Author: Sunil Agrawal

  • सरकारी नौकरी छोड़कर जुड़े आरएसएस से कई संस्थाओं में दी सेवा,जीवन के अंतिम समय में डॉक्टरों द्वारा दिया गया जवाब,कोई नही पहुच रहा हाल पूछने….

    सरकारी नौकरी छोड़कर जुड़े आरएसएस से कई संस्थाओं में दी सेवा,जीवन के अंतिम समय में डॉक्टरों द्वारा दिया गया जवाब,कोई नही पहुच रहा हाल पूछने….

    सरकारी नौकरी छोड़कर समाज कल्याण के लिए आरएसएस से जुड़े, कल्याण आश्रम और शिशु मंदिर जैसी संस्थानों में अपनी सेवाएं दी। अशोक सिंगल और रज्जू भैया जैसे बड़े कद के लोगों के साथ मिलकर काम किया। लेकिन अब अपने जीवन के अंतिम समय में डॉक्टरों द्वारा जवाब दे देने के बाद उनसे मिलने न तो आरएसएस का कोई पहुंच रहा है, न ही अन्य समाजिक संस्थाओं से जूड़े लोग।

    हम बात कर रहे हैं, रायगढ़ के भरत सिंह बैस की। जिन्होंने 1958 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ जुड़ गए। उन्होंने संघ में रहकर वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वह रायगढ़ सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के पहले प्रधानाध्यापक बने। इसके बाद वह जशपुर कल्याण आश्रम से जुड़े। वहां अपनी सेवाएं दी।

    इतना ही नहीं बैस ने इसके बाद विश्व हिंदू परिषद से जुड़कर हरिद्वार, मथुरा आदि में सेवाएं दी हैं। उनका कहना है कि विश्व हिंदू परिषद के बड़े नेता स्व. अशोक सिंघल, रज्जू भईया जैसे लोगों के साथ रहकर उन्होंने काम किया है। लेकिन दुख की बात तो यह है कि जीवन के अंतिम समय में उनसे मिलने या उनका हाल जानने के लिए कोई भी नहीं पहुंच रहा है।

    डॉक्टरों ने दे दिया जवाब

    बता दें कि बैस अभी रायगढ़ शहर के बेलादुला के अपनी छोटे से निजी मकान में 85 वर्ष की आयु में अंतिम सांस गिन रहे हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि उन्हें कई बिमारियां है। मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण ज्यादा दिन जीवित रहने की संभावना नहीं है। वे अपने घर में परिजनों के साथ समय बिता रहे हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने रायगढ़ के पत्रकार हीरा मोटवानी को बुलवाया और उनसे बहुत देर तक पुरानी यादें ताजा की। वह अपने शिशु मंदिर के पहले विद्यार्थियों को याद कर भावुक भी हो रहे हैं।
    वहीं उनके परिजनों का कहना है कि बैस को सबकुछ याद है। लेकिन लीवर और दोनों किडनी ने काम करना बंद कर दिया है। वे कुछ दिन तक रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती थे और अपना इलाज करवा रहे थे। अपने जीवन का ज्यादातर समय उन्होंनें आरएसएस के साथ बिताया। लकिन उनके परिजनों को यह अफसोस है कि अभी उनका हाल जानने भी कोई नहीं आ रहा।

  • कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव और एनएसयूआई प्रभारी रूचि गुप्ता ने पार्टी से दिया इस्तीफा, जानें क्या बताया कारण….

    कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव और एनएसयूआई प्रभारी रूचि गुप्ता ने पार्टी से दिया इस्तीफा, जानें क्या बताया कारण….

    नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की प्रभारी और कांग्रेस की संयुक्त सचिव रुचि गुप्ता ने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा (resign) दे दिया है। गुप्ता ने अपने इस्तीफे का कारण संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल राव को बताया है। रूचि गुप्ता का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस नए अध्यक्ष का चुनाव करने समेत कई अहम मुद्दों पर बड़ी बैठक कर रही है।

    रुचि ने लिखा ‘मैं यह घोषणा करने के लिए लिख रही हूं कि मैंने इस्तीफा दे दिया है। जैसा की आप सभी जानते हैं कि संगठन में बदलाव काफी समय से रुके हुए हैं। राष्ट्रीय समिति ने एक साल तीन महीनों का समय लिया। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष के आदेश महीनों से अटके हुए हैं।’ उन्होंने लिखा ‘कई दूसरे राज्यों में बदलावों के लिए इंतजार किया जा रहा है, ताकि नए कार्यकर्ताओं को जगह मिल सके।’

    उन्होंने लिखा ‘संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की तरफ से हो रही लगातार देरी ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन मौजूदा हालात में कांग्रेस अध्यक्ष के तक यह बढ़ाना मुमकिन नहीं है।’ गुप्ता ने लिखा है कि हालात अस्थिर हो गए हैं।

  • मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उद्योगों के लिए लौह अयस्क और कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी….

    मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उद्योगों के लिए लौह अयस्क और कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी….

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय उद्योगों के लिए लौह अयस्क और कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्य सरकार एनएमडीसी और केन्द्र सरकार के साथ लगातार इस संबंध में प्रयास कर रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के उद्योगपतियों से बस्तर सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में लघु वनोपजों में वेल्यू एडिशन के लिए उद्योगों की छोटी-छोटी यूनिटें लगाने का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री बघेल आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित ’छत्तीसगढ़ के नवा बिहान’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    बघेल ने कार्यक्रम में कहा कि उद्योगपतियों की सहूलियत के लिए राज्य सरकार लघु वनोपजों के वेल्यू एडिशन के लिए वन विभाग के माध्यम से मॉडल प्रोजेक्ट तैयार करने की पहल करेगी। जिससे ऐसे उद्योग स्थापित करने में उद्योगपतियों को आसानी हो। लघु वनोपजों में वेल्यू एडिशन से संग्राहकों को वनोपजों का अच्छा मूल्य मिलेगा और उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 300 गांवों में गौठानों में बनाए गए रूरल इंडस्ट्रियल पार्क सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। जहां महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रोजगार और आय के साधनों के साथ जुड़ रही हैं, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अम्बिकापुर में एक महिला स्वसहायता समूह ने गौठान में तैयार वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री 16 रूपए प्रति किलो की दर से करने के लिए एक कम्पनी के साथ एमओयू भी किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट काल में जब पूरा देश आर्थिक मंदी से प्रभावित था, छत्तीसगढ़ में उद्योग जगत मंदी से अछूता रहा। लॉकडाउन के दौरान देश में सबसे पहले माह अप्रैल में छत्तीसगढ़ के उद्योगों में काम प्रारंभ हुआ। इसमें हमारे उद्योगपतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छत्तीसगढ़ जीएसटी कलेक्शन में आज शीर्ष में हैं। इसका श्रेय भी हमारे उद्योग और व्यापार जगत के लोगों को जाता है। छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क और कोयले की खदानों में कोरोना संकट काल में भी उत्पादन लगातार जारी रहा। बघेल ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगपतियों से विचार-विमर्श कर प्रदेश की नई औद्योगिक नीति निर्धारित की। जिसकी वजह से पिछले दो वर्षो में 103 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन एमओयू के माध्यम से प्रदेश में 42 हजार करोड़ रूपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन एमओयू को क्रियान्वित करने की चुनौती राज्य सरकार के साथ-साथ उद्योगपतियों की भी है। मुख्यमंत्री ने इन एमओयू के क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रोफेशनल तरीके से काम करने को कहा। उद्योगों की स्थापना के लिए अधिकारी उद्योगपतियों के साथ बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें।
    बघेल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता खेती-किसानी के साथ उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न करने की है। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि उद्योगों में प्रशिक्षित श्रमिकों की जरूरत होगी तो राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग, सोलर एनर्जी प्लांट की स्थापना के लिए भी राज्य सरकार की ओर से मदद का आश्वासन दिया।

    उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति देश की सबसे अच्छी उद्योग नीतियों में से एक है। यह उद्योग नीति सभी से विचार-विमर्श कर और दूसरे राज्यों की उद्योग नीति का अध्ययन कर तैयार की गयी है। इस उद्योग नीति से उद्योग, व्यापार जगत सहित आमजनों को फायदा होगा। वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि सीआईआई के कार्यक्रम में लोहा, कोयला, बिजली, पानी की चर्चा होती थी। आज पहली बार गोबर के बारे में भी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की उद्योगों को बढ़ावा देने की दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण लोकल इन्वेस्टर उद्योगों में निवेश के लिए सामने आए हैं। उद्योग नीति में 150 प्रतिशत तक अनुदान के प्रावधान के कारण उद्योगपति आज बस्तर में भी उद्योग स्थापित करने के इच्छुक हैं। भारत सरकार ने धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी है और एथेनॉल के विक्रय की दर भी निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता गांव, गरीब और किसान हैं। साथ ही उद्योगों को भी उचित सम्मान प्राप्त है।

    राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने उद्योगपतियों से प्रदेश के विकास में सहभागी बनने की बात कही। प्रमुख सचिव उद्योग श्री मनोज कुमार पिंगुआ ने राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति, उद्योगों की स्थापना की स्वीकृति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की चर्चा करते हुए कहा कि इज ऑफ डूईंग बिजनेस के मामले में छत्तीसगढ़ शीर्ष स्थान पर है

  • पार्टी आलाकमान से नाराज असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए सप्ताह भर चलेगा बैठकों का दौर…

    पार्टी आलाकमान से नाराज असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए सप्ताह भर चलेगा बैठकों का दौर…

    कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी अंतर्कलह और चुनावों में मिल रही हार के बाद नेतृत्व पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान से नाराज असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए सोनिया गांधी के साथ उनके आवास दस जनपथ पर एक बैठक हुई। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में राहुल गांधी को दोबारा अध्यक्ष बनाने की मांग उठी और मंथन हुआ। हालांकि सूत्रों ने बताया कि इस मांग पर राहुल गांधी ने कहा कि इसे पार्टी की चुनावी प्रक्रिया पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
    इसके साथ ही राहुल ने यह भी कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी उन्हें देगी, वह निभाएंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन बंसल ने बताया कि बैठक में सोनिया गांधी ने पार्टी को एक बड़ा परिवार बताया। साथ ही कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करने की बात कही। बंसल ने कहा कि पार्टी में किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है। सभी पार्टी में ऊर्जा भरने के लिए एकजुट होकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    10 जनपथ में हुई बैठक के बाद पवन कुमार बंसल ने कहा कि कांग्रेस की रणनीतिक बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई। सभी स्तरों पर पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए इस पर नेताओं ने बात की। कांग्रेस में कोई फूट नहीं है, सभी एकजुट होकर पार्टी में ऊर्जा भरने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी ने कहा कि हम सभी एक बृहद परिवार हैं और हमें पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।


    पार्टी को मजबूत करने पर हुई चर्चा
    पार्टी के एक और बड़े नेता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया कि पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए, इसे लेकर यह पहली बैठक थी। शिमला और पंचमढ़ी की तर्ज पर कॉन्क्लेव होगा। उन्होंने कहा, ”हमने पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चा की। यह एक रचनात्मक बैठक थी, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की मौजूदा स्थिति और इसे मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।”

    असंतुष्ट नेताओं ने उठाए थे सवाल
    बैठक में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, पी. चिदंबरम, अशोक गहलोत, अंबिका सोनी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हुए। गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल जैसे 23 नेताओं ने इस साल अगस्त में सोनिया गांधी को खत लिखकर पार्टी के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए थे। बैठक के बाद इस जी-23 में शामिल नेताओं की तरफ से तत्काल कोई बयान नहीं आया है।


    राहुल दोबारा बन सकते हैं अध्यक्ष
    बैठक में एक बार फिर राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग हुई। अंत में राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी जो ज़िम्मेदार देगी उसे मैं उठाउंगा। इस पर बैठक में तालियां बजीं। शुक्रवार को कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगी। उन्होंने बताया था कि शनिवार से शुरू होने वाला बातचीत और मुलाकात का यह दौर लंबा चलेगा और सोनिया गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें करेंगी।

    इस वजह से शीर्ष नेतृत्व से नाराज हैं नेता
    गौरतलब है कि सोनिया गांधी अपनी अस्वस्थता के कारण पार्टी को ज्यादा वक्त नहीं दे पा रही हैं। माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंपने के लिए वह अन्य नेताओं से बात कर रही हैं।

    सोनिया बीते आठ महीने से पार्टी के अन्य नेताओं से नहीं मिल रही हैं। पार्टी के विभिन्न राज्यों के नेता लगातार मिलने का समय मांग रहे थे। अगस्त में पत्र लिखकर नेतृत्व के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नेता भी अपनी आपत्तियों और स्थायी अध्यक्ष की मांग को लेकर मिलने का समय मांग रहे थे।

  • हाई कोर्ट का फैसला, शादी का वादा करके सेक्स करना हमेशा रेप नहीं….

    हाई कोर्ट का फैसला, शादी का वादा करके सेक्स करना हमेशा रेप नहीं….

    दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि शादी से पहले आपसी सहमति से सेक्स करना हमेशा रेप नहीं होता है. आपको बता दें कि हमने कई बार ऐसे मामले देखें हैं जब महिलाओं ने पुरुषों पर लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद भी रेप का आरोप लगाया है. महिलाएं ऐसे मामलों में कहती हैं कि फला पुरुष ने उसे शादी का झांसा देकर उसके साथ कई सालों तक रेप किया है. जब ऐसे मामलों में पुरुष शादी से इंकार करता है तो महिलाएं तुरंत ही उनपर धोखाधड़ी और रेप के केस दर्ज करवा देती हैं. ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाना हर बार रेप नहीं है. 
    दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की ओर से दायर किए गए रेप केस की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर महिला लंबे समय तक अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमत है तो ऐसी स्थिति में शादी का वादा करके सेक्स करना रेप नहीं है. आपको बता दें कि एक महिला ने ऐसे ही एक मामले में एक पुरुष पर रेप का मुकदमा कर दिया था जिसकी सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है. इस केस में पुरुष ने महिला से शादी का वादा किया था. वहीं इस मामले मे कोर्ट ने रेप केस को खारिज कर दिया. इस मामले में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना और शख्स को रेप केस से बरी कर दिया।


    हाई कोर्ट ने दिया ये फैसला
    दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले पूरे मामले की सुनवाई की इसके बाद कहा कि, अगर शारीरिक संबंध (Sexual Relationship) लंबे वक्त तक चलता रहे तो इसमें शादी के वादे को शारीरिक संबंध के लिए लालच के तौर पर नहीं देखा जा सकता है.  हालांकि जस्टिस विभु बाखरू ने सुनवाई के दौरान यह बात भी कही है कि, शादी का झूठा वादा कर सेक्स करने के लिए लालच के तौर पर तब कहा जा सकता है जब पीड़ित महिला किसी एक पल के लिए इसका शिकार होती है. यह तब संभव हो सकता है जब शादी का झांसा देने वाला व्यक्ति अपनी बात पर टिका हुआ नहीं रहे, तब ऐसे मामले में हो सकता है कि एक बार को सहमति मिल जाए लेकिन असल में महिला सेक्स के लिए मना करना चाहती हो।

  • राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के DGP से 7 साल पुराने रेप केस में  लिए गए एक्शन का ब्योरा मांगा….

    राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के DGP से 7 साल पुराने रेप केस में  लिए गए एक्शन का ब्योरा मांगा….

    झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके 13 साल पुराने कांड का जिन एक बार फिर बाहर निकल गया है। इस बार राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने महाराष्ट्र के DGP को पत्र लिख कर इस मामले का ब्योरा मांगा है। DGP को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस से सात साल में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

    मीडिया में आई रिपोर्ट के आधार पर इस मामले का संज्ञान राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया है। बुधवार को दैनिक भास्कर ने भी इस संबंध में खबर प्रकाशित किया था कि सोशल मीडिया पर झारखंड के CM हेमंत सोरेन के खिलाफ मुंबई में कानूनी लड़ाई लड़ रही लड़की को सुरक्षा देने की गुहार लगा रहे हैं। सोशल माडिया पर लोग लड़की की ओर से लिखी गई एक चिट्ठी भी वायरल कर रहे हैं जिसमें लड़की ने बताया है कि न केवल उनका रेप किया गया है बल्कि उन्हें और उनके परिजनों को लगातार धमकी भी दी जा रही है।

    लोग सोशल मीडिया पर चला रहे हैं अभियान
    सोशल मीडिया पर लोग मुंबई पुलिस से आएशा को सुरक्षा देने की गुहार लगा रहे हैं। #justiceforayesha हैश टैग से अभियान चला रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि हेमंत सोरेन अभी एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उनके पास पावर है। वे मामले को समाप्त करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

    निशिकांत दुबे लगाए थे आरोप
    सी मुद्दे पर एक महीने पहले झारखंड में भी राजनीति खूब गरमाई थी। गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया के माध्यम से सीएम हेमंत सोरेन पर अलग-अलग आरोप लगाए थे। BJP के सांसद निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया था कि वे झारखंड डीजीपी एमवी राव और माफिया, गुंडों के साथ मिलकर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लड़की की हत्या करा सकते हैं।

  • FIR में SC-ST एक्ट और पॉस्को एक्ट की धाराएं हो तो सुनवाई पॉस्को कोर्ट में ही होगी….

    FIR में SC-ST एक्ट और पॉस्को एक्ट की धाराएं हो तो सुनवाई पॉस्को कोर्ट में ही होगी….

    बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने एक ही FIR में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम (SC-ST Act) और पॉस्को अधिनियम का मामला दर्ज होने पर विशेष न्यायाधीश पॉस्को अधिनियम के कोर्ट में सुनवाई का अधिकार दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ में हुई।

    कोरबा जिला के उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम कनकिमुडीपारा निवासी राम स्वरूप राजवाड़े के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज किया है। इसमें उसके खिलाफ पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 और लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 ( प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी पॉस्को) का मामला दर्ज किया।

    मामले की सुनवाई कोरबा के एससी-एसटी एक्ट के विशेष सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई। इसको आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दिया। इसमें उसके तरफ से कहा गया कि उसका मामला एससी-एसटी एक्ट की विशेष कोर्ट के बजाय पॉस्को के लिए बने विशेष न्यायालय में सुनवाई होनी चाहिए।

    मामले में हाईकोर्ट ने अधिवक्ता अनुराग दयाल श्रीवास्तव को न्यायमित्र नियुक्त कर मामले में अपना पक्ष रखने कहा। कोर्ट में बताया गया कि यह विशेष अधिनियम है, इसलिए यह देखा जाएगा कि अधिनियम किसमें समाहित किए जाने का प्रावधान है। हाईकोर्ट में न्यायमित्र के तरफ से पक्ष रखा गया कि पॉस्को एक्ट की धारा 28(2) में प्रावधान है कि पॉस्को एक्ट के साथ कोई भी दूसरा अपराध वह चाहे अन्य अधिनियम के तहत है तो भी ऐसे अपराध के लिए भी पॉस्को एक्ट के तहत विशेष न्यायाधीश विचारण के लिए निर्धारित है। उसी कोर्ट में सभी मामले सुने जाएंगे।

    मामले को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मामले को एससी-एसटी एक्ट कोर्ट से पॉस्को कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट को निर्देश दिया कि वे तत्काल प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज विशेष न्यायधीश पॉस्को एक्ट के यहां स्थानांतरित कर दें।

    एससी-एसटी एक्ट में प्रावधान नहीं है

    अधिवक्ता अनुराग दयाल श्रीवास्तव ने बताया कि एससी एसटी एक्ट में ऐसा प्रावधान नहीं है कि उस कोर्ट में दूसरे मामले की सुनवाई हो सके। ऐसी परिस्थिति में पॉस्को अधिनियम में प्रावधान किए गए हैं कि पॉस्को के विशेष न्यायाधीश के किसी भी अधिनियम के तहत सुनवाई कर सकते हैं।

    अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 का है इस पर 2015 में संशोधन किए गए थे। जबकि पॉस्को अधिनियम 2012 का है। इस अधिनियम में एससी-एसटी एक्ट को समाहित किया कर विशेष न्यायाधीश पॉस्को के तहत विचारण का अधिकार दिया गया है।

    कोर्ट का आदेश

    यदि कोई अभियुक्त किसी घटना के अनुक्रम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 और पॉस्को अधिनियम से दंडनीय अपराधों के लिए एक ही विचारण में एक साथ आरोपित किया जाता है, तब ऐसी स्थिति में पॉस्को अधिनियम के तहत अधिसूचित व गठित निर्दिष्ट विशेष न्यायालय को दोनों अधिनियमों के अधीन अपराधों का विचारण करने की अनन्य अधिकारिता होगी।

  • वैक्सीन लगवानी है या नहीं, सरकार ने ये फैसला लोगों की मर्जी पर छोड़ा…

    वैक्सीन लगवानी है या नहीं, सरकार ने ये फैसला लोगों की मर्जी पर छोड़ा…

    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोरोनावायरस का वैक्सीनेशन वॉलेंटरी बेसिस पर होगा। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि भारत में डेवलप की गई वैक्सीन उतनी ही असरदार होगी, जितनी कि दूसरे देशों में बन रही वैक्सीन। साथ ही यह सलाह दी है कि वैक्सीन का पूरा कोर्स लें ताकि खुद को और दूसरों को कोरोना से बचा सकें। मंत्रालय ने वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर पूछे गए सवालों के आधार पर FAQ जारी की है।

     हम आपको उनमें से 15 चुनिंदा सवालों के जवाबों के जरिए बता रहे हैं कि देश में कोरोना वैक्सीनेशन किस तरह होगा…

    1. क्या कोरोना वैक्सीनेशन सभी के लिए जरूरी होगा?
    नहीं। यह वाॅलेंटरी बेसिस पर होगा। हालांकि, यह सलाह है कि कोराेना से बचाव के लिए वैक्सीन का पूरा शेड्यूल अपनाएं ताकि आप अपने परिवार के लोगों, दोस्तों, रिश्तेदारों और को-वर्कर्स तक इस बीमारी को पहुंचने से रोक सकें।

    2. पहले किन्हें वैक्सीन लगाई जाएगी?
    सरकार ने प्रायोरिटी ग्रुप तय कर दिए हैं। पहले ग्रुप में हेल्थ केयर और फ्रंट लाइन वर्कर्स रहेंगे। दूसरे ग्रुप में वे लोग शामिल होंगे, जिनकी उम्र 50 साल से ज्यादा है या जिनकी उम्र 50 से कम है, लेकिन उन्हें गंभीर बीमारियां हैं।

    • 50+ का ग्रुप इसलिए चुना गया है, क्योंकि इस एज ग्रुप को वैक्सीन लगाने से ऐसे 78% लोग कवर हो जाएंगे, जिन्हें कोई न कोई गंभीर बीमारी भी है।
    • 50+ ग्रुप को दो सब-ग्रुप में बांटा जाएगा। पहला सब ग्रुप 60+ उम्र के लोगों का होगा। इन्हें पहले वैक्सीन दी जाएगी। दूसरा सब ग्रुप 50 से 60 साल के उम्र के लोगों का होगा। इन्हें बाद में वैक्सीन लगाई जाएगी।
    • अगर वैक्सीन की अवेलेबिलिटी अच्छी रही तो दोनों ही सब ग्रुप्स को एकसाथ वैक्सीन दी जा सकती है।

    3. जिसे कोरोना है, क्या ऐसे व्यक्ति को वैक्सीन लगाई जाएगी?
    संक्रमित लोग वैक्सीनेशन की जगह पर दूसरे लोगों में वायरस फैला सकते हैं। इसके लिए संक्रमित लोगों को सिम्प्टम खत्म हो जाने के बाद 14 दिन तक अपना वैक्सीनेशन टालना होगा।

    4. जो कोरोना से रिकवर हो चुके हैं, क्या उनके लिए वैक्सीन लगाना जरूरी है?
    हां। आपको कोरोना पहले हुआ हो या नहीं हुआ हो, आपको वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है ताकि वायरस के खिलाफ आपका इम्यून सिस्टम मजबूत हो सके।

    5. सबसे बड़ा सवाल- वैक्सीनेशन होगा कैसे?

    • वैक्सीन की अवेलेबिलिटी के हिसाब से पहले प्रायोरिटी ग्रुप्स का वैक्सीनेशन होगा।
    • जो इन ग्रुप्स के तहत एलिजिबल होंगे, उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए टाइम और हेल्थ फैसिलिटी के बारे में SMS के जरिए बताया जाएगा, जहां जाकर वे वैक्सीनेशन करा सकते हैं।
    • वैक्सीनेशन सेंटर पर मास्क लगाकर जाना होगा। हाथ सैनेटाइज रखने होंगे। दो गज की दूरी रखनी हाेगी।
    • वैक्सीन का डोज लगने के बाद आपको SMS मिलेगा।
    • वैक्सीन लगने के बाद सेंटर पर कम से कम आधा घंटा रुकना होगा। अगर तबीयत ठीक न लगे तो वहां के स्टाफ को बताना होगा।
    • वैक्सीन के सभी डोज लगने के बाद QR कोड बेस्ड सर्टिफिकेशन भी आपके मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा।

    6. वैक्सीन के कितने डोज होंगे?
    दो डोज होंगे। यह 28 दिन के गैप में लगेंगे। इसी के बाद आपका वैक्सीनेशन शेड्यूल पूरा होगा।

    7. अगर किसी ने हेल्थ डिपार्टमेंट में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो क्या उसे वैक्सीन लगेगी?
    नहीं। रजिस्ट्रेशन जरूरी है। रजिस्ट्रेशन के बाद ही व्यक्ति को बताया जाएगा कि उसे कहां, किस वक्त पर वैक्सीन लगवाने पहुंचना है।

    8. जो वैक्सीन के लिए एलिजिबल होंगे, उनके लिए कौन-से डॉक्यूमेंट जरूरी होंगे?
    इनमें से कोई भी फोटो ID रजिस्ट्रेशन के लिए पेश किया जा सकता है-

    • ड्राइविंग लाइसेंस
    • लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड
    • मनरेगा जॉब कार्ड
    • सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों को मिले ऑफिशियल आईडी कार्ड
    • पैन कार्ड
    • बैंक या पोस्ट ऑफिस की तरफ से जारी पासबुक
    • पासपोर्ट
    • पेंशन डॉक्यूमेंट
    • केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पब्लिक लिमिटेड कंपनियों के कर्मचारियों को जारी सर्विस आईडी कार्ड
    • वोटर आईडी कार्ड

    9. क्या रजिस्ट्रेशन के वक्त भी फोटो आईडी जरूरी होगा?
    रजिस्ट्रेशन के वक्त फोटो आईडी जरूरी होगा। इसे वैक्सीनेशन के वक्त वेरिफाई किया जाएगा।

    10. अगर वैक्सीनेशन की जगह पर कोई फोटो आईडी न पेश कर पाए तो क्या होगा?
    रजिस्ट्रेशन और वैक्सीन के वक्त वेरिफिकेशन के लिए फोटो आईडी जरूरी है।

    11. अगर कोई कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों के लिए दवाई ले रहा है तो क्या उसे वैक्सीन लगाई जाएगी?
    हां। इस तरह की बीमारी वाले मरीज हाई रिस्क कैटेगरी में आएंगे। उनके लिए वैक्सीनेशन जरूरी है।

    12. एंटीबॉडी कब डेवलप होगी?
    कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के दो हफ्ते बाद एंटीबॉडी डेवलप होगी।

    13. क्या वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स होंगे? क्या एहतियात जरूरी होंगे?
    जब सेफ्टी साबित होगी, तभी कोरोना वैक्सीन लाई जाएगी। बाकी वैक्सीन्स को देखें तो हल्का बुखार और दर्द जैसे कुछ लक्षण नजर आते हैं। राज्य सरकारों से वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से निपटने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। वैक्सीन लगाने के बाद भी आपको मास्क लगाना होगा। हाथ सैनिटाइज रखे होंगे और दो गज की दूसरी रखनी होगी।

    14. अलग-अलग वैक्सीन्स आने के बाद किसे चुना जाएगा?
    क्लिनिकल ट्रायल के डेटा के आधार पर सेफ्टी को देखते हुए वैक्सीन चुनी जाएगी और उसे लाइसेंस मिलेगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि एक ही वैक्सीन का पूरा शेड्यूल अपनाया जाए। वैक्सीन के डोज बदले नहीं जा सकते।

    15. क्या भारत के पास 2 से 8 डिग्री तापमान में वैक्सीन स्टोर करने की कैपेसिटी है?
    भारत दुनिया का सबसे बड़ा इम्युनाइजेशन प्रोग्राम चलाता है। इसमें 2.6 करोड़ नवजात और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाएं शामिल रहती हैं। इस प्रोग्राम को और मजबूत किया जा रहा है।

  • 26 रुपये का पेट्रोल कैसे बिकता है 82 रुपये में, समझिए महंगे पेट्रोल के पीछे की कहानी

    26 रुपये का पेट्रोल कैसे बिकता है 82 रुपये में, समझिए महंगे पेट्रोल के पीछे की कहानी

    दिल्ली। क्या आपको मालूम है कि पेट्रोल और डीजल सरकार को सिर्फ 26 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिलता है, लेकिन पेट्रोल पंप पर पहुंचते पहुंचते ये कैसे 80 रुपये के पार चला जाता है. मतलब हम और आप पेट्रोल के लिए 54 रुपये ज्यादा देते हैं जो करीब 200 परसेंट है. 
    भारत का 85 परसेंट क्रूड ऑयल इंपोर्ट होता है जिसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इंपोर्ट करती हैं. पहले समझते हैं कि ये OMCs क्या होती हैं. दरअसल इनका काम होता है क्रूड ऑयल को दूसरे देशों से खरीदना, फिर उसे किसी रिफाइनिंग कंपनी से रिफाइन करवाकर उसमें से पेट्रोल, डीजल और केरोसीन निकालना और फिर उसे किसी डीलर को बेचना. भारत में IOC, BPCL और HPCL ये तीन सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हैं जिनका मार्केट शेयर 90 परसेंट से भी ज्यादा है।

    पेट्रोल की कीमतें कैसे तय होती हैं.

    दिल्ली में आज पेट्रोल का रेट 83.71 रुपये प्रति लीटर है. सरकारी तेल कंपनी IOC की वेबसाइट के मुताबिक आज की तारीख में पेट्रोल का बेस प्राइस 26.34 रुपये/लीटर है. इसमें मालभाड़े का खर्चा 0.37 रुपये प्रति लीटर जोड़ा जाता है तो इसका रेट पहुंचता है 26.71 रुपये प्रति लीटर, इसी भाव पर तेल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल को डीलर्स को बेचती हैं।

    डीलर को बेचे गए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी और VAT लगाया जाता है. केंद्र सरकार इस पर 32.98 रुपये रुपये प्रति लीटर की दर से एक्साइज ड्यूटी वसूलती है और राज्य सरकार 19 रुपये प्रति लीटर VAT लगाती है. डीलर भी अपना कमीशन लेता है, जो कि 3.65 रुपये प्रति लीटर है. इस तरह से पेट्रोल का रेट पहुंच जाता है 82 रुपये के पार. VAT हर राज्य अपने अपने हिसाब से अलग अलग लगाता है इसलिए हर राज्य में रेट अलग अलग होते हैं।

    26 का पेट्रोल 82 रुपये में कैसे ?

    बेस प्राइस                         26.34 
    माल भाड़ा                         0.37 
    डीलर को बेचा                   26.71
    एक्साइज ड्यूटी                  32.98
    डीलर कमीशन                  3.65 
    वैट                                 19.00
    रीटेल प्राइस                    82.34
    (सौ: IOC: 1 दिसंबर 2020)

    यानि 82 रुपये में 51.98 रुपये या करीब करीब 52 रुपये केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स वसूलती हैं. पेट्रोल और डीजल अब मार्केट के हवाले है, यानि सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है. मजेदार बात ये है कि कई मौकों पर जब अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव काफी गिरे हुए थे तब भी सरकारों ने एक्साइज ड्यूटी और VAT में बढ़ोतरी की थी।

    इसी तरह एक नजर डीजल के गणित पर भी डाल लेते हैं. डीजल का बेस प्राइस है 27 रुपये यानि जिस भाव पर OMC कंपनी ने तेल इंपोर्ट किया. इसके बाद माल भाड़ा 0.34 रुपये प्रति लीटर जोड़कर इसे डीलर को 27.42 रुपये के भाव पर बेचा. केंद्र सरकार ने इस पर  31.83 रुपये एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार ने 10.64 रुपये वैट लगाया. जिससे रीटेल प्राइस पहुंच गया 72 रुपये के पार. यानि 27 रुपये के डीजल पर सरकारें करीब 45 रुपये टैक्स वसूलती हैं।

    27 का पेट्रोल 72 रुपये में कैसे ?

    बेस प्राइस                         27.08 
    माल भाड़ा                         0.34
    डीलर को बेचा                   27.42
    एक्साइज ड्यूटी                  31.83
    डीलर कमीशन                  2.53 
    वैट                                 10.64 
    रीटेल प्राइस                    72.40
    (सौ: IOC: 1 दिसंबर 2020)

    लॉकडाउन के दौरान 1 अप्रैल तक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 22.98 रुपये हुआ करती थी, जो कि आज 32.98 रुपये है. जबकि डीजल पर एक्साइड ड्यूटी 18.83 रुपये थी जो आज 31.83 रुपये है. यानि लॉकडाउन के दौरान भी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की. जबकि कोरोना संकट की अवधि के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, लेकिन इसका फायदा आम आदमी को नहीं मिला।

  • TI और ASI हुये सस्पेंड, धारा बढ़ाने के नाम पर मांगे पैसे

    TI और ASI हुये सस्पेंड, धारा बढ़ाने के नाम पर मांगे पैसे

    मुंगेली– धारा बढ़ाने के नाम पर आरोपियों को धमका कर पैसे के आरोप में लोरमी के टीआई और एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया है। आरोपियों ने लोरमी टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे के खिलाफ पैसे मांगने का आरोप लगाया है।

    एक मामले के आरोपी खिलाफ धारा बढ़ाने के नाम पर लोरमी के टीआई और एएसआई पर पैसे मांगने का आरोप लगाया। मामले की शिकायत पर एसपी अरविंद कुजूर ने एसडीओपी नवनीत कौर छाबड़ा को इसकी जांच करने कहा। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे को सस्पेंड कर दिया गया है।