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  • छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से प्रशासन बनाम अधिवक्ता: एसडीएम से ऊंची आवाज में बात, धमकी और सरकारी काम में बाधा को लेकर वकील के खिलाफ FIR दर्ज..

    छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से प्रशासन बनाम अधिवक्ता: एसडीएम से ऊंची आवाज में बात, धमकी और सरकारी काम में बाधा को लेकर वकील के खिलाफ FIR दर्ज..

    महासमुंद। छत्तीसगढ़ में राजस्व न्यायालय के कर्मचारी और अधिवक्ताओं का आंदोलन साल की शुरुआत में चरम पर था। पूरी कहानी रायगढ़ के राजस्व न्यायालय से शुरू हुई थी। जहां तहसीलदार और अधिवक्ता के बीच कहासुनी ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिला दिया था और राजस्व न्यायालय में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुहिम शुरू कर दी थी। प्रशासन बनाम अधिवक्ता के मामले में 3 वकील जेल भी गए थे। ऐसा ही एक मामला फिर से प्रकाश में आया है। इस बार सरायपाली में ऐसा ही कुछ वाक्या हुआ है। जिसमें एसडीएम के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी/न्यायालयीन काम में बाधा को लेकर अधिवक्ता पर अपराध दर्ज किया गया है। मामला महासमुंद जिले के सराईपाली क्षेत्र का है।

    सरायपाली एसडीएम हेमंत कुमार नंदनवार ने पुलिस को दिए अपने लिखित आवेदन में बताया है कि “28 नवंबर को न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (रा) सरायपाली में प्रकरण के सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रनदीप सिंह सलूजा के द्वारा न्यायालयीन कार्य में व्यवधान उत्पन्न करते हुए मुझ पीठासीन अधिकारी से ऊंची आवाज में चिल्लाते हुए प्रकरण में आप ऐसा नही कर सकते, आपको अधिकार नहीं है कहा गया। मेरे द्वारा अधिवक्ता को बताया गया कि जो न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है मै वैसा ही लिख रहा हूं परंतु अधिवक्ता द्वारा विरोध किया गया, मेरे द्वारा समझाइस देने के उपरांत भी अधिवक्ता द्वारा पुनः मुझे आप सरकारी सेवक है, हमारा सुनना पड़ेगा। आपको हमसे हद में रहकर बात करना पडेगा। अधिकारी है तो क्या हुआ आप जैसे बहुत सारे देखे है।”

    “ऐसा कहकर मेरे साथ दुर्व्यवहार करते हुए दोषारोपण कर धमकी दी गई एवं बार बार न्यायालयीन कार्यो को बाधित किया गया। जिसके कारण न्यायालयीन / शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न / रूकावट हुआ एवं मुझसे वाद विवाद करने से न्यायालय की गरिमा धुमिल हुई। इस दौरान न्यायालय में उपस्थित अधिवक्ता एवं अन्य का पंचनामा तैयार किया गया। जिसकी कॉपी संलग्न है।”

    फिलहाल इस मामले में अधिवक्ता का पक्ष नहीं मिल पाया है। एसडीएम के आवेदन के आधार पर महासमुंद जिले के सरायपाली थाने में अधिवक्ता रणदीप सिंह सलूजा के खिलाफ आईपीसी की धारा 186 और 506 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    आईएएस अफसर और सरायपाली एसडीएम हेंमत रमेश नंदनवार (Saraipali SDM Henmat Ramesh Nandanwar) ने वकिल रनदीप सिंह सलूजा (Advocate Randeep Singh Saluja) के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंन वकिल पर दुर्व्यवहार करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही न्यायालय की गरिमा धूमिल करने की भी बात कही गई है। इस मामले में पुलिस ने अधिवक्ता के खिलाफ धारा 186, 506 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    वकिल ने कहा- अधिकारी हो तो क्या हुआ? आप जैसे बहुत देखे है…

    शिकायत में एसडीएम नंदनवार ने कहा कि, अधिवक्ता रनदीप सिंह सलूजा ने सुनवाई के दौरान कहा कि, प्रकरण में आप ऐसा नही कर सकते, आपको अधिकार नहीं है। मैनें अधिवक्ता को बताया कि जो न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है मैं वैसा ही लिख रहा हूं। लेकिन अधिवक्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि, आप सरकारी सेवक है, हमारा सुनना पड़ेगा, आपको हमसे हद में रहकर बात करना पडेगा, अधिकारी हो तो क्या हुआ? आप जैसे बहुत देखे है।

    इस मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • सूबे के हेल्थ मिनिस्टर टी एस सिंह की जमीनों के लिए बैठायी गयी जांच! एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश..

    सूबे के हेल्थ मिनिस्टर टी एस सिंह की जमीनों के लिए बैठायी गयी जांच! एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश..

    छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के खिलाफ एक बार फिर जमीन फर्जीवाड़े मामले में जांच बैठा दी गई है. पुरानी शिकायत के आधार पर नजूल तहसीलदार ने बाकायदा जांच का आदेश देते हुए जांच टीम भी बना दी है.

    23 नवंबर 2022 को जारी इस पत्र में नजूल तहसीलदार अजय गुप्ता ने हलका पटवारी का दल गठित कर एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन, पंचनामा, रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

    दरअसल, सूबे में एक बार फिर सरगुजा राजपरिवार की जमीन का मामला सुर्खियों में आ गया है. जबकि इससे पहले हुई सभी जांचों में शिकायत खारिज की जा चुकी है. शिकायत में कहा गया है कि टीएस सिंहदेव और उनके परिवार के सदस्यों के नाम फर्जी तरीके से जमीन पाई गई है. जांच के लिए जारी आदेश में राजस्व विभाग के 6 अधिकारियों की टीम बनाई गई है.

    इस टीम में राजस्व निरीक्षक नारायण सिंह, राजस्व निरीक्षक नजूल राजबहादुर, अशीष गुहा और विजय श्रीवास्तव समेत हल्का पटवारी श्रवण पाण्डेय और महेंद्र गुप्ता का नाम शामिल है. जांच के आदेश जारी होते ही एक बार फिर सरगुजा की राजनीतिक गरमा गई है.

    वहीं, इस मामले में कलेक्टर कुंदन कुमार का कहना है कि मुझे इस आदेश के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी मिली है. मैंने एसडीएम और नायब तहसीलदार से बात की है. पूरे मामले के संदर्भ में जल्द ही एसडीएम और नायब तहसीलदार मुझे अवगत कराएंगे. उनका कहना है कि आदेश कहां से निकला है? इसकी जांच करा रहे हैं.

    टीएस सिंह देव की ओर से पक्ष रखने वाले एडवोकेट संतोष सिंह ने कहा, ”मुझे नवभारत समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि टीएस सिंह देव की जमीन के संदर्भ में जांच कमेटी बैठाई गई है. मुझे लगता है कि शिव सागर तालाब के संदर्भ में जांच कमेटी बैठाई गई होगी. इसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है. शिकायत पर स्थानीय जांच कमेटी की तरफ से क्लीरियंस दिया जा चुका है. यह नायब तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र के बाहर है. उन्हें जांच बैठाने का अधिकार नहीं है.”

  • 4 डाक्टर सहित 7 पर FIR : डॉक्टरों की लापरवाही से 10 माह के बच्चे की अस्पताल में हुई थी मौत, अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के आदेश…

    4 डाक्टर सहित 7 पर FIR : डॉक्टरों की लापरवाही से 10 माह के बच्चे की अस्पताल में हुई थी मौत, अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के आदेश…

    रायपुर। बच्चे की मौत पर चार डाक्टरों सहित 7 लोगों पर FIR दर्ज किया गया है। मामला भिलाई 3 के सिद्धी विनायक अस्पताल का है घटना की शिकायत के बाद दुर्ग पुलिस ने हॉस्पिटल के 7 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया गया।

    दरसअल, ये पूरा मामला सिरसागेट चौक भिलाई-3 स्थित सिद्धिविनायक अस्पताल का है। इस मामले में दुर्ग पुलिस ने एक प्रेसनोट भी जारी किया है, जो इस प्रकार है…सागर पारा देवबलौदा निवासी डिकेश वर्मा ने 27 अक्टूबर को 10 माह के पुत्र को सर्दी जुखाम के चलते सिद्धिविनायक अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने बच्चे को सांस लेने की तकलीफ के चलते आईसीयू में भर्ती कराया गया था। 31 अक्टूबर को बच्चे का स्वास्थ्य बिगड़ने से अस्पताल में उपचार के दौरान बच्चे की मौत हो गई। पीड़ित परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस मामले में थाना पुरानी भिलाई में धारा 174 के तहत अपराध दर्ज कराया। 

    वहीं, इस घटना के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा समिति गठित कर जांच किया गया। जांच पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. संमीत राज प्रसाद, शिशुरोग विशेषज्ञ एवं आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. दुर्गा सोनी, डॉ. हरिराम यदु, डॉ. गिरीश साहू, एवं नर्सिंग स्टाफ, आरती साहू, कुमारी निर्मला यादव के द्वारा बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने पर दोषी होना पाया गया। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पश्चात उपरोक्त सात आरोपीगणों के विरूद्ध याना पुरानी मिलाई में दिनांक 16.11.2022 को अपराध क्रमांक 523/2022 धारा 304ए भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

  • अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    आजकल रेल या प्लेन का टिकट बुक करना हो या फिर बैंकिंग का कोई काम हो, मोबाइल ऐप से तुरंत ये सभी काम हो जाते हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के मुताबिक इनका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, कुछ सकारी ऐप ऐसी हैं, जिनका इस्तेमाल iPhone यूजर्स नहीं कर सकते, क्योंकि ये ऐप Google Play Store पर मौजूद हैं. सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स ही इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

    MYGRIEVANCE: इस ऐप को नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर ने डिपार्टपेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रैटिव रिफॉर्म्स एंड पब्लिक ग्रिवांस के सहयोग से तैयार किया है. MYGRIEVENCE App यूजर्स को केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े किसी भी विभाग की शिकायत करने की सुविधा प्रदान करती है. यहां आप आसानी से किसी भी सरकारी महकमे के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके अलावा यूजर्स ऐप पर अपनी शिकायत का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।

    MYCGHS: यह ऐप केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए है. सरकारी कर्मचारी यहां से डॉक्टर और वेलनेस सेंटर की अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. इसके अलावा यहां से अपॉइंटमेंट कैंसिल भी की जा सकती है. यूजर्स इस ऐप से स्कीम के तहत ..पैनल में शामिल हॉस्पिटल और लैब की जानकारी की भी हासिल कर सकते हैं।

    JeevanPramaan Life Certificate: यह ऐप पेंशनभोगियों के काफी काम आती है. इस ऐप से यूजर्स आधार बायोमैट्रिक के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं. यूजर्स ID की मदद से जीवन प्रमाण पत्र की सर्टिफाइड PDF कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं।

    DND: अगर आप प्रोमोशन वाली कॉल से बेहाल हो चुके हैं, तो DND ऐप आपकी मदद करेगी. सरकारी टेलीकॉम रेगुलेटर बॉडी TRAI ने इस DND ऐप को तैयार किया है. इस ऐप पर मोबाइल नंबर रिजसर्ड कराने के बाद अनसोलिसिट कमर्शियल कम्यूनिकेशन (UCC)/ टेलीमार्केटिंग कॉल और SMS से छुटकारा मिलेगा।

    PMO India: यह भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक ऐप है. इस ऐप पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी सभी लेटेस्ट जानकारी, न्यूज अपडेट्स मिलती हैं. देश के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों की सहूलियत के लिए ये ऐप 13 भाषाओं को सपोर्ट करती है।

     Indian Apps: Kisan Suvidha: किसान सुविधा ऐप को इसलिए डेवलप किया गया है, ताकि वे अपनी उपज को अच्छे दाम पर बेच पाएं. इस ऐप पर किसान किसी भी बाजार में हो रही उपज की निलामी को लाइव चेक कर सकते हैं. वहीं, आढ़ती भी इसकी मदद से उपज की खरीद-फरोख्त पर नजर रख सकते हैं।

  • महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल…

    महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल…

    महासमुन्द। छत्तीसगढ़ के महासमुन्द पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। महासमुंद जिले में 44 पुलिसकर्मियों का प्रशासनिक दृष्टिकोण से ट्रांसफर किया गया है…

  • ‘TI की छुट्टी’ पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए TI की छुट्टी कर SP ने SI को सौंपा थाना…

    ‘TI की छुट्टी’ पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए TI की छुट्टी कर SP ने SI को सौंपा थाना…

    पेंडेंसी निपटाने वाले महीने में छुट्टी में गए टीआई को लाइन भेज दिया गया है. डभरा थाने के थाना प्रभारी अमित सिंह को हटा कर उनकी जगह उसी थाने में पदस्थ एसआई को थाना प्रभारी का चार्ज सौंपा गया है. अमित सिंह डभरा थाने के थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ थे. उन्हें आज एसपी ने सिंगल आदेश जारी कर हटा दिया. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीआई अमित सिंह 5 दिन की छुट्टी में गए थे. जिसके बाद उन्होंने 15 दिन की छुट्टी बढ़ाने के लिए फिर से आवेदन भेज दिया. नवंबर व दिसंबर माह में पुलिस पर थानों में दर्ज अपराधों के पेंडेंसी खत्म करने का दबाव होता है. ऐसे समय मे टीआई की छुट्टी बढ़ाने के चलते उनकी थाने से छुट्टी होने की चर्चा विभाग में है।

  • जज को याचिकाकर्ता ने बताया ‘आतंकवादी’, इस टिप्पणी से अदालत नाराज….

    जज को याचिकाकर्ता ने बताया ‘आतंकवादी’, इस टिप्पणी से अदालत नाराज….

    सुप्रीम कोर्ट के जज को ‘आतंकवादी’ कहने वाला याचिकाकर्ता मुश्किल में फंस गया है. शीर्ष अदालत ने ना सिर्फ नाराजगी जताई, बल्कि रजिस्ट्री विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया है और सख्त टिप्पणी की है. SC ने कहा- क्यों ना उस पर जज का ‘अपमान’ करने के लिए आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलाया जाए. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने याचिका कर्ता के आरोपों की निंदा की और कहा- ‘आपको कुछ महीनों के लिए जेल के अंदर भेजना होगा, तब आपको एहसास होगा.’ बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा- ‘आप सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ यूं ही कोई आरोप नहीं लगा सकते.’ Also Read – शादी के दो साल बाद पति को लगा ज्यादा है पत्नी की उम्र, दूसरी शादी करते पकड़ाया बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक पेंडिंग केस की जल्द सुनवाई की मांग को लेकर याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने फाइल देखने के बाद बेंच को बताया कि उसने याचिकाकर्ता से इस तरह के बयान देने के लिए बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. वकील ने कहा कि वह उसका प्रतिनिधित्व तभी करेगा, जब वह व्यक्ति बिना शर्त माफी मांगेगा. वहीं, याचिका कर्ता ने कहा- ‘मैं माफी मांगता हूं.’ उसने कहा कि जब मैंने याचिका के लिए आवेदन किया था, तब ‘जबरदस्त मानसिक आघात’ से गुजर रहा था. इस पर बेंच ने नाराजगी जताई और कहा- ‘ये निंदनीय है.’ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा- ‘हम आपको कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे और पूछेंगे कि क्यों ना आप पर आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलाया जाए.’ जज का इस कार्यवाही से क्या लेना-देना है? आप उन्हें आतंकवादी और अन्य चीजें कह रहे हैं. क्या ये एक न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाने का तरीका है? बेंच ने पूछा- सिर्फ इसलिए कि वह आपके राज्य से ताल्लुक रखते हैं? चौंका देने वाला है।

    बेंच ने कहा- ‘हम जल्द सुनवाई के लिए आवेदन पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं. आवेदन खारिज कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कहा- रजिस्ट्री याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी कि इस अदालत के एक जज को बदनाम करने के लिए उस पर आपराधिक अवमानना ​​​​का मुकदमा क्यों ना चलाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तीन सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. बेंच ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता ने बिना शर्त माफी मांगी है. अदालत को यह आकलन करने में सक्षम बनाने के लिए कि माफी वास्तविक है या नहीं, वह याचिकार्ता को अपने आचरण को समझाने के लिए हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दे रही है.

  • लोहे का पुल चुराने के बाद, सुरंग खोदकर चोरों ने चुरा लिया रेल का पूरा इंजन, बेच भी दिया और फिर जानें क्या हुआ…

    लोहे का पुल चुराने के बाद, सुरंग खोदकर चोरों ने चुरा लिया रेल का पूरा इंजन, बेच भी दिया और फिर जानें क्या हुआ…

    बिहार में चोरी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ रोहतास में लोहे का 500 टन वजनी पुल चुराने के पश्चात् चोरों ने दूसरी बड़ी घटना को अंजाम दिया है। चोरों ने अब सुरंग बनाकर पूरा का पूरा रेल इंजन ही गायब कर दिया। पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरपुर में एक कबाड़ की दुकान से जब्त किए गए बैग में ट्रेन के इंजन के पुर्जे भरे हुए थे।
    पुलिस के अनुसार, बीते हफ्ते बरौनी (बेगूसराय जिला) के गरहारा यार्ड में मरम्मत के लिए लाए गए ट्रेन के पूरे डीजल इंजन को एक गैंग ने चुरा लिया था। गिरोह ने एक बार में कुछ पुर्जे चुराकर इसे हासिल किया। पहली खोज तब हुई जब पुलिस ने 3 व्यक्तियों को गिरफ्त में लिया तथा उनकी सूचना के आधार पर उन्होंने मुजफ्फरपुर की प्रभात कॉलोनी स्थित एक कबाड़ के गोदाम से इंजन के पुर्जों की 13 बोरियां जब्त कीं। एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि चौंकाने वाली बात यह थी कि हमने यार्ड के पास एक सुरंग का पता लगाया, जिसके जरिए चोर आते थे तथा इंजन के पुर्जों को चुरा लेते थे तथा उन्हें बोरियों में भरकर ले जाते थे। रेलवे अफसर इससे पूरी तरह अनभिज्ञ थे।

    आपको बता दें कि हाल ही में पूर्णिया जिले में जहां चोरों ने एक पूरे विंटेज मीटर गेज स्टीम इंजन को बेच दिया, जो सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए स्थानीय रेलवे स्टेशन पर तैनात था। तहकीकात के चलते पुलिस ने पाया कि एक रेलवे इंजीनियर ने समस्तीपुर डिवीजन के डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियर की ओर जारी एक जाली पत्र के आधार पर क्लासिक स्टीम इंजन को बेच दिया था। दूसरी तरफ, एक अन्य गैंग ने बिहार के उत्तर पूर्वी अररिया जिले में सीताधार नदी पर एक लोहे के पुल का ताला खोल दिया है। पुल के अन्य अहम भाग गायब पाकर पुलिस दंग है। पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने एवं उसकी सुरक्षा के लिए एक कांस्टेबल तैनात करने के लिए विवश होना पड़ा।

    ध्यान हो कि पलटनिया पुल, फारबिसगंज शहर को रानीगंज से जोड़ता है। दोनों ही नगर अररिया जिले में ही आते हैं। मामले को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए। फारबिसगंज थाना प्रभारी निर्मल कुमार यादवेंदु मीडिया को बताया कि हमने पुल की सुरक्षा के लिए एक कांस्टेबल तैनात किया है, जिससे यह सुरक्षित रहे। पुलिस अफसर ने कहा कि हमने लोहे के पुल के कुछ भागों को चुराने के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है तथा तहकीकात जारी है।

  • अधिकारियों ने रॉड से पीटा, मुर्गा बनाया, जबरन घर से उठाया, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया….

    अधिकारियों ने रॉड से पीटा, मुर्गा बनाया, जबरन घर से उठाया, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया….

    केंद्रीय एजेंसी ED और इनकम के अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बड़ा आरोप लगाया है, उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि इनकम टैक्स और ED के अधिकारी छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के साथ बुरा सलूक कर रहे हैं। उन्हें रॉड से पीटा जा रहा है।

    उन्होंने यह भी लिखा है कि इनकम टैक्स और ED के लोग बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए किसी भी अधिकारी के घर घुस जा रहे हैं और वहीं सम्मन काटकर दे रहे हैं और पूछताछ के लिए बुला रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि यह तरीका कानूनी नहीं है।

    पूरा ट्वीट यह है –

    केंद्रीय एजेंसियां देश के नागरिकों की ताकत होती हैं, यदि इन ताकतों से नागरिक डरने लगें तो निश्चित ही यह नकारात्मक शक्ति देश को कमजोर करती है।

    ED और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियां भ्रष्टाचार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करें, हम इसका स्वागत करते हैं।

    लेकिन जिस प्रकार से ED और इनकम टैक्स के अधिकारियों द्वारा लोगों से पूछताछ के दौरान गैर कानूनी कृत्य सामने आ रहे हैं, वो बिल्कुल भी स्वीकार करने योग्य नहीं हैं।

    लोगों को वहीं समन देकर जबरन घर से उठाना, उनको मुर्गा बनाना, मार-पीट कर दवाब डालकर मन चाह बयान दिलवाने को बाध्य करना, आजीवन जेल में सड़ने की धमकी देना, बिना खाना-पानी के देर रात तक रोक कर रखना जैसे गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

    स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना CRPF को साथ लेकर छापा मारी  कर रहे हैं। अधिकारियों से शिकायत प्राप्त हुई है कि कुछ लोगों को रॉड से पीट रहे हैं, किसी का पैर टूटा है तो किसी को सुनाई देना बंद हो गया है।

    इन घटनाओं से प्रदेश की जनता बहुत गुस्से में है। राजनीतिक षड्यंत्र की पूर्ति के उद्देश्य से झूठे प्रकरण बनाने का खेल प्रतीत हो रहा है।

    अधिकारियों को निर्देशित किया है कि भारत सरकार को इन सब घटनाओं की जानकारी दी जाए और अवैधानिक कृत्यों पर रोक लगायी जाए।

  • कौन किसका राजनीतिक टूल ? राज्य बनाम केंद्र की जंग में किसकी शह और किसकी मात ?

    कौन किसका राजनीतिक टूल ? राज्य बनाम केंद्र की जंग में किसकी शह और किसकी मात ? छापे की राजनीति या ............. पढ़िए पूरा विश्लेषण

    मुख्यमंत्री द्वारा ED और इनकम टैक्स के अधिकारियों के ऊपर ट्वीट के माध्यम से बड़े आरोप लगाते गए हैं जिनमें ED अधिकारियों द्वारा राज्य के अधिकारियों के साथ हिरासत में मारपीट, मुर्गा बनाकर पीटने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यहां तक लिखा है कि राज्य सरकार के अधिकारियों को तुरंत सम्मन काटकर बुला लिया जा रहा है। इस ट्वीट के बाद फिर से राज्य की सियासत ठंड में भी गरमा गई है।



    अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में  ED के छापे कुछ अधिकारियों के घर और कार्यालयों पर पड़े थे, ED ने करोड़ों नगद और कुछ सोना बरामद करने का दावा भी किया था। इसके बाद से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया था। भाजपा और कांग्रेस दोनों एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे। कांग्रेस के संचार प्रमुख ने आरोप लगाया था कि ED की प्रेस विज्ञप्ति सबसे पहले भाजपा नेता और पुर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के पास कैसे पहुंच गई थी। वैसे ED के कार्रवाई पर विपक्ष लगातार हमलावर है। जिस विपक्षी सरकार के राज्य में चुनाव होता है वहां भाजपा के साथ -साथ ED भी सक्रिय हो जाती है। ऐसे लगता है जैसे दोनों  संस्थाओं को चुनाव की तैयारी  करनी हो।


    यह भी सच है कि जिस विभाग की अपनी एक बड़ी गरिमा हुआ करती थी उसकी गरिमा तेजी से गिरी है। लगातार प्रवर्तन निदेशालय के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। 2014 से पहले शायद ही किसी ने कभी इस निदेशालय के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया हो। उसपर तुर्रा यह कि जहां भी इनकी कार्रवाई होनी है वहां पहले से इस बात का हल्ला रहता है कि अब ED की कार्रवाई होगी क्योंकि चुनाव आने वाले हैं। यह भी तय होता है कि ED की कार्रवाई वहीं होगी जहां गैर भाजपा दल शासन में होगा।

    छत्तीसगढ़ में ED छापे के मायने

    2018 के विधान सभा चुनाव में पहली बार भाजपा को भारी शिकस्त झेलनी पड़ी। उसे 90 में से मात्र 18 सीट ही मिल पाई। बाद में चार सीटें उपचुनाव में कम भी हो गए। जो पार्टी 15 सालों तक यहां सत्ता में रही वह 15 प्रतिशत सीट पर ही सिमट कर रह गई। राजनीतिक पंडित लगातार यह भविष्यवाणी कर रहे हैं की छत्तीसगढ़ एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी क्योंकि किसान, कर्मचारियों का एक वर्ग सहित ग्रामीणों का एक मुश्त वोट उन्हें मिलेगा। दरअसल छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने सत्ता संभालते ही वादे के अनुरूप धान खरीदी का दर 2500 ₹ प्रति क्विंटल कर दिया, किसानों के कर्ज माफ किए, कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम की घोषणा कर दी। ऐसे में कहा यह जा रहा है की भाजपा को ED का ही सहारा है और सत्ता वापसी के लिए ED की कार्रवाई एक कारगर हथियार साबित हो सकती है।

    तीन चरण की रणनीति

    कुछ भाजपा समर्थकों और राजनीतिक पंडितों की मानें तो ED का यह छापा इस रणनीति का पहला चरण है। छापेमारी का उद्देश्य सरकार को दवाब में लाना, उसे जनता में बदनाम करना, चुनावों के लिए मिलने वाली फंडिंग को रोकना है। कहा जाता है कि अगले चरण में उन सभी उद्योगपतियों को ED टारगेट कर सकती है जो कांग्रेस को अगले चुनाव में संभावित रूप से फंडिंग कर सकते हैं।  इसके अलावा यह भी संभावना है कि ED राज्य सरकार के कई अन्य विभागों में दबिश देकर कई नए खुलासे कर सकती है। नक्सल क्षेत्रों में भ्रष्टाचार को लेकर भी नई तरह से जांच शुरू की जा सकती है।इसके बाद का काम पार्टी का है। पार्टी इन सभी मुद्दों को जनता तक ले जाकर सरकार को भ्रष्ट बताएगी और उसे चुनाव में भुनाएगी। इन मुद्दों को परिणाम में परिवर्तित करना इनका लक्ष्य होगा।



    अधिकारियों से सहानुभूति नहीं

    लोग इस बात पर तो सहमत हैं कि ED की छापेमारी राजनीतिक है और यह भूपेश बघेल सरकार को बदनाम करने के लिए है लेकिन अधिकारियों पर पड़ने वाले छापे से लोग खुश दिखते हैं। उन्हें उन अधिकारियों से कोई सहानुभूति नहीं है जिन्हें ED पकड़ रही है या जिनके घरों में छापेमारी की गई है। दरअसल बेलगाम नौकरशाही से लोग त्रस्त तो हैं। राजस्व और पुलिस विभाग पर सरकार का लगाम नहीं दिखता। यहां भ्रष्टाचार होने और आम लोगों को परेशान किए जाने की बात कई बार सामने आती है। नौकरशाही, खासकर राजस्व और पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने पर लोग बिना तर्क के मान भी लेते हैं। यह देखा गया है कि इन विभागों के बिरले अधिकारियों को ही लोग सपोर्ट करते हैं। 


    आखिर क्या है ED का इतिहास

    प्रवर्तन निदेशालय या ईडी एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो आर्थिक अपराधों की जांच और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के लिए बनाया गया है। इस निदेशालय की स्थापना 1 मई, 1956 को हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA “47) के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से निपटने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग में एक “प्रवर्तन इकाई” का गठन किया गया था। मुख्यालय के रूप में दिल्ली के अलावा कोलकाता और मुंबई में स्थापित किया गया था।  इस इकाई का नेतृत्व एक कानूनी सेवा अधिकारी, प्रवर्तन निदेशक के रूप में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से प्रतिनियुक्ति पर लिए गए एक अधिकारी और विशेष पुलिस स्थापना के 03 निरीक्षकों द्वारा सहायता प्रदान की गई थी।

    वर्ष 1957 में, इस इकाई का नाम बदलकर “प्रवर्तन निदेशालय” कर दिया गया, और मद्रास में एक और शाखा खोली गई। 1960 में, निदेशालय का प्रशासनिक नियंत्रण आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया था। समय बीतने के साथ, FERA”47 को निरस्त कर दिया गया और FERA, 1973 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 04 वर्षों (1973 – 1977) की एक छोटी अवधि के लिए, निदेशालय कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रहा। वर्तमान में, निदेशालय राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

    आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ, FERA, 1973, जो एक नियामक कानून था, को निरस्त कर दिया गया और इसके स्थान पर, एक नया कानून विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) 1 जून 2000 को लाया गया।  इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट को अधिनियमित कर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) अधिनियमित किया गया था ।  जिसके प्रतिपादन का जिम्मा ED को 1अप्रैल 2015 से सौंपा गया था।

    8 सालों में कितनी कार्रवाई

    26 जुलाई 2022 को केंद्र सरकार के वित्त राज्यमंत्री ने राज्यसभा में लिखित जानकारी देते हुए बताया था कि 2014 से 2022 यानी 8 साल के दौरान ED ने 3010 कार्रवाई की है जबकि 2004 से 2014 के बीच ED ने मात्र 112 कार्रवाई ही की थी। वित्त राज्यमंत्री ने यह भी बताया था कि 3010 मामलों में से 888 मामलों में चार्ज शीट फाइल की गई और 23 मामलों में कनविक्शन यानि दोष पाया गया। इस दौरान 869.31 करोड़ की अपराधिक आय की संपत्ति जब्त की गई। वहीं 2005 से 2014 के बीच ED द्वारा 112 कार्रवाई की गई, जिसमे 5,346.16 करोड़ रुपये की अपराध की आय कुर्क की गई और 104 शिकायतें दर्ज की गईं।

    कौन -कौन हुआ शिकार

    2014 के बाद ED के कार्रवाई का शिकार सिर्फ विपक्षी नेता हुए हैं ऐसा आरोप सरकार पर लगाया जाता है। दरअसल केंद्र सरकार के आलोचक दल तृणमूल कांग्रेस (बंगाल), आम आदमी पार्टी (दिल्ली), कांग्रेस (कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश), शिवसेना (महाराष्ट्र), बसपा सहित कई दल इस संस्था के शिकार हुए हैं। विपक्षी नेता एक स्वर में, चाहे ममता बनर्जी हों या अरविंद केजरीवाल या संजय राउत ED कार्रवाई के बाद इन नेताओं ने सीधे केंद्र सरकार पर हमला बोला और सरकार के इस तरीके को धमकाने वाली राजनीति कहा है।

    ED के कुछ चर्चित कार्रवाई

    2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान ED ने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से लगातार पूछताछ की, लोकसभा चुनाव के दौरान ही मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के पीए के घर कार्रवाई हुई, कर्नाटक के कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर तब ED ने दबिश दी जब वे वहां की सरकार बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों को अपने फार्म हाउस में रुकवाया था, ED ने वहीं दबिश दी थी। गुजरात चुनाव के ठीक पहले आम आदमी पार्टी के गुजरात के प्रभारी सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी, इसके बाद आम आदमी पार्टी ने मनीष सिसोदिया को वहां का प्रभारी बनाया और उनके ऊपर भी ED की कार्रवाई हुई। इसमें बड़ी बात यह है कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने इस रेड की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पिछले 6 माह से प्रदेश में ED की कार्रवाई की संभावना जता रहे थे और यहां भी ED ने दोबारा दबिश देकर उनकी आशंका को सही सिद्ध कर दिया। इसी तरह बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान वहां के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर भी ED ने कार्रवाई की जिसकी आलोचना हुई और सवाल खड़े किए गए।