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  • एसपी संतोष कुमार सिंह ने थाना प्रभारियों के प्रभार में किया फेरबदल, जानिए कौन कहा….

    एसपी संतोष कुमार सिंह ने थाना प्रभारियों के प्रभार में किया फेरबदल, जानिए कौन कहा….

    रायगढ़। एसपी संतोष कुमार सिंह ने थाना प्रभारियों के प्रभार में फेरबदल किया है। ऐसे में जहां सारंगढ़ थाना प्रभारी आशीष वासनिक को शहर के चक्रधर नगर थाने का प्रभार सौंपा गया है, तो वही चक्रधर नगर में थाना प्रभारी रहे विवेक पाटले को सारंगढ़ थाने की कमान सौंपी गई है ।

    इसी प्रकार भूपदेवपुर थाने में बड़ी बड़ी कार्रवाई करके चर्चा में आए एस आई केके पटेल को भी सारंगढ़ थाना भेजा गया है। खरसिया चौकी प्रभारी एसआई नंद कुमार गौतम को पुलिस अधीक्षक कार्यालय बुलाया गया है। इसी प्रकार सरिया थाना प्रभारी अंजना केरकेट्टा को पुलिस अधीक्षक कार्यालय बुलवाया गया है।

    अब सरिया थाने में प्रशिक्षु डीएसपी अंजू कुमारी अपने प्रशिक्षण अवधि तक थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ रहेंगी। वही खरसिया चौकी के प्रभारी प्रशिक्षु डीएसपी सतीस भार्गव अपने प्रशिक्षण अवधि तक रहेंगे।

  • सुप्रीम कोर्ट ने दी पुरी में जगन्नाथ यात्रा की अनुमति, नियमों का करना होगा पालन

    सुप्रीम कोर्ट ने दी पुरी में जगन्नाथ यात्रा की अनुमति, नियमों का करना होगा पालन


    सुप्रीम कोर्ट से जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा को मिली मंजूरी

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस से बचाव को लेकर संबंधित दिशा-निर्देशों के साथ रथ यात्रा महोत्सव को मंजूरी दे दी है. इसकी जिम्मेदारी मंदिर न्यास और राज्य की होगी कि वह सभी दिशानिर्देशों का पालन कराते हुए यात्रा का आयोजन करें।
    मुख्य न्यायाधीश एस.ए.बोबडे की अध्यक्षता में तीन सदस्यों पीठ ने यह फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ पुरी में विशेष दिशा-निर्देशों के साथ रथ यात्रा महोत्सव की अनुमति होगी. नागपुर में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए मुख्य न्यायाधीश सुनवाई की. आपको बता दें कि इससे पहले एकल खंडपीठ में रथयात्रा की सुनवाई चल रही थी।
    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च को वार्षिक पुरी रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी. कोरोना महामारी की वजह से पुरी रथ यात्रा पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गईं. आपको बता दें कि यह रथ यात्रा 23 जून को होनी थी, लेकिन कोरोना संकट के चलते सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
    विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री मिलिंद परांडे ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट से यात्रा को हरी झंडी मिलने के बाद विश्व हिन्दू परिषद ने भी निर्णय का स्वागत किया है।
    विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि चार दिन से बाबा जगन्नाथ के करोड़ों भक्तों की सांसे रुकी हुई थीं और अब सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने उन्हें ऑक्सीजन देने का काम किया है, जाहिर तौर पर सभी भक्त नियमों का पालन करते हुए ही यात्रा में भाग लेंगे.
    विहिप प्रवक्ता ने आगे कहा कि यात्रा में भक्तों की भीड़ कम रखने के लिये राज्य सरकार यात्रा के सीधा प्रसारण की व्यवस्था कर सकती है, जिससे सभी श्रद्धालु घर बैठे ही भव्य यात्रा को देख सकें. विहिप ने कहा है कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विहिप कार्यकर्ता मंदिर न्यास और प्रसाशन को किसी भी तरह के सहयोग के लिये तत्पर हैं. यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन हो और व्यवस्था बनी रहे इसके लिये जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी विहिप कार्यकर्ता उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे।
    गौरतलब है कि विश्व हिन्दू परिषद के अलावा एक 19 वर्षीय मुस्लिम छात्र ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. याचिकाकर्ता छात्र का नाम आफताब हुसैन है. छात्र ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है।
    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की तरफ से कहा था कि सदियों की परंपरा को रोका नहीं जा सकता. यह करोड़ों की आस्था का सवाल है. यदि भगवान जगन्नाथ कल नहीं आएंगे, तो वह 12 साल तक परंपराओं के अनुसार नहीं आ सकते हैं. श्रीजगदगुरू आदिशंकराचार्य द्वारा तय किए गए अनुष्ठानों में वह सभी सेवायत भाग ले सकते हैं, जिनका कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव है. साथ ही लोग टीवी पर लाइव टेलीकास्ट भी देख सकते हैं.
    यह रथ यात्रा महोत्सव 10 से 12 दिन चलता है, जो 23 जून को शुरू होने वाला था और रथ यात्रा की वापसी ‘बहुदा जात्रा’ की तारीख एक जुलाई निर्धारित है।

  • कालगर्ल का सहारा लेकर अश्लील VIDEO बनाकर युवको से मोटी रकम वसूल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

    कालगर्ल का सहारा लेकर अश्लील VIDEO बनाकर युवको से मोटी रकम वसूल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश


    बिलासपुर। आज शहर में सेक्स की आड़ में हनीट्रैपिंग का एक ऐसा रैकेट पुलिस की पकड़ में आया…जिसके कारनामें सुनकर आप दंग रह जायेंगे। कमाल की बात तो ये हैं कि इस रैकेट में कॉलगर्ल से लेकर पुलिस तक शामिल थी। कॉलगर्ल की तरफ से पहले सेक्स का आफर और फिर MMS बनाकर कंगाल बना देने का ये कारोबार में न्यायधानी बिलासपुर में लंबे समय से फल फूल रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो कॉलगर्ल, एक कांस्टेबल, एक PCR वैन का ड्राइवर, फर्जी DSP, MMS गिरोह का मास्टरमाइंड समेत आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।
    17 जून को एक व्यक्ति ने बिलासपुर एसपी को इस बात की शिकायत की थी कि एक व्यक्ति MMS वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल कर रहा है। उसने 2 लाख रुपये की डिमांड की थी, जिसमें से 36 हजार रुपये वो अभी तक उसे दे चुका है, बाबजूद उसे लगातर ब्लैकमेल किया जा रहा है। इस सूचना पर एसपी प्रशांत अग्रवाल ने तुरंत एक्शन किया और पुलिस टीम की सक्रियता से सभी को पुलिस ने MMS  के मास्टरमाइंड और 2 कॉलगर्ल सहित आधा दर्जन लोगों को धर दबोचा।
    हुआ कुछ यूं था कि आज से करीब छह महीने पहले मास्टर माइंड मुकुल शर्मा ने पीड़ित व्यक्ति को फोन कर उसके लिए लड़की उपलब्ध कराने की  बात कही और एक लड़की का नंबर भी दिया। व्यक्ति ने भी जब उस मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो सामने से एक लड़की ने बाहर आने और कुछ दिन बाद कॉल करने की बात कही। कुछ दिन के बाद लड़की ने खुद से ही पीड़त युवक को फोन किया…. हैलो…!! आपको ### चाहिये क्या… जैसे ही सामने वाले व्यक्ति ने हामी भरी तो लड़की ने अपना पता देते हुए उसे अपने ठिकाने पर बुला लिया।
    जैसे व्यक्ति बताये हुए जगह पर पहुंचा और कमरे में दाखिल हुआ, लड़की ने दरवाजा बंद कर लिया और अपने कपड़े उतार दिये और उस व्यक्ति के भी उतार दिये। इसी दौरान दरवाजे पर पुलिस की वर्दी और एक व्यक्ति और एक सिविल ड्रेस में युवक पहुंचा और दोनों के वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो फोटो बनाते ही दोनों ने सामने खड़े व्यक्ति से पैसे की डिमांड शुरू कर दी।
    दोनों युवकों ने उस व्यक्ति को धमकी दी कि अगर उसे पैसा नहीं दिया गया तो ना सिर्फ वो MMS को वायरल कर देगा, बल्कि लड़की से उसे बलात्कार के केस में फंसा भी देगा। उस वक्त बुलाये व्यक्ति के पास 6000 रुपये थे, जो उसने दोनों को दे दिये, लेकिन पैसे की उन दोनों और डिमांड शुरू कर दी, पैसे ना होने पर दोनों ने उसके मोबाइल को रख लिया। बाद में 8000 रुपये देने के बाद उसका मोबाइल उसे वापस दिया गया।
    घटना के 3-4 दिन बाद अचानक से पीड़ित व्यक्ति के मोबाइल पर एक फोन कर डीएसपी के नाम से आया, जिसमें MMS की शिकायत आने की बात कही गयी, कार्रवाई से बचने के लिए 2 लाख रुपये की डिमांड की गयी, । साथ ही ये भी चेतावनी दी कि अगर किसी को कुछ कहा तो पुलिस घर में भेजकर उसे उठवा लेगा। सबूत बताने के लिए कथित डीएसपी ने फोटो और वीडियो को सेंड भी किया, जिसके बाद डर से पीड़ित व्यक्ति ने किसी तरह से 22 हजार रुपये का इंतजाम करके कथित डीएसपी को भेजवाया। 9 जून को फिर से तकादा उस फर्जी डीएसपी ने शुरू कर दिया और बाकी बचे रुपये की डिमांड करने लगा। जिसके बाद परेशान युवक ने एसपी से इस मामले में पूरी शिकायत की।
    शिकायत के आधार पर एसपी ने निर्देश पर एडिश्नल एसपी ओपी शर्मा और सीएसपी निमिषा पांडेय के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया। पुलिस ने पीड़ित व्यक्ति को फोन कर फर्जी डीएसपी को पैसे लेने के लिए बुलाने को कहा और फिर जैसे ही एक व्यक्ति पैसे लेने के लिए पहुंचा पुलिस की टीम ने उसे दबोच लिया। उसने व्यक्ति ने मुकुल शर्मा के लिए काम करने की बात स्वीकारी। उसके बाद पुलिस ने उन लड़कियों को भी पकड़ा, जो इस गोरखधंधे में लीड रोल में थी, जिसके जिम्मे ग्राहक के साथ संबंध बनाने के नाम पर MMS तैयार करने का जिम्मा था।
    पुलिस ने पहले एक लड़की को पकड़ा बाद में उसी की निशानदेही पर एक और लड़की को गिरफ्तार किया, जो इसी रैकेट में शामिल थे। पुलिस को लड़कियों  रैकेट में एक पुलिसकर्मी के भी शामिल होने की बात कही, पुलिस ने लड़की की पहचान के बाद रामकुमार खांडेकर नाम के कांस्टेबल और एक पुलिस की PCR वैन के ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। हद तो ये थी कि इस रैकेट में आरोपी महिला का पति भी MMS के नाम पर पैसा वसूली किया करता था। पुलिस ने आरोपी मुकुल को मध्यप्रदेश के सागर से गिरफ्तार किया है, जहां से उसे बिलासपुर लाया जा रहा है। आरोपियों के पास से 6 मोबाइल, 15 हजार रुपये कैश भी बरामद किया है।इस मामले में पुलिस ने मुकेश शर्मा, सूरज सारथी, पुलिसकर्मी रामकुमार, कृष्णा शर्मा, आकाश निर्मलकर और दो महिला को गिरफ्तार किया है।

  • खरसिया मे जनमित्रम के तहत लगातार बाॅटे जा रहे हैं राशन किट!

    खरसिया मे जनमित्रम के तहत लगातार बाॅटे जा रहे हैं राशन किट!

    खरसिया जनमित्रम कल्याण समिति लक्षयगत परियोजना के तहत प्रयोजाना संचालक रायगढ़ के दिशा निर्देशन में प्रबंधक सावित्री चौहान एवं पेयर सरस्वती सहिस ,पेयर शांती सहिस व सहयोगी गणों के अथक प्रयास और कड़ी संघर्ष से खरसिया नगर के साथ ही खरसिया के अंतर्गत आने वाले ग्रामिण क्षेत्र के 10 से 15 जरूरत मंद परिवारों को प्रति दिन राशन समानो से बनी किट प्रदान किये जाने का लक्ष्य रखा गया है !

    देशवासियो आज कोरोना वायरस जैसी विश्वयापी महमारी ने देश के साथ पुरे विश्व मे अपना आतंक मचा रखा है और ऐसे मे दैनिक तिहाड़ी मजदूरी करने वालों के साथ मासिक मजदूर व निम्न व्यवसायीयों का अभी काम धंधा बहुत कम ही चल रहा है जिससे उनकी घर की माली हालत दैनिक जीवन चर्या ठीक नहीं चल रही इन परिस्यिथों को ध्यान में रखते हुए ।

    जनमित्रम क्लयाण समिति लक्षयगत प्रयोजाना के पहल पर खरसिया नगर के जरूरत मंद परिवारों को जो बेरोजगार है ,जो घल से बेघर है, जिनकी माली हालत ठीक नहीं है ऐसे परिवारों को तलाश कर प्रतिदिन राशन किट प्रदान की जा रही है जिसमें समाज सेवी केशव टेलर्स एवं शहीद भगतसिंह ब्रेगेड के शंकर सुमन की गौरव दुनिया न्यूज के अमित साहू की भूमिका सहरानीय है ।

    राशन किट प्राप्त करने वालों के नाम निम्न है – श्रीमति सेवती निषाद , श्रीमति सावित्री ,श्रीमति चद्रकला बरेठ, आमना बेगम , श्रीमति रामबाई सिदार , श्रीमति सरिता सहिस , शुबेदा बेगम , श्रीमति उमा यादव , श्रीमति सुनिता विश्वकर्मा ,श्रीमति गंगोत्री विश्वकर्मा , श्रीमति नर्मदा महंत, मीना सारथी, रूकसाना बनो, हसीना बेगम, सावित्री महंत, आंजु निषाद ,मिथला , धनबाई, सविता निषाद,लक्षमीन बाई, संतोषी निषाद, गीता महंत ,प्रर्मीला महंत ,पीयेम सरा,शबनुर बानो,सावित्री निषाद,मिथला ,श्रीमति सविता थापा, शिवकुमारी प्रजापति,पार्वती सारथी,गुलापी सारथी, प्रेमबाई सारथी, सकुनतोला यादव ,एवं श्रीमति पुष्पा गोस्वामी, राधा ,राजकुमारी गोस्वामी,नंदनी गोस्वामी के साथ खरसिया नगर मे 120 जरूरत मंद परिवारों को राशन किट प्रदान की गई जिसमे आटा 5 kg , राहड़ दाल 1 kg , चना दाल 1kg , तेल किंग सोयाबिन 1 kg , चिवड़ा 2 kg , हलदी 100 gm , मिर्च 100 gm, मशाला 100 gm , साबून संतूर , कपड़ा धोने का साबून फेना , जीरा 100 gm , कोलगेट , मास्क एवं अन्य जरूरी समाग्री दी गई ।



    महिलाओं को जनमित्रम के द्वारा अपिल की गई की कोरोना वायरस से बचाव हेतु आपसी डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भीड़ भाड़ वाले जगाह मे मास्क व सैनीटाजर का उपयोग जरूर करे और केंद्र व राज्य सरकार की दिशा निर्देश को पालन करते हुए अपने सारे काम करे , पहल की नगर के साथ जिले मे भी काफी चर्चा व तारिफ हो रही है ।

  • सुप्रीम कोर्ट ने रोकी पुरी की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा….

    सुप्रीम कोर्ट ने रोकी पुरी की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा….

    दिल्ली। उड़ीसा के पुरी में होने वाली इस साल की भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. कोर्ट ने रथ यात्रा से जुड़ी सभी गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया है.
    बीमारी फैलने का अंदेशा
    ओडिशा विकास परिषद नाम की संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि हर साल होने वाली भगवान जगन्नाथ यात्रा में लाखों लोगों की भीड़ जुटती है. पिछले साल 10 लाख से ज्यादा लोग पुरी की सड़कों पर जमा हुए थे. इस साल कोरोना की महामारी फैली है. लेकिन अभी तक ओडिशा सरकार ने रथयात्रा को रोकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. हाई कोर्ट ने भी फैसला राज्य सरकार के ऊपर छोड़ दिया है. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट को मामले में दखल देना चाहिए.
    आज ही देंगे आदेश’
    सुप्रीम कोर्ट में मामला चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और ए एस बोपन्ना की कोर्ट में सुनवाई के लिए लगा. बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं चीफ जस्टिस ने इसे एक गंभीर मसला बताया. केंद्र की तरफ से कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई कल तक के लिए टालने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि इस मसले पर सरकार भी विचार करके अपनी बात कोर्ट के सामने रखना चाहती है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “रथ यात्रा जैसे-जैसे नजदीक आती जाएगी, इसके बारे में फैसला कठिन हो जाएगा. कल हमारी अदालत नहीं बैठेगी. इसलिए, मसले पर आज ही कोई आदेश दिया जाएगा.“
    बिना भीड़ गतिविधियों की मांग भी नामंज़ूर
    याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इससे सहमति जताते हुए कहा, “यात्रा से जुड़ी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं. करीब 15 दिन तक यह चलती रहेंगी. इस मसले पर कोर्ट की तरफ से तुरंत आदेश दिया जाना जरूरी है.“ इस पर सॉलीसीटर जनरल समेत कुछ वकीलों ने निवेदन किया कि कोर्ट को बिना भीड़ इकट्ठा किए रथ यात्रा से जुड़ी गतिविधियों को चलाने की इजाजत देने पर विचार करना चाहिए.
    कोर्ट ने ओडिशा सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से जब इस पर टिप्पणी करने के लिए कहा तो उनका जवाब था, “अगर धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई तो भीड़ खुद-ब-खुद आ जाएगी. उसे रोक पाना मुश्किल होगा. कोर्ट को इस स्थिति पर विचार करते हुए ही आदेश देना चाहिए.“ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “हमारा भी अनुभव यही कहता है अगर किसी तरह की गतिविधि की अनुमति दी जाती है तो भीड़ वहां जमा हो ही जाती है.“
    भगवान जगन्नाथ हमें माफ करेंगे’
    इसके बाद चीफ जस्टिस ने रथ यात्रा और उससे जुड़ी गतिविधियों पर रोक का आदेश दे दिया. उन्होंने कहा, “लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए यह आदेश देना जरूरी है. ओडिशा सरकार इस साल राज्य में कहीं भी रथयात्रा जैसी गतिविधि की अनुमति न दे. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, “हम लोगों के जीवन की रक्षा के लिए इस तरह का आदेश दे रहे हैं. भगवान जगन्नाथ हमें इसके लिए माफ कर देंगे.”
    चीफ जस्टिस ने अंग्रेजी के शब्द ‘जगरनॉट’ का भी इस्तेमाल किया. अत्यंत प्रभावशाली शक्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘जगरनॉट’ शब्द के बारे में उन्होंने कहा, “यह शब्द जगन्नाथ से ही निकला है. भगवान जगन्नाथ का काम कभी नहीं रुकता है.”

  •  रेप का आरोपी निलंबित कलेक्टर जेपी पाठक फरार 

     रेप का आरोपी निलंबित कलेक्टर जेपी पाठक फरार 

    पुलिस ने तीन ठिकानों में दी दबिश, घर के बाहर चस्पा किया नोटिस
    राज्यपाल, मुख्यमंत्री, डीजीपी से गुहार लगाने के बाद हुई कार्रवाई
    रायपुर। बलात्कार के आरोप में फंसे जांजगीर-चांपा जिले के पूर्व कलेक्टर जेपी पाठक की मुश्किलें कम होने की बजाय बढ़ते ही जा रही है. पुलिस ने आरोपी कलेक्टर के ऊपर शिकंजा कसना शुरु कर दिया है. आरोपी कलेक्टर की तलाश में पुलिस की एक टीम एसपी ने गठित की है. पुलिस की टीम ने जेपी पाठक को गिरफ्तार करने रायपुर सहित तीन ठिकानों पर दबिश दी लेकिन वे कहीं नहीं मिले. पुलिस उनके आवासों में नोटिस चस्पा कर लौट गई है. वहीं पीडिता द्वारा राज्यपाल से गुहार लगाने के बाद पुलिस ने उसको सुरक्षा मुहैया करा दी है। जून को जांजगीर के पूर्व कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक के खिलाफ जिले की ही एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कोतवाली में मामला दर्ज कराया था. मामला सामने आने के बाद जेपी पाठक को मुख्यमंत्री ने निलंबित करने और उच्च स्तरीय समिति से जांच के आदेश दिये थे. पुलिस विभाग द्वारा मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम का गठन कर एसडीओपी रैंक के अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। मामले में पीडि़ता ने फोन रिकॉर्ड, वाट्सअप चैट सहित कई सबूत पुलिस को सौंपे थे. पुलिस ने अपनी जांच में पीडि़ता द्वारा सौंपे गए तमाम साक्ष्यों के साथ ही कलेक्टर परिसर के सीसीटीवी फुटेज को भी जांच में शामिल किया है। मामले की जांच कर कर रही एसडीओपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि जाँजगीर से संयुक्त टीम बनाकर उनकी खोजबीन के लिए भेजा गया है. उनके तमाम ठिकानों पर पतासाजी की जा रही है।


    पीडि़ता ने कहा आरोपी को बचाने की जा रही है कोशिश : पूर्व जनपद सदस्य और एनजीओ संचालिका पीडि़त महिला ने पुलिस प्रशासन पर जेपी पाठक को बचाने का आरोप लगाया है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, डीजीपी के नाम सौंपे ज्ञापन में उसने पुलिस पर बयान बदलवाने व आरोपी को बचाने की साजिश रचने का आरोपा लगाकर सनसनी फैला दी है। पीडि़ता में पूर्व कलेक्टर जेपी पाठक पर 15 मई को चेंबर में दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए एसपी पारूल माथुर को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद उसने अपनी आपबीती बताई और पुलिस ने 3 घंटे के भीतर जिले के पूर्व कलेक्टर एवं आईएएश पर अपराध कायम किया। इस मामले में पुलिस ने पीडि़ता से 164 के तहत कथन भी कराया। मामला दर्ज होने के 2 दिन बाद पीडि़ता रायपुर पहुंची जहां पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए है।


    एएसपी पाठक के संपर्क में : पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि फरार आरोपी पूर्व कलेक्टर जेपी पाठक एएसपी के संपर्ख में है और उसी के निर्देश पर मेरा बयान दर्ज करने के लिए उस पर जोर डाला जा रहा है। पीडि़ता का आरोप है कि एएसपी मधुलिका सिंह ने मूल साक्ष्य नष्ट करने के लिए उसका मोबाइल फोन पुलिस कर्मियों के माध्यम से अपने कब्जे में ले लिया है। और गुम होने का बयान देने के लिए बयान दने के लिए दबाव डाल रही है। पीडि़ता ने कहा कि उससे कोरे कागज पर जोर जबरदस्ती कर हस्ताक्षर करवाए है। पीडि़ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी तत्कालीन कलेक्टर पर एफआईआर दर्ज करने के बाद उसके पति को बगैर किसी ठोस कारण के कई घंटों तक थाने में बैठाकर रखा गया।

  • पति-पत्नी के झगड़े में हुआ वकील का फायदा, बिक गया घर, हो गए कर्जदार, जानिए पूरा मामला…

    पति-पत्नी के झगड़े में हुआ वकील का फायदा, बिक गया घर, हो गए कर्जदार, जानिए पूरा मामला…

    लंदन। अक्सर सुनने को मिलता है कि दो पक्षों की लड़ाई में किसी तीसरे का फायदा हो गया. ऐसे ही एक मामले में वकील का फायदा हो गया. इस लड़ाई में पति-पत्नी की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई. वकील की फीस देने के लिए घर तक बेचने पड़े. दरअसल ये पूरा मामला लंदन का है, जहां तलाक के मामले में लंबी सुनवाई के बाद पति और पत्नी दोनों बेरोजगार हो गए और उनका साझा कारोबार भी खत्म हो गया।

    53 वर्षींय पति और 50 वर्षीय पत्नी दोनों केयर होम के मालिक थे और उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल चल रही थी, लेकिन शादी के 22 साल बाद दोनों के बीच अचानक मनमुटाव हुआ और फिर उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया. दोनों ने कोर्ट में तालाक की अर्जी लगाई और संपत्ति का अधिक हिस्सा पाने के लिए अपना-अपना पक्ष रखा, ये पूरा मुकदमा दो साल तक चला.
    इस दौरान दंपति का 5 बेडरूम वाला मकान भी बिक गया और दोनों के पास मर्सिडीड कार भी थी, जो बेचने की नौबत आ गई. साथ ही दोनों के अलग होने पर केयर होम भी बंद हो गया. इतना ही नहीं वकीलों की रकम अदा करते हुए परेशान पति का 1.17 करोड़ रुपए का कर्ज भी हो गया।


    बता दें कि दोनों के तलाक को लेकर कुल 13 सुनवाई हुई, जिसमें 5 दिन का ट्रायल भी चला. फीस के खर्च के बाद किराए के घर में रह रहे पति को कर्ज भी चुकाना है. अब दोनो के पास महज 5-5 लाख रुपए ही बचे हैं।

  • नगरीय क्षेत्रों में आवास और व्यवसाय के लिए अब सहजता से मिल सकेगी शासकीय जमीन,सीएम भूपेश बघेल ने लोगों को दी बड़ी राहत….

    नगरीय क्षेत्रों में आवास और व्यवसाय के लिए अब सहजता से मिल सकेगी शासकीय जमीन,सीएम भूपेश बघेल ने लोगों को दी बड़ी राहत….

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर काबिज लोगों के साथ ही अन्य लोगों को आवासीय अथवा व्यावसायिक या अन्य प्रयोजन के लिए शासकीय भूमि सहजता से आवंटित हो सके इसके लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए है. जिसके तहत शासकीय भूमि के आवंटन एवं व्यवस्थापन के संबंध में राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राजस्व पुस्तक परिपत्र के खण्ड चार-एक एवं खण्ड चार-2 के प्रावधानों में आंशिक संशोधन करते हुए इसे अब और सरल करते हुए कलेक्टर को अधिकार प्रत्यायोजित किए गये है. इससे जिला स्तर पर भूमि आवंटन एवं व्यवस्थापन के मामलों को पूरी पारदर्शिता के साथ सहजता एवं शीघ्रता से निराकृत किया जा सकेगा. भूमि आवंटन की सरलीकृत प्रक्रिया का लाभ कब्जाधारियों सहित अन्य इच्छुक लोगों को मिल सकेगा

    राज्य शासन द्वारा केन्द्र तथा राज्य के विभागों और निगमों, मंडलों एवं आयोगों को शासकीय भूमि के आवंटन का अधिकार कलेक्टरों को दिया गया है. नगरीय क्षेत्रों में 7500 वर्गफीट तक शासकीय भूमि का 30 वर्षीय पट्टे पर आवंटन तथा अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन का अधिकार भी कलेक्टरों को दिया गया है. 7500 वर्गफीट से अधिक शासकीय भूमि के आवंटन तथा अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन का अधिकार राज्य सरकार को होगा.
    नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा अधिसूचित विकास योजना के अनुरूप ही नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि का आवंटन तथा अतिक्रमित शासकीय भूमि का व्यवस्थापन हो सकेगा. नगरीय निकायों को व्यावसायिक प्रयोजन के लिए भू-खण्ड का आवंटन के लिए प्रब्याजि का निर्धारण प्रचलित गाईड लाइन के 25 प्रतिशत के बराबर मूल्य पर किया जाएगा. शासकीय भूमि का आबंटन किसी व्यक्ति या संस्था को करते समय देय प्रब्याजि का निर्धारण प्रचलित गाईडलाईन के आधार पर किया जाएगा.

    इसी तरह किसी शासकीय भू-खण्ड के आवंटन के लिए दो या दो से अधिक व्यक्ति अथवा संस्था का आवेदन प्राप्त होने पर प्रचलित गाईडलाईन के दर पर निर्धारित की गई प्रीमियम दर को आफसेट मानते हुए नीलामी के माध्यम से सर्वाधिक बोली लगाने वाले को किया जाएगा. राज्य शासन ने भूमि स्वामी या पट्टेदार को भू-भाटक की अदायगी के मामले में भी विशेष रियायती दी है. भू-भाटक की राशि का 15 वर्ष का एकमुश्त भुगतान करने पर भूमि स्वामी या पट्टेदार को आगामी 15 वर्ष (16वें वर्ष से 30वें वर्ष तक) के भू-भाटक से छूट रहेगी. शासन की इस रियायत से प्रति वर्ष भू-भाटक के भुगतान की कठिनाईयों से भी लोगों को राहत मिलेगी.

    सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि जिला स्तर पर शासकीय भूमि के आवंटन एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन के संबंध में सभी कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. भूमि आवंटन के संबंध में प्राप्त होने आवेदनों का परीक्षण जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि रियायती एवं गैर रियायती दर पर प्राप्त पट्टों की भूमि को भूमि स्वामी हक में परिवर्तन के लिए निर्धारित मूल्य से 2 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देनी होगी. भूमि आवंटन अथवा व्यवस्थापन तथा भूमि स्वामी हक में परिवर्तन से संबंधित सभी प्रकरणों में ईश्तहार प्रकाशन, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया तथा विधिवत सुनवाई किया जाना है.

    कलेक्टर भूमि आवंटन एवं व्यवस्थापन के मामले में केवल ऐसी भूमि का ही आवंटन कर सकेंगे, जिसे लोक बाधा, स्वास्थ्य सुरक्षा, जन सुविधा, लोक प्रयोजन तथा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सुरक्षित रखने की आवश्यकता न हो. आवंटन योग्य भूमि का चिन्हांकन कर भुईंया सॉफ्टवेयर में अपलोड कराकर शासकीय विभागों को उक्त भूमि की आवश्यकता के संबंध में प्रस्ताव प्राप्त कर आवंटित किया जाएगा.

  • वर्षा डोंगरे ने सीएम को लिखा पत्र…. 2003 बैच को आईएएस अवॉर्ड के प्रस्ताव पर आपत्ति

    वर्षा डोंगरे ने सीएम को लिखा पत्र…. 2003 बैच को आईएएस अवॉर्ड के प्रस्ताव पर आपत्ति

    रायपुर। पीएससी-2003 बैच के डिप्टी कलेक्टरों को आईएएस अवॉर्ड के लिए सूचीबद्ध करने का मामला तूल पकड़ रहा है। जेल अफसर वर्षा डोंगरे कुंजाम और उनके पति संतोष कुंजाम ने इस पर आपत्ति की है और इस सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया है कि उक्त बैच की चयन परीक्षा में हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। हाईकोर्ट ने भी गड़बड़ी को माना है। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक किसी भी प्रकार का प्रमोशन का लाभ नहीं दिए जाने की गुजारिश की है। 
    सरकार डिप्टी कलेक्टर संवर्ग से आईएएस अवॉर्ड के लिए डीओपीटी को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। बताया गया कि सात रिक्त पद के लिए 21 अफसरों के नाम भेजे जाने हैं। इसमें वर्ष-2003 बैच के डिप्टी कलेक्टर संवर्ग के अफसर भी हैं। इस पर जेल अफसर श्रीमती वर्षा डोंगरे कुंजाम और संतोष कुंजाम ने पीएससी-2003 में भ्रष्टाचार की तरफ मुख्यमंत्री श्री बघेल का ध्यान आकृष्ट कराया है। कुंजाम दंपत्ति हाईकोर्ट के फैसले पर अमल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने 88 पेज के निर्णय में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया है कि राज्य सेवा परीक्षा 2003 में हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। 

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग साक्षात्कार तक के लिए  योग्यता नहीं रखते थे उन्हें चयनित किया गया है एवं चयनित अधिकारीगण अपने मेरिट के आधार पर नहीं बल्कि लोक सेवा आयोग के द्वारा परीक्षा के हर स्तर पर किए गए भ्रष्टाचार के कारण चयनित और सेवारत हैं। प्रकरण में न्यायालय के समक्ष खुद राज्य शासन और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने लिखित में अपनी गलती होना स्वीकार किए हैं। राज्य शासन व लोक सेवा आयोग छत्तीसगढ़ द्वारा उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं दी गई है। 

    पत्र में यह भी बताया गया कि राज्यपाल द्वारा राज्य शासन और लोक सेवा आयोग छत्तीसगढ़ को अपनी गलती सुधार कर नई चयन सूची जारी करने हेत निर्देशित किया गया है। स्वयं लोक सेवा आयोग ने अपने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक बीपी कश्यप के खिलाफ चार्जशीट में यह आरोप उल्लेखित किया है कि प्रारंभिक परीक्षा 2003 में अनुत्तीर्ण अभ्यार्थियों का चयन किया गया है एवं परीक्षा केन्द्रों में उन्हें दोषी सिद्ध होने पर राज्य शासन द्वारा दण्डित भी किया गया है।

    खुद सरकार की जांच एजेंंसी एण्टी करप्शन ब्यूरो द्वारा उक्त परीक्षा परिणाम पर हुए व्यापक अनियमितताओंपर एफआईआर दर्ज कर भादवि 13 (1) डी, 13 (2) डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विस्तृत अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार संबंधी 68 पृष्ठ की जांच रिपोर्ट छत्तीसगढ़ शासन और राज्यपाल को प्रेषित किया गया। जेल अफसर ने कहा कि राज्यसेवा परीक्षा-2003 के भ्रष्टाचार का मामला सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में वर्ष 2016 से आज तक निर्णय हेतु लंबित है। अतएव भ्रष्टाचार से चयनित ऐसे अफसरों को आईएएस जैसे संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक सेवाओं का दायित्व देना न सिर्फ भारतीय प्रशासनिक सेवा बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी संकट पैदा करना होगा। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय तक उन्हें किसी भी प्रकार का प्रमोशन का लाभ न दिया जाए। 

  • अंबिकापुर कलेक्टर ने ऑनलाइन पढ़ाई पर लगाई रोक, रायगढ़ में भी अभिभावको द्वारा ज्ञापन देने की तैयारी…

    अंबिकापुर कलेक्टर ने ऑनलाइन पढ़ाई पर लगाई रोक, रायगढ़ में भी अभिभावको द्वारा ज्ञापन देने की तैयारी…

    अम्बिकापुर। मिली जानकारी के अनुसार अम्बिकापुर के अभिभावक ने ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था और बच्चों को हो रही मानसिक रूप से तनाव के बारे कलेक्टर को जनकारी दिया अभिभावक का कहना है कि बच्चो के द्वारा लगातार मोबाइल लैपटॉप के कारण आंख की जलन या कमजोरी से बचा जा सके , घंटो बैठने के कारण रीढ़ की हडडी का दर्द से बचा जा सके , ईयर फोन ज्यादा देर तक कान में रहने से सुनने में तकलीफ हो रही है और ये सब कारण सिर में दर्द भी होता है जिसके कारण मानसिक हालत भी अच्छी नहीं होती है। बच्चे को करोना से बचा कर अभिभावक तो रखे है लेकिन मोबाइल और लैपटॉप के रेडीयेशन में अधिक समय तक बच्चे रहने से जरूर समस्या में आ सकते है।अम्बिकापुर कलेक्टर महोदय के द्वारा बच्चो की सेहत को ध्यान में रखते हुए और अभिभावक की परेशानी को समझते हुए ऑनलाइन क्लास को स्थगित किया है।

    रायगढ़ में भी अभिभावक कलेक्टर को ज्ञापन देने की तैयारी में…

    जनकारी आ रही है कि रायगढ़ में भी अभिभावक की समस्या यही है कुछ अभिभावक का कहना है कि बच्चों को मानसिक रूप से तनाव ऑनलाइन की पढ़ाई की वजह से हो रहा है ईयर फोन लगाकर तीन से चार घँटे एक ही जगह पर बैठना पड़ता है और एक ही बिषय पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है अभिभावक का कहना है कि हम लोग मिलकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक लगाने की मांग करेंगे।