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  • एक दिवसीय मदिरा उपभोग हेतु मिलेगा लायसेंसनिर्धारित कार्यक्रमों के लिए 15 से 20 दिनों के पूर्व करना होगा ऑनलाईन आवेदन….

    एक दिवसीय मदिरा उपभोग हेतु मिलेगा लायसेंसनिर्धारित कार्यक्रमों के लिए 15 से 20 दिनों के पूर्व करना होगा ऑनलाईन आवेदन….


    रायगढ़। सहायक आयुक्त आबकारी, रायगढ़ ने जानकारी देते हुए बताया कि वैवाहिक कार्यक्रम, जन्मदिन, सगाई, पार्टी, कान्फ्रेंस, नववर्ष के आगमन हेतु विभिन्न संस्थाओं, होटलों द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए तथा अन्य कार्यक्रमों के आयोजन में मदिरा का उपभोग के लिए एक दिवसीय एफ.एल.-5 क लायसेंस आबकारी विभाग द्वारा जारी किया जाता है। आबकारी विभाग के वेबसाईट www.excise.cg.nic.in में लॉग इन कर ऑनलाईन एक दिवसीय एफएल-5 क लायसेंस हेतु आवेदन कर सकते है। ऑनलाईन आवेदन आयोजित कार्यक्रम दिनांक के पूर्व 15 से 20 दिन पहले करना अनिवार्य होगा। एक दिवसीय एफएल-5 क लायसेंस फीस 10 हजार रुपये एवं सुरक्षा धन राशि 5 हजार रुपये (बैंक द्वारा जारी डीडी)निर्धारित है।

  • रायगढ़ एसडीएम गगन शर्मा के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना का प्रकरण दर्ज…

    रायगढ़ एसडीएम गगन शर्मा के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना का प्रकरण दर्ज…

    रायगढ़। रायगढ़ के एस.डी.एम. गगन शर्मा के विरुद्ध छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा न्यायालय अवमानना का प्रकरण दर्ज करके उन्हें हाईकोर्ट तलब करने के लिये नोटिस जारी कर दी गई है ।

    न्यायालय अवमानना का यह प्रकरण अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा चेम्बर द्वारा स्थानीय पत्रकार विवेक श्रीवास्तव की ओर से पैरवी किये जाने वाले भू-अर्जन के मामले में दर्ज किया गया है, जिसमें सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा एवं आशीष कुमार मिश्रा द्वारा गगन शर्मा को कानूनी नोटिस जारी कर आगाह किया गया था कि उनके द्वारा माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की निरतंर अवमानना की जा रही है इसलिये या तो वे हाईकोर्ट के आदेश का पालन करें अथवा उनके विरुद्ध न्यायालय अवमानना का प्रकरण दर्ज किया जावेगा।

    परंतु अनुविभागीय अधिकारी गगन शर्मा द्वारा मिश्रा चेंबर की इस नोटिस का न तो जवाब दिया गया न ही हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया गया, जिसके पश्चात उनके विरुद्ध कन्टेम्पट आफ कोर्ट की पिटीशन हाईकोर्ट में पेश की जो हाईकोर्ट द्वारा पंजीबद्ध कर ली गई एवं गगन शर्मा को तलब किया गया है।

    इस संबंध में ज्ञातब्य है कि पत्रकार विवेक श्रीवास्तव के भू-अर्जन के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा भू-अर्जन अधिकारी रायगढ़ गगन शर्मा को WP(C) No.3212/2022 में दिनांक 25/07/2022 को यह आदेश दिया गया था कि वे ग्राम झिलगीटार, तहसील-पुसौर में विवेक श्रीवास्तव की भूमि खसरा नंबर 79/8 रकबा 0.073 हेक्टेयर का एन.टी.पी.सी. लारा द्वारा किये गए अधिग्रहण के संदर्भ में बोनस और मुआवजा भुगतान की पात्रता 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित कर इसका भुगतान एन.टी.पी.सी.लारा के अधिकारियों को करने का निर्देश देवें परंतु अनुविभागीय अधिकारी गगन शर्मा ने 4 माह बीत जाने के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं किया जबकि उपरोक्त भुगतान की पात्रता के संबंध में पूर्व भू-अर्जन अधिकारी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट और प्रतिवेदन में विवेक श्रीवास्तव को मुआवजा व बोनस भुगतान दिलाने की अनुशंसा भी की गई है। एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा द्वारा यह भी जानकारी दी गई है कि अनुविभागीय अधिकारी गगन शर्मा के कार्यालय में अन्य भी अनेक प्रकरणों में हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है एवं उन प्रकरणों में भी न्यायालय अवमानना की कार्यवाही यथा समय प्रारंभ की जाएगी ।

  • ई डी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया को किया गिरफ्तार…

    ई डी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया को किया गिरफ्तार…

    आयकर विभाग ने पिछले साल जून में कहा था कि उसने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छापेमारी के बाद 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित हवाला रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की एक टॉप ब्यूरोक्रेट को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने गिरफ्तार किया है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया को ईडी ने गिरफ्तार किया है.
    आयकर विभाग ने पिछले साल जून में कहा था कि उसने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छापेमारी के बाद 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित हवाला रैकेट का भंडाफोड़ किया है. हवाला लेनदेन के तहत औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से हटकर नकदी का लेनदेन हुआ है.

    सौम्या चौरसिया के घर पर फरवरी 2020 में भी छापा मारा गया था. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी का छापे की कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” कहा था. उन्होंने दावा किया था कि यह उनकी सरकार को “अस्थिर” करने का प्रयास है.
    फरवरी 2020 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित उनके करीबी सहयोगियों पर इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी से मामला राज्य बनाम केंद्र बन गया था. इनकम टैक्स विभाग की टीम ने सौम्या चौरसिया के बंगले पर छापा मारा था. उस समय जगदलपुर में भी दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापे मारे गए थे.

    छापे के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने उन 19 कारों को जब्त कर लिया था जिसे छापेमारी के लिए कथित तौर पर आयकर अधिकारियों ने किराये पर लिया था. पुलिस का कहना था कि, सारी गाड़ियां नो-पार्किंग ज़ोन में खड़ी थीं इसलिए उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार जुर्माना वसूल किया और वाहनों को छोड़ दिया.

    बीजेपी नेताओं ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था और आरोप लगाया था कि पुलिस इनकम टैक्स के छापे को रोकने की कोशिश कर रही थी.

  • फेरी कर रेकी और चोरी करने वाले गैंग का एक आरोपी गिरफ्तार…आरोपियों का गिरोह छत्तीसगढ़, ओड़िसा, कर्नाटक के कई स्थानों में किये हैं चोरियां….

    फेरी कर रेकी और चोरी करने वाले गैंग का एक आरोपी गिरफ्तार…आरोपियों का गिरोह छत्तीसगढ़, ओड़िसा, कर्नाटक के कई स्थानों में किये हैं चोरियां….

    चोरी का माल बंग्लादेश में खपाते थे आरोपी, पूर्व में गिरोह के तीन आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार…..

    रायगढ़। एसपी श्री अभिषेक मीना के निर्देशन एवं एएसपी श्री संजय महादेवा के मार्गदर्शन पर रात्रि गस्त को सुदृढ किया गया है । इसी क्रम में दिनांक 01.12.2022 को रात्रि गश्त दौरान चौकी जूटमिल पुलिस द्वारा छातामुड़ा चौंक के पास एक लाल रंग के मोटरसाइकिल में घूम रहे संदिग्ध युवक को पकड़ा गया, पूछताछ में युवक अपना नाम मोहम्मद आरिफ शेख जूटमिल का स्थानीय होना बताया । गस्त पार्टी द्वारा युवक से उसका पहचान पत्र आदि चेक किए जाने पर युवक के सुंदरगढ़ उड़ीसा के होने की जानकारी मिली । युवक द्वारा भ्रमित करने पर उसे चौकी लेकर आया गया जिसे कड़ाई से पूछताछ में आरोपी अपने पास रखी हुई मोटरसाइकिल सी.टी 100 क्र सीजी 13 ए.एल. 1218 को चोरी का होना बताया । आरोपी से तरीका-वारदात पूछे जाने पर उसका खुलासा चौंका देने वाला था । आरोपी मोहम्मद आरिफ शेख पिता मोहम्मद जायदुल शेख उम्र 19 साल निवासी ग्राम खुटगांव थाना मिसरा जिला सुंदरगढ़ ओड़िशा अपने मेमोरेंडम कथन में बताया कि वह अलग-अलग शहर व गांव में जाकर बर्तन फेरी करने के बहाने घरों में चोरी के लिए रेकी करता है । इसका शाहपुकुर दक्षिण दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल) का अफसर मंडल, सैकेत मंडल, मोहम्मद खालिद रायपुर का बाबू शेख, जबलपुर मध्य प्रदेश का रहने वाला मोहम्मद रौनी शेख सभी मिलकर शहरों में किराए मकान लेकर रैकी और छोटा-मोटा काम कर चोरी करते हैं । आरोपी मोहम्मद आरिफ शेख बताया कि चोरी में मिले सोना चांदी के जेवर को इनका साथी अफसर मंडल बांग्लादेश तरफ ले जाकर बिक्री करता है और बिक्री से प्राप्त रकम का आपस में सभी लोग बंटवारा करते हैं । आरोपी बताया कि छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, बलरामपुर, रायपुर तथा उड़ीसा के बरगढ़, रायगड़ा, कर्नाटक में मोटरसाइकिल तथा सोने-चांदी के जेवरात चोरी किए हैं । रायगढ़ में रहते हुए अपने साथी मोहम्मद रौनी शेख के साथ मिलकर करीब 6 महीना पहले नेतनागर से मोटर सायकल सी.टी 100 क्रमांक सीजी 13 ए.एल. 1218 को चोरी किया था जिसमें घूम-घूम कर बर्तन बेचने के बहाने रेकी करता था और करीब 3 माह पहले रौनी के साथ मिलकर फटहामुड़ा में जूटमिल में सुनसान जगह पर बने घर के बाहर से खड़ी अवेंजर मोटरसाइकिल को चोरी कर रातो रात लेकर उड़ीसा तरफ जा रहे थे और रास्ते में मोटरसाइकिल बंद होने से मोटरसाइकिल को पुसौर के एक गांव में धान में छिपाकर भाग गए थे । बाइक चोरी के संबंध में चौकी जूटमिल में अप.क्र. 903, 1245/2022 धारा 379 आईपीसी का अपराध पंजीबद्ध है । पुसौर पुलिस द्वारा चोरी गई अवेंजर मोटरसाइकिल को ग्राम धनगांव में लवारिश अवस्था में बरामद किया गया था जिसे वाहन का पंजीकृत स्वामी अनूप कुमार पिता दिलीप कुमार निवासी फटहामुडा चौकी जूटमिल द्वारा दिनांक 09.09.2022 को न्यायालय से वाहन सुपुर्दनामा पर प्राप्त किया गया है । आरोपी बताया कि पिछले दिनों रायगढ़ में बड़ी चोरी के लिए अपने दो साथी – मोह. रौनी शेख और शेख बाबू को बुलाया था जो रायपुर से ट्रेन में रायगढ़ आये थे, जिनको लेने रायगढ़ रेलवे स्टेशन गया था पर उनसे मुलाकात नहीं हुआ वे लोग स्टेशन पर पुलिस चेकिंग को देखकर भाग गये थे । आरोपी मोहम्मद आरिफ शेख से नेतनागर से चोरी किया हुआ मोटर सायकल CT 100 सीजी 13 ए.एल. 1218 कीमती 25,000 रूपये (अप.क्र. 903/2022 धारा 379 आईपीसी) जप्त कर आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है । दोनों ही बाइक चोरी में शामिल आरोपी मोह. रौनी शेख फरार है । सीएसपी रायगढ़ अभिनव उपाध्याय के सुपरविजन में चोरी के माल मुलिज्म पतासाजी में साइबर सेल/चौकी प्रभारी जूटमिल उप निरीक्षक कमल किशोर पटेल, चौकी जूटमिल के प्रधान आरक्षक रामनाथ बनर्जी, मोहम्मद दिलदार कुरैशी, आरक्षक बनारसी सिदार, विनय तिवारी और समीर बेक की अहम भूमिका रही है । विदित हो कि 28 जुलाई को जूटमिल पुलिस द्वारा गैंग के मास्टर माइंड अफसर मंडल के तीन साथी आरोपी (1) मिलोन मंडल पिता मुजामिल मंडल उम्र 36 साल (2) मिलन शेख पिता अब्दुल हलीम शेख उम्र 22 साल (3) छबिकुन नहर बिबी मण्डल पति स्व. हलीम मंडल उम्र 38 साल तीनों का स्थायी पता मध्यरामकृष्णपुर थाना कुमारगंज जिला दक्षिण दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल) को थाना कुमारगंज डिस्ट्रिक्ट दक्षिण दिनाजपुर पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर रायगढ़ लाया गया था जिनसे सोना- 91.25 ग्राम (कीमत 5 लाख), चांदी- 1.127 ग्राम कीमत ₹70,000 और नकद रूपये- 7,35,880 रूपये कुल जुमला – 13,05,880 रूपये की मशरूका जप्त कर चौकी जूटमिल क्षेत्र के पार्क सिटी उडीसा रोड, कोतरारोड़ क्षेत्र के कृष्ण विहार, चक्रधरनगर के केलोबिहार और मालीडिपा में चोरी का खुलासा किया गया था । साइबर सेल और जूटमिल पुलिस फरार आरोपी अफसर मंडल और गिरोह के सदस्यों की पतासाजी की जा रही है ।

  • ASP और उनकी पत्नी धोखाधड़ी मामले में फंसे, पुलिस ने किया मामला दर्ज….

    ASP और उनकी पत्नी धोखाधड़ी मामले में फंसे, पुलिस ने किया मामला दर्ज….

    जोधपुर। राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नरेंद्र चौधरी और उनकी पत्नी के खिलाफ रातानाडा पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है. जोधपुर पुलिस उपायुक्त डॉक्टर अमृता दुहन ने बताया कि रातानाडा इलाके में नरेंद्र चौधरी की तरफ से अर्जुन क्लासेज कोचिंग चलाई जाती है.

    कोचिंग के 30 से 40 विद्यार्थियों ने शिकायत में कहा है कि पुलिस की नौकरी में गारंटी से सिलेक्शन के नाम पर हमसे लाखों रुपए फीस ली गई. सिलेक्शन हुआ नहीं और अब कोचिंग संचालक रुपए वापस करने से आनाकानी कर रहे हैं. उनका दिया हुआ चेक भी बाउंस हो गया है.
    दरअसल, साल 2012- 13 में जोधपुर में अर्जुन क्लासेज खोली गई थी. इसमें राजस्थान पुलिस सब इंस्पेक्टर की भर्ती में गारंटी से पास करवाकर नौकरी दिलाने का दावा अभ्यार्थियों से किया गया था. इसकी एवज में हर अभ्यार्थी से डेढ़ लाख फीस के तौर पर लिए गए थे. साल 2016 में सब इंस्पेक्टर की भर्ती निकली और 2018 में रिजल्ट आया. लेकिन उन अभ्यार्थियों का सिलेक्शन नहीं हुआ, जिन्होंने अर्जुन कोचिंग क्लासेज में गारंटी सिलेक्शन के नाम पर डेढ़ लाख रुपए दिए थे. बाद में अभ्यार्थियों ने नरेंद्र चौधरी से अपनी दी हुई फीस वापस मांगी. इस पर उन्होंने अपनी पत्नी सीमा के साइन किए हुए चेक थमा दिए।

    पीड़ित अभ्यार्थियों में शामिल गोविंद सिंह रत्नु ने बताया कि कोचिंग से मिला चेक बैंक में लगाया. लेकिन वह बाउंस हो गया. इसके बाद फिर से हम नरेंद्र चौधरी के पास पैसे की मांग लेकर पहुंचे. इस पर उन्होंने हमें धमकाया. अपने पद की धौंस बताते हुए पैसे नहीं लौटाने की धमकी दी. थक-हारकर अब हम सभी पीड़ितों ने नरेंद्र चौधरी की शकिायत दर्ज कराई है. मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निशांत भारद्वाज कर रहे हैं।

  • बिजली विभाग के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी पर जुर्माना पहली बार, जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग की कार्रवाई….

    बिजली विभाग के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी पर जुर्माना पहली बार, जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग की कार्रवाई….

    रायपुर। 30 नवंबर यह पहली बार ही है की छत्तीसगढ़ में पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी को सूचना के अधिकार के तहत रुपए 25 हजार की पेनल्टी सूचना आयोग द्वारा लगाई गई है। इसी के साथ सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने शासकीय कंपनी के विभिन्न कार्यालयों के मध्य आवेदन के अंतरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
    आवेदक नितिन सिंघवी ने प्रबंध संचालक विदुत वितरण कंपनी के कार्यालय में आवेदन लगाकर दो पत्रों के बारे में जानकारी चाही थी कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) द्वारा भेजे गए एक पत्र जिसमें हाथियों की विद्युत करंट से हो रही मृत्यु के संबंध में 15 दिनों में कार्य योजना बनाने के लिए लिखा गया था और दूसरे पत्र में प्रमुख सचिव वन विभाग द्वारा हाथियों की विद्युत करंट से हो रही मृत्यु के संबंध में विद्युत वितरण कंपनी के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की चेतावनी दी गई थी। आवेदक ने जानना चाहा था कि ये दोनों पत्र प्रबंध संचालक के कार्यालय में पहुंचने के उपरांत उनके कार्यालय द्वारा क्या कार्यवाही की गई? परंतु तत्कालीन जन सूचना अधिकारी सह उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन) विद्युत वितरण कंपनी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन का अंतरण कार्यालय कार्यपालक निदेशक (संचा./संधारण) को कर दिया, जिन्होंने भी आवेदक को सूचना मुहैया नहीं कराई। प्रथम अपील निरस्त कर दी गई। इसलिए आवेदक ने द्वितीय अपील दायर थी।
    द्वितीय अपील के दौरान आयोग ने माना की आवेदन का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के तहत अंतरण करना उचित नहीं था क्योंकि प्रबंध संचालक कार्यालय द्वारा दोनों पत्रों के परिपेक्ष में यदि कोई कार्यवाही की गई थी तो उक्त कार्यवाही की जानकारी भेजनी चाहिए थी। यदि कार्यवाही नहीं की गई थी तो उसकी जानकारी आवेदक को दी जानी चाहिए थी। आयोग ने कहा कि इस प्रकरण में जन सूचना अधिकारी द्वारा प्राप्त जन सूचना आवेदन का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के तहत जन सूचना अधिकारी कार्यालय कार्यपालक निदेशक (संचा. संधारण) विद्युत वितरण कंपनी को अंतरित किया गया था, जबकि प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिसटीब्यूशन कंपनी लिमिटेड एक ही लोक प्राधिकारी है और उनके कार्यालय में कार्यरत सभी विभाग/शाखा में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के अंतरण मामला नहीं बनता है ।बल्कि वांछित जानकारी जन सूचना अधिकारी के पास नहीं थी तो उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के धारा 5(4) के तहत डीम्ड जन सूचना अधिकारी से प्राप्त कर आवेदक को प्रेषित करनी चाहिए थी ।
    आयोग ने प्रकरण में श्रीमती सरोज तिवारी वर्तमान पदस्थापना मुख्य अभियंता राजस्व स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड तत्कालीन जनसूचना अधिकारी एवं उप महाप्रबंधक (मां.स) विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्राप्त जनसूचना आवेदन का गलत विनिश्चय करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (3) के तहत आवेदन का अंतरण करने के कारण और धारा 5(4) के तहत डीम्ड जन सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त कर अपीलआर्थी को प्रेषित न करने के कारण ₹25000 अर्थ धन आरोपित कर, अर्थ दंड की राशि वसूली हेतु आदेशित किया है।

    00 नहीं होगा कार्यालयों में आवेदनों का अंतरण
    सिंघवी ने चर्चा में बताया कि एक ही लोक प्राधिकारी होने की स्थिति में जैसा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड एक ही लोक प्राधिकारी है, तो आवेदक विद्युत वितरण कंपनी के किसी भी कार्यालय में आवेदन दायर करके जानकारी चाह सकता है। अगर जानकारी दूसरे कार्यालय के पास है तो आवेदन का अंतरण नहीं किया जा सकता, अधिनियम में व्यवस्था दी गई है कि एक ही लोक प्राधिकारी के किसी एक कार्यालय में आवेदन लगाया गया है और उसी लोक प्राधिकारी के दुसरे कार्यालय के पास सूचना होने पर, धारा 5(4) तथा 5(5) के तहत डीम्ड सूचना आधिकारी से सहयोग मांग कर, दूसरे कार्यालय से सूचना बुलाकर आवेदक को प्रदाय की जाएगी, ना कि आवेदन का अंतरण किया जावेगा। यह अंतरण तब किया जा सकता है जब विद्युत वितरण कंपनी में आवेदन लगा दिया गया है और जानकारी विधुत ट्रांसमिशन कंपनी से संबंधित हो, तब धारा 6(3) के अंतर्गत आवेदन का अंतरण किया जा सकता है, क्योंकि दोनों अलग-अलग लोक प्राधिकारी है। छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने इस संबंध में 2005 में ही स्पष्टीकरण जारी कर दिया था। इसी आधार पर सूचना आयोग ने पहले ही रायपुर नगर निगम को एक ही एक ही लोक प्राधिकारी माना है न कि हर जोन कार्यालय को।

  • जमानत किसी और को बाहर आ गया कोई और, जिला प्रशासन ने शुरू की जांच, फर्जी जमानत पर बाहर आया दूसरा आरोपी हुआ फरार….

    जमानत किसी और को बाहर आ गया कोई और, जिला प्रशासन ने शुरू की जांच, फर्जी जमानत पर बाहर आया दूसरा आरोपी हुआ फरार….

    जमानत किसी और को मिली, रिहा कोई और होगा। इस मामले में जेल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिया है। इस मामले में जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। जेल में बंद जिस गुड्डू कुमार को जमानत मिली वो जेल में ही रह गया दूसरा गुड्डू कुमार बाहर आ गया।

    मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिला जेल का है। इस जेल में मीनापुर थाना शंकर पट्टी का गुड्डू कुमार के साथ उसी गांव के उसके हमनाम धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार भी जेल में था। एक गुड्डू कुमार के बदले  दूसरे गुड्डू कुमार को जेल से रिहा कर दिया गया। इसका पता तब चला जब जमानत मिलने वाला बंदी बाहर नहीं निकला। उसके स्वजन की शिकायत पर उसके अधिवक्ता ने जेल प्रशासन से तहकीकात की। इसके बाद जमानत मिले दूसरे बंदी को भी मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया। 

    जमानत का फर्जी लाभ उठाकर जेल से निकलने वाला गुड्डू कुमार फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। वहीं जमानत पर जेल से जमानत पर रिहा होने वाले गुड्डू कुमार को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इस संबंध में जेल प्रशासन की ओर से दोनों के विरुद्ध मिठनपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जेल प्रशासन ने कार्यालय के कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण का उत्तर मिलने के बाद दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की बात बताई जा रही है। मिठनपुरा थानाध्यक्ष श्रीकांत सिन्हा ने बताया कि दोनों गुड्डू आपस में दोस्त है। दोनों की साथ-साथ आपराधिक घटना में संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं।

    मीनापुर थाना के शंकरपट्टी गांव के रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार को 29 मई को हथौड़ी थाना क्षेत्र के बरहेत्ता गांव के निकट वाहन जांच के दौरान चोरी की बाइक व कारतूस एवं एक देसी पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया गया। उसका साथी शंकरपट्टी गांव के धनेश्वर राय का पुत्र गुड्डू कुमार तब फरार हो गया था। हथौड़ी थाना के पुलिस सहायक अवर निरीक्षक अरविंद कुमार ने दोनों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट व चोरी का समान बरामदगी की धारा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद 18 सितंबर को धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार को उसके तीन साथियों के साथ पुलिस ने दादर पुलिस लाइन के पास गांजा व पिस्टल के साथ अहियापुर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

    इस संबंध में अहियापुर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक विनोद दास ने सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दोनों तभी से जेल में था। इस बीच शंकरपट्टी के रामदेव सहनी के पुुत्र गुड्डू कुमार को कोर्ट से जमानत मिल गई। सोमवार को जेल से रिहा करने का कोर्ट से आदेश पहुंचा। जब जेल में रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार की पुकार की गई तो उसके बदले धनेश्वर राय के पुत्र गुड्डू कुमार जेल गेट स्थित कार्यालय में पहुंच गया। उससे पहचान चिह्न पूछा गया। उसने रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार का ही पहचान बता दिया। इससे भ्रमित होकर उसे ही जेलकर्मियों ने उसे रिहा कर दिया।

    जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कि बंदी को छोड़ने में चूक हुई है। यह एक तरह की दुर्घटना है। इसके लिए कार्यालय कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसका उत्तर मिलने के बाद दोषियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब तक की जांच में इस घटना में दोनों की मिलीभगत सामने आ रही है। पुकार होने के समय जानबूझकर दूसरा जेल गेट पर आ गया।

  • कोविड19 वैक्सीन लगने बाद होने वाली मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं, चाहें तो न लगवाएं टीका!

    कोविड19 वैक्सीन लगने बाद होने वाली मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं, चाहें तो न लगवाएं टीका!

    दिल्ली। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के तहत इस्तेमाल किए जा रहे टीकों का निर्माण थर्ड पार्टी द्वारा किया जाता है. उन्हें सुरक्षित व प्रभावी माना जाता है, इसलिए तीसरे पक्ष के बनाए कोविड टीके और उससे मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. केंद्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि कोविड-19 का टीका लगवाने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. केंद्र की यह प्रतिक्रिया दो लड़कियों के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर आई है, जिनकी कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव के कारण मौत हो गई थी.

    मंत्रालय ने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम के तहत उपयोग में आने वाले टीकों का निर्माण थर्ड पार्टी द्वारा किया जाता है और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में सफलतापूर्वक विनियामक समीक्षा की जाती है, जिसे विश्व स्तर पर सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है.

    मंत्रालय ने कहा, ‘इन तथ्यों के तहत, यह विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत किया गया है कि टीकों के उपयोग से एईएफआई (प्रतिकूल घटनाओं के बाद टीकाकरण) के कारण होने वाली अत्यंत दुर्लभ मौतों के लिए सख्त दायित्व के संकीर्ण दायरे के तहत मुआवजा प्रदान करने के लिए राज्य को सीधे तौर पर उत्तरदायी ठहराना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता.’
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति एईएफआई से शारीरिक चोट या मौत का शिकार होता है, तो कानून में उचित उपाय टीके लाभार्थियों या उनके परिवार के लिए खुले हैं, जिसमें लापरवाही, दुर्भावना या गलत व्यवहार के लिए मुआवजे के दावे के लिए दीवानी अदालतों में जाना शामिल है.
    इस तरह के दावों को केस-टू-केस के आधार पर एक उपयुक्त मंच पर निर्धारित किया जा सकता है. इसने कहा कि मौतें दुखद थीं, लेकिन सरकार को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता था. 23 नवंबर को दायर हलफनामे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, हालांकि, सरकार जनहित में सभी पात्र व्यक्तियों को टीका लेने के लिए दृढ़ता से प्रोत्साहित करती है, लेकिन इसके लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

    सरकार की प्रतिक्रिया दो लड़कियों के माता-पिता द्वारा दायर एक याचिका पर आई, जिसका प्रतिनिधित्व वकील सत्य मित्रा ने किया था, कोविड वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स के कारण दोनों लड़कियों का निधन हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में माता-पिता की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था, जिसमें समयबद्ध तरीके से ऑटोप्सी और जांच रिपोर्ट जारी करने के साथ-साथ मौतों की एक स्वतंत्र समिति द्वारा जांच की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने मौद्रिक मुआवजे और कोविड टीकों के प्रतिकूल दुष्प्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों का शीघ्र पता लगाने और उपचार के लिए दिशा-निर्देशों की भी मांग की.
    याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता की 18 वर्षीय बेटी को मई 2021 में कोविशील्ड की पहली खुराक मिली और जून 2021 में उसकी मौत हो गई. दूसरे याचिकाकर्ता की 20 वर्षीय बेटी को कोविशील्ड की पहली खुराक जून 2021 में मिली और जुलाई 2021 में उसकी मौत हो गई।

  • पर्यावरण अधिकारी की बदतमीजी पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा…। अधिकारी के माफीनामा के बाद मामले का हुआ निपटारा…

    पर्यावरण अधिकारी की बदतमीजी पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा…। अधिकारी के माफीनामा के बाद मामले का हुआ निपटारा…

    पर्यावरण विभाग पिछले कुछ समय से सिर्फ और सिर्फ फ्लाई एस डंप व उद्योगों के समर्थन में जनसुनवाई करवाने में लगा हुआ है जिससे यह अधिकारी मन बड़े हो चले हैं ताजा मामले में आज हर्ष न्यूज के संवाददाता संतोष साहू जिला पर्यावरण अधिकारी से फ्लाई डंप दम मामले में उनका कथन लेने पहुंचे थे लगभग 45 मिनट इंतजार के बाद उन्होंने विधिवत पर्ची भेज कर अधिकारी को सूचना दी व निवेदन किया कि उन्हें समय दे जब अधिकारी ने उनको किसी तरह का कोई जवाब नहीं दिया गया तो संतोष साहू ने स्वयं जाकर पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू से निवेदन किया कि कृपया 2 मिनट का समय दें जिस पर जिला पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू पता नहीं किस गुमान,घमंड में आकर पत्रकार को चेंबर से बाहर निकलने व औकात में रहने की बात कर दी।

    जिसके बाद संतोष साहू ने इस वाक्य की जानकारी अपने पत्रकार साथियों को फोन पर दी फोन पर सूचना मिलने पर सभी पत्रकार साथी जोकि 40 से 50 की संख्या में एक साथ जिला पर्यावरण कार्यालय पहुंचे वह उन्होंने नारेबाजी कर जिला पर्यावरण अधिकारी को माफी मांगने की लिए बाध्य किया।अपनी गलती का एहसास होने पर जिला पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू ने सभी वरिष्ठ पत्रकारों के समक्ष पत्रकार संतोष साहू से माफी मांगी व भविष्य में ऐसा दोबारा ना होने की बात भी कही जिस पर पत्रकार संतोष साहू सहमत व संतुष्ट नजर आए।

    इस विरोध के दौरान पत्रकार नरेश शर्मा,प्रवीण त्रिपाठी,युवराज सिंह आजाद,विनय पांडे,नितिन सिन्हा,भूपेंद्र सिंह,सत्यजीत घोष,राजेश जैन,भूपेंद्र ठाकुर,नवरतन शर्मा,नरेंद्र चौबे,विपिन सवानी,बंसी निराला,भीमसेन तिवारी,प्रेम नारायण मौर्य,शमशाद अहमद व अन्य मौजूद थे।

  • IPS सुंदरराज पी और ओपी पॉल केंद्र में IG के लिए इम्पैनल….रतन लाल डांगी नहीं…

    रायपुर । केंद्र सरकार ने देश के अलग-अलग राज्यों के 33 IPS अफसरों को आईजी के लिए इम्पैनल किया है। जबकि रतन लाल डांगी को आईजी रैंक में इम्पैनल नहीं किया गया है। कर्नाटक कैडर की चर्चित आईपीएस रूपा डी को भी इम्पैनल नहीं किया है। छत्तीसगढ़ के दो आईपीएस सुंदरराज पी और ओपी पॉल को IG के लिए इम्पैलन कर दिया गया है।