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  • एम्स रायपुर में ‘स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट’ की सफलता ऐतिहासिक उपलब्धि…

    एम्स रायपुर में ‘स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट’ की सफलता ऐतिहासिक उपलब्धि…

    रायगढ़। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मार्गदर्शन में एम्स रायपुर द्वारा पहली बार ‘स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट’ के मामले में सफलता मिलने पर पूरी टीम को बधाई देते हुए रायगढ़ विधायक,वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस उपलब्धि को चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता का बड़ा कदम निरूपित किया। सोशल मीडिया में इस जानकारी को साझा करते हुए वित्त मंत्री ओपी ने कहा एम्स रायपुर “स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट”करने वाला राज्य का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है व देश के नए एम्स संस्थानों में पहला अस्पताल है। उन्नत और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए हेतु पूरी टीम को बधाई भी दी है।

    इस सफलता पूर्वक ट्रांसप्लांट से किडनी से जुड़े रोगियों को प्रदेश में ही सुविधा मिल सकेगी।स्वैप ट्रांसप्लांट में, गुर्दे की विफलता से पीड़ित एक मरीज जिसके पास एक इच्छुक जीवित दाता है, लेकिन असंगत रक्त समूह या एचएलए एंटीबॉडी की उपस्थिति के कारण किडनी प्राप्त करने में असमर्थ है, फिर भी किसी अन्य असंगत जोड़ी के साथ दाताओं का आदान-प्रदान करके प्रत्यारोपण करवा सकता है। इस व्यवस्था के माध्यम से, दोनों प्राप्तकर्ताओं को संगत गुर्दे मिलते हैं, जिसके परिणामस्वरूप दोनों जोड़ों के लिए सफल प्रत्यारोपण होता है। इस चुनौती से पार पाने के लिए एम्स रायपुर की प्रत्यारोपण टीम ने सफल स्वैप प्रत्यारोपण का समन्वय किया।

    एनओटीटीओ ने देश भर में इन प्रत्यारोपणों को अधिक प्रभावी ढंग से सुविधाजनक बनाने के लिए ‘एक समान एक राष्ट्र एक स्वैप प्रत्यारोपण कार्यक्रम’ शुरू करने योजना भी विचाराधीन है।एम्स रायपुर ने छत्तीसगढ़ में अंग प्रत्यारोपण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान ने सफलतापूर्वक गुर्दा प्रत्यारोपण कार्यक्रम विकसित किया है, जिसमें जीवित और मृत दाता दोनों प्रत्यारोपण शामिल हैं। एम्स रायपुर मृतक दाता अंगदान और मृतक दाता किडनी प्रत्यारोपण शुरू करने वाले नए एम्स में प्रथम है। यह राज्य में मृतक दाता बाल चिकित्सा किडनी प्रत्यारोपण शुरू करने वाला पहला संस्थान भी है। आज तक, संस्थान ने 54 किडनी प्रत्यारोपण किए हैं, जिसमें ग्राफ्ट सर्वाइवल दर 95 प्रतिशत और रोगी सर्वाइवल दर 97 प्रतिशत है, जो इसकी नैदानिक उत्कृष्टता और उच्च गुणवत्ता वाली रोगी देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • वकील ने अपने मुवक्किल को अँधेरे में रख कर दोषी ठहराया…दस हजार सह-निर्माता पटवारी एवं दस्तावेज लेखक को दोषमुक्त किया गया…

    वकील ने अपने मुवक्किल को अँधेरे में रख कर दोषी ठहराया…दस हजार सह-निर्माता पटवारी एवं दस्तावेज लेखक को दोषमुक्त किया गया…

    बिलासपुर। न्यायमूर्ति कृष्ण कुमार अग्रवाल ने किसानों को अत्यधिक तरलता के आधार पर 8.85 एकड़ जमीन पर अपना नाम दर्ज कराया, जो कि गैर कानूनी वकील और उनके सहयोगियों की अपील को खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को यथावत रखा गया है। इस मामले के दो मौलिक पटवारी एवं दस्तावेज लेखक की नामांकित सिडब को दोषमुक्त नहीं किया गया है। बुनियादी वकील को फरवरी 2016 में 3 साल की कैद हुई है।

    सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम खैरा निवासी मेहर चंद पटेल ने 2013 में सिविल लाइन थाने में लिखित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि उनके पास ग्राम खैरा में 8.85 एकड़ कृषि भूमि भी है। बिलासपुर कोर्ट में वकील करने वाले वकील राजस्व विभाग में उनके वकील थे। वकील एवं वकीलों ने कहा कि बाद में कुछ व्हीट द्रव्य की बिक्री कर पूरी 8.85 भूमि अपने नाम कर ली। भू स्वामी को इस बाद की जानकारी मार्च 2013 में सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत के रूप में दी गई। शिकायत की जांच में पुलिस को पता चला कि वकील ने अपने नाम से 2011 में मकान मालिक के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं। जांच के बाद पुलिस ने वकील और गवाहों के खिलाफ मामला दर्ज किया, 22 बिंदु जारी करने वाले, सचिवालय अशोक और दस्तावेज लेखक देवनाथ यादव की धोखाधड़ी का मामला कोर्ट में दर्ज किया गया। सत्रह कोर्ट बिलासपुर ने फरवरी 2016 में सभी को अलग-अलग धाराओं में 3 साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के अलैहिस्सलाम ने उच्च न्यायालय में अलग-अलग अपील पेश की। न्यायमूर्ति प्रियेश कुमार अग्रवाल की अदालत में अपील पर सुनवाई हुई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साक्ष्यों की गहन जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि यह अपीलकर्ता वकील जो मेहर चंद के वकील थे और एक प्रभावशाली स्थिति में थे। मनुष्य अक्सर उसके साथ घूमने जाता था। आवेदनकर्ता को विभिन्न प्रस्तावों के लिए आवेदन करना होता था। उसने घरेलू व्यवसायों में उसकी मदद की थी। आम वकील की पारिवारिक स्थिति के बारे में अच्छी तरह से जानकारी है कि उसके दो बेटे अलग-अलग रह रहे थे और उसकी स्थिति का लाभ अर्जित किया गया था, उसने उसे यह एसकेआर बिलासपुर ले लिया कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में उसे जमानत दे दी गई और ज़मानत के बजाय, अपीलकर्ता वकील ने पंजीकरण बिक्री विलेख प्राप्त किया

    उसकी पूरी 8.85 ओकलैंड ग्राउंड पर फर्ज़ी बुकिंग करके और अपनी फर्जी रिपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया गया।

    अपीलकर्ता ने दावा किया कि बिक्री विलेख को वास्तविक रूप से जब्त कर लिया गया और उसके नाम में बदलाव राजस्व अभिलेखों की जांच की गई और अतिरिक्त विवरण से ऑर्डर प्राप्त किया गया। मृतकों की सूची, लेकिन अंतत: डाबा ने रिपोर्ट में मेन्स के हस्ताक्षरों की जांच की और पाया कि बिक्री विलेख में साइन मेन्स मेहर चंद के नहीं थे। इसलिए, अपीलकर्ता वकील की ओर से प्रस्ताव दिया गया कि उसने नकली बिक्री विलेख तैयार किया था। किसानों को धोखा दिया गया है। इसी प्रकार उनके सहयोगी सीताराम कैवर्त के भी अपराध में संलिता सिडब पाया गया। इस आधार पर अदालत ने अपीलकर्ता वकील एवं गवाहों द्वारा की गयी अपील को खारिज करते हुए अदालत का फैसला यथावत रखा है।

    पटवारी व दस्तावेज़ लेखक दोषमुक्त

    कोर्ट ने अशोक ध्रुव व दस्तावेज लेखक देवनाथ यादव की अपील में कहा कि पटवारी ने सरकारी देनदारी पूरी करने के लिए 22 बिंदु जारी किए हैं, लेकिन यह सिदब नहीं है कि उन्होंने 22 बिंदु पितृ पक्ष में दिए हैं। इसी प्रकार के दस्तावेज लेखक ने भी गैर-कानूनी तरीके से वैलेखित विलेख तैयार किया और उसने स्वंय ने कहा कि इस तरह के दस्तावेज़ लेखक ने अपने सामने हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस आधार पर कोर्ट ने दोनों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया है।

  • कोरबा: सिग्नल देने में गड़बड़ी, मेमू गाड़ी कोल साइडिंग में घुस गई…

    कोरबा: सिग्नल देने में गड़बड़ी, मेमू गाड़ी कोल साइडिंग में घुस गई…

    कोरबा। शनिवार को रेलवे की एक बड़ी प्रतिस्पर्धा सामने आई। सिग्नल देने में गड़बड़ी के कारण मेमू सवारी गाड़ी (मेमू पैसेंजर ट्रेन) रेलवे स्टेशन के सामान्य कोल साइडिंग क्षेत्र में चोरी हो गई।

    मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का है। शनिवार को मेमू सवारी गाड़ी बिलासपुर से प्रस्थान रात्रि 11 बजे कोरबा प्रस्थान। यहां से ट्रेन गेवरा रेलवे स्टेशन के बारे में जानें। ट्रेन गेवरा स्टेशन (गेवरा रेलवे स्टेशन) के प्रारंभ में कुसमुंडा कोल साइडिंग क्षेत्र में प्रवेश किया गया। कोल साइडिंग क्षेत्र में 11 रेलवे लाइन है। यहां से मालगाडियों में कोयला चलाया जाता है। गलत ट्रैक पर गाड़ी के पहुंचने से यात्रियों में सामान चढ़ गया।

    बताया गया है कि संकेतों में गड़बड़ी का कारण यह स्थिति बनी है। शुक्र था कि कोल साइडिंग क्षेत्र के जिस ट्रैक पर यात्री गाड़ी के पास कोई मालागाड़ी खड़ी नहीं थी। अन्यथा दुर्घटना हो सकती थी। बताया जा रहा है कि रेल प्रबंधन ने मामले में कार्रवाई की है।

  • बीएपी MLA ने लिए 20 लाख; विधानसभा में लगाए सवाल वापस लेने के लिए मांगे थे 10 करोड़…

    बीएपी MLA ने लिए 20 लाख; विधानसभा में लगाए सवाल वापस लेने के लिए मांगे थे 10 करोड़…

    एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) राजस्थान ने बागीदौरा (बांसवाड़ा) से विधायक जयकृष्ण पटेल को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। राजस्थान में यह पहली बार है, जब किसी विधायक को रिश्वत लेते अरेस्ट किया गया है।

    विधानसभा में लगाए खनन विभाग से जुड़े सवालों को वापस लेने के लिए भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण ने 10 करोड़ की डिमांड की थी। बाद में 2.5 करोड़ रुपए में सौदा हुआ था। रविवार को 20 लाख रुपए लेते विधायक को गिरफ्तार किया गया है।

    जयकृष्ण पटेल के जयपुर में ज्योति नगर स्थित सरकारी क्वार्टर पर रिश्वत ली गई थी। एसीबी की टीम विधायक के आवास पर पहुंची उससे पहले विधायक का कोई व्यक्ति रिश्वत के 20 लाख रुपए लेकर फरार हो गया। जो व्यक्ति पैसे लेकर भागा है, उसको लेकर विधायक आवास परिसर में सर्च किया और सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

    एसीबी डीजी बोले- विधायक को रंगे हाथों पकड़ा एसीबी डीजी रविप्रकाश मेहरड़ा ने कहा- विधायक को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। उनके हाथ धुलवाए तो उनमें रंग आया है। विधायक ने पैसे के हाथ लगाया है, हमारे पास पैसा लेकर जाते के वीडियो एविडेंस है।

    एसीबी डीजी ने कहा- विधायक ने दूसरे जिले की खान से जुड़े तीन सवाल पूछे थे। उन सवालों को वापस लेने की एवज में विधायक ने पहले 10 करोड़ मांगे थे, फिर 2.50 करोड़ में सौदा हुआ था। तीन सवाल में प्रश्न संख्या- 5998 और 6284 ये दोनों तारांकित हैं और प्रश्न संख्या- 950 अतारांकित है। ये तीनों सवाल अभी विधानसभा में टेबल नहीं हुए हैं, सिर्फ लगाए गए हैं।

    रवि प्रकाश मेहरड़ा ने कहा- विधायक पर कार्रवाई से पहले विधानसभा स्पीकर को जानकारी दी गई थी। स्पीकर को पूरे मामले में ब्रीफ किया गया था। मुख्यमंत्री को भी कार्रवाई की जानकारी दी गई। वे गृह मंत्री भी हैं।

    4 अप्रैल को शिकायत मिली, सत्यापन के बाद विधायक के फोन कॉल सर्विलांस पर लिए एसीबी डीजी डॉ. रविप्रकाश मेहरड़ा ने बताया- शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह 4 अप्रैल को उनके पास आया था। उसने विधायक के बारे में शिकायत दी थी। विधायक ने विधानसभा में कुछ सवाल उठाए थे, उस बारे में शिकायतकर्ता ने विधायक से संपर्क किया था। इसके बाद विधायक ने शिकायतकर्ता को बांसवाड़ा बुलाया था और 10 करोड़ रुपए की मांग की थी। हालांकि सौदा 2.5 करोड़ में तय हुआ।

    रविप्रकाश मेहरड़ा ने बताया- विधायक के बारे में शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने उसका सत्यापन कराया। इसमें विधायक बार-बार शिकायतकर्ता को फोन कर पैसा देने के लिए कह रहा था। इसके बाद से विधायक, उनके गनमैन, पीएस और शिकायतकर्ता के सभी फोन कॉल 24 घंटे सुने जाने लगे।

    3 मई को विधायक ने फोन कर शिकायतकर्ता को कहा था कि वह 4 मई (रविवार) को जयपुर में उससे मिलेगा। इस पर शिकायतकर्ता ने समय पूछा तो विधायक ने समय देने से मना किया।

    विधायक ने कार में बैठकर गिने रिश्वत के रुपए एसीबी डीजी ने बताया- रात को विधायक का शिकायतकर्ता के पास फोन आया और सुबह विधायक क्वार्टर पर आने के लिए कहा। इसके बाद एसीबी की पांच टीमें सुबह से ही विधायक क्वार्टर के पास पहुंच गई। करीब 11.30 बजे शिकायतकर्ता पैसा लेकर विधायक आवास के बेसमेंट में पहुंचा, जहां पर विधायक पहले से मौजूद थे।

    शिकायतकर्ता ने कार में ही विधायक को रुपए दिए, जिनको विधायक ने कार में बैठकर गिना। इसके बाद विधायक ने पैसा किसी अन्य व्यक्ति को दिया, जो पैसा लेकर निकल गया।

    मेहरड़ा ने बताया- विधायक को उसी दौरान डिटेन कर उनके हाथ धुलाए गए तो उनके हाथों से रंग निकला। इसके बाद टीम विधायक को उनके आवास पर लेकर गई और सर्च किया। ACB की टीम ने विधायक से पूछताछ की और उनको सर्विलांस रिपोर्ट के बारे में बताया गया।

    एसीबी की टीम करीब 3 बजे विधायक को ऑफिस मुख्यालय लेकर आई। इसके बाद मेडिकल करवाकर गिरफ्तार किया गया। एसीबी डीजी ने बताया- विधायक से पूछताछ की जा रही है, लेकिन विधायक पूछताछ में कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। सोमवार को उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।

  • सावधान! बाजार में आ गया असली जैसा 500 का नकली नोट, गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट, जानिए असली-नकली की पहचान…

    सावधान! बाजार में आ गया असली जैसा 500 का नकली नोट, गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट, जानिए असली-नकली की पहचान…

    बाजार में नकली नोट की ऐसी खेप आई है जो बिलकुल असली जैसा दिखता है. गृह मंत्रालय ने हाई अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि इन नोटों की पहचान करना मुश्किल तो है, लेकिन कुछ सावधानी के साथ इसे असली नोट से अलग किया जा सकता है.

    दिल्‍ली। बाजार में 500 का ऐसा नकली नोट आ गया है, जो पूरी तरह असली जैसा ही दिखता है. गृह मंत्रालय ने भी इस पर चिंता जताते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है. सरकार ने चेतावनी दी है कि 500 के यह नकली नोट काफी हद तक असली जैसे दिखते हैं और सामान्‍य तौर पर इसमें अंतर कर पाना कठिन है, लेकिन सरकार ने कुछ ऐसे पहचान चिन्‍ह बताए हैं, जिसकी मदद से नकली नोटों को पहचानना मुमकिन होगा. तो, अगर आपके हाथ ऐसे नकली नोट लग जाएं तो इसकी मदद से पहचानना आसान हो जाएगा.

    क्‍या है दोनों नोट में अंतर
    गृह मंत्रालय ने बताया है कि वैसे तो नकली नोट असली 500 रुपये के नोटों से बहुत मिलते-जुलते हैं. लेकिन, इसमें स्‍पेलिंग को लेकर एक गलती हो गई है, जिसकी वजह से इसे पहचाना जा सकता है. 500 रुपये के नकली नोट में यह गलती ‘RESERVE BANK OF INDIA’ के वाक्‍य में है, जहां ‘RESERVE’ में ‘E’ की जगह गलती से ‘A’ लिखा गया है.

    जरा सी चूक और हो जाएगा नुकसान
    एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि यह छोटी सी गलती किसी भी आंखों से मिस हो सकती है. यही कारण है कि ये नकली नोट काफी खतरनाक माने जा रहे हैं और बाजार में तेजी से वायरल हो रहे हैं. सरकार ने बैंकों और अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों को भी हाई अलर्ट जारी किया है और उन्‍हें नकली करेंसी को पहचानने के लिए तस्‍वीर भी जारी की है. बैंकों से कहा गया है कि ऐसी नोट का पता चलते ही जांच एजेंसियों को सूचित करें.

    सरकार ने बनाया नकली नोट पहचानने का सिस्‍टम
    नकली नोट की पहचान करने और उसे बाजार में आने से रोकने के लिए सरकार लगातार सिस्‍टम अपडेट कर रही है. सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), FICN समन्वय समूह (FCORD) और आतंक वित्तपोषण एवं नकली मुद्रा (TFFC) सेल का गठन भी किया गया है, जो इस पर रोकथाम लगाती है. इसके अलावा नकली नोटों का पता लगाने के लिए सभी बैंक शाखाओं/चिन्हित बैक ऑफिसों और मुद्रा चेस्ट शाखाओं में मशीन लगाई गई है.

  • सीजीएमएससी मामले में ACB/EOW के बाद अब ईडी ने जांच शुरु की है…

    सीजीएमएससी मामले में ACB/EOW के बाद अब ईडी ने जांच शुरु की है…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीजीएमएससी घोटाला मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय की भी एंट्री हो गई है। विश्वसनीय सूत्र के अनुसार ईडी ने इस मामले में ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।

    एसीबी कर रही है जांच

    सीजीएमएससी घोटाला मामले में एसीबी/ईओडब्लू ने बीते 22 जनवरी 2025 को एफआईआर कर कार्यवाही कर रही है। मूलतः एसीबी की जांच यह जांच कर रही है कि, तीन टेंडरों के जारी किए जाने में टेंडर प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, और टेंडर प्रक्रिया में यदि गड़बड़ी हुई है तो दोषी कौन हैं या कि कौन कौन हैं। एसीबी/ईओडब्लू ने अब तक मोक्षित समूह के शशांक चोपड़ा सहित सीजीएमएससी में तत्कालीन कार्यरत पांच अधिकारियों को गिरफ्तार जेल भेज दिया है।

    ईडी क्यों ?

    विश्वसनीय सूत्र ने बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय को इस घोटाला मामले में बड़े स्तर पर मनी लॉड्रिंग की आशंका है। ईडी की इस मामले में दर्ज ईसीआईआर का आधार एसीबी में दर्ज एफआईआर है। सीजीएमएससी के इस घोटाले को लेकर तमाम चर्चाएं होती रही हैं। इसे लेकर यह दावा किया जाता रहा है कि, प्रभावशाली अधिकारियों ने सिंडिकेट बनाकर वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक दरों पर मेडिकल उपकरणों और दवाइयों की ख़रीदी की, इनमें रिएजेंट का ज़िक्र बार बार आता रहा है। कहीं कहीं पर इस घोटाले को 600 करोड़ का भी बताया गया है। लेकिन एसीबी के सूत्र ने संकेत दिए हैं कि, भुगतान के बिल क़रीब तीन सौ करोड़ के लंबित थे।

  • तीन दशक बाद उच्च न्यायालय से न्याय मिला 00 पावर का अपमान करने वाले पुलिस अधिकारियों को अर्थदंड की सजा मिली…

    तीन दशक बाद उच्च न्यायालय से न्याय मिला 00 पावर का अपमान करने वाले पुलिस अधिकारियों को अर्थदंड की सजा मिली…

    बिलासपुर। पुलिस प्रताड़ना के कारण एक अलगाव को एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने का आदेश दिया गया, 31 साल बाद उच्च न्यायालय से इन्साफ मिला, जब उनकी अपील पर सुनवाई कर उच्च न्यायालय ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने 5 लाख से अधिक समय तक जेल में रहने का निर्देश दिया है। इस मामले में पावर का दुरुपयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को उनकी करतूत की सजा मिली है।

    सेक्टर-6 भिलाई निवासी प्रदीप सायकल स्टोर के नाम से व्यापार करते थे और पुलिस बलों के खिलाफ समाचार प्रकाशित करते थे । राय ने कहा कि ऐसे केस में बीस साल तक जेल में रखा गया था, दूसरे दिन 29 दिसंबर को उनकी पत्नी साधना जैन को शहर के उदयपुर भिलाई नगर में छोड़ दिया गया था, लेकिन पिपरी जैन को 180 ग्राम की दुकान से हटा दिया गया था । माना जा रहा है कि 28/12/94 को शाम तीन बजे तक वह लगातार पुलिस अभिरक्षा में ऐसी स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रही थी।

    कोर्ट में बहस के दौरान जेल में बंद रहे डीप जैन का यह एपिसोड लगातार सफल रहा और उन्हें 893 दिन तक जेल में रहना पड़ा। जैन द्वारा अभियोजन पक्ष का मामला प्रस्तुत किया गया था, लेकिन जिला न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया था, क्योंकि इसके लिए सरकार ने उच्च न्यायालय में 5 लाख रु. के नुकसान की पूर्ति के लिए याचिका दायर की थी । उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोषी ठहराए गए एक अधिकारी की आवास के दौरान मृत्यु हो गई। वे दो अधिकारी एम डी तिवारी और शमी सेवानिवृत्त हो गए हैं। सरकार अक्रिय तो ऑर्केस्ट्रा ऑर्केस्ट्रा राशि वसूल हो सकती है।

  • डोंगरगढ़ देवी मंदिर में रोपवे ट्रॉली टूटी, प्रदेश महामंत्री भरत घायल, रामसेवक पैकरा, दया सिंह सहित तीन बाल बाल बचे…

    डोंगरगढ़ देवी मंदिर में रोपवे ट्रॉली टूटी, प्रदेश महामंत्री भरत घायल, रामसेवक पैकरा, दया सिंह सहित तीन बाल बाल बचे…

    राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के विख्यात देवी स्थल डोंगरगढ़ में बड़ा हादसा टल गया। मंदिर पर बने प्लेटफार्म पर रोपवे ट्रॉली टूट गई, जिससे उसमें सवार एक व्यक्ति घायल हुआ लेकिन तीन सुरक्षित गए हैं। ट्रॉली में डोंगरगढ़ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल भी मौजूद थे।

    बीजेपी प्रदेश महामंत्री सहित ये लोग थे सवार

    ट्रॉली में जो लोग सवार थे उनमें वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, बीजेपी प्रदेश महामंत्री भरत वर्मा, भिलाई के चर्चित व्यवसायी दया सिंह तथा डोंगरगढ़ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल शामिल हैं। प्रारंभिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार रोपवे ट्रॉली टूटने से भरत वर्मा के हाथ में और पीठ पर चोटें आई हैं। जबकि शेष सभी सुरक्षित हैं।

    यदि बीच में टूटती तो..!

    हादसा तब हुआ जबकि मंदिर दर्शन करने के बाद सभी वापस नीचे लौट रहे थे। रोप वे ट्रॉली जब नीचे प्लेटफार्म पर पहुँच गई तभी तार टूटा और ट्रॉली लुढ़क गई। सतह और ट्रॉली में अंतर नहीं था इसलिए घटना भयावह होने से टल गई। यह हादसा यदि बीच पहाड़ी में होता तो घटना बेहद गंभीर हो जाती।

  • राज्य सरकार ने तहसीलदारों से छीना नामांतरण का अधिकार, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होते ही हो जाएगा नामांतरण, राजपत्र पर अधिसूचना जारी…

    राज्य सरकार ने तहसीलदारों से छीना नामांतरण का अधिकार, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होते ही हो जाएगा नामांतरण, राजपत्र पर अधिसूचना जारी…

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन पारदर्शी और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. इसके तहत छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 24 की उप-धारा (1) के अधीन तहसीलदार को प्राप्त नामांतरण की शक्तियां जिले में पदस्थ रजिस्ट्रार, सब रजिस्ट्रार को दी गई है. ये अधिकारी अपने क्षेत्राधिकार में पंजीकृत विक्रय पत्र के निष्पादन हेतु अधिकृत होंगे. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है.

    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इसे एक जनहितैषी और दूरदर्शी निर्णय बताया. उन्होंने कहा कि भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया के सरलीकरण से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भूमि से संबंधित विवादों में कमी आएगी. आम लोगों को सुविधा मिलेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग सचिव श्री अविनाश चंपावत ने बताया कि यह अधिसूचना 24 अप्रैल 2025 से प्रभाव में आ चुकी है और इसे सभी जिलों में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.


    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन द्वारा जारी अधिसूचना के तहत अब पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार को उस क्षेत्र में पंजीकृत विक्रय पत्रों के आधार पर भूमि के हस्तांतरण का अधिकार सौंपा गया है. पूर्व में यह अधिकार तहसीलदार को प्राप्त था. जो कि भू-राजस्व संहिता की धारा 110 के तहत कार्य करते थे. अब इस बदलाव से भूमि क्रय विक्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगा और कम समय में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.