– ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, धार्मिक व समाजसेवी कार्याे, साम्प्रदायिक सौहार्द में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए बागपत के विपुल जैन को मिला इंटरनेशनल अवार्ड डीपीआईएएफ 2025
– विपुल जैन ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों, गुरूजनों सहित उन सभी शुभचिंतकों व सहयोगियों को दिया जिन्होंने उनको नेक कार्याे को करने के लिए जागरूक किया और हर कदम पर उनका साथ दिया
नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित डीपीआईएएफ 2025 इंटरनेशनल अवार्ड समारोह में इंटरनेशनल अवार्डी व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार विपुल जैन बागपत को डीपीआईएएफ 2025 इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। विपुल जैन को दुबई के प्रमुख समाजसेवी, शीर्ष बिजनसमेन एनएबीडी अल ऐमरेट के चेयरमैन व एएनपीएम के सीईओ डाक्टर कबीर केवी द्वारा शॉल व पटका ओढाकर व प्रतीक चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया। डीपीआईएएफ के संस्थापक कल्याणजी जाना ने कहा कि विपुल जैन को यह अवार्ड उनकी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, धार्मिक व समाजसेवी कार्याे, साम्प्रदायिक सौहार्द में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने और राष्ट्रहित में किये जा रहे कार्याे के लिए प्रदान किया गया है। बताया कि विपुल जैन एक बेहतरीन इंसान है और पूर्व में भी इंटरनेशनल और नेशनल स्तर की अनेकों संस्थाओं और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनको सम्मानित किया जा चुका है। विपुल जैन निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से लोगों को इंसाफ दिलाने और समाज की छुपी हुई प्रतिभाओं को देश व दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। विपुल जैन ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने दादा नरेन्द्र जैन, पिता सुदर्शन जैन, माता रेनु जैन, गुरूजनों सहित उन सभी समस्त शुभचिंतकों व सहयोगियों को दिया, जिन्होंने उनको नेक कार्याे को करने के लिए जागरूक किया और जरूरतमंदो की सहायता करने के लिए तन-मन-धन से हर कदम पर उनका साथ दिया। विपुल जैन ने कहा कि मेरी इस उपलब्धि में वे सभी महान लोग बराबर के साझेदार है, जिनके सहयोग, आर्शीवाद और प्रार्थनाओं से वर्ष 2023-2024 में मुझे नवजीवन प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर देश-विदेश से आयी जानी-मानी हस्तियां उपस्थित रही।
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बागपत के विपुल जैन हुए डीपीआईएएफ 2025 इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित…
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गरीबों का इलाज नहीं हो रहा…तो अपोलो एम्स को सौंप देंगे’, सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी…
सुप्रीम कोर्ट(Suprem Court) ने इंद्रप्रस्थ अपोलो(Apollo) अस्पताल की कड़ी आलोचना की है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल ने गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान नहीं की, तो इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के अधीन कर दिया जाएगा. कोर्ट ने अस्पताल को यह भी बताया कि इसे लाभ और हानि के बिना संचालित किया जाना चाहिए था, लेकिन वर्तमान में इसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 25 मार्च 2025 को स्पष्ट किया कि यदि इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में गरीबों के लिए मुफ्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं, तो वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को इसे अपने अधीन लेने का निर्देश देगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने पट्टा समझौते के उल्लंघन के मामले को गंभीरता से लिया, जिसमें इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMCL) द्वारा संचालित अस्पताल को एक तिहाई गरीब मरीजों को भर्ती करने और आउटपेशेंट डिपार्टमेंट में 40 प्रतिशत मरीजों को बिना भेदभाव मुफ्त इलाज प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
गरीब लोगों का मुफ्त में हो इलाज
पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि यह जानकारी मिली कि गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल रही हैं, तो अस्पताल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को सौंप दिया जाएगा. पीठ ने यह भी बताया कि अपोलो ग्रुप को दिल्ली के एक प्रमुख क्षेत्र में 15 एकड़ भूमि एक रुपये के प्रतीकात्मक पट्टे पर दी गई थी, और इसे ‘लाभ और हानि’ के बिना चलाने का प्रावधान था, लेकिन यह अब एक पूरी तरह से वाणिज्यिक उद्यम में बदल गया है, जहां गरीबों को इलाज प्राप्त करने में कठिनाई होती है. IMCL के वकील ने कहा कि अस्पताल एक संयुक्त उद्यम के रूप में संचालित हो रहा है, जिसमें दिल्ली सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और उसे भी इस व्यवसाय से समान लाभ मिल रहा है.मुनाफा कमा रहा अस्पताल
जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से remarked किया कि यदि दिल्ली सरकार गरीब मरीजों की सेवा करने के बजाय अस्पताल से लाभ अर्जित कर रही है, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि अस्पताल को 30 वर्षों के लिए भूमि का पट्टा दिया गया था, जो 2023 में समाप्त होने वाला था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से यह जानने के लिए कहा कि क्या इस पट्टे के समझौते को अपडेट किया गया है या नहीं.
शीर्ष अदालत IMCL द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के 22 सितंबर 2009 के आदेश को चुनौती दी गई थी. उच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि अस्पताल प्रशासन ने गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देने के समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है. अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से यह भी पूछा कि यदि पट्टा समझौता नवीनीकरण नहीं किया गया है, तो उस भूमि के संबंध में क्या कानूनी कार्रवाई की गई है. इसके अलावा, पीठ ने अस्पताल में उपलब्ध कुल बिस्तरों की संख्या और पिछले पांच वर्षों के ओपीडी मरीजों का रिकॉर्ड भी मांगा. -

PNB बैंक के नए नियम 2025: 1 अप्रैल से लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, जानें आपके लिए क्या है जरूरी
1. बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस की बढ़ी शर्तें
PNB ने अपने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस के नियम में बदलाव किया है। अब आपको अपने अकाउंट में पहले से ज्यादा राशि रखनी होगी। बैंक ने 1 अप्रैल से इस बदलाव को लागू करने की घोषणा की है। पहले जो न्यूनतम बैलेंस की शर्त कम थी, अब आपको उसमें वृद्धि करनी होगी, ताकि आपको शुल्क न देना पड़े। यदि आपने नया बैलेंस जमा नहीं किया, तो आपको अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जो कि पहले से कहीं अधिक होगा।नए न्यूनतम बैलेंस के हिसाब से:
शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम बैलेंस ₹1000 से बढ़ाकर ₹2000 किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह ₹500 से ₹1000 तक हो सकता है।इसलिए, यदि आपका बचत खाता PNB में है, तो 1 अप्रैल से अपने खाते में उचित बैलेंस रखना सुनिश्चित करें, वरना अधिक शुल्क आपको देना पड़ सकता है।
2. चार्ज में बढ़ोतरी पर ध्यान दें
PNB ने अपनी कई बैंकिंग सेवाओं के लिए शुल्क में वृद्धि की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत, यदि आप बैंक की सेवाओं का उपयोग करते हैं, जैसे कि डिमांड ड्राफ्ट, चेक बुक, या फिर अन्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, तो आपको अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। बैंक ने कहा है कि यह वृद्धि आम बैंकिंग शुल्क पर होगी, जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।
इसके अलावा, पेनल्टी चार्जेज़ भी बढ़ाए गए हैं, जैसे कि अकाउंट के न्यूनतम बैलेंस के उल्लंघन पर मिलने वाले शुल्क। इसलिए, इस बदलाव से पहले अपनी बैंकिंग जरूरतों को ठीक से समझ लें।
3. लॉकर सेवाओं में बदलाव
PNB ने अपनी लॉकर सेवाओं में भी बदलाव किया है। यदि आप बैंक के लॉकर का उपयोग करते हैं, तो 1 अप्रैल से आपको अधिक शुल्क देना होगा। लॉकर की सुविधाएं महंगी हो सकती हैं, इसलिए पहले से ही अपनी योजना पर विचार कर लें। लॉकर के प्रकार के हिसाब से शुल्क में विभिन्नता हो सकती है, जैसे छोटे, मध्यम और बड़े आकार के लॉकर पर अलग-अलग चार्ज लागू होंगे।
4. डिमांड ड्राफ्ट की फीस बढ़ी
PNB ने डिमांड ड्राफ्ट (DD) की फीस भी बढ़ा दी है। अब आपको पहले से ज्यादा राशि का भुगतान करना पड़ेगा यदि आप DD प्राप्त करते हैं या फिर जारी करते हैं। यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो नियमित रूप से इस सेवा का उपयोग करते हैं। यदि आप डिमांड ड्राफ्ट की सुविधा का लाभ लेते हैं, तो आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप नए शुल्कों से अवगत रहें और अपने बैंकिंग खर्चों का हिसाब किताब ठीक से रखें।
5. करंट अकाउंट पर शुल्क वृद्धि
PNB ने करंट अकाउंट पर भी शुल्क बढ़ा दिए हैं। विशेष रूप से व्यवसायिक उपयोग के लिए करंट अकाउंट रखने वालों को 1 अप्रैल से अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। यह शुल्क अकाउंट के संचालन से संबंधित सेवाओं, जैसे चेक बुक, चेक क्लीयरिंग, आदि, पर लागू होंगे। व्यवसायियों को यह बदलाव अपने खर्चों में जोड़कर चलना होगा।
PNB के नए नियमों का असर:
इन नए नियमों का असर उन सभी PNB ग्राहकों पर पड़ेगा, जिनका खाता इस बैंक में है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन बदलावों से बैंकिंग शुल्क में वृद्धि होने से ग्राहकों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए, PNB के सभी ग्राहकों को इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपने खातों और सेवाओं को उचित तरीके से प्रबंधित करना चाहिए।
किसे चाहिए इन बदलावों से बचने की सलाह?
बचत खाता रखने वाले – यदि आपका खाता PNB में है, तो आपके लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपने खाता में सही मात्रा में बैलेंस रखें, ताकि शुल्क से बच सकें।
लॉकर ग्राहक – अगर आप बैंक के लॉकर सेवाओं का उपयोग करते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपको नया शुल्क समझ में आ जाए और आपका लॉकर आवंटन और शुल्क राशि स्पष्ट हो।
व्यवसायिक खाते वाले – अगर आप करंट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको शुल्क वृद्धि के असर को समझना और अपने व्यवसायिक खर्चे में इसे शामिल करना होगा।
निष्कर्ष
PNB ने 2025 में अपनी कई बैंकिंग सेवाओं के नियमों और शुल्कों में बदलाव किया है। इन नए नियमों का असर 1 अप्रैल से देखने को मिलेगा, और यह बदलाव खासकर उन ग्राहकों पर असर डालेंगे जो बचत खाता, लॉकर्स, डिमांड ड्राफ्ट, और करंट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, PNB ग्राहकों को इन बदलावों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए ताकि वे आगामी शुल्क वृद्धि से बच सकें और अपनी बैंकिंग सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठा सकें।
यह जरूरी है कि आप PNB के नए नियमों को समय रहते समझें और अपनी बैंकिंग गतिविधियों की योजना उसी अनुसार बनाएं। -

छत्तीसगढ़ के सक्ती और सूरजपुर जिले में एसीबी ने रिश्वत लेते पटवारी समेत तीन को गिरफ्तार किया…
छत्तीसगढ़ की एंटी करप्शन यूनिट ने राज्य के सक्ती जिले और सूरजपुर जिले में कार्यवाही करते हुए क्रमशः राजस्व निरीक्षक, पटवारी और लिपिक को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इनमें मौत के मुआवजे के लिए वारिस की जानकारी देने, दैनिक वेतन भोगी को फिर से नौकरी पर रखने और ज़मीन की चौहद्दी का काग़ज़ देने के एवज़ में सरकारी गिद्ध रिश्वत माँग रहे थे।
मौत के मुआवज़े और चौहद्दी के लिए रिश्वत
सूरजपुर के प्रतापपुर में पदस्थ पटवारी मोगेंद्र प्रताप सिंह चौहद्दी का काग़ज़ बनाकर देने के लिए 15 हजार ले रहे थे, जबकि प्रतापपुर तहसील में ही पदस्थ बाबू बृजभान सिंह हाथी से मौत की क्षतिपूर्ति राशि के लिए वारिसान की जानकारी वन विभाग को भेजने के बदले मृतक के वारिस से दस हजार रुपए रिश्वत ले रहे थे। हाथी की वजह से मौत के मामले में राज्य सरकार मृतक के आश्रित को 6 लाख रुपए मुआवजा देती है।
डेलीवेज पर फिर से रखने रिश्वत
सक्ती जिले के आदिवासी विकास विभाग के मंडल निरीक्षक संदीप खांडेकर पचास हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए हैं। संदीप खांडेकर उस दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी से रकम वसूल रहे थे, जिसे केवल इसलिए हटाया गया था कि, छात्रावास के इलेक्ट्रिक बोर्ड को अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया था और इस मामले में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को नौकरी से हटा दिया गया था। मंडल निरीक्षक उसे दुबारा नौकरी में लेने डेढ़ लाख मांग रहे थे और पहली किश्त पचास हजार रुपए लेते धरा गए। -

बलात्कार के दोषसिद्ध अपराधी आसूमल थाऊमल सिरुमलानी उर्फ आसाराम को मेडिकल आधार पर मिली अंतरिम जमानत की अवधि तीन महीने बढ़ा दी गई है…
गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा प्राप्त आसूमल थाउमल सिरुमलानी ऊर्फ आसाराम की स्वास्थ्य आधार पर मिली अंतरिम जमानत की अवधि को 90 दिनों के लिए बढ़ाने का निर्णय दिया है। इस निर्णय के पहले विचारण के दौरान राज्य की ओर से कोई विरोध दर्ज नहीं किया गया।
खंडपीठ में विभाजित फैसला फिर तीसरे जस्टिस ने किया आदेश
आसूमल ऊर्फ आसाराम की ओर से यह याचिका दायर की गई थी कि, वह गंभीर रुप से बीमार हैं और उपचार हेतु वह आयुर्वेदिक उपचार की ज़रूरत महसूस करता है। जिसके लिए उसे निरंतर योग्य चिकित्सकों की आवश्यकता है। इसलिए उसकी अंतरिम जमानत अवधि तीन महीने बढ़ाई जाए। इस याचिका की सुनवाई की जस्टिस इलेश जे वोरा और जस्टिस संदीप एन भट्ट ने की। पीठ ने इस याचिका पर विभाजित याने परस्पर विरोधी फैसला सुनाया। विभाजित फ़ैसले का अर्थ हुआ कि जब किसी मसले पर दो जजों की राय अलग अलग हो। विभाजित फैसले के बाद इस याचिका की सुनवाई जस्टिस ए एस सुपेहिया ने की। जस्टिस सुपेहिया ने आसूमल की स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत याचिका की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ा दी है।
अदालत ने कहा
गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए इस तथ्य को रेखांकित किया है कि, आसूमल की याचिका का राज्य की ओर से विरोध नहीं किया गया है। साथ ही राज्य ने यह भी नहीं कहा है कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम जमानत अवधि के दौरान कोई दुरपयोग किया। अदालत ने यह माना है कि याचिकाकर्ता को अपने उपचार की अनुमति दी जानी चाहिए। -

फोन में बात कर रहा था सिपाही, तभी हुआ कुछ ऐसा कि खुद को मारी गोली, चली गई जान…
रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की कोतवाली टांडा में रविवार शाम को दर्दनाक घटना सामने आई। जहां, एक सिपाही ने फोन पर बात करते हुए खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक सिपाही की पहचान आरक्षी अंकित कुमार (बेल्ट नंबर 1908) के रूप में हुई, जो बुलंदशहर जिले के ढलना गांव के निवासी थे। घटना के दौरान अंकित ने अपनी सरकारी रायफल से खुद को गोली मार ली, जिसकी आवाज सुनकर थाना परिसर में तैनात अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
साथी पुलिसकर्मी तुरंत उन्हें समुदाय स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल एसपी अतुल कुमार श्रीवास्तव, सीओ कीर्ति निधि आनंद और एसडीएम कुमार गौरव मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में सामने आया कि अंकित कुमार लगभग दो साल पहले कोतवाली टांडा में तैनात हुए थे।
इस घटना से पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने यह कदम क्यों उठाया। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फोन पर उनकी किससे बात हो रही थी और आत्महत्या के पीछे की असली वजह क्या थी। -

नियम का उल्लंघन पर रेरा की बड़ी कार्रवाई, इस बिल्डर पर लगाया 10,000,00 रुपए का जुर्माना…
रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने नियम का उल्लंघन करने पर बिल्डर पर कार्रवाई करते हुए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. जांच में पाया गया है कि अनुबंध किए बिना क्रेताओं से भू-संपदा की लागत के 10 प्रतिशत से अधिक धनराशि प्राप्त की, जो अधिनियम के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लघंन है.
रेरा से मिली जानकारी के मुताबिक, समृद्धि विहार परियोजना के प्रमोटर, प्राइम डेव्हलपर्स पर 10 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है. यह दंड रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 13 के उल्लघंन के कारण लगाया गया. प्राधिकरण ने सभी प्रमोटरों को निर्देश दिया है कि वे रेरा अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें. साथ ही सभी केताओं से अपील की है कि रेरा अंतर्गत पंजीकृत प्रोजेक्ट में ही निवेश करना सुनिश्चित करें. -

ED की रडार पर IAS अभिषेक प्रकाश, लखनऊ पुलिस से दस्तावेज तलब, जांच में खुलेंगे कई राज…
लखनऊ। उद्योग लगाने के बदले व्यापारी से 5% कमीशन के आरोप में फंसे IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब ED ने सीनियर आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश पर शिकंजा कसा है। लखनऊ पुलिस ने दस्तावेज तलब कर दिया है। सरकार ने सारे दस्तावेज ईडी को सौंपने के आदेश दिए थे। जिसके बाद ED ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
वीरेंद्र मस्त ने दिए थे सरकार को सबूत
ED जल्द ही अभिषेक प्रकाश को समन करने वाला है। अभिषेक के खिलाफ जितने भी भ्रष्टाचार के मामले है, सब जांच एजेंसी को सौंपे जाएंगे। अब जल्द ही जांच की आंच अधिकारियों तक पहुंचेगी। आरोप है कि अभिषेक के पास अरबों रुपए कीमत की जमीनें हैं। बलिया के तत्कालीन सांसद वीरेंद्र मस्त ने सबूत के साथ यूपी सरकार को तब ब्यौरा दिया था। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अभिषेक ने जांच नहीं होने दी थी लेकिन घूस कांड में सस्पेंशन के बार अब उसकी संपत्तियों जो अवैध रूप से अर्जित की गई है, उसकी जांच के आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं।
बता दें कि लखनऊ के पूर्व डीएम और LDA के पूर्व VC अभिषेक प्रकाश घूसखोरी कांड में निलंबित किया गया था। आरोप है कि उन्होंने उद्योग लगाने के बदले व्यापारी से पांच प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। गोपनीय जांच में आरोप प्रमाणित हुए। अभिषेक घूसकांड के वक्त उद्योग विभाग के अधीन इन्वेस्ट यूपी में CEO पद पर तैनात थे। -

गोवा में एक रंग में दिखेंगी सरकारी इमारतें, विधानसभा में सीएम सावंत बोले- भगवा नहीं किया जाएगा…
गोवा में जल्द ही सभी सरकारी इमारतें एक रंग में दिखाई देंगी। सीएम प्रमोद सावंत ने विधानसभा में बजट पेश किए जाने के दौरान सरकारी इमारतों के लिए एक समान रंग कोड लागू करने का प्रस्ताव पेश किया। जब विपक्ष ने रंग को लेकर पूछा तो सीएम बोले कि इमारतों का रंग भगवा नहीं होगा।
सीएम ने कहा कि मैं सरकारी इमारतों को एक समान रंग कोड के साथ पेंट करने का प्रस्ताव करता हूं। सीएम ने कहा कि रंग भगवा नहीं होगा। इसके लिए राज्य सरकार की सभी इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट किया जाएगा। कुछ इमारतों का ऑडिट पहले ही शुरू किया जा चुका है। विस्तृत परामर्श रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक उपाय फास्ट ट्रैक मोड पर किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बजट में सरकार ने राज्य की सभी विरासत इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके बाद आवश्यकतानुसार सभी विरासत इमारतों का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। बजट में नए सरकारी भवनों के निर्माण और पुरानी संरचनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए 273 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है।
सीएम ने कहा कि दक्षिण गोवा के पुराने कलक्ट्रेट और पुलिस मुख्यालय की इमारतों की मरम्मत का काम पहले ही शुरू हो चुका है। सीएम ने शहरी क्षेत्रों में गर्मी से निपटने के लिए वर्टिकल गार्डन सहित विभिन्न पर्यावरण-अनुकूल पहलों का भी प्रस्ताव रखा। सीएम प्रमोद सावंत ने कहा कि सौंदर्य और सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार के लिए प्रमुख राजमार्गों के साथ हरित गलियारे बनाने के लिए सड़क इंजीनियरिंग और डिजाइन पर भी नई नीति पेश की जाएगी। इससे पर्यटकों और लोगों को राहत मिलेगी। -

घोटालेबाज अफसरों पर बाबा का शिकंजा : राजस्व विभाग ने कार्रवाई के लिए अन्य विभागों को भेजा पत्र…
लखनऊ। डिफेंस कॉरिडोर घोटाले में दोषियों पर शिकंजा कसता जा रहा है. अब राजस्व विभाग ने डिफेंस भूमि घोटाले में कार्रवाई के लिए विभागों को पत्र भेजा है. इस मामले में तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश समेत 16 अफसरों पर कार्रवाई होनी है. जिसके लिए विभागों को पत्र लिखा गया है. विभागों को आरोपी अफसरों के निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई करनी है.
भटगांव में हुए इस भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच तत्कालीन राजस्व परिषद के अध्यक्ष रजनीश ने की थी. अगस्त 2024 में शासन को इस मामले में 83 पन्नों की जांच रिपोर्ट दी थी. अधिकारियों की सांठगांठ से अधिग्रहण प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर किया गया था. इतना ही नहीं अधिकारियों ने मालिकाना हक की जांच किए बिना ही मुआवजा वितरित कर दिया था. इसमें भूमाफिया और अधिकारियों ने मिलकर करोड़ो का मुआवजा हड़प लिया था.
इन सबके नाम हैं शामिल
मामले में तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश और एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह दोषी हैं. इसके अलावा एसडीएम संतोष कुमार सिंह, शंभू शरण सिंह, आनंद कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार, चार तत्कालीन तहसीलदार विजय कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, उमेश कुमार सिंह और मनीष त्रिपाठी का नाम भी शामिल है. साथ ही तत्कालीन नायब तहसीलदार कविता ठाकुर, तत्कालीन लेखपाल हरिश्चंद्र, ज्ञान प्रकाश, तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम जितेंद्र सिंह और नैंसी शुक्ला का भी इस मामले में शामिल है. इन सभी पर अब कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।