Author: Sunil Agrawal

  • बालको का सेक्युरिटी ऑफिसर छात्रा का फोटो खींचने भेज दिया अपने मातहत को,फिर जो हुआ जानकर आप हैरान रह जाएंगे

    बालको का सेक्युरिटी ऑफिसर छात्रा का फोटो खींचने भेज दिया अपने मातहत को,फिर जो हुआ जानकर आप हैरान रह जाएंगे

    महिलाओं और स्कूली छात्राओं के साथ हो रहे अत्याचार और अपराध के रोकथाम और अपराधियों को कड़ी सजा देने को लेकर देशभर में एक ओर जहा बहस जारी है। वही दूसरी तरफ बालको का सिक्योरिटी विभाग इन सारे कानून का माखौल उड़ाने में लगा हुआ है। ताजा मामला बालको के सिक्यूरिटी विभाग का है जहाँ अपने बड़े अफसर के कहने पर स्कूली छात्रा का मोबाईल में फोटो खींचने का है दरअसल पूरा मामला बालको थाना क्षेत्र में संचालित एक स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा के साथ हुए घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है। बालको के निजी सुरक्षा कर्मियों की माने तो बालको के सिक्योरिटी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर पिछले दिनों एक सिक्योरिटी गार्ड ने स्कूली छात्रा का फोटो खींचने स्कूल परिसर के पास पहुंच गया, और सिक्योरिटी गार्ड ने अपने मित्र के लड़के को मोबाइल देकर उक्त स्कूली छात्रा का फोटो खिंचने भेज दिया तभी छात्रा ने फोटो खिंचाने से मना कर दिया और मामले की जानकारी पीड़ित छात्रा ने अपने परिजनों को दी, तब पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया। पीड़िता के परिजनों ने इसकी शिकायत उसी सेक्युरिटी अफसर से का दी तभी बवाल को बढ़ता देख फोटो खींचने वाले संबंधित गार्ड को आनन-फानन में सिक्यूरिटी विभाग ने निलंबित कर काम से बाहर कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य सूत्रधार सिक्योरिटी अफसर ने किस ध्येय के साथ स्कूली छात्रा का फोटो खींचने का आदेश सिक्योरिटी गार्ड को दिया था, ये तो वे ही बेहतर जानते है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि जिस सिक्यूरिटी विभाग पर संयंत्र, प्रबंधन व सोसायटी की सुरक्षा का जिम्मा है, उसी विभाग के जवाबदार अफसर महिला सुरक्षा का माखौल उड़ा रहे है। इस पूरे मामले में सिक्योरिटी अफसर ने खुद को बचाने के लिए जहां संबंधित गार्ड को निलंबित कर दिया है। वही दूसरी तरफ निलंबित गार्ड ने इस पूरे मामले की शिकायत जब श्रमिक संगठन में कर दी, तब जाकर बालको प्रबंधन के जवाबदार अफसर एक बार फिर बैकफूट पर नजर आ रहे है और उन्होने जवाबदार सिक्योरिटी अफसर को बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड को कुछ दिनो बाद फिर से काम पर वापस ले लेने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम को तूल पकड़ता देख अब बालको के जवाबदार सिक्योरिटी अफसर एक कर्मी के फर्जी नाम पर नौकरी करने की जांच करने की बात कह रहे है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में बालको के जवाबदार अफसर पीड़ित छात्रा के परिजन और निलंबित गार्ड को साधने में लगे हुए है, ताकि मामला पुलिस थाने तक न पहुंच सके। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि निलंबित गार्ड केा बालको प्रबंधन कब तक नौकरी पर दोबारा रखता है ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगाबालको के जिम्मेदार अफसर खामोश क्योयहां यह बताना लाज़मी होगा कि बालको प्रबंधन यह सब कुछ जानते हुए भी इतने गंभीर मामले में चुप्पी साधे हुए है जबकि अगर मामला तूल पकड़ता है तो बालको प्रबंधन भी उतना ही जिम्मेदार है जितना कि मामले का सूत्रधार सेक्युरिटी अफसर फिर आखिर उस सेक्युरिटी अफसर को बचाने का प्रयास क्यो कही बालको को उस छात्रा की सुरक्षा से ज्यादा अपने शान की फिक्र तो नही है अगर ऐसा नही है तो बालको को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए
  • आंचलिक पत्रकार सम्मेलन का हुआ आयोजन,एसईसीएल छाल में सम्मानित हुए पत्रकारगण…

    आंचलिक पत्रकार सम्मेलन का हुआ आयोजन,एसईसीएल छाल में सम्मानित हुए पत्रकारगण…

    रायगढ़। जिले में पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत छाल पत्रकार गणों के द्वारा प्रथम आंचलिक पत्रकार सम्मान समारोह एवं सम्मेलन का आयोजन एसईसीएल कालोनी के ऑडिटोरियम में रविवार को किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि निरंजन साय, अध्यक्षता एसपी रायगढ़ संतोष सिंह, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सुभाष त्रिपाठी, रमेश अग्रवाल, शशिकांत शर्मा, जिला प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचन्द्र शर्मा, जिला पंचायत सदस्य रजनी राठिया आदि के आतिथ्य में मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन कर किया गया। अतिथियों के सम्मान के पश्चात् अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि निरंजन साय ने छाल पत्रकार संघ की तारीफ की, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पुलिस अधीक्षक रायगढ़ ने पत्रकारिता के मूल्यों को तथा लोकतंत्र की आवाज बनाये रखने के लिये पत्रकारों को साधुवाद दिया।विशिष्ट अतिथि सुभाष त्रिपाठी ने स्व. किशोरीमोहन जी के जीवन पर प्रकाश डाला, वरिष्ठ पत्रकार शशिकांत शर्मा ने ऐसे कार्यक्रम पत्रकारों द्वारा कराये जाने की प्रशंसा की, जिला प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचन्द्र शर्मा ने पत्रकारों को एकजुट होने तथा पत्रकार जगत की बेहतरी के लिये कार्य करने की जरूरत के बारे में बताया। कार्यक्रम में पत्रकार जगत से आये हुए रायगढ़ के पत्रकारों तथा खरसिया व छाल के पत्रकार गणों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण श्रीमती अनिता गर्ग, प्रारंभिक प्रतिवेदन छाल प्रेस क्लब के अध्यक्ष रामकृष्ण पाठक तथा मंच संचालन राजू साहू एवं आभार प्रदर्शन नेहरू देवांगन के द्वारा किया गया। संविधान निर्मात्री समिति के वरिष्ठ सदस्य माननीय किशोरी मोहन त्रिपाठी जी के सम्मान में रखे इस कार्यक्रम की रीढ़ खरसिया अंचल के वरिष्ठ पत्रकार रमेश अग्रवाल द्वारा रखी गई थी। कार्यक्रम में रायगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार रमेश अग्रवाल, पत्रकार साथी प्रकाश थवाईत, अभिषेक उपाध्याय, नितिन सिन्हा, महादेव परिहारी, रवि सांवरिया, भूपेन्द्र सिंह राजपूत, अक्षय कुमार, नवरतन शर्मा, मनीष सिंह, नरेन्द्र चौबे, खरसिया पत्रकार संघ सचिव सुनील अग्रवाल, अमर मंत्री, गोपालकृष्ण नायक, संटी सोनी, मुकेशलहरे सहित बड़ी संख्या में स्थानीय पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
  • झारखंड में चुने गए आधे विधायकों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले और ये चलाएंगे राज्य

    झारखंड में चुने गए आधे विधायकों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले और ये चलाएंगे राज्य

    दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में चयनित 81 विधायकों में 40 विधायक ऐसे हैं, जिनपर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आधे विधायकों पर आपराधिक मामले बताते हैं कि राज्य की कमान कैसे हाथों में होगी। इनमें हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, छेड़खानी व नाजायज तरीके से भीड़ जुटाने से संबंधित आरोप दर्ज हैं।विधानसभा चुनाव लडऩे वाले विधायकों में 44 फीसद विधायक अपनी सीट बचाने में फेल रहे। इस चुनाव में कुल 40 विधायक ऐसे हैैं जिनपर आपरााधिक मामले दर्ज हैैंं। इससे साफ पता चलता है कि राज्य कि विधानसभा में चुने गए आधे माननीय अपराधिक मामलों में लिप्त रहे हैं। अब वो माननीय होकर राज्य की दिशा तय करेंगे।
  • अब कोर्ट ने भी मान लिया कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता…

    अब कोर्ट ने भी मान लिया कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता…

    दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार का हाल इतना बुरा है कि अब अदालतों ने भी मानना शुरु कर दिया है कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। जबलपुर की सीबीआइ कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के जमाने में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है। ये भयंकर समस्या का रूप ले चुका है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। आरपीएफ के एक एसआइ को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हर सरकारी कर्मचारी बेईमानी और घूसखोरी करना अपना फर्ज समझने लगा है। जो कि बेहद गंभीर है। देश में अब शायद ही ऐसा कोई काम हो, जिसके लिए रिश्वत की मांग न की जाती हो।
  • पत्रकारों के लिए बड़ी खबर ,नहीं दर्ज होगा फर्जी मुकदमा।

    पत्रकारों के लिए बड़ी खबर ,नहीं दर्ज होगा फर्जी मुकदमा।

    काउंसिल ऑफ इंडिया ने सरकार को निर्देशित किया है, कि किसी भी पत्रकार पर कोई भी फर्जी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाए, और अगर ऐसा करती है तो मुकदमा दर्ज करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। आपको बता दें कि अगस्त में मिड डे मील में नमक के साथ रोटी खिलाने की एक खबर प्रकाशित हुई थी। जिसमें पत्रकार प्रकाश जायसवाल ने यह खबर प्रमुखता से दिखाई थी और उसी खबर पर उस वक्त आक्रोशित होकर पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उस पर आज पीसीआई ने प्रयागराज में सुनवाई की और सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया, इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। और भविष्य में किसी भी पत्रकार के खिलाफ कोई मुकदमा इस तरह का दर्ज नहीं होना चाहिए। जिससे जो पत्रकार सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाता है अगर आप उस पर षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज करेंगे तो फिर कौन पत्रकारिता करेगा। जस्टिस चंद्र मौली का यह निर्णय भविष्य में नजीर बनेगा।
  • खरसिया नगर की सत्ता अब कांग्रेस के हाथ…. 12 पार्षदों के साथ बनेगी कांग्रेस की शहर सरकार

    खरसिया नगर की सत्ता अब कांग्रेस के हाथ…. 12 पार्षदों के साथ बनेगी कांग्रेस की शहर सरकार

    खरसिया। खरसिया नगर पालिका के चुनाव में कांग्रेस ने 18 वार्डों में से 12 में जीत हासिल करते हुए अपना परचम लहरा दिया है। भाजपा को 5 सीटों पर संतोष करना पड़ा है, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुआ है। इस प्रकार खरसिया नगरपालिका पर कांग्रेस का कब्जा हो गया है और कांग्रेस का अध्यक्ष बनना तय है।

    नगरपालिका खरसिया का चुनाव प्रारंभ से ही मंत्री उमेश पटेल की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था, वहीं नगर के भाजपा नेताओं के आपसी फूट का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा और 18 में से सिर्फ 5 पर ही संतोष करना पड़ा, अगर नगर भाजपा के सभी नेता एकमत होकर टिकट वितरण और ईमानदारी से प्रत्याशी को विजयी बनाने में लगे होते तो आशाजनक परिणाम सामने आ सकते थे। वार्ड़ क्र 5 में श्रीमती हेमा मनोज अग्रवाल को जिताने में दीपक अग्रवाल, विनोद अग्रवाल सहित पूरा परिवार लगा हुआ था, वहीं वार्ड़ क्रमांक 11 के प्रत्याशी हरेराम चन्द्रा ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया, भाजपा प्रत्याशी बंटी सोनी के नामांकन वापिस लेने के बाद से ही हरेराम चन्द्रा को ड़मी प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा था, किंतु हरेराम चन्द्र की जीत ने सिद्व कर दिया की प्रतिद्वंदी कभी कमजोर नही होता, हरेराम चन्द्र की जीत का एकमात्र श्रेय पूर्व एल्ड़रमेन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता दीनदयाल अग्रवाल को जाता है जो नामांकन दाखिल करने के समय से अंत तक हरेराम चन्द्रा के साथ मजबूती से ड़टे रहे और ड़मी प्रत्याशी के रूप में देखे जा रहे प्रत्याशी को विजय दिला दी। इसी प्रकार वार्ड़ क्रमांक 14 में सुनील शर्मा ने अपनी दक्षता एवं चुनाव कौशल से वार्ड़ में कांग्रेस का परचम लहराया तो वार्ड़ क्रमांक 16 में नगर महामंत्री और कद्दावर भाजपा नेता रामचरण अग्रवाल ने दीनदयाल अग्रवाल को विजयी बनाया। 24 दिसंबर के दिन पूरे शहर में उत्सव सा माहौल रहा और भाजपा और कांग्रेस के विजयी प्रत्याशियों के द्वारा अपने अपने वार्ड़ में जूलुस निकालकर मतदाताओं का आभार व्यक्त किया गया। सबसे चर्चित वार्ड़ 12 का चुनाव रहा जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी सुमित अग्रवाल ने 588 में से 190 मत प्राप्त कर त्रिकोणिय संघर्ष बनाकर मजबूत निर्दलीय जनाधार प्राप्त किया, तथा चुनाव हारने के बाद भी वार्ड़ में मतदाताओं के बीच जाकर उनका आभार व्यक्त किया, वहीं वार्ड़ क्रमांक 6 के कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने प्रतिद्वंदी को 316 मतो से हराकर खरसिया नगर पालिका में सबसे ज्यादा मतो से जीतने का रिकार्ड़ बनाया।

    जानें, कौन जीता कौन हारा..

    वार्ड 1 से बीजेपी की रीता जायसवाल ने कांग्रेस की जीवन बाई यादव को 126 मतों से मात दी।

    वार्ड 2 में कांग्रेस से श्वेता सुनील विश्वकर्मा ने 198 वोट से भाजपा की कल्पना मानिकपुरी को हराया।

    वार्ड 3 से निर्दलीय रिया श्रीवास्तव ने 42 वोट से जीत दर्ज कर कांग्रेस के रामकिसुन आदित्य को हराया।

    वार्ड 4 से कांग्रेस प्रत्याशी राजेश सहिस ने 226 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा की पूर्णिमा सहिस को हराया।

    वार्ड 5 से कांग्रेस की हेमा मनोज अग्रवाल ने 61 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा के दीपक अग्रवाल को हराया।

    वार्ड 6 से कांग्रेस की अमिता विनोद राठौर ने 316 वोट से जीत कर भाजपा की आरती वैष्णव को हराया।

    वार्ड 7 से कांग्रेस की प्रत्याशी शकुंतला राठौर ने 04 वोट से जीत कर भाजपा के ललित राठौर को हराया।

    वार्ड 8 से भाजपा के राधे राठौर ने 35 वोट से जीत कर कांग्रेस के दिनेश राठौर को हराया।

    वार्ड 9 से कांग्रेस के ज्योति सिदार ने 70 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा के विनोद सिदार को हराया।

    वार्ड 10 से कांग्रेस की अनुसुइया मेहर ने 243 वोट से जीतकर भाजपा की रजनी झरिया को हराया।

    वार्ड 11 से भाजपा के हरेराम चंद्रा ने 33 मतों से जीत दर्ज कर कांग्रेस के संटी सोनी को हराया।

    वार्ड 12 से कांग्रेस प्रत्याशी सरिता देवी ने 14 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा की कोमल बंसल को हराया।

    वार्ड 13 से कांग्रेस की जयंती शर्मा ने 175 वोट से जीत दर्ज करते हुए भाजपा की ललिता अग्रवाल को हराया।

    वार्ड 14 से श्रीमती राधा सुनील शर्मा कांग्रेस ने 307 वोट से जीत करते हुए भाजपा की मीरा श्रीवानी को हराया।

    वार्ड 15 से ममता सोनू अग्रवाल बीजेपी ने 180 वोट से जीत कर कांग्रेस की पूजा विक्कल अग्रवाल को हराया।

    वार्ड 16 से भाजपा के दीनदयाल अग्रवाल ने 181 वोट से जीत दर्ज कर कांग्रेस की राखी अग्रवाल को हराया।

    वार्ड 17 से परदेसी यादव कांग्रेस ने 160 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा के मुरली राठौर को हराया।

    वार्ड 18 से रेशम गबेल कांग्रेस ने 258 वोट से जीत दर्ज कर भाजपा के त्रिलोचन राठौर को हराया।

    इस तरह नगर पालिका चुनाव परिणामों में कुल 18 वार्ड में कांग्रेस के 12 प्रत्याशी विजयी हुए, वहीं बीजेपी के 05 प्रत्याशी सहित जबकि एक निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई।

  • उन्नाव रेप केस के दोषी कुलदीप सेंगर को मिली उम्रकैद की सजा, पीड़िता की बहन ने फैसले पर जताई खुशी…

    उन्नाव रेप केस के दोषी कुलदीप सेंगर को मिली उम्रकैद की सजा, पीड़िता की बहन ने फैसले पर जताई खुशी…

    उन्नाव रेप केस के दोषी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर की सजा पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाते हुए 25 लाख रुपये जुर्माना का भी ऐलान किया. बता दें कि जज धर्मेश शर्मा ने कुलदीप सेंगर के वकीलों की तरफ से दिए गए हलफनामों को पढ़ा और केस में बहस हुई.इससे पहले तीस हजारी कोर्ट में सेंगर की सजा पर सुनवाई हुई थी. इस दौरान सीबीआई ने दोषी सेंगर को उम्र कैद देने की मांग की थी. सीबीआई ने कहा कि मामला सिर्फ बलात्कार का नहीं, बल्कि इसमें मानसिक उत्पीड़न भी शामिल है. वहीं, इससे पहले इस मामले में तीस हजारी कोर्ट ने जांच को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी. आइए जानते हैं, कब क्या हुआ?4 जून 2017 को उन्नाव के माखी गांव से युवती गायब हुई. थाने में सुनवाई न होने पर पीड़िता की मां कोर्ट पहुंची. सात दिन बाद कोर्ट के दखल पर केस दर्ज हुआ.3 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता दिल्ली से पेशी पर आए. इसके बाद गांव पहुंचे, जहां विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल व अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की. विधायक पक्ष की तहरीर पर माखी थाना ने युवती के पिता पर आर्म्स एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर दी.4 अप्रैल 2018 को पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने माखी गांव के ही विनीत, सोनू, बउवा और शैलू समेत अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया. वहीं, इस मुकदमे में पुलिस ने विधायक के भाई अतुल सिंह का नाम हटा दिया.5 अप्रैल 2018 को पुलिस ने जिला अस्पताल में इलाज करने के बाद शाम को युवती के पिता को जेल भेज दिया, जबकि परिवार वाले इलाज कराने की मांग करते रहे.8 अप्रैल 2018 को पिता को झूठे मुकदमे में फंसाने और हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए युवती ने परिवार सहित लखनऊ में सीएम आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की. वहीं, जेल में बंद युवती के पिता की हालत भी बिगड़ गई और रात 9 बजे जेल अधीक्षक एके सिंह ने जिला अस्पताल भेजा. सुबह 3:49 बजे युवती के पिता की मौत हो गई.9 अप्रैल 2018 को इलाज के दौरान युवती के पिता की मौत का मामला तूल पकड़ा, तब सरकार ने कार्रवाई तेज की.10 अप्रैल 2018 को राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराई. जांच रिपोर्ट के बाद विधायक के भाई अतुल सिंह समेत 5 लोगों पर युवती के पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई.12 अप्रैल 2018 को मामला दिल्ली पहुंचा और कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा. इसके अलावा इसी रात यूपी सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच की मंजूरी दी. उसके बाद सुबह तड़के सीबीआई ने विधायक कुलदीप सेंगर और शशि सिंह के खिलाफ रिपोर्ट की.13 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने सेंगर को लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया.15 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने 14 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की.8 मई 2018 को पीड़िता के चाचा की आपत्ति पर विधायक को उन्नाव जेल से सीतापुर जेल भेज दिया गया.28 जुलाई 2019 को रायबरेली जेल में बंद चाचा से मिलने के लिए युवती अपने वकील की कार से चाची और मासी के साथ जेल जा रही थी, तभी कार की ट्रक से भिड़ंत हो गई, जिसमें चाची और मासी की मौत हो गई. वहीं, वकील और युवती बुरी तरह घायल हो गए.1 अगस्त 2019 को चीफ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने सभी पांचों मामले लखनऊ की अदालत से दिल्ली की सीबीआई अदालत को ट्रांसफर करने के आदेश दिए और कहा कि 45 दिनों में सुनवाई पूरी की जाए.2 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा की सुरक्षा को लकेर रायबरेली की जेल से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया.5 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को इलाज के लिए लखनऊ से दिल्ली लाने का आदेश दिया.9 अगस्त 2019 को दिल्ली की एक अदालत ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ आरोप तय कर दिए. सेंगर को धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण या उत्पीड़न), 376 (बलात्कार और अन्य संबंधित धाराओं) और POCSO के तहत दोषी ठहराया गया.14 अगस्त 2019 को पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सेंगर सहित नौ लोगों पर कोर्ट ने आरोप तय किए.7 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के एम्स में अस्थाई तौर पर कोर्ट लगाने का आदेश दिया.29 सितंबर 2019 को दिल्ली महिला आयोग ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में पीड़िता और उसके परिवार के लिए अस्थाई तौर पर रहने की व्यवस्था एक सुरक्षित स्थान पर की जाएगी.11 अक्टूबर 2019 को पीड़िता की कार पर हमले के मामले में सीबीआई ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.10 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने 16 दिसंबर के लिए अपना फैसला सुरक्षित रखा.16 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को अपहरण और रेप मामले में दोषी करार दिया.
  • सूचना का अधिकार कानून के दुरुपयोग की कोई जानकारी नहीं है-केंद्र सरकार

    सूचना का अधिकार कानून के दुरुपयोग की कोई जानकारी नहीं है-केंद्र सरकार

    भोपालदेश में  सूचना अधिकार अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है । सुप्रीम कोर्ट के इस वक्तव्य से देश भर में कार्य कर रहे आरटीआई कार्यकर्ताओं को भारी मायूसी का सामना करना पड़ा और देश में भ्रष्टाचार के पर्याय बने अफ़सर , नौकरशाहों और कर्मचारियों की खुशी की ठिकाना नही रहा जो आरटीआई के चाबुक से आहत थे।  उनको यह कहने का अवसर मिल गया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने आरटीआई पर शंका व्यक्त की तो हम क्यो नही कर सकते । मुमकिन है सुप्रीम कोर्ट का यह वक्तव्य किसी विशेष मामले या घटना पर आधारित हो । हम यह भी नही कहते कि सुप्रीम कोर्ट ने गलत कहा होगा , परन्तु यह  सच नही है । मुठ्ठी भर लोगों के कुकृत्यों के लिए संपूर्ण समाज को कठघरे में खड़ा नही किया जा सकता उसी तरह यह भी नही कहा जा सकता कि देश में इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है । वेसे सुप्रीम कोर्ट के इस वक्तव्य के बाद सरकार ने सारी शंकाओं को विराम दे दिया । केंद्र सरकार ने सूचना अधिकार अधिनियम की अस्मिता को बचा कर आरटीआई कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित कर दिया । केंद्र सरकार ने व्यक्त किया कि सूचना का अधिकार कानून के दुरुपयोग की कोई जानकारी नहीं है।  केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के दुरुपयोग की कोई जानकारी भारत सरकार के संज्ञान में नहीं है। आगे उन्होने कहा कि कानून के दुरुपयोग से बचने के लिए आरटीआई कानून में पहले से ही व्यवस्था दी गईं है ।प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के दुरुपयोग की कोई विशिष्ट जानकारी भारत सरकार के संज्ञान में नहीं लाई गई है। सिंह ने कहा कि दुरुपयोग से बचने के लिए आरटीआई कानून में पहले से ही व्यवस्था दी गई है. उन्होंने कहा, ‘आरटीआई के तहत जानकारी मांगने का अधिकार निरंकुश नहीं है।जितेंद्र सिंह का ये बयान ऐसे लोगों के लिए जवाब के रूप में देखा जा रहा है जो ये कहते हैं कि आरटीआई कानून का लोग दुरुपयोग करते हैं और परेशान करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।आरटीआई कानून के तहत जन सूचना अधिकारी इस बात को लेकर आपत्ति जताते हैं कि कुछ याचिकाकर्ता एक ही विषय पर कई बार आवेदन करते हैं और कई बार गलत सवाल पूछते हैं, जिसकी वजह से उनका काफी समय खराब होता है.हालांकि केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्व सूचना आयुक्त का कहना है कि ऐसे मामले सिर्फ 1-2 प्रतिशत ही हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था, ‘अन्य कानून की तरह आरटीआई कानून भी दुरुपयोग से अछूता नहीं है. चूंकि ये सूचना का अधिकार कानून है, इसलिए ज्यादा कोशिश सूचना देने के लिए की जानी चाहिए।शैलेश गांधी ने कहा कि इस मामले को हल करने के लिए पूरे देश में आरटीआई आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाना चाहिए. यदि आवेदन ऑनलाइन किए जाते हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति को पता चलेगा कि कौन बार-बार गलती कर रहा है और इस तरह से यह कदम समस्या निवारक के रूप में काम करेगा।बता दें कि सूचना का अधिकार कानून संभवत: आम जनता द्वारा सबसे ज्यादा बार प्रयोग किया जाने वाले कानूनों में से एक है। भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के मुद्दों पर काम करने वाली गैर सरकारी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 से 2016 के बीच देश भर में कुल दो करोड़ 43 लाख से ज्यादा आरटीआई आवेदन दायर किए गए।  इस बीच सबसे ज्यादा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 57 लाख 43 हजार आरटीआई आवेदन दायर किए गए।वहीं महाराष्ट्र में 54 लाख 95 हजार, कर्नाटक में 22 लाख 78 हजार, केरल में 21 लाख 92 हजार, तमिलनाडु में 19 लाख 23 हजार आरटीआई आवेदन दायर किए गए हैं. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया ने केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों द्वारा मुहैया कराई कई जानकारी के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार किया है।बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार आरटीआई संशोधन विधेयक लेकर आई है जिसमें केंद्रीय सूचना आयुक्तों और राज्य सूचना आयुक्तों का वेतन और उनके कार्यकाल को केंद्र सरकार द्वारा तय करने का प्रावधान रखा गया है. आरटीआई कानून के मुताबिक एक सूचना आयुक्त का कार्यकाल पांच साल या 65 साल की उम्र, जो भी पहले पूरा हो, का होता है।अभी तक मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का वेतन मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के वेतन के बराबर मिलता था. वहीं राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त का वेतन चुनाव आयुक्त और राज्य सरकार के मुख्य सचिव के वेतन के बराबर मिलता था।आरटीआई एक्ट के अनुच्छेद 13 और 15 में केंद्रीय सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों का वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाएं निर्धारित करने की व्यवस्था दी गई है. केंद्र की मोदी सरकार इसी में संशोधन करने के लिए बिल लेकर आई है।आरटीआई की दिशा में काम करने वाले लोग और संगठन इस संशोधन का कड़ा विरोध कर रहे हैं. इसे लेकर नागरिक समाज और पूर्व आयुक्तों ने कड़ी आपत्ति जताई है. बीते बुधवार को दिल्ली में केंद्र द्वारा प्रस्तावित आरटीआई संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था जहां पर 12 राज्यों से लोग आए थे।देश के सूचना आयोगों की क्या है स्थिति देश भर के सूचना आयोग की हालात बेहद खराब है। आलम ये है कि अगर आज के दिन सूचना आयोग में अपील डाली जाती है तो कई सालों बाद सुनवाई का नंबर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इन आयोगों में कई सारे पद खाली पड़े हैं।1. आंध्र प्रदेश के राज्य सूचना आयोग में एक भी सूचना आयुक्त नहीं है. ये संस्थान इस समय पूरी तरह से निष्क्रिय है।2. महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में इस समय 40,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं लेकिन यहां पर अभी भी चार पद खाली पड़े हैं।3. केरल राज्य सूचना आयोग में सिर्फ एक सूचना आयुक्त है. यहां पर 14,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं।4. कर्नाटक राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के 6 पद खाली पड़े हैं जबकि यहां पर 33,000 अपील और शिकायतें लंबित हैं।5. ओडिशा सूचना आयोग सिर्फ तीन सूचना आयुक्तों के भरोसे चल रहा है जबकि यहां पर 10,000 से अपील/शिकायतें लंबित हैं. इसी तरह तेलंगाना के सूचना आयोग में सिर्फ 2 सूचना आयुक्त हैं और यहां पर 15,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं।6. पश्चिम बंगाल की स्थिति बहुत ज्यादा भयावह है. यहां स्थिति ये है कि अगर आज वहां पर कोई अपील फाइल की जाती है तो उसकी सुनवाई 10 साल बाद हो पाएगी. यहां पर सिर्फ 2 सूचना आयुक्त हैं।7. वहीं गुजरात, महाराष्ट्र और नगालैंड जैसी जगहों पर मुख्य सूचना आयुक्त ही नहीं हैं. यहां पर सूचना आयुक्त मुख्य सूचना आयुक्त के बिना काम कर रहे हैं।सूचना अधिकार का कैसे होता है उपयोग –सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयोग सूचना पाने संबंधी मामलों के लिए सबसे बड़ा और आखिरी संस्थान है।हालांकि सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सबसे पहले आवेदक सरकारी विभाग के लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन करता है।अगर 30 दिनों में वहां से जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपना आवेदन भेजता है।अगर यहां से भी 45 दिनों के भीतर जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना के आयोग की शरण लेता है।लेकिन मोदी सरकार पर आरोप है कि वो संशोधन के जरिए आरटीआई कानून को कमजोर कर रही है और सूचना आयुक्तों पर दवाब डालना चाहती है ताकि वे ऐसे फैसले न दे सकें जो सरकार के खिलाफ हो।सूचना अधिकार के दुरुपयोग से बचने के लिए प्रावधान – दुरुपयोग से बचने के लिए आरटीआई एक्ट में धारा-8 है जो कि कुछ सूचनाओं का खुलासा करने से छूट प्रदान करता है।इस धारा और उसकी उपधाराओ में स्पष्ट रुप से व्यक्त किया गया है कि किस प्रकार की जानकारी के प्रकटन पर रोक है । दुरुपयोग से बचने के लिए आरटीआई एक्ट में धारा-8 है जो कि कुछ सूचनाओं का खुलासा करने से छूट प्रदान करता है। इसके  अलावा धारा-9 है जो कि कुछ मामलों में सूचना नहीं देने का आधार है । इस धारा में भी सूचनाओं के प्रकटन पर रोक का प्रावधान दिया गया है । अधिनियम की धारा-11में प्रावधान किया गया है कि चाही गईं जानकारी यदि तृतीय पक्ष से संबन्धित है तो उसको सूचना देकर सहमति । वही थर्ड पार्टी से संबंधित जानकारी नहीं दी जा सकती और धारा-24 के मुताबिक ये कानून कुछ संगठनों पर लागू नहीं होता है
  • भाजपा ने रायपुर निगम के 7 बागी प्रत्याशियों को दिखाया बाहर का रास्ता, 6 साल के लिए पार्टी से किया निलंबित …

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    रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी में सक्रिय सदस्यों पर जिन्होंने नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया है. उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने पार्टी के विरूध कार्य करने वाले ऐसे कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया है. जिसका निलंबन आदेश जारी कर दिया गया है। कार्यकर्ताओं के खिलाफ जारी निलंबन की सूची
    वहीं कांग्रेस ने अभी तक बागियों पर निलंबन की कार्रवाई नहीं की है. बीजेपी ने निलंबन आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टीं के विरुध जाने वाले कार्यकर्ताओं पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
  • ‘राम वन गमन पर्यटन’ : छग के इन स्थानों को पर्यटन स्थल में किया जाएगा विकसित, माता कौशल्या मंदिर से होगी शुरुआत, सीएम भूपेश करेंगे शुभारंभ

    ‘राम वन गमन पर्यटन’ : छग के इन स्थानों को पर्यटन स्थल में किया जाएगा विकसित, माता कौशल्या मंदिर से होगी शुरुआत, सीएम भूपेश करेंगे शुभारंभ

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में राम वन गमन परिपथ को एक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा. साथ ही चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण का काम किया जाएगा. जिसकी शुरुआत कौशल्या माता मंदिर से ही होगी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 दिसंबर को सुबह 11 बजे शुभारंभ करेंगे।  इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश मुख्य अतिथि होंगे. इसके अलावा गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे. साथ ही मंत्री अमरजीत भगत, मंत्री शिव कुमार डहरिया विशिष्ट अतिथि होंगे.बता दें कि राम वन गमन परिपथ में आने वाले छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण स्थल सीतामढ़ी हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा (सप्त ऋषि आश्रम), रामाराम सुकमा और जगदलपुर को विकसित किया जाएगा। वहीं रायपुर से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर से राम वन गमन परिपथ को सम्पूर्ण रूप से विकसित करने का काम किया जाएगा. यह दुनिया का एक मात्र कौशल्या माता मंदिर है, इसमें भगवान राम बाल रुप में मां की गोद में दिखाए गए हैं. चंदखुरी मंदिर का नव निर्माण लगभग 5 करोड रुपए की लागत से हो रहा है. राम वन गमन पर्यटन परिपथ का निर्माण लगभग 100 करोड रुपए की लागत से हो रहा है. पूरे प्रदेश में पहले चरण में 9 स्थानों को चिन्हित किया गया है. आने वाले चरणों में अन्य जगहों को भी चिन्हांकित कर उसका विकास किया जाएगा। इस मामले में कांग्रेस  प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि 15 साल की भाजपा सरकार ने ना तो कभी कौशल्या माता के मंदिर की सुध ली, और ना ही कभी राम वन गमन परिपथ निर्माण के बारे में सोचा, क्योंकि राम भाजपा के लिए चंदा धंधा और राजनीतिक रोटी सेकने के अलावा आस्था का विषय कभी नहीं रहे हैं।