Blog

  • न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना होंगे देश के नए मुख्य न्यायाधीश , 24 अप्रैल को लेंगे शपथ….

    न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इनके नाम पर मंजूरी दे दी है। बता दें कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना के नाम की सिफारिश की थी। सीजेआई एसए बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं और 24 अप्रैल को न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना अगले सीजेआई के तौर पर शपथ लेंगे। बता दें कि न्यायमूर्ति नाथुलापति वेंकट रमन्ना को साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। हालांकि उनके कार्यकाल में दो साल से भी कम का वक्त बचा है क्योंकि जस्टिस रमन्ना 26 अगस्त 2022 को रिटायर होने वाले हैं।

    कौन हैं न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना ?
    एनवी रमन्ना का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के कृष्ण जिले के पोन्नवरम गांव में एक कृषि परिवार में हुआ था। न्यायमूर्ति रमन्ना ने दस फरवरी 1983 में वकालत शुरू कर दी थी। न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने विज्ञान और वकालत में स्नातक किया है। 27 जून 2000 को जस्टिस रमन्ना आंध प्रदेश हाईकोर्ट के स्थायी जज के तौर पर नियुक्त हुए।

    साल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश बने
    इसके बाद न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना साल 2013 में 13 मार्च से लेकर 20 मई तक आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस रहे। इसके बाद दो सितंबर 2013 को न्यायमूर्ति रमन्ना का प्रमोशन हुआ और इसके बाद वो दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए।2014 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने
    इसके बाद 17 फरवरी 2014 को न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट के जज बने। फिलहाल न्यायमू्र्ति एनवी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों की फेहरिस्त में आते हैं और सीजेआई एसए बोबडे के बाद दूसरे नंबर पर आते हैं। पिछले कुछ सालों में न्यायमूर्ति का सबसे चर्चित फैसला जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की बहाली का था।

  • एक और साइबर ठगी, डिप्टी कलेक्टर के नाम से बनाया फर्जी फेसबुक आईडी….ठगे गए 64 हजार रुपये…

    एक और साइबर ठगी, डिप्टी कलेक्टर के नाम से बनाया फर्जी फेसबुक आईडी….ठगे गए 64 हजार रुपये…

    बिलासपुर। मस्तुरी थाना क्षेत्र में एक बार फिर साईबर ठगी का मामला सामने आया है साईबर अपराध के बढ़ते मामले को देखते हुए पुलिस विभाग के द्वारा साईबर जागरूकता अभियान चलाया और क्षेत्र के लगभग 72 हजार लोगों को जागरूक किया लेकिन साईबर अपराध पर अंकुश नही लगा पाया । ऐसा ही एक मामला मस्तूरी के ग्राम खैरा में देखने को मिला l ग्राम खैरा निवासी खगेश कुमार साहू 25 वर्षीय को उनके गांव के ही सागर सिंह राज का फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आया जो की रायगढ़ जनपद पंचायत में सीईओ के पद पर पदस्त है सागर सिंह के आईडी से खगेश को मैसेज आया फोन पे पर पैसा डालने से डबल हो जाने का बात कहा गया जब 50 रुपये डाला गया तब उन्हें 100 रुपये वापिस आया ऐसे ही 20,000 भेजने के लिए बोला गया और 20,000 भेजा गया तब ट्रांजेक्शन फैल्ड हो गया तब एक बार और भेजने को कहा और 64,000 रुपये का ठगी कर लिया । पैसा ठगी होने के बाद खगेश ने मस्तुरी थाने शिकायत दर्ज कराया। शिकायत के बाद पता चला कि सागर सिंह का फेसबुक आईडी को हैक कर लिया गया है जिसकी सूचना सागर सिंह ने अपने फेसबुक आईडी पर पोस्ट किया था।वही पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस जांच में जुटी हुई है। आपको बता दे लाख कोशिशों के बाद भी साइबर ठगी रुकने का नाम नही ले रहा है,जिसके कारण घटना हो रही है। फिलहाल देखना होगा की लोग डबल पैसो के लालच में अपना कितना पैसा बर्बाद करते है। या फिर जागरूक होने का परिचय देंगे।

  • नक्सली लीडर हिडमा का बस्तर के पत्रकारों को फोन, एक जवान हमारे कब्जे में….

    नक्सली लीडर हिडमा का बस्तर के पत्रकारों को फोन, एक जवान हमारे कब्जे में….

    बीजापुर। शनिवार को जवानों के खून से होली खेलने वाले नक्सलियों ने एक जवान का अपहरण भी कर लिया है। अभी तक जवान का कोई सुराग नहीं मिल रहा था, लेकिन रविवार देर शाम नक्सली लीडर हिडमा ने बीजापुर के पत्रकारों को फोन करके बताया कि एक जवान हमारे कब्जे में है। पुलिस अब अपहृत जवान को सुरक्षित वापस लाने की कवायद में जुट गई है।

    नक्सलियों के जमावड़े की सूचना पर शुक्रवार को सीआरपीएफ, डीजीआर, कोबरा बटालियन, बस्तरिया बटालियन के जवान सर्चिंग पर निकले थे। दूसरे दिन शनिवार को तर्रेम थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने तीन जगह एंबुश लगाकर जवानों को घेरकर निशाना बनाया। इसमें 23 जवान शहीद हो गए और 50 से ज्यादा जवान घायल हुए थे। दूसरे दिन मौके पर जगह-जगह जवानों के शव बिखरे पाए गए, जबकि कई जवानों का पता नहीं चल रहा था। रविवार शाम तक एक जवान को छोड़कर सभी मिल गए। देर शाम नक्सली लीडर हिडमा ने बीजापुर पत्रकारों को फोन कर बताया कि उनका एक जवान नक्सलियों के कब्जे में है। अपहृत जवान राजेश्वर मनहास सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन का जवान है और जम्मू-कश्मीर का निवासी बताया जा रहा है।

    जवान के नक्सलियों के कब्जे में होने की सूचना के बाद हड़कंप मचा हुआ है। जवान को सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बीजापुर पहुंचे हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि जवान को मुक्त कराने के लिए नक्सली सौदेबाजी पर उतर सकते हैं।

  • छत्तीसगढ़: वो 22 जवान जो बीजापुर नक्सली हमले में मारे गए

    छत्तीसगढ़: वो 22 जवान जो बीजापुर नक्सली हमले में मारे गए

    छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए जवानों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है. नक्सल ऑपरेशन के डीजी अशोक जुनेजा ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की है. वहीं एक जवान शनिवार को मुठभेड़ के बाद से ही लापता है।

    गृहमंत्री अमित शाह ने मुठभेड़ के बाद मौजूदा हालात की दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा की है. इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार और गृह मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।


    दिल्ली पहुंचने से पहले गुवाहाटी में संवाददाताओं से बात करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था, “मैं जवानों के परिवारों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा.”

    बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने कहा है कि ताज़ा जानकारी के मुताबिक, “22 जवानों के शव बरामद हो गए हैं. 31 जवान घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी हालत स्थिर बनी हुई है. एक कोबरा जवान लापता है. तलाशी अभियान जारी है.”

    केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के महानिदेशक कुलदीप सिंह ने कहा है कि “ऑपरेशन में किसी तरह की इंटेलीजेंस चूक नहीं हुई है. बीजापुर मुठभेड़ में 25-30 नक्सली मारे गए हैं.”

    नक्सल ऑपरेशन पर निकले थे जवान

    अधिकारियों ने बताया कि माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच क़रीब चार घंटे तक मुठभेड़ चली. इस घटना में माओवादियों को भी काफ़ी क्षति पहुँची है. जिन सात जवानों को रायपुर शिफ़्ट किया गया था, वो अब ख़तरे से बाहर हैं. एक जवान अभी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.

    मारे गए जवानों की सूची
    इमेज कैप्शन,मारे गए जवानों की सूची
    मारे गए जवानों की सूची

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को सुकमा और बीजापुर के अलग-अलग इलाक़ों से सीआरपीएफ़, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड, स्पेशल टॉस्क फ़ोर्स और कोबरा बटालियन के 2059 जवान नक्सल ऑपरेशन के लिए निकले थे.

    इनमें नरसापुर कैंप से 420 जवान, मिनपा कैंप से 483 जवान, उसुर कैंप से 200 जवान, पामेड़ कैंप से 195 जवान और तर्रेम कैंप से 760 जवान शामिल थे.

    घायल जवान रायपुर के अस्पताल में

    शनिवार को ऑपरेशन के बाद वापसी के दौरान तर्रेम थाना के सिगलेर से लगे जोन्नागुंड़ा के जंगल में माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर हमला बोल दिया था. मुठभेड़ में घायल हुए 37 जवानों को बीजापुर और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती किया गया है.

    इस बीच, राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने शनिवार की रात रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किये गये जवानों से मुलाक़ात की थी.

  • छत्तीसगढ़ आएंगे अमित शाह, शहीद जवानों को देंगे श्रद्धांजलि….

    छत्तीसगढ़ आएंगे अमित शाह, शहीद जवानों को देंगे श्रद्धांजलि….

    दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में 22 जवानों की शहादत के बाद से देश में आक्रोश और गम दोनों है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कुछ ही देर में जगदलपुर रवाना होने वाले हैं. जगदलपुर में अमित शाह शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, इसके साथ ही घायल जवानों से अस्पताल में मुलाकात भी करेंगे. बता दें कि बीजापुर नक्सली हमले में 22 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जबकि एक लापता है और बत्तीस जवान घायल हैं।

    गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10:40 बजे वह जगदलपुर हवाई अड्डे पहुचेंगे. पुलिस लाइन जगदलपुर में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद गृहमंत्री बीजापुर पहुंचेंगे. अमित शाह सुरक्षाबलों के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे. नक्सल प्रभावित बासागुड़ा CRPF कैंप भी जाएंगे. रायपुर में घायल जवानों से मुलाक़ात कर हौसला बढ़ाएंगे. इसके बाद वह शाम 5:30 बजे दिल्ली लौटेंगे।

    नक्सली हमले की खबर के बाद अमित शाह कल चुनावी दौरा बीच में ही छोड़कर दिल्ली लौट आए थे. शाह ने हमले के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल से भी बात कर स्थिति का जायजा लिया था. इसके साथ ही उन्होंने CRPF के डीजी को तत्काल बीजापुर पहुंचने के निर्देश दिए थे. बस्तर के बीजापुर में हमारे जवानों का खून बहाने वाले नक्सलियों के विरुद्ध केंद्र और राज्य सरकारों ने नए सिरे से रणनीति बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

  • 5 दिन पहले ही मिल गई थी नक्सलियों की तैयारियों की जानकारी, कार्रवाई में देरी हुई और शहीद हो गए 22 जांबाज….

    5 दिन पहले ही मिल गई थी नक्सलियों की तैयारियों की जानकारी, कार्रवाई में देरी हुई और शहीद हो गए 22 जांबाज….

    सुकमा इनकाउंटर में 22 जवानों की मौत से पूरे देश में दुख के साथ गुस्से का माहौल है। तमाम तैयारी और संसाधनों के बावजूद नक्सली एक बार फिर इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे गए। सवाल यह भी है कि सुरक्षा एजेंसियों को 5 दिन पहले ही नक्सलियों की तैयारियों के बारे में इनपुट मिल गया था, लेकिन कार्रवाई में देरी हो गई।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 22 जवानों की मौत के बाद सरकार की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों की भारी तादाद में मौजूदगी के बावजूद नक्सली इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे गए, यह हैरान करने वाला है। आश्चर्य यह है कि 25 मार्च के आसपास से ही इस क्षेत्र में नक्सलियों का जमावड़ा हो रहा था और पांच दिन पहले ही सरकार को यह इनपुट मिल गया था कि नक्सली किसी बड़े वारदात की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन को-ऑर्डिनेशन की कमी के चलते उनसे मुकाबले में चूक हो गई।

    तर्रेम के जिस इलाके में यह मुठभेड़ हुई, वह नक्सली कमांडर हिडमा का गढ़ है। तर्रेम तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल है। सुरक्षाबलों ने यहां कैंप खोलकर नक्सलियों को खुली चुनौती दी थी। इतना ही नहीं, तर्रेम से आगे सिलेगर में भी कैंप खोलने की तैयारी है। अपने गढ़ में सुरक्षाबलों की मौजूदगी से बौखलाए नक्सली उन्हें सबक सिखाने की तैयारी पहले से कर रहे थे।

    23 मार्च की घटना से नहीं लिया सबक
    सुरक्षाबलों की तमाम तैयारियों के बावजूद नक्सली शहीद दिवस के मौके पर बड़ी कार्रवाई को जरूर अंजाम देते हैं। इस साल भी नारायणपुर में जवानों से भरी बस को आईईडी से उड़ाकर उन्होंने अपनी तैयारियों के संकेत दे दिए थे। इसके दो दिन बाद 25 मार्च को तर्रेम कैंप के आसपास बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमावड़े की खबर मिली थी। सुरक्षाबलों के दबाव से बौखलाए नक्सलियों ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। संयुक्त मिलिट्री कमांड का गठन कर इन दिनों टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट भी इसी का उदाहरण था, लेकिन सरकार इससे नहीं चेती।


    रायपुर और दिल्ली से होते हैं फैसले
    शनिवार को हुई मुठभेड़ से पांच दिन पहले सुरक्षाबलों को नक्सलियों की बड़ी तैयारी के बारे में इनपुट मिला था। इस पर तत्काल कार्रवाई किए जाने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि नक्सलियों के खिलाफ रणनीति के सारे फैसले दिल्ली और रायपुर में लिए जाते हैं। इससे नक्सलियों को मौका मिल गया और पांच दिन बाद जब जवान वहां पहुंचे तो वे उनके जाल में फंस गए।

  • रूकमणी देवी को प्रेस क्लब ने दी श्रद्वांजलि

    रूकमणी देवी को प्रेस क्लब ने दी श्रद्वांजलि

    खरसिया। प्रेस क्लब खरसिया के अध्यक्ष रामनारायण सोनी (संटी) की माता रूकमणी देवी केे आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया। शोक व्यक्त करने पहुंचे प्रेस क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने संटी सोनी के निवास पर पहुँचकर उनकी माता के छाया चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्वांजलि अर्पित कर उनके परिवार को ढांढस बंधाया। प्रतिनिधिमंडल में प्रेस क्लब संयोजक अरुण चैधरी, उपाध्यक्ष प्रहलाद बंसल, अशोक अग्रवाल, जयप्रकाश अग्रवाल, अमर मंत्री, मुकेश मित्तल, अमित साहू, आदि शामिल थे।

  • सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सहित गाड़ियों के जरूरी दस्तावेज की वैधता 30 जून तक बढ़ाई….

    सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सहित गाड़ियों के जरूरी दस्तावेज की वैधता 30 जून तक बढ़ाई….

    भारत सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते केस के बीच कई वाहन मालिकों और ड्राइविंग लाइसेंस होल्डर्स को राहत दी है. दरअसल, सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) सहित गाड़ियों के जरूरी दस्तावेज की वैधता 30 जून तक बढ़ा दी है. सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर यह कदम उठाया है. ऐसे में जानते हैं कि यह राहत किन-किन दस्तावेजों के लिए है और किन लोगों को इसका फायदा मिलने वाला है.

    किन किन दस्तावेजों के लिए मिलेगी राहत- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने इस बारे में राज्यों को एडवायजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और दूसरे दस्तावेजों की वैधता बढ़ाई जा रही है।

    किन लोगों को मिलेगा फायदा- जिन लोगों के दस्तावेज 1 फरवरी 2020 और इसके बाद एक्सपायर हो चुके हैं, उन्हें 30 जून 2021 तक वैध माना जाएगा. यानी ऊपर बताए गए डॉक्यूमेंट्स में से कोई भी दस्तावेज अगर 1 फरवरी 2020 या उसके बाद एक्सपायर हो गया है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है आप 30 जून तक इसे रिन्यू करवा सकते हैं.

    सरकार ने अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि इन डॉक्यूमेंट्स को वैध माना जाए, जिससे ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सेवाओं में कोई दिक्कत न आए. सड़क और परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस आदेश का पालन करने के लिए कहा है.

    दरअसल, पिछले साल मार्च में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लगा दिया गया था. उस दौरान सरकार ने 1 फरवरी को एक्सपायर हुए दस्तावेज के लिए रिन्यू की तारीख बढ़ा दी थी. इसके बाद कई बार एडवाइजरी जारी की गई और तारीख को लगातार आगे बढ़ा दिया गया.

    इससे पहले 31 मार्च तक सभी दस्तावेज वैलिड कर दिए गए थे, जिसे अब 30 जून कर दिया गया है. ऐसे में जिन लोगों के दस्तावेज एक्सपायर हो गए हैं, वो आराम से कागजों में बदलाव कर सकते हैं.

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा – किराएदार खुद को मकान मालिक ना समझें, समझिए क्या था मामला?

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा – किराएदार खुद को मकान मालिक ना समझें, समझिए क्या था मामला?

    दिल्ली। देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने एक फैसले के जरिए ऐसे किराएदारों को कड़ा सबक दिया है जो जबरन मकान पर कब्जा किए बैठे रहते हैं और मकान मालिक को परेशान करते हैं। मकान खाली करने में आनाकानी कर रहे एक ऐसे ही किराएदार (Tenant) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा- जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्‍थर नहीं मारते।

    इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से ये साफ संदेश दिया कि किराएदार चाहे कितने भी समय से रह रहा हो, मकान का असली मालिक उसका मकान मालिक ही रहेगा। किराएदार को ये नहीं भूलना चाहिए कि वो सिर्फ किराएदार है, मकान का मालिक नहीं।

    समझिए, क्या था मामला? दरअसल इस किराएदार ने एक दुकान किराए पर ली थी, पर उसने करीब तीन साल मकान मालिक को किराया नहीं दिया था। मकान मालिक ने दुकान खाली करने को कहातो वो राजी नहीं हुआ। ऐसे में दुकान मालिक ने कोर्ट का रुख किया। निचली अदालत ने किराएदार को ना केवल बकाया किराया चुकाने बल्कि दो महीने में दुकान खाली करनेके लिए कहा। साथ ही 35 हजार प्रति महीने किराये का भुगतान करने के लिए भी कहा था। लेकिन इसके बाद भी किरायेदार ने कोर्ट का आदेश नहीं माना।

    फिर मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने किराएदार को बकाया रकम 9 लाख जमा करने के लिए 4 महीने का समय दिया। लेकिन किराएदार ने उसका पालन भी नहीं किया। इसके बाद मामलासुप्रीम कोर्ट पहुंचा। SC ने नहीं दी कोई राहत सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि किराएदार को परिसर खाली करना ही पड़ेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने किराएदार दिनेश को जल्‍द से जल्‍द बकाया किराया देने के भी आदेश जारी किए। किराएदार के वकील ने बेंच से कहा कि उन्‍हें बकाया किराए की रकम जमा करने के लिए वक्‍त दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने इससे भी साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जिस तरह से आपने इस मामले में मकान मालिक को परेशान किया है, उसके बाद कोर्ट किसी भी तरह की राहत नहीं दे सकता। आपको परिसर भी खाली करना होगा और किराए का भुगतान भी तुरंत करना होगा।

  • उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के बाद अब इस राज्य में भी लव जिहाद के खिलाफ कानून पास, होगी 10 साल की सजा…

    उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के बाद अब इस राज्य में भी लव जिहाद के खिलाफ कानून पास, होगी 10 साल की सजा…

    गांधीनगर। गुजरात कथित लव जिहाद के खिलाफ कानून बना रहा है. बीजेपी ने विधानसभा में गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक पास कर दिया है. इसी तरह का कानून पहले से उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बनाया गया है. गुजरात में विवाह करके कपटपूर्ण तरीके से या जबरन धर्मांतरण कराने के मामले में दस साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. विधेयक के माध्यम से 2003 के एक कानून को संशोधित किया गया है, जिसमें बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने पर सजा मिलेगी।

    गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 में उस उभरते चलन को रोकने का प्रावधान है, जिसमें महिलाओं को धर्मांतरण कराने की मंशा से शादी करने के लिए बहलाया-फुसलाया जाता है. विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया।

    तीन से पांच साल तक की कैद की सजा

    शादी करके या किसी की शादी कराके या शादी में मदद करके जबरन धर्मांतरण कराने पर उसे कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल तक जेल की सजा सुनाई जा सकती है. साथ ही उस पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

    यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, दलित या आदिवासी है तो दोषी को कम से कम चार साल और ज्यादा से ज्यादा सात साल जेल होगी और कम से कम तीन लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

    संस्था या संगठन के प्रभारी 10 साल की सजा

    प्रस्तावित संशोधन के प्रावधानों में कहा गया है कि अगर कोई संस्था या संगठन ऐसी शादी के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उस संगठन के प्रभारी को कम से कम तीन साल की कैद और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक की सजा दी जाएगी. साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा।

    मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पहले ही यह कानून

    भाजपा शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पहले ही इस तरह के कानून बनाये गए हैं. यहां शादी करके जबरन धर्मांतरण कराने पर रोक लगाने कानून लागू किये गए हैं।