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  • आल इंडिया रेडियो के सभी 43 चैनल्स (विविध भारती, FM गोल्ड इत्यादि) अब आपके फोन पर…

    आल इंडिया रेडियो के सभी 43 चैनल्स (विविध भारती, FM गोल्ड इत्यादि) अब आपके फोन पर…

    आज से आल इंडिया रेडियो के सभी 43 चैनल्स (विविध भारती, FM गोल्ड इत्यादि) अपने फोन पर बिना हेडफोन के सुन सकेंगे जिसकी लिंक नीचे दी गई है।।

    http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=43


  • एक और बैंक दिवालिया होने की कगार पर, अगर आपका भी अकाउंट है तो सतर्क हो जाएं

    एक और बैंक दिवालिया होने की कगार पर, अगर आपका भी अकाउंट है तो सतर्क हो जाएं

    दिल्ली. देश में जोर शोर से साल भर पहले सरकार ने इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की शुरुआत की थी लेकिन शुरु होने के सालभर के भीतर ही बैंक की हालत खस्ता हो गई है.
    अब हाल ये है कि बैंक के पास अपने कर्मचारियों को सेलरी देने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं. दरअसल बैंक का बिजनेस उस तरह  नहीं हो रहा है जितने की उम्मीद की गई थी. अब डाक विभाग ने आरबीआई से इसको स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलने की इजाजत मांगी है.


    दरअसल नियमों के मुताबिक इस पेमेंट बैंक में एक लाख रुपये से ज्यादा का जमा नहीं हो सकता है औऱ न ही बैंक किसी को कर्ज दे सकता है. ऐसे में बैंकिंग के दोनों आकर्षक फीचर्स न होने की वजह से बैंक को उतनी कमाई नहीं हो रही है जितनी की उम्मीद थी. अब बैंक ने आरबीआई से खुद को स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलने की मंजूरी मांगी है.

  • सुब्रमण्यम स्वामी बोले- जीएसटी काे लागू करना सरकार का पागलपन, इसे खत्म करना चाहिए

    सुब्रमण्यम स्वामी बोले- जीएसटी काे लागू करना सरकार का पागलपन, इसे खत्म करना चाहिए

    केंद्र सरकार सेठों को रियायतें देने के अलावा आम आदमी को राहत देने के लिए काम करें

    पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद हैं डाॅ. सुब्रमण्यम स्वामी

    शिमला पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद डाॅ. सुब्रमण्यम स्वामी ने जीएसटी लागू करने के निर्णय काे पागलपन बताया। विराट हिंदाेस्तान संगम की राज्य कार्यकारिणी के गठन के बाद प्रेस कांफ्रेंस काे संबोधित करते हुए डा. स्वामी ने कहा कि जीएसटी लागू हाेने से कुछ हाेने वाला नहीं है ऐसे में इसे खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सेठों को रियायतें देने के अलावा आम आदमी को राहत देने के लिए कार्य करना चाहिए। बैंकों में ब्याज दर को बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि लोग बैंकाें में पैसा जमा करने के लिए आगे आए।
    उन्होंने लोगोंको दिए जाने वाले ऋण की ब्याज दर को कम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेठों को आयकर में छूट देने के विरोधी नहीं है, लेकिन आम आदमी के हाथ तक अधिक पैसा पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमाेहन सिंह अच्छे आदमी हैं, ईमानदार हैं, लेकिन वे राष्ट्रवादी चरित्र नहीं निभाते। वे इटली की महिला से डरते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश के इतिहास से बहुत खिलवाड़ हुआ है। देश के युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराना जरूरी है।
    राज्यसभा सांसद वरिष्ठ नेता डाॅ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि गोडसे के बारे में, मैं शोध कर रहा हूं कि क्या उन्होंने गांधी की हत्या की या उनके खिलाफ एक साजिश रची गई थी। जेएनयू के प्रोफेसर झूठ बोलने और लिखने में माहिर हैं। देश के गौरवशाली इतिहास और विजयनगर जैसे साम्राज्य का इतिहास और हिंदुओं के इतिहास काे छुपाया गया है। पंडित नेहरू पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी जी की मौत का फायदा उन्होंने उठाया और आरएसएस पर बैन लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य बंडारू दत्तात्रेय ने भी अपने विचार प्रकट किए।

  • फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल की सजा

    फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल की सजा

    जिले में फर्जी शिक्षाकर्मियों के खिलाफ प्रथम श्रेणी व्यवहार न्यायालय कुरूद ने बड़ा फैसला सुनाया है. मगरलोड जनपद पंचायत में वर्ष 2008 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में 11 फर्जी शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

    बता दें कि वर्ष 2008 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की नौकरी के लिए अभ्यर्थियों की भर्ती की गई थी. मगरलोड जनपद पंचायत में भी विज्ञान एवं कला विषय के लिए 211 पदों पर भर्ती हुई थी. इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का आरोप ग्राम चंदना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू ने लगाया था. उसने सूचना के अधिकार के तहत तमाम दस्तावेज हासिल करने के बाद 3 जून 2006 को धमतरी कलेक्टर और एसपी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया था.
    शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर मगरलोड थाना में 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ था. शिकायत करने के करीब 9 साल बाद 6 अगस्त 2018 को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुरूद में शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू का बयान दर्ज किया गया. सभी पक्ष को सुनने के बाद न्यायाधीश महेश बाबू ने आरोप को सही पाते हुए सभी 11 शिक्षाकर्मियों को धारा 420 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 467 के तहत 2 वर्ष 6 माह कठोर कारावास व 1000 रुपये अर्थदंड, धारा 468 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपये अर्थदंड और धारा 471 के तहत 1 वर्ष कठोर कारावास व 500 अर्थदंड की सजा सुनाया है.

    इन फर्जी शिक्षाकर्मियों को हुई सजा

    जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज के जरिए शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की नौकरी हासिल की थी, उनमें सुबोध कुमार साहू, शिवकुमार सोनकर, देवेंद्र कुमार साहू, गीता साहू, योगेश कुमार साहू, देवबती साहू, बसंत पटेल, टेमन लाल विश्वकर्मा, हीरालाल साहू, मनोज कुमार सिन्हा, तोरण सिन्हा शामिल हैं, जिन्हें न्यायालय ने कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

    सीईओ के खिलाफ भी हुई थी शिकायत

    आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू का कहना है कि शिक्षाकर्मी फर्जीवाड़ा में जनपद सीईओ समेत छानबीन समिति की भी मुख्य भूमिका रही है, क्योंकि छानबीन समिति के द्वारा फर्जी दस्तावेजों को भी सही बताते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को शिक्षाकर्मी की नौकरी दिलाने का काम किया गया. इस मामले में करीब 20 शिक्षाकर्मियों के अलावा जनपद सीईओ और छानबीन समिति के विरुद्ध भी थाना में शिकायत दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने सिर्फ 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया, बाकी लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने के बजाय उन्हें छोड़ दिया गया. अब जब न्यायालय ने भी आरोप को सही पाते हुए फर्जी शिक्षाकर्मियों को सजा दे दी है, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि छानबीन समिति में शामिल लोगों के द्वारा इस फर्जीवाड़े को अमलीजामा पहनाया गया था, लिहाजा उनके विरुद्ध भी कार्यवाही किया जाना चाहिए.

  • हनी ट्रेप कांड में एसआईटी के हाथ लगे अहम सबूत -मास्टर माइंड श्वेता जैन के लॉकर ने उगले राज़ !

    हनी ट्रेप कांड में एसआईटी के हाथ लगे अहम सबूत -मास्टर माइंड श्वेता जैन के लॉकर ने उगले राज़ !

    भोपाल। हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही स्पेशनल इंवेस्टिगेशन टीम मंगलवार को मामले में आरोपित श्वेता जैन और आरती दयाल के लॉकरों की जांच करने पहुंची। एसआईटी की टीम ने इंद्रपुरी स्थित एचडीएफसी बैंक में लॉकर खंगाले। एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक एसआईटी को आरोपित श्वेता जैन के लॉकर से साढ़े तेरह लाख नगद बरामद हुए हैं जबकि आरोपित आरती दयाल का लॉकर खाली मिला है। एसआईटी ने मौके पर ही लॉकर से बरामद रूपए का जप्ती पंचनामा बनाकर अपने कब्जे में ले लिया है।

    एसआईटी की टीम ने मंगलवार शाम बैंक में करीब चार घंटे जांच की। सूत्र बताते हैं कि आरोपित आरती दयाल गिरफ्तारी से दो दिन पहले बैंक आई थी और उसने लॉकर खाली कर दिया था और पैसा आईसीआईसीआई बैंक में पहुंचाया था।

    एसआईटी इसी मामले में बुधवार को प्रभात पेट्रोल पम्प स्थित आईसीआईसीआई बैंक जाकर पड़ताल करेगी।

    गौरतलब है कि 19 सितंबर की दरम्यानी रात को एसटीएफ, एसआईटी, सीबीआई की टीमों ने मिलकर भोपाल की चार महिलाओं के यहां पर छापे मारकर उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं के पास से कई राजनैतिक नेताओं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की सीडी, मोबाइल रिकार्डिंग व दस्तावेज बरामद हुए थे। मामले का खुलासा इंदौर स्थित पलासिया थाने में दर्ज उस रिपोर्ट से हुआ जिसमें नगर निगम के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह ने आरोप लगाया था कि उसे कुछ महिलाओं द्वारा ब्लैकमेल करके दो करोड़ रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है।

    महिलाओं ने उसके अंतरंग दृश्यों का वीडियो बनाया है जिसे सार्वजनिक करने की धमकी दी जा रही है। पुलिस ने जांच के दौरान भोपाल की चार महिलाओं के नाम सामने आए थे। पूरे मामले में प्रदेश में सियासी हलचल पैदा कर दी थी। इन महिलाओं के पास से जिन लोगों के वीडियो मिले हैं, उसमें कई बड़े नेता और अफसर भी शामिल हैं।

  • इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    भोपाल। मध्यप्रदेश के हनी ट्रेप मामले में दिवाली से पहले फ़िर से उबाल आ गया । मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा भोपाल नगर निगम के विभाजन का शगूफा छोड़कर हनी ट्रेप मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया । कुछ हद तक सरकार को इसमे कामयाबी भी हासिल हुई । भोपाल के कॉंग्रेस -भाजपा सहित अन्य नेता पिछ्ले कई दिनों से नगर निगम विभाजन के पक्ष -विपक्ष में उलझ गए और समाचार पत्रो से हनी ट्रेप मामला बख़ूबी गायब होगया । परन्तु कल अचानक इन्दौर उच्च न्यायालय खंड पीठ में लंबित मामले ने दुबारा हनी ट्रेप मामले को गरमी दे दी और न्यायालय की कमलनाथ सरकार को लथाड़ ने सबका ध्यान हनी ट्रेप मामले पर केन्द्रित कर दिया । अदालत की दख़ल ने यह साबित कर दिया है कि हनी ट्रेप में शामिल विष कन्याओं के द्वारा डसे गए राजनेता , अफ़सर , नौकरशाह अब बेनक़ाब ज़रूर हो सकेगे ।
    गौरतलब हो कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कल सोमवार को हनीट्रैप मामले में कमलनाथ सरकार को लताड़ लगाई। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अब एसआईटी चीफ को उसकी अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकता।
    बता दें कि हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर सुनवाई हो रही थी। याचिका में निवेदन किया गया है कि सरकार एसआईटी में परिवर्तन करके मामले की जांच को प्रभावित कर रही है।

    गृह सचिव की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट
    हाईकोर्ट ने हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के चीफ को बार-बार बदले जाने पर गृह सचिव से इस बदलाव का कारण जानने के लिए बंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने ये रिपोर्ट पेश किया था लेकिन रिपोर्ट में अधूरी जानकारी और संतोषजनक तथ्य नहीं होने की वजह से हाइकोर्ट ने फटकार लगाई।


    एसआईटी को अब हाईकोर्ट का संरक्षण
    हाईकोर्ट ने दिया कि अब उसकी अनुमति के बिना एसआईटी में शामिल किसी भी अधिकारी का तबादला नहीं किया जा सकता, ना ही एसआईटी की जांच से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अभी तक हनी ट्रैप मामले में जितने भी इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए गए हैं, उन्हें जांच के लिए हैदराबाद स्थित आईटी लैब में भेजा जाएगा। हाइकोर्ट ने एसआईटी अधिकारियों को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।

    हनी ट्रेप मामले की जांच पर हाईकोर्ट की रहेगी नज़र
    समझा जा रहा है कि हाइकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब पूरी जांच कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होनी तय हुई है, एसआईटी को इन्वेस्टिगेशन स्टेटस रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही अब एसआईटी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाये, एसआईटी में नियुक्त मौजूदा अधिकारियों का हाईकोर्ट की अनुमति के बिना तबादला नहीं किया जा सकेगा।

    इंदौर के वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल ने लगाई है जनहित याचिका 
    बता दें कि हनी ट्रैप मामले का खुलासा होने के बाद इसकी जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया था लेकिन चंद दिनों में ही एसआईटी में कुछ ही दिनों मेें शीर्ष स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ था, इसी पर सीनियर वकील मनोहर दलाल ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने यह अपील की थी कि बार-बार एसआईटी चीफ बदलने से जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही हनी ट्रैप मामले की जांच हाईकोर्ट के देख-रेख में की जाए। इसी पर सुनवाई करते हुए पिछली तारीख पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया था।

    क्या है हनी ट्रेप मामला
    पिछले दिनों मध्य प्रदेश पुलिस ने पांच लड़कियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह दावा किया था कि यह लड़कियां मध्य प्रदेश के नेताओं और नौकरशाहों से अवैध शारीरिक संबंध बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि यह लड़कियां नेताओं और नौकरशाहों को हनीट्रैप का शिकार बनाकर सरकारी कामकाज में दखल देती है। इन्होंने कई कंपनियों को टेंडर दिलाए एवं कई संस्थाओं को काम भी दिलाया। अब यह मामला अवैध संबंधों से बढ़कर भ्रष्टाचार का हो गया है। इस मामले की जद में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सहित पूर्व सांसद , कई आईएएस , आईपीएस अफसरों सहित राजनैतिक दलों के बड़े बड़े नेता और अफ़सर आए हैं । जाँच में जिनकी विडिओ व अन्य सामग्रियाँ आई हैँ । इसी मामले में एक लड़की को 15-16वर्ष की आयु में हनी ट्रेप कांड में शामिल किये जाने के भी प्रमाण मिले हैँ । इस विष कन्या गेंग की मुखिया के पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री संतरी से घनिष्ठता के भी पुख्ता प्रमाण मिले हैँ । राजनैतिक संरक्षण में हनी ट्रेप गेंग की मुखिया द्वारा किये गए कांड भी उजागर हुऐ हैं । इसी गेंग में शामिल विष कन्या का पति भी अचानक मीडिया के सामने आकर पत्नि को बेगुनाह साबित कर रहा था , जिसकी विडिओ भी धड़ल्ले से चली परन्तु जिस नाटकीय ढंग से वह सामने आया था , उसी नाटकीय ढंग से वह अब गायब है। गायब हुआ या कराया गया यह भी जाँच का विषय है । परन्तु जाँच एजेंसी द्वारा उसकी और से गफ़लत करना भी संदेह को जन्म देता है 

  • डॉक्टर को ब्लैकमेल करने वाली महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, आरोपी महिला की तलाश जारी

    डॉक्टर को ब्लैकमेल करने वाली महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, आरोपी महिला की तलाश जारी

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डेंटिस्ट डॉक्टर को ब्लैकमेल कर 30 लाख रुपए की मांग करने वाली आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला फरार चल रही है. उसने अपने वकील की माध्यम से न्यायालय में जमानत याचिका लगाई थी. जिस पर आज सुनवाई हुई और एडीजे सुमीत कपूर की कोर्ट अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। डॉक्टर के वकील संजय शर्मा ने न्यायालय के सामने दलील दी कि महिला ने गलत तरीके से डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कराया था, इसलिए वह डर कर भाग रही है और अपने वकील के माध्यम से जमानत याचिका लगा रही है. वकील ने यह भी दलील रखी की झूठी केस दर्ज कराने पर महिलाओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।जानकारी के अनुसार महिला अपने बहन और परिजनों के साथ घर छोड़कर कही भाग गई है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है, लेकिन उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा है. हालांकि पुलिस अभी भी महिला की खोजबीन कर रही है। डेंटल डॉक्टर अरविंद जैन पर महिला ने रेप का आरोप लगाया था. मामले की जांच की गई जिसमें आरोप बेबुनियाद पाए गए. उसके बाद महिला के खिलाफ डॉक्टर ने राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया था. जिसके बाद से महिला के परिवार समेत घर छोड़कर फरार चल रही है। बता दें कि डॉक्टर अरविंद जैन के क्लीनिक में आरोपी महिला 28 जुलाई 2015 को दात का इलाज कराने आई थी. कई बार क्लिनिक में इलाज हुआ. इस दौरान उन्होंने गलत इलाज करने का आरोप लगाया और पैसे की मांग करने लगी. जब मांग पूरी नहीं की तो झूठे केस में फंसा देते हुए धमकी देकर ब्लैकमेलिंग कर 30 लाख रुपए की मांग की थी. बाद में डॉक्टर के खिलाफ रेप का केस भी दर्ज करा दिया था. जिसके बाद डॉक्टर अरविंद जैन में महिला के खिलाफ 14 अक्टूबर को ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज कराया है।
  • आज व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मनाएंगे दीवाली

    आज व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मनाएंगे दीवाली

    दिल्ली भारतीय पर्वों की धूम पूरी दुनिया में है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज यानि 24 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में दिवाली का जश्न मनाएंगे.
    भारत में दीवाली मनाए जाने से तीन दिन पहले व्हाइट हाउस में ये आयोजन किया जा रहा है. खास बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में तीसरी बार दीवाली का जश्न मनाने जा रहे हैं.

    व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2009 में की थी. व्हाइट हाउस के अदिकारियों के मुताबिक ट्रंप ‘दीप जलाने की रस्म के साथ बृहस्पतिवार को दीवाली मनाएंगे. इस बीच अमेरिका में दीवाली का जश्न शुरू हो चुका है. टेक्सास के गवर्नर ग्रेग अबोट ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ शनिवार को दिवाली मनाई।

  • 18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    रायपुर. राज्य शासन ने विशेष सचिव आइएएस मुकेश बंसल को कृषि विभाग के उन 34 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया है जिन पर कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी में 18 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार करने तथा सरकार को आर्थिक चूना लगाने का आरोप है. कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में तेजी आई है अन्यथा लगभग डेढ़ साल से आरोपी ना सिर्फ बचे हुए हैं बल्कि कई तो प्रमोशन भी पा गए.

    कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के उप सचिव जेवियर तिग्गा द्वारा विगत 18 अकटूबर को जारी आदेश में कहा गया है कि जांच अधिकारी 30 दिन के अंदर जांच कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे. आदेश में कहा गया है कि फरवरी 2018 में आयोजित विधानसभा सत्र में उठे एक सवाल में वर्ष 2016—17—18 तक हुई विभागीय खरीदी में भंडार क्रय नियम के उल्लंघन का मामला सामने आया था, जिसके बाद संचालक कृषि ने एक आदेश जारी करते हुए जांच समिति गठित की थी जिसने अपने प्रतिवेदन में 34 अधिकारियों को जांच के धेरे में पाया था जिन्हें अब कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

    प्रकरण की सम्पूर्ण जांच और आरोपियों को सुनवाई का मौका देने मुकेश बंसल को जांच अधिकारी बनाया गया है जो फिलहाल कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के विशेष सचिव हैं. जांच के घेरे में 34 कृषि अधिकारी हैं, इनमें उपसंचालक कृषि से लेकर संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं. नियुक्त जांच अधिकारी आइएएस मुकेश बंसल ने इस संवाददाता से चर्चा करते हुए कहा कि ‘सारे प्रकरण को समझने में लगा हूं. आरोपी अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी हुआ है. उनका जवाब मिलने के बाद हम जांच प्रारंभ करेंगे.’

    आज की जनधारा समाचार—पत्र ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद संयुक्त संचालक विनोद कुमार वर्मा पर गाज गिरी थी और वे निलंबित हो चुके हैं. इसी तरह तत्कालीन संचालक एम एस केरकेटटा को भी नोटिस मिला है. आश्चर्य कि सी वीड घोटाले का जांच प्रतिवेदन फिलहाल नही आया है अन्यथा 60 से ज्यादा अधिकारी जांच के घेरे में होंगे. अगर ये सभी दोषी पाए गए तो पूरा का पूरा कृषि और उद्यानिकी विभाग ही खाली हो जाएगा. ये पूरा मामला भंडार क्रय नियम के उल्लंघन से संबंधित है. लगभग 18 करोड़ के इस घोटाले के तहत कृषि विभाग में कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी हुई थी जिसमें विभागीय अफसरों ने अलग—अलग जिलों में करोड़ों का वारा न्यारा किया था.

    महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की है. दोहरा आश्चर्य यह कि करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों को सजा देने के बजाय उलटा मलाईदार पदों पर बिठा दिया गया है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2015—16 में विभाग के अधिकारियों ने भंडार क्रय नियम का उल्लंघन करते हुए 18 करोड़ की खरीदी की. इसके तहत एनएफएसएम, हरित क्रांति एवं आरकेवीवाय योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर सूक्ष्म तत्व—वीडीसाइड—कीटनाशक रसायन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा किया है.

    इस मामले की फाइल नही है : केडीपी राव, कृषि उत्पादन आयुक्त

    IAS के.डी.पी. राव

    कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोपी अफसरों को शोकॉज नोटिस दिया जा चुका है. हालांकि एक जांच समिति पहले ही मामले की जांच कर रही है परंतु सरकार संतुष्ट नही थी और विधानसभा में भी सवाल उठे थे इसलिए नए सिरे से जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उल्लेखनीय है कि केडीपी राव आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं परंतु अभी तक उन्होंने इस मामले की फाइल नही देखी है.
    राव से जब पूछा गया कि विधानसभा में मामला उठे एक साल से ज्यादा हो गया, इसके बावजूद आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी तो उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी निलंबित हुए हैं. यह पूछने पर कि क्या इसके पहले के जांच अधिकारियों ने ईमानदारी से जांच नही की तो राव ने कहा कि ये आपकी रॉय हो सकती है, मैंने ऐसा कुछ भी नही कहा.

    वैसे राव के इस बयान का मतलब यही निकाला जा सकता है कि इसके पहले तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त रहे, मुख्य सचिव एस.के.कुजूर या आइएएस भीम सिंह के कार्यकाल में इस मामले की जांच तो हुई परंतु वह किसी अंजाम पर नही पहुंच सकी और ना किसी दोषी अफसर को सजा हो सकी. 

  • जिला विपणन अधिकारी का कारनामा, चहेते ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिये करोड़ों के टेण्ड़र में कर दिया गोलमाल

    जिला विपणन अधिकारी का कारनामा, चहेते ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिये करोड़ों के टेण्ड़र में कर दिया गोलमाल

    खरसिया। धान परिवहन के लिये निकाली गयी निविदा में रायगढ़ ड़ीएमओ के द्वारा भ्र्रष्टाचार किये जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिसमें समस्त प्रक्रिया हो जाने के बाद अपने चहेते ठेकेदार को काम न मिलने पर बिना किसी कारण के टेण्ड़र को निरस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित द्वारा वर्श 2019-20 के लिये ई-निविदा के माध्यम से परिवहन कार्य हेतू निविदा आमंत्रित की गयी थी, जिसके लिये ठेकेदारों ने दिनांक 14.10.2019 को आनलाईन विधिवत टेण्ड़र भरा गया, जिसमें टेक्नीकल बीड़ के परीक्षण उपरांत दिनांक 15.10.2019 को निविदा खोली गयी, जिसमें खरसिया के लिये बजरंगलाल अग्रवाल, बरमकेला के लिये बजरंगलाल अग्रवाल, लोहरसिंह के लिये मेसर्स रामचरण अग्रवाल तथा हरदी सारंगढ़ के लिये बजरंगलाल अग्रवाल की दर न्यूनतम होने पर उन्हे कार्यादेश देने की प्रक्रिया पूरी की जानी थी किंतु जिला विपणन अधिकारी के द्वारा नियम कानून को ताक में रखकर उक्त टेण्ड़र को निरस्त कर दिया गया, जबकि रायगढ़ जिले में खरसिया एवं सारंगढ़ का परिवहन दर पूरे प्रदेष में सबसे कम दर है।

    मजे की बात यह है कि टेण्ड़र किस वजह से निरस्त किया गया इसकी सूचना निविदा में एल वन तथा एल टू आने वालों को देना तक जरूरी नही समझा गया, इस प्रकार रायगढ़ ड़ीएमओ के द्वारा प्रदेष में सबसे कम दर होने के बावजूद बिना किसी कारण के टेण्ड़र को निरस्त कर शासन को करोड़ो का चूना लगाने का कार्य किया जा रहा है जिसकी जांच कर ड़ीएमओ पर विभागीय कार्यवाही करने की आवश्यकता है जिससे भविष्य में कोई अधिकारी टेण्ड़र प्रक्रिया में भ्र्रष्टाचार न कर सके। इस संबंध में रायगढ़ के प्रभारी ड़ीएमओ लोकेश देवांगन से चर्चा किये जाने पर उन्होंने बताया कि ठेकेदारों की टेक्नीकल बीड़़ में कागजात पूरे नहीं थे, किन्तु यहां यह प्रश्न उठता है कि जब ठेकेदारों के दस्तावेज पूर्ण नहीं थे तो फिर उनके टेण्ड़र की प्राईस बीड़ क्यों खोली गयी। प्रभारी ड़ीएमओ के द्वारा इस सवाल का गोलमोल जवाब दिया जा रहा है, जबकि निविदा नियमावली में यह स्प्ष्ट उल्लेखित है कि टेक्नीकल बीड़ सही पाये जाने पर ही प्राईस बीड़ खोली जावेगी, जबकि जिला विपणन कार्यालय में टेक्नीकल बीड़ जांच के उपरांत प्राईस बीड़ खोली गयी एवं एल वन, एल टू का निर्धारण कर आनलाईन निविदाकर्ता को सूचना दी गयी, किंतु उसके तत्काल बाद ठेकेदार के दस्तावेज पूरे नही होने की बात कहते हुये उक्त टेण्ड़र को निरस्त कर आनन फानन में नया टेण्ड़र निकाल दिया गया।

    पूरे प्रदेश में डाले गए टेंडरों में सबसे कम दर थी

    सूत्रों के अनुसार जिला विपणन अधिकारी के एक चहेते ठेकेदार को कार्य दिलाने के लिये यह सारा गोलमाल किया गया है, उक्त ठेकेदार की दर अधिक होने की वजह से उसे कार्य दिलाये जाने समस्त नियम कायदों को ताक पर रखकर हेतू पुनः निविदा आमंत्रित कर दी गयी। दिनांक 14.10.2019 को निकाली गयी निविदा दरें पूरे प्रदेष में सबसे कम थी, जिसका लाभ शासन को मिलना था किंतु जिला विपणन अधिकारी की कारगुजारी से अब शासन को करोड़ों की हानि होनी निश्चित है।

    टेंडर समिति ने ओके कर दिया था निविदा

    यहां यह बताना लाजिमी होगा कि शनिवार को जिला स्तरीय कमेटी जिसमें डिप्टी कलेक्टर जिला खाद्य अधिकारी तथा विपणन विभाग के अधिकारी शामिल थे, की उपस्थिति में टेंडर खोला गया तथा L1, L2 का निर्धारण किया गया उसके बाद अचानक आनन-फानन में उठ पटांग तर्क देते हुए पूरी निविदा निरस्त कर दी गई जो अनेक संदेह को जन्म दे रहा है।

    जिला विपणन कार्यालय में लागू नहीं सूचना का अधिकार

    आश्चर्य की बात यह है कि जिला विपणन कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू नहीं होने का बोर्ड लगा दिया है जो संदेह को जन्म देता है, उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सूचना का अधिकार अधिनियम उपरोक्त कार्यालय में लागू था।

    हमारे द्वारा लाखों रूपयों की ड़ीड़ी जमा कर हजारों रूपये का निविदा शुल्क पटाते हुये निविदा भरा गया था, और निविदा की सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण भी किया गया था, किंतु सबसे कम दर होने के बाद भी निविदा निरस्त कर दी गयी, और निरस्त किये जाने के संबंध में कोई सूचना तक नही दी गयी, जिससे हम अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है।

    रामचरण अग्रवाल ( ठेकेदार )