Category: राष्ट्रीय

  • फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल की सजा

    फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल की सजा

    जिले में फर्जी शिक्षाकर्मियों के खिलाफ प्रथम श्रेणी व्यवहार न्यायालय कुरूद ने बड़ा फैसला सुनाया है. मगरलोड जनपद पंचायत में वर्ष 2008 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में 11 फर्जी शिक्षाकर्मियों को ढाई-ढाई साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

    बता दें कि वर्ष 2008 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की नौकरी के लिए अभ्यर्थियों की भर्ती की गई थी. मगरलोड जनपद पंचायत में भी विज्ञान एवं कला विषय के लिए 211 पदों पर भर्ती हुई थी. इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का आरोप ग्राम चंदना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू ने लगाया था. उसने सूचना के अधिकार के तहत तमाम दस्तावेज हासिल करने के बाद 3 जून 2006 को धमतरी कलेक्टर और एसपी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया था.
    शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर मगरलोड थाना में 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ था. शिकायत करने के करीब 9 साल बाद 6 अगस्त 2018 को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुरूद में शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू का बयान दर्ज किया गया. सभी पक्ष को सुनने के बाद न्यायाधीश महेश बाबू ने आरोप को सही पाते हुए सभी 11 शिक्षाकर्मियों को धारा 420 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 467 के तहत 2 वर्ष 6 माह कठोर कारावास व 1000 रुपये अर्थदंड, धारा 468 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपये अर्थदंड और धारा 471 के तहत 1 वर्ष कठोर कारावास व 500 अर्थदंड की सजा सुनाया है.

    इन फर्जी शिक्षाकर्मियों को हुई सजा

    जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज के जरिए शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की नौकरी हासिल की थी, उनमें सुबोध कुमार साहू, शिवकुमार सोनकर, देवेंद्र कुमार साहू, गीता साहू, योगेश कुमार साहू, देवबती साहू, बसंत पटेल, टेमन लाल विश्वकर्मा, हीरालाल साहू, मनोज कुमार सिन्हा, तोरण सिन्हा शामिल हैं, जिन्हें न्यायालय ने कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

    सीईओ के खिलाफ भी हुई थी शिकायत

    आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू का कहना है कि शिक्षाकर्मी फर्जीवाड़ा में जनपद सीईओ समेत छानबीन समिति की भी मुख्य भूमिका रही है, क्योंकि छानबीन समिति के द्वारा फर्जी दस्तावेजों को भी सही बताते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को शिक्षाकर्मी की नौकरी दिलाने का काम किया गया. इस मामले में करीब 20 शिक्षाकर्मियों के अलावा जनपद सीईओ और छानबीन समिति के विरुद्ध भी थाना में शिकायत दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने सिर्फ 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया, बाकी लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने के बजाय उन्हें छोड़ दिया गया. अब जब न्यायालय ने भी आरोप को सही पाते हुए फर्जी शिक्षाकर्मियों को सजा दे दी है, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि छानबीन समिति में शामिल लोगों के द्वारा इस फर्जीवाड़े को अमलीजामा पहनाया गया था, लिहाजा उनके विरुद्ध भी कार्यवाही किया जाना चाहिए.

  • हनी ट्रेप कांड में एसआईटी के हाथ लगे अहम सबूत -मास्टर माइंड श्वेता जैन के लॉकर ने उगले राज़ !

    हनी ट्रेप कांड में एसआईटी के हाथ लगे अहम सबूत -मास्टर माइंड श्वेता जैन के लॉकर ने उगले राज़ !

    भोपाल। हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही स्पेशनल इंवेस्टिगेशन टीम मंगलवार को मामले में आरोपित श्वेता जैन और आरती दयाल के लॉकरों की जांच करने पहुंची। एसआईटी की टीम ने इंद्रपुरी स्थित एचडीएफसी बैंक में लॉकर खंगाले। एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक एसआईटी को आरोपित श्वेता जैन के लॉकर से साढ़े तेरह लाख नगद बरामद हुए हैं जबकि आरोपित आरती दयाल का लॉकर खाली मिला है। एसआईटी ने मौके पर ही लॉकर से बरामद रूपए का जप्ती पंचनामा बनाकर अपने कब्जे में ले लिया है।

    एसआईटी की टीम ने मंगलवार शाम बैंक में करीब चार घंटे जांच की। सूत्र बताते हैं कि आरोपित आरती दयाल गिरफ्तारी से दो दिन पहले बैंक आई थी और उसने लॉकर खाली कर दिया था और पैसा आईसीआईसीआई बैंक में पहुंचाया था।

    एसआईटी इसी मामले में बुधवार को प्रभात पेट्रोल पम्प स्थित आईसीआईसीआई बैंक जाकर पड़ताल करेगी।

    गौरतलब है कि 19 सितंबर की दरम्यानी रात को एसटीएफ, एसआईटी, सीबीआई की टीमों ने मिलकर भोपाल की चार महिलाओं के यहां पर छापे मारकर उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं के पास से कई राजनैतिक नेताओं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की सीडी, मोबाइल रिकार्डिंग व दस्तावेज बरामद हुए थे। मामले का खुलासा इंदौर स्थित पलासिया थाने में दर्ज उस रिपोर्ट से हुआ जिसमें नगर निगम के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह ने आरोप लगाया था कि उसे कुछ महिलाओं द्वारा ब्लैकमेल करके दो करोड़ रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है।

    महिलाओं ने उसके अंतरंग दृश्यों का वीडियो बनाया है जिसे सार्वजनिक करने की धमकी दी जा रही है। पुलिस ने जांच के दौरान भोपाल की चार महिलाओं के नाम सामने आए थे। पूरे मामले में प्रदेश में सियासी हलचल पैदा कर दी थी। इन महिलाओं के पास से जिन लोगों के वीडियो मिले हैं, उसमें कई बड़े नेता और अफसर भी शामिल हैं।

  • इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    भोपाल। मध्यप्रदेश के हनी ट्रेप मामले में दिवाली से पहले फ़िर से उबाल आ गया । मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा भोपाल नगर निगम के विभाजन का शगूफा छोड़कर हनी ट्रेप मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया । कुछ हद तक सरकार को इसमे कामयाबी भी हासिल हुई । भोपाल के कॉंग्रेस -भाजपा सहित अन्य नेता पिछ्ले कई दिनों से नगर निगम विभाजन के पक्ष -विपक्ष में उलझ गए और समाचार पत्रो से हनी ट्रेप मामला बख़ूबी गायब होगया । परन्तु कल अचानक इन्दौर उच्च न्यायालय खंड पीठ में लंबित मामले ने दुबारा हनी ट्रेप मामले को गरमी दे दी और न्यायालय की कमलनाथ सरकार को लथाड़ ने सबका ध्यान हनी ट्रेप मामले पर केन्द्रित कर दिया । अदालत की दख़ल ने यह साबित कर दिया है कि हनी ट्रेप में शामिल विष कन्याओं के द्वारा डसे गए राजनेता , अफ़सर , नौकरशाह अब बेनक़ाब ज़रूर हो सकेगे ।
    गौरतलब हो कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कल सोमवार को हनीट्रैप मामले में कमलनाथ सरकार को लताड़ लगाई। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अब एसआईटी चीफ को उसकी अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकता।
    बता दें कि हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर सुनवाई हो रही थी। याचिका में निवेदन किया गया है कि सरकार एसआईटी में परिवर्तन करके मामले की जांच को प्रभावित कर रही है।

    गृह सचिव की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट
    हाईकोर्ट ने हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के चीफ को बार-बार बदले जाने पर गृह सचिव से इस बदलाव का कारण जानने के लिए बंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने ये रिपोर्ट पेश किया था लेकिन रिपोर्ट में अधूरी जानकारी और संतोषजनक तथ्य नहीं होने की वजह से हाइकोर्ट ने फटकार लगाई।


    एसआईटी को अब हाईकोर्ट का संरक्षण
    हाईकोर्ट ने दिया कि अब उसकी अनुमति के बिना एसआईटी में शामिल किसी भी अधिकारी का तबादला नहीं किया जा सकता, ना ही एसआईटी की जांच से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अभी तक हनी ट्रैप मामले में जितने भी इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए गए हैं, उन्हें जांच के लिए हैदराबाद स्थित आईटी लैब में भेजा जाएगा। हाइकोर्ट ने एसआईटी अधिकारियों को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।

    हनी ट्रेप मामले की जांच पर हाईकोर्ट की रहेगी नज़र
    समझा जा रहा है कि हाइकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब पूरी जांच कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होनी तय हुई है, एसआईटी को इन्वेस्टिगेशन स्टेटस रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही अब एसआईटी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाये, एसआईटी में नियुक्त मौजूदा अधिकारियों का हाईकोर्ट की अनुमति के बिना तबादला नहीं किया जा सकेगा।

    इंदौर के वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल ने लगाई है जनहित याचिका 
    बता दें कि हनी ट्रैप मामले का खुलासा होने के बाद इसकी जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया था लेकिन चंद दिनों में ही एसआईटी में कुछ ही दिनों मेें शीर्ष स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ था, इसी पर सीनियर वकील मनोहर दलाल ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने यह अपील की थी कि बार-बार एसआईटी चीफ बदलने से जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही हनी ट्रैप मामले की जांच हाईकोर्ट के देख-रेख में की जाए। इसी पर सुनवाई करते हुए पिछली तारीख पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया था।

    क्या है हनी ट्रेप मामला
    पिछले दिनों मध्य प्रदेश पुलिस ने पांच लड़कियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह दावा किया था कि यह लड़कियां मध्य प्रदेश के नेताओं और नौकरशाहों से अवैध शारीरिक संबंध बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि यह लड़कियां नेताओं और नौकरशाहों को हनीट्रैप का शिकार बनाकर सरकारी कामकाज में दखल देती है। इन्होंने कई कंपनियों को टेंडर दिलाए एवं कई संस्थाओं को काम भी दिलाया। अब यह मामला अवैध संबंधों से बढ़कर भ्रष्टाचार का हो गया है। इस मामले की जद में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सहित पूर्व सांसद , कई आईएएस , आईपीएस अफसरों सहित राजनैतिक दलों के बड़े बड़े नेता और अफ़सर आए हैं । जाँच में जिनकी विडिओ व अन्य सामग्रियाँ आई हैँ । इसी मामले में एक लड़की को 15-16वर्ष की आयु में हनी ट्रेप कांड में शामिल किये जाने के भी प्रमाण मिले हैँ । इस विष कन्या गेंग की मुखिया के पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री संतरी से घनिष्ठता के भी पुख्ता प्रमाण मिले हैँ । राजनैतिक संरक्षण में हनी ट्रेप गेंग की मुखिया द्वारा किये गए कांड भी उजागर हुऐ हैं । इसी गेंग में शामिल विष कन्या का पति भी अचानक मीडिया के सामने आकर पत्नि को बेगुनाह साबित कर रहा था , जिसकी विडिओ भी धड़ल्ले से चली परन्तु जिस नाटकीय ढंग से वह सामने आया था , उसी नाटकीय ढंग से वह अब गायब है। गायब हुआ या कराया गया यह भी जाँच का विषय है । परन्तु जाँच एजेंसी द्वारा उसकी और से गफ़लत करना भी संदेह को जन्म देता है 

  • 18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    रायपुर. राज्य शासन ने विशेष सचिव आइएएस मुकेश बंसल को कृषि विभाग के उन 34 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया है जिन पर कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी में 18 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार करने तथा सरकार को आर्थिक चूना लगाने का आरोप है. कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में तेजी आई है अन्यथा लगभग डेढ़ साल से आरोपी ना सिर्फ बचे हुए हैं बल्कि कई तो प्रमोशन भी पा गए.

    कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के उप सचिव जेवियर तिग्गा द्वारा विगत 18 अकटूबर को जारी आदेश में कहा गया है कि जांच अधिकारी 30 दिन के अंदर जांच कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे. आदेश में कहा गया है कि फरवरी 2018 में आयोजित विधानसभा सत्र में उठे एक सवाल में वर्ष 2016—17—18 तक हुई विभागीय खरीदी में भंडार क्रय नियम के उल्लंघन का मामला सामने आया था, जिसके बाद संचालक कृषि ने एक आदेश जारी करते हुए जांच समिति गठित की थी जिसने अपने प्रतिवेदन में 34 अधिकारियों को जांच के धेरे में पाया था जिन्हें अब कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

    प्रकरण की सम्पूर्ण जांच और आरोपियों को सुनवाई का मौका देने मुकेश बंसल को जांच अधिकारी बनाया गया है जो फिलहाल कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के विशेष सचिव हैं. जांच के घेरे में 34 कृषि अधिकारी हैं, इनमें उपसंचालक कृषि से लेकर संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं. नियुक्त जांच अधिकारी आइएएस मुकेश बंसल ने इस संवाददाता से चर्चा करते हुए कहा कि ‘सारे प्रकरण को समझने में लगा हूं. आरोपी अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी हुआ है. उनका जवाब मिलने के बाद हम जांच प्रारंभ करेंगे.’

    आज की जनधारा समाचार—पत्र ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद संयुक्त संचालक विनोद कुमार वर्मा पर गाज गिरी थी और वे निलंबित हो चुके हैं. इसी तरह तत्कालीन संचालक एम एस केरकेटटा को भी नोटिस मिला है. आश्चर्य कि सी वीड घोटाले का जांच प्रतिवेदन फिलहाल नही आया है अन्यथा 60 से ज्यादा अधिकारी जांच के घेरे में होंगे. अगर ये सभी दोषी पाए गए तो पूरा का पूरा कृषि और उद्यानिकी विभाग ही खाली हो जाएगा. ये पूरा मामला भंडार क्रय नियम के उल्लंघन से संबंधित है. लगभग 18 करोड़ के इस घोटाले के तहत कृषि विभाग में कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी हुई थी जिसमें विभागीय अफसरों ने अलग—अलग जिलों में करोड़ों का वारा न्यारा किया था.

    महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की है. दोहरा आश्चर्य यह कि करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों को सजा देने के बजाय उलटा मलाईदार पदों पर बिठा दिया गया है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2015—16 में विभाग के अधिकारियों ने भंडार क्रय नियम का उल्लंघन करते हुए 18 करोड़ की खरीदी की. इसके तहत एनएफएसएम, हरित क्रांति एवं आरकेवीवाय योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर सूक्ष्म तत्व—वीडीसाइड—कीटनाशक रसायन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा किया है.

    इस मामले की फाइल नही है : केडीपी राव, कृषि उत्पादन आयुक्त

    IAS के.डी.पी. राव

    कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोपी अफसरों को शोकॉज नोटिस दिया जा चुका है. हालांकि एक जांच समिति पहले ही मामले की जांच कर रही है परंतु सरकार संतुष्ट नही थी और विधानसभा में भी सवाल उठे थे इसलिए नए सिरे से जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उल्लेखनीय है कि केडीपी राव आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं परंतु अभी तक उन्होंने इस मामले की फाइल नही देखी है.
    राव से जब पूछा गया कि विधानसभा में मामला उठे एक साल से ज्यादा हो गया, इसके बावजूद आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी तो उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी निलंबित हुए हैं. यह पूछने पर कि क्या इसके पहले के जांच अधिकारियों ने ईमानदारी से जांच नही की तो राव ने कहा कि ये आपकी रॉय हो सकती है, मैंने ऐसा कुछ भी नही कहा.

    वैसे राव के इस बयान का मतलब यही निकाला जा सकता है कि इसके पहले तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त रहे, मुख्य सचिव एस.के.कुजूर या आइएएस भीम सिंह के कार्यकाल में इस मामले की जांच तो हुई परंतु वह किसी अंजाम पर नही पहुंच सकी और ना किसी दोषी अफसर को सजा हो सकी. 

  • हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन कटौती को असंवैधानिक करार दिया

    हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन कटौती को असंवैधानिक करार दिया

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन से की गई कटौती चार माह मे वापस करने शासन को दिया निर्देश…

    अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से पंचायत सचिवो ने की थी याचिका प्रस्तुत ।छतीसगढ हाई कोर्ट ने पंचायत सचिवो की वेतन कटौती को असंवैधानिक करार देते हुए उनसे की गई वसूली को लौटाने एवं बिना सुनवाई का अवसर दिये वतन पुन निर्धारण को असंगत बताते हुए याचिका स्वीकार करते हुए पंचायत सचिवो के पक्ष मे ऐतिहासिक फैसला दिया।

    जिला जांजगीर-चांपा के पामगढ़ जनपद के 50 से अधिक पंचायत सचिवो ने हाई कोर्ट अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी सैम कोसी की एकल खण्डपीठ ने यचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा दिये गए तर्को को विधि संगत मानते हुए निर्णय दिया ।न्यायमूर्ति पी सैम कोसी ने शासन को चार माह मे यचिकाकर्तओ से की गई कटौती वापस करने का निर्णय दिया। साथ ही स्थानीय निधि सम्परिक्षा द्वारा वेतन निर्धारण मे सचिवो को देय बड़े हुए वेतन को वापस कम करने के निर्णय पर यचिका कर्ता को अपना पक्ष रखने हेतु मौका देते हुए, विधि अनुरुप निर्णय लेने हेतु शासन को निर्देशित भी किया है।याचिकाकर्ता रजनी कुमारी जटाशंकर, के के अनंत वा अन्य 50 यचिककर्ता के द्वारा अधिवक्ता रोहित शर्मा, राहुल शर्मा, वतन साहु के माध्यम से यह याचिका प्रस्तुत की थी ।

  • क्यों ना निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के करवाने के निर्देश दिए जाएं ?-हाईकोर्ट

    क्यों ना निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के करवाने के निर्देश दिए जाएं ?-हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट (Rajasthan Highcourt) : ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस (Notice issued) जारी कर पूछा है कि क्यों ना आगामी नगर निगम, नगर पालिका , नगर पंचायत चुनाव (Nagar palika election) बिना ओबीसी आरक्षण (OBC reservation) के करवाने के निर्देश दिए जाएं ? जयपुर। मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और न्यायाधीश मोहम्मद रफीक ने यह अंतरिम आदेश समता आंदोलन समिति व तीन अन्य की जनहित याचिका पर दिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव,सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग,स्वायत्त शासन विभाग,चुनाव आयोग और केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के वकीलों को नोटिस दिलवाकर अगली सुनवाई 7 नवंबर को तय की है।एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने बताया कि 102 वें संविधान संशोधन के जरिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को परिभाषित कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद से ओबीसी जाति वही होगी जिसके लिए केन्द्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सिफारिश करेगा और सरकार व संसद की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति अधिसूचना जारी करेगें। यह संशोधन 14 अगस्त,2018 से देश में लागू हो चुका है लेकिन,केन्द्र सरकार ने अब तक राष्ट्रपति के जरिए ओबीसी जातियों को कोई भी सूची जारी नहीं की है। वर्तमान में देश और राज्य में कोई भी जाति ओबीसी नहीं है और इसलिए ओबीसी सूची के अभाव में निकाय चुनाव में ओबीसी जाति का आरक्षण देना असंवैधानिक है। राज्य सरकार का निकाय चुनाव में ओबीसी जातियों के लिए सीटों का आरक्षण करना गलत है इसलिए इसे रद्द किया जाए और बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवाए जाएं।इसके साथ ही याचिका में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम-2009 में दी गई ओबीसी जाति की परिभाषा को भी चुनौती दी गई है। इसके अनुसार राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित की गई जातियां ही ओबीसी जातियां मानी जाती हैं। 102 वें संवैधानिक संशोधन के बाद ओबीसी की सूची की केवल राष्ट्रपति ही जारी कर सकते हैं। इसलिए इस परिभाषा को संविधान के विपरीत होने के कारण रद्द किया जाए।
  • मोबाइल ऐप से परीक्षा…शिक्षा विभाग फेल ,विद्यार्थी- शिक्षक घंटों हलाकान ,दिवाली की छुट्टी में करनी होगी रिजल्ट की एंट्री…?

    मोबाइल ऐप से परीक्षा…शिक्षा विभाग फेल ,विद्यार्थी- शिक्षक घंटों हलाकान ,दिवाली की छुट्टी में करनी होगी रिजल्ट की एंट्री…?

    रायपुर। प्रदेश में पहली बार एप के माध्यम से कक्षा पहली और दूसरी की मोबाइल ऐप टीम्स टी द्वारा  19 अक्टूबर से होने वाली सावधिक आकलन परीक्षा नेटवर्क की वजह आधे से ज्यादा शालाओं में आयोजित नहीं की जा सकी। खराब नेटवर्क और सर्वर की वजह से टीचरों के मोबाइल पर ऑनलाइन परीक्षा लेने के लिए टीम्स टीचर एप परीक्षा के एनमौके पर चालू ही नहीं हुआ जिससे पूरे राज्य में  30,000 से ज्यादा प्राथमिक शासकीय शालाओं के शिक्षक और विद्यार्थी घंटो हलाकान हुए।

    बताया जा रहा है जिन स्कूलों में परीक्षा नहीं हो सकी है, वहां सोमवार को पुनः परीक्षा का आयोजन होगा। ऐप के नहीं खुलने की स्थिति में एससीईआरटी की वेबसाइट पर कक्षा 1 और 2 के 19 अक्टूबर के प्रश्नपत्र पीडीएफ फाइल में  विकल्प के तौर पर अपलोड कर दिए गए है। कक्षा पहली और दूसरी के आकलन में प्राप्त अंको की तुरंत ऐप में एन्ट्री होनी है।
    बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण के आपाधापी में ली जा रही है इस परीक्षा से  शिक्षक और विद्यार्थी, विभाग के कर्मी  घंटों परेशान हुए। कुछ जगहों पर नेटवर्क होने से यह परीक्षा आयोजित की जा सकी। विगत दिवस प्रातः 8 बजे से नेटवर्क की तलाश में शिक्षक परेशान होकर इधर उधर संपर्क करते रहे लेकिन कोई हल नहीं निकला।
    4 घंटे बाद लगभग 12:00 बजे एससीईआरटी की वेबसाइट पर परीक्षा के प्रश्न पत्र देकर कर ऐप नहीं खुलने की दशा में तीसरी से आठवीं की की तरह ब्लैक बोर्ड पर पीडीएफ फाइल से परीक्षा लेने के लिए संदेश प्रसारित किया गया तब तक अधिकांश स्कूलों के बच्चे मध्यानह भोजन करके घर को जा चुके थे.

    बताया जा रहा है कि अब सोमवार को दो विषयों की परीक्षा होगी ।मोबाइल एप के द्वारा पहली और दूसरी की परीक्षा 19 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ली जाएगी।

    14 अक्टूबर से शुरू हुई कक्षा तीसरी से आठवीं तक सावधिक आकलन 19 अक्टूबर को  सफलतापूर्वक संपन्न हुई।समय-सारणी के अनुसार मूल्यांकन कर स्कुलो को अंकों की डाटा प्रविष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं। मोबाइल ऐप के माध्यम से परीक्षा लिए जाने के  नए प्रयोग में शिक्षा विभाग असफल साबित हुआ। अनेक शालाओं में आज भी कई शिक्षकों के द्वारा टीम्स टी ऐप डाउनलोड नहीं किया गया है।

    मूल्यांकन के लिए वेबसाइट में उत्तर-एंस एल ए गाइडलाइन अनुसार कक्षा तीसरी से आठवीं तक के मूल्यांकन कार्य हेतु वेबसाइट में मॉडल उत्तर परीक्षा समाप्ति के बाद जारी किया जाना था जिसके आधार पर 24 तारीख तक मूल्यांकन कार्य करना होगा लेकिन मॉडल उत्तर 20 तारीख को भी जारी नहीं किया गया है।कई स्कूलों में मूल्यांकन का कार्य पहले ही शुरू कर दिया गया है।

    दिवाली अवकाश में एंट्री का कार्य …???

    राज्य स्तरीय आकलन परीक्षा के प्राप्त अंकों का समय सारणी अनुसार रिजल्ट तैयार करने 25 अक्टूबर से 2 नवंबर तक एस एल ए मूल्यांकन  एंट्री कार्य होना है। ऐसे में शिक्षकों द्वारा  दिवाली अवकाश प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसके पूर्व दशहरे के अवकाश में भी अघोषित रूप से दबाव बनाकर सभी शिक्षकों को टीम्स टी  मोबाइल ऐप पंजीयन और स्कूल पंजीयन, विद्यार्थी प्रोग्रेशन का कार्य कराया जा रहा था। शिक्षक संघो  द्वारा आकलन प्रणाली एव क्रियान्वयन के तरीकों के विरुद्ध असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।

  • अब पाकिस्तान से न चिट्ठी आएगी, न संदेश, पड़ोसी ने बंद कर दी डाक सेवा…

    अब पाकिस्तान से न चिट्ठी आएगी, न संदेश, पड़ोसी ने बंद कर दी डाक सेवा…

    दिल्ली भारत औऱ पाकिस्तान के बीच संबंध अपने सबसे बुरे दौर में गुजर रहे हैं. दोनों देशों के बीच बातचीत के सारे रास्ते बंद होते जा रहे हैं. अब पाकिस्तान से देश में चिट्ठी पत्री भी नहीं आएगी। भारत पाकिस्‍तान के बीच बुरे से बुरे हालातों में भी दोनों देशों के बीच एक सेवा कभी बंद नहीं हुई लेकिन अब पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच डाक मेल सेवा को रोक दिया है. पाकिस्तान ने पिछले 27 अगस्त को भारतीय डाक अधिकारियों से अपने देश के लिए डाक मेल की एक खेप को स्वीकार किया था, उसके बाद से यह सेवा बंद कर दी गई है।डाक सेवा निदेशक ने बताया कि पाकिस्तान ने अपनी तरफ से ये सेवा बंद कर दी है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान देर सबेर इस सेवा को शुरु कर देगा।
  • अब आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखेगी सरकार: सुप्रीम कोर्ट में कहा सोशल मीडिया दे रहा है कामकाज में दखल, इसको कंट्रोल करना होगा

    अब आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखेगी सरकार: सुप्रीम कोर्ट में कहा सोशल मीडिया दे रहा है कामकाज में दखल, इसको कंट्रोल करना होगा

    दिल्ली. सरकार ने कई तरीके के कानून बनाकर उनकी अपने हिसाब से व्याख्या की है. अब ऐसा लगता है कि सरकार की नजरें इंटरनेट पर टेढ़ी हो गई हैं.केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए अपन पक्ष रखा औऱ अदालत को बताया कि इंटरनेट राजनीति में काफी ज्यादा हस्तक्षेपर कर रहा है. ये कामकाज को भी प्रबावित कर रहा है. सरकार ने कोर्ट से देश में सोशल मीडिया प्लेटफार्म के संचालन को नियंत्रित करने वाले नियमों को अंतिम रूप देने और उन्हें नोटीफाई करने के लिए तीन महीने का वक्त मांगा है. माना जा रहा है कि सरकार अब सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के मूड में है औऱ वो ऐसा कानून लाने जा रही है जिससे आपका सोशल मीडिया अकाउंट सरकार की नजर में होगा और इस पर सरकार किसी न किसी तरीके से अपना नियंत्रण रखेगी.
  • रेप पीड़िता के खिलाफ ये Action चाहता है BJP का चिन्मयानंद…

    रेप पीड़िता के खिलाफ ये Action चाहता है BJP का चिन्मयानंद…

    दिल्ली. यौन शोषण के मामले में जेल में बंद पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने जेल से सोमवार को एक पत्र भेजकर पुलिस अधीक्षक से मांग की कि उनसे पांच करोड़ की रंगदारी मांगने की आरोपी बलात्कार पीड़िता समेत चारों आरोपियों पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए. स्वामी चिन्मयानंद की सुप्रीम कोर्ट की वकील पूजा सिंह ने बताया कि सीजेएम ओमवीर सिंह की अदालत में उन्होंने गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए जो प्रार्थना पत्र दिया था, उस पर सुनवाई होने के बाद आदेश को सुरक्षित कर लिया गया है।

    वहीं, जेल अधिकारी ने बताया कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने उन्हें एक पत्र दिया है जिसमें उनसे पांच करोड़ की रंगदारी मांगने वाले आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई. यह पत्र विभागीय डाक से पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर के पास भेज दिया गया है. चिन्मयानंद ने लिखा है कि वह नौ अगस्त को अपने आवास पर बैठे थे तभी सचिन सेंगर उनके पास आया और उनसे कहा कि आपकी प्रतिष्ठा धूमिल करने के उसके पास पूरे सबूत हैं, आप पांच करोड़ रुपए दे दो नहीं तो आपके विरुद्ध झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा।

    चिन्मयानंद द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आरोपी संजय विक्रम सचिन और पीड़िता को रंगदारी मामले में एसआईटी ने दोषी पाया है जिन्हें जेल भी भेजा जा चुका है. वहीं उन्होंने एसआईटी के प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि उक्त चारों आरोपियों के अलावा अन्य लोग भी गिरोह बनाकर इस मामले में संलिप्त होकर अपराध कर रहे हैं. पत्र में उन्होंने आरोपी की मां को भी अपराधिक एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त बताया गया है. साथ ही पीड़िता के पिता पर दो मुकदमे का विवरण दिया है।

    गौरतलब है कि स्वामी चिन्मयानंद पर उन्हीं के कालेज में पढ़ने वाली एक छात्रा ने वीडियो वायरल करके यौन शोषण का आरोप लगाया था. उसके बाद पीड़िता लापता हो गई थी. पीड़िता की ओर से चिन्मयानंद पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. उधर, चिन्मयानंद के वकील ने पांच करोड़ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें पीड़िता समेत चार आरोपियों को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जेल भेज दिया है. यौन शोषण के मामले में चिन्मयानंद भी जेल में बंद हैं।