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  • प्रभा मिश्रा नहीं भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण हैं रामायण की असली मंदोदरी, 15 साल बाद सामने आई असलियत

    प्रभा मिश्रा नहीं भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण हैं रामायण की असली मंदोदरी, 15 साल बाद सामने आई असलियत

     

    • बीते 15 वर्षों से लोग ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ीं प्रभा मिश्रा को मानते रहे हैं रामायण में मंदोदरी की भूमिका निभाने वाली एक्ट्रेस
    • वास्तव में मंदोदरी का किरदार महान अभिनेता भारत भूषण की बेटी अपराजिता ने निभाया था, जो वर्तमान में एक लेखिका है
    • वायरस के लॉकडाउन के कारण टीवी पर 34 साल बाद रामानंद सागर की बनाई रामायण का फिर से प्रसारण हो रहा है। दर्शक जहां इस धारावाहिक के बहाने यादों को ताजा कर रहे हैं, वहीं इसके कारण एक सच्चाई का खुलासा भी हुआ जो मंदोदरी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस को लेकर है। दरअसल, बीते 15 वर्षों से लोग और मीडिया प्रभा मिश्रा नाम की जिस महिला को मंदोदरी की पहचान देते आए हैं, उन्होंने वास्तव में मंदोदरी की भूमिका नहीं निभाई थी। सच्चाई यह है कि इस भूमिका को महान अभिनेता भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण ने निभाया था।
    मंदोदरी की भूमिका के लिए मेकअप की यह 35 साल पुरानी यह तस्वीर अपराजिता ने अपने एलबम से साझा की है।

    एक महान किरदार की पहचान खोने के इस पूरे मामले म अपराजिता भूषण का सच अपराजिता के शब्दों में बयां कर रहे हैं-

    मैं अपराजिता भूषण, भारत भूषण जी की बड़ी बेटी हूं और अपने परिवार के साथ पुणे में रहती हूं। मैं करीब 23 साल पहले फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो गई थी और मैंने अपना आगे का करिअर बतौर एक लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में बनाया है।

    ये इसी साल जनवरी के महीने की बात है। जब कुछ शुभचिंतकों ने मेरे ध्यान में यह बात लाई कि इंटरनेट पर ‘मंदोदरी’ शब्द को सर्च करें तो रामानंद जी की रामायण में मंदोदरी की आपकी भूमिका आपके नाम से नहीं, बल्कि बीके प्रभा मिश्रा के नाम से आती है। यह बात तब की है जब न तो कोई कोरोना संकट था और न ही रामायण के दोबारा प्रसारण की कोई योजना थी।

    मंदोदरी की भूमिका में रावण बने अरविंद त्रिवेदी के साथ अपराजिता। 

    मैं शॉक्ड रह गई क्योंकि मेरे नाम और काम पर आघात यह सब पिछले 15 साल से चल रहा था। मैंने गूगल सर्च करके पुराने लिंक खोजे और पाया कि मेरे शुभचिंतक सही कह रहे थे। मैंने पाया कि जिन प्रभा मिश्रा के नाम को रामायण की मंदोदरी बताया जा रहा है वे प्रतिष्ठित संस्था ब्रह्मकुमारीज से जुड़ी हैं।

    इसके बाद मैंने ब्रह्मकुमारीज संस्था से सम्पर्क किया और उन्हें पूरी बात बताते हुए कहा कि इससे तो मेरा काम और मेरी पहचान ही गुम हो गई, या कहें कि चोरी हो गई। उन्होंने मेरी बात बहुत गंभीरता से सुनी और मदद के लिए तुरंत कदम उठाए। उन्हीं के माध्यम से मैंने प्रभा मिश्रा से सम्पर्क किया। उन्होंने सब कुछ सुनकर मुझे कुछ अजीब से तर्क दिए, जो सच्चाई से परे थे।

    सच-झूठ सामने आने के बाद उन्होंने मुझसे माफी मांगी। मैं व्यथित थी और मैंने उनसे आग्रह किया कि वे मेरी पहचान लौटाए और बीते 15 वर्षों में जो भी इंटरव्यू दिए है उन्हें डिलीट करवाएं और जो भी बातें उन्होंने मेरी मंदोदरी वाली भूमिका ओढ़कर की है उसे लेकर अपना स्पष्टीकरण लिखित में दें कि मैंने वह भूमिका नहीं की थी, मैंने तो सिर्फ उसका इस्तेमाल किया था।

    कई बार ध्यान दिलाने के बाद भी दो महीने तक उनकी ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। तभी अचानक कोरोना लॉकडाउन में दूरदर्शन ने रामायण को फिर से दिखाने का फैसला किया। मुझे मीडिया की ओर से कॉल आने लगे और साथ ही प्रभा मिश्रा की भूमिका को लेकर भी मुझसे सवाल किए जाने लगे। जब मैंने सच्चाई बताई तो सभी हैरान थे और मुझे कानूनी कदम उठाने की सलाह भी दी गई, हालांकि मैंने उस सलाह को नजरअंदाज करने का फैसला किया।

    बीके प्रभा मिश्रा की फाइल फोटो, जिन्हें अब तक माना जाता था कि मंदोदरी की भूमिका उन्होंने निभाई थी। 

    मैंने प्रभा जी को फिर से कॉल किया और उनसे कहा कि आप मुझे एक ईमेल करके अपनी सफाई दें और उसमें लिखें कि मैं असली मंदोदरी नहीं हूं, यह भूमिका अपराजिता भूषण ने की थी। उन्हाेंने बीते दिनों मुझे एक ईमेल भेजा और अपनी गलती स्वीकार कर मुझे अपनी मंदोदरी की पहचान लौटाई। आखिरकार, उन्होंने मेरा सहयोग किया और इस तरह सद्भावनापूर्वक इस पूरे मामले में सच की जीत हुई।

    बीते तीन महीने मुझे इस पूरे मामले ने काफी परेशान किया। मेरे परिवारजन भी दुखी हुए, लेकिन हमने हिम्मत और सच्चाई के साथ सहानुभूति से सभी के सामने अपने पक्ष को रखा। मैंने प्रभा जी से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। मेरे पिता ने हमेशा हम बच्चों को रामायण और श्रीमदभगवतगीता के रास्ते पर चलने की सीख दी। बतौर स्प्रिच्युअल राइटर और स्पीकर होने के नाते मेरी शक्ति भी वही गुण हैं। मेरा मानना है कि जीवन में क्षमा और करुणा बहुत आवश्यक है, लेकिन मेरा यह भी मानना है कि जो कुछ भी गलत है और धर्म के विरूद्ध है, उसका मुकाबला करके उसे नष्ट किया जाना चाहिए।

    अंत में, मैं कहूंगी कि ईश्वर की कृपा है कि उन्होंने मेरी सत्यनिष्ठा को स्थापित करने की शक्ति दी और मुझे अंधेरे से उजाले में आने का मार्ग दिखाया।

  • अखबार या चैनल में काम करने वाला “हर शख्स पत्रकार” नहीं होता

    अखबार या चैनल में काम करने वाला “हर शख्स पत्रकार” नहीं होता

    आइये आपको पत्रकारिता जगत की पोस्ट (पद) के बारे में अवगत कराएँ

    मालिक

    पहले सिर्फ एक पत्रकार ही अखबार का मालिक होता था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी भी यंग इंडिया अखबार के मालिक रहे हैं। 7 मार्च 1956 को राजस्थान पत्रिका अखबार की शुरुआत करने वाले श्री कर्पूरचंद क़ुर्लिस जी भी मालिक बनने से पहले एक जाने-माने पत्रकार थे। उज्जैन जिले के स्थानीय तौर पर बात करे तो 51 साल पहले दैनिक अवंतिका अखबार की शुरुआत करने वाले श्री गोवर्धनलाल मेहता जी पत्रकार थे। दैनिक अग्निपथ अखबार की शुरुआत करने वाले ठाकुर शिवप्रताप सिंह चंदेल जी देश के जाने-माने मूर्धन्य पत्रकार थे। 40 साल से अदम्य साहस की पत्रकारिता कर रहे साप्ताहिक अदम्य अखबार के मालिक श्री भूपेंद्र दलाल जी जाने-माने पत्रकार हैं। लेकिन वर्तमान दौर में कोई सटोरिया, भू-माफिया, शराब माफिया, गुटखा किंग, पार्टी नेता या चकलाघर संचालित करने वाला भी अखबार या चैनल का मालिक बन जाता हैं।

    संपादक

    ये मालिक के बाद अखबार की सबसे बड़ी पोस्ट है। इस पोस्ट पर एक सही पत्रकार ही बैठ सकता हैं क्योंकि उसे 10-12 साल मैदान में पत्रकारिता कर सभी बीटों का ज्ञान रहता हैं। कौन सी खबर अखबार में कितनी और कहाँ पर जाएगी। ये सारे अधिकार संपादक के पास रहते हैं। ये बात और है कि अखबार मालिक चाहे तो अपने 8 वी पास चमचे को भी संपादक की कुर्सी पर बैठा सकता है।

    पत्रकार

    ये अखबार की रीढ़ की हड्डी होते है। इनकी खबरों के दम पर अखबार की साख रहती है और बाजार में वह टिका रहता हैं। अखबार में इनकी अलग-अलग बीट होती है। जैसे क्राइम, प्रशासन, खेल, धर्म, नगर निगम, राजनीतिक व अन्य। ऑफिस मीटिंग के बाद सुबह से शाम तक इन्हें अपनी-अपनी बीटों में रहना होता है और शाम को ऑफिस आकर इन्हें खुद अपनी-अपनी खबरें बनाकर देनी होती हैं। ये बात और है कि मीटिंग के बाद कुछ पत्रकार घर जाकर सो जाते है और शाम को ऑफिस आकर टेलीफोनिक पत्रकारिता को अंजाम देते हैं।

    ब्यूरो प्रमुख

    यदि अखबार मालिक किसी शहर या तहसील में खुद के खर्च से ऑफिस मेंटेन कर वहाँ की खबरों के लिए स्थानीय पेज निकालता है तो इस स्थान पर बैठाए गए पत्रकार को ब्यूरो प्रमुख कहते है। ब्यूरो प्रमुख को खबरें भी लिखनी होती हैं।

    कंप्यूटर आपरेटर

    ये पत्रकारों की लिखी खबर या संपादक द्वारा लिखी संपादकीय या फिर विज्ञापन को सही डिजाइन देकर संपादक द्वारा अखबार में बताए स्थान पर लगाते हैं।

    मार्केटिंग

    इन्हें अखबार के लिए विज्ञापन लाना होता हैं। खबरें लिखने की वजह से पत्रकार सरस्वती पुत्र कहलाता है; लेकिन ये अखबार के लिए विज्ञापन के तौर पर धन लाते हैं इसलिए ये लक्ष्मीपुत्र कहलाते हैं। चूंकि लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू होता हैं। जिस पर किसी मार्केटिंग वाले के उल्लू रहने पर भी ये मालिक के लाड़ले के रहते है।

    फोटो-वीडियो ग्राफर

    अखबार व चैनल मालिक की ओर से इन्हें किसी भी प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछने के कोई अधिकार नहीं रहते हैं। सवाल पूछने का अधिकार उनके साथ आए सिर्फ पत्रकारों को ही रहता हैं। इनका मूल कार्य घटना-दुर्घटना, मेले-ठेले व अन्य सभी कार्यक्रमों को अपने कैमरे में कैद कर संबंधित बीट के पत्रकारों को जानकारी देना भर रहती हैं। इनके फ़ोटो तक पर केपशन पत्रकार ही देते हैं।

    हॉकर

    इनकी अखबार के लिए विशेष भूमिका होती हैं। ये कड़कती सर्दी हो, भीषण गर्मी हो या फिर मूसलाधार बारिश हो कि सारी बाधाओं को चीरते हुए सही समय पर पाठकों तक अखबार पहुचाते हैं।

    एजेंट

     (पत्रकारों में अपनी गिनती करने वाले सबसे खतरनाक प्रजाति) ये राजधानी या बाहर के किसी शहर के 100-50 अखबार की एजेंसी ले आते हैं। इनका मूल काम कुछ और होता है। लेकिन अपने धंधे की छतरी के तौर पर ये अखबार या चैनल की एजेंसी ले आते हैं। चूंकि मालिक को इनसे धन प्राप्त होता है इसलिए इनके अनुरोध पर वे इन्हें एजेंट का नहीं बल्कि ब्यूरो प्रमुख का कार्ड बनाकर दे देते हैं जबकि ज्यादातर एजेंटों को पत्रकारिता के प शब्द की जानकारी भी नहीं होती हैं।

    प्रेसक्लब अध्यक्ष व उसकी पूरी कार्यकारिणी

    इसके लिए पत्रकार होना जरूरी नहीं हैं लेकिन इसके लिए प्रेसक्लब के सदस्य व मतदाता होना बहुत जरूरी हैं। भले ही वह सदस्य व मतदाता शराब कारोबारी हो या फिर अन्य किसी धंधे में लिप्त हो। मतदान के बाद यदि वह चुन लिया जाता है तो वह अध्यक्ष व कार्यकारिणी सदस्य बन जाता हैं।

    अधिमान्य पत्रकार शासन के नियमानुसार एक सही पत्रकार ही अधिमान्य पत्रकार बन सकता हैं। मतलब उसका पत्रकारिता के अलावा कोई पेशा न हो, उसकी शिक्षा कम से कम ग्रेजुएट हो, आपराधिक रिकार्ड न हो, पत्रकारिता के रिकॉर्ड के तौर पर उसकी कम से कम 5-6 साल की खबरों की कतरने हो। वे ही अधिमान्य पत्रकार बनने के पात्र होते हैं। ये बात और है कि जनसंपर्क/मंत्री अपने अधिकारों का प्रयोग कर किसी को भी अधिमान्य पत्रकार का कार्ड जारी कर सकते हैं। इसके पहले प्रदेश में 15 साल तक भाजपा की सरकार रही थी। जिस पर प्रदेश के सैकड़ों चाटुकार / दलालों के पास भी अधिमान्य पत्रकार के कार्ड हैं।

  • सरकार का आदेश बस इन 17 सेवाओं पर ही मिलेगी छूट … जानिये कौन-कौन सी सेवा रहेगी आपके लिए उपलब्ध

    सरकार का आदेश बस इन 17 सेवाओं पर ही मिलेगी छूट … जानिये कौन-कौन सी सेवा रहेगी आपके लिए उपलब्ध

    क्या-क्या कर सकेंगे आप ,किस कार्य के लिए मिलेगी छूट

    1. स्वास्थ्य सेवाएं। इसमें AYUSH सेवाएं फँक्शनल रहेंगी।
    2. सभी तरह की कृषि, हॉर्टिकल्टर गतिविधियां की जा सकेंगी।
    3. मछलीपालन से जुड़ी गतिविधियों (मरीन या इनलैंड) का संचालन किया जा सकेगा।
    4. चाय, कॉफी, रबड़ आदि का प्लांटेशन किया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए 50 फीसदी वर्करों के साथ काम की इजाजत।
    5. पशुपालन किया जा सकेगा।
    6. वित्तीय क्षेत्र का कामकाज जारी रहेगा।
    7. सोशल सेक्टर का कामकाज जारी रहेगा।
    8. पेट्रोल पंप जैसी पब्लिक यूटिलिटीज सेवाओं को छूट
    9. सामान की ढुलाई का काम चलता रहेगा।
    10. मनरेगा से जुड़ी गतिविधियों को इजाजत। लेकिन सोशल डिस्टैंसिंग और फेस मास्क के साथ होगा काम।
    11. जरूरी सामान की सप्लाई को छूट
    12. कमर्शल व प्राइवेट कंपनियों को काम करने की छूट
    13. इंडस्ट्रीज/औद्योगिक इकाइयां(सरकारी व निजी) को काम की इजाजत।
    14. कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम किए जा सकेंगे।
    15. मेडिकल व वेटिनरी केयर और जरूरी सामान की खरीदारी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए प्राइवेट वीइकल का इस्तामल किया जा सकेगा। इसके अलावा, जो लोग छूट प्राप्त कैटिगरी में काम के सिलसिले में बाहर जा रहे हैं उनको इजाजत होगी।
    16. केंद्र, राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों के सभी दफ्तर खुले रहेंगे।

    17. ऑनलाइन टीचिंग, डिस्टेंस लर्निंग की बढ़ावा देने की बात कही गई. ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का नियम सही से पालन हो।

  • इंदौर में कोरोना से पुलिस इंस्पेक्टर ने तोड़ा दम, अरविंदो अस्पताल में चल रहा था इलाज

    इंदौर में कोरोना से पुलिस इंस्पेक्टर ने तोड़ा दम, अरविंदो अस्पताल में चल रहा था इलाज

     मध्यप्रदेश। इंदौर में कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमित पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई। देवेंद्र चंद्रवंशी जूनी इंदौर थाना प्रभारी भी रहे।

    कोरोना पॉजीटिव रिपोर्ट आने के बाद अरविंदो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अरविंदो अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार देर रात उन्होंने दम तोड़ा है।

    कोरोना से थाना प्रभारी की मौत से पुलिस कर्मियों को बड़ा सदमा लगा है। बता दें मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा इंदौर जिला कोरोना से प्रभावित है। यहां संक्रमित मरीजों की संख्या 891 पहुंच गई है।

    वहीं इंदौर में 48 लोगों ने दम तोड़ा है। मध्यप्रदेश में संक्रमितों की संख्या 1400 के पार पहुंच गया है।

  • ई- कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं, केवल जरूरी सामान कर सकती हैं डिलीवर

    ई- कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं, केवल जरूरी सामान कर सकती हैं डिलीवर

    दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं मिलेगी. कंपनियां केवल जरूरी सामान डिलीवर कर सकती हैं।

    गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा गैर-जरूरी सामान की सप्लाई पर रोक लगा दी है।

  • भारत में सूचना प्रसारण मंत्रालय जाली पत्रकारों एवं फर्ज़ी चैनलों पर शिकंजा कसने को तैयार, फर्ज़ी पत्रकारों के खिलाफ पूरे देश में होगी एफआईआर

    फर्ज़ी पत्रकारों के खिलाफ पूरे देश में होगी एफआईआर..

    नई दिल्ली। भारत में सूचना प्रसारण मंत्रालय जाली पत्रकारों एवं फर्ज़ी चैनलों पर शिकंजा कसने को तैयार है जो लोग वगैर आर.एन.आई के अखबार या चैनल चला रहे हैं उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सूचना एवं प्रसारणमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश भर में जितने भी लोग प्रेस आई○डी○कार्ड लेकर घुम रहे हैं या फर्ज़ी चैनल चला रहे हैं ऐसे लोगों की तत्काल जांच शुरू होगी। इस मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आगे मंत्री जी ने कहा कि कुछ दोषी लोगों के कारण अच्छे, सच्चे एवं ईमानदार पत्रकारों के छवि खराब हो रही है, एवं उनके कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही है।

    इस संबंध में सामने आई एक घटना…

    सूरजपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवेश गोयल ने थाना सूरजपुर में शिकायत किया है कि 17 अप्रैल 2020 को सूरजपुर निवासी संदीप अगरिया एवं सौरभ साहू के द्वारा खुद को पत्रकार बताते हुए रकम उगाही कर था नहीं दिए जाने पर किसी मामले में फसांने की धमकी दी गई। जिस पर कोतवाली पुलिस ने लिखित आवेदन पर अपराध क्रमांक 150/20 धारा 419, 420, 34 भादवि के तहत् मामला पंजीबद्व कर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने फर्जी पत्रकार बनकर अवैध उगाही करने वाले दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

    विवेचना के दौरान कोतवाली पुलिस ने अपने आप को पत्रकार बताकर अवैध उगाही करने वाले मेन रोड़ सूरजपुर निवासी 27 वर्षीय सौरभ साहू पिता प्रदुम्मन साहू एवं बड़कापारा निवासी संदीप अगरिया पिता प्यारेलाल अगरिया को तलब कर दोनों से पत्रकार होनेे के संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया तब दोनों ने पत्रकार व रिपोर्टर तथा अन्य किसी पद पर कार्यरत् होने संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये जाने पर पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को उपरोक्त धारा के तहत् विधिवत् गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया है।

    इस कार्यवाही में थाना प्रभारी सूरजपुर धर्मानंद शुक्ला, एसआई हिम्मत सिंह शेखावत, रश्मि सिंह, एएसआई हीरालाल साहू, आरक्षक राजकुमार नायक, दरश देवांगन, शिवकुमार, रावेन्द्र पाल व सुरेश साहू सक्रिय रहे।


     

    पूरे देश में कुछ पैसा लेकर जाली प्रेस आईडी बांटने एवं जाली पत्रकार नियुक्ति करने तथा प्रेस के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने का धंधा चल रहा है। जिस पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है।

     

    इस संबंध में सभी राज्यों के प्रेस सूचना मंत्रालय को निर्देश जारी कर दिया गया है। आगे उन्होंने बताया कि जो अखबार/पत्रिका भारत सरकार के आर○एन○आई○ द्वारा रजिस्टर्ड हो या जो टीवी/रेडियो सूचना प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड हो उसी के द्वारा पत्रकार/संवाददाता की नियुक्ति हो सकती है व केवल उसका सम्पादक ही प्रेस कार्ड जारी कर सकता है। न्यूज पोर्टल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन्टरनेट पर चल रहे न्यूज पोर्टल के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान सूचना प्रसारण मंत्रालय में नहीं है एवं कोई भी न्यूज पोर्टल एवं केबल (डिस ) टीवी पर चल रहे समाचार चैनल किसी भी तरह के पत्रकार की नियुक्ति नहीं कर सकता है। और न ही प्रेस आई○डी○ जारी कर सकता है यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अवैध है एवं उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी सुनिश्चित है।

    “अगर कोई वगैर RNI के पोर्टल या अखबार चलाते मिला तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी और ऐसे व्यक्ति को हरगिज़ माफ नहीं किया जायेगा।” — सूचना एवं प्रसारणमंत्री भारत सरकार.

  • अब कोरबा में होगा कोरोना की जांच …प्रतिदिन 25 से 30 की जांच … कोरबा को मिले 2000 रैपिड किट

    अब कोरबा में होगा कोरोना की जांच …प्रतिदिन 25 से 30 की जांच … कोरबा को मिले 2000 रैपिड किट

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक सिंह ने रेड जोन कटघोरा का निरीक्षण किया । कोरबा कलेक्टर को 2000 रैपिड किट उपलब्ध कराया । इस दौरान कोरबा कलेक्टर किरण कौशल ने कटघोरा की ताजा स्थिति से अवगत कराया। अब प्रतिदिन 20 से 25 टेस्ट कोरबा में ही होंगे। कोरोना की जांच तेज करने सरकार ने यह कदम उठाया ।

  • कोटा में फंसे छत्तीसगढ़ के सैकड़ों बच्चों की वापसी को लेकर CM भूपेश गंभीर, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुमोदन का इंतजार

    कोटा में फंसे छत्तीसगढ़ के सैकड़ों बच्चों की वापसी को लेकर CM भूपेश गंभीर, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुमोदन का इंतजार

    रायपुर। राजस्थान के कोटा में प्रदेश के बच्चे अध्ययनरत हैं। इन बच्चों की वापसी को लेकर परिजन परेशान हैं, वहीं CM भूपेश बघेल भी इस मसले को पूरी संवेदनशीलता से देख रहे हैं।राज्य सरकार ने इस मसले को लेकर कोटा जिला प्रशासन से भी जानकारी ली है। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मसले को लेकर संपर्क में हैं।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन बच्चों की वापसी जल्द और सुरक्षित तरीक़े से सुनिश्चित कराने की क़वायद में हैं। कोविड 19 संक्रमण के इस समय में राज्यों के बीच यात्री परिवहन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति जरुरी है। खबरें हैं कि मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास राज्य सरकार ने भेज दिया है और अब राज्य सरकार को अनुमोदन का इंतज़ार है।

    उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया

    “हम पूरी संवेदनशीलता से उन बच्चों को लाने की क़वायद में जुटे हैं.. हमें केंद्रीय गृह मंत्रालय से दिशानिर्देश और अनुमोदन का इंतज़ार है”

  • साम्प्रदायिक और भड़काऊ पोस्ट करने वाला गिरफ्तार…फेसबुक पर एक्ट्रेस की फ़ोटो लगाकर कर रहा था विवादित पोस्ट, निशा जिंदल के नाम से फर्जी आईडी बनाकर लगातार कर रहा था विवादित पोस्ट..

    साम्प्रदायिक और भड़काऊ पोस्ट करने वाला गिरफ्तार…फेसबुक पर एक्ट्रेस की फ़ोटो लगाकर कर रहा था विवादित पोस्ट, निशा जिंदल के नाम से फर्जी आईडी बनाकर लगातार कर रहा था विवादित पोस्ट..

    रायपुर। रायपुर पुलिस ने जिस रवि पुजार को युवती की तस्वीर वाली निशा ज़िंदाल की आईडी बनाकर लोगों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्यता बढ़ाने के आरोप में गिरफ़्तार किया है, उसे लेकर पुलिस को कई दिलचस्प जानकारियां मिल रही हैं।
    11 बरसे से इंजीनियरिंग की सेमेस्टर पढाई में पासिंग मार्क को तरस रहे रवि पुजार की फ़र्ज़ी आईडी में दस हज़ार से ज़्यादा फ़ॉलोअर हैं। इनमें कई पुलिस अधिकारी भी हैं। पुजार ने बेहद खूबसूरत युवती निशा जिंदाल नाम के फर्जी आईडी से फेसबुक बनाया था। इस ग्रुप में लोगों ने ऐसी बातें लिखी है कि उसे खबर में नहीं लिखी जा सकती। इनमें राजधानी के कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
    राजधानी के कबीर नगर निवासी इस युवक की आईडी में फ्रेंड लिस्ट ओपन नहीं है, लेकिन यदि पोस्ट के शब्द और उस पर आए कमेंट देखें तो समझ आता है कि उसकी फ़र्ज़ी आईडी के दीवाने और उस एंजल निशा को लेकर दीवानगी किसी समुद्री तूफ़ान से भी ज़्यादा थी।
    एंजल निशा ज़िंदाल की आईडी में रवि पुजार ने खुद को एक नन्ही बच्ची की उस माँ के रुप में पेश किया, जिसे कि वह सिंगल मदर के रुप में पाल रही है। यह सिंगल मदर पोर्टफ़ोलियो और खुबसूरत चेहरे ने तूफ़ान मचाया था।

    दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि कबीर नगर एमआईजी-68, निवासी रवि पुजार फेसबुक पर नाम बदलकर साम्रदायिक मुद्दों पर लगातार भड़काऊ पोस्ट कर रहा है। आरोपी पाकिस्तानी लड़कियों के नाम पर फर्जी आईडी फेसबुक पर बनाया हुआ है और खुद को IMF, WHO, WTO जैसे संगठन का सदस्य बता रहा है। शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी आरिफ शेख ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए थाना कबीर नगर व साइबर सेल की संयुक्त टीम को निर्देश दिए गए। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को कबीर नगर के एक घर से गिरफ्तार किया गया। आरोपी युवक आईटी इंजीनियरिंग का छात्र है और पिछले 11 सालों से इंजीनियरिंग कर रहा है और अब तक के पास आउट नहीं हो पाया है।

    आरोपी रवि पुजार बहुत ही शातिर है। 2012 से फेसबुक पर निशा जिंदल और पाकिस्तानी एक्ट्रेस मिरहा पाशा के नाम पर आईडी बना रखा था। इन आईडी से ये फेसबुक पर साम्रदायिक मुद्दों पर भड़काऊ और विवादित पोस्ट किया करता था। आरोपी के फेसबुक पर 4 हजार से ज्यादा दोस्त और 10 हजार से ज्यादा फॉलोवर है। आरोपी के खिलाफ कबीर नगर थाने में धारा 153A, 295A I.P.C.  व 67C I.T. ACT  के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

     

  • कुछ दिन चिकन-मटन नहीं खाएंगे तो क्या बिगड़ जाएगा? SC में नॉनवेज पर याचिका खारिज

    कुछ दिन चिकन-मटन नहीं खाएंगे तो क्या बिगड़ जाएगा? SC में नॉनवेज पर याचिका खारिज

    असम के गुवाहाटी के रहने वाले अमित गोयल ने लॉकडाउन के दौरान चिकन और मटन को आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया था।

    दिल्ली। कोरोना वायरस (Coronavirus) के हर दिन बढ़ते मामलों की वजह से देश में लॉकडाउन (Lockdown) को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है. इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी दुकानें बंद हैं. इस बीच जो लोग अपने खाने में ज्यादातर नॉनवेज शामिल करते हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से करारा जवाब मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने चिकन-मटन को जरूरी सामान की कैटेगरी में शामिल करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर आप कुछ दिन घर पर रह लेंगे और चिकन-मटन नहीं खाएंगे, तो उससे क्या बिगड़ जाएगा?

    दरअसल, असम के गुवाहाटी के रहने वाले अमित गोयल ने चिकन और मटन को आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में कहा था कि वह ग्रोसरीज के साथ-साथ चिकन और मटन की तलाश में अपने घर से निकला था, लेकिन पुलिस ने उसे परेशान किया।

    याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि चिकन मटन को भी जरूरी खाने-पीने की चीजों में शामिल किया जाए और हर हफ्ते परिवार के किसी एक सदस्य को इसे खरीदने की अनुमति मिलनी चाहिए. ये सामान एक ही दुकान में उपलब्ध होना चाहिए, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग इन्हें खरीद सके.इस पर जस्टिस एन वी रमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्चटिस बी आर गवई की बेंच ने कहा, ‘आपने किस तरह की याचिका दायर की है. कुछ दिनों तक चिकन और मटन नहीं खाएंगे तो क्या हो जाएगा? आप बाहर निकलकर भीड़ क्यों बढ़ाना चाहते हैं? क्या आप अपनी छोटी सी जिम्मेदारी भी नहीं निभा सकते?’ कोर्ट ने ये कहते हुए याचिका खारिज कर दी।

    बता दें कि अमित गोयल ने वकील कौशिक चौधरी के माध्यम से ये याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि मौजूदा समय में लॉकडाउन के दौरान जरूरी सामान की खरीदारी को लेकर स्पष्टता नहीं है।