रायपुर। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़वासियों के लिए एक राहत भरी ख़बर है. राज्य स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक 6 कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क जीतने भी लोग आए हैं सभी की जाँच रिपोर्ट निगेटिव पाई गई है. वहीं शनिवार को जो 7वाँ पॉजिटिव मरीज मिला उनके संपर्क में आने वाले लोगों की जाँच रिपोर्ट अभी बाकी है।
मेडिकल बुलेटिन के अनुसार अब तक 376 लोगों की जाँच की गई है. इसमें 7 मरीज पॉजिटिव मिले हैं. जबिक 369 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
कोरोना पॉजिटिव में 4 रायपुर, 1 बिलापसुर, 1 भिलाई और 1 राजनांदगांव से हैं. इनमें से 5 एम्स रायपुर, जबिक 1 बिलासपुर में भर्ती हैं. अब तक सर्वाधिक जाँच रायपुर में 242 लोगों की हुई है।
गृह विभाग ने जारी किया आदेश, राज्य शासन ने तत्काल आदेश लागू किए जाने का निर्देश जारी किया
रायपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम में जुटी सरकार ने अब संभावित खतरों के मद्देनजर अति आवश्यक सेवाओं से जुड़ी सेवाओं में एस्मा लगा दिया है. राज्य सरकार ने 10 अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की उपबल्धता सुनिश्चित करने के लिहाज से यह सख्त आदेश जारी किया है. राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से यह आदेश लागू करने के निर्देश जारी किए हैं. राज्य शासन के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 की (क्रं.10 सन 1979) की धारा 4 की उप धारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया गया है. शासन की ओर से जारी यह आदेश समस्त स्वास्थ्य सुविधाएं, डाक्टर नर्स और स्वास्थ्यकर्मी, स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता कार्यकर्ता, मेडिकल उपकरणों की बिक्री संधारण एवं परिवहन, दवाईयों और ड्रग्स की बिक्री, परिवहन एवं विनिर्माण, एबुंलेस सेवाएं, पानी एवं बिजली का आपूर्ति, सुरक्षा संबंध सेवाएं, खाद्य, पेयजल प्रावधान एवं प्रबंधन तथा बीएमडब्ल्यू प्रबंधन सेवाओं पर लागू होगा.सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि सभी सरकारी और निजी क्षेत्रों में यह आदेश प्रभावशील होगा।
एक नजर में जानिए कौन आएगा एस्मा के दायरे में- समस्या स्वास्थ्य सुविधाएं डाक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता कार्यकर्ता मेडिकल उपकरणों की बिक्री संधारण एवं परिवहन दवाईय़ां,ड्रग्स की बिक्री परिवहन एवं विनिर्माण एंबुलेंस सेवाएं पानी एवं बिजली आपूर्ति सुरक्षा संबंधी सेवाएं खाद्य, पेयजल प्रावधान एवं प्रबंधन बीएमडब्ल्यू प्रबंध
खरसिया। लाॅक ड़ाउन के दौरान प्रशासन के आदेशों को न मान कर अपने दुकान खोलने और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी कर मनमाने दाम पर बेचने वाले दुकानदार पर खरसिया प्रशासन ने कार्यवाही करते हुये नगर की तीन दुकानों को सील कर दिया है।
गौरतलब है कि वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिये पूरे भारत को लाॅक ड़ाउन कर दिया गया है, इस दौरान पुलिस, नगरपालिका, अस्पताल, मीड़िया जैसी आवश्यक सेवाओं अथवा विभागों को छ़ोड़कर लगभग सभी प्रशासनिक कार्यालयों को भी बंद कर दिया गया है, दूध, सब्जी, राशन, पेट्रोल की दुकानों को नगर में सुबह 5 बजे से 9 बजे तक खोलने की अनुमति प्रदान की गयी है, किंतु एैसे दौर में जबकि हर व्यक्ति के सिर पर महामारी की चपेट में आने का खतरा मंड़रा रहा है, कुछ़ लोग इस आपातकाल का फायदा उठाते हुये राशन सामानों को मनमाने दामों बेच रहे हैं, प्रशासन की लाख अपील के बाद भी एैसे दुकानदारों के द्वारा कालाबाजारी की जा रही है, शिकायत मिलने पर खरसिया प्रशासन के द्वारा एैसे चार दुकानदारों पर कार्यवाही करते हुये उनके प्रतिष्ठान आगामी आदेश तक सील कर दिया है।
सील की दुकानों में बस स्टैंड़ स्थित अपना जनरल स्टोर्स को अधिक मूल्य पर सामान बेचते पाये जाने पर, स्टेशन रोड़ स्थित शुभम इंटर प्राईजेज तथा नटवर इलेक्ट्रिकल को लाॅक ड़ाउन के दौरान दुकान खोलने तथा कन्या भवन के सामने स्थित लक्ष्मी लाॅज में प्रशासन से छुपा कर बाहर प्रांतों के लोगों को रखने पर कार्यवाही की गयी है।
इस दौरान खरसिया एसड़ीएम, एसड़ीओपी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित नगरपालिका तथा पुलिस विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे, प्रशासन ने नगरवासियों से अपील की है कि लाॅक ड़ाउन के दौरान घरों से बाहर न निकले, घर के अंदर रहें, सुरक्षित रहें, साथ ही राशन तथा अन्य आवश्यक सामानों का विक्रय करने वाले दुकादारों से भी अपील है कि वे मानवता दिखायें, और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं को अधिक मूल्य पर न बेचें, एैसा करने की शिकायत मिलने पर उनके प्रतिष्ठानों को सील कर कठोर कार्यवाही की जायेगी।
जैसा की आप सब जानते ही है कि कोरोना वायरस महामारी के बारे में आम जनता तक सही सूचना पहुचाने और उन्हें जागरूक करने में सभी समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों की महत्ती भूमिका है । ऐसे समय जब पूरा देश लॉक डाउन में है आप दिन रात समाज और देश के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिये दुरूह परिस्थितियों में भी परिश्रम कर रहे है ।
माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस बात के लिए चिंता जताई है कि कई बार पत्रकार अपने कर्तव्य की पूर्ति करने के प्रक्रम में अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते है और इसका विपरीत प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है । कोरोना वायरस महामारी के कवरेज के दौरान विश्व में कई पत्रकार इस वायरस की चपेट में आ चुके है । मेरा आप सभी पत्रकारगणों से आग्रह है कि कोरोना वायरस महामारी के कवरेज के दौरान पूरी सावधानी बरतें , सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा पालन करे और प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि से बचे । हर हाल में पत्रकारों को भी सोशल डिस्टेंसिन्ग का पालन करना जरूरी है । माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पत्रकारों को लॉक डाउन के दौरान समाचार संकलन में किसी तरह की कठिनाई न आये ।
रायपुर। डीजीपी डीएम अवस्थी ने सभी आईजी और पुलिस अधीक्षकों को लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं. अवस्थी ने निर्देश दिए हैं कि लॉक डाउन का पालन कराते समय पुलिस अपना मानवीय चेहरा बनाये रखे. आम नागरिकों के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार जैसी घटनायें नहीं होनी चाहिए. सभी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारियों को इसके लिये जिम्मेदार माना जायेगा। वे अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर पुलिस बल का मनोबल बनाये रखें एवं लॉक डाऊन का दृढता से पालन करायें.डीजीपी ने कहा है कि लॉक डाऊन का कुछ जिलों के कस्बों में सख्ती से पालन नहीं कराया जा रहा है. इसके लिए राजपत्रित अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी फिक्स पिकेट एवं पेट्रोलिंग आदि में इस प्रकार लगायेे कि इस लॉक डाऊन का सख्ती से पालन कराया जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि आवश्यक वस्तुएं जैसे दूध, पानी, बिजली, मेडिकल स्टोर्स, राशन दुकान, सब्जी एवं फल दुकान आदि आवश्यक सेवाओं की सुविधा नागरिकों को मिलती रहे. इसके साथ ही कुछ लोग आवश्यक वस्तुओं की प्राप्ति एवं आपूर्ति की आड़ में अनावश्यक रूप से इधर-उधर घूम रहे हैं. इसके अलावा बहुत से स्वयंसेवी संगठन/वालेंटियर्स आदि समूह में घूम रहे हैं, जो कि ठीक नहीं है. यह भी ध्यान रखा जाये कि लोग इन आवश्यकताओं की पूर्ति अपने निकटम दुकानों से ही करें, पूरे शहर में घूमते हुए न पाये जाएं।
मुंबई। देश में कोरोना वायरस के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल तक 21 दिनों का लॉक डाउन घोषित किया है. अब केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के लिए बतौर प्रभारी तय किए गए केंद्रीय मंत्रियों ने अपनी-अपनी कमान संभाल ली है।
सभी मंत्री प्रभार वाले राज्यों के जिला कलेक्टर के सीधे संपर्क में हैं. सभी कलेक्टर से कहा गया है कि वे हर गांव, टोला तक जाकर लोगों की स्थिति की जानकारी लें. उनको जागरूक करें और लॉकडाउन की स्थिति सुनिश्चित करें।
वहीं, सरकारी सूत्रों के अनुसार, लॉकडाउन अवधि और बढ़ाई जा सकती है. एक हफ्ते में संक्रमण प्रभावित मरीजों की संख्या को देखते हुए इस बारे में फैसला किया जाएगा।
पीएमओ ने केंद्रीय मंत्रियों को कोरोना फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर दैनिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं. इनमें रोगियों को पृथक करने की सुविधा,आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के प्रभाव से निपटने को लेकर रिपोर्ट करना है. जिसके बाद ये फैसला लिया जाएगा कि लॉक डाउन बढ़ाया जाए या नहीं.
रायपुर। पूरे विश्व में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हुआ है. इस हाहाकार से भारत भी नहीं बचा हुआ है. लेकिन अच्छी बात ये है कि भारत को ऋषि-मुनियों का देश माना जाता है और कई सौ साल पहले आयुर्वेद पद्धति से बताए इलाज उनके आज भी कारगर साबित होते है।
अब जब कोरोना वायरस का संक्रमण फैला हुआ है तो देश के कई आयुर्वेदाचार्यों ने इससे बचने उपाए बताने शुरू किए है।
मध्यप्रदेश के नर्मदा भक्त और सतधारा आश्रम में निवासरत संत हरिहर महाराज ने कहा है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से घबरायें नहीं. कोरोना जैसी कई घातक बीमारियों से हमारे देश में मात्र चुटकी भर हल्दी बचा सकती है।
संत हरिहर महाराज ने बताया कि हल्दी बहुत ही गुणकारी होती हैं इसे घर में कूटपीस कर पावडर बना कर धीमी आग में हल्का सेंककर उसमें सेंधा नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ सेवन किया जाता है. जिससे असाध्य बीमारियां भी नष्ट हो सकती है और कोरोना जैसी भयानक बीमारियों से भी छुटकारा मिल जाता है. इस मिश्रण को हर गरीब अमीर सभी उपयोग कर सकते हैं. कोरोना के बारे में उन्होंने कहा कि बड़े देशों द्वारा गरीब देशों को गुलाम बनाने के लिए इस बीमारी के बैक्टीरिया प्रयोगशालाओं में तैयार किये गये हैं।
इसके बचाव के लिए लोग मंहगी सामग्री खरीदेंगे जिससे गरीब देशों की आर्थिक स्थिति को गड़बड़ाकर उन्हें गुलाम बनाया जा सके. अन्य देश इससे बचने एवं सुरक्षा के उपाय ढूढ़ रहें हैं. मास्क एवं अन्य रसायनों का उपयोग कर रहे हैं. लेकिन हमारे भारत में आयुर्वेद में इतनी शक्ति है कि ये उपाय हमारे शरीर में ऐसे रोगों से लडऩे व उनके रोकथाम के लिए अनुकूल है।
जहां आज इस लॉक डाउन की परिस्थिति में लोग दुकानदार, शासन प्रशासन की तरफ निर्भर हो रहे हैं वही सूरजपुर जेल में एक बंदी अनिल कुमार राजवाडे जो कि 376 के अपराध में जेल में बंद है उसने जब जेल में देखा कि माक्स की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो जेलर मुकेश कुशवाहा को उसने कहा कि यदि आप मुझे सामान उपलब्ध करा देंगे तो मैं जेल में अपने बंदी भाइयो और पूरे जेल स्टाफ के लिए मास्क बना सकता हूं तब जेलर मुकेश कुशवाहा ने उसकी बातों को गंभीरता से लेते हुए कपड़े और जरूरत के सामानों की व्यवस्था कर दी और उस कैदी ने देखते ही देखते 1 दिन में 100 मास्क बना दिए l भले आदमी किसी भी अपराध में बंद हो पर अगर उसे जेल में अच्छे संस्कार मिलेंगे तो वह इस प्रकार कार्य कर के अपने गुनाह त्यागकर लोगो के काम आकर कुछ न कुछ कम कर सकता है।
आज के इस लॉक डाउन समय की परिस्थिति में हर नागरिक चाहे वह कोई भी हो का कर्तव्य है कि हम केवल शासन प्रशासन पर निर्भर ना रहें और अपने से भी इस संकट की घड़ी में जो हो सकता है वह करना चाहिए जिसका परिणाम है कि आज हमारे जेल में बंद एक कैदी अनिल कुमार राजवाड़े ने एक दिन में 100 मास्क बनाकर हमारी बहुत बड़ी परेशानी को हल किया।
गौरतलब हो कि जेलर मुकेश कुशवाहा ऐसे अधिकारी है जो अपने पदस्थापना के दौरान राज्य के विभिन्न जेलों में बन्द विचाराधीन बंदियों या सजायाफ्ता कैदियों के बीच शिक्षा के प्रचार-प्रसार में आगे रहते हैं।। इस क्रम में उन्होने महासमुंद जिला जेल में पदस्थापना के दौरान 4 विचाराधीन बंदियों को न केवल cg psc की परीक्षा दिलवाई थी बल्कि खुद उनका मार्गदर्शन करते हुए उन्हें परीक्षा उपयोगी साधन भी उपलब्ध कराए थे।
इंदौर। इंदौरशहर में मौजूद पुलिसकर्मियों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका है। कोरोनाग्रस्त लोगों के संपर्क व ऐसे क्षेत्रों में भ्रमण के कारण वर्दी के जरिए कोरोना वायरस घर तक पहुंच सकता है। पुलिसकर्मी घर जाना छोड़ दें। ड्यूटी के तुरंत बाद वर्दी को गरम पानी में डुबो दें। यह निर्देश आईजी विवेक शर्मा ने दिए है। देखभाल के लिए एएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त कर दिया है। थानों पर जाकर व्यवस्थाएं भी देख रहे हैं। शर्मा के अनुसार कोरोना वायरस (कोविड-19) से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिसकर्मी भी तैनात रहते है। कई बार मरीजों को भर्ती कराने, अस्तपताल जाने और ड्यूटी के दौरान जांच में भी कोरोनाग्रस्त व्यक्ति से संपर्क का खतरा रहता है। कर्फ्यू के कारण परिवार वैसे ही लॉकडाउन हैं। ऐसे में ड्यूटी के बाद घर न जाएं। थाना स्तर व पुलिस लाइन में निर्धारित स्थानों पर ही रुकें।
आईजी ने यह भी सुझाव दिया कि ड्यूटी के बाद तुरंत वर्दी उबलते हुए पानी में भिगो दें। उन्होंने पुलिसकर्मियों और स्वजन की देखभाल के लिए सेल बनाई है। इसकी एएसपी गुरुप्रसाद पारासर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईजी ने सभी एसपी और डीआईजी को भी इसका पालन करने के निर्देश दिए और स्वयं ने भी परिवार से अलग रहना शुरू कर दिया। थाना स्तर पर होस्टल-धर्मशाला और होटल को बनाएंगे बैरक : आरआई जयसिंह तोमर के अनुसार पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए और इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत करने के लिए दवाइयों का वितरण किया जा रहा है। नहाने और पीने के लिए गरम पानी भी मुहैया करवाया जाएगा। रुकने के लिए सभी थाना क्षेत्रों में होटल, होस्टल व धर्मशालाओं का अधिग्रहण कर पुलिसकर्मियों के लिए व्यवस्था की जाएगी।
अस्पताल में सिर्फ दो मरीज, डॉक्टर भी क्वारंटाइन बुधवार रात आई रिपोर्ट में मालवा मिल क्षेत्र के अस्पताल में भर्ती एक मरीज भी कोरोना संक्रमित पाया गया है। इसके बाद से अस्पताल में सुरक्षा के प्रबंध बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल इस अस्पताल में सिर्फ दो मरीज ही भर्ती हैं। इसमें एक कोरोना से संक्रमित रोगी है, जबकि दूसरा सिर पर लगी चोट के कारण भर्ती है। संक्रमित रोगी का जो डॉक्टर इलाज कर रहा था, वह भी अस्पताल में ही क्वारंटाइन है। अस्पताल खाली होने के कारण 80 फीसदी स्टाफ को भी छुट्टी दी गई है। नए मरीज भी अस्पताल में नहीं लिए जा रहे हैं। कोरोना संक्रमित मरीज की हालत भी ठीक है और पूरी एहतियात के साथ स्टाफ उसका इलाज कर रहा है।
मुंबई। कोरोना के बीच एक राहत की खबर है। केंद्र सरकार के बड़े ऐलान के बीच अब रिजर्व बैंक ने भी आमलोगों को राहत की सौगात दी है। तीन महीने तक EMI पर छूट दी गयी है। रिजर्व बैंक के गर्वनर ने प्रेस कांफ्रेस कर इस राहत का ऐलान किया है। आरबीआई के मुताबिक रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है. इस कटौती के बाद रेपो रेट 5.15 से घटकर 4.45 फीसदी पर आ गई है.
वहीं बैंकों से लोन की ईएमआई दे रहे लोगों को 3 महीने तक के राहत की सलाह दी है. यहां बता दें कि आरबीआई ने आदेश नहीं, सिर्फ सलाह दी है. कहने का मतलब ये है कि अब गेंद बैंकों के पाले में है. आसान भाषा में समझें तो बैंकों को अब तय करना है कि वो आम लोगों को ईएमआई पर छूट दे रही हैं या नहीं.
आरबीआई ने सभी बैंकों का कैश रिजर्व रेश्यो भी एक फीसदी यानी 100 आधार अंक घटाकर तीन फीसदी कर दिया है। यह पूरे एक साल के लिए चार फीसदी की बजाए तीन फीसदी होगा। इसके तहत बैंक अपनी जमा का कुछ फीसदी आरबीआई के पास रखते हैं। इसमें कटौती होने से 1.37 लाख करोड़ रुपये की रकम बैंकों को मिल पाएगी।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया गया है. सीआरआर 3 प्रतिश्त पर आ गया. इस कदम से वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित होगी. CRR वह राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना अनिवार्य होता है. दास ने कहा कि इस कदम से बैंकों के पास 1,37,000 करोड़ रुपये की पूंजी आएगी।
आरबीआई के 5 बड़े कदम
1. रेपो रेट में 0.75% कमी असर : सभी कर्ज सस्ते होंगे 2. टर्म लोन की किश्त चुकाने में तीन महीने की छूट असर: ग्राहकों और बैंकों को राहत मिलेगी 3. वर्किंग कैपिटल पर ब्याज का भुगतान तीन महीने टाला असर: कंपनियों को राहत मिलेगी 4. कैश रिजर्व रेश्यो 1% घटाया असर : बैंकों के पास ज्यादा कैश रहेगा 5. आरबीआई के फैसलों से सिस्टम में 3.74 लाख करोड़ रुपए की नकदी बढ़ेगी
ईएमआई में तीन महीने की छूट के मायने क्या हैं ? ईएमआई पेमेंट में छूट का मतलब यह नहीं कि आपको कभी बकाया भुगतान नहीं करना पड़ेगा। बस तीन महीने टाल सकते हैं, बाद में भुगतान करना होगा। यह कदम इस मकसद से उठाया गया है कि लॉकडाउन की वजह से जिनके पास वाकई नकदी की कमी होती है तो उन्हें कर्ज के भुगतान में कुछ समय मिल जाए। विशेषज्ञों की राय है कि वेतनभोगी या जिनके पास पर्याप्त नकदी है उन्हें ईएमआई समय पर ही चुकानी चाहिए, नहीं तो उन पर ही बोझ बढ़ेगा।
आरबीआई के फैसले से किसे और क्या फायदा होगा? आम आदमी को : नकदी की कमी की वजह से तीन महीने तक लोन की किश्त नहीं चुका पाएंगे तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। छोटी कंपनियों को : वर्किंग कैपिटल लोन के ब्याज भुगतान में तीन महीने की राहत मिल जाएगी। क्रेडिट हिस्ट्री पर भी असर नहीं पड़ेगा। बैंकों को : कोरोनावायरस की वजह से अर्थव्यवस्था और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में आशंका थी कि कई ग्राहक डिफॉल्ट कर सकते हैं। इससे बैंकों का एनपीए बढ़ता, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कर्ज का भुगतान नहीं आने से बैंकों के पास कैश की कमी नहीं हो, इसके लिए नकदी बढ़ाने के उपाय भी किए गए हैं।
देश में 21 दिन का लॉकडाउन चल रहा है
सरकार ने भी गुरुवार को 1.70 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसमें गरीब, किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों को राहत के ऐलान किए गए थे। कोरोनावायरस की वजह से देश में 21 दिन का लॉकडाउन चल रहा है। इससे अर्थव्यवस्था और जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
इसके अतिरिक्त लिक्विडिटी एड्जेस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) में भी 0.9 फीसदी की कटौती की घोषणा की गई है। अब एलएएफ घटकर चार फीसदी हो गया है।आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोविड-19 के चलते अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरे को देखते हुए एमपीसी ने समय से पहले ही समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक 24 से 27 मार्च तक चली।