Category: राजनीती

  • अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर चुने जाने को बीजेपी कोर्ट में देगी चुनौती, पूर्व मुख्यमंत्री बोले- हम चाहते हैं जनता का अधिकार बना रहे

    अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर चुने जाने को बीजेपी कोर्ट में देगी चुनौती, पूर्व मुख्यमंत्री बोले- हम चाहते हैं जनता का अधिकार बना रहे

    रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने कहा है कि हम चाहते थे कि जनता का अधिकार बना रहे और जनता के माध्यम से ही महापौर का निर्वाचन हो, लेकिन सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर का चुनाव कराना चाहती है. उन्होंने कहा कि हम पार्षद चुनाव में मजबूती के साथ खड़े होंगे. ज्यादा से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज करेंगे।


    गौरतलब है कि पिछले दिनों भूपेश सरकार ने महापौर चुनाव कराए जाने के संदर्भ में मंत्रीमंडलीय उप समिति का गठन किया था. इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. इस रिपोर्ट को अब सरकार की मंजूरी के लिए कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा. हालांकि यह तय है कि राज्य में महापौर के निर्वाचन में अब जनता की सीधी भागीदारी खत्म हो जाएगी. चुने हुए पार्षद महापौर का चुनाव करेंगे. पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने एक बयान में यह कहा था कि अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में कोई खराबी नहीं है.

    महापौर चयन के लिए दल बदल कानून लाने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका मतलब यह है कि महापौर के चुनाव के लिए पूरी छूट दे दी जाए। किसी को भी पद पर बिठा दिया जाए। सरकार ने महापौर चुनाव कराए जाने के संदर्भ में मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया था।

    समिति ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इस रिपोर्ट को अब सरकार की मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा। बैठक में संगठन चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई। रायपुर के सभी 16 मंडलों में 30 और 31 अक्टूबर को मंडल अध्यक्ष और कार्यकारिणी का चुनाव होगा। इसके लिए हर मंडल में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है।

    इसमें चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी और पर्यवेक्षक शामिल हैं। रायपुर में 2800 सक्रिय सदस्य बने हैं और 91 फीसद बूथ कमेटियों का गठन पूरा कर लिया गया है। रायपुर में नए सदस्य बनाने के लिए 41 हजार का लक्ष्य दिया गया था, जो 90 हजार तक पहुंच गया। बैठक में डॉ रमन सिंह ने साफ किया कि मंडल चुनाव में मेरा-तेरा की जगह ऐसे सदस्यों को मौका दिया जाए, जो संगठन को मजबूत करने का काम करें।

  • मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल और विधायकों के नए आवास का भूमिपूजन, नया रायपुर में होगा निर्माण

    मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल और विधायकों के नए आवास का भूमिपूजन, नया रायपुर में होगा निर्माण

    रायपुर। मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल और विधायकों के नए आवास के लिए धनतेरस को नया रायपुर में भूमि पूजन किया जाएगा. सीएम भूपेश बघेल ने नए आवास को लेकर कहा कि जब तक राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्री वहां नहीं रहेंगे तब तक नया रायपुर नहीं बसेगा

    उन्होंने कहा कि 6000 करोड़ की राशि वहां खर्च हो चुकी है इसलिए नवा रायपुर में बसाहट जरूरी है. आपको बता दें नया रायपुर के सेक्टर 19 में सीएम हाउस, राजभवन के साथ ही मंत्री, विधायकों औऱ उच्च अधिकारियों के लिए बंगले बनाए जाएंगे. पीडब्ल्यूडी ने निर्माण के लिए 531 करोड़ का टेंडर जारी किया था. भूमिपूजन के बाद निर्माण कार्य शुरु कर दिये जाएंगे.

  • सीडी कांड की सुनवाई छत्तीसगढ़ से बाहर किसी कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए CBI ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका

    सीडी कांड की सुनवाई छत्तीसगढ़ से बाहर किसी कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए CBI ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल मचाने वाले पूर्व मंत्री राजेश मूणत के कथित अश्लील सीडी कांड मामले में एक नया मोड़ आ गया है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ से बाहर किसी दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए याचिका लगाई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच में यह अर्जी दी गई है। इस महीने की 21 तारीख को पहली सुनवाई होनी है। सीआरपीसी की धारा 406 के तहत सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया है, इस पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का अधिकार है। इसमें सुप्रीम कोर्ट प्रकरण को एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट या हाईकोर्ट के अधीन किसी दूसरे कोर्ट के समान कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर सकता है। बता दें कि 27 अक्टूबर 2017 को कथित अश्लील सीडी का मामला सामने आया था, जिसके बाद राजनीति गरमा गई थी। इस मामले में बीजेपी सरकार ने सीबीआई जांच का ऐलान किया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की थी। बाद में जांच कमजोर पड़ गई थी।
    इस मामले में सीबीआई ने
    कैलाश मुरारका, विजय भाटिया समेत कई लोगों को प्रतिवादी बनाया है।

  • ड्रॉप होंगे तीन मंत्री?

    ड्रॉप होंगे तीन मंत्री?

    देवती कर्मा के विधायक निर्वाचित होने के बाद सियासी गलियारों में उन्हें मंत्री बनाने की अटकलें बड़़ी तेज हैं। इसके पीछे ठोस तर्क भी दिए जा रहे….बस्तर का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बेहद कम है। सिर्फ एक। कवासी लकमा उद्योग और आबकारी विभाग संभाल रहे हैं। वहीं, सरगुजा से तीन मंत्री हैं। सबसे सीनियर टीएस सिंहदेव। फिर प्रेमसाय सिंह और नए मंत्री अमरजीत भगत। जाहिर है, सरकार मंत्रिमंडल में बस्तर का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहेगी। और, सियासी दृष्टि से देवती से अच्छा कोई नाम नहीं हो सकता। बस्तर शेर कहे जाने वाले दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी हैं। ट्राईबल भी और महिला भी। कहने के लिए हो जाएगा, भूपेश सरकार ने राज्य बनने के बाद पहली बार दो महिलाओं को मंत्रिमंडल में जगह दी। लेकिन, इसके लिए सरकार को मंत्रिमंडल में एक सर्जरी करनी होगी। क्योंकि, कोटा फुल है। 12 ही मंत्री बन सकते हैं। एक सीट खाली थी, उस पर अमरजीत को मौका मिल गया। वैसे, नगरीय निकाय चुनाव के बाद माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में एक सर्जरी होगी। इसमें दो-से-तीन मंत्री ड्रॉप हो सकते हैं। तीनों के परफारमेंस पुअर है। एक विकेट सरगुजा से गिरेगा। दो और नामों की चर्चा है।

    ट्रेंगुलर मुकाबला

    चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर को छह महीने का एक्सटेंशन देने के लिए सरकार ने केंद्र को रिमाइंडर भेजा है। उसमें बताया गया है कि वर्तमान सीएस को एक्सटेंशन देना क्यों जरूरी है। लिहाजा, अब सीके खेतान और आरपी मंडल के साथ ही सुनील कुजूर का नाम भी सीएस की दौड़ में शामिल हो गया है। हालांकि, पहले यह माना जा रहा था कि भारत सरकार आसानी से एक्सटेंशन देती नहीं। लेकिन, सरकार के रिमाइंडर से यह जाहिर हुआ है कि कुजूर को लेकर सरकार गंभीर है। बहरहाल, रिमाइंडर पर भारत सरकार क्या रुख अपनाती है यह आखिरी समय में ही तय होगा। जानकारों का कहना है, ऐसे केस में भारत सरकार लास्ट वीक या लास्ट दिन भी कई बार फैसले करती है। याने 31 अक्टूबर को कुजूर रिटायर होने वाले हैं तो उससे एक-दो दिन पहले सरकार का फैसला आएगा। यदि एक्सटेंशन मिलेगा तो लेटर आ जाएगा। और, नहीं तो 30 अक्टूबर तक वेट कर राज्य सरकार नए सीएस का ऐलान कर देगी। उससे पहिले सूबे में अटकलों का दौर जारी है। खासकर, ब्यूरोक्रेसी में इसको लेकर खूब गुणा-भाग किए जा रहे हैं। हालांकि, कैलकुलेशन का कोई मतलब नहीं। चीफ सिकरेट्री और डीजीपी वही बनता है, जिसके माथे पर लिखा होता है। वरना, कई आईएएस, आईपीएस बिना इस पद को इनज्वॉय किए बिदा नहीं हो गए होते। सुनील कुजूर भी भला कभी सोचे होंगे कि वे चीफ सिकरेट्री बन सकते हैं। और, एक्सटेंशन देने के लिए सरकार प्रयास करेगी। वे तो बेचारे अदद एक बढ़ियां विभाग के मोहताज थे। इसी तरह रिटायर डीजीपी एएन उपध्याय भी हैं। उनके जैसा दुनियादारी से दूर रहने वाले अफसर को सरकार डीजीपी बनाएगी, उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन, उपध्याय ने पोस्टिंग का रिकार्ड ही बना दिया। पूरे पौने पांच साल डीजीपी रहे।

    मंत्री के लेटरहेड पर वसूली

    स्कूल शिक्षा विभाग के ट्रांसफर में गोलमाल को लेकर सरकार ने मंत्री के ओएसडी और विशेष सहायक की छुट्टी कर दी। लेकिन, इसके बाद भी विभाग में नित नए कारनामे सामने आ रहे हैं। बताते हैं, स्कूल शिक्षा डायरेक्ट्रेट के स्थापना शाखा के एक अधिकारी ने डीईओ, बीईओ के ट्रांसफर के लिए दूसरे विभाग के एक मंत्री का लेटरहेड जुगाड़ लिया। और, जिसने पैसा दिया, उसके लिए उसी लेटरहेड पर मंत्री की तरफ से खुद ही ट्रांसफर की अनुशंसा कर आर्डर निकाल दिया। ताकि, कोई पूछ तो बता दें कि फलां मंत्रीजी ने रिकमांड किया था। स्कूल शिक्षा इससे बेखबर रहे। अफसर के खेल का भंडाफोड़ तब हुआ, जब लिस्ट में एक ही समुदाय के 70 परसेंट से अधिक लोग डीईओ, बीईओ बन गए। सरकार को इसकी जानकारी मिल गई है। जल्द ही स्कूल शिक्षा में तीसरा विकेट गिर जाए, तो आश्चर्य नहीं।

    विवेकानंद का रिकार्ड

    लांग कुमेर के बाद विवेकानंद बस्तर के पहिले आईजी होंगे, जिन्होंने वहां ढाई साल का लंबा कार्यकाल पूरा कर लिया है और अभी भी पिच पर जमे हुए हैं। वे ऐसे समय में बिलासपुर से बस्तर गए थे, जब बिलासपुर में आईजी बने उनका तीन महीना भी नहीं हुआ था। एसआरपी कल्लूरी को बस्तर से हटाने के बाद सरकार किसी उपयुक्त चेहरे की तलाश कर रही थी। उस समय तत्कालीन डीजीपी एएन उपध्याय ने सरकार को सुझाया कि विवेकानंद बस्तर के लिए बेहतर होंगे। इस बेहतर के फेर में विवेकानंद फंस गए। वरना, बस्तर गए अधिकांश आईजी साल, डेढ़ साल में जोर-जुगाड़ लगाकर रायपुर लौट आए। सिर्फ लांग कुमेर ही ऐसे आईपीएस थे, जो लंबे समय तक बस्तर में रहे। लेकिन, वे वैसा खुद चाह रहे थे। उन्हें हिन्दी का प्राब्लम था फिर वहां उन्होंने ऐसा कुछ जमा लिया था कि डीआईजी, आईजी और एडीजी बनने तक कुछ दिन वे बस्तर रेंज में रहे।

    अमिताभ और सोनमणि

    अमिताभ जैन जब दिल्ली डेपुटेशन से लौटे थे तो उस समय शेखर दत्त सूबे के गवर्नर थे। राज्य में भाजपा की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस की। शेखर दत्त ने मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह से अमिताभ जैन को सिकरेट्री के रूप में मांगा था। और, यह दूसरी बार हुआ कि राज्यपाल अनसुईया उईके ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फोन कर सोनमणि बोरा सचिव के रूप में मांगा। और, मुख्यमंत्री ने इसमें तनिक भी देरी नहीं लगाई। सोनमणि का आदेश राजभवन के लिए जारी हो गया।

    22 दिन का कार्यकाल

    सोनमणि बोरा के लिए अखरने वाली बात यह रही कि सबसे कम दिन तक किसी विभाग में सिकरेट्री रहने का रिकार्ड उनके नाम दर्ज हो गया। सिर्फ 22 दिन। इस 22 दिन में एक बहुत बड़ा काम उन्होंने यह किया कि हाईकोर्ट में रिट दायर कर सहायक प्राध्यापकों की भरती पर लगी रोक उन्होंने हटवा दी। संस्कृति सचिव के रूप में ट्राईबल डांस को लेकर भी वे बड़ा तेजी से काम कर रहे थे। ये दोनों उनके हाथ से निकल गए। हालांकि, पहले भी राजभवन के साथ ही हायर एजुकेशन या किसी और विभाग का चार्ज अफसरों के पास हमेशा रहा है। वैसे, छत्तीसगढ़ राजभवन में सुनील कुजूर, आईसीपी केसरी, शैलेष पाठक, अमिताभ जैन सिकरेट्री रहे हैं। आरआर के रूप में सोनमणि का नाम भी इसमें जुड़ गया।

    दुआ कीजिए!

    हायर एजुकेशन में चार महीने में चार सिकरेट्री चेंज हो गए। 31 मई को सुरेंद्र जायसवाल रिटायर हुए थे। रेणु पिल्ले को उनकी जगह सिकरेट्री बनाया गया था। 9 सितंबर को उन्हें हटाकर सोनमणि बोरा को हायर एजुकेशन का दायित्व सौंपा गया। एक अक्टूबर को वे भी बिदा हो गए। अलरमेल मंगई डी अब उच्च शिक्षा की नई सिकरेट्री बनी हैं। इस विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को कुछ अनुष्ठान वगैरह करना चाहिए। ताकि, मंगई कुछ दिन हायर एजुकेशन में बनी रहें।

  • CM के खिलाफ ACB में दर्ज प्रकरण का प्रतिवेदन कोर्ट ने स्वीकारा, केस किया खत्म…

    CM के खिलाफ ACB में दर्ज प्रकरण का प्रतिवेदन कोर्ट ने स्वीकारा, केस किया खत्म…

    रायपुर। सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ एसीबी में दर्ज प्रकरण को खात्मा करने के लिए दुर्ग कोर्ट में आवेदन दिया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर दर्ज केस को खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ ACB ने तत्कालीन कलेक्टर दुर्ग आर. संगीता के द्वारा गठित समिति की सिफ़ारिश के आधार पर आरोपी बनाते हुए अपराध दर्ज किया था।

    ये है पूरा मामला
    विजय बघेल ने एसीबी के समक्ष शिकायत करते हुए जानकारी दी थी कि तत्कालीन पाटन विधायक भूपेश बघेल विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य थे। उन्होंने अपनी पत्नी मुक्तेश्वरी, माता बिन्देश्वरी बघेल दोनों के नाम से वसुंधरा नगर (उत्तर) में 15 बाई 24 मीटर आकार का भूखण्ड आवंटन के लिए आवेदन दिया था। उक्त आकार का प्लाट नहीं होने पर अधिकारियों ने दोनों आवेदिका को विभिन्न आय वर्ग के लिए आरक्षित मानसरोवर आवासीय योजना में उनके मन चाहे आकार के भूखण्ड दिलाने 6-6 आरक्षित प्लाट को एक बनाकर अवैध रुप से आवंटित कर दिया, इस शिकायत पर एसीबी ने 2017 में धारा 120 बी 13(1)डी , 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया था।

  • वार्ड़ क्रमांक 16 के लिए विकास ज्योति के नाम की चर्चा जोरों पर…

    वार्ड़ क्रमांक 16 के लिए विकास ज्योति के नाम की चर्चा जोरों पर…

    खरसिया। नगरीय निकायों के वार्ड़ो के आरक्षण में वार्ड़ क्रमांक 16 सामान्य सीट घोषित होने के बाद प्रत्याशी के रूप में युवा तुर्क विकास अग्रवाल उर्फ ज्योति का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

    बता दें विकास “ज्योति” ने वार्ड़ सहित समूचे नगर में अपनी पैनी पत्रकारिता एवं कुशल व्यवहार के माध्यम से लोगों के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है। अगर ये पार्षद पद के लये अपना नामांकन दाखिल करते हैं, तो इनकी मिलनसारिता और दमदार व्यक्तित्व का लाभ निश्चित तौर पर इन्हे मिलेगा। वहीं वार्ड वासियों के द्वारा भी विकास के नामांकन को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्ड की मांग पर विकास अग्रवाल पार्षद पद के लिये नांमांकन दाखिल करते हैं अथवा नहीं।

  • पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    पार्षद का चुनाव नही लड़ने वाला व्यक्ति और हारा प्रत्याशी भी बनेगा मेयर- सभापति

    ऐसी व्यवस्था करने वाला राजस्थान पहला राज्य

    राजस्थान सरकार ने निकाय चुनाव को लेकर ऐसी व्यवस्था की है जो देश में पहली बार किसी राज्य में लागू हुई है. इसके तहत पार्षद का चुनाव नहीं लड़ने वाला व्यक्ति और हारा हुआ प्रत्याशी भी मेयर-सभापति बन सकता है। यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा विधायक या सांसद का चुनाव लड़े बिना ही या जीते बिना ही मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुन लिए जाते हैं। यह हाईब्रिड मॉडल उतारने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है।

  • उपसमिति के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस अपनी हार से डरी

    उपसमिति के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस अपनी हार से डरी

    रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर-अध्यक्ष चुनाव पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिश को लोकतांत्रिक मूल्यों से खिलवाड़ बताया है। कौशिक ने कहा कि ईवीएम के बजाय मतपत्र और महापौर-अध्यक्ष चुनाव पार्षदों से कराकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस लोकतंत्र पर कब्जा करने का षड्यंत्र रच रही हैं। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि अपनी विफलताओं से घबराए और गत लोकसभा चुनाव के नतीजों में अपना सूपड़ा साफ होने से भयभीत कांग्रेस नेता और प्रदेश सरकार ने अपने कर्मों पर पर्दा डालने के लिए यह निर्णय लिया है। ऐसा करके कांग्रेस ने प्रदेश के लोकतांत्रिक वातावरण को प्रदूषित करने और चुनाव बाद पवित्र जनादेश के साथ मनमाना खिलवाड़ करने का अपना मंसूबा जाहिर किया है।
    प्रदेश सरकार की यह कवायद साफ करती है कि वह जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों कुचलकर अपनी राजनीतिक मनमानी करने पर आमादा है और लोकतंत्र कांग्रेस के लिए कोई मायने नहीं रखता। कौशिक ने कहा कि अपने कर्मों और विफलताओं के बोझ से छटपटाती कांग्रेस और उसकी प्रदेश सरकार को नगरीय निकाय चुनाव में अपनी हार का साफ संकेत मिल चुका है और इसीलिए उसने इस तरह का अलोकतांत्रिक कदम उठाया है।
  • बड़ी खबर-2000 के चूल्हे के साथ मिलेगी 300 यूनिट बिजली फ्री

    बड़ी खबर-2000 के चूल्हे के साथ मिलेगी 300 यूनिट बिजली फ्री

    हरियाणा।कांग्रेस नेता गुलाम नवी आज़ाद, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष शैलजा कुमारी ने शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया है।घोषणा पत्र में उन्होंने कई बड़े ऐलान किये हैं, इसमे उन्होंने 24 घण्टे के अंदर किसानों का कर्ज माफ करना,300 यूनिट बिजली फ्री देना और हर महीने महिलाओं को 2000 रुपये का चूल्हा खर्च देने का एलान किया है।

  • कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान- हमारे नेता ने हमें छोड़ दिया

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी ही पार्टी की आलोचना करते हुए बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने पार्टी के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर जिम्मेदारियों से भाग गए?

    कम-से-कम सलमान खुर्शीद तो यही मानते हैं। पार्टी के इस वरिष्ठ नेता ने पहली बार वह बात खुलकर कह दी जो दबे अंदाज में कहा जा रहा था। खुर्शीद ने कहा, हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे नेता ही छोड़ गए। उन्होंने पार्टी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे से संकट बढ़ा है।
    खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी के इस फैसले के कारण पार्टी हार के बाद जरूरी आत्मनिरीक्षण भी नहीं कर पाई। कांग्रेस को लेकर चर्चा करते हुए पार्टी के सीनियर नेता ने कहा, हम विश्लेषण के लिए भी एकजुट नहीं हो सके कि हम लोकसभा चुनाव में क्यों हारे। हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे नेता ने हमें छोड़ दिया।


    यह पहला मौका है, जब कांग्रेस के किसी नेता ने राहुल गांधी के इस्तीफे के लिए छोड़ जाने जैसे शब्द का इस्तेमाल किया है। खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद एक खालीपन पैदा हुआ है। यह संकट तब और बढ़ता दिखता है, जब सोनिया गांधी उनके स्थान पर अस्थायी तौर पर कमान संभाल रही हैं।
    पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने राहुल गांधी के इस्तीफे को लेकर कहा, मैं नहीं चाहता था कि राहुल गांधी इस्तीफा दें। मेरी राय थी कि वह पद पर रहें। मैं मानता हूं कि कार्यकर्ता भी यही चाहते थे कि वह बने रहें और नेतृत्व करें। उन्होंने कहा, यह एक खालीपन जैसा है। सोनिया गांधी ने दखल दिया है, लेकिन साफ संदेश है कि वह एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर हैं। मैं ऐसा नहीं चाहता।