Blog

  • एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने से मौत’ संचालक डॉ गोयल गिरफ्तार, भारी हंगामे के चलते भारी पुलिस बल तैनात और धारा 144 लागू

    एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने से मौत’ संचालक डॉ गोयल गिरफ्तार, भारी हंगामे के चलते भारी पुलिस बल तैनात और धारा 144 लागू

    रायपुर। राजधानी रायपुर के समता कॉलोनी स्थित गोयल अस्पताल में युवती को एक्सपायरी डेट वाला इंजेक्शन लगाने से युवती की मौत हो गयी है। जिसके चलते आक्रोश में सैकड़ों लोगों ने अस्पताल को घेर लिया। जिसके कारण पुलिस ने डॉक्टरों को सुरक्षित किया।  बढ़ईपारा निवासी 30 वर्षीय युवती को हल्का सर्दी बुखार की शिकायत के बाद परिजन गोयल अस्पताल लेकर गये थे। जहाँ पैडिकोर इंजेक्शन एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाते ही युवती का शरीर नीला पड़ गया और थोड़ी देर में युवती की मौत हो गयी।

    https://youtu.be/a5LQG3u5npE

    परिजनों ने अस्पताल प्रशाशन पर लापरवाही का आरोप लगे है साथ ही अस्पताल प्रबंधन के अड़ियल रवैये को लेकर भी लोग नाराज़ हो गए है। भीड़ के उग्र रवैये को लेकर नाराज़ डॉक्टर एकजुट हो रहे है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन का अड़ियल रवैये बना हुआ है तथा वह ऐसी किसी भी लापरवाही से इंकार कर रहा है। शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच कर रही है। भीड़ के उग्र रवैये को लेकर नाराज़ डॉक्टर एकजुट हो रहे हैं। डॉक्टर्स एसोशिएशन ने राजधानी के सभी निजी अस्पतालों में काम बंद करने की चेतावनी दी है। डॉक्टर राकेश गुप्ता ने अस्पताल को भारी पुलिस सुरक्षा देने और घटना की जांच करने की मांग की है।

    आचार संहिता लागू होने और माहौल तनावपूर्ण होने के चलते समता कॉलोनी में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है वहीं धारा 144 भी लागू कर दिया गया है। थाने के अंदर ही डॉक्टर्स बैठ गए हैं जबकि बाहर लोग मौजूद है।

  • एक्सपायरी डेट इंजेक्शन से युवती की मौत का मामला : प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज बंद करने का लिया फैसला, थाने में जमाया डेरा

    एक्सपायरी डेट इंजेक्शन से युवती की मौत का मामला : प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज बंद करने का लिया फैसला, थाने में जमाया डेरा

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्राइवेट अस्पताल में एक्सपायरी डेट की इंजेक्शन लगाने के बाद युवती की मौत हो गई थी. जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ और हंगामा किया था. इससे नाराज रायपुर के निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर मरीज़ों का इलाज बंद करने का फैसला लिया है।

    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तमाम सदस्य आज़ाद चौक थाना पहुंचे हुए है और हॉस्पिटल में हुए तोड़फोड़ का विरोध कर कार्रवाई करने की माँग की है. वहीं मृतक के परिजन भी थाना पहुंचे हुए है. डॉक्टर और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत की जा रही है।

    बता दें कि रायपुर के समता कॉलोनी स्थित गोयल अस्पताल में शुक्रवार दोपहर एक्सपाइरी डेट की इंजेक्शन लगाने से युवती की मौत हो गई थी. युवती की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में डॉक्टर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन करते हुए हंगामा किया था और तोड़फोड़ भी की थी.

  • दिशा’ को लेकर देश में उबाल के बीच राष्ट्रपति कोविंद का बड़ा बयान, पाक्सो एक्ट के दोषियों को नहीं हो क्षमा याचिका का अधिकार, संसद करे विचार…

    दिशा’ को लेकर देश में उबाल के बीच राष्ट्रपति कोविंद का बड़ा बयान, पाक्सो एक्ट के दोषियों को नहीं हो क्षमा याचिका का अधिकार, संसद करे विचार…

    रायपुर। महिलाओं के साथ बलात्कार और जलाकर मार दिए जाने की घटनाओं के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पाक्सो एक्ट में दोषी व्यक्तियों के लिए क्षमा याचिका का प्रावधान खत्म करने की बात कहकर नई बहस छेड़ दी है।

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को राजस्थान के सिरोही जिला स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत गंभीर मुद्दा है. इस बारे में बहुत काम किया गया है लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. लड़कियों पर आसुरी हमलों की घटनाएं देश की अंतरात्मा को झकझोर देती हैं. प्रत्‍येक माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह लड़कों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावनाओं का समावेश करे.राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि पाक्सो एक्ट के दोषियों को क्षया याचिका का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए. इस विषय पर संसद में विचार किए जाने की जरूरत है।

    राष्ट्रपति के इस बयान की पूरे देश में चर्चा हो रही है. ऐसे समय में जब घटना के 12 साल बाद भी निर्भया के दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है, राष्ट्रपति के इस बयान का महत्व काफी बढ़ गया है. बता दें कि जघन्य मामलों की तरह पाक्सो एक्ट में फांसी की सजा पाने वाले दोषी को क्षमा याचिका दाखिल करने का अधिकार है. लेकिन हैदराबाद में महिला वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुई घटना के बाद राष्ट्रपति के बयान से नए सिरे से विचार की उम्मीद जगी है।

  • हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक, एड्स पीड़ित बच्चियों के लिए संचालित संस्था को बंद करने का दिया था आदेश

    हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक, एड्स पीड़ित बच्चियों के लिए संचालित संस्था को बंद करने का दिया था आदेश

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में एकमात्र बिलासपुर स्थित एड्स पीड़ित नाबालिग बच्चियों की देखभाल करने वाली संस्था को बंद करने के सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले में आज हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए शासन के फैसले पर सोमवार तक रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी. जस्टिस पी. सैम कोशी की एकल पीठ में मामले की सुनवाई हुई। शासन ने ट्रस्ट पर जूएनाईल जस्टिस एक्ट के पालन ना करने का आरोप लगाया है. वहीं ट्रस्ट ने सरकार पर जवाब के लिए समय नहीं देने का आरोप लगाया है. इसी मामले को लेकर याचिकाकर्ता संजीव ठक्कर ने याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता संजीव ठक्कर की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के मुताबिक सरकार के फैसले से 15 नाबालिग बच्चियों पर प्रभाव पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार के फैसले से पीड़ित बच्चियां घबराई हुई हैं. क्योंकि छत्तीसगढ़ में एकमात्र बिलासपुर स्थित यह ट्रस्ट है, जहां इन बच्चों की देखभाल होती है।
  • सारकेगुड़ा मामला : 2012 में ही जिस शख्स ने बता दिया था मुठभेड़ फर्जी है, उस शख्स से खास-बातचीत, FIR को लेकर अनशन पर बैठे

    सारकेगुड़ा मामला : 2012 में ही जिस शख्स ने बता दिया था मुठभेड़ फर्जी है, उस शख्स से खास-बातचीत, FIR को लेकर अनशन पर बैठे

    बीजापुर। धुर नक्सल क्षेत्र और जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर 28 जून 2012 को सारकेगुड़ा में सुरक्षाबल के जवानों द्वारा बीज पांडुम मनाने जुटे तीन गांव राजपेटा, सारकेगुड़ा और कोत्तगुड़ा के ग्रामीणों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी. इस घटना में 7 नाबालिग सहित 17 लोग सामूहिक नरसंहार में मारे गए थे। इस घटना के तत्काल बाद सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार मौके पर पहुँचे थे, गाँव वालों से मिले थे, पीड़ित परिवार वालो से मिले थे और उन्होंने कहा था कि मुठभेड़ फर्जी है. निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर मारा गया. उन्होंने इस मामले में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने संघर्ष किया. अब जब 7 साल बाद फैसला आया न्यायिक जाँच आयोग ने माना कि मुठभेड़ में मारे गए आदिवासी नक्सली नहीं थे. मारे गए लोग निर्दोष थे। अब इसी मामले को 2012 में ही मुठभेड़ को फर्जी बताने वाले हिमांशु कुमार घटना के लिए पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व डीजीपी विश्वरंजन, तत्कालीन बस्तर आईजी टीजे लांगकुमेर, तत्कालीन आईबी चीफ मुकेश गुप्ता, तत्कालीन एसपी प्रशांत अग्रवाल, सीआरपीएफ डीआईजी एलांगो, तत्कालीन थाना प्रभारी इकबाल पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. इस मांग को लेकर हिमांशु कुमार बासागुड़ा थाना में ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठ गए है।
  • ‘दिशा’ गैंगरेप के चारों हैवानों का शव लेने से परिजनों ने किया इनकार,  पुलिस एनकाउंटर में हुए थे ढेर….

    ‘दिशा’ गैंगरेप के चारों हैवानों का शव लेने से परिजनों ने किया इनकार, पुलिस एनकाउंटर में हुए थे ढेर….

    दिल्ली। हैदराबाद गैंगरेप के चारों आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उनके परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया है.  पुलिस उनके शव को परिजनों को देने की तैयारी में थी, लेकिन उनके परिजनों ने शवों को लेने से मना कर दिया. लिहाजा अब तेलंगाना पुलिस सभी आरोपियों अंतिम संस्कार कर सकती है।
    दरअसल शुक्रवार सुबह महिला डॉक्टर से गैंगरेप और हत्या मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को लेकर पुलिस घटना स्थल पर जांच करने पहुंची थी. इसी दौरान दो आरोपी पुलिस की गन लेकर भागने की कोशिश करने लगे. मना करने पुलिस के ऊपर फायरिंग करनी शुरु कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें चारों रेपिस्ट मारे गए. यह एनकाउंटर नेशनल हाइवे-44 के पास हुआ। बता दें कि 27 नवंबर की रात को हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत की हदें पार करते हुए चार आरोपी मोहम्मद आरिफ, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा ने गैंगरेप के बाद जिंदा जला दिया था।
  • आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई उन्नाव गैंगरेप पीड़िता, मौत से पहले बोली थी, ‘मेरी ये हालत करने वाला कोई जिंदा न बचे’

    आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई उन्नाव गैंगरेप पीड़िता, मौत से पहले बोली थी, ‘मेरी ये हालत करने वाला कोई जिंदा न बचे’

    दिल्ली। गैंगरेप का शिकार हुई उन्नाव की पीड़िता ने दम तोड़ दिया है. शुक्रवार देर रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान रात 11 बजकर 40 मिनट पर मौत हो गई. पीड़िता को जेल से बेल पर रिहा हुए आरोपियों ने जलाकर मारने की कोशिश की थी. जिससे वो 90 प्रतिशत जल चुकी थी. जिसके बाद लखनऊ से एयर लिफ्ट कर उसे सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया गया था. डॉक्टरों के मुताबिक उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।

    उन्नाव पीड़िता 5 दिसंबर को इसी केस के सिलसिले में रायबरेली कोर्ट जाने के लिए निकली थी. उसी दौरान जेल से छूटे आरोपियों ने उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया. जिससे वो 90 फीसदी जल गई थी.दरअसल उन्नाव की बेटी के साथ दिसंबर साल 2018 में रेप हुआ था. पुलिस के पास दर्ज पीड़िता के बयान के मुताबिक गांव के ही शिवम त्रिवेदी नाम के शख्स ने शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया।

    रेप के दौरान उसका वीडियो बनाया और वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ बार-बार रेप किया. इस दौरान शिवम के साथ उसके दोस्त शुभम समेत पांच लोगों ने इस घिनौनी हरकत में उसका साथ दिया.पीड़िता की मौत के बाद अब परिवार आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रहा है. सभी पांच आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके हैं. एसआईटी जांच भी हो रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल्द से जल्द इंसाफ दिलाने का भरोसा भी दिलाया है.वहीं अब पीड़िता के परिजनों व रिश्तेदारों का कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. ऐसे देखना यह होगा कि अब पीड़िता को सरकार किस तरह से न्याय दिलाती है।

    पीड़िता के पास में खड़े अस्पताल के बर्न यूनिट के हेड डॉ. शलभ और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि उसके मुंह से निकली हुई बातें इतनी ही समझ में आ रहीं थी कि वह जानना चाह रही थी कि वह बच जाएगी न. डॉक्टरों ने बताया कि उसने इशारों में और हल्की आवाज में कहा कि वह मरना नहीं चाहती है. उसने यह भी कहा कि उसके साथ ऐसा करने वाला कोई बचे न।

    गैंगरेप पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन मरने से पहले उसने भावुक होकर कहा था कि वह मरना नहीं चाहती है और उसके साथ ऐसा करने वाला कोई जिंदा नहीं बचना चाहिए. अब क्या सरकार उसके गुनाहगारों को फांसी की सजा देगी ? क्योंकि उसके परिजन भी यही मांग कर रहे हैं कि आरोपियों को फांसी हो या फिर हैदराबाद की तरह एनकाउंटर कर दिया जाए.

  • चर्चा : गैंगरेप आरोपियो के एनकाउंटर पर IPS रतनलाल डांगी का फेसबुक पोस्ट,पुलिस की किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई पर विवेक से काम लेना जरूरी

    चर्चा : गैंगरेप आरोपियो के एनकाउंटर पर IPS रतनलाल डांगी का फेसबुक पोस्ट,पुलिस की किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई पर विवेक से काम लेना जरूरी

    रायपुर। हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद पुलिस का जहाँ सम्मान हो रहा है, तो वहीं उनकी ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. देश भर में इस लेकर तरह-तरह की चर्चा है. इन चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ के आईपीएस अफसर रतनलाल डांगी का फेसबुक पोस्ट भी चर्चा में आ गया है.दुर्ग जिले में डीआईजी के रूप पदस्थ रतनलाल डांगी हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई से सहमत नहीं है. उनका कहना है कि भावनाओ में बहकर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. समाज में इसका क्या असर पड़ सकता है इसे देखना जरूरी है. उन्होंने अपने फेसबुक पर पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है- भावनाओ में बहकर पुलिस की किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई की वाह-वाही में विवेक से काम लेना बहुत जरूरी है।
    रतनलाल डांगी ने कहा कि जब हालात नाजुक हो तो संयम से काम लेना चाहिए. वक्त देना चाहिए. इस तरह से कानून को भावनाओं में आकर काम नहीं करना चाहिए. कल इस तरह की कार्रवाई का दुरुपयोग भी हो सकता है. वैसे पुलिस पर सवाल उठते रहते हैं. कानून के मुताबिक संयम से कार्रवाई होनी चाहिए. हमारे सामने कई घटनाएँ समाज में जब पुलिस कई मर्तबा गलतियाँ हो जाती है. समाज पुलिस पर ही सवाल उठाती रही है. ऐसे में कल को कुछ और भी हो सकता है. मुझे लगता ऐसे नाजुक मौके पर संयम, विवेक की जरूरत है. विशेषकर तब और जब हम पर जनभावनाएँ हावी हो।
  • अब अधिकारी करेंगे गोदामों की जांच,मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्याज के स्टॉक सीमा को किया गया कम…बड़े व्यापारी 25 टन और खुदरा विक्रेता 5 टन रख सकेंगे स्टॉक…

    अब अधिकारी करेंगे गोदामों की जांच,मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्याज के स्टॉक सीमा को किया गया कम…बड़े व्यापारी 25 टन और खुदरा विक्रेता 5 टन रख सकेंगे स्टॉक…

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बाजारों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में व्यापारियों को गोदाम में प्याज का स्टॉक रखने की सीमा कम करके आधा कर दिया गया है। नए आदेश के अनुसार बड़े व्यापारी अब 25 टन और कमीशन अभिकर्ता 5 टन तक प्याज का स्टॉक रख सकते हैं।खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा मंत्रालय महानदी भवन से प्याज के स्टॉक सीमा में संशोधन करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। प्रदेश के सभी कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    खाद्य विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेश के खाद्य अधिकारियों को नए खाद्य लिमिट के अनुसार गोदामों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।राज्य शासन द्वारा प्याज की संग्रहण क्षमता में संशोधन का निर्णय प्रदेश में बढ़ते प्याज के कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए लिया गया है। राज्य शासन द्वारा पूर्व में बड़े व्यापारियों को 50 टन और कमीशन अभिकर्ताओं को 10 टन प्याज का स्टॉक सीमा निर्धारित था।राज्य शासन द्वारा प्याज की कीमत में नियंत्रण रखने के लिए राज्य की उचित मूल्य के दुकानों से प्रतिदिन 10-15 क्विंटल प्याज उचित दर पर विक्रय किया जा रहा है। इन दुकानों से प्रत्येक हितग्राही को 5 किलोग्राम प्याज का विक्रय किया जा रहा है।

    इसके अलावा रायपुर शहर में थोक प्याज व्यापारियों से समन्वय कर गत 4 नवम्बर से शहर के सात स्थानों में प्याज का विक्रय किया जा रहा है। राज्य के अन्य जिलों में प्याज के खुदरा बाजार मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि के संदर्भ में सभी जिलों के थोक प्याज व्यापारियों से समन्वय कर उचित दर की दुकान शुरू कर प्याज उपलब्ध कराने के निर्देश भी राज्य शासन द्वारा दिए गए हैं।

  • शादीशुदा महिला टीचर ने 15 साल के छात्र को लिया गोद…वजह थी बना सके शारीरिक संबंध…कई महीने तक होता रहा शोषण…जब मना किया तो…

    शादीशुदा महिला टीचर ने 15 साल के छात्र को लिया गोद…वजह थी बना सके शारीरिक संबंध…कई महीने तक होता रहा शोषण…जब मना किया तो…

    एक शादीशुदा महिला टीचर पर आरोप लगा है कि उन्होंने 15 साल के छात्र को इसलिए गोद लिया ताकि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बना सके। ये मामला अमेरिका के न्यू जर्सी के ट्रेन्टन का है. टीचर के क्लास लेने पर बैन लगा दिया गया है।15 साल के लडक़े को जब अपने घर से निकाल दिया गया तब 45 साल की टीचर रायना कल्वर उसकी लीगल गार्जियन बन गई। लडक़े का दावा है कि कई महीनों तक टीचर ने रोज उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

    इस मामले में अभी ट्रायल चल रहा है. गिरफ्तारी के बाद से ही टीचर छुट्टी पर थीं, लेकिन अब उनके स्कूल जाने पर तब तक बैन लगा दिया गया है जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता।बच्चे का भविष्य खराब करने और यौन शोषण के मामले में टीचर पर मुकदमा चलाया जा रहा है। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, बच्चे की कस्टडी लेने से पहले से ही टीचर उसके काफी करीब हो गई थी।

    शुरुआत में टीचर गलत तरीके से उसे छूती थी, लेकिन लडक़ा इसके बारे में अधिक सोच नहीं पा रहा था. बाद में लडक़े ने जब टीचर को संबंध बनाने से मना किया तो उन्होंने दबाव बनाया। प्रॉसेक्यूटर के मुताबिक, पीडि़त लडक़े को यह लगने लगा था कि उसे घर में जगह देने के पीछे टीचर का मकसद उसके साथ संबंध बनाना ही था।