





मध्यप्रदेश। एक महिला की शिकायत पर पुलिस ने झाबुआ के पूर्व भाजपा विधायक शांतिलाल बिलवाल पर सोमवार को धारा 376 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। महिला ने बिलवाल पर शादी का झांसा देकर 2004 में उसके साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया है। बिलवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि महिला के साथ सामाजिक रीति-रिवाज से शादी की थी। उसके पिता को वधू मूल्य भी चुकाया था। प्रकरण दर्ज होने पर पुलिस पूर्व विधायक के घर पहुंची, लेकिन वे नहीं मिले।
एएसपी विजय डावर ने बताया कि महिला ने पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल के खिलाफ पिछले दिनों शिकायती आवेदन दिया था। जांच में पता चला कि महिला और बिलवाल के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हुआ। शिकायतकर्ता महिला कार्रवाई चाहती थी, इसलिए सोमवार को शांतिलाल बिलवाल के खिलाफ धारा 376 के तहत कोतवाली थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। प्रकरण दर्ज होने के बाद बिलवाल के घर पुलिस की टीम गई थी लेकिन वे नहीं मिले।
रीति रिवाज से शादी:-
महिला के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व विधायक बिलवाल ने कहा कि महिला के साथ पूर्व में रीति रिवाज से शादी हुई थी। उसके पिता को समाज के रीति रिवाज के अनुसार वधू मूल्य भी दिया गया। पिछले महीने ही उन्होंने महिला के साथ कोर्ट मैरिज के तहत स्टाम्प पर लिखा-पढ़ी भी करवाई है। नियमानुसार छह माह के भीतर शादी को रजिस्टर्ड कराया जा सकता है।
परिवार परामर्श केंद्र भेजा था मामला:-
बिलवाल ने कहा कि पूर्व में भी उक्त महिला पुलिस को शिकायत कर चुकी है, शिकायती आवेदनों में उसने खुद समझौता होने और रीति रिवाज अनुसार 2.25 लाख रुपए पिता को दिए जाने की बात स्वीकारी है। पुलिस ने समझाइश के लिए मामला परिवार परामर्श केंद्र भी भेजा था, यदि शादी नहीं होती तो मामला वहां क्यों भेजा जाता।

8 सालों से 100 करोड़ नही देने वाले NTPC से ब्याज सहित वसूले सरकार
एनटीपीसी के कारण 8वर्षों में सामाजिक-आर्थिक-शेक्षणीक नुकसान की समीक्षा हो?
गलतफहमी न पाले एनटीपीसी की अब रमन-अमन की सरकार है?
लारा-संघर्ष का प्रतिनिधि मंडल जल्द ही भुपेश बघेल से मिलेगा
रायगढ़। लारा संघर्ष के युवाओं ने छत्तीसगढ़ सरकार सहित भु-विस्थापितों को गुमराह करने का आरोप एनटीपीसी पर लगाते हुए कहा है कि सन 2011-12 के प्रशासनिक अनुबंध के अनुसार 100 करोड़ रुपये मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देने हेतु कहा गया था जो कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में खोलने के लिये अनुदान के रूप में था। जिसमें प्रभावितों ओर भु-विस्थापितों के परिवारजनों के मुफ्त में इलाज के उद्देश्य से था।लारा-संघर्ष ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ सरकार को एनटीपीसी ने वर्ष 2011-12 में यह अनुदान के रूप में रायगढ़ में मेडिकल कॉलेज को 100 करोड़ रुपये देगी जो कि अब तक 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी एनटीपीसी ने नही दिया। जिसकी भरपाई को इस उद्योगिक कम्पनी से बैंक ब्याज दर से ब्याज सहित वसूलना चाहिए।
एनटीपीसी रायगढ़ को चारागाह बनाने पर तुली हुई है न तो किसान हित में काम कर रही है और न ही जनहित में ऐसी कंपनियों को रायगढ़ जिले का दोहन करने के मामले में समेकित रूप से जांच होनी चाहिए। जिसमें शासकीय, सामाजिक और कृषि समीक्षकों जैसे प्रतिनिधियो की नियुक्ति कर पूर्ण समीक्षा करवाना चाहिए। जिसमें योजना प्रभावितों के परिजनों का कार्ड भी नही बनवाना की जांच होनी चाहिए तदोपरांत एनटीपीसी कम्पनी पर न्यायिक और दण्डात्मक कार्यवाही होनी चाहिए।एनटीपीसी प्रबंधन न तो भुविस्थापितों को उनका मुआवजा दे रही है और न ही भूमिहीन और तेंदूपत्ता संग्रहनकर्ताओं को उनका पुनर्वास राशि दिया जा रहा है और साथ ही साथ रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए दी जाने वाली राशि के संबंध में भी सरकार को एनटीपीसी के अधिकारियों द्वारा गुमराह किया जा रहा है।
देना था 100 करोड़ 25 करोड़ देकर निपटाया
लारा संघर्ष के द्वारा प्रेस जारी कर बताया गया कि विगत दिनों एनटीपीसी के उच्च अधिकारियों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के निर्माण के लिए 25 करोड़ की राशि दिए जाने की बात कह कर गुमराह करने की कोशिश की गई जबकि एनटीपीसी द्वारा लारा परियोजना हेतु भूमि अर्जन की प्रगति के आधार पर रायगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज को 100 करोड़ का अनुदान दिए जाने की बात भूमि अधिग्रहण से पहले कही गई थी।आज जब एनटीपीसी के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी हो चुकी है, प्रथम फेस का काम पूरा होकर विद्युत उत्पादन शुरू हो चुका है। इस स्थिति में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज को पूरा 100 करोड़ मिल जाना चाहिए था। वहाँ मात्र 25 करोड़ की राशि देकर एनटीपीसी के अधिकारी वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में लारा-संघर्ष जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर जांच कराने एवम दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करने की मांग करेगा

रायपुर। माता-पिता के नहीं आने की वजह से सखी वन स्टाप सेंटर से नहीं छोड़े जाने पर अब अंजलि जैन ने अपने अधिवक्ता के जरिए से पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है. इसमें हाईकोर्ट के आदेश में परिजनों के उपस्थित नहीं बल्कि सूचित किए जाने का उल्लेख करते हुए केंद्र से निकालने की बात कही है।
वकील प्रियंका शुक्ला ने रायपुर पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में बताया कि चीफ जस्टिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने 15 नवंबर को अंजलि जैन पति आर्यन उर्फ इब्राहिम को अपनी मर्जी से किसी भी मनचाहे व्यक्ति व अपने अनुसार कही भी जाने का आदेश दिया था. इस हिसाब से अजंलि को सखी से निकालने की प्रक्रिया शुरू होने के 24 घंटे के पहले अंजली के पिता अशोक जैन व अंजली के पति आर्यन उर्फ इब्राहिम को फोन व किसी भी माध्यम से दोनों पक्षों को सूचना मात्र दिया जाना था।
16 नवंबर को दोपहर लगभग 12 बजे फोन के द्वारा व शाम 5 बजे के लगभग ई-मेल के माध्यम से इब्राहिम व अशोक जैन दोनों को सूचना देते हुए 17 नवंबर को दोपहर 1 बजे को आने के लिए कहा गया था. अंजलि के पति आर्यन उपस्थित हो गए, और अजंलि ने लिखित में सक्षम अधिकारी को पति के साथ जाने की बात कही गई, लेकिन इसके बाद भी उन्हें नहीं जाने दिया गया।
अंजली को यह कहते हुए अधिकारियों ने रोक दिया कि उनके पिता अशोक जैन उपस्थित नहीं हुए है, जबकि आदेश के हिसाब से दोनों पक्षों को मात्र किसी भी माध्यम से सूचना देना था, ना कि उपस्थित होने जैसी कोई बात कही गई है. अधिवक्ता ने अपने पक्षकार के अधिकारों की रक्षा की बात कहते हुए उसे सखी सेंटर से निकालने आदेश देने का आग्रह किया है।


गलती से बंदर के हाथ एक लड़की का फोन लग जाने के बाद उसने ऐसी हरकत की जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। मामला चीन के जिंगसू प्रांत स्थित येंगचेंग चिड़ियाघर का है। यहां जू-कीपर के तौर पर काम कर रही एक लड़की का फोन गलती से जू के ही एक बंदर के हाथ लग गया। इस चालाक बंदर ने लेव मेंगमेंग नाम की इस लड़की के फोन से ऑनलाइन शॉपिंग कर डाली।दरअसल कुछ दिनों पहले जब लेव मेंगमेंग बंदरों के लिए खाना लेने गई तो अपना फोन वहीं भूल गई। डेली मेल की खबर के मुताबिक लेव ने बताया कि खाना लेने जाने से पहले वह ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अपनी रोजमर्रा की चीजें तलाश रही थी।
जितनी देर में वह खाना लेकर वापस आई उतनी देर में बंदर ने धड़ा-धड़ मोबाइल के बटन दबा दिए। जब महिला वापस आई तो उसने देखा कि उसे ऑनलाइन शॉपिंग साइट से नोटिफिकेशन आए हुए थे। सभी में लिखा था कि आपके ऑर्डर सफलतापूर्वक प्लेस हो चुके है। जबकि लेव ने ये ऑर्डर किए भी नहीं थे। पहले तो महिला को लगा कि उसका फोन हैक हो गया है और किसी ने उससे शॉपिंग कर ली है।लेकिन इसके बाद लेव मेंगमेंग ने चिड़िया घर में लगे सीसीटीवी फुटेज चैक किए तो हैरान रह गई। वीडियो फुटेज में दिखा कि उसका मोबाइल फोन बंदर के हाथ में था तथा और वो ही स्क्रीन पर कुछ कर रहा था।

अब अगर आपके बैंक खाते में पैसा नहीं है और इसके बावजूद आप चेक जारी करते हैं तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि गुरुवार को संसद से एक ऐसा विधेयक पारित हुआ है जिसमें इस मामले में जुर्माने का प्रावधान है. इस बिल के तहत चेक बाउंस के आरोपी को इसकी राशि का 20 फीसदी हिस्सा अदालत में अंतरिम मुआवजे के तौर पर जमा कराना होगा.विधेयक में चेक बाउंस मामलों के दोषियों को 2 साल तक की सजा का प्रावधान है.
चेक बाउंस होने की स्थिति में चेक प्राप्तकर्ता को और अधिक राहत प्रदान करने वाला ‘परक्राम्य लिखत (संशोधन) विधेयक, 2017 (नेगोशियेबिल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट बिल) को आज राज्यसभा में चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी गई जबकि यह बिल लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है.
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि समय-समय पर संबंधित कानून में संशोधन होता रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसा होगा. उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि चेक बाउंस होने की स्थिति में आरोपी की तरफ से पहले ही चेक पर अंकित राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी.बिल में प्रावधान है कि अगर निचली अदालत में फैसला आरोपी के खिलाफ आता है और वह ऊपरी अदालत में अपील करता है तो उसे फिर से कुल राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी. मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस प्रावधान की वजह से चेक बाउंस के मामलों पर अंकुश लगेगा और अदालतों पर चेक बाउंस के मुकदमों का बोझ कम होगा.
बैंकों की साख का सवाल
वित्त राज्य मंत्री शुक्ल ने सदन को बताया कि मौजूदा समय में देश भर की निचली अदालतों में चेक बाउंस के करीब 16 लाख मुकदमे चल रहे हैं जबकि 32,000 मामले उच्च अदालतों तक गए हैं. इससे पहले विधेयक पेश करते हुए मंत्री ने कहा था कि चेक प्राप्तकर्ता को राहत देने के मकसद से इस विधेयक में पर्याप्त उपाय किये गये हैं. इससे चेक की विश्वसनीयता और साख बढ़ेगी.इससे पूर्व विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री सहित कई सदस्यों ने मौजूदा विधेयक को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें सजा के प्रावधान को 2 से बढ़ाकर 4 साल करने और अंतरिम मुआवजा की राशि को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत करने की मांग की ताकि चेक की वित्तीय साख को मजबूत किया जा सके और गलत मंशा से चेक जारी करने वालों पर रोक लगाई जा सके

वॉट्सऐप (WhatsApp) को लेकर यूज़र्स को एक बड़ी समस्या आ रही है. WABetaInfo पर पिछले कई दिनों से यूज़र्स लगातार इस बात को रिपोर्ट कर रहे हैं कि उन्हें वॉट्सऐप ने बैन कर दिया है. WAबीटाइन्फो के जांच-पड़ताल करने के बाद सामने आया कि वॉट्सऐप उन यूज़र्स को बैन कर रहा है कि जो कि ऐसे ग्रुप में ऐड हों, जिसका नाम संदेहजनक हो.
बताया गया कि सबसे पहले Mowe11 नाम के यूज़र ने रेडिट (Reddit) पर पोस्ट कर रिपोर्ट दी. बताया गया कि वह शख्स एक युनिवर्सिटी नाम के ग्रुप को ऐड था, उस ग्रुप के एक पार्टिसिपेंट (member) ने उसका नाम ‘child porn’ कर दिया था. इसकी वजह से ग्रुप के सारे मेंबर को वॉट्सऐप से बैन कर दिया गया.इसके अलावा रेडिट पर ही एक दूसरे यूज़र FranciscoAlfaro ने बताया कि वह अपने स्कूल के ग्रुप में ऐड है और हाल ही में जब वह सुबह उठा तो देखा कि ग्रुप के मेंबर्स (100 participant) बैन हो गए हैं.
एक दूसरी रिपोर्ट PiTiXX पर सामने आई, जहां यूज़र ने बताया कि वह वॉट्सऐप ग्रुप से बैन हो गया है, क्योंकि उसके दोस्त ने ग्रुप का सब्जेक्ट बदलकर संदेहजनक रख दिया था. इतना ही नहीं Laurato नाम के एक यूज़र ने WABetaInfo को रिपोर्ट किया उसे भी ग्रुप के नाम के वजह से बैन कर दिया गया है.WABetaInfo ने बताया कि जब इन यूज़र्स ने वॉट्सऐप को संपर्क किया तो उन्हें ऑटोमेटेड रिप्लाई मिला. उसमें लिखा है, उन्हें वॉट्सऐप की Terms of Services का उल्लघंन करने की वजह से बैन किया गया है और उन्हें दुबारा रिप्लाई नहीं किया जाएगा.
तोअगर ऐसे में कोई यूज़र गलती से भी बैन हो गया है तो वॉट्सऐप की तरफ से उसे कोई रिप्लाई नहीं आएगा. इसके बाद यूज़र को मजबूरन अपना फोन नंबर चेंज करना पड़ेगा. जानकारी के लिए बता दें कि बैन होने के बाद यूज़र की पूरी चैट हिस्ट्री डिलीट हो जाएगी

