रायगढ़। अनुमति प्राप्त दुकान , सब्जी व फल विक्रेता के द्वारा सामानों को निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचने पर तत्काल निम्न नम्बरों पर शिकायत करें..
जिला प्रशासन ने जनता को राहत दिलाने के लिये सम्पर्क नम्बर जारी किया है…


रायगढ़। अनुमति प्राप्त दुकान , सब्जी व फल विक्रेता के द्वारा सामानों को निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचने पर तत्काल निम्न नम्बरों पर शिकायत करें..
जिला प्रशासन ने जनता को राहत दिलाने के लिये सम्पर्क नम्बर जारी किया है…


दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला को राष्ट्रीय स्तर पर ‘वाय’ केटेगरी सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही अब अदार पूनावाला की सुरक्षा में सीआरपीएफ के जवान तैनात रहेंगे।
बता दें कि देश में कोरोना संकट छाने के बाद से ही सीरम इंस्टीट्यूट के साथ इसके सीईओ अदार पूनावाला चर्चा में बने हुए हैं. अस्ट्राजेंका के कोविशील्ड का उत्पादन कर देश में आपूर्ति करने के साथ विदेशों को भी निर्यात किया जा रहा है. कोरोना की दूसरी लहर के बीच कोरोना के वैक्सीनेशन को लेकर सरकार फिर से जोर दे रही है. ऐसे में सीरम इंस्टीट्यूट का महत्व और बढ़ गया है।
सीरम इंस्टीट्यूट ने केंद्र सरकार को 150 रुपए में कोविशील्ड प्रदान करने के बाद एक मई से शुरू हो रहे कोरोना वैक्सीनेशन के तीसरे चरण के लिए राज्य सरकारों के लिए कोविशील्ड की कीमत 400 रुपए और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपए तय की थी, लेकिन राज्य सरकारों की आपत्तियों को देखते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ने सौ रुपए कीमत कम करते हुए राज्य सरकारों के लिए वैक्सीन की कीमत 300 रुपए तय की है।

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाओं की अधिसूचना के संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि देश के बाकी प्रदेशों की तरह छत्तीसगढ़ में भी कोविड-19 की द्वितीय लहर के अंतर्गत संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
इस महामारी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 25 अप्रैल 2021 तक के 6,52,362 मामले दर्ज किए गए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 अंतर्गत औषधियों को आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया गया है। औषधि का अर्थ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत अधिसूचित औषधियों से है। भारत सरकार ने इससे पहले भी कोविड-19 से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मास्क (2 और 3 प्लाई सर्जिकल मास्क एवं N95 मास्क) एवं हैंड सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत अधिसूचित (भारत सरकार अधिसूचना 13 मार्च 2020) किया था, जिससे महामारी की पहली लहर से निपटने में अत्यंत सहायता हुई।
कोविड-19 की वजह से प्रदेश में बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर मरीजों के उपचार के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन,आइवरमेक्टिन टैबलेट्स, एनोक्सापारिन इंजेक्शन,डेक्सामेथासोन टैबलेट एवं इंजेक्शन,टोसीलीजुमब इंजेक्शन और फेविपिराविर कैप्सूल की मांग बढ़ गई है। इन औषधियों की बड़ी मांग के कारण इनके जमाखोरी एवं काला बाजारी की शिकायतें भी लगातार प्राप्त हो रही है,जिसकी वजह से मरीजों के उपचार में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने उपरोक्त औषधियों की काला बाजारी को रोकने के कई निर्णायक कदम उठाए हैं।
इसमें अस्पतालों में दवाओं के वितरण एवं उपयोग पर लगातार निगरानी, विशेष टास्क फोर्स का गठन, आकस्मिक जांच एवं काला बाजारी की खबर मिलने पर तत्काल दबिश इत्यादि शामिल हैं। उपरोक्त औषधियों को आवश्यक वस्तु अधिनियम,1955 के अंतर्गत अधिसूचित करने से प्रशासन को काला बाजारी रोकने तथा गुणवत्ता एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने में आवश्यक सहायता प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री बघेल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से अनुरोध किया है कि कोविड-19 महामारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त औषधियों को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आवश्यक वस्तुओं के रूप में तत्काल अधिसूचित किया जाए।

पटना। देश में कोरोना से मौत का सिलसिला रूक नहीं रहा है. अब बिहार सरकार के मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह का निधन हो गया है. वह कोरोना संक्रमित थे और उनका इलाज चल रहा था. उनके निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है. इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का कोरोना से निधन हो गया था. 1985 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अरुण कुमार सिंह मुख्य सचिव से पहले बिहार के विकास आयुक्त थे. इसी साल उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया था. जानकारी के मुताबिक, 15 अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज उन्होंने अंतिम सांस ली. कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह के निधन की खबर के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कैबिनेट के सहयोगियों ने शोक जताया. कोरोना के कारण अभी तक बिहार के कई अफसरों की मौत हो चुकी है. एक हफ्ते पहले ही स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का निधन हो गया था. आईएएस अधिकारी और अरवल के पूर्व डीएम रवि शंकर चौधरी कुछ दिन पहले संक्रमित हो गए थे. राजधानी पटना स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा था. हालांकि उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी और आखिर में 23 अप्रैल को निधन हो गया. उनके निधन पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गहरा दुख जताया था।

दिल्ली। देशभर में कोरोना के संक्रमण को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हालात को देखते हुए कई राज्यों में लाॅकडाउन लगा दिया गया है। लाॅकडाउन के चलते लोग घरों में कैद हो गए हैं। घरों में रहकर जहां एक ओर लोग सोशल मीडिया पर अपना टाइम स्पेंड कर रहे हैं तो कुछ लोग इस चीज का फायदा उठाने में लगे हुए हैं। लोग फर्जी मैसेज भेजकर कोरोना काल में गुमराह बनाने में लगे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने देश में 3 मई से 20 मई तक सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है।#PIBFactCheck: यह दावा #फर्जी है। केंद्र सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। pic.twitter.com/Xt93IDnMcc
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) April 30, 2021
इसी बीच एक और मैसेज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया जा रहा है। वायरल मसैजे में यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने केंद्र सरकार ने देश में 3 मई से 20 मई तक सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है। लेकिन PIBFactCheck ने इस दावे को फर्जी करार दिया है।
वायरल मैसेज के दावों की जांच के बाद #PIBFactCheck ने ट्वीट कर बताया है कि यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है

कोविड-19 के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपनी शिकायत और मदद मांगते हुए दिख रहे हैं। देश के कई राज्यों में ऐसे पोस्ट पर कार्यवाही करते हुए मामले दर्ज किए गए हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोविड-19 के मामलों को स्वतः संज्ञान में लेकर मामले की सुनवाई करते हुए 3 जजों की बेंच न्यायमूर्ति डी चंद्रचूड़ ने कहा है कि
“हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि नागरिक सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है। हम जानकारी का कोई क्लैंपडाउन नहीं चाहते हैं। अगर कार्रवाई के लिए ऐसी शिकायतों पर विचार किया जाता है तो हम इसे अदालत की अवमानना मानेंगे।”

देश भर में ऐसे कई मामले सुनने को मिले हैं जिनमें सोशल मीडिया में की गई कोविड-19 के समय ऑक्सीजन बेड या शिकायत के लिए किए पोस्ट या जानकारी पर अधिकारियों द्वारा गलत और भ्रामक जानकारी मानकर कठोर कार्रवाई की गई है। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि
“हम ऐसी जानकारी पर कोई कठोर कार्यवाही नहीं चाहते हैं। अगर कार्रवाई के लिए ऐसी शिकायतों पर विचार किया जाता है तो हम इसे अदालत की अवमानना मानेंगे।”
सोशल मीडिया पर एसओएस कॉल करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की धमकियों का जिक्र करते हुए बेंच, जिसमें जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट शामिल थे, ने कहा,
“हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि अगर नागरिक सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अपनी शिकायत को साझा करते हैं तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है। “
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा किसी भी जानकारी पर कार्यवाही करना कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा किसी भी जानकारी पर कार्यवाही करना कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
यह कहा गया कि
“एक मजबूत संदेश सभी राज्यों और राज्यों के DGP को जाने दें।”


रायगढ़। महामारी काल को भी अवसर मानकर कतिपय मेडिकल स्टोर्स के संचालक मरीज़ों से लूट-खसोट कर रहे हैं।रुपयों की हवस का एक ऐसा ही मामला सामने आया है।

जानकारी मिल रही है की आक्सीमीटर को तय कीमत से ज्यादा दाम पर कतिपय मेडिकल स्टोर्स बेच रहे थे। जिसपर कलेक्टर के आदेश उपरांत,तहसीलदार सीमा पात्रे, नायब तहसीलदार श्रुति शर्मा,डीएसपी अंजू कुमारी पुलिसकर्मियों के साथ नगर के कई मेडिकल स्टोर्स में पहुंचे।और पटवारियों को अलग-अलग दुकानों में आक्सीमीटर खरीदने को भेजा। जिसमें रामनिवास चौक में स्थित दीपक मेडिकल स्टोर्स पटवारी को 1800 रुपये में आक्सीमीटर बेचा गया।और बाकायदा उसे बिल भी दिया गया। जिसके बाद तहसीलदार ने दीपक मेडिकल पर 5000 का जुर्माना किया है।

रायपुर। कोरोना संक्रमण काल में राज्य सरकार ने सभी कर्मचारियों के एक एक दिन वेतन सहायता कोष में देने का आह्वान किया था। वित्त विभाग ने इसे लेकर एक आदेश जारी करते हुए उल्लेखित किया कि यह स्वैच्छिक वेतन कटौती होगी। स्वैच्छिक का अर्थ हुआ कि कोई दबाव नहीं है जिन कर्मचारियों को देना है वे दें जिन्हें नहीं देना है वे ना दें। लेकिन सॉफ़्टवेयर में कुछ ऐसी एंट्री हो गई है कि वह स्वैच्छिक की बजाय अनिवार्य हो गया है।
दरअसल जबकि वेतन बनाया जा रहा है तो सॉफ़्टवेयर उस वेतन को तब तक स्वीकार नहीं कर रहा है जब तक कि उसमें कटौती ना की जाए। सॉफ़्टवेयर में पूरा वेतन अपलोड होने की एंट्री नहीं हो रही है, सॉफ़्टवेयर में उपर मैसेज ब्लिंक हो रहा है।
“मुख्यमंत्री सहायता राशि की कटौती नहीं की गई है, कृपया कटौती करें”
इस व्यवस्था से स्वैच्छिक शब्द अनिवार्य में तब्दील हो गया है। जबकि एक दिन का वेतन सहायता राशि में देने की बात कही गई थी, तब भी कर्मचारियों में रोष और असहमति थी, इसके पीछे वजह यह भी थी कि कई कर्मचारियों के घरों में मरीज़ भी है तो शोक भी है, इसके साथ साथ मार्च के महिने में इंकमटैक्स समेत कई डिडक्शन पहले ही होते हैं, इन परिस्थितियों में कर्मचारियों में सहमति नहीं थी, पर स्वैच्छिक होने की वजह से वे निश्चिंत थे कि सहमति नहीं देंगे तो वेतन नहीं कटेगा, लेकिन अब अनिवार्य रुप से वेतन कटने से कर्मचारियों में क्षोभ देखा जा रहा है।

महामारी के दौरान चल रहे चुनाव अब बंगाल की जनता पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। न तो सभाओं में कोविड गाइड लाइन का पालन किया गया और न ही जरूरी एहतियात बरती गई। इसका असर अब दिखाई दे रहा है। बंगाल में कोरोना खतरनाक रूप लेता दिख रहा है। यहां जांच के लिए आ रहे लोगों में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल से कोरोना को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आ रहे है। राजधानी कोलकाता में हर दूसरे व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। कोलकाता और उसके आसपास के उपनगरों में हर दूसरे व्यक्ति की आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।
शहर के बड़े जांच केंद्र के एक डॉक्टर के अनुसार कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में जांच केंद्रों में पॉजिटिविटी रेट 45 से 55 प्रतिशत तक दर्ज किया जा रहा है। पूरे देश में बंगाल समेत अन्य राज्यों में हो रहीं चुनावी रैलियों की जमकर आलोचना हो रही है। आज भी बंगाल में सातवें चरण के 34 सीटों के लिए चुनाव जारी है, जिसमें कोलकाता भी शामिल है।
चुनाव आयोग और कोर्ट के आदेश के बाद कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन तो हो रहा है, लेकिन संतोषजनक नहीं है।
वर्तमान में राज्य का कोरोना पॉजिटिविटी रेट लगभग 25 प्रतिशत है। शनिवार को राज्य में 55 हज़ार टेस्ट हुए थे, जिसमें 14,281 लोग पॉजिटिव पाए गए। बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक अप्रैल को 25,766 लोगों की जांच हुई थी। इसमें 1,274 लोग पॉजिटिव आए थे। बीते दिन राज्य में 15,889 लोग संक्रमिक्त पाए गए थे और 57 लोगों की जान गई थी।

जमाना तो डिजिटल का हो चला है. पहले ये शहरों तक सीमित था, लेकिन अब गांवों में भी डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं. चाय-पान-नाश्ता करने से लेकर शॉपिंग करने और कार खरीदने तक… पेमेंट करने के लिए हम डिजिटल तरीका अपनाते हैं. यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग या फिर मोबाइल बैंकिंग ऐप… कैश लेनदेन से ज्यादा पेमेंट के ये तरीके ही आजकल चलन में हैं. लेकिन आपको उतना ही अधिक सावधान रहने की जरूरत है. 41 करोड़ से ज्यादा यूजर्स वाली देशी की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी जियो (Jio) ने ऐसी ही सलाह दी है।
दरअसल डिजिटल लेनदेन के इस युग में लोगों के साइबर फ्रॉड का शिकार होने की खबरें अक्सर आती रहती हैं. साइबर अपराधी कई तरह से लोगों को चूना लगाते हैं. फ्रॉड का एक तरीका यह भी है कि साइबर अपराधी मुफ्त मोबाइल डाटा ऑफर (Free Mobile Data Offer) करते हुए आपको मैसेज करते हैं या कॉल करते हैं और फिर शातिराना अंदाज में आपकी निजी जानकारी हासिल कर आपको चूना लगा देते हैं. ऐसी आशंका को देखते हुए जियो ने अपने करोड़ों ग्राहकों को टेक्स्ट मैसेज डालकर अलर्ट किया है।
Jio ने मोबाइल यूजर्स को अलर्ट मैसेज भेजा है. इसमें कहा है, “धोखाधड़ी के इरादे से भेजे गए ऐसे किसी भी संदेश से सावधान रहें, जिसमें आपसे आपकी व्यक्तिगत जानकारी/ केवाईसी (KYC) डिटेल्स को अपडेट करने को कहा जाए. ऐसे मैसेज से भी सावधान रहें, जिनमें मुफ्त मोबाइल डेटा देने का वादा किया गया हो. जियो ने अपने ग्राहकों से कहा है कि किसी भी अज्ञात या संदिग्ध नंबरों से कॉल करने वाले को अपनी व्यक्तिगत जानकारी कभी भी न दें. सुरक्षित रहें.”
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर आपने निजी जानकारी दी तो जालसाज आपके खाते से आपकी मेहनत की कमाई चुरा सकते हैं. जियो ने स्पष्ट तौर पर अपने ग्राहकों से अपनी पर्सनल डिटेल्स के बारे में गोपनीयता रखने को कहा है. कई बार हमें अज्ञात नंबरों से कॉल आते हैं और कहा जाता है कि हम आपके बैंक की ओर से बोल रहे हैं. कभी वे कहेंगे कि एटीएम वैलिडिटी खत्म हो गई तो कभी कहेंगे कि केवाईसी डिटेल्स कंफर्म करा दें. कई बार तो लोन ऑफर्स के नाम पर भी साइबर अपराधी धोखा करते हैं. केवाईसी संबंधित डिटेल्स हासिल कर वे बैंक खाते से सारे पैसे गायब कर देते हैं. इस संबंध में एसबीआई समेत कई बैंकों की ओर से ग्राहकों को समय-समय पर अलर्ट किया जाता रहा है।