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  • प्रदेश के सभी अस्पतालों के कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन, बीजेपी विधायक की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री ने की घोषणा…

    प्रदेश के सभी अस्पतालों के कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन, बीजेपी विधायक की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री ने की घोषणा…

    रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू हो चुकी है। आज सदन की कार्यवाही का तीसरा दिन है। विधानसभा के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा में लापरवाही का मामला गूंजा। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री सत्ता पक्ष के ही विधायकों के सवालों से घिरते नजर आएं। बीजेपी विधायक धरम लाल कौशिक ने अस्पताल मेकाहारा में बड़ी लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि यहां कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन का प्रावधान ही नहीं है।

    विधायक कौशिक का कहना है कि बिना सत्यापन कर्मचारियों की भर्ती से मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अस्पताल में चोरी की घटनाएं हो रही है। गार्डों द्वारा पत्रकारों से मारपीट किया जाता है। क्योंकि बिना वेरिफिकेशन के लोगों को रख लिया गया है, विधायक ने आरोप लगते हुए कहा कि जानबूझ कर एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए नियम तोड़ा गया है।

    मंत्री जायसवाल ने की बड़ी घोषणा

    वहीं सदन में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि मेकाहारा और डीकेएस के कर्मचारियों का वेरिफिकेशन करा लिया गया है। मंत्री जायसवाल ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब से सारे अस्पतालों के प्लेसमेंट कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा। जिस हॉस्पिटल में पहले से ही टेंडर हो चुका वहां भी वेरिफिकेशन की जाएगी।

  • जज के साथ विस्तारा एयरलाइंस ने धोखाधड़ी की, 1 लाख का जुर्माना…

    जज के साथ विस्तारा एयरलाइंस ने धोखाधड़ी की, 1 लाख का जुर्माना…

    छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने विस्तारा एयरलाइंस को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें से 10 हजार रुपये मुकदमे में लगा खर्च है। यह राशि शिकायतकर्ता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) भूपेंद्र कुमार वासनीकर को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। आयोग ने यह भी साफ किया कि अगर निर्धारित समय सीमा यानी 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो एयरलाइंस को इस राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।पूरा मामला कांकेर में पदस्थ एडीजे भूपेंद्र कुमार वासनीकर से जुड़ा है।

    जज अपने परिवार के साथ कश्मीर में छुट्टियां बिताने के बाद 28 मई 2023 को दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। उन्होंने नौ मई को ही 23,156 रुपये का भुगतान कर विस्तारा फ्लाइट के चार कन्फर्म टिकट बुक करा लिए थे। 28 मई को उड़ान के समय से चार घंटे पहले (दोपहर दो बजे) वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए थे। इसके बावजूद विस्तारा के कर्मचारियों ने उन्हें तीन घंटे तक बोर्डिंग पास जारी नहीं किया। अंत में उड़ान से एक घंटे पहले ओवरबुकिंग का हवाला देकर जज का कन्फर्म टिकट रद कर दिया गया और केवल उनकी पत्नी व बेटे-बेटी को रायपुर भेजा गया। एडीजे को मजबूरी में दिल्ली में ही रुकना पड़ा और अगले दिन उन्हें इंडिगो एयरलाइंस की 18,823 रुपये का टिकट खरीदकर रायपुर आना पड़ा।

    आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीस की पीठ ने सुनवाई के दौरान एयरलाइन कंपनी के रवैये पर बेहद तीखी टिप्पणी की। आयोग ने पाया कि जज ने जो टिकट नौ मई को 7,204 रुपये में खरीदा था, उसे एयरलाइन ने 28 मई को किसी अन्य यात्री को 40 हजार रुपये में बेच दिया। एयरलाइन का दावा था कि कोई वैकल्पिक फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने किराए का चार गुना रिफंड कर दिया। आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जज ने अगले ही दिन खुद इंडिगो की फ्लाइट से टिकट बुक कर यात्रा की, जिससे साफ है कि विकल्प मौजूद थे।

  • छत्तीसगढ़ PWD टेंडर घोटाला! ‘लिफाफा मत खोलो’ लिखकर बंटे करोड़ों के ठेके, तत्कालीन SE कुंजाम पर सिंडिकेट चलाने का आरोप….

    छत्तीसगढ़ PWD टेंडर घोटाला! ‘लिफाफा मत खोलो’ लिखकर बंटे करोड़ों के ठेके, तत्कालीन SE कुंजाम पर सिंडिकेट चलाने का आरोप….

    लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत यांत्रिकी शाखा में टेंडर आवंटन में भारी गड़बड़ी और राजस्व को चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान करीब 4 करोड़ 22 लाख रुपए के 8 अलग-अलग टेंडरों में चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। पूरे मामले की लिखित शिकायत राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रमुख अभियंता से करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

    Corruption News: ठेकेदारों का सिंडिकेट

    पत्रिका के हाथ लगे आधिकारिक और आरटीआई दस्तावेजों के मुताबिक, 8 महत्वपूर्ण टेंडरों में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। ठेकेदारों ने एक सुनियोजित सिंडिकेट (कर्टेल) बनाकर विभाग के आला अधिकारियों की साठगांठ से इन कामों को हथियाया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान बकायदा लिखित आवेदन दिए गए कि हमारा वित्तीय लिफाफा न खोला जाए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सिंडिकेट के पसंदीदा ठेकेदार को ही न्यूनतम दर पर काम मिल सके और बाकी प्रतिस्पर्धी दौड़ से बाहर हो जाएं।

    शिकायत पत्रों में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता टीआर कुंजाम को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि कुंजाम ने अपने परिचितों के नाम पर कांट्रेक्टरों की एक फेहरिस्त तैयार कर रखी है, जिन्हें उपकृत किया जाता रहा। इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें विभाग का मुख्य अभियंता बना दिया गया।

    क्या है नियम?

    नियमानुसार यदि कोई टेंडरकर्ता 120 दिनों की तय अवधि से पहले अपने प्रस्ताव से पीछे हटता है या लिफाफा न खोलने का आवेदन देता है, तो उसकी अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट जब्त कर ली जाती है। बार-बार ऐसा करने पर ठेकेदार का पंजीयन दो वर्ष के लिए निलंबित करने का प्रावधान है। लेकिन इन मामलों में न तो ईएमडी जब्त हुई और न ही किसी पर प्रतिबंध लगा, बल्कि उन्हें राशि लौटाकर वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए।

    PWD Tender Irregularities: ये ठेकेदार और कार्य रहे रडार पर

    दस्तावेजों के मुताबिक संदीप भोंसले, पी एंड वॉय एसोसिएट, सागर शर्मा, अंकिता इलेक्ट्रिकल्स, भारत कंस्ट्रक्शन, डीएम झा, सुपरटेक सॉल्यूशन्स, पराग इंफ्रा और एनके ट्रेडर्स ने बार-बार वित्तीय लिफाफा न खोलने के आवेदन दिए।

    हेराफेरी के शिकार हुए प्रमुख कार्यों में रायपुर सब-डिवीजन का इलेक्ट्रिफिकेशन वर्क (45.04 लाख), कबीर नगर-हीरापुर का डिपॉजिट वर्क (65 लाख), विधानसभा सब-डिवीजन में एचटी-एलटी लाइन शिफ्टिंग (93.36 लाख), और रविशंकर शुक्ल विवि का ऑडियो-वीडियो सिस्टम रिनोवेशन (41.87 लाख) समेत बलौदाबाजार और पंचशील नगर के कुल 8 कार्य शामिल हैं।

    मैं इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी और फाइलें तलब की जाएंगी-मुकेश बंसल, सचिव, लोक निर्माण विभाग

    मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है। आरटीआई से क्या जानकारी मिली है और उसमें क्या दावे हैं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता-टी.आर. कुंजाम, मुख्य अभियंता, विद्युत यांत्रिकी मंडल

  • स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमी दूर, बिजली विभाग ने बताई बिल बढ़ने की वजह….

    स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमी दूर, बिजली विभाग ने बताई बिल बढ़ने की वजह….

    स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही शंकाओं और भ्रम को दूर करने के लिए बिजली विभाग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने साफ कहा है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि यह केवल उपभोक्ता द्वारा उपयोग की गई वास्तविक बिजली खपत का सटीक रिकॉर्ड तैयार करता है। यदि किसी उपभोक्ता का बिल पहले की तुलना में अधिक आया है तो इसका मुख्य कारण बिजली की बढ़ी हुई खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।

    उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर

    स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि केवल वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है तो उसका प्रमुख कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर। स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उपभोक्ता को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध कराता है। मोर बिजली ऐप के माध्यम से उपभोक्ता हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन-से विद्युत उपकरण सबसे अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और किन उपायों से खपत कम की जा सकती है।

    पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर

    पहले उपभोक्ताओं को केवल महीने के अंत में बिजली बिल मिलने पर ही खपत का पता चलता था, जबकि स्मार्ट मीटर में उपभोक्ता पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग पर नियंत्रण संभव होता है और बिल भी कम किया जा सकता है।बिजली विभाग ने बताया कि प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के अनुसार लागू होती हैं। शून्य से 100 यूनिट तक 4.40रुपये प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये प्रति यूनिट 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये,601 यूनिट से अधिक पर 8.80रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित हैं। जैसे ही बिजली खपत बढ़कर अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।

    400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना

    विभाग के अनुसार इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी के कारण अधिकांश घरों में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा। इसी वजह से बिजली की खपत बढ़ी और कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह स्थिति मौसम और खपत से जुड़ी है, न कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली से। स्मार्ट मीटर का एक बड़ा लाभ यह भी है कि उपभोक्ता अपनी मासिक खपत को 400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना पहले से बना सकते हैं। इससे उन्हें राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहता है। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो योजना का लाभ प्रभावित होता है और बिल बढ़ जाता है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता को समय रहते ऐसी स्थिति से बचने का अवसर देता है।

    बिजली विभाग ने बताया

    बिजली विभाग ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच में अधिकांश मामलों में मीटर सही पाया गया। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर संबंधी कोई शिकायत हो तो वह 1912 पर संपर्क कर सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करें, बिजली की खपत पर नियमित निगरानी रखें तथा ऊर्जा संरक्षण अपनाकर बिजली बिल कम करें। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल को और कम अथवा शून्य करने का लाभ भी लिया जा सकता है।

  • हो जाइए तैयार, बदले जाएंगे भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ये नोट; आरबीआई ने कर दिया बड़ा एलान…

    हो जाइए तैयार, बदले जाएंगे भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ये नोट; आरबीआई ने कर दिया बड़ा एलान…

    UPI का जमाना है. लोग कैश कम ही रखते हैं. वजह सही है, क्योंकि कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं और आसानी से फट जाते हैं. हालांकि, यह प्रॉब्लम अब सॉल्व होने वाली है, क्योंकि भविष्य में आपकी जेब में जो नोट होगा वह प्लास्टिक का हो सकता है.

    RBNNMPL, जो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की नोट प्रिंटिंग विंग है, ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है. कंपनी ने दुनिया भर की कंपनियों से पॉलीमर शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (EOI) मंगाए हैं, जिसका मतलब है कि पहली बार नोट छापने के लिए ज़रूरी प्लास्टिक मटीरियल खरीदने का प्रोसेस ऑफिशियली शुरू होता दिख रहा है. शुरुआती दौर में, 10 और 20 रुपये के नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किए जा सकते हैं.

    प्लास्टिक नोट असल में क्या होते हैं?

    प्लास्टिक नोटों को पॉलीमर नोट कहा जाता है. ये आम प्लास्टिक पर नहीं, बल्कि एक खास, मज़बूत प्लास्टिक फिल्म पर प्रिंट होते हैं. इस फिल्म पर प्रिंटिंग के लिए सफेद कोटिंग की जाती है. नोट में एक ट्रांसपेरेंट विंडो भी होती है, जिसे इसका सबसे ज़रूरी सिक्योरिटी फीचर माना जाता है. यही वजह है कि ऐसे नोटों की नकली बनाना बहुत मुश्किल होता है.

    कौन से नोट सबसे पहले बदले जा सकते हैं?

    एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो 10 और 20 रुपये के नोट पॉलीमर से बनने वाले पहले नोट हो सकते हैं. वजह साफ़ है: ये सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं और सबसे जल्दी खराब होते हैं.

    RBI का यह कदम कितना अहम है?

    BRBNMPL वही कंपनी है जो मैसूर और सालबोनी में अपने प्रेस में इंडियन करेंसी प्रिंट करती है. यह कंपनी पॉलीमर शीट खरीदने के लिए ग्लोबल कंपनियों से प्रपोज़ल मांग रही है, यह सिर्फ़ एक आइडिया नहीं है, बल्कि तैयारी का एक पक्का संकेत है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अगले महीने मार्केट में प्लास्टिक के नोट मिल जाएंगे. यह प्रोसेस अभी शुरुआती स्टेज में है.

    5 जून, 2026 को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि पॉलीमर नोट के प्रपोज़ल पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने साफ़ किया कि कोई आखिरी फ़ैसला नहीं हुआ है और सेंट्रल बैंक इसके फ़ायदे और नुकसान देख रहा है.

    भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया

    भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया लगभग 14 साल पुराना है. इस पर पहली बार 2009 के आसपास चर्चा हुई थी. 2012 में,  सरकार ने 10 रुपये के 1 बिलियन पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंज़ूरी दी.
    2014 में, कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में अलग-अलग मौसम में इनका टेस्ट करने का फ़ैसला किया गया. 2016 में, सरकार ने घोषणा की कि सामान खरीदने का प्रोसेस शुरू हो गया है, लेकिन टेक्निकल और ऑपरेशनल कारणों से प्लान आगे नहीं बढ़ सका और प्रोजेक्ट को रोक दिया गया.

  • कारोबारी को 500 टन चीनी का लालच देकर 1.87 करोड़ की ठगी! खमतराई पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ किया केस दर्ज…

    कारोबारी को 500 टन चीनी का लालच देकर 1.87 करोड़ की ठगी! खमतराई पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ किया केस दर्ज…

    रायपुर : व्यापार की चकाचौंध भरी दुनिया में एक बार फिर धोखे का जाल बिछा दिया गया। रायपुर के थोक शक्कर कारोबारी राजेश अग्रवाल (सिंघल प्रोविजन स्टोर्स, श्रीनगर रोड) को 500 टन चीनी सप्लाई करने के बड़े सौदे ने रातोंरात उनकी नींद उड़ा दी। फरवरी 2025 में शुरू हुआ यह सिलसिला अंत में 1 करोड़ 87 लाख 48 हजार 667 रुपये की भारी ठगी में बदल गया।

    कैसे रचा गया धोखे का जाल?
    सब कुछ शुरू हुआ जब राजेश अग्रवाल की मुलाकात राजीव मोरे नाम के व्यक्ति से हुई। मोरे ने खुद को पुणे स्थित नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिनिधि बताया। शुरुआत छोटे ऑर्डर से हुई — पहले 35 टन, फिर 70 टन चीनी समय पर सप्लाई हो गई। भरोसा जम गया।

    फिर आया बड़ा धमाका — 500 टन चीनी का सौदा। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है। एडवांस मांगा गया। राजेश अग्रवाल ने 17 से 21 फरवरी 2025 के बीच RTGS के जरिए कुल 1.87 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। भुगतान होते ही कंपनी ने GST इनवॉयस और E-Way बिल भेजे। बताया गया कि ट्रक रवाना हो चुके हैं। राजेश अग्रवाल इंतजार करते रहे… लेकिन चीनी का एक दाना भी रायपुर नहीं पहुंचा।

    धोखे का पर्दाफाश
    जब शक हुआ तो राजेश ने जांच कराई। पता चला कि जिन ट्रकों के नंबर दिए गए थे, उनमें उनके नाम का कोई माल लोड ही नहीं किया गया था। बाद में उसी वाहनों के नाम पर क्रेडिट नोट जारी कर कागजी खेल खेला गया। कई बार फॉलो-अप करने पर कंपनी के संचालक रफीक बाबा शेख ने व्हाट्सएप पर मैसेज किया कि “राजीव मोरे तो सिर्फ ब्रोकर था”। इसके बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख समेत पूरा गिरोह गायब है।

    पुलिस एक्शन
    शिकायत पर खमतराई थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड, राजीव मोरे, रफीक बाबा शेख, मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420, 406 आदि) का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, ई-वे बिल, GST रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। मामले में अंतरराज्यीय ठगी का पहलू भी सामने आ रहा है। राजेश अग्रवाल ने कहा, “छोटे-छोटे ऑर्डर समय पर पूरा करके भरोसा जीता गया। बड़े सौदे में पूरा खेल रचा गया।”पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस तरह की कंपनियां छोटे सौदों से भरोसा बनाकर बड़े एडवांस हड़पने का रैकेट चलाती हैं। जांच जारी है, जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

  • महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में ED की बड़ी कार्रवाई: 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर विकास गर्ग, अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त…

    महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में ED की बड़ी कार्रवाई: 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर विकास गर्ग, अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त…

     रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल ऑफिस ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। ED ने इस मामले के प्रमुख आरोपियों में से एक EbixCash के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार कर 10 दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल कर लिया है। साथ ही अब तक मामले में 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है।

    दिल्ली से गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड

    ED के मुताबिक, विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नई दिल्ली की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से ED ने उसकी ट्रांजिट रिमांड हासिल की।

    10 दिनों की ED कस्टडी में आरोपी

    ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद विकास गर्ग को 15 जुलाई 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया। ED की दलीलों को सुनने के बाद, रायपुर की विशेष अदालत ने आरोपी विकास गर्ग को 24 जुलाई तक कुल 10 दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है। अब पूछताछ के दौरान इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े चेहरों और वित्तीय लेन-देन का खुलासा होने की उम्मीद है।

    अब तक 4,000 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त

    महादेव ऑनलाइन बुक और अन्य अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ ED की यह कार्रवाई देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बन चुकी है। जांच एजेंसी इस मामले में अब तक देश और विदेश में फैले एक विशाल नेटवर्क का भंडाफोड़ कर चुकी है। मामले में अब तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है।

    जानिए पूरा मामला

    ED ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने ‘महादेव ऑनलाइन बुक’, ‘स्काईएक्सचेंज’ और अन्य के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से जुड़े मामले में विकास गर्ग को ‘प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। विकास गर्ग को 14.07.2026 को नई दिल्ली में PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें नई दिल्ली की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के सामने पेश किया गया, जिसने ट्रांजिट रिमांड दी और उसके बाद उन्हें 15.07.2026 को रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के सामने पेश किया गया। रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) ने विकास गर्ग को 24.07.2026 तक, यानी 10 दिनों के लिए ED की कस्टडी में भेज दिया है।

    भौगोलिकसंदर्भ

    ED ने छत्तीसगढ़ पुलिस (दुर्ग) द्वारा दर्ज FIR और छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि की पुलिस द्वारा दर्ज कई अन्य FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। इन FIR में गैर-कानूनी ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और सहयोगियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। ED की जांच से पता चला कि सट्टेबाजी का सिंडिकेट विदेश से चलाए जा रहे फ्रैंचाइज़ी-आधारित ‘पैनल’ नेटवर्क के ज़रिए काम करता था और गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हर महीने 450 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) करता था।

    ED की जांच से पता चला कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ और ‘स्काईएक्सचेंज’ के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हुई अवैध कमाई को कई स्तरों वाले स्ट्रक्चर के ज़रिए लॉन्डर किया गया। इसमें शेल कंपनियों के जाल के ज़रिए कैश के बदले ‘अकोमोडेशन एंट्री’ की व्यवस्था करना और दुबई, मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम में मौजूद विदेशी कंपनियों के ज़रिए QIP, FPI, FDI और FCCB रूट से निवेश करना शामिल था। इस पैसे को विकास गर्ग के मालिकाना हक और कंट्रोल वाली लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों में लगाया गया, ताकि अवैध पैसे को वैध दिखाया जा सके। अवैध कमाई को उनके ग्रुप की कंपनियों के ज़रिए और भी कई स्तरों पर घुमाया गया और उसका इस्तेमाल कई कामों में किया गया, जैसे कि यूनाइटेड स्टेट्स बैंकरप्सी कोर्ट के ज़रिए अमेरिका की कंपनी EBIX Inc. में 97.58% हिस्सेदारी खरीदना, और भारत व विदेश में शेयर, सिक्योरिटीज़ और अन्य एसेट्स बनाना।

    इस मामले में पहले, 05.06.2026 को एक प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था। इसके तहत विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनियों की चल और अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया गया था। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 940.77 करोड़ रुपये थी, जिनमें रिहायशी संपत्तियां, ज़मीन के टुकड़े, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज़ शामिल थीं। जांच से यह पता चला है कि विकास गर्ग ने अपने खिलाफ चल रही जांच के दौरान भी अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) को छिपाने और इधर-उधर करने की कोशिशें जारी रखीं।

    इस मामले में पहले सात प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए गए थे और रायपुर की माननीय स्पेशल कोर्ट (PMLA) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की गई हैं। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया है। इस मामले में अब तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच/ज़ब्त/फ़्रीज़ किया गया है। आगे की जांच जारी है।

  • ड्राइविंग के दौरान आया हार्ट अटैक, बेकाबू कार नाले में गिरी; 55 वर्षीय चालक की मौत…

    ड्राइविंग के दौरान आया हार्ट अटैक, बेकाबू कार नाले में गिरी; 55 वर्षीय चालक की मौत…

    जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक दर्दनाक हादसे में ड्राइविंग के दौरान हार्ट अटैक आने से 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना गोहलपुर थाना क्षेत्र के अमखेड़ा रोड की है, जहां अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क से उतरकर नाले में जा गिरा। गनीमत रही कि उस समय सड़क पर ज्यादा यातायात नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    अचानक हार्ट अटैक आने की आशंका
    मृतक की पहचान हनुमानताल क्षेत्र के कसाई मंडी निवासी बाबुआ हाजी (55) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार वह बुधवार को अपनी कार से अमखेड़ा रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक आने की आशंका है, जिसके कारण कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाले में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों ने तुरंत कार तक पहुंचकर चालक को बाहर निकाला और इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    क्रेन की मदद से कार को नाले से निकाला
    घटना की सूचना मिलते ही गोहलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। बाद में क्रेन की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया। हादसे के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में चालक की मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। हालांकि मौत के सटीक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    अधिकारियों के अनुसार यदि उस समय सड़क पर अधिक ट्रैफिक होता तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था। समय रहते वाहन सड़क से हट जाने के कारण अन्य किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

  • लैलूंगा थप्पड़कांड में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर को थप्पड़ मारने वाली युवती पर FIR दर्ज…

    लैलूंगा थप्पड़कांड में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर को थप्पड़ मारने वाली युवती पर FIR दर्ज…

    रायगढ़। लैलूंगा के चर्चित थप्पड़कांड में नया कानूनी मोड़ आ गया है। सरकारी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक रेमन भार्गव की शिकायत पर पुलिस ने उस युवती के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसने कुछ दिन पहले उन्हें सरेआम थप्पड़ मारने का आरोपित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया था। प्रोफेसर का आरोप है कि युवती ने उनसे रुपए मांगे, मना करने पर गाली-गलौज की, कॉलर पकड़कर मारपीट की और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 296 और 351(3) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ सहायक प्राध्यापक रेमन भार्गव ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि भागीरथी पटेल कॉलोनी में रहने वाली युवती का उनके घर आना-जाना था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवती कई बार उधार में रुपए मांग चुकी थी। प्रोफेसर का कहना है कि हाल में फिर पैसे मांगने पर उन्होंने इंकार किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि युवती ने उनके साथ अभद्रता की, कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारे और झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी दी। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि घटना के बाद भय के कारण वे कुछ समय के लिए लैलूंगा छोड़कर रायगढ़ चले गए थे और बाद में पत्नी के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई।

    यहीं से शुरू हुआ था पूरा विवाद

    यह वही मामला है, जिसने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वीडियो में एक युवती सहायक प्राध्यापक का कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारते और तीखी नोकझोंक करते दिखाई दे रही थी। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सहायक प्राध्यापक पिछले करीब डेढ़ साल से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से अश्लील संदेश भेज रहे थे तथा उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाल रहे थे। युवती ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया था। पुलिस ने उस शिकायत के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 और 79 के तहत मामला दर्ज किया था।

    अब जांच के केंद्र में दोनों पक्षों के आरोप

    ताजा एफआईआर के बाद यह मामला अब एकतरफा शिकायत का नहीं रहा। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज हैं और दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी अब दोनों मामलों के तथ्यों, गवाहों के बयान, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों का परीक्षण करेगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एम.एल. पटेल ने कहा कि घटना कॉलेज परिसर की नहीं है और कॉलेज को इस संबंध में युवती की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च शिक्षा विभाग को अवगत कराया जाता।

    जांच में जुटी पुलिस

    लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती की शिकायत पर पहले सहायक प्राध्यापक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था। अब प्रोफेसर की शिकायत पर युवती के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • मालगाड़ी डिरेल मामला : JCB बकेट को रेल लाइन पर छोड़ भागे थे मजदूर, डब्बे डिरेल होने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार…

    मालगाड़ी डिरेल मामला : JCB बकेट को रेल लाइन पर छोड़ भागे थे मजदूर, डब्बे डिरेल होने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार…

    बिलासपुर मंडल के करगी रोड रेलवे स्टेशन पर 13 जुलाई को हुई मालगाड़ी डिरेलमेंट मामले में RPF ने बड़ी कार्रवाई की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बिलासपुर से इंदौर तक छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि इस साजिश का मुख्य आरोपी निजी ठेकेदार पवन नायक अब भी फरार है।

    क्या हुआ था 13 जुलाई को ?

    Train Derailment Case : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर रेल मंडल में 48 घंटे के भीतर दूसरा रेल हादसा हो गया। सोमवार दोपहर करगी रोड रेलवे स्टेशन पर डाउन मेन लाइन से गुजर रही एक मालगाड़ी ट्रैक पर पड़ी जेसीबी मशीन की बकेट से टकरा गई। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे तीन वैगन पटरी से उतर गए। हादसे से प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर रेल संचालन प्रभावित रहा। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इससे पहले शनिवार को बिलासपुर स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर मालगाड़ी डिरेल हो गई थी।

    Train Derailment Case : रेलवे के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 2.20 बजे मालगाड़ी पीसीएमसी से आकर करगी रोड स्टेशन की डाउन मेन लाइन नंबर-3 से गुजर रही थी। इसी दौरान लोको पायलट ने ट्रैक पर जेसीबी की बकेट पड़ी देख तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन ट्रेन और बाधा के बीच दूरी कम होने से मालगाड़ी समय पर नहीं रुक सकी। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे पहला, तीसरा और छठवां वैगन पटरी से उतर गए।