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  • शराब, भांग और बीयर की दुकानों पर नहीं लिखा जाएगा सरकारी और ठेका शब्द…

    शराब, भांग और बीयर की दुकानों पर नहीं लिखा जाएगा सरकारी और ठेका शब्द…

    UP में अब सड़क किनारे या हाइवे पर कहीं भी ‘सरकारी’ और ‘ठेका’ शब्द लिखा दिखाई नहीं देगा. शराब, बीयर या भांग की दुकनों पर इन शब्दों के स्तेमाल करने पर पाबंदी होगी. यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शराब और बीयर की दुकानों पर लगने वाले बोर्ड में ‘सरकारी’ और ‘ठेका’ जैसे शब्द लिखने पर पाबंदी लगा दी है. अब इसके स्थान पर दुकानदार बीयर शॉप, भांग की दुकान और शराब की दुकान जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

    अभी तक यूपी में सरकारी शराब का ठेका,सरकारी भांग ठेका या सरकारी बीयर की दुकान जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता था. इस आदेश के बाद अब ‘ठेका’ शब्द का ठिकाना खत्म हो जाएगा. जानकारी के मुताबिक,आबकारी विभाग ने सरकार की तरफ से जारी आदेशों के बाद यह कदम उठाया है. घर में रखनी है शराब, तो लेना होगा लाइसेंस अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और घर में बार की व्यवस्था करने का शौक है, तो आपको सरकार से लाइसेंस लेना होगा. नई आबकारी नीति के अनुसार घर में 6 लीटर से ज्यादा शराब या बीयर रखने पर जिला कलेक्ट्रेट से लाइसेंस लेना जरूरी होगा. इसकी सिक्योरिटी फीस 51,000 रुपये तय की गई है. यह लाइसेंस एक साल के लिए वैलिड होगा और आपको हर साल इसे रिन्यू कराना होगा. जानकारी के मुताबिक, लाइसेंस रिन्यू कराने की फीस 12,000 रुपये तय की गई है. मतलब, हर साल आपको 12,000 हजार रुपये दे कर लाइसेंस रिन्यू कराना होगा।

  • आधार में घर बैठे अपडेट करें अपना नाम, पता और जन्मतिथि, UIDAI ने फिर शुरू की सर्विस, ये है तरीका….

    आधार में घर बैठे अपडेट करें अपना नाम, पता और जन्मतिथि, UIDAI ने फिर शुरू की सर्विस, ये है तरीका….

    UIDAI ने डेमोग्राफिक डिटेल्स ऑनलाइन अपडेट कराने की सुविधा ​बंद कर दी थी. आधार कार्ड धारक सिर्फ पता ही घर बैठे अपडेट कर सकते थे.आधार धारकों के लिए एक बड़ी सुविधा फिर से शुरू हो गई है. UIDAI ने एक बार फिर लोगों को आधार में डेमोग्राफिक डिटेल्स घर बैठे अपडेट करने की अनुमति दे दी है.

    अब घर बैठे आधार में अपना नाम, पता, जन्मतिथी और लिंग अपडेट करा सकते हैं. UIDAI ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी है.

    दरअसल UIDAI ने डेमोग्राफिक डिटेल्स ऑनलाइन अपडेट करने की सुविधा ​बंद कर दी थी. आधार कार्ड धारक सिर्फ पता ही घर बैठे अपडेट कर सकते थे. इसके अलावा किसी भी डेमोग्राफिक डिटेल का अपडेशन कराने के लिए आधार केंद्र जाना पड़ता था.

    अपडेशन का तरीका

    यह ध्यान रखें कि आपका मोबाइल नंबर आधार में रजिस्टर होना जरूरी है क्योंकि अपडेशन के प्रोसेस में ओटीपी उसी मोबाइल नंबर पर आएगा.

    नाम, पता, जन्मतिथि और लिंग अपडेट करने के लिए

    https://ssup.uidai.gov.in/ssup/ पर जाएं.
    ‘प्रोसीड टू अपडेट आधार’ पर क्लिक करें.
    इसके बाद नया पेज खुलेगा यहां 12 डिजिट के आधार नंबर को टाइप करें, कैप्चा कोड डालें. इसके बाद सेंड ओटीपी पर क्लिक करें.

    रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा.

    ओटीपी को निर्धारित स्पेस में डालकर सबमिट करें.

    इसके बाद फिर नया पेज खुलेगा और यहां दो विकल्प मिलेंगे- 1- सपोर्टिंग डॉक्युमेंट प्रूफ के साथ एड्रेस समेत डेमोग्राफिक डिटेल्स का अपडेशन. 2- एड्रेस वैलिडेशन लेटर के जरिए एड्रेस अपडेट
    नाम, जन्मतिथि, लिंग, पते में से किसी को डॉक्युमेंट प्रूफ के साथ अपडेट करने के लिए ‘अपडेट डेमोग्राफिक्स डेटा’ पर क्लिक करना होगा.
    इसके बाद आपको जिस डिटेल को अपडेट करना है, उसका चुनाव करना होगा. इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी.

    इन बातों का रखें ध्यान

    आधार में नाम जीवन में दो बार, जेंडर एक बार, जन्मतिथि एक बार अपडेट कराई जा सकती है.

    वैलिड डॉक्युमेंट प्रूफ की कलर स्कैन्ड कॉपी अपलोड करनी होगी.

    जेंडर अपडेशन के लिए किसी प्रूफ की जरूरत नहीं है.

    आधार कार्ड धारक के नाम पर अगर कोई वैलिड एड्रेस प्रूफ नहीं है, तो वह एड्रेस वैलिडेशन

    लेटर की मदद से पता अपडेट करा सकता है.

  • कौन है चंदा लेने के लिए अधिकृत,छत्तीसगढ़ सरकार ने मंदिर ट्रस्ट से पूछा…

    कौन है चंदा लेने के लिए अधिकृत,छत्तीसगढ़ सरकार ने मंदिर ट्रस्ट से पूछा…

    रायपुर। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए संघ और भाजपा पदाधिकारियों ने राशि एकत्र करने का अभियान शुरू किया है। इस बीच, छत्तीसगढ़ सरकार ने मंदिर निर्माण ट्रस्ट से यह पूछा है कि चंदा लेने के लिए किन-किन संगठनों को अधिकृत किया गया है।
    मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को पत्र भेजकर जानकारी मांगी है। दरअसल, बिलासपुर में फर्जी रसीद बुक से चंदा लेने के मामले में एक एफआइआर दर्ज की गई है। इसके बाद सरकार ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जानकारी मांगी है।
    जैन ने अपने पत्र में कहा है कि मंदिर निर्माण के नाम पर अवैध वसूली हो रही है, जिससे प्रदेश के नागरिक ठगे जा रहे हैं। इस ठगी से रोकने के लिए अधिकृत संस्थाओं की जानकारी दी जाए।


    इस बीच, कांग्रेस विधायक अमितेश शुक्ला ने एक लाख 11 हजार स्र्पये का दान मंदिर निर्माण के लिए किया है। अमितेश दान देने के दौरान भगवा कुर्ते में नजर आ रहे थे। अमितेश ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि मंदिर निर्माण के लिए राशि सौंप रहे हैं। यह बहुत ही सुखद है।

  • आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी पर रोक,सात साल से कम सजा के मामलों में कोर्ट ने चेताया-‘न हो आदेश की अवहेलनाा’

    आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी पर रोक,सात साल से कम सजा के मामलों में कोर्ट ने चेताया-‘न हो आदेश की अवहेलनाा’

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की पुलिस को सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी न करने के कानून का पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को भी गिरफ्तारी पर पुलिस रिपोर्ट से संतुष्ट होने पर ही पुलिस कस्टडी रिमांड देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस को सीआरपीसी की धारा 41(1)बी व 41ए की शर्तों का पालन करते हुए जरूरी होने पर ही अभियुक्त की गिरफ्तारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि अनावश्यक गिरफ्तारी की गई तो गलती करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की कार्यवाही की जाएगी।

    कोर्ट ने पुलिस को व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं सामाजिक व्यवस्था के बीच बैलेंस कायम रखने का भी आदेश दिया है। साथ ही आदेश की कॉपी व परिपत्र प्रदेश के डीजीपी, विधि सचिव व महानिबंधक को सभी पुलिस थानों को अनुपालनार्थ भेजने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ केजे ठाकर एवं न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने एटा के विमल कुमार व तीन अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी है।
    मामले के तथ्यों के अनुसार याची की प्रियंका के साथ शादी तय हुई। सगाई में में साढे छह लाख रुपये दिए गए। उसके बाद कार की मांग पूरी करने पर शादी करने की शर्त रखी गई है। इस पर एटा की कोतवाली में 28 नवम्बर 2020 को दहेज उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस गिरफ्तारी के लिए याची के घर पर लगातार दबिश दे रही है। याची का कहना था कि धारा 41(1)बी की शर्तों व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के तहत बिना ठोस कारण के सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी न करने पर रोक लगी है। इसके बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज होते ही कानूनी उपबंधों की अवहेलना करते हुए गिरफ्तारी करने के लिए दबिश देने लगती है, जो कानून के विपरीत है।

    इस धारा में आरोपी की हाजिरी की दो सप्ताह का नोटिस देने तथा साक्ष्य व पर्याप्त वजह होने पर ही गिरफ्तार करने का अधिकार है। कहा गया कि सामान्यतया पुलिस सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी नहीं कर सकती। कोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को भी रूटीन रिमांड न देने का निर्देश जारी किया है और कहा है कि बिना ठोस कारण के अभियुक्त की गिरफ्तारी की रिपोर्ट जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से महानिबंधक को भेजी जाए ताकि मनमानी करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। कोर्ट ने जिला न्यायाधीश को प्रशासन के साथ मासिक बैठक में इसकी जानकारी देने को भी कहा है। कोर्ट ने सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपियों की हाईकोर्ट में लगातार गिरफ्तारी पर रोक की मांग में आ रही याचिकाओं को दुखःद बताया और कहा कि गंभीर अपराधों के सिवाय बिना ठोस वजह आरोपियों की रूटीन गिरफ्तारी न की जाए। पुलिस अभियुक्त की गिरफ्तारी की रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करे और मजिस्ट्रेट संतुष्ट होने पर ही रिमांड देने का निर्देश दे।इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए।

  • 3 लाख की ठगी का आरोप,डॉक्टर सहित दो के खिलाफ अपराध दर्ज….

    3 लाख की ठगी का आरोप,डॉक्टर सहित दो के खिलाफ अपराध दर्ज….

    रायपुर। इलाज करने के बहाने ठगी करने का हैरान करने वाला एक मामला सामने आया है। एक महिला ने डॉक्टर सहित दो लोगों पर ऑर्थराइटिस का इलाज करने के बहाने 3 लाख रुपये की ठगी किये जाने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने नागपुर में रहने वाले डॉक्टर और रायपुर के एक व्यक्ति पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

    सरस्वती नगर थाना प्रभारी गौतम गावड़े ने बताया कि रिटायर्ड शिक्षिका शीतला सिंह पिछले 12-13 साल से आर्थराइटिस की बीमारी से जूझ रही है। 9 दिसम्बर को यह कोतवाली थाना के पास दवाई लेने गयी थी। तभी वहां पर खड़े कोटा निवासी राहुल अग्रवाल नाम के व्यक्ति से पीड़िता का परिचय हुआ। शीतला सिंह ने उसे अपने घुटने की बीमारी के बारे में बताया। तब आरोपी राहुल ने उसे घुटने की बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर रहमान निवासी नागपुर के बारे में बताते हुए पीड़िता से कहा कि मैंने अपनी मां का इलाज करवाया हु अब वो पूरी तरह से स्वस्थ है। आप कहेंगी तो मैं डॉक्टर को रायपुर बुलावा सकता हूं।

    थाना प्रभारी ने बताया,  प्रार्थीया इसके बातों को विश्वास करके अपना मोबाइल नम्बर दे दी। फिर उसी दिन शाम को एक मोबाइल नंबर से इसके पास फोन आया उसने अपने आप को डॉक्टर रहमान बताया। उसने यह जानकारी दी कि अभी वह इलाज करने रायपुर आया है। पीड़िता उसके पास इलाज कराने के लिए तैयार हो गयी। फिर अगले दिन 11 दिसम्बर को वह डॉक्टर रहमान के पास गई वहां पर राहुल अग्रवाल भी मौजूद था। डॉक्टर रहमान ने पीड़िता के घुटने को देखने के बाद कहा कि मेरा फीस ज्यादा है..जिस पर प्रार्थीया तैयार हो गयी। पूरे इलाज के नाम पर आरोपी डॉक्टर ने 2 लाख 40 हजार रुपए ले लिए। इसके अलावा पीड़िता शीतला ने 75 हजार रुपये की दवाई भी खरीदा था। काफी दिन तक उसने दवाई का सेवन किया लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। तब इसने डॉक्टर रहमान को फोन लगाया तो वह टालमटोल करता रहा और बाद में फिर उसने मोबाइल बंद कर दिया। दोनों आरोपी का लोकेशन खंगाला जा रहा है जल्द दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • बैंक अधिकारी ने ली 2000 करोड़ रिश्वत, नोटों से भरा मिला फ्लैट, अब मिली मौत की सजा

    बैंक अधिकारी ने ली 2000 करोड़ रिश्वत, नोटों से भरा मिला फ्लैट, अब मिली मौत की सजा

    कोर्ट ने लाई शाओमिन को 5 जनवरी को मौत की सजा सुनाई थी। शुक्रवार को उन्हें मौत दे दी गई। यह साफ नहीं है कि फांसी या फिर किस तरीके से पूर्व बैंक अधिकारी को सजा दी गई। पूर्व बैंक अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सीक्रेट तरीके से दूसरा परिवार शुरू किया था। अपने मूल परिवार से अलग वे एक महिला के संग लंबे वक्त से पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे। सीक्रेट फैमिली के साथ उनका एक बच्चा भी था।

    लाई शाओमिन ने घूस के रूप में 2026 करोड़ रुपये 2008 से 2018 के बीच लिए। शाओमिन के चेयरमैन भी हुआ करते थे। 5 जनवरी को तिआनजिन के सेकंडरी इंटरमीडियट पीपल्स कोर्ट में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।

    शाओमिन को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का रिव्यू भी किया था। फैसले के रिव्यू के दौरान यह पाया गया कि शाओमिन ने समाज को जितना नुकसान पहुंचाया है, वह उनके अच्छे कामों पर काफी भारी पड़ता है। इसी वजह से उनकी मौत की सजा बरकरार रखी गई थी।

    इससे पहले शाओमिन का एक वीडियो भी प्रसारित किया गया था जिसमें वे अपना गुनाह कबूलते नजर आते हैं। सरकारी टीवी चैनल पर यह भी दिखाया गया था कि शाओमिन के बीजिंग स्थिति एक अपार्टमेंट के कई हिस्से कैश से भरे हुए मिले थे।

  • ‘अकेला व्यक्ति बिना हाथापाई के नहीं कर सकता रेप’- हाइकोर्ट

    ‘अकेला व्यक्ति बिना हाथापाई के नहीं कर सकता रेप’- हाइकोर्ट

    पॉक्सो के तहत यौन शोषण को लेकर दिए अपने विवादास्पद आदेश के बाद, बंबई उच्च न्यायालय के नागपुर पीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेदीवाल ने हाल ही में दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी कर दिया है। अपने आदेश में न्यायमूर्ति गनेदीवाल का कहना है कि एक अकेले आदमी के लिए पीड़िता का मुंह बंद करना और बिना किसी हाथापाई के एक ही समय में उसके और अपने कपड़े उतारना असंभव लगता है। गनेदीवाल पहली बार चर्चा में तब आई थीं जब उन्होंने एक 12 वर्षीय लड़की के स्तन को छूने के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया था क्योंकि उनके बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं बना था। इसके बाद उन्होंने आदेश दिया था कि पांच साल की बच्ची का हाथ पकड़ना और उसके सामने पैंट की जिप खोलना पॉक्सो अधिनियम के तहत यौन शोषण के दायरे में नहीं आता है।

    ताजा मामले में न्यायमूर्ति गनेदीवाल की पीठ ने कहा, ‘किसी एक व्यक्ति के लिए अभियोजन पक्ष (पीड़िता) का मुंह बंद करके, उसके और अपने कपड़े उतारना और बिना किसी हाथापाई के जबरन दुष्कर्म करना बेहद असंभव लगता है। चिकित्सा साक्ष्य भी अभियोजन पक्ष की बात का समर्थन नहीं करते हैं।’ गनेदीवाल 26 साल के सूरज कासकर की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थीं, जो यवतमाल का रहने वाला है। जुलाई 2013 में पीड़िता की मां ने अपने पड़ोसी कासकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि आरोपी ने तब उनकी 15 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके चार्जशीट दाखिल की थी।

    सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दुष्कर्म और आपराधिक अत्याचार के आरोप तो साबित कर सकता है लेकिन वह यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने अदालत को बताया कि घटना के समय पीड़िता 18 साल से ऊपर थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। वहीं अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि आरोपी रात के 9.30 बजे तब उसके घर आया जब उसका छोटा भाई नीचे सो रहा था और उसकी मां घर से बाहर थी। रिपोर्ट में पीड़िता का कहना है, ‘उस समय सूरज शराब के नशे में धुत होकर मेरे घर आया। मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह बंद कर दिया ताकि मैं चिल्ला न सकूं। इसके बाद उसने मेरे और अपने कपड़े उतारे। दुष्कर्म करने के बाद कासकर अपने कपड़े लेकर भाग गया।’ पीड़िता ने घटना की जानकारी अपनी मां को दी, जिन्होंने बाद में शिकायत दर्ज करवाई।

  • विधान परिषद में अपने मोबाइल पर अश्लील क्लिप देखते दिखाई दिए विधायक…

    विधान परिषद में अपने मोबाइल पर अश्लील क्लिप देखते दिखाई दिए विधायक…

    कर्नाटक में विपक्षी दल कांग्रेस के लिए शुक्रवार को शर्मनाक स्थिति बन गई. पार्टी के एमएलसी प्रकाश राठौड़ विधान परिषद में अपने मोबाइल पर अश्लील क्लिप देखते दिखाई दिए. कुछ कैमरा पर्सन द्वारा ली गई तस्वीरें दिखाती हैं कि राठौड़ पोर्न क्लिप देख रहे थे. बाद में राठौड़ ने मीडिया से कहा कि वो इंटरनेट पर कुछ नहीं देख रहे थे बल्कि मोबाइल से अवांछित वीडियो डिलीट कर रहे थे.

    राठौड़ ने दी सफाई-डिलीट कर रहा था पुराने वीडियो

    राठौड़ ने कहा-मैं सामान्य तौर पर सदन में मोबाइल लेकर नहीं आता. लेकिन इस बार मुझे कुछ सवाल पूछने थे और इसी वजह से मैं फोन चेक कर रहा था. मैंने महसूस किया कि मेरा स्टोरेज फुल है और फिर मैंने वीडियो क्लिप्स डिलीट करने शुरू किए.

    बीजेपी ने की सदन से निष्कासन की मांग
    बीजेपी के प्रवक्ता ने इस मामले पर कहा है-ये ऊपरी सदन है. ये विद्वत लोगों की सदन मानी जाती है और गलत कारणों से इसकी बदनामी हो रही है. आखिरी बार कांग्रेस ने ही सदन में खूब बवाल किया था. अब फिर उनकी पार्टी का एक सदस्य अश्लील वीडियो देखते पकड़ा गया है. मैं उम्मीद करता हूं कि प्रकाश राठौड़ के खिलाफ डीके शिवकुमार सख्त कदम उठाएंगे और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर देंगे.

  • पुलिस और पत्रकारों ने हेलमेट जागरूकता रैली निकालकर दिया जागरूकता का संदेश

    पुलिस और पत्रकारों ने हेलमेट जागरूकता रैली निकालकर दिया जागरूकता का संदेश

    खरसिया। पुलिस कप्तान संतोष सिंह के निर्देशानुसार दिनांक 18 जनवरी 2021 से एक माह तक 32वां राष्ट्रीय सडक सुरक्षा माह 2021 का शुभारंभ किया गया है।

    जिला मुख्यालय तथा अनुविभाग के थानो में दिनांक 17 फरवरी 2021 तक चलने वाले सडक सुरक्षा सप्ताह का आयोजन करने हेतु अलग-अलग तिथि निर्धारित किया गया है। इसी तारतम्य में 28 जनवरी 2021 को खरसिया अनुविभाग के थाना खरसिया क्षेत्र में थाना प्रभारी निरीक्षक एस.आर. साहू, चौकी प्रभारी नंद किशोर गौतम एवं स्टाफ द्वारा हेलमेट जागरूकता रैली निकाला गया।

    पुलिस के साथ इस रैली में खरसिया क्षेत्र के पत्रकार साथियों ने भी भाग लिया तथा खरसियावासियों को यातायात के नियमों का पालन करने का तथा जागरूकता का संदेश दिया गया।


    शाम लगभग 4 बजे खरसिया थाना प्रभारी सुम्मतराम साहू के द्वारा पुलिस चौकी खरसिया के पास हरी झंड़ी दिखाकर हेलमेट रैली को रवाना किया गया जो पुलिस चौकी से निकलकर स्टेशन चौक, गंज बाजार, अग्रसेन चौक, रायगढ़ चैंक, पुत्रीशाला, पुरानी बस्ती से होते हुए वापिस पुलिस चौकी खरसिया में आकर समाप्त हुई। खरसिया टीआई सुम्मतराम साहू एवं चौकी प्रभारी नन्द किशोर गौतम द्वारा रैली के दौरान चौक-चौराहों में दुपहिया चालकों को हेलमेट की अनिवार्यता, नशे की हालत में वाहन न चलाने, नाबालिगों को वाहन चलाने नहीं देने को गया तथा यातायात सुरक्षा से संबंधित पाम्पलेट बांटा गया।

    हेलमेट बाइक रैली में टीआई एसआर साहू, चौकी प्रभारी नंदकिशोर गौतम, एसआई जयमंगल पटेल, प्रधान आरक्षक मनोज पटेल, महेंद्र खरे, चित्रांगद चंद्रा, आरक्षक प्रदीप तिवारी, विशोप सिंह, किशोर राठौर, रामगोपाल यादव, रवि बिंझवार, शिव वर्मा, जय सिंह, दिग्विजय गोयल, कीर्ति सिदार, सोहन यादव, साविल चंद्रा, सुरेंद्र पटेल के अलावा प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के सुनील अग्रवाल, मुकेश लहरे, कैलाश गर्ग, अजय बंसल, विकास ज्योति, लोचन महंत शामिल रहे ।

  • छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है। पीठ ने एक अक्टूबर को याचिकाओं में सुनवाई पूरी कर निर्णय को सुरक्षित रखा था। कोर्ट के इस आदेश से सरकार को झटका लगा है।

    राज्य में आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90 प्रतीशत कर दिया गया था, जिसे संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य की आबादी के अनुपात को देखते हुए पिछड़ा वर्ग के लिए हमने आरक्षण की सीमा बढ़ाई थी, जिस पर न्यायालय ने रोक लगा दी, लेकिन इसके लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम न्यायालय के सामने उचित साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे।

    चार सितंबर को जारी किया था अध्यादेशnull

    राज्य शासन ने चार सितंबर 2019 को अध्यादेश जारी कर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को 27 प्रतिशत कर दिया था। इससे एसटी, एससी व ओबीसी को मिलाकर कुल आरक्षण 82 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके अलावा महिला, दिव्यांग व अन्य वर्ग के लिए प्रावधान जोड़ने पर आरक्षण 90 प्रतिशत हो रहा है। चीफ जस्टिस की पीठ ने एक अक्टूबर को सभी याचिकाओं में एक साथ सुनवाई पूरी कर निर्णय के लिए सुरक्षित रखा था। सरकार की ओर से जो डाटा पेश किया गया वह केन्द्र सरकार का है। यहां लागू नहीं होता है।

    अध्यादेश पर तत्काल प्रभाव से रोकnull

    पीठ ने मामले को शुक्रवार को निर्णय के लिए सुरक्षित रखा गया था। याचिकाकर्ताओं व शासन के अधिवक्ताओं की उपस्थिति में कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य शासन के 4 सितंबर के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के इस आदेश से सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सरकार के अन्य पिछड़ा वर्गो की आबादी प्रदेश में 45 प्रतिशत से अधिक होने, तमिलनाडू और मराठा आरक्षण के तर्क को अमान्य कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, पलास तिवारी, रोहित शर्मा, शैलेन्द्र शुक्ला, वैभव शुक्ला, शक्तिराज सिन्हा समेत अन्य पैरवी कर रहे हैं।

    आरक्षण के पीछे सरकार का तर्क

    इसके खिलाफ आदित्य तिवारी, कुणाल शुक्ला, पुनेश्वरनाथ मिश्रा, पुष्पा पांडेय, स्नेहिल दुबे, अखिल मिश्रा, गरिमा तिवारी समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन ने बिना आंकड़े के आरक्षण को बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के खिलाफ कुल आरक्षण 82 प्रतिशत किया गया है। राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 45.5 प्रतिशत से अधिक होने के कारण आरक्षण बढ़ाया गया है। इसके अलावा सरकार को आरक्षण बढ़ाने का अधिकार है।

    शासन के इस तर्क पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य शासन ने सिर्फ एक सर्वे के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाया है। याचिका में वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक राज्य सेवा परीक्षा में ओबीसी वर्ग के अनारक्षित सीट से चयन के आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसमें उनका प्रतिनिधित्व हमेशा अधिक रहा है। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उनका प्रतिनिधित्व कम है।

    संविधान में ऐसा प्रावधान

    50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संविधान की मूल भावना के अनुसार अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है। इसे समानता का अधिकार समाप्त हो रहा है, राज्यों में जनसंख्या और जाति समुदायों के अलग-अलग अनुपात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आरक्षण संबंधि महाजन कमेटी की स्थापना की थी। महाजन कमेटी की रिपोर्ट में भी आवश्यकता अनुसार आरक्षण घटाने व बढ़ाने का अधिकार है। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण व तमिलनाडु में भी राज्य शासन ने आरक्षण बढ़ाया है। इस आधार पर याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई। हालांकि महाजन कमेटी की रिपोर्ट तय समय के लिए है।

    हमारा फैसला गलत नहीं

    आरक्षण पर लगी अंतरिम रोक पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है उसमें पहले ही छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण था। अब जा के आरक्षण 69 प्रतिशत को उन्होंने स्वीकार किया है इसका अर्थ यह हुआ कि 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति को जो दिया गया था उसे उन्होंने स्वीकार किया है। 10 प्रतिशत जो आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है, उसे भी कोर्ट ने स्वीकार किया है। 13 प्रतिशत जो ओबीसी के लिए है उसके लिए हम लोगों को लड़ाई लड़नी पड़ेगी, हमारा फैसला गलत नही है हम माननीय न्यायालय के सामने सभी साक्ष्य पेश करेंगे।

    आरक्षण विरोधी रही है कांग्रेस

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा स्थगनादेश जारी करने के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है। कौशिक ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपने ओछे राजनीतिक पाखंड से बाज नहीं आई और अब कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही बेनकाब हो गया है। कौशिक ने कहा कि कांग्रेस तो शुरू से आरक्षण के खिलाफ रही है, हालांकि जाहिराना तौर पर वह आरक्षण को अपने राजनीतिक हितों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही है।