Author: Sunil Agrawal

  • किसानों के समर्थन में पंजाब जेल के डीआईजी ने किसानों के समर्थन में अपने पद से दिया इस्तीफा….

    किसानों के समर्थन में पंजाब जेल के डीआईजी ने किसानों के समर्थन में अपने पद से दिया इस्तीफा….

    दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों को चौतरफा समर्थन मिल रहा है. इसके बावजूद केंद्र सरकार कानून को वापस लेने के मूड में नहीं है. इसी बीच रविवार को पंजाब के जेल उप महानिरीक्षक (डीआईजी) लखविंदर सिंह जाखड़ ने किसानों के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

    जेल डीआईजी लखविंदर सिंह जाखड़ का कहना है कि नियमों के अनुसार उन्हें तीन महीने का नोटिस देना होगा. अगर मैं आज इस्तीफा देना चाहता हूं, तो मुझे उस अवधि के भुगतान भत्ते को जमा करना होगा. मैं राशि जमा करने को तैयार हूं, क्योंकि मुझे अभी जाना है. मैं एक किसान का बेटा हूं और मुझे इस पर गर्व है।

    इससे पहले किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पद्मभूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं. पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार व एक अखबार के संपादक ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाने का एलान पहले ही कर चुके हैं. इसके अलावा पंजाब के 27 खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की थी।

    बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानून के विरोध में हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों के किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. किसानों के आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों को समर्थन मिल रहा है।

  • इनके संरक्षण में रखा था 102 किलो सोना, अचानक हो गया गायब…

    इनके संरक्षण में रखा था 102 किलो सोना, अचानक हो गया गायब…

    जब्त किया हुआ सोना जिसके कस्टडी में हो और वहीं से वह गायब हो जाय तो उसकी जांच कौन करेगा ? यह वाकया पेश आया है CBI के साथ। उसके कस्टडी में रखा 102 किलो सोना गायब हो गया, जिसकी कीमत लगभग 43 करोड़ आंकी गई है। अब कोर्ट ने इसके जांच का जिम्मा पुलिस को दिया है। हालांकि CBI ने यह कहकर इसका विरोध किया है कि इससे उसकी इज्जत कम हो जाएगी।
    मामला तमिलनाडु CBI का है। 2012 में MMTC मिनरल्स एंड मेटल्स ट्रेडिंग कारपोरेशन के सुराणा कार्यालय से 400.47 किलो सोना जब्त किया था और इसे फर्म के वाल्ट में ही सील कर दिया गया था। जिसकी चाबी CBI के विशेष कोर्ट ने CBI को सौंपी थी। इसके बाद यहां सील किये गए सोना में से 102 किलो सोना गायब हो गया। मामला कोर्ट में गया जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले।के जांच का जिम्मा स्थानीय पुलिस को दे दिया इसके बाद मामला विवादों में आ गया।

    कोर्ट ने CBI के इस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि इस मामले की जांच का जिम्मा किसी बड़े एजेंसी को दिया जाय। पुलिस को जांच का जिम्मा दिए जाने से CBI की प्रतिष्ठा धूमिल होने की बात याचिका में कही गई थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कोर्ट ने कहा- यह CBI के लिए अग्नि परीक्षा हो सकती है लेकिन उनके हाथ यदि पाक साफ है तो वे बच जाएंगे अन्यथा उसकी कीमत उन्हें चुकाना पड़ेगा।

    CBI ने इस मामले की जांच का जिम्मा विशेष CBI टीम या NIA से कराए जाने की मांग की थी लेकिन जज ने कहा- ऐसा नहीं हो सकता, कानून इस तरह के आक्षेप की मंजूरी नहीं देता। सभी पुलिसकर्मियों पर भी विश्वास किया जाना चाहिए। पुलिस से जांच न करवाने की बात कहना गलत है।

  • तहसीलदार की गाड़ी को घेरकर ड्राइवर से की मारपीट,पुलिस ने किया आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज….

    तहसीलदार की गाड़ी को घेरकर ड्राइवर से की मारपीट,पुलिस ने किया आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज….

    खबर जशपुर जिले के तुमला थाना इलाके से आ रही है जहाँ बीती शाम तहसीलदार की गाड़ी को घेरकर तहसीलदार के ड्राइवर से मारपीट की गई है।हमलावरों के मार से ड्राइवर के घायल होने की खबर है। तुमला थाना पुलिस ने जनपद सदस्य कृष्णा यादव ,नंदलाल यादव एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर लिया है।

    जानकारी के मूताबिक घटना शुक्रवार के शाम की है जब तहसीलदार फरसाबहार सुनील गुप्ता जोरन्दा झरिया की ओर से वापस लौट रहे थे तभी शाम करीब साढ़े 6/7बजे तुमला थाना से एक या डेढ़ किमी पहले स्टेट हाईवे के पास चारपहिया और दो पहिया सवार करीब 10 से 15 लोगो ने तहसीलदार सुनील गुप्ता की गाड़ी को ओवर टेक करके रोक लिया और ड्राइवर श्रवण नायक के साथ मारपीट करने लगे। मारपीट के दौरान ड्राइवर श्रवण की कनपटी में डंडा से हमला कर दिया गया जिससे वह गम्भीर रुप से घायल हो गया।
    जानकारी के मूताबिक आरोपियो में से 1 आरोपी जोरन्दा झरिया का जनपद सदस्य है जिसका नाम कृष्णा यादव बताया जा रहा है ।
    बहरहाल,घटना का असली कारण जांच और पूलिस विवेचना के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के मूताबिक रेत माफियाओं और धान तस्करों के विरुद्ध तहसीलदार सुनील गुप्ता के द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाइयों की यह परिणीति है।

  • 10 साल से पहले सरकारी नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टरों पर होगा 1 करोड़ का जुर्माना….

    10 साल से पहले सरकारी नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टरों पर होगा 1 करोड़ का जुर्माना….

    उत्तर प्रदेश में सरकारी कॉलेजों से पीजी करने के बाद डॉक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पताल में नौकरी करनी होगी। अगर कोई डॉक्टर इससे पहले नौकरी छोड़ता है, तो उसे एक करोड़ रुपए की रकम जुर्माने के तौर पर यूपी सरकार को देनी होगी। यह खबर सामने आने के बाद सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि यह आज का नहीं, बल्कि तीन साल पुराना आदेश है।
    यूपी के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- सोशल मीडिया पर एक खबर चली है कि जो डॉक्टर पीजी करते हैं, उन्हें 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में काम करना होगा। ऐसा न करने पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना भरना होगा। यह कोई नया नियम नहीं है। सरकार ने 3 अप्रैल 2017 को इस बारे में आदेश जारी किया था।


    पढ़ाई पूरी करते ही जॉइन करनी होगी नौकरी
    सरकारी गाइडलाइन में कहा गया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर को तुरंत नौकरी जॉइन करनी होगी। इसके अलावा पीजी के बाद सरकारी डॉक्टरों के सीनियर रेजिडेंसी में रुकने पर भी रोक लगा दी गई है। नए नियम में कहा गया है कि विभाग की ओर से इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र (NoC) जारी नहीं किया जाएगा।


    कोर्स छोड़ने पर नहीं ले सकेंगे दोबारा एडमिशन
    गाइडलाइन के मुताबिक, अगर कोई डॉक्टर बीच में ही पीजी छोड़ देता है तो उस पर 3 साल के लिए रोक लगा दी जाएगी। इन सालों में स्टूडेंट्स दोबारा एडमिशन नहीं ले सकेंगे। इससे पहले शुक्रवार को देशभर में डॉक्टरों ने हड़ताल की थी। इसकी वजह आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी करने की अनुमति मिलना बताया गया था।


    डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए लिया फैसला
    यूपी के गांव-गांव में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुले हैं, लेकिन ये केंद्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। कई स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट तो कई अन्य कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालयों पर बने अस्पतालों में भी डॉक्टर्स की कमी है। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से प्रदेश में डॉक्टरों की कमी की भरपाई की जा सकेगी।

  • पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने 6 निरीक्षकों के प्रभार में किया परिवर्तन रायगढ़ के नए कोतवाल होंगे कृष्णकांत सिंह…

    पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने 6 निरीक्षकों के प्रभार में किया परिवर्तन रायगढ़ के नए कोतवाल होंगे कृष्णकांत सिंह…

    रायगढ़। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने 6 निरीक्षकों के प्रभार में परिवर्तन करते हुए उन्हें नया प्रभार सौंपा है जिसमें घरघोड़ा के थाना प्रभारी कृष्ण कांत सिंह को थाना कोतवाली का प्रभार दिया गया है वही लैलूंगा थाना प्रभारी अमित सिंह को घरघोड़ा और कौशल्या साहू को पुसौर का प्रभार देते हुए पुसौर थाना प्रभारी गौरी शंकर दुबे को एक बार फिर से सारंगढ़ थाने का प्रभारी बनाया गया है। इसी प्रकार लक्ष्मण प्रसाद पटेल को रक्षित केंद्र रायगढ़ से लैलूंगा का थाना प्रभारी बनाया गया और विजय पैकरा को रक्षित केंद्र रायगढ़ से बुलाकर निरीक्षक कौशल्या साहू के स्थान पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायगढ़ में शिकायत शाखा का प्रभारी बनाया गया है।
    बता दें की पिछले दिनों कोतवाली थाना प्रभारी का तबादला दुर्ग और सारंगढ़ थाना प्रभारी आशीष वासनिक का रायपुर मुख्यालय तबादला होने के बाद कोतवाली और सारंगढ़ थाने में नए प्रभारियों को भेजा जाना था। इस कारण पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह की ओर से टीआई कृष्णकांत को अनुभव के आधार पर कोतवाली थाना और गौरी शंकर दुबे को सारंगढ़ थाना भेजा गया है।

  • कलेक्टर की फटकार, नही लेते हो तो ठीक है, लेकिन अगर लेते तो तुम्हारी ऐसी तैसी कर दूंगा….

    कलेक्टर की फटकार, नही लेते हो तो ठीक है, लेकिन अगर लेते तो तुम्हारी ऐसी तैसी कर दूंगा….

    इन दिनों सोशल मीडिया में एक कलेक्टर का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।ये कलेक्टर साहब है वीरेंद्र सिंह रावत ।वीरेंद्र सिंह रावत इन दिनों मध्यप्रदेश के भिंड में कलेक्टर है।कलेक्टर जिला अस्पताल भिंड का निरीक्षण करने पहुँचे ।यहाँ पहुंचकर उन्होंने मरीजो से बात चीत कर यह जानने की कोशिश कि कि मरीजो को कहीं कोई तकलीफ तो नही, यहाँ तक तो सब कुछ ठीक है, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसको लेकर कलेक्टर साहब सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ गए।


    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को अस्पताल में रिश्वतखोरी की शिकायत मिल गयी और जाँच के उद्देश्य से कलेक्टर ने अस्पताल के कर्मचारियों कहा कि उन्हें काम के बदले पैसे लेने की शिकायतें मिली है और शिकायत सही मिली तो तुमलोगो की ऐसी तैसी कर दूंगा ।


    कलेक्टर रावत ने कर्मचारी से पूछा -काम के बदले पैसे लेते हो ?कर्मचारी का जवाब था -‘नही’ इस पर कलेक्टर ने कहा-नही लेते हो तो ठीक है लेकिन अगर लेते तो तुम्हारी ऐसी तैसी कर दूंगा ।
    कलेक्टर की फटकार किसी के कैमरे में कैद हो गया और कैमरे में आते ही वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने लगा और कलेक्टर के द्वारा कहे जा रही इन अमर्यादित शब्दो की सभी आलोचना करने लगे ।

  • लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बदलकर 21 वर्ष कर सकती है सरकार….

    लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बदलकर 21 वर्ष कर सकती है सरकार….

    दिल्ली। लड़कियों की शादी के उम्र को लेकर देश में बहस चल रही है। बता दें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में अपने बजट भाषण में इसका जिक्र किया था। उन्होंने एक कमेटी बनाने की बात भी कही थी। प्रधानमंत्री मोदी भी 15 अगस्त के अपने भाषण में इसका जिक्र कर चुके हैं।

    जानिए सरकार शादी की उम्र क्यों बदलना चाहती है? 

     कहा जा रहा है कि सरकार मैटरनल मोर्टेलिटी रेट में कमी लाना चाहती है। तर्क ये भी दिया जा रहा है कि लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने से उन्हें बेहतर एजुकेशन और डेवलपमेंट का भी मौका मिलेगा। सरकार की इस कवायद का समर्थन करने वाले कहते हैं लड़के और लड़की दोनों की शादी की उम्र एक होनी चाहिए।

    मौजूदा कानून क्या है और कितनी इफेक्टिवनेस हैं? 

    1929 के शारदा कानून में शादी के वक्त लड़कियों का कम से कम 14 साल और लड़कों का 18 साल होने की बात कही गई। 1978 में इसे बदलकर लड़कों के लिए ये 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल कर दी गई। 2006 में बाल विवाह रोकथाम कानून ने कुछ और शर्तों के साथ पुराने कानून की जगह ली। इस कानून के बाद में दुनियाभर में जितनी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में होती है उनमें से हर तीसरी लड़की भारतीय होती है। ऐसा हम नहीं यूनिसेफ के आंकड़े कहते हैं।

    देश के बाल विवाह रोकथाम कानून में दो साल की सजा और एक लाख जुर्माने की बात कही गई है।इस कानून का इस्तेमाल कितना हो रहा है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 2014 से 2016 के बीच देशभर में बाल विवाह के कुल 1,785 मामले दर्ज हुए। इनमें केवल 274 लोगों की गिरफ्तारी हुई और महज 45 लोग दोषी करार दिए गए।पुराने कानून का तो ये हाल है। इसके बाद सरकार अब जो नया कानून लाएगी उसकी इफेक्टिवनेस का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।

  • डिजिटल लेनदेन वाले लोगो के लिए आर बी आई ने शुरू की ये सुविधा….

    डिजिटल लेनदेन वाले लोगो के लिए आर बी आई ने शुरू की ये सुविधा….

    अगर आप डिजिटल लेनदेन करते हैं तो आपके लिए एक अच्‍छी खबर है. रिजर्व बैंक ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) की सुविधा 24 घंटे यानी हर वक्त उपलब्‍ध कराने का ऐलान किया है. यह सेवा 14 दिसंबर की रात में साढ़े 12 बजे से ग्राहकों के लिए हर वक्त उपलब्ध हो चुकी है. आइए इस सुविधा के बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक 14 दिसंबर से आरटीजीएस की सुविधा सातों दिन 24 घंटे उपलब्ध की गई है. मतलब ये कि आप कभी भी और किसी भी वक्‍त आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहां यह सुविधा दिन रात काम करती है.RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि कोरोना काल में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में काफी तेजी आई है. जिसके बाद आरबीआई ने RTGS की सुविधा 24*7 घंटे उपलब्ध कराने का फैसला किया।

    आरबीआई ने भारतीय वित्तीय बाजार के ग्लोबल इंटीग्रेशन की कोशिशों को सहारा देने के लिए आरटीजीएस की टाइमिंग बढ़ाने का फैसला किया था.आरटीजीएस डिजिटल फंड ट्रांसफर करने का एक तरीका है. इसकी मदद से बेहद कम समय में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं. RTGS का उपयोग मुख्य रूप से बड़ी राशि के ट्रांसफर के लिए होता है. इसके तहत न्यूनतम 2 लाख रुपये भेजे जा सकते हैं. अधिकतम राशि भेजने की सीमा 10 लाख रुपये है।

    आरबीआई ने आरटीजीएस के जरिए 2 लाख से 5 लाख तक का फंड ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम शुल्क 24.5 रुपये रखा है और 5 लाख से अधिक के फंड ट्रांसफर के लिए बैंक अधिकतम 49.5 रुपये का शुल्क ले सकता है. इस पर जीएसटी भी देनी पड़ती है. हालांकि देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की बात करें तो यह आरटीजीएस के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है.RTGS की शुरुआत 26 मार्च 2004 को हुई थी. उस समय केवल 4 बैंक ही इस सेवा से जुड़े थे. लेकिन अब देश के करीब 237 बैंक इस प्रणाली के माध्यम से 4.17 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन को प्रतिदिन पूरा करते हैं. नवंबर में आरटीजीएस से औसत 57.96 लाख रुपये का लेनदेन हुआ।

    फिलहाल दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर महीने के सभी वर्किंग डे पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक RTGS की मदद से फंड ट्रांसफर किया जाता है. इससे पहले आरबीआई ने NEFT के नियमों में भी बदलाव किया था. NEFT की सुविधा दिसंबर 2019 से 24 घंटे उपलब्ध है.  NEFT भी पेमेंट का एक तरीका है. लेकिन इसमें पैसे ट्रांसफर की प्रक्रिया कुछ समय बाद पूरी होती है।

  • युद्धवीर का भुपेश प्रेम पूरे चरम पर ! कभी भी बीजेपी को बॉय कह सकते हैं युद्धवीर…..

    युद्धवीर का भुपेश प्रेम पूरे चरम पर ! कभी भी बीजेपी को बॉय कह सकते हैं युद्धवीर…..

    रायपुर। छग की सियासत में बहुत जल्द बड़ा भूचाल आ सकता है ।छग भाजपा के आईकॉन कहै जाने वाले जशपुर जुदेव परिवार के छोटे सरकार याने चंद्रपुर से 2-2बार भाजपा की ओर से विधायक रहे युद्धवीर सिंह जूदेव के भाजपा छोड़ने की चर्चा तेज हो गई है। युद्धवीर ने मीडिया को एक बयान देकर पूरे प्रदेश की सियासत में खलबली मचा दी है ।उन्होंने मीडिया को दिये एक वन टू वन साक्षत्कार में भाजपा को वयापरियो की पार्टी और प्रदेश के मुखिया भुपेश बघेल को मेहनतकश और छत्तीसगढ़िया संस्कृति और माटी से प्रेम करने वाला मुख्य्मंत्री बताया है। उन्होंने अपने साक्षत्कार में कहा कि उन्होंने मेहनत करना भुपेश बघेल से सीखा है ।

    यह पहली दफा नही है कि युद्धवीर अपनी ही पार्टी के विरुद्ध तंज कस रहे हैं।इससे पहले भी वो कई बार पार्टी के बड़े नेताओं को अपने निशाने में ले चुके है और पार्टी को जवाब देना मुश्किल हो गया है लेकिन इस बार जो उन्होंने अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जिस तरह से मीडिया के सामने व्यापारियों की पार्टी कहा और मुख्य्मंत्री भुपेश बघेल की खुलकर तारीफ की उससे कहीं न कहीं यह लगने लगा है कि अब पानी सिर के उपर से जा गुजरा है और युद्धवीर कभी भी बड़ा निर्णय लेकर बीजेपी के सामने सियासी संकट खड़ा कर सकते हैं।

    यह भी बता दें कि युद्धवीर 2018 के विधानसभा चुनाव से पूर्व भी अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से खुलकर नाराज चल रहे थे और उनकी नाराजगी का नतीजा यह हुआ कि जशपुर जिले में भाजपा का सुपडा साफ हो गया ।जिले की एक भी सीट भाजपा को हाथ नही लगी और भाजपा के तीनों विधायक चुनाव हार गए।करीब 35 वर्षों बाद जिले की तीनों सीटो पर काँग्रेस का कब्जा हो गया। हांलाकि युद्धवीर को नाराज करके हार की सजा भुगतने के बाद पार्टी की आँख खुली और पार्टी ने इन्हें लोकसभा चुनाव में इनके कहने पर गोमती साय को लोकसभा का टिकट दिया और इन्हें जीताने की जिम्मेदारी भी दी ।पार्टी द्वारा दी गयी जिम्मेदारी को युद्धवीर ने बखूबी निभाया ।गोमती साय को रायगढ़ लोकसभा में बड़ी जीत हासिल हुई और यह कहा जाने लगा कि जिस युद्धवीर के चलते भाजपा को जिले में 3 सीट गंवाने पड़े उसी युद्धवीर ने लोकसभा में भाजपा को वापस लिया दिया बल्कि पंचायत चुनाव में काँग्रेस को जीत के लिए नाकों चने चबाने पड़े । कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि युद्धवीर और बीजेपी के बीच की खाई खत्म हो गयी और सब कुछ बेहतर हो गया लेकिन इन सब कयासों के बीच फिर से युद्धवीर की नाराजगी सामने आ गयी और इस बार ऐसा लग रहा है कि यह नाराजगी आर पार की है। आरपार की नाराजगी केवल इसलिए नही कि उन्होंने मुख्यमंत्री भुपेश बघेल की तारीफ कर दी बल्कि इसलिए कि उन्होंने मुख्यमंत्री को मेहनतकश इंसान और छत्तीसगढ़िया संस्कृति के सबसे बड़े हिमायती कहने के साथ साथ भाजपा को सीधे तौर पर वयापरियो की पार्टी कह दिया ।इतना ही नही जब मीडिया ने बेहतर मुख्य्मंत्री कौन साबित हुआ डॉ रमन या भुपेश बघेल इस सवाल का जवाब भी उन्होंने कुछ ऐसा दिया कि उनकी पार्टी से नाराजगी और पार्टी से बाहर जाने के कयास तेज हो गए ।उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब तो नही दिया लेकिन टेढ़ा मेढ़ा ही सही उन्होंने भुपेश बघेल को ही श्रेष्ठ मुख्य्मंत्री बता दिया ।

    एक डेढ़ माह पूर्व भी युद्धवीर ने सोशल मीडिया पर मुख्य्मंत्री भुपेश बघेल की तारीफ की थी और उन्हें एक पत्र का त्वरित जवाब ढिये जाने को लेकर धन्यवाद कहा था और ठीक इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय को लेकर सोशल मीडिया में बड़ा बयान जारी कर खलबली मचा दी थी । उन्होंने अपने फेसबुक वॉल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को कुनकुरी से चुनाव लड़ने की मंशा त्यागकर मारवाहि से चुनाव लड़ने की सलाह दे डाली थी इसके अलावे उन्हीने काफी कुछ ऐसा कहा जिसे पढ़कर और सुनकर यह तो साफ हो गया कि बीजेपी और युद्धवीर के बीच खाई पटने के बजाय और गहरी होती जा रही है और कभी भी कुछ भी हो सकता है ।

    राजनीति से ताल्लुक रखने वाले स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषकों को याद होगा कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पूर्व युद्धवीर काँग्रेस के कद्दावर मंत्री टीएस सिंहदेव को कई बार कुशल नेतृत्व वाला नेता बताया था और टीएस सिंहदेव ने भी यह साफ कर दिया था कि युद्दवीर के चुनाव क्षेत्र में वह काँग्रेस का प्रचार करने नहीं जाएँगे ।दो पार्टी जे दो दिग्गज नेताओं के ऐसे बड़े बयानों के बाद से ही अनुमान लगाया जाने लगा था कि युद्धवीर और काँग्रेस याने टीएस बाबा के बीच पोलटिकल फिक्सिंग हो गयी है और चुनाव के बाद अनुमान सच भी साबित हो गया जब भाजपा का जशपुर में पूरी तरह सफाया हो गया ।
    बहरहाल भाजपा और युद्दवीर के बीच यह कोई पहली बार ऐसा द्वंद नही देखा जा रहा ।इससे पूर्व भी युद्धवीर कई बार पार्टी के बड़े नेताओं के बारे में सोशल मीडिया में कई ऐसे बयान जारी किए जिससे पार्टी के अंदर अस्थिरता की स्थिति उतपन्न हो चुकी है ।हालात उस वक़्त भी बिगड़ते नजर आए थे जब इन्होंने अपना एक अलग से हिन्दू संगठन तैयार कर लिया जिसका नाम “बहुजन हिन्दू परिषद” है लेकिन यह भी सच है कि जब जब पार्टी से इनकी नाराजगी उभरकर सामने आयी इन्हें मनाने की भी कोशिश की गई और कुछ दिनों के लिए फिर से सब कुछ ठीक हो गया परन्तु इस बार की नाराजगी पूरे सतह पर दिखाई दे रही है क्योंकि इससे पहले युद्धवीर ने पार्टी को इशारों में भले ही कुछ कह हो परन्तु मीडिया के सामने सीधा तंज नही कसा था इसलिए कुछ भी संभव है ,बात कहीं तक भी जा सकती है ।

  • सुरक्षा अधिकारी ने किया हैरान कर देने वाला खुलासा…पूर्व राष्ट्रपति खोलने वाले थे एलियन्स का राज……

    सुरक्षा अधिकारी ने किया हैरान कर देने वाला खुलासा…पूर्व राष्ट्रपति खोलने वाले थे एलियन्स का राज……

    इजरायल के एक वरिष्ठ स्पेस अधिकारी ने एलियन्स को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं. पिछले तीस साल से इजरायल के स्पेस सिक्योरिटी प्रोग्राम के हेड और रिटायर्ड जनरल हाएम इशेद का मानना है कि एलियन्स होते हैं और वे धरती पर भी रह रहे हैं और वे सीक्रेट तरीके से अमेरिका और इजरायल के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि एलियन्स अपने अस्तित्व का आम लोगों के सामने खुलासा इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग अभी इस तरह के खुलासे के लिए तैयार नहीं हैं. हाएम ने इजरायल के अखबार Yediot Aharonot को दिए एक इंटरव्यू में ये भी दावा किया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एलियन्स का राज लोगों को बताने वाले थे लेकिन सही समय पर गैलेक्टिक फेडरेशन के एलियन्स ने ट्रंप को रोक लिया।

    गैलेक्टिक फेडरेशन के तहत अमेरिका का एलियन्स के साथ गुप्‍त समझौता है और इस समझौते के चलते ही मंगल ग्रह पर एक अंडरग्राउंड बेस बनाया गया है जहां अमेरिका के एस्ट्रोनॉट्स और कुछ एलियन्स मौजूद हैं. इशेद के मुताबिक ट्रंप एक बार तो एलियन्‍स की मौजूदगी के बारे में ऐलान करने ही वाले थे लेकिन ये एलियन्स पब्लिक में किसी तरह का पैनिक नहीं फैलाना चाहते हैं. वे इंतजार कर रहे हैं जब मानव सभ्यता ब्रहांड, स्पेसशिप्स और यूनिवर्स से जुड़ी जटिल चीजों को समझने में कामयाब हो जाएगी तब वे अपने अस्तित्व से खुले रहस्यों को लोगों के सामने रख देंगे।

    इशेद ने कहा कि अमेरिकी सरकार और एलियन्स के बीच समझौते के तहत ये एलियन्स धरती पर कई तरह के प्रयोग करते हैं. मानव सभ्यता की तरह ही ये एलियन्स भी रिसर्च कर रहे हैं और ब्रहांड के गूढ़ रहस्यों और ताने-बाने को समझने की कोशिश कर रहे हैं और इस काम में उन्हें हमारी मदद की जरूरत है. इशेद का ये भी कहना था कि अगर उन्होंने ये बात आज से पांच साल पहले पब्लिक में कही होती तो उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया जाता. लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अब चीजें बदलेंगी. इशेद ने कहा कि उन्होंने जहां भी अपनी बात रखी, सबने उन्हें पागल ही बताया लेकिन उन्हें इसकी परवाह नहीं है और उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है. साल 2011 में जब इशेद रिटायर हुए थे तो उनके योगदान को देखते हुए इजरायल की मीडिया ने उन्हें फादर ऑफ इजरायल सैटेलाइट प्रोग्राम भी बताया था. अपने पद से हटने के बाद उन्होंने अपना सबसे ज्यादा ध्यान उसी एक चीज पर लगाया है जो उनके लिए बेहद रहस्यमयी और दिलचस्प है, वो हैं एलियन्स।

    जेरुसेलम पोस्ट के मुताबिक, इस शख्स ने अपने विचारों को एक किताब की शक्ल भी दी है. द यूनिवर्स बियॉन्ड द हॉरीजन नाम की इस किताब में उन्होंने ये भी समझाने की कोशिश की है कि कैसे इन एलियन्स के चलते हमारी धरती पर न्यूक्लियर दुर्घटनाएं होने से बची हैं. उन्होंने अपनी इस किताब में एलियन्स के नेचर, उनके अस्तित्व से जुड़ी कई थ्योरी दी हैं. गौरतलब है कि इजरायल की स्पेस एजेंसी एक फ्यूचर मून मिशन की तैयारी कर रही है. इससे पहले इजरायल ने अप्रैल में कोशिश की थी लेकिन उनका ये प्राइवेट फंडिंग रोबोटिक क्राफ्ट से जुड़ा मिशन फेल हो गया था. इससे पहले सिर्फ अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत यूनियन चांद पर एक कंट्रोल्ड लैंडिंग कर पाया है. इशेद ने भले ही ये दावा किया हो कि अमेरिका के एस्ट्रोनॉट्स मंगल ग्रह पर एलियन्स के साथ अंडरग्राउंड बेस में मौजूद हैं लेकिन सच यही है कि अब तक कोई भी देश मंगल ग्रह पर किसी इंसान की लैंडिंग नहीं करा पाया है. हालांकि अमेरिका और चीन की मंगल पर निगाहें टिकी हैं।