खरसिया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के खरसिया शाखा में गोल्ड लोन में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है जिसमे पीड़ित व्यक्ति ने सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक पर गंभीर आरोप लगाए हैं वहीं बैंक प्रबंधन इस संबंध में कोई जानकारी तक देने को तैयार नहीं है, जिससे लगता है कि आरोप सत्य है और बैंक के द्वारा गोल्ड लोन में घोटाला कर जहां अपने वरिष्ठ अधिकारियों को धोखे में रखा जा रहा है, साथ ही बैंक को वित्तीय हानि भी पहुचाई जा रही हैं वहीं भोले भाले ग्रामीणों के नाम पर लोन कर के उनका भी शोषण किया जा रहा है।
आज के डिजिटल युग मे जब सरकार के द्वारा ऑनलाइन भुगतान को प्रोत्साहित किया जा रहा है ऐसे में बैंक चाहे सरकारी हो या प्रायवेट, लोगों को उसमे खाता रखना तथा लेनदेन करना मजबूरी बन चुकी है। कुछ वर्षों पहले तक जरूरी नहीं था कि किसी व्यक्ति का बैंक में खाता होना जरूरी हो लेकिन आज के समय मे शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके किसी भी बैंक या में खाता न हो, क्योकिं डिजिटल भुगतान के साथ साथ शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी लाभार्थी को बैंक के माध्यम से ही प्राप्त होता है। इसी के साथ अगर किसी व्यक्ति को बैंक से कर्ज चाहिए तो भी बैंक में खाता होना आवश्यक होता है, लेकिन ऐसे समय मे जब बैंकिंग व्यवस्था आम आदमी के लिए अति आवश्यक हो चुकी है कुछ बैंक के कर्मचारियों अधिकरियो की वजह से आम जनता का भरोसा बैंकिंग व्यवस्था से खत्म होता जा रहा है और लोग अपनी जमा पूंजी बैंक में रखने से कतराने लगे है। खरसिया के ही सेंट्रल बैंक में खाता धारकों के खातों से लाखों की रकम की फर्जी निकासी किये जाने का मामला अभी खत्म भी नहीं हो पाया था कि खरसिया के ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शाखा प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों के द्वारा गोल्ड लोन में गड़बड़ी किये जाने का मामला प्रकाश में आया है जहां किसी बैंक के ही अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा अपने खुद के सोने को किसी अन्य व्यक्ति के नाम से अपने ही बैंक में गिरवी रखकर रकम निकाल ली गयी तथा उक्त रकम को तत्काल किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में डाल दिया गया, मामला प्रकाश में तब आया जब खाता धारक को तय की गई रकम नहीं दी गयी तो खाता धारक के द्वारा बैंक प्रबंधन के इस गड़बड़झाले के संबंध में पीड़ित ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने साथ हुई धोखाघड़ी का खुलासा करते हुए दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
प्राप्त सूचना के अनुसार सिद्धार्थ पांडे नामक युवक को आईडीएफसी बैंक से किसी ओम पटेल नामक कर्मचारी ने बैंक बुलाया और कहा कि बैंक के शाखा प्रबंधक रजत लाल का सोना है और वे इससे लोन लेना चाहते हैं चूंकि वे खुद शाखा प्रबंधक है इसलिए उनके नाम से इस बैंक में लोन नहीं हो सकता इसलिए तुम अपने नाम से लोन लेकर उन्हें दे दो इसके एवज में 5 प्रतिशत कमीशन दिए जाने की बात भी ओम पटेल के द्वारा कही गई, जिस पर सिद्धार्थ पांडे ने अपने नाम से गोल्ड लोन करवा लिया और उनके खाते में 528000 आ भी गए परन्तु थोडी ही देर बाद उनके खाते से उक्त रकम को ट्रांसफर भी कर दिया गया। मोबाइल में मैसेज आने पर इस संबंध में जब खाता धारक ने ओम पटेल से जानकारी लेनी चाही तो उन्हें बताया गया कि हमने अपना पैसा वापिस ले लिया है और आपका लोन खाता बन्द कर दिया जाएगा, जब खाता धारक ने अपने खाते की जानकारी निकलवाई तो पता चला कि लोन की रकम बैंक को वापिस होने की जगह किसी मनोज कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दी गयी है, इस संबंध में जब सिद्धार्थ पांडे ने पूछताछ की तो ओम पटेल ने ब्रांच मैनेजर रजत लाल से बात करने को कहा लेकिन रजत लाल ने उनसे कोई बात नहीं की। पीड़ित ने इस संबंध में खरसिया पुलिस चौकी में भी शिकायत की लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर उनके द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से अपने साथ धोखाघड़ी करने वाले ओम पटेल तथा रजत लाल के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने की मांग बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से की है।
क्या है गड़बड़झाला
इस पूरे मामले में जांच का मुख्य विषय यह है कि जिस सोने को बैंक में रखकर लोन लिया गया वो सोना किसका था और वो सोना भी था या नही, क्योकि जिस सोने को रजत लाल ने अपना बताकर सिद्धार्थ पांडे के नाम से लोन कराया था अगर वो सोना ही था तो उसने अपने नाम से लोन क्यों नहीं लिया क्यों अपने खुद के सोने को अनजान व्यक्ति को देकर उसके नाम से अपने ही बैंक में लोन कराया गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि सोने के नाम पर पीतल अथवा कोई अन्य धातु रखकर लोन करा लिया गया हो, तभी पीड़ित को 5 प्रतिशत कमीशन का लालच दिया गया था। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खरसिया शाखा के विगत पांच सालों के रिकार्ड चेक कराया जाना चाहिए तथा पिछले पांच सालों के दौरान हुए सभी गोल्ड लोन के एवज में गिरवी रखे गए सोने की भी जांच कराई जानी जाती आवश्यक है साथ ही इस बात की भी जांच हो कि विगत पांच सालों में कितने गोल्ड लोन बैंक ने दिए है और कितने आज तक चालू हैं, क्योकि इस मामले के सामने आने से ये तो तय है कि बैंक के ही अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा सांठगांठ कर बैंक को लोन के नाम पर चूना लगाया जा रहा है, हो सकता है कि ऐसे कितने ही फर्जी लोन अभी तक चालू हों। इस पूरे मामले की गहराई से जांच और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही जरूरी है जिससे आम जनता का बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा कायम रहा सके।
बैंक के संबंध में अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, कोई शिकायत आएगी तो जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।
अमित तिवारी
चौकी प्रभारी , पुलिस चौकी खरसिया
मैं इस संबंध में कोई भी जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं।
रजत लाल
शाखा प्रबंधक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खरसिया
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आईडीएफसी बैंक कर रहा गोल्ड लोन घोटाला..
शाखा प्रबंधक की भूमिका संदेह में..
आम जनता का बैंकिंग व्यवस्था में भरोसा हो रहा कम.. -

शिव मंदिर भगत तालाब में भव्यता से मनाई गई शिवरात्रि…
खरसिया। सावन महिने के पावन अवसर पर खरसिया में स्थित नगर के प्रसिद्ध शिव मंदिर भगत तालाब में शिवरात्रि का पर्व शिव परिवार द्वारा बडे ही धूमधाम एवं भव्यवतापूर्वक मनाया गया। इस दौरान शिव परिवार द्वारा शिवरात्रि के पावन पर्व पर देवो के देव भगवान महादेव का विशेष रूप से श्रृंगार किया गया। शाम को भजन संध्या के पश्चात् भगवान भोलेनाथ की महाआरती की गयी तथा भक्तों का प्रसाद का वितरण किया गया।
विदित हो कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी खरसिया के विभिन्न शिव मंदिरों में सावन शिवरात्रि के अवसर पर 23 जुलाई को बडी संख्या में भगवान भोले शंकर के भक्तों द्वारा विशेष पूजा अर्चना की गई। इसी कडी में खरसिया के प्रसिद्ध भगत तालाब जो कि अपनी रंगीन मछ़लियों की वजह से पूरे छत्तीसगढ में मछली तालाब के नाम से प्रसिद्ध है वहां स्थित शिव मंदिर में शिव परिवार द्वारा सावन मास के शिवरात्रि के अवसर पर पूरे मंदिर को विशेष तौर पर फुलों एवं रंगीन झालरों से सजाया गया था। शिवरात्रि के पावन आवसर पर शिव मंदिर भगत तालाब में भगवान शिव के भक्तों का दिन भर तांता लगा रहा। वहीं शिव परिवार द्वारा शिव मंदिर में शिवरात्री का पर्व बडे ही धूमधाम से मनाते हुए भोले भंडारी का विशेष श्रृगांर किया गया।
शिव मंदिर भगत तालाब में 23 जुलाई को रात्रि 7 बजे से बाबा के भक्तों द्वारा भोले शंकर एवं मॉं पार्वती के भजनों से बाबा को भाव विभोर किया गया। इस दौरान बाबा भोलेनाथ के भक्त बाबा के भजनों पर मस्ती के साथ थिरकते दिखे वहीं रात्रि में शिव परिवार द्वारा देवों के देव महादेव की आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान मंदिर के पुजारी सुरेंद्र के साथ शिवमण्ड़ल के विजय अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, सतीष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, दिनदयाल अग्रवाल, दिलीप शर्मा, मुन्ना अग्रवाल, नारायण चक्रधारी, मुकेश अमलड़िहा, विकास कबुलपुरिया, शेरू शर्मा, राधे अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल, सौरभ शर्मा सहित महिला मण्ड़ल की शकुन्तला देवी अग्रवाल, शशिकला अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, कंचन अग्रवाल, सहित नगर के अन्य शिवभक्त उपस्थित थे।
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बाबा के दिवाने बोल बम जाने को तैयार, फैमली कांवड़िया संघ 28 जुलाई को होगा रवाना…
खरसिया। फैमिली कांवड़िया संघ खरसिया प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 90 से अधिक कांवड़िया बंधुओ के साथ 28 जुलाई को अशोक अग्रवाल (पत्रकार), सुनील बंसल एवं सुभाष पप्पू (ठेकेदार) के नेतृत्व में साउथ बिहार एक्सप्रेस से रवाना होंगे। फैमिली कांवड़िया संघ खरसिया का यह लगातार 37वां वर्ष है। जिसमें खरसिया के अलावा भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, अंबिकापुर, लैलुंगा, पत्थलगांव, कांसाबेल, रायगढ़, झारसगुड़ा एवं बरगढ़ से बोल बम कांवड़िया भक्त शामिल होंगे।
फैमिली कांवड़िया संघ के प्रमुख अशोक अग्रवाल (पत्रकार) ने बताया कि इस वर्ष हमारे कांवड़िया संघ के साथ छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भजन गायक राजेश अग्रवाल (बोडू) एवं मोनिका अग्रवाल (मोनू) मिजिशयन टीम एवं साउण्ड सिस्टम के साथ बाबा के भजनो से सभी कांवड़िया बंधुओ को नचाने उपस्थित रहेंगे। हमारे सभी बम साथी सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर लगभग 100 कि.मी. की पैदल यात्रा बोल बम-बोल बम के नारे के साथ पूरी करते है और बाबा बैद्यनाथ का गंगा जल से अभिषेक करते है। इसके पश्चात सभी बाबा बासुकीनाथ धाम जाकर जलार्पण करते है।
खरसिया क्षेत्र से अनेकानेक बाबा के भक्त विभिन्न दलो के माध्यम से जाकर प्रत्येक वर्ष जल चढ़ाते है और बाबा बैद्यनाथ अपने सभी भक्तो की मनोकामना पूर्ण करते है। पवित्र श्रावण मास में चारो ओर बोल बम के नारो की धूम मची हुई है। हर कोई भक्त कही न कही सोमवार के दिन बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ा कर प्रसन्न करता है एवं अपने मनोरथ पूर्ण करवाता है। इस वर्ष भी बाबाधाम के साथ-साथ अमरनाथ, घोघड़ बाबा, तुर्रीधाम एवं सिद्धेश्वर महादेव बरगढ़ में जल चढ़ाने वालो की लम्बी कतारे देखने को मिल रही है। -

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा…
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया है। धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया है। रिजाइन के बाद उन्होंने कहा ‘सहयोग के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिमंडल का धन्यवाद। सांसदों के स्नेह और सम्मान के लिए भी धन्यवाद।’
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राजधानी में महिला ने संत पर लगाए गंभीर आरोप…एसएसपी से की शिकायत, कहा- न्याय नहीं मिला तो उसके घर के सामने करूंगी…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बाबा के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं. बोरियाखुर्द, नवरंग चौक निवासी प्रमिला बाबुरिक (लोधी क्षत्री) ने कुशालपुर निवासी अमनदत्त ठाकुर उर्फ स्वामी अभिरामदास पर ये गंभीर आरोप लगाए है. महिला ने चेतावनी दी है कि यदि उसके आरोपों पर जांच के बाद उसे न्याय नहीं मिला तो वे परिवार के साथ उक्त बाबा के घर के सामने आत्मदाह करने के लिए बाध्य होगी. ये शिकायत रायपुर एसएसपी से की गई है.
महिला ने संत अमनदत्त ठाकुर उर्फ अभिरामदास पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने उनके छोटे पुत्र प्रशांत कुमार बाबुरिक को धर्म के नाम पर बरगला कर उसे सन्यास के लिए उकसाया. परिवार का कहना है कि उक्त बाबा भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर वृंदावन के आश्रम में ले जाता है, जहां उन्हें नौकरों की तरह काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.
प्रमिला ने आरोप लगाए है कि उनका परिवार निम्न वर्ग से है और उन्होंने अपनी हैसियत से अधिक खर्च कर प्रशांत की शिक्षा पूरी कराई थी, ताकि वह परिवार का सहारा बने. लेकिन संत अमनदत्त ठाकुर ने उनके बेटे को भागवत कथा जैसे आयोजनों में शामिल होने के बाद सन्यास के लिए प्रेरित किया. बाबा ने प्रशांत को नया नाम ‘शेष नारायण वैष्णव’ देने और परिवार का त्याग कर उनके साथ वृंदावन जाने के लिए कहा. परिवार के विरोध करने पर बाबा ने धमकी दी कि अगर प्रशांत को सन्यास लेने से रोका गया, तो वह पागल हो जाएगा या किसी दुर्घटना का शिकार हो सकता है.
प्रार्थी प्रमिला ने एसपी से की शिकायत में यहां तक आरोप लगाए है कि ‘यह ढोंगी बाबा तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को डराता-धमकाता है और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर सन्यास के लिए दबाव बनाता है’. इन आरोपों पर लल्लूराम डॉट कॉम ने उक्त संत से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. -

मवेशियों को लावारिस छोड़ने वाले पर प्रदेश में पहली बार एफआईआर दर्ज…
पालतू मवेशियों को लावारिस छोड़ने की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है और सड़क पर जाम लग रहा है। यह राहगीरों एवं वाहन चालकों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। लगातार समझाइश के बाद भी मवेशी मालिक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। शहर के मोपका चौराहे में मंगलवार की शाम करीब 20 मवेशियों के वजह से जाम की स्थिति निर्मित हो गई। इस मामले में प्रदेश में पहली बार सरकंडा पुलिस ने पशु मालिक मनीष सिंह के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इन मवेशियों में आठ पशु उसके पालतू थे और उन्हें वह लावारिस हालत में चरने छोड़ दिया था।
सरकंडा पुलिस ने बताया कि नगर निगम के प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी किशोर सिंह ने पुलिस को जानकारी दी कि उन्हें 15 जुलाई को सूचना मिली रवि रेंसीडेंसी के पास मोपका का रहने वाला मनीष सिंह अपने पशुओं को लावारिस हालत में चरने छोड़ दिया है। इसके कारण दुर्घटना की आंशका बनी हुई है।
पशु क्रूरता पर जुर्माने और सजा का प्रावधानः
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सचिव एडवोकेट वरुनेंद्र मिश्रा कहते हैं कि… पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 में विभिन्न प्रकार की पशु क्रूरता को परिभाषित किया गया है, जैसे किःपशु को मारना, पीटना, अत्यधिक सवारी करना, बहुत अधिक बोझ डालना यातना देना । पशु को ऐसी परिस्थितियों में त्याग देना जिससे उसे अनावश्यक पीड़ा हो। उन्होंने कहा कि, धारा 11 के तहत, ऐसे अपराधों के लिए सजा 50 से 100 तक का जुर्माना या तीन महीने तक की कैद या दोनों हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति इन अपराधों को बार-बार करता है, तो उसे अधिक कड़ी सजा मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 428 और 429 में भी जानवरों के प्रति क्रूरता के लिए दंड का प्रावधान है, जिसमें हत्या, जहर देना, अपंग बनाना या बेकार बनाना शामिल है। कितनी सजा मिलेगी, यह सब अदालत के विवेक और घटना की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।इन धाराओं में दर्ज किया गया केसः सरकंडा पुलिस मोपका निवासी मनीष सिंह के खिलाफ अपराध क्रमांक 978/2025 धारा 291,325,285 पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 3,11,1 आई के तहत अपराध दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
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बेटे चैतन्य से मिलने पहुंचे भूपेश बघेल, बेटी-बहू भी साथ: ED ऑफिस के एक कमरे में हैं बंद, शराब घोटाले में हुई है गिरफ्तारी..
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी के बाद रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन जारी है। इस बीच भूपेश बघेल बेटे चैतन्य से मिलने ED ऑफिस पहुंचे हैं। बघेल के साथ उनकी बेटी और बहू भी मौजूद है। 18 जुलाई को शराब घोटाला केस में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हुई थी।
22 जुलाई तक ED ने उन्हें अपनी रिमांड पर लिया है। जानकारी के मुताबिक रायपुर के ED ऑफिस के एक कमरे में चैतन्य को बंद कर रखा गया है। जहां अधिकारी केस से जुड़ी पूछताछ कर रहे हैं। बेटे से मुलाकात के बाद रविवार रात भूपेश बघेल नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। -

छत्तीसगढ़ में भूमि-अधिग्रहण प्राधिकरण गठन करने का आदेश: सुप्रीम-कोर्ट ने 2 महीने का दिया समय, कहा-ये टालने लायक नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका…
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण का गठन करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 2 महीने का समय दिया है। ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी थी।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी बाबूलाल ने एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव के जरिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका लगाई थी। इसमें बताया कि राज्य में सालों से भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका है। इसके चलते मुआवजा और ब्याज से जुड़ी सैकड़ों अर्जियां अधर में लटकी हुई हैं। इससे प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार ने कहा- प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2025 के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड देखते हुए पाया कि यह प्राधिकरण पिछले कई सालों से पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण का गठन और टालने लायक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह काम अगले दो महीनों के अंदर पूरा किया जाए, नहीं तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को यह आदेश दिया है।
2018 में एक्ट आया, तब से पेंडिंग है आवेदन
एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू किया गया था, जिसके तहत अधिनियम के अनुच्छेद-5(a) के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद कोई भी व्यक्ति प्रस्तावित भूमि पर मुआवजे और अन्य किसी विवाद के संबंध में आवेदन कर सकता है।
भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा मुआवजे और अन्य विवादों से संबंधित सभी मामलों का निपटारा एक साल के अंदर करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में 2018 से प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। जिसके चलते भूमि अधिग्रहण के मुआवजा और ब्याज को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग प्रभावित हैं। उनका निराकरण नहीं हो पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता या अन्य प्रभावित व्यक्ति मुआवजा या ब्याज का दावा करने से वंचित नहीं किए जाएंगे। यानी उनके हक अब भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी। जिसमें यह देखा जाएगा कि राज्य सरकार ने दिए गए निर्देशों का पालन किया या नहीं।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जनहित याचिका
याचिकाकर्ता ने पूर्व में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें बताया कि राज्य बनने के बाद यहां प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। जिसके कारण भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, हाईकोर्ट ने इसे जनहित का मामला मानने से इनकार करते हुए खारिज कर दी थी। -

विशेष न्यायाधीश ने कार्यपालक अभियंता व प्रभारी एसडीओ काे सुनाई 3 वर्ष की सजा…
दंतेवाड़ा। जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता ने लोक निर्माण विभाग सुकमा में पदस्थ कार्यपालक अभियंता चोवाराम पिस्दा और कोन्टा के उप अभियंता एवं प्रभारी एसडीओ ज्ञानेश कुमार तारम काे सड़क निर्माण में भारी अनियमितता काे लेकर भारतीय दंड साहिता की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 13(2), भा.द.सं. की धारा 120, 420, 467, 468, 471 के तहत दोनों आरोपियों चोवाराम पिस्दा और ज्ञानेश कुमार तारम को 3 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2010-11 में एलईडब्लयू योजना के तहत चिंतलनार से मरईगुड़ा तक सडक निर्माण का कार्य किया जा रहा था। निर्माण का ठेका नीरज सीमेंट स्ट्रक्चर लिमिटेड मुंबई को दिया गया था। निर्माण कार्य की माप पुस्तिका फर्जी तरीके से करोड़ों रुपए ज्यादा दर्शाए गए थे। कार्य से कहीं अधिक मूल्य का बिल बनवाया गया और करीब 2 करोड़ 84 लाख की राशि का अतिरिक्त आहरण कर ठेकेदार को भुगतान करवा दिया गया था । माप पुस्तिका में कूट रचना और आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र के प्रमाण मिलने पर इस मामले में 5 सितंबर 2012 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके पश्चात 29 जुलाई 2019 को न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (चार्जशीट) प्रस्तुत किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 19 गवाहों के बयान न्यायालय में हुए। बयान और सक्ष्यों ने अभियुक्तों की संलिप्तता और षड्यंत्र को स्पष्ट कर दिया। दंतेवाड़ा के विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी पाकर 3 वर्ष की सजा सुनाई है। -

डिजिटल अरेस्ट’…रिटायर्ड कर्मचारी से 32 लाख की ठगी..कहा..‘आपका नाम केस में है’ और लूट लिया जीवन भर की कमाई…
जांजगीर-चांपा। जिले में एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है, सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त एक बुजुर्ग कर्मचारी से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ₹32.54 लाख की ठगी की गई। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत दर्ज हुआ है और पुलिस ने इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुई ठगी?
पीड़ित तसर तसारकर देवांगन, जो वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुए थे, को 3 मई को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को एक अधिकारी बताकर बताया कि उनका नाम मुंबई के एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस नरेश गोयल प्रकरण में जुड़ा हुआ है और उन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का आदेश जारी है। चूंकि वे वरिष्ठ नागरिक हैं, इसलिए गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगाई गई है।इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित को एक फर्जी “डिजिटल अरेस्ट नोटिस” भेजा गया और कहा गया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया, तो उनके सभी बैंक खातों की जांच होगी और उन्हें स्थानीय पुलिस गिरफ्तार कर लेगी। इस भय और भ्रम में आकर पीड़ित ने ठगों के बताए अनुसार छह अलग-अलग किस्तों में ₹32,54,996 की राशि ट्रांसफर कर दी।
ठगों की चालबाज़ी
साइबर ठगी को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। चार बार पैसे RTGS के माध्यम से और दो बार PhonePe एप्लिकेशन के ज़रिए ट्रांसफर कराए गए। शातिर ठगों ने पीड़ित के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और झूठे सरकारी दबाव में डालते हुए सारा पैसा हड़प लिया।पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिन नंबरों से कॉल और मैसेज किए गए, उनकी ट्रैकिंग की जा रही है। साथ ही, जिन खातों में पैसे भेजे गए, उनकी भी जानकारी संबंधित बैंकों से मांगी गई है। रविवार होने की वजह से कुछ तकनीकी जानकारी मिलने में समय लग रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती या कोई गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
जागरूकता के बावजूद शिकार बन रहे
पुलिस द्वारा लगातार डिजिटल ठगी से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिर भी वरिष्ठ नागरिक, विशेषकर सेवानिवृत्त कर्मचारी, ऐसे अपराधों का आसान शिकार बन रहे हैं। जीवन भर की मेहनत से संचित राशि चंद मिनटों में ठगों के हाथ चली जाती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी संबंधी सूचना यदि फोन पर प्राप्त हो, तो पहले उसकी स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग से पुष्टि करें, और सीधे पैसे ट्रांसफर करने से बचें।