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  • किसानों के हस्ताक्षर वाले दस हजार पत्र चोरी, पीएम मोदी को भेजने वाली थी कांग्रेस

    किसानों के हस्ताक्षर वाले दस हजार पत्र चोरी, पीएम मोदी को भेजने वाली थी कांग्रेस

    रायगढ़। रायगढ़ में एक अनोखी चोरी का मामला सामने आया है। जहां चोर हीरे, जवाहरात या नकदी नहीं, बल्कि किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्र चुराकर ले गए। जी हां, पिछले दिनों धान खरीदी को लेकर केंद्र से चल रही तनातनी के कारण कांग्रेस ने किसानों का हस्ताक्षर अभियान चलाया था। इन पत्रों को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजने वाली थी। लेकिन इसके पहले ही अज्ञात चोर ने दस हजार पत्र चुरा लिए।
    हम आपको बता दें कि धान बोनस को लेकर के कांग्रेस द्वारा एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। इसे केंद्र सरकार को भेजने के लिए कमेटी द्वारा आज रायपुर भेजना था। यह कार्ड रायपुर से दिल्ली जाता इससे पहले चोरों को भनक लग गई।अभियान हस्ताक्षर वाले अलमारी में रखे 10000 साइन वाले फार्म को अज्ञात चोरों ने चोरी कर लिया और मात्र अलमारी में 100 पीस शेष बचे फॉर्म को छोड़ कर रफूचक्कर हो गए। इसके अलावा एक एलईडी टीवी को निशाना बनाकर चलते बने।
  • चौकीदार चोर है पर राहुल को सुप्रीम कोर्ट ने दी नसीहत

    चौकीदार चोर है पर राहुल को सुप्रीम कोर्ट ने दी नसीहत

    दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज मानहानि मामले में फैसला सुनाते हुए उनकी माफी को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया को बंद कर दिया है। वहीं ऐसे लोगों को चेतावनी दी हैए जो बिना सोचे.समझे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अपने राजनीतिक हित साधते हैं। अदालत ने राहुल गांधी को भविष्य के लिए चेताया।

    आपको बता दें कि चौकीदार चोर है बयान पर राहुल ने माफी मांग ली थी। शीर्ष अदालत ने राहुल गांधी के माफीनामे को स्वीकर करते हुए राहुल गांधी को नसीहत दी कि भविष्य में कोर्ट से जुड़े किसी भी मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक भाषण देने में सतर्कता बरतें। अदालत ने राफेल मामले को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए शीर्ष अदालत का नाम लिया था। जिसे लेकर ही पूरा विवाद था।

    मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोईए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिए लंबित इस मामले पर 10 मई को सुनवाई पूरी कर ली थी। अदालत ने राहुल गांधी को भविष्य में अदालत से जुड़े किसी भी मामले में किसी भी तरह का राजनीतिक भाषण देने में सतर्कता बरतने के लिए कहा है। राहुल गांधी की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा था कि कांग्रेस नेता ने शीर्ष अदालत के हवाले से टिप्पणी करने को लेकर माफी मांग ली है। वहीं भाजपा नेता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि राहुल की माफी को अस्वीकार करना चाहिए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

    बता दें कि यह याचिका भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने उनके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी चौकीदार चोर है मामले में दर्ज कराई थी। उन्होंने इस अवमानना याचिका को उच्चतम न्यायालय से जोडक़र दाखिल किया थी। अदालत ने इसपर सुनवाई के बाद 10 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी को गलत ठहराया था। राहुल गांधी ने इस बयान को लेकर अदालत से इसे अनजाने में दिया गया बताते हुए माफी भी मांगी थी।

  • आधार में पता अलग होने पर भी खुल सकेगा बैंक में खाता

    आधार में पता अलग होने पर भी खुल सकेगा बैंक में खाता

    दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने लोगों को बैंक में खाता खोलने में आने आ रही परेशानियों को देखते हुए एक बड़ी राहत दी है।

    सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड में पता अलग होने पर भी केवल एक स्वघोषणा पत्र देकर लोग खाता खुलवा सकते हैं।अधिसूचना के मुताबिक अब जो लोग अपना केवाईसी के लिए आधार नंबर दे रहे हैं और पता कोई और देना चाहते हैं जो आधार कार्ड पर लिखे पते से अलग है तो एक स्वघोषणा पत्र देकर अपना दूसरा पता दे सकेंगे।सरकार के इस फैसले से मूल निवास से दूर रहने वाले या दूसरी जगह काम करने वाले लाखों कामगारों को फायदा होगा।

    बुधवार को जारी राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग सूचनाओं के रोकथाम अधिनियम में संशोधन कर ये बदलाव किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसे कामगार जहां रहते हैं उन्हें बैंक खाता खोलने में दिक्कत होती थी क्योंकि आधार पर पता उनके घर का होता था और काम किसी दूसरे शहर में करते थे।

    सरकार ने प्रवासियों को बैंक खाता खुलवाने में सहूलियत देने तथा वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। इस पहल के लिए कई क्षेत्रों से लंबे समय से मांग की जा रही थी।

  • भारतीय सेना की पहली महिला न्यायाधीश नियुक्त हुईं लेफ्टिनेट कर्नल ज्योति शर्मा

    भारतीय सेना की पहली महिला न्यायाधीश नियुक्त हुईं लेफ्टिनेट कर्नल ज्योति शर्मा

    दिल्ली। भारतीय सेना में पहली बार किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है। लेफ्टिनेंट कर्नल ज्योति शर्मा को भारतीय सेना की महिला न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। वह सैन्य कानूनी विशेषज्ञ के रूप में  पूर्वी अफ्रीकी देश सेशेल्स की सरकार को अपनी सेवाएं देंगी।यह पहला मौका है जब भारतीय सेना में किसी महिला न्यायाधीश को नियुक्त किया गया है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि इससे पहले किसी भी महिला को न्यायाधीश के तौर पर भारतीय सेना में नियुक्त नहीं किया गया था। ज्योति शर्मा विदेश से जुडे मामले देखेंगी। गौरतलब है कि भारत में न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी का पद सेना के लेफ्टिनेंट को दिया जाता है। ये सेना का न्यायिक प्रमुख होते हैं। भारतीय सेना की न्यायाधीश एडवोकेट जनरल एक अलग शाखा है। इसमें कानूनी रूप से योग्य सेना के अधिकारी शामिल होते है। गौरतलब है कि एडवोकेट जनरल अधिकारी सभी तरह से सेना को कानूनी मदद देते हैं।

    शादीशुदा महिलाओं का सेना में प्रतिबंध

    गौरतलब है कि भारतीय सेना ने अपनी कानूनी शाखा न्यायाधीश एडवोकेट जनरल में आवेदन करने के लिए विवाहित महिलाओं पर प्रतिबंध लगाया है। इसे लेकर अदालत में याचिका भी दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में सेना ने अपने पक्ष को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सेना चाहती है कि महिलाए कठिन ट्रेनिंग को बिना किसी छुट्टी के पूरा करें। बता दें कि इस मामले में कानून की छात्रा कुश कालरा ने अदालत में याचिका दाखिल कर सेना से जवाब मांगा था। जिसपर जवाब देते हुए सेना की ओर से कहा गया कि विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कारणों से प्रतिबंधित किया गया है। क्योंकि शादी के बाद उन्हें लंबी छुट्टियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में शादी के बाद वो प्री कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी नहीं कर सकती हैं। हालांकि ये सिर्फ एडवोकेट जनरल के पद तक ही सीमित नहींए है बल्कि सेना के किसी भी विभाग में शादीशुदा लड़कियों को नौकरी नहीं दी जा सकती है।

  • अब सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ करेगी सुनवाई

    अब सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ करेगी सुनवाई

    दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को सबरीमाला मंदिर मामले को सुनवाई के लिए सात जजों की पीठ के पास भेज दिया है। हालांकि न्यायालय ने बड़ी पीठ में सुनवाई के बाद फैसला आने तक अपना पूर्व में दिया गया फैसला लागू रखने का निर्णय दिया है। सीजेआई ने गुरुवार को कहा कि पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश केवल इस मंदिर तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के मस्जिदों और परसी मंदिर में प्रवेश को लेकर भी है। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य धर्म और विश्वास पर बहस को पुनर्जीवित करना था। पीठ ने कहा कि धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध केवल सबरीमला तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य धर्मों में भी ऐसा है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपनी ओर से तथा न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की ओर से फैसला पढ़ा। शीर्ष अदालत ने 3रू2 के बहुमत से पुनर्विचार याचिकाओं को बड़ी बेच को स्थानांतरित किया है। जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसपर असहमति जताई। मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश पर बड़ी बेंच का फैसला आने तक अदालत का पूर्ववर्ती फैसला लागू रहेगा। पीठ ने कहा कि सबरीमलाए मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं में खतना जैसे धार्मिक मुद्दों पर फैसला वृहद पीठ लेगी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता धर्म और आस्था पर बहस फिर से शुरू करना चाहते हैं। सबरीमला मामले पर फैसले में न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन और डीवाई चंद्रचूड़ की राय अलग थी।मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का हवाला देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को सबरीमला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक समान नीति बनाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे धार्मिक मुद्दों पर सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सबरीमला मामले में पुनर्विचार समेत सभी अन्य याचिकाएं उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजीं। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को 4 के मुकाबले एक के बहुमत से फैसला दिया था जिसमें केरल के सुप्रसिद्ध अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 की आयुवर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया गया था। फैसले में शीर्ष अदालत ने सदियों से चली आ रही इस धार्मिक प्रथा को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था। इस फैसले के बाद लगभग पूरे केरल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने 4रू1 की सहमति से यह फैसला सुनाते हुए विशेष उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न करने देने को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। अदालत के फैसले से पहले केरल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
  • अब बैंक में जितने चाहे सिक्के करो जमा, हाईकोर्ट ने RBI के सभी बैंकों को लिमिट हटाने के दिए निर्देश

    अब बैंक में जितने चाहे सिक्के करो जमा, हाईकोर्ट ने RBI के सभी बैंकों को लिमिट हटाने के दिए निर्देश

    बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कारोबारियों समेत आम लोगों को बड़ी राहत दी है. बैंकों द्वारा सिक्के नहीं लेने पर लगी रिट पिटीशन में हाईकोर्ट ने जनहित में बड़ा फैसला सुनाया है. आरबीआई के सभी बैंकों को दिनभर में 100 सिक्के लेने के आदेश को हटाने के निर्देश दिए है।

    बिलासपुर हाइकोर्ट ने आर बी आई के सिक्के जमा करने के लिमिट को हटाते हुए अनलिमिटेड सिक्के जमा करने के निर्देश दिए है. आरबीआई ने हलफनामा पेशकर सिक्के जमा करने की लिमिट हटाने की जानकारी दी है. राजधानी रायपुर के FMCG व्यापारी श्रेणिक पारख की याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है।

  • आज ही पहली बार की गई थी मोबाइल से कॉल…

    आज ही पहली बार की गई थी मोबाइल से कॉल…

    आज बिना मोबाइल के कोई नहीं रह सकता. जिस मोबाइल फोन को आप और हम दिन-रात सीने से लगाए रहते हैं, उससे आज ही के  दिन पहली कॉल की गई थी. 43 साल पहले मोटोरोला के कर्मचारी मार्टिन कूपर ने पहली कॉल की थी. मोबाइल के इतिहास में आज का दिन बेहद ही महत्वपूर्ण है.

    जानिए इससे जुड़ी खास बातें… 

    1. आज भले ही हल्के और स्लिम फोन आ गये हैं लेकिन जिस मोबाइल से पहली कॉल की गई थी उसका वजन 1.1 किलोग्राम था. साथ ही यह मोबाइल 13 सेमी मोटा और 4.45 सेमी चौड़ा था. जिसकी तुलना ईंट या जूते से की जाती थी.

    2. जहां आज के मोबाइल चार्ज होने पर 15 से 20 मिनट का समय लेता है और 1 से 2 दिन तक चल जाता है, वहीं दुनिया के पहले मोबाइल को 10 घंटे चार्ज करने के बाद के बाद भी वह सिर्फ 20 मिनट तक ही चल पाता था.

    3. इसकी बैट्री का वजन आज की तुलना में चार से पांच गुना ज्यादा था.

    4. मोटोरोला के कर्मचारी मार्टिन कपूर ने पहली कॉल न्यूयॉर्क से न्यू जर्सी की गई थी.

    5. ये डायना TAC मोटोरोला का प्रोटोटाइप आधारित पहला कमर्शियल था.

    6. मार्टिन कपूर को मोबाइल फोन का पितामाह माना जाता है.

  • कलेक्टरों पर बिफरे सीएस मंडल

    कलेक्टरों पर बिफरे सीएस मंडल

    रायपुर। चीफ सेक्रेट्री आरपी मंडल की समीक्षा बैठक में आज उस वक्त कई जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ की हवा खिसक गई जब फील्ड की जानकारी लेकर बैठे मंडल के सवालों के जवाब नहीं दे सके। दरअसल अधिकारियों को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि समीक्षा के दौरान जमीनी जानकारी चीफ सेक्रेटरी के पास मौजूद होगी, हालांकि बैठक में मंडल के अंदाज ने प्रशंसा पाने वालों के साथ साथ डांट खाने वाले अधिकारियों की भी जमकर प्रभावित किया। बैठक से बाहर निकले अधिकारियों में गुफ्तगू होती रही कि, अरसे बाद राज्य एवं प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा इस तरह से की गई। चीफ सेक्रेटरी ने अपने मातहत अधिकारियों को मोटिवेट भी किया है, कई कलेक्टर यह कहते हुए बैठक से बाहर निकले की यह मंडल स्टाइल वाली बैठक है, जहां डांट भी है तो वही अच्छे काम की सराहना भी।

    बैठक के दौरान चीफ सेक्रेट्री ने 5 जिलों के कलेक्टरों के कामकाज पर नाराजगी जाहिर की, वही कमिश्नर को लेकर दो टूक कहा कि सिर्फ शोपीस बनकर ना रहें। बता दे कि चीफ सेक्रेटरी का जिम्मा संभालने के बाद आर पी मंडल ने राज्य की प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए सभी 27 जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ की बैठक बुलाई थी। न्यू सर्किट हाउस में हुई इस बैठक का एजेंडा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर था।

    सूत्र बताते हैं कि आर पी मंडल में एक एक जिले में योजनाओं के हालातों की जानकारी जुटा रखी थी।जिलो के समीक्षा के दौरान अधिकारियों की रिपोर्ट पर मंडल के कामकाज को जमकर सराहा, सूत्र बताते हैं कि बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्रियों का संदर्भ देते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में जाने का वक्त तय करने, आम जनता की सुनवाई होने, के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में चीफ सेक्रेटरी के सख्त मिजाज की जमकर चर्चा होती रही ।आरपी मंडल अपने अनूठे काम के अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं, प्रशासनिक मुखिया बनने के बावजूद फील्ड की गहरी समझ की वजह से बैठक में मौजूद अधिकारियों के पसीने छूटते दिखे।

    15 दिनों में दोबारा लेंगे समीक्षा बैठक

    चीफ सेक्रेटरी आरपी मंडल ने दो टूक कह दिया है कि आज की बैठक में दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन तेजी से किया जाए, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हर जिले के कामकाज पर उनकी बारीक नजर होगी। साथ ही 15 दिनों बाद वह खुद दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर सख्ती बरती जाएगी।

    अवैध धान रोकने बरती जाय सख्ती

    कलेक्टर जिला पंचायत सीईओ की बैठक में चीफ सेक्रेटरी आर पी मंडल ने दो टूक निर्देश देते हुए कहा है कि, 1 दिसंबर से शुरू होने जा रही धान खरीदी में दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध आवाज को रोकने सख्ती से कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा है कि, इसके लिए बिचौलियों के खिलाफ लगातार कार्यवाही की जाए जिससे इस पर रोक लगाई जा सके। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि दूसरे राज्यों से धान आने की शिकायत पर उस क्षेत्र के संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे, और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • छत्तीसगढ़ में शीघ्र लागू होगा पत्रकार सुरक्षा कानून

    छत्तीसगढ़ में शीघ्र लागू होगा पत्रकार सुरक्षा कानून

    रायगढ़। प्रदेश में पत्रकार निर्भीकता से स्वतंत्र लेखन कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने का निर्णय लिया है। जिसके परिपालन में मार्च 2019 में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।

    जिसके मद्देनजर अब जल्द ही प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हेतु पत्रकारों, पत्रकार संगठनों तथा आमजनों से चर्चा कर सुझाव प्राप्त करने के लिए समिति 16 से 18 नवम्बर तक राज्य के विभिन्न अंचलों का दौरा करेगी।

    समिति 16 नवम्बर को रायपुर के विशिष्ठ अतिथि विश्राम गृह पहुना में दोपहर 12.30 बजे से 2 बजे तक पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों से तथा अपरान्ह 3.30 से शाम 5 बजे तक आमजनों से चर्चा कर सुझाव लेगी।

    ईसी प्रकार समिति 17 नवम्बर को सर्किट हाऊस जगदलपुर में पूर्वान्ह 11.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक पत्रकार और पत्रकार संगठनों से तथा अपरान्ह 3 से 4 बजे तक आम नागरिकों से सुझाव लेगी।

    समिति 18 नवम्बर को अम्बिकापुर पहंुचेगी और दोपहर 12.30 बजे से 1.30 बजे तक पत्रकार और पत्रकार संगठनों से तथा दोपहर 2.30 बजे से 3.30 बजे तक आम नागरिकों से चर्चा कर सुझाव प्राप्त करेगी।

    प्रस्तावित छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून का हिन्दी और अंग्रेजी प्रारूप जनसम्पर्क संचालनालय की वेबसाइट http://dprcg.gov.in उपलब्ध है। किसी शंका की दशा में अंग्रेजी रूपांतरण मान्य होगा।


    ज्ञातव्य है कि प्रदेश में पत्रकार निर्भीकता से स्वतंत्र लेखन कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने का निर्णय लिया है। जिसके परिपालन में मार्च 2019 में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री आफताब आलम की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति में न्यायमूर्ति श्रीमती अंजना प्रकाश सेवानिवृत्त न्यायाधीश उच्च न्यायालय, श्री राजूराम चन्द्रन वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय, महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव विधि विभाग, श्री रूचिर गर्ग मीडिया सलाहकार मुख्यमंत्री, श्री ललित सुरजन, प्रधान संपादक दैनिक देशबंधु और श्री प्रकाश दुबे वरिष्ठ पत्रकार नागपुर समिति के सदस्य हैं।

  • राजधानी के तर्ज पर एयरपोर्ट सहित अब जिला मुख्यालयों में खोला जाएगा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का गढ़ कलेवा…

    राजधानी के तर्ज पर एयरपोर्ट सहित अब जिला मुख्यालयों में खोला जाएगा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का गढ़ कलेवा…

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज जन चौपाल में राजधानी रायपुर की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के निर्देश दिए है. सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के लिए मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है. रायपुर  के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध गढ़ कलेवा का संचालन किया जा रहा है. जिसमें स्व सहायता समूहों की लगभग सौ महिलाएं कार्य कर रही हैं. इस केन्द्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों और राज्य के बाहर से आने वाले लोग पारम्परिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लाभ उठा रहे हैं. राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खुलने से लोगों को छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद मिल पाएगा साथ ही हजारों स्थानीय महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार भी मिलेगा. जन चौपाल कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के संबंध में मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति रायपुर के विश्वजीत मित्रा ने सुझाव पत्र प्रस्तुत किया है. जिसमें सभी जिला मुख्यालयों के जिलाधीश कार्यालय परिसरों, जिला न्यायालय परिसरों, रेलवे स्टेशनों और स्वामी विवेकानन्द विमानतल में गढ़ कलेवा केन्द्र खोलने का सुझाव दिया है. इन स्थानों में गढ़ कलेवा खुलने से राज्य के सभी जिलों के नागरिकों के साथ-साथ अन्य राज्यों के लोगों को भी छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा.