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  • अब एक क्लिक में मिलेगी बिजली से जुड़ी समस्त सेवाओं की जानकारी

    अब एक क्लिक में मिलेगी बिजली से जुड़ी समस्त सेवाओं की जानकारी

    गूगल प्ले स्टोर में जाकर मोर बिजली लिखकर डाउनलोड करना होगा ऐप… रायगढ़। अब लोगों को मोर बिजली मोबाइल ऐप के माध्यम से एक क्लिक में बिजली से जुड़ी समस्त सेवाओं की जानकारी मिल सकेगी। इस ऐप के माध्यम से नवीनतम बिजली बिल बिजली बिल का भुगतान बिजली बंद की शिकायत खपत का पैटर्न और बिजली बिल में कितनी छूट मिली इन सभी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी मिलेगी, इसके लिए उपभोक्ता गूगल प्ले स्टोर में जाकर और बिजली लिखकर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके माध्यम से अगर उपभोक्ता का मोबाइल नंबर लिंक नहीं है तो वह स्वयं इस ऐप के माध्यम से अपना बीपी नंबर को मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लिंक कर सकता है। अगर उपभोक्ता का मोबाइल नंबर बीपी नंबर लिंक है तो उपभोक्ता अपने रजिस्टर्ड नंबर से इस ऐप को लागू कर सकते हैं, इसके माध्यम से मासिक बिजली बिल देखने भुगतान करने और रसीद प्राप्त करने की सुविधा है, इसी तरह पिछले छह माह खपत का पैटर्न देखने बिजली बिल का भुगतान का विवरण देखने और बिजली बिल हाफ योजना के प्राप्त छूट का विवरण देखने की सुविधा है। इसके माध्यम से बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायत करने की भी सुविधा है ऐप का लाभ जिले के उपभोक्ता उठा सकते हैं।
    लापरवाही पर होगी कार्यवाही वर्तमान समय में जिले के लोग बिजली की समस्या को लेकर कंपनी के दफ्तर में फोन लगाते हैं, फोन पर ही शिकायत दर्ज कराई जाती है इसके बाद विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति की समस्या का निराकरण करने टीम भेजी जाती है। कई लोगों को पता नहीं चलता कि कंपनी द्वारा उनके आवेदन को लेकर क्या किया जा रहा है, लेकिन इस ऐप में शिकायत दर्ज कराने के बाद ऐप के माध्यम से ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जाएगी। ऑनलाइन शिकायत के बाद निराकरण नहीं होने से कर्मचारियों पर सीधे कार्यवाही होगी इसकी मॉनिटरिंग जिला स्तर पर कार्यपालन अभियंता करेंगे।
    छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य सरकार की नीति के अनुरूप ‘गढ़वा नया छत्तीसगढ़ बिजली बरही जम्मो घर’ को साकार करने के लिए मोर बिजली एप का शुभारंभ किया गया है यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त उपलब्ध है जिसे मोर बिजली लिखकर सर्च करके आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है इसके अंतर्गत उपभोक्ता बिना बिजली बिल ऑफिस जाए ऑनलाइन विद्युत संबंधी कार्यों को घर बैठे ही कर सकते हैं पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को मोबाइल फोन पर अपने बिजली संबंधी सभी जानकारी अपडेट रखने के लिए मोर बिजली एप का निर्माण किया गया है।
  • शुक्ला हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर बसंतपुर थाना में अपराध दर्ज, तत्काल गिरफ्तारी की उठ रही मांग

    शुक्ला हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर बसंतपुर थाना में अपराध दर्ज, तत्काल गिरफ्तारी की उठ रही मांग

    राजनांदगांव। शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही से हुई 23 वर्षीय पुलकेश साहू की मौत के मामले में आखिरकार एफआइआर हो ही गया। बसंतपुर पुलिस ने जांच रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत पर हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर 420, 304 ए और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। हालांकि मामले में प्रबंधन व डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। पुलिस ने एफआइआर कर मामले को विवेचना में लिया है। वहीं परिजनों को आश्वस्त भी किया है कि कार्रवाई में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। इसके लिए परिजनों ने आइजी हिमांशु गुप्ता से भी फोन पर न्याय की मांग रखी। आइजी ने भी परिजनों को कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। बड़ी बात यह है कि यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें हास्पिटल प्रबंधन के साथ डॉक्टरों के खिलाफ भी एफआइआर दर्ज हुआ है। इधर एफआइआर की खबर शहर में लगते ही निजी हास्पिटल के संचालकों में हड़कंप मच गया है। वहीं डॉक्टर भी सकते में आ गए हैं।

    परिजनों ने दर्ज कराई रिपोर्ट

    डोंगरगढ़ से लगे ग्राम बेलगांव के 23 वर्षीय पुलकेश पिता कृष्णकुमार साहू बीते 26 सितंबर को बालोद जिले के देवरी-जेवरतला गांव के पास सड़क हादसे में घायल हो गया था। इलाज के लिए उसे मेडिकल अस्पताल के बाद शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में दाखिल कराया गया। भर्ती के दिन ही शाम को पुलकेश के पूरे शरीर का एक्स-रे किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने रिपोर्ट नार्मल मानकर इलाज में गंभीरता नहीं दिखाई। जबकि रिपोर्ट में पुलकेश के सिर पर अंदरूनी चोंट का निशान था। कान से ब्लड भी आ रहे थे। दूसरे दिन 27 सितंबर की सुबह जब डॉक्टरों को पुलकेश के गंभीर होने की खबर लगी, तो प्रबंधन भी हड़बड़ा गया। आखिर में इलाज के दौरान पुलकेश की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने हास्पिटल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हास्पिटल प्रबंधन के साथ डॉक्टरों को भी घेरा। हालांकि पुलिस की हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। इसके दूसरे ही दिन 28 सितंबर को परिजनों ने बसंतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

    बुधवार को पुलकेश के परिजन जिला कार्यालय के सामने एकजुट हो गए इसमें पुलकेश के कई एमआर दोस्त भी थे। सभी एकजुट होकर बसंतपुर थाना पहुंचे, यहां कांग्रेस के युवा नेता निखिल द्विवेदी व भाजयुमो के युवा नेता मोनू बहादुर सिंह के साथ परिजनों ने थाना प्रभारी से घटना की शिकायत की। परिजनों की शिकायत और प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तत्काल हास्पिटल प्रबंधन व उनके दो डॉक्टर प्रतीक कौशिक और डा. चमन निषाद पर मामला दर्ज किया। इससे पहले परिजनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निज सचिव से मोबाइल फोन पर थाना प्रभारी की बात भी कराई। जिसमें सीएम के निज सचिव ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।

    डॉक्टरों की लापरवाही से 23 वर्षीय बेटे को खोने के बाद भी पुलकेश के पिता कृष्णकुमार साहू कमजोर नहीं हुए। मामले में पुलकेश के दोस्तों ने भी साथ दिया, जिसके कारण परिजनों ने जिला प्रशासन के साथ मामले की शिकायत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी की। सीएम कार्यालय में की गई शिकायत पर मुख्यमंत्री के निज सचिव ने कलेक्टर को जांच के लिए निर्देशित किया। जिसमें कलेक्टर ने एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित कर मामले की जांच कराई और रिपोर्ट सीएम के निज सचिव को भेजा। इसके बाद पुलकेश के परिजन जांच प्रतिवेदन लेकर सीएम के निज सचिव से मिले। सीएम कार्यालय के आश्वासन के बाद ही परिजनों ने बुधवार को बसंतपुर थाने में एफआइआर दर्ज कराने पहुंचे।

    परिजन आज पुलिस को सौंपेंगे कई दस्तावेज

    पुलकेश के परिजन गुरुवार को कई ऐसे दस्तावेज पुलिस को सौंपेगी, जिसमें हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर कई और धाराएं जुड़ सकती है। पुलकेश के चाचा प्रेम साहू ने बताया कि हास्पिटल प्रबंधन ने सीसीटीवी फूटेज के साथ दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर साक्ष्य छुपाने की कोशिश की है। लेकिन उनके पास कई ऐसे दस्तावेज है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन व डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही की है। पुलकेश के चाचा ने बताया कि सीएम से शिकायत के बाद प्रबंधन के डॉक्टरों ने केस वापस लेने उन पर दबाव बनाने की कोशिश भी की है, जिसका आडियो पुलिस को सौंपेंगे। साथ ही घटनाक्रम से जुड़ी 27 सितंबर को दोपहर एक बजे तक की सीसीटीवी फूटेज है, उसकी वीडियो फूटेज भी पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस को दी जाएगी।

    सरकार ने कराई निष्पक्ष जांच

    पुलकेश के परिजनों को लेकर बसंतपुर थाने पहुंचे एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव व कांग्रेस के युवा नेता निखिल द्विवेदी ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने ऐसे मामले में निष्पक्ष जांच की। निखिल ने कहा कि पहले भी कई निजी व शासकीय हास्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत का मामला सामने आया, लेकिन कभी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई। यह पहला ऐसा मामला है, जिसकी शिकायत के बाद सीएम कार्यालय ने निष्पक्ष जांच कराकर हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इससे डॉक्टरों में गंभीरता जरूर जाएगी।

    पदमेश साहू, पुलकेश का बड़ा भाई ने कहा

    इलाज में लापरवाही कर जिस तरह परिजन व प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गई है। ऐसे मामले में तो हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर गैर जमानती धारा के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर गंभीर रहे। डॉक्टरों को सजा मिलने के बाद ही हमें न्याय मिलेगा।

    नासिर बाठी, थाना प्रभारी बसंतपुर

    शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल के प्रबंधन और दो डॉक्टर के खिलाफ एफआइआर किया गया है। परिजनों की शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर धारा 420, 304 ए और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध हुआ है। मामले को जांच में लिया गया है। हास्पिटल की जांच कर प्रबंधन का बयान भी लेंगे। इसके बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।

  • पाकिस्तान जाने को तड़प रहे सिद्धू, सरकार को तीन बार लिख चुके चिट्ठी, सरकार ने दी इजाजत

    पाकिस्तान जाने को तड़प रहे सिद्धू, सरकार को तीन बार लिख चुके चिट्ठी, सरकार ने दी इजाजत

    दिल्ली। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम पूरी दुनिया को पता है. वो इस कदर पाकिस्तान जाने को उतावले हैं कि सरकार को तीन तीन बार चिट्ठी लिख चुके हैं.सरकार ने सिद्धू को तीन तीन चिट्ठी लिखने के बाद औऱ पाकिस्तान जाने की उनकी मंशा को देखते हुए आखिरकार सिद्धू को पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी है।

    सिद्धू ने तीसरी बार विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा है.उन्होंने इस पत्र में करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में जाने की इजाजत सरकार से मांगी है. सिद्धू ने कहा है कि उन्हें साफ साफ बताया जाए कि सरकार चाहती क्या है।

    वह इस समारोह में भाग लेने के लिए 9 नवंबर को सुबह साढ़े नौ बजे डेरा बाबा नानक की साइड बने कॉरिडोर से पाकिस्तान जाना चाहते हैं, ताकि वह साढ़े 11 बजे शुरू होने वाले उद्घाटन समारोह में पहुंच सकें. आखिरकार सरकार ने सिद्धू की मांग मानते हुए उनको पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी है।

  • अब सरकारी कर्मचारियों की मौज होगी खत्म, 8 घंटे के बजाय करना होगा 9 घंटे काम, सरकार ने बनाया प्लान

    अब सरकारी कर्मचारियों की मौज होगी खत्म, 8 घंटे के बजाय करना होगा 9 घंटे काम, सरकार ने बनाया प्लान

    दिल्ली। सरकारी कर्मचारी अपनी आराम तलबी और काम न करने के लिए कुख्यात हैं. अब सरकार इनके काम के घंटे बढ़ाने वाली है. इस बारे में सरकार ने प्लान बना लिया है।

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अब आठ के बजाय नौ घंटे तक काम करना पड़ेगा. इसके लिए सरकार जल्द ही नियम बदलने जा रही है. केंद्र सरकार ने नए नियम का मसौदा भी तैयार कर लिया है।

    इसमें सरकारी कर्मचारियों के काम करने के समय को एक घंटा बढ़ाने की सिफारिश की गई है. फिलहाल सरकारी कर्मचारी दिन में आठ घंटे की कार्यावधि के नियम के तहत 26 दिन काम करते हैं. जिस पर उनका वेतन तय किया जाता है. दिसंबर में नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

  • अब विज्ञापन में सेना की वर्दी का नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

    अब विज्ञापन में सेना की वर्दी का नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

    दिल्ली। सेना सबके लिए सम्मान का सबब है. कंपनियां भी सेना के कद को भुनाने में खूब लगी रहती हैं. सेना के सम्मान को भुनाने के मकसद से कंपनियां सेना और सैनिकों को लेकर खूब विज्ञापन बनाती हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अक्सर विज्ञापनों में एक्टर सेना की वर्दी पहनकर चीजों का विज्ञापन करते हैं. सेना के जवानों को क्रीम, पाउडर और मसाला तक बेचते हुए दिखाया जाता है लेकिन अब विज्ञापनों में सेना की वर्दी का इस्तेमाल नहीं होगा. अब सेना की इजाजत के बिना विज्ञापनों में सेना की वर्दी का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. एडवरटाइजमेंट स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब विज्ञापनों में सेना की वर्दी इस्तेमाल करने से पहले सेना की इजाजत लेनी होगी. काउंसिल ने सेना की आपत्ति के बाद ये एडवाएजरी जारी की है.
  • छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने देश को दिया संदेश, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए देगा एक लाख रुपए

    छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने देश को दिया संदेश, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए देगा एक लाख रुपए

    रायपुर। सुप्रीम कोर्ट का शनिवार को राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद छत्तीसगढ़ मुस्लिम समाज ने एक लाख रुपए राम मंदिर निर्माण के लिए देने का निर्णय लिया है. इस बात की जानकारी भाजपा नेता सलीम राज ने दी।

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद राजधानी रायपुर के साथ पूरे प्रदेश से देश को साप्रदायिक सौहार्द और सद्भाव का संदेश दिया गया है. फैसले के पहले सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन द्वारा उठाए गए तमाम एहतियाती कदमों के साथ ही प्रदेश के किसी कोने से किसी प्रकार की कोई घटना की खबर नहीं आई है।

    पुलिस-प्रशासन के कदम के अलावा धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस कोशिश को बल देने का काम किया. राजधानी रायपुर में मुस्लिम समाज के शहर काजी मोहम्मद अली फारुकी ने सभी समाज के सदस्यों को जोड़कर संदेश देने की कोशिश की।

  • संजय गुप्ता बने गूगल इंडिया के नए कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट, देश को लेकर है बड़ा लक्ष्य

    संजय गुप्ता बने गूगल इंडिया के नए कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट, देश को लेकर है बड़ा लक्ष्य

    दिल्ली। आर्थिक जगत से बड़ी खबर है। गूगल इंडिया ने संजय गुप्ता को अपना नया कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट) नियुक्त किया है। एक बायन में गूगल की ओर से कहा गया है कि संजय गुप्ता भारत में इंटरनेट के इकोसिस्टम को बढ़ाने में मदद करेंगे। साथ ही, बिजनेस को बढ़ाने और इंटरनेट को बढ़ावा देने के गूगल की ओर से हो रहे प्रयासों में योगदान करेंगे। बता दें कि संजय गुप्ता इससे पहले डिजनी और स्टार को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राजन आनंदन के इस्तीफे के बाद से गूगल इंडिया अपना नया कंट्री मैनेजर और वीपी ढ़ूढ़ रहा था। पिछले 8 महीने से ये पद खाली था। गूगल को छोडऩे के बाद राजन आनंदन ने वेंचर फंड कंपनी सिक्योइया कैपिटल को जॉइन किया है। संजय गुप्ता इससे पहले स्टार और डिज्नी कै मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं. भारत में हॉटस्टार के पॉपुलैरिटी के पीछे इनका अहम रोल बताया जाता है। गूगल के मुताबिक संजय मुंबई में रह कर गूगल की गुडग़ांव और हैदराबाद की टीम के साथ काम करेंगे। अगले साल की शुरुआत से वो अपने इस पद को संभालेंगे। गूगल ज्वाइन करने के पर संजय गुप्ता ने कहा है, ‘गूगल इंडिया को लीड करने को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। यह भारत की कुछ अनोखी चुनौतियों को हल करने और इंटरनेट को लोगों और समुदायों के लिए आर्थिक विकास का इंजन बनाने के लिए ये अच्छा मौका है।’
  • आर्थिक मोर्चे पर भारत को एक और झटका, मूडीज ने घटाई रेटिंग

    आर्थिक मोर्चे पर भारत को एक और झटका, मूडीज ने घटाई रेटिंग

    मुंबई। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग पर अपना परिदृश्य बदलते हुए इसे स्थिर से नकारात्मक कर दिया है। पहले के मुकाबले आर्थिक वृद्धि के बहुत कम रहने की आशंका है। एजेंसी ने भारत के लिए बीएए2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग की पुष्टि की है। रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, परिदृश्य को नकारात्मक करने का मूडीज का फैसला आर्थिक वृद्धि के पहले के मुकाबले काफी कम रहने के बढ़ते जोखिम को दिखाता है। मूडीज के पूर्व अनुमान के मुकाबले वर्तमान की रेटिंग लंबे समय से चली आ रही आर्थिक एवं संस्थागत कमजोरी से निपटने में सरकार एवं नीति के प्रभाव को कम होते हुए दिखाती है। जिस कारण पहले ही उच्च स्तर पर पहुंचा कर्ज का बोझ धीरे-धीरे और बढ़ सकता है। इसके पहले अक्टूबर में ही मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने 2019-20 में त्रष्ठक्क ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया था। मूडीज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पहले के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था में जोखिम बढ़ गया है, इसलिए आउटलुक को घटाने का फैसला किया है। आपको बता दें कि दुनिया की अन्य बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच और एसएंडपी ने भारत के आउटलुक को स्टेबल रखा है।

    अब क्या होगा

    कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर पशुपति सुब्रमण्यम ने बताया है कि रेटिंग एजेंसी के इस फैसले से खास असर नहीं होगा, क्योंकि अब दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे है। क्योंकि, ब्याज दरें घटाने के बाद निवेशकों का भरोसा भी लौटा है। इसीलिए शेयर बाजार में तेजी आई है। भारत में विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर महीने में करीब 8595.66 करोड़ रुपये लगाए हैं। वहीं, नवंबर में अभी तक  2,806.10 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं। वीएम पोर्टफोलियो के हेड विवेक मित्तल कहते हैं कि मौजूदा तिमाही में भी जीडीपी ग्रोथ पर दबाव रह सकता है। लेकिन अगले साल के शुरुआती महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सकती है। इसके संकेत कंपनियों के तिमाही नतीजों से मिले है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनियों का प्रदर्शन अनुमान से बेहतर रहा है। इसीलिए घरेलू शेयर बाजार पर रेटिंग घटाने का खास असर नहीं है। ऐसे माहौल में निवेशकों के पास अच्छे शेयरों में खरीदारी करने का मौका है। 

    भारत की रेटिंग

    रेटिंग के बारे में जानकारी देते हुए मूडीज ने कुछ चीजों को लेकर चिंताएं जाहिर की है। मूडीज का कहना है कि आर्थिक मंदी को लेकर चिंताएं लंबे समय तक रहेंगी और कर्ज बढ़ सकता है। 

    कौन है मूडीज

    आपको बता दें कि रेटिंग देने के इस सिस्टम देने की शुरुआत 1909 में जॉन मूडी ने की थी। इसका मकसद इन्वेस्टर्स को एक ग्रेड देना है, ताकि मार्केट में उसकी क्रेडिट बन सके। रूशशस्र4ज्ह्य कॉर्पोरेशन, रूशशस्र4ज्ह्य इन्वेस्टर्स सर्विस की पेरेंट कंपनी है, जो क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च का काम करती है। मूडीज की रेटिंग का मतलब मूडीज एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। ये एजेंसी 100 से भी अधिक आर्थिक विशेषज्ञों के साथ किसी देश की रेटिंग तय करते हैं। हालांकि, इसके लिए कोई भी फॉर्मूला नहीं है। इसमें किसी भी देश पर कर्ज और उसे चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। इसके अलावा रेटिंग एजेंसी देश में आर्थिक सुधारों और उसके भविष्य के प्रभाव को भी ध्यान में रखता है।

  • जानिए उन 5 जजों के बारे में जिन्होंने की अयोध्या केस पर सुनवाई

    जानिए उन 5 जजों के बारे में जिन्होंने की अयोध्या केस पर सुनवाई

    पहली बार पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने सुनवाई की है। इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं।

    जानिए इनके बारे में…

    जस्टिस रंजन गोगोई:

    अक्‍टूबर 2018 को देश के 46वें मुख्‍य न्‍यायधीश का पद संभालने वाले रंजन गोगोई असम के पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेसी नेता केसब चंद्र गोगोई के बेटे हैं। मुख्‍य न्‍यायधीश के तौर पर उनका कार्यकाल 17 नवंबर 2019 को खत्‍म होगा। गोगोई 1978 उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत गुवाहटी हाईकोर्ट में वकालत से की थी। यहीं पर वह पहली बार फरवरी 2001 में स्‍थायी जज नियुक्‍त किए गए। सितंबर 2010 में उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया था। अप्रेल 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने थे। बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्‍चन से जुड़े आय के मामले और जेएनयू छात्रा कन्‍हैया कुमार पर हमले को लेकर दायर याचिका को खारिज करने से सुर्खियों में आए थे। इस याचिका के तहत हमले की जांच को एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी। इसके अलावा एक और चर्चित मामले की वजह से भी वह सुर्खियों में आए थे। यह मामला केरल की महिला सौम्‍या के साथ दुष्‍कर्म के बाद हत्‍या से जुड़ा था। इसमें गठित तीन जजों की बैंच में रंजन गोगोई के अलावा न्‍यायधीश प्रफुल सी पंत और न्‍यायधीश उदय उमेश ललित शामिल थे। इस खड़े पीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया था जिसमें दोषी को फांसी की सजा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दोषी गोविंदास्‍वामी को मिली फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था। इस फैसले को पूर्व न्‍यायधीश मार्कंडे काटजू ने विरोध कर इसको गलत बताया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके विचार पर जवाब मांगे जाने के बाद वह इससे पीछे हट गए थे। इसके अलावा 2017 में असम के असल वासी कौन है के मुद्दे पर भी उनका फैसला काफी चर्चित हुआ था। इन सभी के अलावा रंजन गोगोई पर सभी का ध्‍यान जनवरी 2018 में उस वक्‍त गया था जब उनके साथ न्‍यायधीश चेलमेश्‍वर, एमबी लोकुर, कुरियन जोसफ ने सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार खुलेतौर पर मीडिया के समक्ष आकर मामलों का निस्‍तारण और मामले जिस तरह से जजों को दिए जाते हैं उस पर आपत्ति जताई थी। इस मामले ने उस वक्‍त काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा उन्‍होंने ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को हिंदी में जारी कर वेबसाइट पर डालने का भी आदेश दिया था।

    जस्टिस एसए बोबडे :

    वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने अपने नए फैसले में कहा है कि अगर तलाक की अर्जी लंबित है और दोनों पक्षों में केस को लेकर सहमति है तो दूसरी शादी मान्य होगी। हिंदू मेरिज एक्ट के सेक्शन 15 की व्याख्या करते हुए जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बैंच ने कहा, तलाक के खिलाफ अपील की पेंडेंसी के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता, जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो।

    जस्टिस एनवी रमना :

    किसी आपराधिक मामले में अगर कोई एफआईआर रद्द की जा चुकी है तो उस मामले में फिर से दूसरी एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, बशर्ते केस में कुछ नए तथ्य सामने आ गए हों। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में यह व्यवस्था दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना और एम शंतनागौदार की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के एक फैसले को रद्द करते हुए कहा है कि एक ही केस में पहली शिकायत खारिज होने पर दोबारा एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

    जस्टिस यूयू ललित :

    एससी एसटी एक्‍ट पर अहम फैसला देने वाली खंडपीठ में जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस ललित भी थे। उनका कहना था कि इसकी आड़ में फर्जी मुकदमें दर्ज करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। इतना ही नहीं तकनीकी शिक्षा को लेकर भी उनका फैसला काफी अहम रहा है। उन्‍होंने दो जजों की बेंच के तहत इसको गलत करार दिया था। जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित ने अपने फैसले में कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन ने इंजीनियरिंग के लिए डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम्स को अनुमति नहीं दी है। डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल द्वारा चलाए गए ऐसे सभी कोर्स गैरकानूनी हैं।

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़:

    संविधान पीठ के दूसरे न्‍यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ हैं जो देश के पूर्व मुख्‍य न्‍यायधीश वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं। उनके पिता वर्तमान समय तक देश के सबसे लंबी अवधि तक रहने वाले मुख्‍य न्‍यायधीश हैं। न्‍यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नाम के साथ कई बड़े और अहम फैसले हैं। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायधीश भी रह चुके हैं। उन्‍हें परंपरा और धर्म के मामले में अलग हटकर सोच रखने वालों में गिना जाता है। कई मामलों में उनके फैसले काफी अहम रहे हैं। मार्च 2018 में उन्‍होंने चर्चित हादिया केस में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए हदिया और शाफीन जहां की शादी को सही करार दिया था। कोर्ट ने उनकी शादी को दोबारा बहाल किया था। इसी तरह से भीमा-कोरेगांव मामले में एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी केस में तीन जजों की खंडपीठ में शामिल चंद्रचूड़ ने अन्‍य दो जजों से अलग राय दी। सितंबर 2018 में इस पर फैसला सामने आया था। इसके अलावा इच्छामृत्यु के मामले या फिर लिविंग विल मामले में बनी संविधान पीठ का वह भी हिस्‍सा थे। मार्च 2018 में दिए फैसले में उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि लाइलाज बीमारी की गिरफ्त में आने के बाद किसी भी इंसान को अपनी मौत मांगने का अधिकार है। इस खंडपीठ ने लिविंग विल को मंजूरी देकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। फैसले में कोर्ट ने व्‍यवस्‍था दी कि ठीक न हो सकने वाली बीमारी की चपेट में आने के बाद पीड़ित अपनी वसीयत खुद लिख सकता है, जो डाक्टरों को लाइफ सपोर्ट हटाने की मंजूरी यानी इच्छा मृत्यु (यूथनेशिया) की इजाजत देता है। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाली खंडपीठ के चंद्रचूड़ भी सदस्‍य थे।

  • पुलिस विभाग ने 30 सब इंस्पेक्टरों का किया तबादला, पीएचक्यू से जारी हुआ आदेश

    पुलिस विभाग ने 30 सब इंस्पेक्टरों का किया तबादला, पीएचक्यू से जारी हुआ आदेश

    रायपुर। इंस्पेक्टरों के तबादले के बाद पुलिस विभाग ने सब इंस्पेक्टरों का तबादला किया है. पीएचक्यू से शनिवार को जारी किये गए आदेश में राज्य के अलग-अलग जिलों में पदस्थ 30 उप निरीक्षकों का तबादला किया है।