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  • बिजली विभाग के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी पर जुर्माना पहली बार, जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग की कार्रवाई….

    बिजली विभाग के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी पर जुर्माना पहली बार, जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग की कार्रवाई….

    रायपुर। 30 नवंबर यह पहली बार ही है की छत्तीसगढ़ में पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी को सूचना के अधिकार के तहत रुपए 25 हजार की पेनल्टी सूचना आयोग द्वारा लगाई गई है। इसी के साथ सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने शासकीय कंपनी के विभिन्न कार्यालयों के मध्य आवेदन के अंतरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
    आवेदक नितिन सिंघवी ने प्रबंध संचालक विदुत वितरण कंपनी के कार्यालय में आवेदन लगाकर दो पत्रों के बारे में जानकारी चाही थी कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) द्वारा भेजे गए एक पत्र जिसमें हाथियों की विद्युत करंट से हो रही मृत्यु के संबंध में 15 दिनों में कार्य योजना बनाने के लिए लिखा गया था और दूसरे पत्र में प्रमुख सचिव वन विभाग द्वारा हाथियों की विद्युत करंट से हो रही मृत्यु के संबंध में विद्युत वितरण कंपनी के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की चेतावनी दी गई थी। आवेदक ने जानना चाहा था कि ये दोनों पत्र प्रबंध संचालक के कार्यालय में पहुंचने के उपरांत उनके कार्यालय द्वारा क्या कार्यवाही की गई? परंतु तत्कालीन जन सूचना अधिकारी सह उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन) विद्युत वितरण कंपनी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन का अंतरण कार्यालय कार्यपालक निदेशक (संचा./संधारण) को कर दिया, जिन्होंने भी आवेदक को सूचना मुहैया नहीं कराई। प्रथम अपील निरस्त कर दी गई। इसलिए आवेदक ने द्वितीय अपील दायर थी।
    द्वितीय अपील के दौरान आयोग ने माना की आवेदन का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के तहत अंतरण करना उचित नहीं था क्योंकि प्रबंध संचालक कार्यालय द्वारा दोनों पत्रों के परिपेक्ष में यदि कोई कार्यवाही की गई थी तो उक्त कार्यवाही की जानकारी भेजनी चाहिए थी। यदि कार्यवाही नहीं की गई थी तो उसकी जानकारी आवेदक को दी जानी चाहिए थी। आयोग ने कहा कि इस प्रकरण में जन सूचना अधिकारी द्वारा प्राप्त जन सूचना आवेदन का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के तहत जन सूचना अधिकारी कार्यालय कार्यपालक निदेशक (संचा. संधारण) विद्युत वितरण कंपनी को अंतरित किया गया था, जबकि प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिसटीब्यूशन कंपनी लिमिटेड एक ही लोक प्राधिकारी है और उनके कार्यालय में कार्यरत सभी विभाग/शाखा में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के अंतरण मामला नहीं बनता है ।बल्कि वांछित जानकारी जन सूचना अधिकारी के पास नहीं थी तो उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के धारा 5(4) के तहत डीम्ड जन सूचना अधिकारी से प्राप्त कर आवेदक को प्रेषित करनी चाहिए थी ।
    आयोग ने प्रकरण में श्रीमती सरोज तिवारी वर्तमान पदस्थापना मुख्य अभियंता राजस्व स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड तत्कालीन जनसूचना अधिकारी एवं उप महाप्रबंधक (मां.स) विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्राप्त जनसूचना आवेदन का गलत विनिश्चय करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (3) के तहत आवेदन का अंतरण करने के कारण और धारा 5(4) के तहत डीम्ड जन सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त कर अपीलआर्थी को प्रेषित न करने के कारण ₹25000 अर्थ धन आरोपित कर, अर्थ दंड की राशि वसूली हेतु आदेशित किया है।

    00 नहीं होगा कार्यालयों में आवेदनों का अंतरण
    सिंघवी ने चर्चा में बताया कि एक ही लोक प्राधिकारी होने की स्थिति में जैसा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड एक ही लोक प्राधिकारी है, तो आवेदक विद्युत वितरण कंपनी के किसी भी कार्यालय में आवेदन दायर करके जानकारी चाह सकता है। अगर जानकारी दूसरे कार्यालय के पास है तो आवेदन का अंतरण नहीं किया जा सकता, अधिनियम में व्यवस्था दी गई है कि एक ही लोक प्राधिकारी के किसी एक कार्यालय में आवेदन लगाया गया है और उसी लोक प्राधिकारी के दुसरे कार्यालय के पास सूचना होने पर, धारा 5(4) तथा 5(5) के तहत डीम्ड सूचना आधिकारी से सहयोग मांग कर, दूसरे कार्यालय से सूचना बुलाकर आवेदक को प्रदाय की जाएगी, ना कि आवेदन का अंतरण किया जावेगा। यह अंतरण तब किया जा सकता है जब विद्युत वितरण कंपनी में आवेदन लगा दिया गया है और जानकारी विधुत ट्रांसमिशन कंपनी से संबंधित हो, तब धारा 6(3) के अंतर्गत आवेदन का अंतरण किया जा सकता है, क्योंकि दोनों अलग-अलग लोक प्राधिकारी है। छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने इस संबंध में 2005 में ही स्पष्टीकरण जारी कर दिया था। इसी आधार पर सूचना आयोग ने पहले ही रायपुर नगर निगम को एक ही एक ही लोक प्राधिकारी माना है न कि हर जोन कार्यालय को।

  • जमानत किसी और को बाहर आ गया कोई और, जिला प्रशासन ने शुरू की जांच, फर्जी जमानत पर बाहर आया दूसरा आरोपी हुआ फरार….

    जमानत किसी और को बाहर आ गया कोई और, जिला प्रशासन ने शुरू की जांच, फर्जी जमानत पर बाहर आया दूसरा आरोपी हुआ फरार….

    जमानत किसी और को मिली, रिहा कोई और होगा। इस मामले में जेल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिया है। इस मामले में जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। जेल में बंद जिस गुड्डू कुमार को जमानत मिली वो जेल में ही रह गया दूसरा गुड्डू कुमार बाहर आ गया।

    मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिला जेल का है। इस जेल में मीनापुर थाना शंकर पट्टी का गुड्डू कुमार के साथ उसी गांव के उसके हमनाम धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार भी जेल में था। एक गुड्डू कुमार के बदले  दूसरे गुड्डू कुमार को जेल से रिहा कर दिया गया। इसका पता तब चला जब जमानत मिलने वाला बंदी बाहर नहीं निकला। उसके स्वजन की शिकायत पर उसके अधिवक्ता ने जेल प्रशासन से तहकीकात की। इसके बाद जमानत मिले दूसरे बंदी को भी मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया। 

    जमानत का फर्जी लाभ उठाकर जेल से निकलने वाला गुड्डू कुमार फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। वहीं जमानत पर जेल से जमानत पर रिहा होने वाले गुड्डू कुमार को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इस संबंध में जेल प्रशासन की ओर से दोनों के विरुद्ध मिठनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जेल प्रशासन ने कार्यालय के कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण का उत्तर मिलने के बाद दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की बात बताई जा रही है। मिठनपुरा थानाध्यक्ष श्रीकांत सिन्हा ने बताया कि दोनों गुड्डू आपस में दोस्त है। दोनों की साथ-साथ आपराधिक घटना में संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं।

    मीनापुर थाना के शंकरपट्टी गांव के रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार को 29 मई को हथौड़ी थाना क्षेत्र के बरहेत्ता गांव के निकट वाहन जांच के दौरान चोरी की बाइक व कारतूस एवं एक देसी पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया गया। उसका साथी शंकरपट्टी गांव के धनेश्वर राय का पुत्र गुड्डू कुमार तब फरार हो गया था। हथौड़ी थाना के पुलिस सहायक अवर निरीक्षक अरविंद कुमार ने दोनों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट व चोरी का समान बरामदगी की धारा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद 18 सितंबर को धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार को उसके तीन साथियों के साथ पुलिस ने दादर पुलिस लाइन के पास गांजा व पिस्टल के साथ अहियापुर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

    इस संबंध में अहियापुर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक विनोद दास ने सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दोनों तभी से जेल में था। इस बीच शंकरपट्टी के रामदेव सहनी के पुुत्र गुड्डू कुमार को कोर्ट से जमानत मिल गई। सोमवार को जेल से रिहा करने का कोर्ट से आदेश पहुंचा। जब जेल में रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार की पुकार की गई तो उसके बदले धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार जेल गेट स्थित कार्यालय में पहुंच गया। उससे पहचान चिह्न पूछा गया। उसने रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार का ही पहचान बता दिया। इससे भ्रमित होकर उसे ही जेलकर्मियों ने उसे रिहा कर दिया।

    जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कि बंदी को छोड़ने में चूक हुई है। यह एक तरह की दुर्घटना है। इसके लिए कार्यालय कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसका उत्तर मिलने के बाद दोषियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब तक की जांच में इस घटना में दोनों की मिलीभगत सामने आ रही है। पुकार होने के समय जानबूझकर दूसरा जेल गेट पर आ गया।

  • कोविड19 वैक्सीन लगने बाद होने वाली मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं, चाहें तो न लगवाएं टीका!

    कोविड19 वैक्सीन लगने बाद होने वाली मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं, चाहें तो न लगवाएं टीका!

    दिल्ली। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के तहत इस्तेमाल किए जा रहे टीकों का निर्माण थर्ड पार्टी द्वारा किया जाता है. उन्हें सुरक्षित व प्रभावी माना जाता है, इसलिए तीसरे पक्ष के बनाए कोविड टीके और उससे मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. केंद्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि कोविड-19 का टीका लगवाने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. केंद्र की यह प्रतिक्रिया दो लड़कियों के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर आई है, जिनकी कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव के कारण मौत हो गई थी.

    मंत्रालय ने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम के तहत उपयोग में आने वाले टीकों का निर्माण थर्ड पार्टी द्वारा किया जाता है और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में सफलतापूर्वक विनियामक समीक्षा की जाती है, जिसे विश्व स्तर पर सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है.

    मंत्रालय ने कहा, ‘इन तथ्यों के तहत, यह विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत किया गया है कि टीकों के उपयोग से एईएफआई (प्रतिकूल घटनाओं के बाद टीकाकरण) के कारण होने वाली अत्यंत दुर्लभ मौतों के लिए सख्त दायित्व के संकीर्ण दायरे के तहत मुआवजा प्रदान करने के लिए राज्य को सीधे तौर पर उत्तरदायी ठहराना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता.’
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति एईएफआई से शारीरिक चोट या मौत का शिकार होता है, तो कानून में उचित उपाय टीके लाभार्थियों या उनके परिवार के लिए खुले हैं, जिसमें लापरवाही, दुर्भावना या गलत व्यवहार के लिए मुआवजे के दावे के लिए दीवानी अदालतों में जाना शामिल है.
    इस तरह के दावों को केस-टू-केस के आधार पर एक उपयुक्त मंच पर निर्धारित किया जा सकता है. इसने कहा कि मौतें दुखद थीं, लेकिन सरकार को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता था. 23 नवंबर को दायर हलफनामे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, हालांकि, सरकार जनहित में सभी पात्र व्यक्तियों को टीका लेने के लिए दृढ़ता से प्रोत्साहित करती है, लेकिन इसके लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

    सरकार की प्रतिक्रिया दो लड़कियों के माता-पिता द्वारा दायर एक याचिका पर आई, जिसका प्रतिनिधित्व वकील सत्य मित्रा ने किया था, कोविड वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स के कारण दोनों लड़कियों का निधन हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में माता-पिता की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था, जिसमें समयबद्ध तरीके से ऑटोप्सी और जांच रिपोर्ट जारी करने के साथ-साथ मौतों की एक स्वतंत्र समिति द्वारा जांच की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने मौद्रिक मुआवजे और कोविड टीकों के प्रतिकूल दुष्प्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों का शीघ्र पता लगाने और उपचार के लिए दिशा-निर्देशों की भी मांग की.
    याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता की 18 वर्षीय बेटी को मई 2021 में कोविशील्ड की पहली खुराक मिली और जून 2021 में उसकी मौत हो गई. दूसरे याचिकाकर्ता की 20 वर्षीय बेटी को कोविशील्ड की पहली खुराक जून 2021 में मिली और जुलाई 2021 में उसकी मौत हो गई।

  • पर्यावरण अधिकारी की बदतमीजी पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा…। अधिकारी के माफीनामा के बाद मामले का हुआ निपटारा…

    पर्यावरण अधिकारी की बदतमीजी पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा…। अधिकारी के माफीनामा के बाद मामले का हुआ निपटारा…

    पर्यावरण विभाग पिछले कुछ समय से सिर्फ और सिर्फ फ्लाई एस डंप व उद्योगों के समर्थन में जनसुनवाई करवाने में लगा हुआ है जिससे यह अधिकारी मन बड़े हो चले हैं ताजा मामले में आज हर्ष न्यूज के संवाददाता संतोष साहू जिला पर्यावरण अधिकारी से फ्लाई डंप दम मामले में उनका कथन लेने पहुंचे थे लगभग 45 मिनट इंतजार के बाद उन्होंने विधिवत पर्ची भेज कर अधिकारी को सूचना दी व निवेदन किया कि उन्हें समय दे जब अधिकारी ने उनको किसी तरह का कोई जवाब नहीं दिया गया तो संतोष साहू ने स्वयं जाकर पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू से निवेदन किया कि कृपया 2 मिनट का समय दें जिस पर जिला पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू पता नहीं किस गुमान,घमंड में आकर पत्रकार को चेंबर से बाहर निकलने व औकात में रहने की बात कर दी।

    जिसके बाद संतोष साहू ने इस वाक्य की जानकारी अपने पत्रकार साथियों को फोन पर दी फोन पर सूचना मिलने पर सभी पत्रकार साथी जोकि 40 से 50 की संख्या में एक साथ जिला पर्यावरण कार्यालय पहुंचे वह उन्होंने नारेबाजी कर जिला पर्यावरण अधिकारी को माफी मांगने की लिए बाध्य किया।अपनी गलती का एहसास होने पर जिला पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू ने सभी वरिष्ठ पत्रकारों के समक्ष पत्रकार संतोष साहू से माफी मांगी व भविष्य में ऐसा दोबारा ना होने की बात भी कही जिस पर पत्रकार संतोष साहू सहमत व संतुष्ट नजर आए।

    इस विरोध के दौरान पत्रकार नरेश शर्मा,प्रवीण त्रिपाठी,युवराज सिंह आजाद,विनय पांडे,नितिन सिन्हा,भूपेंद्र सिंह,सत्यजीत घोष,राजेश जैन,भूपेंद्र ठाकुर,नवरतन शर्मा,नरेंद्र चौबे,विपिन सवानी,बंसी निराला,भीमसेन तिवारी,प्रेम नारायण मौर्य,शमशाद अहमद व अन्य मौजूद थे।

  • IPS सुंदरराज पी और ओपी पॉल केंद्र में IG के लिए इम्पैनल….रतन लाल डांगी नहीं…

    रायपुर । केंद्र सरकार ने देश के अलग-अलग राज्यों के 33 IPS अफसरों को आईजी के लिए इम्पैनल किया है। जबकि रतन लाल डांगी को आईजी रैंक में इम्पैनल नहीं किया गया है। कर्नाटक कैडर की चर्चित आईपीएस रूपा डी को भी इम्पैनल नहीं किया है। छत्तीसगढ़ के दो आईपीएस सुंदरराज पी और ओपी पॉल को IG के लिए इम्पैलन कर दिया गया है।

  • छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से प्रशासन बनाम अधिवक्ता: एसडीएम से ऊंची आवाज में बात, धमकी और सरकारी काम में बाधा को लेकर वकील के खिलाफ FIR दर्ज..

    छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से प्रशासन बनाम अधिवक्ता: एसडीएम से ऊंची आवाज में बात, धमकी और सरकारी काम में बाधा को लेकर वकील के खिलाफ FIR दर्ज..

    महासमुंद। छत्तीसगढ़ में राजस्व न्यायालय के कर्मचारी और अधिवक्ताओं का आंदोलन साल की शुरुआत में चरम पर था। पूरी कहानी रायगढ़ के राजस्व न्यायालय से शुरू हुई थी। जहां तहसीलदार और अधिवक्ता के बीच कहासुनी ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिला दिया था और राजस्व न्यायालय में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुहिम शुरू कर दी थी। प्रशासन बनाम अधिवक्ता के मामले में 3 वकील जेल भी गए थे। ऐसा ही एक मामला फिर से प्रकाश में आया है। इस बार सरायपाली में ऐसा ही कुछ वाक्या हुआ है। जिसमें एसडीएम के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी/न्यायालयीन काम में बाधा को लेकर अधिवक्ता पर अपराध दर्ज किया गया है। मामला महासमुंद जिले के सराईपाली क्षेत्र का है।

    सरायपाली एसडीएम हेमंत कुमार नंदनवार ने पुलिस को दिए अपने लिखित आवेदन में बताया है कि “28 नवंबर को न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (रा) सरायपाली में प्रकरण के सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रनदीप सिंह सलूजा के द्वारा न्यायालयीन कार्य में व्यवधान उत्पन्न करते हुए मुझ पीठासीन अधिकारी से ऊंची आवाज में चिल्लाते हुए प्रकरण में आप ऐसा नही कर सकते, आपको अधिकार नहीं है कहा गया। मेरे द्वारा अधिवक्ता को बताया गया कि जो न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है मै वैसा ही लिख रहा हूं परंतु अधिवक्ता द्वारा विरोध किया गया, मेरे द्वारा समझाइस देने के उपरांत भी अधिवक्ता द्वारा पुनः मुझे आप सरकारी सेवक है, हमारा सुनना पड़ेगा। आपको हमसे हद में रहकर बात करना पडेगा। अधिकारी है तो क्या हुआ आप जैसे बहुत सारे देखे है।”

    “ऐसा कहकर मेरे साथ दुर्व्यवहार करते हुए दोषारोपण कर धमकी दी गई एवं बार बार न्यायालयीन कार्यो को बाधित किया गया। जिसके कारण न्यायालयीन / शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न / रूकावट हुआ एवं मुझसे वाद विवाद करने से न्यायालय की गरिमा धुमिल हुई। इस दौरान न्यायालय में उपस्थित अधिवक्ता एवं अन्य का पंचनामा तैयार किया गया। जिसकी कॉपी संलग्न है।”

    फिलहाल इस मामले में अधिवक्ता का पक्ष नहीं मिल पाया है। एसडीएम के आवेदन के आधार पर महासमुंद जिले के सरायपाली थाने में अधिवक्ता रणदीप सिंह सलूजा के खिलाफ आईपीसी की धारा 186 और 506 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    आईएएस अफसर और सरायपाली एसडीएम हेंमत रमेश नंदनवार (Saraipali SDM Henmat Ramesh Nandanwar) ने वकिल रनदीप सिंह सलूजा (Advocate Randeep Singh Saluja) के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंन वकिल पर दुर्व्यवहार करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही न्यायालय की गरिमा धूमिल करने की भी बात कही गई है। इस मामले में पुलिस ने अधिवक्ता के खिलाफ धारा 186, 506 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    वकिल ने कहा- अधिकारी हो तो क्या हुआ? आप जैसे बहुत देखे है…

    शिकायत में एसडीएम नंदनवार ने कहा कि, अधिवक्ता रनदीप सिंह सलूजा ने सुनवाई के दौरान कहा कि, प्रकरण में आप ऐसा नही कर सकते, आपको अधिकार नहीं है। मैनें अधिवक्ता को बताया कि जो न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है मैं वैसा ही लिख रहा हूं। लेकिन अधिवक्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि, आप सरकारी सेवक है, हमारा सुनना पड़ेगा, आपको हमसे हद में रहकर बात करना पडेगा, अधिकारी हो तो क्या हुआ? आप जैसे बहुत देखे है।

    इस मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • सूबे के हेल्थ मिनिस्टर टी एस सिंह की जमीनों के लिए बैठायी गयी जांच! एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश..

    सूबे के हेल्थ मिनिस्टर टी एस सिंह की जमीनों के लिए बैठायी गयी जांच! एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश..

    छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के खिलाफ एक बार फिर जमीन फर्जीवाड़े मामले में जांच बैठा दी गई है. पुरानी शिकायत के आधार पर नजूल तहसीलदार ने बाकायदा जांच का आदेश देते हुए जांच टीम भी बना दी है.

    23 नवंबर 2022 को जारी इस पत्र में नजूल तहसीलदार अजय गुप्ता ने हलका पटवारी का दल गठित कर एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

    दरअसल, सूबे में एक बार फिर सरगुजा राजपरिवार की जमीन का मामला सुर्खियों में आ गया है. जबकि इससे पहले हुई सभी जांचों में शिकायत खारिज की जा चुकी है. शिकायत में कहा गया है कि टीएस सिंहदेव और उनके परिवार के सदस्यों के नाम फर्जी तरीके से जमीन पाई गई है. जांच के लिए जारी आदेश में राजस्व विभाग के 6 अधिकारियों की टीम बनाई गई है.

    इस टीम में राजस्व निरीक्षक नारायण सिंह, राजस्व निरीक्षक नजूल राजबहादुर, अशीष गुहा और विजय श्रीवास्तव समेत हल्का पटवारी श्रवण पाण्डेय और महेंद्र गुप्ता का नाम शामिल है. जांच के आदेश जारी होते ही एक बार फिर सरगुजा की राजनीतिक गरमा गई है.

    वहीं, इस मामले में कलेक्टर कुंदन कुमार का कहना है कि मुझे इस आदेश के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी मिली है. मैंने एसडीएम और नायब तहसीलदार से बात की है. पूरे मामले के संदर्भ में जल्द ही एसडीएम और नायब तहसीलदार मुझे अवगत कराएंगे. उनका कहना है कि आदेश कहां से निकला है? इसकी जांच करा रहे हैं.

    टीएस सिंह देव की ओर से पक्ष रखने वाले एडवोकेट संतोष सिंह ने कहा, ”मुझे नवभारत समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि टीएस सिंह देव की जमीन के संदर्भ में जांच कमेटी बैठाई गई है. मुझे लगता है कि शिव सागर तालाब के संदर्भ में जांच कमेटी बैठाई गई होगी. इसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है. शिकायत पर स्थानीय जांच कमेटी की तरफ से क्लीरियंस दिया जा चुका है. यह नायब तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र के बाहर है. उन्हें जांच बैठाने का अधिकार नहीं है.”

  • 4 डाक्टर सहित 7 पर FIR : डॉक्टरों की लापरवाही से 10 माह के बच्चे की अस्पताल में हुई थी मौत, अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के आदेश…

    4 डाक्टर सहित 7 पर FIR : डॉक्टरों की लापरवाही से 10 माह के बच्चे की अस्पताल में हुई थी मौत, अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के आदेश…

    रायपुर। बच्चे की मौत पर चार डाक्टरों सहित 7 लोगों पर FIR दर्ज किया गया है। मामला भिलाई 3 के सिद्धी विनायक अस्पताल का है घटना की शिकायत के बाद दुर्ग पुलिस ने हॉस्पिटल के 7 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया गया।

    दरसअल, ये पूरा मामला सिरसागेट चौक भिलाई-3 स्थित सिद्धिविनायक अस्पताल का है। इस मामले में दुर्ग पुलिस ने एक प्रेसनोट भी जारी किया है, जो इस प्रकार है…सागर पारा देवबलौदा निवासी डिकेश वर्मा ने 27 अक्टूबर को 10 माह के पुत्र को सर्दी जुखाम के चलते सिद्धिविनायक अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने बच्चे को सांस लेने की तकलीफ के चलते आईसीयू में भर्ती कराया गया था। 31 अक्टूबर को बच्चे का स्वास्थ्य बिगड़ने से अस्पताल में उपचार के दौरान बच्चे की मौत हो गई। पीड़ित परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस मामले में थाना पुरानी भिलाई में धारा 174 के तहत अपराध दर्ज कराया। 

    वहीं, इस घटना के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा समिति गठित कर जांच किया गया। जांच पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. संमीत राज प्रसाद, शिशुरोग विशेषज्ञ एवं आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. दुर्गा सोनी, डॉ. हरिराम यदु, डॉ. गिरीश साहू, एवं नर्सिंग स्टाफ, आरती साहू, कुमारी निर्मला यादव के द्वारा बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने पर दोषी होना पाया गया। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पश्चात उपरोक्त सात आरोपीगणों के विरूद्ध याना पुरानी मिलाई में दिनांक 16.11.2022 को अपराध क्रमांक 523/2022 धारा 304ए भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

  • अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    आजकल रेल या प्लेन का टिकट बुक करना हो या फिर बैंकिंग का कोई काम हो, मोबाइल ऐप से तुरंत ये सभी काम हो जाते हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के मुताबिक इनका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, कुछ सकारी ऐप ऐसी हैं, जिनका इस्तेमाल iPhone यूजर्स नहीं कर सकते, क्योंकि ये ऐप Google Play Store पर मौजूद हैं. सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स ही इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

    MYGRIEVANCE: इस ऐप को नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर ने डिपार्टपेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रैटिव रिफॉर्म्स एंड पब्लिक ग्रिवांस के सहयोग से तैयार किया है. MYGRIEVENCE App यूजर्स को केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े किसी भी विभाग की शिकायत करने की सुविधा प्रदान करती है. यहां आप आसानी से किसी भी सरकारी महकमे के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके अलावा यूजर्स ऐप पर अपनी शिकायत का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।

    MYCGHS: यह ऐप केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए है. सरकारी कर्मचारी यहां से डॉक्टर और वेलनेस सेंटर की अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. इसके अलावा यहां से अपॉइंटमेंट कैंसिल भी की जा सकती है. यूजर्स इस ऐप से स्कीम के तहत ..पैनल में शामिल हॉस्पिटल और लैब की जानकारी की भी हासिल कर सकते हैं।

    JeevanPramaan Life Certificate: यह ऐप पेंशनभोगियों के काफी काम आती है. इस ऐप से यूजर्स आधार बायोमैट्रिक के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं. यूजर्स ID की मदद से जीवन प्रमाण पत्र की सर्टिफाइड PDF कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं।

    DND: अगर आप प्रोमोशन वाली कॉल से बेहाल हो चुके हैं, तो DND ऐप आपकी मदद करेगी. सरकारी टेलीकॉम रेगुलेटर बॉडी TRAI ने इस DND ऐप को तैयार किया है. इस ऐप पर मोबाइल नंबर रिजसर्ड कराने के बाद अनसोलिसिट कमर्शियल कम्यूनिकेशन (UCC)/ टेलीमार्केटिंग कॉल और SMS से छुटकारा मिलेगा।

    PMO India: यह भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक ऐप है. इस ऐप पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी सभी लेटेस्ट जानकारी, न्यूज अपडेट्स मिलती हैं. देश के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों की सहूलियत के लिए ये ऐप 13 भाषाओं को सपोर्ट करती है।

     Indian Apps: Kisan Suvidha: किसान सुविधा ऐप को इसलिए डेवलप किया गया है, ताकि वे अपनी उपज को अच्छे दाम पर बेच पाएं. इस ऐप पर किसान किसी भी बाजार में हो रही उपज की निलामी को लाइव चेक कर सकते हैं. वहीं, आढ़ती भी इसकी मदद से उपज की खरीद-फरोख्त पर नजर रख सकते हैं।

  • महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल…

    महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल…

    महासमुन्द। छत्तीसगढ़ के महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। महासमुंद जिले में 44 पुलिसकर्मियों का प्रशासनिक दृष्टिकोण से ट्रांसफर किया गया है…