Author: Sunil Agrawal

  • कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी, घायल बिलासपुर में भर्ती…

    कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी, घायल बिलासपुर में भर्ती…

    बिलासपुर। गेवरा कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी की गई, लेकिन गाड़ी में सवार लोग जंगलों से होते हुए भाग निकले. घटना के बाद बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में गोली लगने से उपचार के लिए कोरबा के युवक के भर्ती होने की सूचना पर दीपका पुलिस पूछताछ के लिए रवाना हो गई है।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात गेवरा कोयला खदान में संदिग्ध वाहन दिखने पर सीआईएसएफ क्यूआरटी के गस्ती दल ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वाहन रुकने की वजह सीआईएसएफ के वाहन को टक्कर मारकर भागने लगे. इस पर जवानों ने फायरिंग की, लेकिन वाहन में सवार लोग जंगल के रास्ते से भाग निकले।

    इसके बाद बिलासपुर के सरकण्डा थाना से सूचना मिली की अपोलो हास्पिटल बिलासपुर में सालिक राम गोंड पिता बिरन सिंह गोंड (32 साल) निवासी खल्लारी पारा, ग्राम नोनबिर्रा, थाना पाली, जिला कोरबा गोली लगने से घायल होकर इलाज के लिये भर्ती है. युवक की हालत खतरे से बाहर है. युवक ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि रात्रि में गेवरा खदान में गाड़ी लेकर घुसने के दौरान सीआईएसएफ गस्ती दल की फायरिंग से उसे चोट लगी है।

    इस घटना के संबंध थाना दीपका में अपराध क्रमांक 52/2021 धारा 186, 353, 447, 427, 34 भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है. साथ ही दीपका थाना की पुलिस टीम घायल सालिक राम गोंड से पूछताछ करने अपोलो हास्पिटल बिलासपुर रवाना किया गया है।


    चार पहिया में गए थे मवेशी चराने
    पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय लोगों का कहना है कि घायल युवक मवेशी खोजने के लिए गया था, जिस पर सीआईएसएफ के गस्ती दल ने गोलिया चलाईं है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि रात में चार पहिया वाहन में कोई कैसे मवेशी खोजने के लिए जा सकता है. हालांकि, इस पूरे मामले पर एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर का कहना है कि ग्रामीणों की बात को सिरे से नकारते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है ये लोग खदान में क्या करने के लिए गए थे।

  • पूर्व सांसद की गिरफ्तारी कभी भी…सीजेएम कोर्ट ने जारी किया वारंट….

    पूर्व सांसद की गिरफ्तारी कभी भी…सीजेएम कोर्ट ने जारी किया वारंट….

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 6 जनवरी को हुए गैंगवार में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या मामले में लखनऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की गई है. पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. पुलिस ने धनंजय को हत्या की साजिश रचने का आरोपी बनाया है।

    लखनऊ की सीजेएम कोर्ट ने धनंजय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है. इससे पहले भी इस केस में पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह का नाम सामने आया था. गैंगवार में घायल शूटर का इलाज करने वाले सुल्तानपुर के डॉ. एके सिंह ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि धनंजय सिंह ने ही उन्हें फोनकर घायल शूटर के इलाज के लिए कहा था।

  • क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    सुरक्षित उपयोग कैसे करें

    दोस्तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से wifi क्रडिट ,डेबिट कार्ड अथवा कॉन्टेक्टलेस कार्ड को मार्केट में लाया गया था ।इस कार्ड को स्वैप करने की जरूरत नही होती है ,बिना पिन के आप इस कार्ड से पेमेंट कर सकते है ।जैसे ही आप इस कार्ड को pos मशीन के 4 cm के दायरे में लाते है ।आपका पैसा ऑटोमैटिकली निकल जाता है।इसे है #कार्ड टेपिंग कहते है ।। कार्ड में wifi का निशान बना होता है। यह कार्ड नियर फील्ड कम्युनिकेशन रेडियो फ्रीक्वेंसी ऑथेंटिकेशन तकनीक पर काम करती है ।।इसमें एक छोटी सी चीप लग होती है एक छोटी सी एंटीना लगा होता है ।जिससे सिग्नल निकलता है ।

    दोस्तो इस कार्ड की लिमिट 2000 की होती है।उससे ज्यादा इस कार्ड से एक बार मे रुपये नही निकाल सकते । हालांकि अभी इसकी लिमिट 5000 कर दी गई है ।यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सही है ।लेकिन साइबर ठगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है।
    दिल्ली पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा था ,जो हाथ मे पॉश मशीन लेकर चलते थे ,भीड़ भाड़ वाले इलाके में ,लोगों के पॉकेट के किनारे 4 cm की दूरी पर मशीन लगाकर 2 हजार निकाल लिया करते थे।

    जाने कार्ड को सुरक्षित कैसे रख सकते है

    बील पेमेंट करना हो तो स्वयं कार्ड को pos मशीन के पास ले जाये ,टेप करे। जब रकम आपका निकल जायेगा ,वैसे ही आपके मोबाइल में अलर्ट मेसेज आएगा।

    pos मशीन के 4 cm के दायरे में आने के बाद ही इस कार्ड से पैसे निकल जाते है ।इसके लिए कार्ड को एलुमिनियम के फॉइल पेपर पर लपेट कर रख सकते है।

    RFID ब्लॉकिंग वालेट्स जो फ्रीक्वेंसी को रोकता है ।का उपयोग कर सकते है। यह वालेट्स मार्किट में उपलब्ध है।

  • 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए श्रम कानून बनाए गए….

    29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए श्रम कानून बनाए गए….

    मोदी सरकार चौंकाने वाले निर्णयों के लिए जानी जाती है। एक बार फिर उसने नौकरीपेशा लोगों को चौंकाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने सैलरी के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जिससे आपकी टेक होम सैलरी कम हो जाएगी।

    नौकरीपेशा लोगों के लिए देश में अभी तक 29 श्रम कानून थे। केंद्र सरकार ने बदलाव करते हुए इनकी संख्या 29 से 4 कर दी है। ये कानून हैं- व्यावसायिक सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य और कार्य की स्थितियां, औद्योगिक संबंध और सामाजिक सुरक्षा कानून। एक अप्रैल से नए कानून लागू हो जाएंगे और एक मई की सैलरी पर इनका असर भी दिखना शुरू हो जाएगा।

    सबसे पहले सैलरी का गणित समझना जरूरी

    नौकरी करने वाले लोग दो शब्दों से परिचित होते हैं, पहला CTC यानी कॉस्ट टु कंपनी और दूसरा टेक होम सैलरी, जिसे इन-हैंड सैलरी भी कहा जाता है।

    1. CTC: CTC यानी आपके काम के ऐवज में कंपनी का कुल खर्च, यह आपकी कुल सैलरी होती है। इस सैलरी में आपकी बेसिक सैलरी तो होती ही है, इसके अलावा हाउस अलाउंस, मेडिकल अलाउंस, ट्रैवल अलाउंस, फूड अलाउंस और इंसेंटिव भी होता है। इन सबको मिलाकर आपकी टोटल सैलरी तय होती है, जिसे CTC कहा जाता है।

    2. टेक होम सैलरी: जब आपके हाथ में सैलरी आती है तो वह आपकी CTC से कम होती है। वजह- कंपनी आपकी CTC यानी कुल सैलरी से कुछ पैसा प्रोविडेंट फंड यानी PF के लिए काटती है, कुछ मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम के तौर पर काटती है और इसके अलावा भी कुछ मदों में कटौती की जाती है। इन सभी के बाद जो पैसा आपके हाथ में आता है, वह आपकी इन-हैंड सैलरी होती है।

    कैसे कम हो जाएगी आपकी सैलरी?

    जिसकी बेसिक सैलरी CTC की 50% है, उसे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन जिसकी बेसिक सैलरी CTC की 50% नहीं है उसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि इन नियमों के तहत अब किसी की भी बेसिक सैलरी CTC के 50% से कम नहीं हो सकती।

    दरअसल PF का पैसा आपकी बेसिक सैलरी से कटता है, जो बेसिक सैलरी का 12% होता है। यानी बेसिक सैलरी ‍जितनी ज्यादा होगी PF उतना ज्यादा कटेगा। पहले लोग टोटल CTC से बेसिक सैलरी कम कराकर अलाउंस बढ़वा लेते थे, जिससे टैक्स में छूट भी मिल जाती थी और PF भी कम कटता था। इससे इन-हैंड सैलरी बढ़ जाती थी।

    नोट- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और अन्य कटौतियां को 1 हजार माना गया है, जबकि यह हर कंपनी में अलग-अलग होता है। यह कंपनी की सैलरी पॉलिसी और एंप्लॉय क्लास पर निर्भर करता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की, जब सत्यापित करने वाले दोनों गवाहों की मौत हो गई हो तो वसीयत के निष्पादन को कैसे साबित किया जाए ?

    सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की, जब सत्यापित करने वाले दोनों गवाहों की मौत हो गई हो तो वसीयत के निष्पादन को कैसे साबित किया जाए ?

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में कहा है कि ऐसी स्थिति में जहां वसीयत में गवाही देने वाले दोनों गवाहों की मौत हो जाती है, यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि गवाही देने वाले कम से कम एक गवाह की लिखावट उसकी ही है। इस मामले में, प्रासंगिक समय पर, प्रश्न में वसीयत में गवाही देने वाले दोनों व्यक्ति जीवित नहीं थे। सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कार्यवाही में गवाहों को एक गवाह द्वारा दिए गए सत्यापित बयान की प्रति प्रस्तुत करके वसीयत को साबित करने की मांग की गई थी।

    हालांकि, उच्च न्यायालय ने माना कि वसीयत को सत्यापित करने वाले गवाहों में से एक की गवाही ने वसीयत के उचित निष्पादन को स्थापित नहीं किया है, इसमें उसने दूसरे कथित गवाह द्वारा वसीयत को सत्यापित करने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष अपील में मुद्दा यह था कि जबकि दोनों साक्षी गवाह मर चुके हैं तो क्या अभी भी साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत, सत्यापन कानून की आवश्यकता है और भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 के तहत, दो गवाहों द्वारा सत्यापन को प्रमाणित किया जाना है? या यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि गवाही देने वाले कम से कम एक गवाह की लिखावट उसकी ही है, जो उसको साबित करने के अलावा साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 की शाब्दिक कमान है?

    न्यायमूर्ति जोसेफ द्वारा लिखित निर्णय में वसीहत के निष्पादन के प्रमाण से संबंधित कानून को सफलतापूर्वक निपटाया गया है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 अप्राधिकृत वसीयत के निष्पादन से संबंधित है, इस आदेश में कि न केवल एक वैध वसीयत बनाई जाएगी, यह आवश्यक है कि वसीयतकर्ता को दस्तावेज़ को निष्पादित करना चाहिए, बल्कि निष्पादन को कम से कम दो गवाहों द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 68, कानून द्वारा सत्यापित किए जाने वाले दस्तावेज के निष्पादन के प्रमाण से संबंधित है। इस प्रावधान के अनुसार, वसीहत के मामले में, यदि कोई गवाह जीवित है और अदालत की प्रक्रिया के अधीन है और सबूत देने में सक्षम है, तो, वसीयत तभी साबित की जा सकती है, जब इसके निष्पादन को साबित करने को लिए गवाह में से किसी एक को गवाही के लिए बुलाया जाए।इसके अलावा, यह भी एक सुलझा हुआ कानून है, ऐसे मामलों में, कम से कम एक गवाह को न केवल उसके द्वारा जांच को प्रमाणित करने के लिए छानबीन की जानी चाहिए, बल्कि उसे अन्य गवाह [[1995 (6) SCC 213]) द्वारा सत्यापन भी साबित करना होगा।

    इस मुद्दे का जवाब देते हुए अदालत ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 69, साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 में सन्निहित आवश्यकता से प्रस्थान को दर्शाती है। बेंच द्वारा इस संबंध में की गई प्रासंगिक टिप्पणियों को नीचे उद्धृत किया गया है “वसीयत के मामले में, जिसे भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 में प्रदान किए गए मोड में निष्पादित किया जाना आवश्यक है, जब कोई गवाह उपलब्ध है, तो वसीयत को उसकी जांच करके साबित किया जाना चाहिए। उसे न केवल साबित करना होगा कि साक्षत्कार उसके द्वारा किया गया था, बल्कि उसे दूसरे गवाह द्वारा भी सत्यापित गवाही को साबित करना चाहिए। यह, कोई संदेह नहीं है, इस स्थिति के अधीन जो साक्ष्य अधिनियम की धारा 71 में चिंतन किया गया है जो अन्य दस्तावेज़ों के बीच में, अन्य साक्ष्य को सबूत में जोड़ने की अनुमति देता है, जहां उपस्थित गवाह ने वसीयत या अन्य दस्तावेज़ के क्रियान्वयन से इंकार किया है या याद नहीं किया है। दूसरे शब्दों में, दस्तावेज़ के तहत वसीयत करने वाले या वसीयत के उत्तराधिकारी का भाग्य, जिसे कानून द्वारा सत्यापित किया जाना आवश्यक है, सत्यापित गवाह की गवाही पर ही आधारित नहीं रखा गया है और कानून गवाह द्वारा दस्तावेज के निष्पादन से इनकार करने के बावजूद दस्तावेज़ को प्रभावित करने में सक्षम बनाता है। ” (पैरा 70)

    अदालत ने आगे कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए मामले में, जहां तक साबित हो रहा है कि जहां तक साक्षी गवाह का संबंध है, यह है कि साक्षी में से किसी एक की गवाही उसकी लिखावट में है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 पर वापस लौटते हुए, हमारा विचार है कि इसमें आवश्यकता यह होगी कि यदि दस्तावेज को निष्पादित करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर उसकी लिखावट में साबित होते हैं, तो एक गवाह की गवाही को साबित करना है। दूसरे शब्दों में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए एक मामले में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 के अनुसार आवश्यक है कि दोनों गवाहों द्वारा किए गए सत्यापन को कम से कम एक गवाह की जांच करके साबित किया जाए, जिसके साथ विवाद किया गया है। ऐसा हो सकता है कि साक्ष्य के गवाह द्वारा दिए गए सबूत, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के अर्थ के भीतर, अन्य गवाह द्वारा सत्यापन से संबंधित सबूत हो सकते हैं, लेकिन यह वैसा नहीं है, जैसा कि इसे कानूनी आवश्यकता बताया गया है। धारा के तहत दोनों गवाहों द्वारा सत्यापन को साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 द्वारा कवर किए गए मामले में साबित किया जाना है। संक्षेप में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए एक मामले में, जहां तक साबित हो रहा है कि जहां तक साक्षी गवाह का संबंध है, वह यह है कि उपस्थित गवाह में से एक का सत्यापन उसकी लिखावट में है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 धारा की भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध है जैसा कि अदालत ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों गवाहों के सत्यापन को साबित करना होगा लेकिन साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 में इसकी आवश्यकता नहीं है। (पैरा 71)

  • अमेरिकी शख्स ने कुत्ते के नाम की 40 करोड़ की प्रापर्टी….

    अमेरिकी शख्स ने कुत्ते के नाम की 40 करोड़ की प्रापर्टी….

    दिल्ली। अक्सर लोग जानवरों से इस कदर प्रेम करते हैं कि उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। ऐसे ही एक शख्स का काम इन दिनों चर्चा में है।दरअसल, अमेरिका के नैशविले में रहने वाले एक शख्स व्यक्ति ने अपने पालतू कुत्ते लुलू के लिए पचास लाख डॉलर यानि लगभग चालीस करोड़ रूपये की संपत्ति छोड़ी है। अमेरिकी मीडिया की खबरों के मुताबिक लुलू की देखरेख करने वाली मार्था बर्टन ने बताया कि कुत्ते के मालिक बिल डोरिस एक जाने माने बिजनेसमैन थे और पिछले साल उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने अपनी मौत से पहले लुलू को अपनी जायदाद का वारिस घोषित कर दिया।खबरों के मुताबिक बिजनेसमैन डोरिस ने अपनी वसीयत में लुलू की देखरेख के लिए पैसे एक ट्रस्ट में जमा करने एवं उसकी देखरेख करने के लिए हर महीने उसमें से राशि देने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वह कुत्ते को बहुत प्यार करते थे। इस कुत्ते लुलू की देखभाल करने वाली बर्टन ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि इतनी बड़ी राशि कभी लुलू की देखभाल पर खर्च हो भी सकेगी या नहीं। फिलहाल चालीस करोड़ रूपये की संपत्ति एक कुत्ते के नाम कर देने की बात अमेरिका समेत पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • फास्टैग में मिनिमम बैलेंस की बाध्यता खत्म, जानिए और क्या नियम बदले…

    फास्टैग में मिनिमम बैलेंस की बाध्यता खत्म, जानिए और क्या नियम बदले…

    दिल्ली। फास्टैग (Fastag) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI,एनएचएआई) ने फास्टैग में मिनिमम बैलेंस रखने की बाध्यता खत्म कर दी है. हालांकि यह सुविधा सिर्फ कार, जीप या वैन (Car, Jeep, Van) के लिए ही है, कामर्शियल व्हीकल (Commercial Vehicles) के लिए नहीं।

    एनएचएआई ने फास्टैग जारी करने वाले बैंकों से कहा है कि वे सिक्योरिटी डिपॉजिट के अलावा कोई मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं कर सकते हैं. पहले विभिन्न बैंक फास्टैग में सिक्योरिटी डिपोजिट के अलावा मिनिमम बैलेंस रखने के लिए भी कह रहे थे. कोई बैंक 150 रुपये तो कोई बैंक 200 रुपये का मिनिमम बैलेंस रखने को कह रहे थे. मिनिमम बैलेंस होने की वजह से कई FASTag उपयोगकर्ताओं को अपने FASTag खाते/वॉलेट में पर्याप्त शेष होने राशि के बाद भी एक टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति नहीं मिलती थी. इसके चलते टोल प्लाजा पर गैर जरूरी नोक—झोंक होती थी और कई बार पीछे आ रहे वाहनों को असुविधा होती है।

    बैलेंस शून्य हो गया है तो फास्टैग लाइन से नहीं निकल सकेगी गाड़ी
    एनएचएअई के मुताबिक यूजर को अब टोल प्लाजा से गुजरने की तब तक अनुमति दी जाएगी, जब तक कि FASTag खाते/वॉलेट में निगेटिव बैलेंस नहीं है. यदि फास्टैग अकाउंट में कम पैसे हैं तो भी कार को टोल प्लाजा पार करने की अनुमति होगी. भले ही टोल प्लाजा पार करने के बाद फास्टैग अकाउंट निगेटिव क्यों नहीं हो जाए. यदि ग्राहक उसे रिचार्ज नहीं करता है तो निगेटिव अकाउंट की रकम बैंक सिक्योरिटी डिपॉजिट से वसूल कर सकता है।


    FASTag कुल टोल कलेक्शन का 80 फीसदी
    देश भर में 2.54 करोड़ से अधिक फास्टैग के यूजर हैं. हाइवे पर FASTag कुल टोल कलेक्शन का 80 फीसदी योगदान देता है। इस समय FASTag के माध्यम से डेली टोल कलेक्शन 89 करोड़ रुपए को पार कर गया है। गौरतलब है कि 15 फरवरी 2021 से फास्टैग के माध्यम से टोल प्लाजा पर भुगतान अनिवार्य हो जाएगा. ऐसा इसलिए, क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण देश भर में टोल प्लाजा पर 100% कैशलेस टोल प्राप्त करने का लक्ष्य बना रहा है।

  • सोशल मीडिया पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी अपलोड करने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार….

    सोशल मीडिया पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी अपलोड करने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार….

    रायपुर। सोशल मीडिया पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी अपलोड करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने सोशल मीडिया फ्लेटफार्म पर महिलाओं और बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो अपलोड किया था. एक मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना इलाके और दूसरा मामला मौदहापारा थाना इलाके का है।

    पुलिस के मुताबिक साल 2020 में सोशल मीडिया पर आरोपी संतोष कुमार यादव निवासी जोरा ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी अपलोड अपलोड किया था. जिसकी शिकायत मिलने के बाद से उसे ट्रेस किया जा रहा था. आज उसे गिरफ्तार किया गया है. उसके खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई है. आरोपी को ज्यूडिशियल रिमांड के लिए न्यायालय भेजा गया है।

    मप्र से गिरफ्तार हुआ आरोपी

    इसके अलावा रायपुर के थाना मौदहपारा क्षेत्र में रहते हुए मप्र के भिण्ड निवासी आरोपी जगन्नाथ सुमन (35 वर्ष) ने मोबाइल फोन से बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया में अपलोड किया था. जिस पर जगन्नाथ के खिलाफ मौदहापारा थाने में आईटी एक्ट की धारा 67ए के तहत अपराध दर्ज कर तलाश की जा रही थी. जिसके बाद उसे भिंड से गिरफ्तार किया गया है. उसके पास से मोबाइल फोन को जब्त किया गया है।

    इससे पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

    बता दें कि सोशल मीडिया पर चाइल्ड पोर्न अपलोड करने की जानकारी एनसीआरबी (राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो) के जरिए पुलिस को मिलती है. इससे पहले भी राजधानी रायपुर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इसके बाद भी अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

    चाइल्ड पोर्न क्लिप सर्च करना भी अपराध

    इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च करना या इससे संबंधित कोई भी वीडियो शेयर करना अपराध है. ऐसे मामलों में आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. इसमें 5 साल की सजा हो सकती है. अधिकारियों के मुताबिक ‘नेशनल क्राइम फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन’ इस पर नजर रखती है।

  • अश्लील वीडियो मामले में पहले से ही जेल में रह रही गहना वशिष्ठ पर गैंगरेप कराने का मामला दर्ज… हैं जेल मे, मॉडल को तीन-तीन मर्दों के साथ गंदा काम करवाने का आरोप….

    अश्लील वीडियो मामले में पहले से ही जेल में रह रही गहना वशिष्ठ पर गैंगरेप कराने का मामला दर्ज… हैं जेल मे, मॉडल को तीन-तीन मर्दों के साथ गंदा काम करवाने का आरोप….

    मुंबई। एकता कपूर की वेब सीरीज गंदी बात से सुर्खियों में आई एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ पर एक के बाद एक गंभीर आरोप लग रहे हैं। हाल ही में अदाकारा को पोर्न वीडियोज अपलोड करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

    अदाकारा पर करीब 87 अश्वील वीडियोज को शूट करने और उन्हें वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप थे। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर केस दर्ज किया गया था। अब गहना वशिष्ठ पर एक और संगीन आरोप लगा है।

    सामने आ रही ताजा रिपोर्ट्स की मानें तो गहना वशिष्ठ पर गैंगरेप करवाने का आरोप है। जिसके बाद अभिनेत्री के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। ये चौंकाने वाली जानकारी सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    एक रिपोर्ट के हवाले से जानकारी मिली है। रिपोर्ट की मानें तो अदाकारा के साथ-साथ 3 और लोगों पर महिलाओं की शीलता भंग करने और अश्लील हरकतें करने के आरोप में आईपीसी की धारा के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है।

    खबर के मुताबिक एक 24 वर्षीय मॉडल ने अदाकारा पर गंभीर आरोप लगाया कि एक वीडियो शूट के दौरान उनके साथ जबरन 3 पुरुषों से अश्लीलता करवाई गई। हालांकि गहना वशिष्ठ के वकील ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि अदाकारा ने महज ये वीडियो शूट किया था।

    बता दें अभिनेत्री गहना वशिष्ठ का जन्म छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में 16 जून 1988 में हुआ है। उनका असली नाम वंदना तिवारी है। बताया गया कि गहना को शुरू से ही एक्टिंग और मॉडलिंग का शौक था।

    उन्होंने 2012 में मिस एशिया बिकिनी का खिताब भी अपने नाम किया था। गहना वशिष्ठ ने कई विज्ञापन फ़िल्मों के लिए मॉडलिंग की है। उन्होंने कई हिंदी और तेलुगु फ़िल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

    हाल ही में गहना वशिष्ठ तब सुर्खियों में आईं, जब सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में अभिनेत्री अपनी कमर के नीचे तिरंगा लपेटे हुए नजर आयी और वह बहुत इरॉटिक अंदाज में पोज दे रही थीं। ये वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर काफी हलचल मच गई थी।

  • विदेशी नागरिक और एक महिला को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार, लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों महिलाओं से 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक कि ऑनलाइन ठगी…

    विदेशी नागरिक और एक महिला को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार, लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों महिलाओं से 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक कि ऑनलाइन ठगी…

    मुंबई। बोरीवली पुलिस को दिल्ली के चंद्र बिहार इलाके में आरोपी के छिपे होने की सूचना मिली थी.विदेशी नागरिक इफिनाई मदुकासी प्रिंस (30) और नार्थ ईस्ट से हेयो बोलो मेइंग (23) नाम के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान आरोपीयों के पास से पुलिस को 16 डेबिट कार्ड, 10 पासबुक, 2 लेपटॉप, 9 मोबाइल, 4 नए सिम कार्ड और 2 इंटरनेशनल सिम कार्ड बरामद हुए हैं. शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों महिलाओं से 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक की ऑनलाइन ठगी की है. और बाद में ये सारा पैसा उन्होंने डेबिट कार्ड की मदद से निकाल लिया था।


    पुलिस जांच में सामने आया है कि इफिनाई मदुकासी प्रिंस (30) नाम का ये विदेशी नागरिक 10 फर्जी फेसबुक आईडी के जरिए भारतीय महिलाओं को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता था. जो महिलाएं फ्रेंड रिक्वेट एक्सेप्ट कर लेती थीं तो फिर वो उनको अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनका वॉट्सऐप नंबर मांग लेता था. जब महिला पूरी तरीके से उसके चंगुल में फंस जाती तो वो लंदन से उसके लिए गिफ्ट भेजने की बात कहता था. इसके 2-3 दिन बाद उक्त महिला को मुंबई एयरपोर्ट का फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर फोन किया जाता था और करीब 2-3 लाख का टैक्स देकर पार्सल ले जाने को कहा जाता था. ऐसे में अगर कोई महिला पैसे देने से इनकार करती थी तो विदेशी नागरिक दोबारा महिला को फोन कर पार्सल में 3 से 4 करोड़ के गहने की बात कहकर महिला को मना लेता था. ठगी का ये सिलसिला आगे बढ़ता गया और अब महिला से सर्विस फी भरने को कहा जाने लगा. अगर महिला मना करती तो पुलिस से गिरफ्तार करवाने की धमकी दी जाती. मजबूर होकर महिला 2 से 3 लाख रुपये अलग एकाउंट में ट्रांसफर कर देती. जब तक महिला को पता चलता कि उसके साथ ठगी हो रही है, तब तक आरोपी अपने सारे मोबाइल और फेसबुक आईडी बंद कर चुका होता था. ऑनलाइन ठगी करने वाले विदेशी नागरिक और एक महिला को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।