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  • इस राज्य में कीमत पहुंची 200 रुपये किलो,गरीबों की सूखी रोटी का साथ छोड़ चुकी प्याज अब उच्चवर्गीयों को भी रुलाने लगी…

    इस राज्य में कीमत पहुंची 200 रुपये किलो,गरीबों की सूखी रोटी का साथ छोड़ चुकी प्याज अब उच्चवर्गीयों को भी रुलाने लगी…

    बेंगलुरु। यूं तो प्याज काटने पर आंखों से आंसू बहने लगते हैं लेकिन इन दिनों प्याज का नाम लेने मात्र से लोगों के आंखों में आंसू आ जा रहा है. जो प्याज कभी गरीबों को बमुश्किल नसीब होने वाले दो जून की सूखी रोटी खाने का सहारा होती थी अब वही प्याज मध्यम वर्गीयों की पहुंच से काफी दूर हो गई है. देश में इन दिनों प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं. आलम यह है कि इसके दाम ने अब दोहरा शतक लगा दिया है।

    बेंगलुरु में प्याज के दाम अब 140 रुपये से लेकर 200 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. प्याज के बेतहाशा बढ़ते दाम से न सिर्फ आम जनता परेशान है बल्कि यह प्याज अब छोटे-मझोले व्यापारियों को भी रुला रही है. कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि की वजह से इसकी बिक्री पर भी असर पड़ा है. बड़ी तादाद में लोग प्याज खाने से तौबा करने लगे हैं।

    यह सिर्फ बेंगलुरु का ही नहीं बल्कि पूरे देश भर का यही हाल है. सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी महंगाई और प्याज के दाम संसद में भी गूंजने लगे हैं. हाल ही में प्याज को लेकर संसद में चली बहस के दौरान वित्त मंत्री के एक बयान की देशभर में जमकर आलोचना हुई थी।

    सोशल मीडिया में उनके बयान को लेकर मीम्स बनाए जा रहे थे. बीते बुधवार को एक सांसद ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पूछा था कि क्या वह प्याज खाती हैं जिसकी कीमतें आसमान छू रही हैं. जिसके जवाब में वित्त मंत्री ने कहा था, ”मैं ऐसे परिवार से आती हूं, जिसमें प्याज और लहसुन नहीं खाया जाता.” उनके इस बयान की खूब आलोचना हुई थी. राहुल गांधी ने कहा था, ”कोई नहीं पूछ रहा कि आप प्याज खाती हैं या नहीं. आप वित्त मंत्री हैं और हम पूछ रहे हैं कि अर्थव्यवस्था क्यों संकट का सामना कर रही है. अगर आपने गरीब से गरीब व्यक्ति से भी पूछा होता तो आपको उचित जवाब मिल जाता.”आपको बता दें देश में यह पहला मौका है जब प्याज या किसी और खाद्य पदार्थ में इस तरह से आश्चर्यजनक रुप से मूल्य वृद्धि हुई है.

  • 100 यूनिट से ज्यादा खपत होने पर प्रति यूनिट दो-तीन पैसा वीसीए चार्ज बढ़ा

    100 यूनिट से ज्यादा खपत होने पर प्रति यूनिट दो-तीन पैसा वीसीए चार्ज बढ़ा

    रायपुर। Chhattisgarh Electricity अब 100 यूनिट से ज्यादा बिजली खपत हुई तो प्रति यूनिट दो पैसा अतिरिक्त वेरिएबल कास्ट एडजस्टमेंट (वीसीए) चार्ज देना होगा। यह चार्ज 200 यूनिट तक लगेगा। 200 यूनिट से ज्यादा बिजली खपत होने पर तीन पैसा प्रति यूनिट वीसीए चार्ज लगेगा। यह चार्ज 100 यूनिट तक नहीं देना पड़ेगा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इसका आदेश जारी कर दिया है। विभाग के अधिकारी का कहना है कि कोयले और तेल की कीमत में बढ़ोतरी होने के कारण इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत चार्ज बढ़ाया गया है। पावर कंपनीज के चेयरमैन शैलेंद्र शुक्ल के अनुसार बिजली उपभोक्ताओं से वीसीए चार्ज लेने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम 100 यूनिट तक खपत पर वीसीए चार्ज पहले जैसा ही 17 पैसा प्रति यूनिट देय होगा। इस श्रेणी के उपभोक्ताओं के वीसीए चार्ज में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। यह नियम नवंबर- दिसंबर 2019 के विद्युत देयकों पर लागू होगा। चेयरमैन का कहना है कि कोयले और डीजल के दाम में वृद्धि से विद्युत उत्पादन से लेकर कोल परिवहन की दरें घटती-बढ़ती रहती हैं। इस आधार पर बिजली की प्रचलित दर में वीसीए चार्ज को घटाने-बढ़ाने का प्रावधान इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 62(4) के तहत किया गया है। वीसीए के निर्धारण में राज्य शासन अथवा पावर कंपनी की कोई निर्णायक भूमिका नहीं रहती। वीसीए चार्ज का समायोजन देश के सभी विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा समय-समय पर करना अनिवार्य होता है। इसका अनुपालन छत्तीसगढ़ में भी किया जा रहा है। हाफ रेट नियम पर कोई फर्क नहीं वर्तमान में प्रदेश में हाफ रेट पर बिजली भुगतान की योजना जारी है। इसके अंतर्गत घरेलू उपभोक्ताओं को प्रथम 400 यूनिट बिजली खपत पर आधी दर से भुगतान करना होता है। इस योजना का लाभ वीसीए चार्ज पर भी मिलेगा। वीसीए चार्ज बढ़ने पर हाफ रेट के नियमों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
  • दो से अधिक संतान, तथा एक से अधिक पत्नी रखने वाले कर्मचारियों की नौकरी खतरे में

    दो से अधिक संतान, तथा एक से अधिक पत्नी रखने वाले कर्मचारियों की नौकरी खतरे में

    रायगढ़ जिले में शिक्षाकर्मी भर्ती तथा अन्य शासकीय सेवा में सेवारत कर्मचारियों के भर्ती के समय नियामानुसार सिविल सेवा, सामान्य सेवा एवं शर्तों के तहत आज भी सभी नियम व शर्तें लागू हैं। किंतु छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की घोर लापरवाही के कारण आज भी कई शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक व शासकीय सेवक हैं, जो कि भारत सरकार के परिवार नियोजन नीति की सारी हदों को पार करते हुए, नियम व कायदे को ताक पर रखते हुए 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान पैदाकर जानकारी छुपाते हुए नौकरी कर रहे हैं। तथा शासन को यह भी जानकारी गया है, कि एक से अधिक पत्नी रखने वाले कर्मचारियों के विरूद्ध बहुत जल्द कठोर से कठोर कार्यवाही हो सकती है।

    जिले मैं सैकड़ों ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके द्वारा शासकीय सेवा में जानकारी को छुपाया गया है। कई तो ऐसे भी हैं, जो कि नियुक्ति के समय ही बाकायदा नॉटरी के समक्ष शपथ पत्र भर कर दिया गया है। कि मैं दो से अधिक संतान जन्म नहीं दूंगा /दूंगी क्योंकि। यदि मेरे द्वारा ऐसे गलती की जाती है। तो मैं उसके लिए स्वयं जबाबदार रहूंगा/रहूंगी। तथा कई ऐसे भी शासकीय सेवक हैं, जिनके द्वारा गोपनीय ढंग से एक से अधिक पत्नी रखा गया है। उनके विरुद्ध भी इसी तरह के कड़े कार्यवाही होने कि पूरी संभावना है। भारत को परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने वाले विकासशील देशों में पहला देश होने का गौरव प्राप्त है। जो – जो राज्य प्रायोजित था, जबकि यह कार्यक्रम 1952 में शुरू किया गया था। और इसे राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम कहा जाता था। सबसे पहले, कार्यक्रम गर्भनिरोधक उपायों जैसे कि जन्म नियंत्रण पर केंद्रित था।

    हालांकि, समय बीतने के साथ, कार्यक्रम में पोषण, परिवार कल्याण और माता और बाल स्वास्थ्य जैसे परिवार के स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है। आखिरकार, नीति में इस उन्नति का प्रदर्शन करने के लिए परिवार नियोजन, परिवार कल्याण विभाग का कार्य बहुत ही सराहनीय रहा है। परिवार नियोजन की वर्तमान स्थिति पर दशकों से राज्य और केंद्र दोनों सरकारों ने समाज के विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम को लागू करने के लिए बहुत कुछ काम किया है। इसमें सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और डोर-टू-डोर अभियानों के माध्यम से जागरूकता फैलाना, मौद्रिक प्रोत्साहन के माध्यम से दो-बच्चे के मानदंड को प्रोत्साहित करना, लड़कों और लड़कियों के लिए शिक्षा पर जोर देना और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सारे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने के तरीके शामिल हैं। यह परिवार नियोजन के उपाय निश्चित रूप से सफल रहे हैं, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि दर में कमी प्रदर्शित होती है।

    हालाँकि, गरीबी जैसे कारक, बेटी से बेटों की पसंद और पारंपरिक सोच पूरी सफलता के लिए प्रमुख बाधाएँ हैं।

  • सर्दी में इस HOT हॉलीवुड एक्ट्रेस ने PM Modi को क्यों लिखा पत्र…

    सर्दी में इस HOT हॉलीवुड एक्ट्रेस ने PM Modi को क्यों लिखा पत्र…

    दिल्ली। पीपुल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में हॉलीवुड एक्ट्रेस पामेला एंडरसन ने सरकारी बैठकों और कार्यों में शाकाहारी भोजन परोसने का आग्रह किया हैं।
    दिल्ली के बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स से चिंतित पेटा की माननीय निदेशक पामेला एंडरसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सरकार की सभी आधिकारिक बैठकों और कामों में केवल शाकाहारी भोजन परोसने का प्रावधान कर पर्यावरण को बचाने के लिए काम करें. अपने पत्र में उन्होंने बताया है कि डेयरी, मांस और अंडों के लिए जानवरों के पालन-पोषण के कारण 20% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है।
    उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने भी शाकाहारी खाने की ओर बढ़ने की सलाह दी है, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सकें. पामेला ने लेटर में यह भी लिखा है कि पूरी तरह से पौधे से बने खाने को खाने से न केवल जानवरों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि मीट और डेयरी के खाने से होने वाली बीमारियों जैसे मधुमेह, स्तन कैंसर और दिल की बीमारी से भी बचा जा सकता है।
    पामेला पिछले कई सालों से शाकाहारी का प्रमोशन कर रही हैं और अक्सर पेटा की मुहीम में शाकाहारी जीवन शैली को बढ़ावा देती नजर आती हैं. पिछले साल द गार्जियन के साथ एक इंटरव्यू में पामेला ने खुलासा किया कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही हंटिंग गेम की क्रूरता के बाद मांस खाना छोड़ दिया था.
  • रेबिज पीड़ित छात्र अयामी का इलाज नहीं करने का मामला, हाईकोर्ट ने अंबेडकर प्रबंधन को 5 लाख मुआवजा राशि देने का दिया आदेश

    रेबिज पीड़ित छात्र अयामी का इलाज नहीं करने का मामला, हाईकोर्ट ने अंबेडकर प्रबंधन को 5 लाख मुआवजा राशि देने का दिया आदेश

    रायपुर। नारायणपुर जिले के रामकृष्ण मिशन आश्रम के छात्र हेमंत अलामी की मौत मामले में हाईकोर्ट ने अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन को पांच लाख का मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है. आदेश के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को राशि लेने के लिए पत्र लिखा है. परिजन पहचान पत्र दिखाकर राशि ले सकते हैं।

    अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक विवेक चौधरी ने बताया कि यह मामला कोर्ट पहुंचा था. कोर्ट के आदेशानुसार हमें परिजनों को पांच लाख क्षतिपूर्ति राशि देना होगा. इसके लिए परिजनों को लेटर लिखा गया है. उन्होंने बताया कि परिजन पहचान पत्र लाकर क्षतिपूर्ति राशि ले सकते हैं. कोर्ट का जो आदेश है उसका पालन किया जा रहा है.बता दें कि चार महीने पहले नारायपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के ग्राम काकावाड़ा निवासी रेबीज़ पीड़ित हेमंत अयामी को मेकाहारा लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने मरीज़ की जान नहीं बचने और उसकी बीमारी दूसरे मरीज़ में फैलने का डर बताकर घर वापस भेज दिया था. घटना से व्यथित परिजनों ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर बच्चे को चंद दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कर उसके लिए सकुन की मौत मांगी थी।

    मामला मीडिया में उठने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीम गठित कर पीड़ित का गांव भेजा. टीम के पहुंचने से पहले ही मासूम की मौत हो गई. इस मामले में जमकर राजनीति हुई. मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा. जहां हाईकोर्ट ने प्रबंधन को मुआवजा देने का आदेश दिया।

  • महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार गंभीर, पुलिस महानिदेशक ने एसपी डायल 112 को कोताही न बरतने किया ताकीद…

    महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार गंभीर, पुलिस महानिदेशक ने एसपी डायल 112 को कोताही न बरतने किया ताकीद…

    रायपुर। महिलाओं को आपातकालीन स्थिति में डायल 112 के जरिए उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए पुलिस विभाग कवायद में जुटा हुआ है. इस संबंध में पुलिस महानिदेशक आरके विज ने पुलिस अधीक्षक, डायल-112 धर्मेन्द्र गर्ग को पत्र के जरिए सचेत किया है।

    पुलिस महानिदेशक विज ने एसपी धर्मेंद्र विज को जारी पत्र में बीते महीने अकेली बैठी महिला को सूचना मिलने पर ईआरव्ही द्वारा सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने की प्रशंसा की है. इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति राज्य शासन व पुलिस विभाग कटिबद्धता को बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां, जिसमें महिला या किसी अन्य व्यक्ति को मौके पर आपातकालीन सहायता या फिर उन्हें सुरक्षित स्थल पर पहुंचाना जरूरी हो, ईआरव्ही व उनमें तैनात पुलिस अधिकारी बिना किसी हिचक के अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

    पुलिस महानिदेशक विज ने साथ ही ताकिद किया है कि संदिग्ध परिस्थितियों में महिलाओं को आपातकालीन सेवा देने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में कोई कोताही न बरती जाये, जिससे कोई गंभीर घटना घटित न हो सके।

  • सुप्रीम कोर्ट के जज को मांगनी पड़ी वकीलों से दंडवत होकर माफी…

    सुप्रीम कोर्ट के जज को मांगनी पड़ी वकीलों से दंडवत होकर माफी…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसे देखकर हरकोई हैरान रह गया. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जज को वकीलों के भारी विरोध के बाद उनसे दंडवत होकर माफी मांगनी पड़ी।

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरुण मिश्रा अपने बर्ताव के चलते वकीलों के निशाने पर थे. उनके बुरे बर्चाव की शिकायतें कई वकील बार में कर चुके थे. आखिरकार एक सीनियर वकील को उन्होंने बहस के दौरान अवमानना करने की धमकी दे दी जिसपर खफा होकर सीनियर एडवोकेट ने उनकी अदालत का बायकाट कर दिया. इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार ने कड़ा ऐतराज जताया. जिसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा को वकीलों से माफी मांगनी पड़ी।

    उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनकी बात से किसी वकील को बुरा लगा हो तो वह बार के हर सदस्य से ‘दंडवत’ होकर माफी मांगते हैं. वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई वकीलों ने जस्टिस मिश्रा से बार के सदस्यों के साथ विनम्र रवैया अपनाने की अपील की थी।

  • IAS एसोसिएशन ने दिवंगत IAS उइके के परिवार से एक सदस्य को नौकरी देने की मांग, विदेश दौरे पर कहा- निजी खर्च और छुट्टी पर जाने का पूरा अधिकार

    IAS एसोसिएशन ने दिवंगत IAS उइके के परिवार से एक सदस्य को नौकरी देने की मांग, विदेश दौरे पर कहा- निजी खर्च और छुट्टी पर जाने का पूरा अधिकार

    रायपुर। छत्तीसगढ़ आईएएस एसोसिएशन की सामान्य सभा की बैठक शनिवार को मंत्रालय में की गई. बैठक में सदस्यों ने कहा कि हाल ही में आईएएस अधिकारियों की निजी विदेश यात्राओं को लेकर प्रकाशित खबर के संबंध में तथ्यों को मीडिया ने सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे इस संबंध में आम जनता द्वारा यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि कुछ अधिकारी विदेश यात्राओं के शौकीन हैं, जबकि आज के युग में सभी को अपने निजी व्यय से अवकाश पर जाने या भ्रमण करने का पूरा अधिकार है।

    यह भी स्पष्ट है कि यदि आईएएस अधिकारी निजी विदेश यात्रा पर गये हैं. तो उन्होंने इसकी विधिवत अनुमति भी ली है. कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जिनके परिवार के सदस्य वर्तमान में विदेश में कार्यरत हैं तथा उनको निजी व्यय से परिवार के साथ मिलने जाने का पूरा अधिकार है. मीडिया से अपेक्षा है कि तथ्यों को इस तरह प्रस्तुत नहीं करना चाहिए जिससे आईएएस अधिकारियों के व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना माना जाये और इससे भारतीय प्रशासनिक सेवा की छवि धूमिल हो. एसोसिएशन ने यह निवेदन  किया कि किसी अधिकारी के बारे में तथ्यों की व्याख्या करने के पहले संबंधित अधिकारी का वक्तव्य भी ले लिया जाये, ताकि उक्त अधिकारी की बात जनता के बीच आ जाए।

    गौरतलब है कि सामान्य सभा की अध्यक्षता सीके खेतान ने की. वरिष्ठ अधिकारियों में आर पी. मण्डल, अमिताभ जैन, सुबत साह, निहारिका बारीक, सुबोध सिंह, डी.डी. सिंह, कमलप्रीत सिंह, अविनाश चम्पावत, रीता शांडिल्य उपस्थित थे. सबसे पहले एसोसिएशन ने उनके एक सदस्य चंद्रकांत उईके के असामयिक निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और यह प्रार्थना की गई कि ईश्वर उनके परिवार को इस संकट की घड़ी में संबल प्रदान करे।

    सहयोग राशि करेंगे जमा  

    एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से यह भी निवेदन किया जाए कि उनके परिवार के किसी एक सदस्य को उचित राजपत्रित अधिकारी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए. साथ ही एसोसिएशन ने निर्णय लिया कि स्व. चंद्रकांत उईके के पुत्र, जो अभी 12वीं कक्षा में अध्ययनरत् हैं, उनकी उच्च शिक्षा के लिए धनराशि की सहायता दी जाए. एसोसिएशन के सभी सदस्य इस उद्देश्य के लिए अपनी तरफ से सहयोग राशि इकट्ठा करें, जो उनके पुत्र के नाम से सावधि जमा के रूप में रख दिया जाए, ताकि उनका पुत्र आवश्यकता पड़ने पर राशि का उपयोग कर सके. इसके बाद सामान्य सभा में एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2018-19 के लेखा को अनुमोदित किया गया. उक्त लेखा चार्टर्ड एकाउंट द्वारा ऑडिट किया गया।

    किसी भी तरह की छानबीन के लिए हमेशा तैयार

    एसोसिएशन ने कहा कि आईएएस सेवा के अधिकारियों की सेवा में पूर्ण पारदर्शिता और अधिकारियों के जिम्मेदार व्यवहार का पक्षधर है. एसोसिएशन इस बात में भी विश्वास रखता है कि देश की सर्वोच्च सेवा होने के नाते छत्तीसगढ़ के सभी आई.ए.एस. अधिकारी किसी भी तरह की प्रशासनिक समीक्षा या छानबीन के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन मीडिया से इस बात का ख्याल रखने की अपेक्षा है कि किसी अधिकारी की निष्ठा, प्रतिष्ठा एवं छवि बेवजह धूमिल न हो.एसोसिएशन द्वारा प्रशासन अकादमी, छत्तीसगढ़ से यह भी अनुरोध करने का निर्णय लिया गया कि परिवीक्षाधीन आई.ए.एस. अधिकारियों को एक सप्ताह के मंत्रालय के परिचयात्मक मॉड्यूल प्रशिक्षण में आवश्यक रूप से शामिल किया जाए, ताकि उन्हें मंत्रालयीन कामकाज का ज्ञान हो सके

  • सोशल मीडिया यूज करना है तो सरकार से कराना पड़ेगा वैरिफकेशन, सरकार संसद में पेश करने जा रही है प्रस्ताव

    सोशल मीडिया यूज करना है तो सरकार से कराना पड़ेगा वैरिफकेशन, सरकार संसद में पेश करने जा रही है प्रस्ताव

    दिल्ली। अब आप अगर सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं तो खबरदार हो जाइए क्योंकि अब आपको सोशल मीडिया यूज करने से पहले उसका वैरिफिकेशन सरकार से कराना पड़ेगा. सरकार संसद के इसी सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश करने वाली है।

    अब देश के करोड़ों यूजर्स जो कि सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं उनको अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ेगा. सरकार ससंद के इसी सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश करने वाली है. बिल के पास होने पर व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे एप का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को पहले सरकारी एजेंसी से अपने अकाउंट का वेरिफिकेशन कराना होगा. उसके बाद ही उसका अकाउंट चालू हो पाएगा।

    सरकार के सूत्रों का कहना है कि वह इस बिल को इसलिए लेकर आ रही है ताकि फेक न्यूज पर रोक लगाई जा सके. अब सोशल मीडिया यूजर्स को अपनी केवाईसी करानी पड़ेगी.

  • उच्च न्यायालय ने महिला आयोग के सचिव को दिया नोटिस, कहा- क्यों न आपके विरुद्ध अवमानना की हो कार्यवाही, जानिए क्या है मामला…

    उच्च न्यायालय ने महिला आयोग के सचिव को दिया नोटिस, कहा- क्यों न आपके विरुद्ध अवमानना की हो कार्यवाही, जानिए क्या है मामला…

    बिलासपुर। महिला आयोग में कार्यकाल खत्म होने से पहले ही तीन सदस्यों को हटाए जाने के मामले में उच्च न्यायालय ने आयोग के सचिव को नोटिस जारी किया है. इसमें उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना व अवमानना की कार्यवाही की बात कही गई है।

    उच्च न्यायालय ने  2 मई 2019 को आयोग की तीन सदस्यों को कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व के बर्खास्त किए जाने के आदेश को दरकिनार करते हुए बर्खास्तगी दिनांक से समस्त बकाया देयकों को प्रदान कर पुनर्स्थापित करने का आदेश पारित किया था. एकल पीठ के इस आदेश पर शासन ने रिट अपील में भी चुनौती दी थी, जिसे युगल पीठ ने खारिज कर दिया था।

    युगल पीठ के याचिका खारिज किए जाने के बाद भी बकाया का भुगतान नहीं किए जाने से क्षुब्ध पदमा चंद्राकर ने उच्च न्यायालय के एकल पीठ में अवमानना याचिका दायर की. इस याचिका पर पीठ ने शुक्रवार को राज्य महिला आयोग के सचिव अभय देवांगन को नोटिस जारी किया है कि क्यों न उनके विरुद्ध उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं अवमानना की कार्यवाही की जाए।