रायगढ़। सूबे के वित्त मंत्री विधायक रायगढ़ ओपी ने विधान सभा रायगढ़ के तहत आने वाले नगर निगम रायगढ़ के लिए जीवर्धन चौहान को महापौर प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अपनी दुकान पर चाय बनाते वीडियो जारी किया। महापौर का प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी आज जीवर्धन चौहान अपनी टपरी नुमा दुकान पहुंचे और चाय बनाकर बेची। सोशल मंच में जारी संदेश के साथ वीडियो जारी करते हुए ओपी ने कहा भाजपा ने चाय बेचने वाले, 29 साल से पार्टी का कार्य कर रहे जमीनी कार्यकर्ता जीवर्धन चौहान जी को प्रदेश भाजपा ने रायगढ़ महापौर प्रत्याशी बनाया है।
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निगम महापौर की ”अजीब है कहानी” कभी एक मजदूर इस सीट पर बैठता है, कभी हाउस वाईफ तो कभी किन्नर, अब क्या चाय वाला बनेगा महापौर…..!
रायगढ़। नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा होनें के बाद अब प्रत्याशियों की भी घोषणा हो चुकी है। रायगढ़ नगर निगम के सभी 48 वार्डो के साथ-साथ महापौर के नामों की घोषणा कांग्रेस भाजपा के साथ-साथ पहली बार आप पार्टी ने भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है लेकिन इस बार जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा यह भले ही जनता के हाथ में है कि वे किसको वोट देकर मेयर की सीट पर बिठाने की तैयारी कर रहे हैं पर रायगढ़ नगर निगम मेयर की सीट पर अजब-गजब कहानी जुडी हुई है।
रायगढ़ नगर निगम पहली बार 2004 में बना और इस नगर निगम में पहले मेयर के रूप में कांगे्रस के जेठूराम मनहर ने जीत हासिल करके सभी चैका दिया। जेठूराम मनहर एक कापी कारखाना में बतौर मजदूर काम करते हुए अपनी पहचान जनता के बीच बनाने में कामयाब हुए थे और अपने पहले चुनाव निर्दलीय के रूप में 1994-94 में जीत कर यह बता दिया था कि एक मजदूर भी राजनीति मैदान में जीत सकता है और उन्होंने पार्षद बनने के बाद भी अपनी मजदूरी जारी रखी थी। इसके बाद उन्हें महापौर प्रत्याशी बनाया गया तब उन्होंने मजदूरी छोड़कर राजनीति को अपना कार्यक्षेत्र बनाते हुए पहले महापौर के रूप में नगर निगम की कुर्सी में बैठने का गौरव हासिल किया।
अब हम आपको दूसरी कहानी के रूप में बता दें कि नगर निगम में रेल लाइन की दूसरी तरफ रहने वाले महेन्द्र चौहथा को जीत हासिल हुई और उन्होंने 2009 में जेठूराम मनहर को हराकर महापौर का पद हासिल किया। रायगढ़ की जनता के लिये महेन्द्र चौहथा ऐसे प्रत्याशी थे जिन्हें पहचान बनाने में वक्त लगा लेकिन भाजपा की कार्यशैली व उनकी रणनीति से पहली बार नगर निगम में भाजपा ने जीत का परचम लहराया। मजे की बात यह है कि वर्ष 2013-14 में नगर निगम में इतना बड़ा उलट फेर हुआ कि जनता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मेयर सीट पर निर्दलीय चुनाव लड रही किन्नर मधु बाई चौहान को भारी मतों से जीताते हुए सभी को चैका दिया। मेयर बनने वाली मधुबाई चौहान पहली किन्नर थे जिसने पूरे देश में चर्चा का विषय बनी।
चैथे महापौर के रूप में एक हाउस वाईफ जानकी काटजू की ताजपोशी हुई। 2019 में कांगे्रस शासनकाल के दौरान नगर निगम चुनाव में महापौर के सीधे चुनाव करवाने की बजाये पार्षदों द्वारा चुने जाने की घोषणा होनें से कांगे्रस पार्टी के ज्यादातर पार्षद जीत कर आये और इस चुनाव में भाजपा के अधिकांश बागियों ने भाजपा का खेल बिगाडा और यही कारण है कि कांगे्रस के पार्षदों की संख्या 26 होनें से जानकी काटजू को बतौर महापौर चुना गया। अब इन चारो महापौर की रोचक कहानी यह भी है कि दो महापौर उसी मोहल्ले से मिले जहां एक दूसरे के सामने उनके घर हैं तो वहीं रेल लाइन के उस पार रहने वाले महेन्द्र चौहथा तथा मधुबाई किन्नर भी रेल लाइन के दूसरी छोर रहने वाली थी वहीं अब एक बार फिर से मामला रेल लाइन के उस पार का है जहां से चाय बेचने वाले जीवर्धन चैहान को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है और मात्र एक दिन के भीतर ओपी चौधरी व उनकी टीम ने जीवर्धन को सोशल मीडिया में इतना लोकप्रिय कर दिया कि पूरे छत्तीसगढ़ ही नही बल्कि देश में जीवर्धन चौहान चाय वाले के रूप में बीजेपी के महापौर प्रत्याशी के रूप में लोकप्रिय होते जा रहे हैं।
बहरहाल देखना यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिन्हें चाय वाला के नाम से आज भी जाना जाता है और अब भाजपा ने हमेशा चौकाने वाले अंदाज में एक गरीब तबके के जमीन से जुड़े भाजपा कार्यकर्ता को महापौर प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है जो चाय बेचकर अपना जीवन यापन करता है। उसे लेकर रायगढ़ शहर की जनता उन्हें कितना समर्थन देती है यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन इतना तय है कि इस बार चाय बेचने वाले ने धमाका तो जोरदार कर दिया है। -

फिर शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, भारत और चीन के बीच बनी सहमति…
देश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने का फैसला किया।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी मंत्री वांग यी के बीच में हुई मुलाकात में यह फैसला लिया गया।
बता दें कि काफी लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद है। इसके अलावा भारत और चीन दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने पर भी सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं। -

खाकी वर्दी पर आरोप: रात भर बीच सड़क गुंडागर्दी, युवक का सिर फूटा.. जिसने पुलिस बुलाया उसके परिजनों को भेजा जेल!
रायपुर। राजधानी रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत अवंति विहार के विजय नगर चौक में तीन दिन पहले पार्किंग को लेकर हुए विवाद में पुलिस ने एकपक्ष पर कार्यवाही कर चार लोगो को जेल भेज दिया,
उधर दूसरे पक्ष की शिकायत पर अब तक कार्यवाही नहीं हुई है। बीते दिनों चार दिन पहले 24 जनवरी की रात विजय नगर चौक में कार पार्किंग को लेकर करण जायसवाल और आशुतोष मिश्रा के बीच कहासुनी हो गया था, विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों ने जमकर मारपीट हुई। आधी रात हुए हंगामे को शांत कराने कई थानों के सीएसपी दलबल के साथ पहुंचे थे। आशुतोष मिश्रा की शिकायत पर पुलिस ने चार युवको जेल भेज दिया है।
उधर दूसरे पक्ष ने भी उसी रात कार्यवाही करने आवेदन दिया था जिस पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई है। शिकायतकर्ता दिशा जायसवाल के अनुसार 24 जनवरी की रात साढ़े बजे से शुरू हुआ विवाद आधी रात तक चलता। एक पक्ष खुलेआम बीच सड़क पर गुंडागर्दी करता रहा और पुलिस बचाव कराती रही। तीन थानों के सीएसपी मौके पर डटे रहे और आधी रात अपराध दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार युवक ज्यादा उत्पात मचा रहे थे ऐसे में सुरक्षा के दृष्टि से विधानसभा थाना ले जाया गया था। पीड़िता के अनुसार पुलिस की मौजूदगी में भी भीड़ ने उन्हें मारा है। उधर खम्हारडीह थाना प्रभारी मनोज साहू ने बताया कि “दोनों पक्षों से शिकायत मिली है, एक पक्ष पर अपराध दर्ज कर चार लोगो को जेल भेजा गया है दूसरे पक्ष के शिकायत की जाँच कर कार्यवाही की जाएगी।” -

राजधानी की जेल में विदेशी कैदी ने की आत्महत्या, इस मामले में हुआ था गिरफ्तार….।
रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल में एक विदेशी नागरिक की मौत से हड़कम्प मच गया है, रायपुर की सेन्ट्रल जेल से एक बड़ी खबर सामने आई है, यहां रायपुर सेंट्रल जेल में चार साल से बंद अफ़्रीकी नागरिक पैट्रिक ने आत्महत्या कर ली है। 2021 में ड्रग केस में गिरफ्तार किए गए इस अफ़्रीकी बंदी ने जेल में खुदकुशी की है, जिससे एक बार फिर रायपुर सेंट्रल जेल विवादों के घेरे में आ गया है। इस घटना से जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया है।
इस घटना की सूचना मिलने के बाद गंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। जेल प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की उपस्थिति में घटना स्थल पर पंचनामा जारी किया गया, इस घटना से जेल प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो रहे है। यह कार्यवाही न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में की गई है। अब पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है, और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आत्महत्या का कारण क्या था और इस मामले में जेल प्रशासन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। जिससे जेल प्रशासन का दायित्व और जिम्मेदारी तय की जा सके।
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बस्तर में पास्टर का शव दफनाने के विवाद पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने कहा चिन्हाकित जगह में ही अंतिम संस्कार करने कानून बना है, लोक व्यवस्था का सिद्धांत के तहत अनुमति दी जा सकती है….
बिलासपुर। पुत्र द्वारा अपने पिता के अंतिम संस्कार हेतु सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए युगलपीठ के दोनों जजों का मत अलग लग होने पर भी संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए मुकदमे को रेफर करने से इनकार कर दिया । इसके साथ ही याचिकाकर्ता के पिता का शव कड़कापाल के कब्रिस्तान में ही दफनाने का निर्देश दिया। राज्य शासन को इसके लिए कानून व्यवस्था बनाये जाने का निर्देश भी दिया है ।
बस्तर के दरभा निवासी याचिकाकर्ता रमेश बघेल के पास्टर पिता की 7 जनवरी को मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद से याचिकाकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों ने ईसाईयों के लिए सुरक्षित जगह के बजाय उनका गांव के आम कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करने की तैयारी की थी। लेकिन, इसकी जानकारी होने पर गांव के लोगों ने विरोध कर दिया और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। गांव वालों ने दावा कि किसी ईसाई व्यक्ति को उनके गांव में दफनाया नहीं जा सकता, चाहे वह गांव का कब्रिस्तान हो या याचिकाकर्ता की अपनी निजी भूमि। जिसके बाद रमेश बघेल ने अपने पिता का शव अपनी खुद की जमीन पर दफन करने और सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता ने इसके लिए पहले स्थानीय अधिकारियों के साथ ही सरकार से सुरक्षा और मदद मांगी थी। जहां से मदद नहीं मिलने पर उन्हें हाईकोर्ट आना पड़ा। याचिका में कहा कि छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत नियम, 1999 के प्रावधानों के अनुसार मृत व्यक्ति के धर्म की रीति के अनुसार शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह उपलब्ध कराना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। शासन के वकील ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपने मृत पिता का अंतिम संस्कार गांव छिंदवाड़ा से 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नजदीकी गांव करकापाल में करता है, जहां ईसाइयों का एक अलग कब्रिस्तान है, तो कोई आपत्ति नहीं होगी।शासन का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दी थी। इसके बाद ही पुत्र ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली । सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश शर्मा ने अलग – अलग आदेश दिया । जस्टिस नागरत्ना ने कहा कोई भी व्यक्ति अपनी निजी जमीन में शव को दफना सकता है । पंचायत यदि इस पर इंकार कर रही है तो यह संविधान के विपरीत है । दूसरी ओर जस्टिस सतीश शर्मा ने कहा कि कानून बना हुआ है कि , चिन्हांकित स्थान पर ही अंतिम संस्कार होगा । लोक व्यवस्था सिद्धन्त का ध्यान रखते हुए इसकी अनुमति दी जाति है तो व्यवस्था बिगड़ जायेगी । इस तरह इस आदेश में हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन किया गया । मत भिन्नता के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्धारित जगह में ही अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी है।
नहीं किया रेफर
दोनों जजों की राय अलग अलग होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने भी संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए मुकदमे को अन्य बेच या लार्जर बेंच में रेफर करने से इनकार कर दिया। दोनों ने मिलकर एक निर्णय दिया और पुत्र को शव निर्धारित स्थल पर दफनाने की अनुमति देकर याचिका निराकृत कर दी ।राज्य शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट तुषार मेहता, प्रफुल्ल भारत , कौस्तुभ शुक्ला , रोहित शर्मा उपस्थित हुए । -

प्रधानमंत्री आवास की राशि गबन करने पर 6 लोगों के विरुद्ध की गई प्राथमिकी दर्ज….
कोरबा। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर शासन की जन कल्याणकारी प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना ग्रामीण की राशि गबन करने वाले 3 ठेकेदार- मेघनाथ विश्वकर्मा,राजाराम चौहान सिमकेंदा,लखनलाल बैगा श्यांग, प्रकाश चौहान पूर्व रोजगार सहायक श्यांग,किरण महंत पूर्व रोजगार सहायक सोल्वा, चंद्रशेखर मँझवार,करूमौहा पूर्व आवास मित्र के विरुद्ध पुलिस थाना श्यांग,कोरबा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही वित्तीय अनियमितता में शामिल दोनों रोजगार सहायकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
यह शिकायत प्राप्त हुई थी कि जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत श्यांग, सिमकेदा, एवं सोलवा में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 72 हितग्राहियों के आवास आधे अधूरे थे। आवास बने ही नहीं और 86 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत के संबंध में जिला स्तरीय जांच समिति गठित कर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार उक्त तीनों ग्रामों में स्वीकृत 72 आवासों के लिए ठेकेदार राजाराम, मेघनाथ विश्वकर्मा, लखनलाल बैगा तत्कालीन रोजगार सहायक प्रकाश चौहान,किरण महंत, तत्कालीन आवास मित्र चंद्रशेखर मँझवार के द्वारा आवास की राशि ली गई जो कि गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है,फलस्वरूप आवास निर्माण अपूर्ण स्थिति में हैं। तत्कालीन विकासखंड समन्वयक लम्बोदर कौशिक, कलेश्वर चौहान तथा तकनीकी सहायक नरेंद्र साहू के द्वारा भी पूर्ण स्तर के जिओ टैग किए गए आवासों का भौतिक सत्यापन नहीं कराया जा कर अपूर्ण आवासों का पूर्ण भुगतान कराया गया जो कि गंभीर लापरवाही प्रदर्शित करता है।
सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही की जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शासन की महत्वाकांक्षी और जनकल्याणकारी योजना है, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसमें लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जायेगी।
जनपद पंचायत सीईओ के पत्रानुसार देवानंद श्रीवास विकासखंड समन्वयक प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण जनपद पंचायत कोरबा के द्वारा उक्त 6 व्यक्तियों पर पुलिस थाना श्यांग में शासकीय राशि के गबन की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने 6 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420,409,120-बी,34 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। -

ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर सख्ती: रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध….
छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 20 जनवरी को नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन-2025 की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 4 के तहत आदेश जारी करते हुए रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। यह आदेश चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रभावशील रहेगा।
राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों द्वारा चुनाव प्रचार में लाउडस्पीकरों का अत्यधिक उपयोग शांति और जनजीवन को बाधित करता है। वाहनों और स्थायी मंचों पर लगाए गए लाउडस्पीकरों की तेज आवाज से विद्यार्थियों, रोगियों और वृद्धजनों को विशेष रूप से असुविधा होती है। इस कारण लाउडस्पीकर का विवेकपूर्ण और निर्धारित समय के भीतर उपयोग आवश्यक है।
चुनाव प्रचार हेतु प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा सकेगा। उपयोग के लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी से लिखित पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सालयों, नर्सिंग होम, न्यायालय परिसर, शासकीय कार्यालय, छात्रावास, नगर पालिका परिषद, जनपद पंचायत, बैंकों, पोस्ट ऑफिस और दूरभाष केंद्रों से 200 मीटर की दूरी के भीतर लाउडस्पीकर का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। प्रचार के लिए उपयोग किए जाने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्र मध्यम आवाज के होंगे, ताकि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों से नियमों का पालन करने की अपील की है। आदेश के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्ति और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -

बीजेपी ने नगर पालिका खरसिया के लिए वार्ड पार्षद प्रत्याशियों की सूची जारी की…
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के लिए बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा शुरु कर दी है।
इसी कड़ी में बीजेपी ने रायगढ़ जिले के नगर पालिका खरसिया के लिए वार्ड पार्षद प्रत्याशियों की सूची जारी की है। जिसमें नगर पालिका खरसिया शहर के 18 वार्डों के लिए प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया गया है।
देखिए सूची…
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Waqf: वक्फ पर JPC बैठक में जमकर बवाल, निशिकांत दुबे और कल्याण बनर्जी में हुई तीखी नोकझोंक, ओवैसी समेत 10 विपक्षी सांसद सस्पेंड…
वक्फ संशोधन बिल पर बनी जेपीसी की बैठक में एक बार फिर जमकर बवाल हो गया है। वक्फ बिल को लेकर बनाई गई संसद की संयुक्त समिति की शुक्रवार को बैठक हुई। बैठक में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पूछा कि बैठक को इतनी जल्दबाजी में क्यों बुलाया जा रहा है।
इस पर निशिकांत दुबे ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात यह हो गई कि मार्सल को बुलाना पड़ा। इसके बाद बैठक को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया। जेपीसी कमेटी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कल्याण बनर्जी-ओवैसी समेत 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए सस्पेंड कर दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब जेपीसी की बैठक में हंगामा हुआ है। इससे पहले भी इस बैठक में विवाद हो चुके हैं। वक्फ पर बनी जेपीसी की यह बैठक दो दिन तक चलेगी।
दरअसल वक्फ पर बनी जेपीसी में विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा हंगामे के पीछे का मुख्य कारण समिति के सदस्यों की ये मांग थी कि रिपोर्ट एडॉप्ट की तारीख को 31 जनवरी किया जाए। समिति की रिपोर्ट तैयार करने से पहले क्लॉज दर क्लॉज अमेंडमेंट पर चर्चा के लिए पहले 24 और 25 जनवरी की तारीख तय की गई थी, लेकिन कल गुरुवार की देर रात वो तिथि चेंज करके 27 जनवरी कर दी गई थी।समिति में विपक्षी दलों के सांसदों की ये मांग थी कि क्लॉज बाय क्लॉज के लिए बैठक 27 जनवरी की जगह 31 जनवरी कर दिया जाए। समिति के अध्यक्ष विपक्षी दलों के सांसदों की मांग के लिए तैयार नहीं थे। पहले के तय कार्यक्रम के मुताबिक आज 24 जनवरी को क्लॉज बाय क्लॉज अमेंडमेंट एडॉप्शन किया जाना तय था लेकिन आज मीरवाइज फारूक के नेतृत्व में कश्मीर के मुस्लिम स्कॉलर्स को समिति के सामने बात रखने का मौका दिया गया। ये निर्णय कल रात को ली गई थी।
कार्यवाही से बाहर आए TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि समिति की कार्यवाही एक तमाशा बन गई है। उन्होंने मांग की कि 27 जनवरी को निर्धारित बैठक को 30 जनवरी या 31 जनवरी तक के लिए टाल दिया जाए। हालंकि, भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने विपक्षी सदस्यों की आलोचना की और कहा कि उनका आचरण संसदीय परंपरा के खिलाफ है और वे बहुमत की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की ओर से लोकसभा में DMK के मुख्य सचेतक ए राजा ने 24 और 25 जनवरी की बैठक स्थगित करने की मांग की है। जगदंबिका पाल को लिखे लेटर में राजा ने कहा- “यह कहने की जरूरत नहीं है कि पटना, कोलकाता और लखनऊ में जेपीसी के दौरे 21 जनवरी को ही पूरे हो गए थे। अजीब बात यह है कि तारीखों की घोषणा बिना जेपीसी की अगली बैठक जल्दबाजी में की गई, जबकि जेपीसी पहले से ही दौरे पर थी।बता दें कि समिति के 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों में से 13 विपक्षी दलों से हैं। निचले सदन में नौ और उच्च सदन में चार सदस्य हैं। माना जा रहा है कि समिति आगामी बजट सत्र में अपनी 500 पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है। वक्फ पर बनी इस समिति ने दिल्ली में 34 बैठकें की हैं और कई राज्यों का दौरा किया है, जहां 24 से अधिक हितधारकों को बुलाया गया था।
लखनऊ में हुई बैठक करने के बाद अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा था कि 24 जनवरी को JPC की आखिरी बैठक होगी। इसके बाद वे 31 जनवरी को होने वाले बजट सत्र के दौरान संसद में रिपोर्ट पेश होगी।पाल ने कहा- पिछले 6 महीने में हमने अकेले दिल्ली में 34 बैठकें की हैं। JPC सभी चर्चाएं अच्छे माहौल में हुई हैं। मुझे उम्मीद है हमारी रिपोर्ट से लोगों को फायदा होगा।
