।
    इस चरण में कक्षा 5वीं और 8वीं के सभी विषयों की किताबें तैयार की जाएंगी। वहीं कक्षा 7वीं में गणित और योग शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उद्देश्य है कि बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और स्थानीय परिवेश से जुड़ी शिक्षा मिल सके। एससीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार नई किताबों में छत्तीसगढ़ के भूगोल, लोक संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्थानीय महापुरुषों की जानकारी को प्रमुखता दी जाएगी। किताबों की भाषा सरल और बच्चों के लिए सहज बनाने के लिए सेवानिवृत्त प्राचार्यों और विषय विशेषज्ञों का अनुभव लिया जा रहा है।

  • कोयले की धरती पर विकास का धुआं, विधायक पर उठते सवाल…

    कोयले की धरती पर विकास का धुआं, विधायक पर उठते सवाल…

    रायगढ़ लैलूंगा में सत्ता विरोध की आहट, सोशल मीडिया बना नया विपक्ष लैलूंगा विधानसभा… प्रदेश का शायद सबसे विचित्र राजनीतिक और भौगोलिक इलाका। रायगढ़ शहर के पांच वार्ड इसकी सीमा में आते हैं, लेकिन विकास की रफ्तार कई गांवों तक पहुंचते-पहुंचते जैसे थक जाती है। विडंबना यह है कि जिस धरती के नीचे कोयले का अकूत खजाना है, उसी धरती पर सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे सवाल आज भी खदानों की धूल में दबे पड़े हैं। सवाल यह नहीं कि संसाधन नहीं हैं, सवाल यह है कि उनका लाभ आखिर पहुंचा किस तक?
    ढाई साल पहले कांग्रेस ने निष्क्रियता के आरोपों के बीच तत्कालीन विधायक चक्रधर सिदार का टिकट काटकर नया चेहरा विद्यावती सिदार सामने रखा। उम्मीद थी कि नया नेतृत्व नई ऊर्जा लाएगा। लेकिन आज क्षेत्र में उल्टी तुलना सुनाई देने लगी है। कांग्रेस के कई पुराने कार्यकर्ता और आम लोग यह कहते मिल जाते हैं कि “चक्रधर कम बोलते थे, लेकिन लोगों के बीच दिखते तो थे।”
    राजनीति में कभी-कभी सबसे कठोर विपक्ष सामने वाली पार्टी नहीं, बल्कि मोबाइल का कमेंट बॉक्स बन जाता है। रायपुर के कांग्रेस शिविर से नेताओं को मीडिया और सोशल मीडिया में सक्रिय रहने का संदेश मिला। लैलूंगा की विधायक ने भी सक्रियता बढ़ाई, लेकिन हर नई पोस्ट के नीचे विकास का रिपोर्ट कार्ड खुलने लगा।

    मुड़ागांव में जंगल कटाई, प्रगति नगर की कार्रवाई, धौराभांटा की जनसुनवाई… सोशल मीडिया पर लोग एक-एक मुद्दा गिनाकर पूछ रहे हैं कि विरोध सिर्फ फोटो तक सीमित था या उसका कोई असर भी हुआ? राजनीति में धारणा कई बार वास्तविकता से बड़ी हो जाती है, और फिलहाल यही धारणा विधायक के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती दिख रही है।
    दूसरा मोर्चा संगठन का है। कांग्रेस के भीतर दबे स्वर अब फुसफुसाहट से आगे बढ़कर चर्चा बनने लगे हैं। चुनाव में मेहनत करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें अब महत्व नहीं मिल रहा। वहीं कई स्थानीय नेताओं का मानना है कि विधायक के पति कुंज बिहारी की बढ़ती सक्रियता ने संगठन में समानांतर शक्ति केंद्र की चर्चा को जन्म दिया है। इन आरोपों पर विधायक की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीति में कई बार चर्चाएं भी माहौल बना देती हैं।

    कमजोर नेतृत्व क्षेत्र का नुकसान
    लैलूंगा की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां खदानें बढ़ीं, उद्योग बढ़े, उत्पादन बढ़ा… लेकिन क्या उसी अनुपात में गांव भी बढ़े? यह सवाल लगातार उठ रहा है। कोल ब्लॉक और बड़े उद्योगों से घिरे इस इलाके में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसे मुद्दे चुनावी भाषणों से बाहर नहीं निकल पाए। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि उद्योगों की सीएसआर राशि का असर गांवों में उतना दिखाई नहीं देता, जितना कागजों में दिखाई देता है।
    अदाणी समूह समेत बड़े औद्योगिक घरानों की मौजूदगी वाले इस क्षेत्र में विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि उद्योगों और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और अधिक प्रभावी क्यों नहीं रही। यह राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी दलीलें हैं, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा चुनाव तक जीवित रहने वाला है।

    कांग्रेस की निष्क्रियता और भाजपा के अंतर्कलह का फायदा किसे

    लैलूंगा की राजनीति की एक और खासियत है कि यहां मतदाता किसी दल के स्थायी नहीं, अपने फैसले के स्थायी हैं। पिछले चुनाव में भाजपा बेहद कम अंतर से हार गई थी। उस हार में विपक्ष से ज्यादा चर्चा भाजपा की अंदरूनी राजनीति की हुई थी। अब यदि वही स्थिति दोबारा बनी और कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल भी मजबूत हुआ, तो मुकाबला पहले से कहीं अधिक दिलचस्प हो सकता है।
    यही कारण है कि युवा नेता रवि भगत की सक्रियता पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। टिकट न मिलने की पीड़ा, पत्नी की जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी ठुकराए जाने का अनुभव और अब संगठन से दूरी, इन सबने उन्हें एक अलग राजनीतिक पहचान दी है। यदि भाजपा फिर अंतर्कलह में उलझी तो रवि भगत समीकरण बदल सकते हैं, और यदि भाजपा एकजुट रही तो भी वे स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बने रहेंगे।

    फिलहाल लैलूंगा की राजनीति में सबसे बड़ी अदालत जनता का मोबाइल बन चुका है। वहां लाइक से ज्यादा कमेंट पढ़े जा रहे हैं और पोस्टर से ज्यादा प्रदर्शन का हिसाब मांगा जा रहा है। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन जनता ने संकेत दे दिया है कि इस बार सिर्फ चेहरे नहीं, काम भी तौले जाएंगे। लैलूंगा अब केवल सत्ता बदलने वाली सीट नहीं, बल्कि नेताओं का रिपोर्ट कार्ड जांचने वाली विधानसभा बनती जा रही है।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला : राजस्व मंडल का आवेदन खारिज, निरक्षर ग्रामीणों को देरी से दायर याचिका पर भी मिलेगा न्याय का अवसर…

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला : राजस्व मंडल का आवेदन खारिज, निरक्षर ग्रामीणों को देरी से दायर याचिका पर भी मिलेगा न्याय का अवसर…

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समय-सीमा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, कम पढ़े-लिखे और आदिवासी वर्ग के लोग अपने मामलों में पूरी तरह वकीलों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल इस आधार पर न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने समय पर अपील या पुनरीक्षण याचिका दायर नहीं की।

    राजस्व मंडल का आदेश किया निरस्त
    जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, बिलासपुर के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सात ग्रामीणों की विलंब से दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए राजस्व मंडल को वापस भेजते हुए सभी पक्षों को सुनकर गुण-दोष के आधार पर नया निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

    बेदखली की कार्रवाई से जुड़ा है मामला
    मामला मरियमपारा निवासी 68 वर्षीय कोदिया उरांव और अन्य ग्रामीणों से जुड़ा है। ग्रामीण लंबे समय से जिस भूमि पर मकान बनाकर रह रहे थे, वहां से बेदखली की कार्रवाई तहसीलदार द्वारा शुरू की गई थी। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने सरगुजा संभाग आयुक्त न्यायालय में अपील दायर की थी। हालांकि 21 जुलाई 2025 को आयुक्त न्यायालय ने तहसीलदार के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी।

    जनवरी 2026 में मिली आदेश की जानकारी
    ग्रामीणों का कहना था कि वे दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के निवासी और निरक्षर हैं, इसलिए उन्हें आयुक्त न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं मिल सकी। जनवरी 2026 में जब प्रशासन उनके मकानों को हटाने पहुंचा, तब उन्हें मामले की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दायर की और देरी माफ करने का आवेदन भी प्रस्तुत किया।

    राजस्व मंडल ने बताया था लापरवाही
    राजस्व मंडल ने 9 मार्च 2026 को आवेदन खारिज करते हुए कहा था कि ग्रामीणों ने अपने अधिवक्ता से मामले की जानकारी लेने का प्रयास नहीं किया, जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए ग्रामीण हाईकोर्ट पहुंचे थे।

    न्याय का उद्देश्य अधिकारों की रक्षा- हाईकोर्ट
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे आदिवासी समाज के गरीब और निरक्षर लोग हैं तथा पूरी तरह अपने वकील पर निर्भर थे। जैसे ही उन्हें बेदखली की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं राज्य शासन की ओर से कहा गया कि सात महीने की देरी के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं और राजस्व मंडल का आदेश वैधानिक है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि समय-सीमा में छूट देने संबंधी कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि तकनीकी आधार पर किसी के अधिकारों का हनन करना। अदालत ने माना कि राजस्व मंडल ने ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

    दोबारा होगी सुनवाई
    हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। अब राजस्व मंडल सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में नए सिरे से निर्णय करेगा।

  • बिजली विभाग के अधिकारी को जान से मारने की धमकी, FIR दर्ज…

    बिजली विभाग के अधिकारी को जान से मारने की धमकी, FIR दर्ज…

    रायपुर। सिविल लाईन पुलिस ने अरूण भद्रा पर सहायक अभियंता (एई) से गाली गलौज और जान से मारने की धमकी के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया है। टाउन हॉल के पास स्थित बिजली आफिस में यह घटना बुधवार रात हुई।रात करीब 8 अरूण भद्रा बिजली आफिस पहुंचा और वहां मौजूद एई मुकेश त्रिपाठी 53 से बिजली बिल में गलत मीटर रीडिंग डालने का कारण पूछा। इसी सवाल जबाव के दौरान अरूण भद्रा ने आपा खोया और गाली गलौज करते हुए जान से मारने की भी धमकी दी। मुकेश ने रात 9.30 बजे सिविल लाइन थाने में अरूण के खिलाफ लिखित रिपोर्ट दी । इस पर पुलिस ने धारा 221,224,296,351-2 के तहत शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का अपराध दर्ज किया है।

  • निकाह व्यवस्था में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ में गैर-मुस्लिम से निकाह से पहले लेनी होगी अनुमति, मौलानाओं का भी होगा रजिस्ट्रेशन…

    निकाह व्यवस्था में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ में गैर-मुस्लिम से निकाह से पहले लेनी होगी अनुमति, मौलानाओं का भी होगा रजिस्ट्रेशन…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में निकाह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाने की दिशा में वक्फ बोर्ड बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं का पंजीयन भी किया जाएगा। बोर्ड की योजना है कि यह व्यवस्था अगस्त 2026 से लागू कर दी जाए। वक्फ बोर्ड के मुताबिक, अंतरधार्मिक निकाह के मामलों में दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं की जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी। बोर्ड का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य निकाह व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को कम करना है।

    केवल पंजीकृत मौलाना ही करा सकेंगे निकाह

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। केवल पंजीकृत मौलाना ही वैध रूप से निकाह संपन्न करा सकेंगे। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना निकाह कराने की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

    दस्तावेजों की होगी विस्तृत जांच

    वक्फ बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक निकाह के हर मामले में दोनों पक्षों की पहचान, आवश्यक दस्तावेज और लागू कानूनी प्रक्रियाओं का सत्यापन किया जाएगा। जहां कानून के तहत धर्म परिवर्तन की आवश्यकता होगी, वहां उससे जुड़ी औपचारिकताओं का पालन भी सुनिश्चित कराया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निकाह की अनुमति दी जाएगी।

    हर निकाह का रिकॉर्ड रहेगा वक्फ बोर्ड के पास

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रदेश में संपन्न होने वाले सभी निकाह का डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा। निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा पूरे प्रदेश में निकाहनामा का एक समान प्रारूप लागू करने की तैयारी है, ताकि भविष्य में दस्तावेजों से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।

    वक्फ बोर्ड ने बताई नई व्यवस्था की वजह

    छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज का कहना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं। इसके कारण बाद में वैवाहिक स्थिति, पहचान और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी आसान होगी और प्रत्येक निकाह का प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

    आदिवासी क्षेत्रों की शिकायतों के बाद लिया फैसला

    वक्फ बोर्ड के अनुसार, आदिवासी इलाकों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने तथा संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में जांच करना आसान होगा।

  • प्रदेश में माननीय एवं ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक प्रकरण लंबित हाईकोर्ट ने विशेष एमपी, एमएलए कोर्ट में लंबित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट जारी किया….

    प्रदेश में माननीय एवं ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक प्रकरण लंबित हाईकोर्ट ने विशेष एमपी, एमएलए कोर्ट में लंबित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट जारी किया….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमपी, एमएलए विश्ोष कोर्ट में प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक पूर्व व वर्तमान विधायकों व उनके ब्यूरोक्रेटस के खिलाफ चल रहे आपराधिक प्रकरणों की स्थिति की रिपोर्ट जारी किया है। इसमें अधिकांश विधायकों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन के दौरान हंगामा, तोड़फोड़ का मामला दर्ज किया है।

    जारी रिपोर्ट में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ अपराध क्रमांक 541/2026 में धारा 190, 191 (2) 192, 126 (2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर सीजेएम बिलासपुर की अदालत में प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान में प्रकरण 1 जुलाई को चार्ज के लिए लगा है।

    बलौदाबाजार तृतीय एडीजे व सीजेएम की अदालत में किशोर नवरंग, विधायक देवेंद्र यादव व प्रमोद शर्मा पूर्व विधायक सहित 11 अन्य के खिलाफ अपराध क्रमांक 2818/2024 और 39/2024, 1354/2024 आपराधिक प्रकरण दर्ज है।

    जांजगीर-चाम्पा जिला अदालत में दो आपराधिक प्रकरण दर्ज है। अपराध क्रमांक 116/125 में वेदप्रकाश साहू व 7 अन्य तथा बालेश्वर साहू के खिलाफ धारा 147, 294, 452, 323, 149, 427 आईपीसी के तहत प्रकरण चल रहा। मामला अभियोजन साक्ष्य के लिए रखा गया है। इसी प्रकार अपराध क्रमांक 34/2026 में गौतम राठौर और बालेश्वर साहू के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत प्रकरण लंबित है।

    कवर्धा सीजेएम कोर्ट में अपराध क्रमांक 135/2022 में छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ब अशोक साहू व अन्य के खिलाफ 147,148, 149, 109, 353, 332, 153 (ए), 186, 188, 295, 427, 120 (बी) व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रकरण विचाराधीन है।

    इसके साथ रायपुर के अलग अलग विश्ोष कोर्ट में एसीबी द्बारा दर्ज अपराध क्रमांक 01/ 2024 में विधायक कवासी लखमा, पूर्व आबकारी अधिकारी अरूण पति त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्ट्राचर निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण लंबित है।

    ईडी के प्रकरण क्रमांक ०3/2023 में देवेंद्र सिंह यादव व चंद्रदेव प्रसाद राय के खिलाफ मनीलॉड्रिंग का मामला चल रहा।

    ईडी के प्रकरण क्रमांक ०5/2024 में विधायक कवासी लखमा के खिलाफ मनीलॉड्रिंग एक्ट का प्रकरण लंबित है। आपराधिक प्रकरण क्रमांक 22283/2013 में संजीव शुक्ला व देवेंद्र यादव के खिलाफ 147, 188, 353, 332, 186 आईपीसी के तहत प्रकरण लंबित है। अपराध क्रमांक 4819 /2018 में डेमाल प्रसाद व श्रीमती उद्बेश्वरी पैकरा के खिलाफ 147, 341 के तहत मुकदमा चल रहा है। अपराध क्रमांक 4884/2018 में आकाश शर्मा व अन्य के खिलाफ 353, 186, 332, 427, 147 आईपीसी के तहत प्रकरण चल रहा है।

    सीबीआई के विश्ोष प्रकरण क्रमांक 5465/2018 में कैलाश मुरारका, भूपेश बघ्ोल, विजय भाठिया के खिलाफ 120 बी, 469, 471 आईपीसी एवं 67 ए आईटी एक्ट का प्रकरण चल रहा।

    अपराध क्रमांक 666/ 2025 में पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी व अन्य के खिलाफ 341,147 आईपीसी के तहत प्रकरण लंबित है। अपराध क्रमांक 667/2025 में गोवर्धन मांझी व अन्य के खिलाफ 341, 147 के तहत मामला लंबित है। अपराध क्रमांक 391/2024 में रोहित साहू व अन्य के खिलाफ दो अलग अलग प्रकरण धारा 341, 147, 186 का लंबित है। सर्वाधिक प्रकरण रायपुर न्यायालय में चल रहा है।

    इसी प्रकार राजनांदगांव जिला न्यायालय के विश्ोष कोर्ट में सीजीपीडीआई एक्ट के तहत मोहम्मद खालिद व पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के खिलाफ 6 प्रकरण पेश किया गया है। सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फिलहाल सुनवाई पर रोक लगाई है।

  • हीरा ग्रुप घोटाले में बड़ा एक्शन, ईडी ने 159 करोड़ की संपत्तियां नीलाम कीं…

    हीरा ग्रुप घोटाले में बड़ा एक्शन, ईडी ने 159 करोड़ की संपत्तियां नीलाम कीं…

    हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उनसे जुड़ी संस्थाओं की लगभग 159 करोड़ रुपए की कीमत वाली 23 अटैच्ड अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी की है। ईडी, हैदराबाद ने नीलामी से पहले नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने भोले-भाले लोगों से सालाना 36 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देने का वादा करके 5,978 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश इकट्ठा किया, लेकिन वे लोगों को मूल रकम भी वापस नहीं कर पाए, जिससे देश भर में बड़ी संख्या में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई।

    इसी के संबंध में ईडी, हैदराबाद जोनल ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट के रिट पिटीशन में मिसलेनियस एप्लीकेशन के निर्देशों का पालन करते हुए शुक्रवार को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के जरिए आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य संबंधित संस्थाओं की अटैच्ड अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक आयोजित की। ईडी द्वारा नीलाम की गई संपत्तियों में वे एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अटैच किया गया था। इन एसेट्स की पहचान ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (निर्धारित अपराधों) से हुई ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध से हुई कमाई) से हासिल या अर्जित संपत्ति के तौर पर की गई थी और पीएमएलए की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इसकी पुष्टि की थी।

    नीलामी की प्रक्रिया एमएसटीसी लिमिटेड के जरिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित की गई थी। वहीं, नीलामी से मिली रकम का इस्तेमाल असली निवेशकों/पीड़ितों को पैसे वापस करने और मुआवजा देने के लिए किया जाएगा। यह काम पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट की देखरेख और निर्देशों के तहत होगा, जिससे उन हजारों निवेशकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिनके साथ आरोपियों ने धोखाधड़ी की थी। ईडी जांच के दौरान, नोहेरा शेख सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहीं। उनके व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद हैदराबाद में पीएमएलए के तहत स्पेशल कोर्ट ने 7 मई को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसी संबंध में खास जानकारी मिलने पर ईडी ने उन्हें 21 मई को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया और संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जहां वे अभी भी हैं। वहीं, उनकी पर्सनल असिस्टेंट नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा, अपराध से हुई कमाई को रखने, इस्तेमाल करने और उसे और बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थीं।

  • रायपुर में डॉक्टरों का कैंडल मार्च : बाहरी राज्यों से आउटसोर्सिंग का विरोध, स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर किया प्रदर्शन…

    रायपुर में डॉक्टरों का कैंडल मार्च : बाहरी राज्यों से आउटसोर्सिंग का विरोध, स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर किया प्रदर्शन…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों ने भाग लिया।

    डॉक्टरों ने राज्य  सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बगैर पंजीयन दूसरे राज्य से आउटसोर्सिंग का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

    डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

    प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—

    • इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि।
    • राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।
    • छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकार और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
    • मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में बाहरी राज्यों से बिना पंजीयन प्रवेश का विरोध।

    लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप

    कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के रोजगार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का भी सवाल है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेश के युवा चिकित्सकों में असंतोष और चिंता को और बढ़ा दिया है।

    डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी

    प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। यह संघर्ष पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

    JDA और CGDF का संयुक्त बयान

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और स्थानीय युवाओं के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

  • EOW-ACB की बड़ी कार्रवाई : नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप…

    EOW-ACB की बड़ी कार्रवाई : नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप…

     रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा को गिरफ्तार किया है। वर्मा पर निविदा (टेंडर) आवंटन के बदले रिश्वत मांगने और आय से अधिक अकूत संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं।

    EOW-ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए रायपुर, बिलासपुर और मध्यप्रदेश के उज्जैन कुल 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।

    जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े अहम सुराग सामने आए हैं। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी भागीरथ वर्मा को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। इस दौरान EOW-ACB उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी।

    अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में टेंडर प्रक्रिया, कथित रिश्वतखोरी और अन्य संभावित आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। EOW-ACB का कहना है कि जांच अभी जारी है। बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • पुलिस परिवारों ने कहा: 8-10 साल से नक्सल क्षेत्र में ड्यूटी, फिर भी ट्रांसफर नहीं…

    पुलिस परिवारों ने कहा: 8-10 साल से नक्सल क्षेत्र में ड्यूटी, फिर भी ट्रांसफर नहीं…

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के स्थानांतरण की मांग को लेकर मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के परिजन पुलिस महानिदेशक … (डीजीपी) से मुलाकात करने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि चार दिन पहले ही मुलाकात के लिए आवेदन देने के बावजूद उन्हें डीजीपी से मिलने का अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी देखी गई।

    जानकारी के अनुसार, लगभग 200 निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के माता-पिता, पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन अपने परिवार के सदस्यों के वर्षों से लंबित स्थानांतरण की मांग लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे डीजीपी से यह जानना चाहते थे कि आखिर उनके परिजनों का स्थानांतरण कब होगा, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप है कि डीजीपी ने अन्य लोगों से मुलाकात की, जबकि वे उनसे नही मिले ।
    परिजनों का कहना है कि उनके परिवार के सदस्य पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार नक्सल प्रभावित और अनुसूचित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कई बार विभाग को स्थानांतरण के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि इस लंबे कार्यकाल का असर पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पारिवारिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
    परिजनों ने यह भी दावा किया कि स्थानांतरण को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों का सामान्यतः तीन वर्ष बाद मैदानी क्षेत्रों में स्थानांतरण किया जाता है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यही नीति लागू है तो बड़ी संख्या में निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8 से 10 वर्षों से नक्सल क्षेत्रों में ही क्यों पदस्थ है।

    पुलिस परिवारों की बात सुनने के बजाय उन्हें मिलने से रोक दिया

    संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने आरोप लगाया कि पुलिस परिवारों की बात सुनने के बजाय उन्हें मिलने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया किसी कारणवश प्रभावित है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और परिवार के सदस्यों को डीजीपी तक पहुंचने नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से लंबित स्थानांतरण की मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।