खरसिया। विगत कुछ महिनों से क्षेत्र में स्थित कोयला खदानों से कुछ कोलमाफियाओं द्वारा निम्न गुणवत्ता वाले कोयला का डीओ में अच्छी गुणवत्ता वाले कोयला निकाल कर एसईसीएल को नुकसान पहुंचाते हुए लाखों रूपयों की अवैध कमाई किया जा रहा है। क्षेत्र में हो रही इस तरह के कोयला की अफरा तफरी को लेकर भाजपा नेता मोनू केसरी ने आईजी बिलासपुर रेंज को पत्र लिखकर कोलमाफियाओ के विरूद्ध कार्यवाही करने की मांग की है, उक्त पत्र की प्रतिलिपि छ.ग.शासन के गृहमंत्री एवं डीजीपी को भी प्रेषित कर उच्चस्तरीय जांच करा कर कार्यवाही किये जाने की मांग की है।
विदित हो कि विगत कुछ महिनों से क्षेत्र में स्थित कोयला खदान से कोलमाफियाओं द्वारा निम्न गुणवत्ता वाले कोयला का डीओ में अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला निकाल कर लाखों रूपयों की अवैध कमाई की जा रहा है। इसी क्रम में कुछ दिनों पूर्व ही घरघोड़ा के कोलमाफिया अमित चौधरी द्वारा क्षेत्र के बिजारी मांइस घरघोड़ा से G 15 गुणवत्ता वाले कोयला का डीओ लेकर मांइस के अंदर गाड़ी भेजा गया जहां अमित चौधरी द्वारा कोयला खदान एवं कांटा में सेंटिंग कर निम्न गुणवत्ता वाले G 15 कोयले की जगह उच्च गुणवत्ता वाले G 09 कोयला लोड कराकर 10 गाड़ी कोयला ,खदान से निकाल कर परिवहन करते हुए उक्त उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को भूपदेवपुर क्षेत्र में स्थित उसके कोयला भंड़ारण क्षेत्र में खाली कर एसईसीएल को राजस्व की हानि पहुंचाई गई है। वहीं निम्न स्तर के डीओ के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कोयला लेकर मोटी रकम की कमाई की गई है। कोल माफिया के इस कार्य मे बिजारी कोल मांइस के कर्मचारियों की भी मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसलिये क्षेत्र के कोल माफियाओं के कोल परिवहन के कार्यो का उच्चस्तरीय जांच किसी निष्पक्ष एवं ईमानदार उच्चाधिकारी से कराते हुए दोषी कोल माफियाओं के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। भाजपा नेता मोनू केशरी ने स्थानीय पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कोयले के इस काले खेल में स्थानीय पुलिस भी मिली हुई है, क्योंकि स्थानीय पुलिस को जानकारी होते हुए भी इस सम्बन्ध में कोई कारवाई नहीं की जाती है।
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कोल माफियाओं द्वारा कोयला परिवहन में किये जा रहे अफरा तफरी को लेकर भाजपा नेता मोनू केसरी ने आईजी को लिखा पत्र..
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चपले कॉलेज का राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का चतुर्थ दिवस…
खरसिया। शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ से संबंध शासकीय नवीन महाविद्यालय चपले के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन ग्राम पंचायत खैरपाली में दिनांक 27.11.2024 से 3.12.2024 तक हो रहा है। आज शिविर के चतुर्थ दिवस में स्वयंसेवकों ने प्रातः 5:30 बजे पी.टी.और योगा के साथ शुभारंभ किया। कार्यक्रम अधिकारी प्रो.एम एल पटेल सर, प्रभारी प्राचार्य प्रो.जी.एस.राठिया और स्वयंसेवकों द्वारा ग्राम खैरपाली बस्ती में प्रभात फेरी निकाली गई।
शासकीय माध्यमिक विद्यालय खैरपाली के प्रांगण की साफ सफाई की गई, हैंडपंप से लगे गंदगी की साफ सफाई की गई और कैंपस के गड्ढों को भरा गया। कार्यक्रम समन्वयक आदरणीय डॉ. एस. के. एक्का राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई शहीद नंदकुमार पटेल वि.वि.रायगढ़ का अपने टीम सहित आगमन हुआ। डॉ.एक्का जी द्वारा निरीक्षण किया गया साथ ही स्वयंसेवकाें को अपने रा.से.यो. में किए गए कार्यों से अवगत कराते हुए प्रेरक गीत एवं अपने व्यक्तव्य से उन्हें ओज एवं ऊर्जा से भर दिया।
द्वितीय सत्र में भोजन पश्चात बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन हुआ।कार्यक्रम का सफल मंच संचालन स्वयंसेवक रंजिता सारथी ने किया। मुख्य वक्ता श्री डी. एल.पटेल जी द्वारा स्वयं सेवकों को निष्पक्ष मतदान हेतु जागरूक करते हुए देश के विकास में युवाओं के योगदान पर ओजपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। अगली कड़ी में श्री एस. आर. यादव जी द्वारा शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर विचार अभिव्यक्त करते हुए जीवन में लक्ष्य निर्धारण हेतु स्वयंसेवकों को प्रेरित किया गया इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश तिवारी जी द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से दैनिक जीवन में होने वाले सकारात्मक परिवर्तन पर अपने अमूल्य विचारों से स्वयंसेवकों को अवगत कराया गया। श्री एस. डी. डनसेना एवं जी. एल.चेरवा सर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में रा.से.यो.सहायक कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्राची थवाईत द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवक अमन पटैल,वेद प्रकाश एवं साथी का दैनिक कार्य में विशेष योगदान रहा। सांयकाल में रानी दुर्गावती दल की स्वयंसेवक एलिशिबा पूरती द्वारा तृतीय दिवस का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। आज के कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रो. एस.के.मेहर, आर.के.लहरे, श्रीमति छाया सिदार, श्रीमति संगीता सिदार और अक्षय सिदार सर उपस्थित रहे और अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया। -

राज्य शासन द्वारा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंताओं/ सहायक अभियंताओं के पदस्थापना सम्बन्धी आदेश…
राज्य शासन द्वारा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंताओं/ सहायक अभियंताओं के पदस्थापना सम्बन्धी आदेश प्रसारित किए गए हैं।




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चीन को झटका, भारतीय कंपनियों की मौज, सरकार देगी 5 अरब डॉलर तक का ‘इनाम…
चाइनीज कंपनियों से रिश्ते खत्म करेगा एपल, हो रही भारतीय फर्म से नाता जोड़ने की तैयारी।
Apple पूरी तरह से भारतीय बनने की तैयारी कर रहा है।
एपल चाइनीज फर्म से नाता तोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है और भारतीय टेक फर्म से रिश्ते जोड़ने की तैयारी चल रही है।
Apple ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस (EMS) कंपनियों से कंपोनेंट्स सोर्स करने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू की है।
एपल ने Dixon Tech, Amber Enterprises जैसी 40 से अधिक भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत की है।
इसके अलावा HCLTech, Wipro और Motherson Group जैसी कंपनियों को भी शामिल किया गया है।
भारत सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पुर्जों के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 5 अरब डॉलर तक का प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य उद्योग को मजबूत करना और चीन से आयात पर निर्भरता को कम करना है।
■ पिछले छह सालों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन दोगुने से ज्यादा बढ़कर 2024 में 115 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसमें Apple और Samsung जैसी वैश्विक कंपनियों की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी का बड़ा योगदान है। भारत अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा स्मार्टफोन सप्लायर बन गया है।
■ यह योजना अगले 2-3 महीनों में लॉन्च की जा सकती है। इसमें वैश्विक या स्थानीय कंपनियों को 4-5 अरब डॉलर तक का प्रोत्साहन देने की उम्मीद है।
■ भारत सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय द्वारा तैयार की गई योजना के तहत उन पुर्जों की पहचान कर ली गई है, जिन्हें प्रोत्साहन मिलेगा।
■ भारत का लक्ष्य 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाना है, जिसमें 150 अरब डॉलर के पुर्जों का निर्माण शामिल है। वित्त वर्ष 2024 में भारत ने 89.8 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उपकरण और इलेक्ट्रिकल उत्पादों का आयात किया, जिसमें से आधे से अधिक चीन और हांगकांग से मंगाए गए।
■ नई योजना प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के प्रोडक्शन को प्रोत्साहित करेगी, जिससे घरेलू वैल्यू एडिसन में सुधार होगा और अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए स्थानीय सप्लाई चेन्स को मजबूत किया जा सकेगा.
भारत के सेल्यूलर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के प्रमुख पंकज मोहिन्द्रू ने कहा, “यह योजना ऐसे समय में आ रही है जब कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, जिससे हमें इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन को ग्लोबल लेवल पर ले जाने में मदद मिलेगी.” -

टेंशन खत्म! बिना नेटवर्क के कर पाएंगे कॉल, मैसेज और UPI पेमेंट; BSNL ने किया कमाल…
नई दिल्ली। टैरिफ में बढ़ोत्तरी के बाद से बीएसएनएल के दिन बदल रहे हैं। सरकारी कंपनी देश में लगातार अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। हाल ही में दूरसंचार विभाग (DoT) ने BSNL डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सर्विस अनाउंस की है, जो बिना किसी टेलीकॉम नेटवर्क कनेक्टिविटी के दूरदराज इलाकों में कॉल, मैसेज और यूपीआई पेमेंट करने की सुविधा देती है। यह भारत में विकसित अपनी तरह की पहली स्वदेशी टेक्नोलॉजी है।
बीएसएनएल के अलावा दूसरी टेलीकॉम कंपनियां भी इस तरह के समाधानों पर काम कर रही हैं। साथ ही एलन मस्क की स्टारलिंक और अमेजन की कुइपर भी सैटेलाइट इंटरनेट लॉन्च करने की तैयारी में है। बीएसएनएल की सैटेलाइट टू-डिवाइस सर्विस क्या है और कैसे काम करती है। आइए जानते हैं।एक्स के जरिए सर्विस की घोषणा करते हुए DoT ने कहा कि BSNL ने भारत की पहली सैटेलाइट-टू-डिवाइस सर्विस शुरू की है, जो बिना किसी रुकावट के भारत के दूरदराज इलाकों में पहुंचती है। इस सर्विस के लिए BSNL ने Viasat के साथ साझेदारी की है। यह अमेरिकी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है।
बता दें, इस साल हुए इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में Viasat और BSNL ने इसके लिए बनाए गए कस्टम Android डिवाइस का इस्तेमाल करके दो-तरफा मैसेजिंग और SoS मैसेजिंग का सफलतापूर्वक प्रदर्शन भी किया था।मिलेंगे ढेरों बेनिफिट
सैटेलाइट डायरेक्ट-टू-डिवाइस सर्विस मिलने के बाद यूजर्स को टावर नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें सर्विस सैटेलाइट के जरिये मिलेगी। अगर आप किसी ऐसे इलाके में होंगे, जहां नेटवर्क नहीं पहुंचते हैं तो इस स्थिति में सर्विस की मदद से आप कॉल, मैसेज और यहां तक कि यूपीआई का इस्तेमाल भी कर पाएंगे। सैटेलाइट के जरिये दूरदराज इलाकों में मोबाइल टावर नेटवर्क पर निर्भर रहने की जरूरत खत्म हो जाएगी।आम आदमी को कब मिलेगी सर्विस
फिलहाल, सर्विस की उपलब्धता और कीमतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए पूरी सेटअप प्रक्रिया महंगी और मुश्किल हो सकती है। साथ ही इसमें खराब मौसम होने की स्थिति में सिग्नल बाधित भी हो सकते हैं। अपने फेसबुक पेज पर बीएसएनएल ने कहा कि, यह सर्विस इमरजेंसी में किसी से संपर्क करने या यूपीआई से पेमेंट करने के लिए अलग-थलग क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है।
एलन मस्क की भी तैयारीएलन मस्क भी भारत में अपनी सैटेलाइट सर्विस लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मस्क की स्टारलिंक ने भारत की सिक्योरिटी और प्राइवेसी से जुड़ी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। जिसके बाद स्टारलिंक का भारत में आने का रास्ता पहले से साफ हो गया है। साथ में अमेजन की कुइपर के लॉन्च होने की भी खबरें हैं। हालांकि दोनों ही कंपनियां कब तक सर्विस लॉन्च करेंगी। इस बार में अभी कुछ भी कहना मुश्किल हैं।
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महिला रेंजर ने वन मंडलाधिकारी पर शारिरिक संबंध के लिए दबाब बनाने का लगाया आरोप, महिला रेंजर ने सीएम समेत कई मंत्री, केंद्रीय मंत्रियों सहित, ष्ठढ्ढत्र छत्तीसगढ़ को भेजी शिकायत…
जशपुर। जिले से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है जहां जशपुर डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय पर महिला रेंजर ने संगीन आरोप लगाये हैं। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि जशपुर वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय वर्ष 2022 में शासकीय कार्यभार के दौरान उन्हें कुनकुरी के विश्राम गृह लेकर गए थे। विश्राम ग्रह में बोले कि तुम मुझे अच्छी लगती हो इस दौरान शारिरिक शोषण करने का प्रयास किया गया। मेरे मना करने पर उपाध्याय ने मेरे विरुद्ध विधायक यूडी मिंज से झूठा शिकायत किया गया। इस बात की जानकारी जब मुझे मिली तो मैं तत्कालीन विधायक यूडी मिंज से मिली और वस्तुस्थिति से उनको अवगत करायी। इसके बाद भी वन मंडलाधिकारी जशपुर उपाध्याय द्वारा मुझे परेशान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ जिला जशपुर के पदाधिकारियों से 21 मार्च 2023 को मेरे खिलाफ झूठा शिकायत करवाया गया। वन कर्मचारियों के विरुद्ध तानाशाह रवैया अपनाने एवं कर्मचारियों को परेशान करने का मुझ पर आरोप लगाते हुए अन्यंत्र स्थान पर स्थान्तरण करने का मांग किया गया। मैं इससे व्यथित होकर स्वत: आवेदन प्रस्तुत कर अपना स्थान्तरण मनोरा करा ली। जिसके बाद भी मुझे उपाध्याय शासकीय भ्रमण के नाम पर अपने साथ अपनी निजी वाहन इनोवा में बैठाकर लोदाम क्षेत्र की ओर ले गए और मेरे साथ गलत हरकत करने लगे मैं बीच बचाव की जिसके कारण हाथापाई भी हुई है। मुझे इसकी किसी से शिकायत करने पर सस्पेंड करने की धमकी दी जाती थी मेरे खिलाफ उपाध्याय ने मुख्य वन संरक्षक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख नवा रायपुर से झूठा शिकायत किया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को शिकायत पीडि़ता महिला रेंजर ने इसकी लिखित शिकायत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल रायपुर से की है जिसमे उन्होंने अपने साथ हुए घटनाक्रम का जिक्र भी किया है। मामले को लेकर जब हमने जशपुर ष्ठस्नह्र जितेंद्र उपाध्याय से फोन पर संपर्क करना चाहा तो उनका फोन काटना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
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स्थानांतरण के बाद हाई कोर्ट से स्टे लाने वालों पर होगी बड़ी कार्रवाई, निलंबन एवं ब्रेक इन सर्विस किया जाएगा, स्टे का फायदा सबसे ज्यादा पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा उठाया जाता है…
शासकीय सेवकों के पदस्थापना/स्थानांतरण के फलस्वरूप नवीन पदस्थापना स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने संबंध में अक्सर किए जाने वाले हीला हवाला के कारण प्रभावित होने वाले कार्यों के मद्देनजर छत्तीसगढ़ सरकार ने कठोर कदम उठाए हैं। शासन ने इस हेतु नियम-निर्देश जारी किए हैं जिनका अनिवार्यत: पालन सुनिश्चित करना होगा।
राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से समय-समय पर अधिकारियों / कर्मचारियों का अन्यत्र पदस्थापना अथवा स्थानांतरित करते हुए अन्य कार्यालय में नवीन पदस्थापना की जाती है। यह बात देखने में आया है कि अन्यत्र पदस्थापना अथवा स्थानांतरण के फलस्वरूप प्रभावित अधिकारी/कर्मचारी अपने नवीन पदस्थापना स्थान पर उपस्थित होने के बजाय उक्त स्थानांतरण आदेश के विरूद्ध माननीय न्यायालय में याचिका दायर की जाती है। स्थानांतरण के ऐसे कई मामलों में माननीय न्यायालय द्वारा संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी को स्थगन देते हैं। प्रायः उस अवधि में संबंधित अधिकारी/कर्मचारी अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहते हैं। साथ ही उस अवधि के लिए वेतन, भत्ते की मांग करते हैं, जब वे अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहते हैं। स्थानांतरण एक सतत् प्रक्रिया है। इसके पीछे शासन की यह मंशा रहती है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी योजनायें सुचारू रूप से संचालित हो सके, तथा शासकीय अधिकारियों / कर्मचारियों के अभाव में योजनाएं प्रभावित न हो। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि जब कोई व्यक्ति शासकीय सेवा में नियोजित हो जाता है तो स्थानांतरण की प्रक्रिया सेवा की शर्तों में अंतर्निहित हो जाती है, जब तक कि सेवा की शर्तों को नियंत्रित करने वाले कुछ प्रावधानों के तहत इसे विशेष रूप से प्रतिबंधित नहीं किया जाता है। सेवा की ऐसी शर्तों और नियमों के तहत, किसी कर्मचारी को अपने वर्तमान पदस्थापना स्थान से भारमुक्त होने के बाद अनुपस्थित रहने या स्थानांतरण के फलस्वरूप नवीन पदस्थापना स्थान पर उपस्थित होने से इनकार करने का कोई अधिकार नहीं रह जाता है।
यद्यपि अपने स्थानांतरण से व्यथित शासकीय सेवक को स्थानांतरित स्थान पर उपस्थित होने तथा स्थानांतरण के विरूद्ध अपनी शिकायतों के निराकरण के लिए नियमों के तहत् उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने का पूरा अधिकार है।
0 उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए निम्नानुसार निर्देश प्रसारित किए जाते हैं :-
छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी निर्देश में कहा है कि स्थानांतरित किए गए शासकीय सेवक को स्थानांतरण आदेश जारी होने के 10 दिवस के भीतर कार्यमुक्त किया जाए। यदि संबंधित शासकीय सेवक निर्धारित समयावधि में कार्यमुक्त नहीं होता है तो उसे सक्ष्म अधिकारी द्वारा एकपक्षीय भारमुक्त करने के आदेश दिए जाएं तथा स्थानांतरण आदेश क्रियान्वित हुआ माना जाए। यदि शासकीय सेवक द्वारा स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावे।
(2) शासकीय सेवकों द्वारा 07 दिवस के भीतर स्थानांतरण आदेश का पालन न किए जाने की स्थिति में संबंधित शासकीय सेवक के विरूद्ध निलम्बन की कार्यवाही की जाए और अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित व्यक्ति के विरूद्ध “ब्रेक-इन-सर्विस” की कार्यवाही की जाए।
(3) स्थानांतरित शासकीय सेवक यदि 07 दिनों से अधिक अवधि के लिए लघुकृत अवकाश लेता है तो उसे मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा जाए। यदि मेडिकल बोर्ड द्वारा अनुशंसा नहीं की जाती है अथवा शासकीय सेवक अन्य अवकाश के लिए आवेदन करता है या अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहता है तो ऐसी अवधि को अनाधिकृत अनुपस्थिति मानकर इसे “डाईज-नॉन” किया जाए।
(4) स्थानांतरित किए गए शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय से ही स्वीकृत किया जाएगा।


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आरओबी के टेंडर के बाद चुप बैठा सेतु विभाग, सेतु विभाग ने करीब एक साल पहले किया था खरसिया आरओबी का टेंडर…
रायगढ़ जिले में ऐसे कई काम हैं जो एक साल से रुके पड़े हैं। इनमें से एक खरसिया रेल ओवरब्रिज भी है। टेंडर होने को करीब एक साल होने जा रहा है। अभी तक विभाग ने मंजूरी ही नहीं दी है, ताकि एग्रीमेंट हो सके। इस वजह से खरसिया के लोग फाटक बंद होने की परेशानी से जूझ रहे हैं। एक ओर रेलवे मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए जरूरी है कि शहरों के बीच में स्थित रेलवे फाटक बंद हो जाएं और आरओबी का निर्माण हो। आरओबी नहीं बनने की वजह से लोगों को रेल लाइन पार करने के लिए ट्रेन के गुजरने का इंतजार करना पड़ता है। खरसिया में रेलवे फाटक की मांग कई सालों से लोग कर रहे हैं। जनवरी 2021 में राज्य सरकार ने इसकी स्वीकृति की घोषणा की थी।
सर्वे के बाद मार्च 2021 में ही प्रपोजल इंजीनियर इन चीफ को भेजा गया था। आरओबी निर्माण में राज्य और केंद्र सरकार बराबर राशि खर्च करेंगे। दो बार इसका टेंडर कैंसल हुआ। तीसरी बार में जयपुर की भारत स्पन कंपनी ने ठेका लिया है। 14 सितंबर 2022 को आरओबी के लिए भूमिपूजन भी किया जा चुका है। इसके लिए 64.95 करोड़ मंजूर किए गए थे। ठेका कंपनी ने कम दर में टेंडर करीब 59 करोड़ में पाया है। टेंडर हुए करीब एक साल होने वाले हैं। अभी तक इसका एग्रीमेंट नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि फंड की कमी के कारण स्वीकृति रोकी गई है।
इधर चक्रधर नगर आरओबी का मांगा प्रस्ताव
स्वीकृति के लिए जो काम लटकाए जाते हैं, उनके समय पर पूरा होने की संभावना भी बहुत कम होती है। खरसिया आरओबी का जब टेंडर हुआ तो रॉ मटेरियल की कीमतें कम थीं। अब कीमतें बढ़ चुकी हैं। एक साल में हालात भी अलग हो गए हैं। खरसिया के लोगों को अब भी वैसी ही परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है। अब तो चक्रधर नगर रेल ओवरब्रिज का प्रस्ताव भी मंगवाया गया है। -

दिवालिया होगा अमेरिका! रोजाना ₹5,31,94,85,78,490 बढ़ रहा कर्ज, हर आदमी पर कितना बोझ?
दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज 36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है। पिछले 316 दिन में अमेरिका के कर्ज में रोजाना 6.3 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से अमेरिका के कर्ज में करीब 16 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।
नई दिल्ली: डॉनल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले ही देश का कर्ज रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज 36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। इस साल इसमें दो ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। पिछले 316 दिन में अमेरिका के कर्ज में रोजाना 6.3 अरब डॉलर यानी करीब 5,31,94,85,78,490 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि अमेरिका के हर नागरिक पर 108,000 डॉलर का कर्ज है। जीडीपी के परसेंटेज के रूप में डेफिसिट स्पेंडिंग दूसरे विश्व युद्ध के स्तर पर पहुंच चुका है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से अमेरिका के कर्ज में करीब 16 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। अमेरिका के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार को इतना कर्ज लेना पड़ा है।
अमेरिका का कर्ज पिछले 24 साल में छह गुना बढ़ा है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था। साल 2010 में यह 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। देश का कर्ज जीडीपी का करीब 125% है। स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका को रोज 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। साफ है कि सरकार की कमाई कम हो रही है और खर्च बढ़ गया है।
क्या होगा असर?
जानकारों का कहना है कि यह देश की इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अच्छी बात नहीं है। माना जा रहा है कि अगले कुछ साल में अमेरिका का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 200% तक पहुंच सकता है। मतलब देश का कर्ज इकॉनमी से दोगुना पहुंच जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो कर्ज चुकाते-चुकाते ही अमेरिका की इकॉनमी का दम निकल जाएगा। इससे सरकार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च से ज्यादा पैसा ब्याज चुकाने में देना होगा। चिंता की बात यह है कि अमेरिका का कर्ज ऐसे समय बढ़ रहा है जब देश की इकॉनमी अच्छी स्थिति में है। अमूमन जब इकॉनमी में कमजोरी आती है तो सरकार खर्च बढ़ाती है ताकि ग्रोथ को हवा दी जा सके।बढ़ते कर्ज से देश में एक बार फिर शटडाउन की नौबत आ सकती है। कर्ज को लेकर अक्सर दोनों पक्षों यानी रिपलिकन्स और डेमोक्रेट्स में विवाद रहता है। मगर सच्चाई यह है कि दोनों दलों के कार्यकाल में देश का कर्ज बढ़ा है। देश की क्रेडिट रेटिंग पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। पिछले साल अगस्त में फिच ने अमेरिका के सॉवरेन डेट की रेटिंग AA+ से घटाकर AAA कर दी थी। मूडीज ने भी चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका की AAA में कटौती कर सकती है। पिछले साल जून में अमेरिका पहली बार डिफॉल्ट की दहलीज पर पहुंच गया था और एक बार फिर यह स्थिति बन रही है।
कैसे घटेगा खर्च?
ट्रंप ने सरकारी खर्चों में कटौती करने और सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एक नया विभाग डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशिएंसी बनाने की घोषणा की है। इसकी कमान दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क और विवेक रामास्वामी को दी गई है। मस्क ने ट्रंप के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि वह सरकारी बजट में अरबों डॉलर की बचत कर सकते हैं। उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती की बात कही है। इसमें पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग और गर्भपात अधिकार समूहों को दी जाने वाली राशि शामिल है। -

मध्यम वर्ग को संपत्ति रजिस्ट्री में बड़ी राहत, अब गाइड लाइन मूल्य पर ही लगेगा रजिस्ट्री शुल्क…
छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी प्रापर्टी की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर से सौदे की रकम अधिक होने पर भी रजिस्ट्री शुल्क गाइड लाइन दर के अनुसार ही लिया जाएगा। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से विशेषकर उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक ऋण के माध्यम से संपत्ति खरीदते हैं। पूर्व में संपत्ति की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर और सौदे की राशि में जो भी अधिक होता था, उस पर रजिस्ट्री शुल्क देना आवश्यक था। उदाहरण के लिए यदि किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख में हुआ, तो रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख पर 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपये देना पड़ता था।
इस नियम में संशोधन के बाद संपत्ति खरीदने वाले अब सौदे की रकम गाइड लाइन दर से अधिक होने पर भी वास्तविक मूल्य को अंकित कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोई रजिस्ट्री शुल्क नहीं देना होगा। 10 लाख रुपये की गाइड लाइन मूल्य वाली प्रॉपर्टी का सौदा 15 लाख में होता है, तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के 4 प्रतिशत के हिसाब से 40 हजार रुपये देय होगा। इस तरह 20 हजार रुपये की बचत होगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक ऋण प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इसके अलावा यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। केवल मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य सामान्यतः गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल का सीधा लाभ राज्य के सभी मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा क्योंकि अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार संपत्ति खरीदने के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं। बैंक लोन रजिस्ट्री पेपर में दिखाए गए सौदे के रकम के आधार पर मिलता है, लोग पंजीयन शुल्क से बचने के लिए गाइडलाइन कीमत के बराबर सौदा मूल्य दिखाते हैं। कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है। इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पायी गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ। संपत्ति का सही मूल्य रजिस्ट्री में अंकित होने से प्रभावित व्यक्ति को उसका सही मुआवजा प्राप्त हो पायेगा।