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  • पत्रकार आपको हमेशा दूध का धुला चाहिए !

    पत्रकार आपको हमेशा दूध का धुला चाहिए !

    लव, वार और बाजार में सब कुछ जायज है! पहले पान मसाले की फैक्टरी खोलो. कैंसर के मरीज अपने आप पैदा हो जाएंगे. फिर उनके इलाज के लिए अस्पताल खोलो. मुनाफा ठीक ठाक चाहिए तो पान मसाला कंपनी के रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट विंग को नए नए प्रयोग की छूट दो. जरूरत पड़े तो ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्ट करो. जितने ज्यादा लोग खाएंगे, उतना मुनाफा बढ़ेगा. जितने ज्यादे फ्लेवर होंगे उतने ज्यादे कस्टमर होंगे. ज्यादा से ज्यादा लोग खाएंगे तो ज्यादा से ज्यादा लोग अस्पताल भी पहुंचेंगे. ज्यादा से ज्यादा दवाइयां भी बिकेंगी. ‘किस्म किस्म’ की सहूलियतें इजाद करो, अस्पताल में भी मरीज को बेहतर से बेहतर सहूलियतें दो. जब आप बेहतर सहूलियत दोगे. तभी न उसकी कीमत वसूलने के हकदार होगे, और तभी सरकारी अस्पतालों का खटारापन बेपर्दा होगा. न क्वालिटी पर बात करते वक्त कीमत की तुलना करना बेईमानी है. ऊंचे लोगों की पसंद ऊँची ही होती है.

    हां, महंगे इलाज का टेंशन भी नहीं देना है. अब इंश्योरेंस कंपनी खोल लो. लोगों को बताओ कि कैंसर से तनिक न घबराए. इत्मीनान से पान मसाला खाएं. इसके बाद अस्पताल पहुंचेगे तो इंश्योरेंस कंपनी संभाल लेगी. और मान लीजिए ख़ुदा न खास्ता कोई घटना दुर्घटना हो गई. तो भी परेशान न हो जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी का मुकम्मल इंतजाम है. दाह संस्कार से लेकर बेटी की शादी और बेटे की पढाई तक का पूरा इंतजाम है. कितनी वेल प्लान्ड है न एक कन्ज्यूमर की लाइफ. अब आप इत्मीनान से कन्ज्यूमर फ्रेंडली अखबार पढ़िए और चैनल भी देखिए. जानिए कि क्यों सैफ से शादी करना करीना के लिए आसान नहीं था. अरे रे रे…. बोर हो रहे हैं? तैमूर भी बहुत बोर हो रहा होगा इन दिनों. इसमें भी किसी न किसी का फायदा ही है.

    आइए अब टॉपिक चेंज करते हैं. वाकई आप बोर हो रहे होंगे. दूरदर्शन की खबरों से भारत में टीवी जर्नलिज्म की एंट्री होती है. अखबार या प्रिंट जर्नलिज्म की एक अपनी सीमा थी. सो उससे कुछ आगे की सोची गई. मगर तेवर और मिजाज अखबारी ही रहा. अर्थात फोकस खबरों पर ही रहा. सुंदर, सौम्य, शालीन चेहरों को खबरें पढ़ते सुनने का भी एक अपना आनंद था. मगर दूरदर्शन ठहरा सरकारी चैनल. उसकी अपनी सीमाएं थी. फिर वह सरकार से असहमत लोगों को कब तक रोक पाएगा. सही बात तो यही थी कि वह तब भी सरकारी भोंपू ही था.

    सो निजी चैनलों के जरिए वैरायटी का इंतजाम किया गया. इन्वेस्टर का धर्म ही है मुनाफा कमाना. यह उसकी नेचुरल च्वाइस है. आखिर कोई क्यों इन्वेस्ट करेगा? कोई तो लॉजिक होनी चाहिए? फिर चल निकला कारोबार. मगर अखबारी दुकानों को बगले झांकने की नौबत आ गई. फिर उन्होंने भी नए नए प्रयोग शुरू किए. दिल्ली, लखनऊ, पटना और भोपाल का अखबार वाराणसी, गोरखपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे महानगरों तक ग्राहक की तलाश में पहुंचा. बलिया जैसा नितांत पिछड़ा जिले का एडिशन पढ़ने के बाद तो वहां के लोगों के पांव जमीन पर नहीं थे. भरोसा होने लगा. अब बैरिया, सिकंदरपुर और रसड़ा जैसे दूरदराज के इलाकों में भी विकास की आंधी पहुंचने वाली है, बिल्कुल बुलेट ट्रेन वाली रफ्तार से. वहां के छुटभैया नेता भी बड़े इत्मीनान से मास्क बांट कर आज फोटो खिंचवा रहे है।

    लगता है लोकल को लेकर कुछ ज्यादा ही वोकल हो गया. आइए फिर फ्लेवर बदलते हैं. दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर पत्रकारिता के महानायक सुरेंद्र प्रताप सिंह का उपहार सिनेमा अग्निकांड वाला एपिसोड देख देश भाव विह्वल हो उठा. इन्वेस्टरों को टीवी जर्नलिज्म में नया स्कोप नजर आने लगा. नए नए चैनल आए. तर्क दिया गया कि जितने ज्यादे चैनल होंगे उतनी ज्यादे वैरायटी होगी. उतना ही ज्यादा लोकतंत्र मजबूत होगा. इतना बड़ा देश है. कोई इग्नोर नहीं फील करेगा. सबकी आवाज दिल्ली तक गूंजेगी. खबरें घटना स्थल से सीधे लाइव होने लगी. दर्शकों के मनोरंजन का पुख्ता इंतजाम हो गया. मगर मन को क्या कीजिएगा. वह विज्ञापन आपने देखा है या नहीं. जिसमें रीतिकालिन नायिका अदा के साथ कहती है, क्या करें, कंट्रोल नहीं होता. तो हां, मन की क्षुधा तो सुरसा की तरह बढ़ती ही जाती है.

    मार्केटिंग का एक अलग ही फंडा है. आप लगातार मेरी साड़ी से उसकी साड़ी सफेद कैसे कह कर डिटर्जेंट नहीं बेच सकते. बीच बीच में फ्लेवर चेंज करते रहना चाहिए. बताइए कि इसके लिए नींबू वाला डिटर्जेंट भी जरूरी है. बीच बीच में पूछते रहिए कि आपके टूथपेस्ट में नमक है या नहीं. इससे नए लोग जुड़ेंगे. प्लस पुराने कस्टमर भी कूल कूल चेंज फील करते रहेंगे.

    बातचीत के दौरान मेरे एक टीवी जर्नलिस्ट मित्र ने कभी बताया था कि लोग रेप की खबर पहले पढ़ते थे. फिर टीवी पर देखने सुनने लगे. टीवी वालों को टीआरपी बनाए रखनी थी. सो नाट्य रूपांतरण का प्रयोग शुरू हुआ. लोग बाग चाव से इंज्वॉय करने लगे. भूख बढाने वाला टॉनिक इतना कारगर रहा कि लोग सीधे रेप के सीन की हसरत पालने लगे. तकनीक सुलभ दौर में रेपिस्ट विधिवत वीडियो वायरल करने लगे. तारक मेहता का उल्टा चश्मा वाली टप्पू सेना ने तो टीवी की सुर्खियां बटोरने के लिए किडनैपिंग का भी विधिवत प्रयोग किया.

    किसी दौर में कलकत्ता मतलब द स्टेट्समैन हुआ करता था. हमारे मुहल्लों गलियों में लगे होर्डिंग्स बैनर के जरिए इस बात की बार बार तस्दीक की जाती थी कि आप कलकत्ता में रह रहे हैं तो स्टेट्समैन जरूर पढ़ते होंगे. बार बार एक ही बात रटाई जाएगी तो जाहिर है एक न एक दिन आप यह रट लेंगे कि कोरोना से बचने के लिए मास्क होना ही चाहिए, बाकी शरीर भले नंग धड़ंग रहे. क्योंकि प्रचार वाले ने यह तो बताया ही नहीं कि पूरे कपड़े पहनने के बाद मास्क भी पहनना है. जानकार बताते हैं कि टेलीग्राफ की लांचिंग से पहले विधिवत सर्वे करवाया गया. आईआईएम कलकत्ता के मैनेजमेंट गुरुओं ने आनंद बाजार समूह को यह मशविरा दिया कि भले आप बांग्ला के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार के पब्लिशर हैं, अंग्रेजी पाठकों के लिए कलकत्ता मतलब स्टेट्समैन है. इसिलिए इस तिलिस्म या एडिक्शन को तोड़ना ही सबसे बड़ी चुनौती है.

    यही वजह है कि द टेलीग्राफ की लांचिंग के वक्त टार्गेट रीडर गैर बांग्ला भाषी अंग्रेजीदा लोग थे. विशेष तौर पर बंगाल-बिहार (तब झारखंड नहीं था) का सीमावर्ती अंचल. क्योंकि कलकत्ता मोह को भेदना भी इतना आसान नहीं था. हालत तो यह है कि स्टेट्समैन ने बंगाल की सीमा के बाहर पैर पसारने की कोशिश की तो इसी ब्रांडिंग के चलते (ऐसी मेरी निजी राय है) वैसी कामयाबी नहीं मिली, जो कलकत्ता में वह चख चुका था. इसी ब्रांडिंग के चलते लोगों के मन में यह बात बैठा नहीं पाया कि दिल्ली का मतलब भी स्टेट्समैन. किसी दौर में पंजाब केसरी की तूती पंजाब में बोलती थी. अमर उजाला और जागरण ने चुनौती पेश की तो नेता स्टाइल में वहां के रीडर्स के बीच यही परसेप्शन बनाने की कोशिश की गई कि यूपी वाले भइया लोगों का अखबार है. आपको तो पता ही है कि सिर्फ इश्क ही नहीं, वार और बाजार में भी सब कुछ जायज है. आप अखबार या चैनल के लिए सिर्फ एक पाठक या दर्शक मात्र ही नहीं है, हंड्रेड परसेंट कन्ज्यूमर हैं.

    ऐसी ही मोनोपॉली राजस्थान में राजस्थान पत्रिका की हुआ करती थी और अविभाजित बिहार में हिंदुस्तान की. मगर इस तिलिस्म को तोड़ने के लिए प्रतिद्वंद्वियों ने घाट घाट का पानी पीया. इमैजिन कीजिए सेंध लगाने के लिए हाथी पर बैठकर जब माधुरी दीक्षित शहर में घूमी होंगी तो कितनी क्यूट लग रही होंगी? कैसे महीनों फ्री में अखबार पूरे के पूरे प्रदेश को पढ़वाया गया, ताकि आप एक खास फ्लेवर के एडिक्टटेड हो जाए. किस्म किस्म की स्कीमें चलाई गईं. फ्री में अखबार पढिए, बाइक या कार जीतिए. बहुत कूपन काट काट कर बटोरे होंगे आप भी. ऐसी भी भीड़ अखबारों के दफ्तर में पहुंचती थी कि फलां दिन वाला कूपन काट नहीं पाया था, कृपया उस दिन का पुराना एडिशन दे दीजिए. उस दौर में पत्रकार कूपन मैनेजर भी हुआ करते थे. ठीक वैसे ही जैसे आज शिक्षक क्वारंटीन सेंटरों में भी ड्यूटी बजा रहे हैं.

    तब मेरा पाला भी एक ऐसी ही मकान मालकिन से पड़ा था. चूंकि नौकरी चलाने के लिए शहर के सारे अखबारों पर नजर रखना मेरी जिम्मेदारी थी. सो सारे अखबार मेरे घर आते थे. देर रात घर लौटता तो जाहिर है देर तक सुबह सोता भी. मेरी मकान मालकिन मेरी इस मजबूरी का पूरा पूरा फायदा उठाती. वे ग्राउंड फ्लोर पर ही अखबार पर कब्जा कर लेतीं. जगने पर मैं अब उनसे मांगता कि कृपया जरा मेरा अखबार पढ़ने के लिए दे दीजिए. पता चलता सारे अखबारों के कूपन मैडम ने काट लिए. उन्हें यह मुगालता थी कि अखबार तो इसी का है. क्या करेगा कूपन. इसको तो फ्री में ही मिलता होगा. बाद में मैंने उन्हें जानकारी दी कि मैडम हीरे की फैक्टरी में नौकरी बजाने का यह मतलब कत्तई नहीं है कि तराशे गए हीरे मेरे ही हैं. उन अखबारों का मैं विधिवत भुगतान करता हूं. आपने कूपन काट लिया मुझे ऐतराज नहीं है. मगर अखबार में उस कूपन के पीछे वाली खबर भी कट जाती है. यह मेरे लिए चिंता का सबब है. इस पर उनका तर्क था कि खबरें तो सब रात को आप दफ्तर में पढ़ ही लेते होंगे. वैसे कसूर उनका नहीं था. विशेष तौर पर हिंदी पाठकों की यह परंपरा रही है कि बहुतेरे पाठक अखबार पड़ोसी के यहां ही पढ़ते हैं. या चाय वाले के यहां पढ़ते हैं. इस तरह लोकतंत्र बचाते हुए वे पड़ोसी के यहां ही पकौड़ी संग चाय की चुस्की भी ले लेते हैं. हैं न डबल फायदा. तो मेरी मकान मालकिन को भी किरायेदार पत्रकार रखने का फायदा मिलना ही चाहिए न.

    इतना तो आप भी जानते होंगे. कि फ्री में इस दुनिया में कुछ नहीं मिलता. बाजार में हर डील की कीमत चुकानी पड़ती है. हर फ्री में कुछ न कुछ लोचा होता है. एक बात और गांठ बांध लीजिए. कि अखबार या चैनल विज्ञापन के बूते ही जिंदा हैं. क्योंकि आपको खबरें फ्री में चाहिए. आप जिस कीमत में अखबार खरीदते हैं उसमें कायदे के पान मसाले का छोटा पाउच भी नहीं खरीदा जा सकता.

    बांग्ला में एक कहावत जतो दोष नंदो घोष. अर्थात मैंने तो कोई गलती की ही नहीं. जितनी गलतियां हुई नंदो घोष ने की है. स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में बहुत बारीक फर्क है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (स्वच्छंदता) के नाम पर आप सोशल साइटों पर जितना गंध मचाना चाहें, मचा लिजिए. अपने मन की भड़ांस मिटा लीजिए. आपको कूल बनाए रखने के लिए सोशल साइटों का पुख्ता इंतजाम कर दिया गया है. देखिए लोहिया को मत याद करने लगिएगा. अब वे आउटडेटेड हो चुके हैं. सड़कों पर ट्रैफिक बाधित करना गैरकानूनी है.

    सोशल साइट पर ठीक रहेगा. क्यों…. तो वहीं सुरक्षित बीवी बच्चों के साथ घर में बैठकर ट्वीटर पर ट्रेंड ट्रेंड खेल कर लोकतंत्र का नियमित पाठ जारी ऱखिए. बीच बीच में मीडिया को पानी पी पी कर कोसते रहिए. सारी समस्याओं की जड़ यह मीडिया ही है. हां, सोशल साइटों पर आपके द्वारा फैलाया गया यह दुर्गंध भी मार्केट ही तैयार कर रहा है. बल्कि यूं कह लीजिए फैलवाया जा रहा है. बस तय आपको करना है कि कहां आप कम्पलीट कम्फर्ट फील करते हैं. कौन सा फ्लेवर आपको जंच रहा है. सपोर्ट में या विरोध में. आपके सामने सिर्फ दो आप्शन है. आर या पार. कोई लाइफ लाइन नहीं है. आप ही न चाहते हैं. आपको भगत सिंह भी चाहिए. मगर किलकारी पड़ोसी के आंगन में गूंजनी चाहिए. सब कुछ आपकी ही शर्तेों पर कैसे संभव है. कुछ तो कीमत चुकानी ही पड़ेगी.

    देखिएगा, खरीद कर पान मसाला भले खा लें, पढ़ने के लिए पत्र, पत्रिकाएं और किताबें गलती से भी न खरीदें. यह विशुद्ध फिजुलखर्ची है. और जब भी गुस्सा आए पत्तलकार पत्तलकार जाप शुरू कर दें. आप 500/1000 रुपये पर अपना वोट बेच सकते हैं, डंडा झंडा ढो सकते हैं, किसी भी पॉलिटिकल पार्टी की रैली में हिस्सा ले सकते हैं. सरकार बदलते ही रातों राते पूरे प्रदेश की बेशकीमती लग्जरियस गाड़ियों के झंडे बदल सकते हैं. मगर पत्रकार आपको हमेशा दूध का धूला चाहिए. यह तो गणेश शंकर विद्यार्थी ही लिख गए हैं कि दवात में कलम का आगमन हुआ और कवि पैदा हुए, पीली पत्रकारिता का जन्म तो तभी हो गया था।

  • ब्लैक फंगस के इलाज में 1.5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंवानी पड़ी आंख….

    ब्लैक फंगस के इलाज में 1.5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंवानी पड़ी आंख….

    कोरोना के बाद ब्लैक फंगस भी महामारी का रूप ले चुकी है। देश के 25 राज्यों में फैली इस बीमारी ने भी अब कहर मचाना शुरू कर दिया है। इसी बीच महाराष्ट्र के नागपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नागपुर के एक व्यक्ति को कोरोना होने के कुछ महीने बाद म्यूकरमाइकोसिस बीमारी हो गई और उसके परिवार ने इलाज के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन, दुर्भाग्य की बात यह है कि इतना पैसा खर्च करने के बाद भी उस व्यक्ति को अपनी एक आंख हमेशा के लिए गंवानी पड़ी।


    नागपुर के नवीन पॉल जीएसटी विभाग में काम करते हैं। कोरोना के बाद उन्हें म्यूकरमाइकोसिस बीमारी हो गई और इसके इलाज के लिए उन्हें लगातार 6 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। जिसके लिए उन्हें 1 करोड़ 48 लाख रुपये खर्च करने पड़े।
    नवीन पॉल को पिछले कुछ महीनों पहले कोरोना हो गया था जिससे वो ठीक भी हो गए लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें आंखों में दिक्कत होने लगी और दांत हिलने लगे। जब उन्होंने नागपुर के एक डॉक्टर से इस बारे में पूछताछ की तो उन्हें आगे के इलाज के लिए हैदराबाद जाने की सलाह दी गई लेकिन हैदराबाद में कोई खास इलाज नहीं हुआ तो वे मुंबई चले गए।


    मुंबई में एक महीने तक उनका इलाज चला। उस इलाज से भी उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिला तो पॉल इलाज के लिए नागपुर वापस लौट आए। यहीं पर उनका इलाज किया गया और डॉक्टर ने उनकी एक आंख निकालने का फैसला किया। परिजनों की सहमति के बाद पॉल की एक आंख निकाल दी गई।
    इन सभी अस्पतालों में इलाज के लिए पॉल को 1 करोड़ 48 लाख रुपये का बिल देना पड़ा। नवीन की पत्नी रेलवे में काम करती हैं इसलिए इन सभी उपचारों के लिए रेल विभाग ने उनकी काफी मदद की। नवीन की पत्नी संगीता ने अपने पति को बचाने के लिए बहुत प्रयास किए। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उनके पति के इलाज के लिए खर्च बढ़ती जा रही थी, उनके रिश्तेदारों ने भी उनकी बहुत मदद की। उनकी जान बचाने के लिए हर कोई मदद के लिए आगे आ रहा था और नागपुर में डॉक्टरों ने भी बहुत प्रयास किया और नवीन की जान बच गई। पॉल का कहना है कि रेलवे एवं उनके दोस्त एवं परिवार ने उनकी बहुत मदद की।

  • तहसीलदार ने झट से छू लिए नए कलेक्टर के पांव, IAS अफसर ने भी कह दिया “खुश रहो”

    तहसीलदार ने झट से छू लिए नए कलेक्टर के पांव, IAS अफसर ने भी कह दिया “खुश रहो”

    छत्तीसगढ़ में एक अधिकारी की वायरल फोटो सुर्खियों में बनी हुई है । वायरल फोटो में अधिकारी अपने नए कलेक्टर का पैर छूकर स्वागत कर रहे हैं, जबकि स्वागत में पूरा जिला प्रशासन पुष्प गुच्छ के साथ खड़ा नजर आ रहा है । बुधवार की शाम से फोटो जमकर वायरल हो रही है, वायरल फोटो अब लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है ।

    दरअसल, ये पूरा मामला कोरिया जिला कलेक्टर कार्यालय का है, जहां बुधवार को पुराने कलेक्टर SN राठौर को विदाई दी जा रही थी और नए कलेक्टर श्याम धावड़े को पदभार ग्रहण करना था।

    बड़ा भाई मानता हूं

    तहसीलदार मनोज पैकरा ने बताया कि श्याम धावड़े जी के साथ हम पहले भी काम कर चुके हैं। इसलिए मैं उनको अच्छी तरह जानता हूं। मैं उन्हें बड़ा भाई मानता हूं। इसलिए मैंने उनका पैर छू लिया। मनोज ने बताया कि हमने गरियाबंद जिले में साथ काम किया है, इसलिए उनका पैर छू लिया।


    कुछ दिन पहले हुई थी प्रशासनिक सर्जरी


    राज्य सरकार ने पिछले दिनों बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की थी। जिसमें कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यहां से वहां किए गए थे। जिसके चलते ही एसएन राठौर को मंत्रालय भेजा गया है और श्याम धावड़े जिले के नए कलेक्टर बनाए गए हैं। धावड़े ने बुधवार को कोरिया जिले के 16वें कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया है। धावड़े इससे पहले बलरामपुर जिले के कलेक्टर थे।

  • हनी ने अपने ट्रैप में लिया एक डॉक्टर को, न्यूड वीडियो कॉलिंग कर लिया झांसे में….

    हनी ने अपने ट्रैप में लिया एक डॉक्टर को, न्यूड वीडियो कॉलिंग कर लिया झांसे में….

    एक हनी ने सोशल मीडिया में दोस्ती कर इस बार एक डॉक्टर को अपने ट्रैप में लिया है. ये डॉक्टर न्यूड वीडियो कॉलिंग के माध्यम से उसके झांसे में आ गया और अब पूरा मामला पुलिस तक पहुंच गया है।

    सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद धोखाधड़ी करने के मामलों में काफी तेजी से इजाफा हो रहा है. ऐसे ही एक केस में शातिरों ने डॉक्टर को फंसा लिया. पहले फेसबुक पर लड़की ने दोस्ती की, फिर हनी ने वॉट्सऐप नंबर लेकर सेक्सी कॉल करने की बात करने लगी. सेक्सी कॉल की बात पर डॉक्टर झांसे में आ गए और उसके बाद ब्लैकमेलिंग के जाल में फंस गए।

    रात करीब 11:00 बजे फेसबुक पर लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट आया. रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद युवती ने वॉट्सऐप नंबर मांगा दोनों में बातचीत होती है. लड़की सेक्सी वीडियो कॉल का झांसा देती है. वह वीडियो कॉल कर न्यूड होने लगती है. डॉक्टर भी न्यूड हो जाते हैं. तुरंत कॉल कट जाती है. फिर शुरू होती है ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली. न्यूड फोटो सोशल मीडिया पर वायरल की धमकी देकर डॉक्टर से पैसे ऐंठे जाते हैं. जब ब्लैकमेलिंग का सिलसिला नहीं थमा तो डॉक्टर ने सेंट्रल दिल्ली के आईपी एस्टेट थाने में शिकायत दी. पुलिस ने मंडे को धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. बता दें कि उक्त डॉक्टर यमुनापार में रहते है।

    जानकारी के मुताबिक उक्त डॉक्टर ने अब तक 81 हजार रुपए इन ठगों को दे दिए है इसके बाद भी जब ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई तो उन्होंने पुलिस से मदद मांगी है।

  • सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों, मरीजों का बड़ा सवाल…

    सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों, मरीजों का बड़ा सवाल…

    रायपुर। लोग समय देखकर बीमार नही होते, परेशानी होने पर ही इलाज कराने पहुंचते है. ऐसे में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों किया जाता है. मरीजों को इस निश्चित समय पर क्यों बुलाते हैं. यह एक गंभीर सवाल है. सरकारी अस्पताल से वापस लौटने वाले लोग कहते हैं कि 12 बजे के बाद ओपीडी बंद हो जाती है. हॉस्पिटल जाने के बाद कहा जाता है कि कल एक बजे के पहले आना. आखिर दिन भर ओपीडी क्यों नहीं होती. यह हाल राज्य के सभी सरकारी हॉस्पिटलों का है. दोपहर के बाद सीनियर डॉक्टर नहीं मिलते.

    मरीजों की गुहा

    जिला अस्पताल से भटक कर निराश वापस लौटने वाली सड्डू निवासी लक्ष्मी साहू ने कहा कि भगवान भरोसे अस्पताल चल रहा है. दोपहर पहुंचे तो डॉक्टर नहीं होते, शाम में तो कोई नहीं रहता. ये कैसी व्यवस्था है. बस दिखाने का बड़ा अस्पताल है।

    वहीं टाटीबंध से इलाज के लिए मेकाहारा पहुंचे जगू यादव ने कहा कि दोपहर के बाद अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं होते. कोई भी रोग हो एक डॉक्टर के पास भेज देते हैं. स्कीन समस्या दिखाने आया था लेकिन कल आने के लिए कहा गया है. मैं तो ठीक कल भी आ जाउंगा लेकिन बीमार लोगों के साथ यही किया जाता है ये खतरनाक है।

    ओपीडी नहीं शाम में एमरजेंसी सेवा

    जिला अस्पताल पंडरी के अधीक्षक आरके गुप्ता ने कहा कि हमारे यहां सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी होता है. सभी डॉक्टर मौजूद रहते हैं. पहले सुबह आठ बजे से दोपहर 2 बजे का होता था जिसे शासन के आदेशानुसार सुबह 9 बजे से 1 बजे किया गया है.

    शासन के आदेश का पालन

    मेकाहारा के अधीक्षक डॉ विनीत जैन ने कहा कि सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक समय निर्धारित है. ओपीडी में लगभग 14 मरीज पहुंच रहे हैं. शाम को कोई ओपीडी सेवा नहीं होता है. एमरजेंसी सेवा चालू रहता है. शासन का आदेश है क्या कर सकते हैं।

    क्या कहते हैं स्वास्थ्य के जानकार

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में लगभग 90 प्रतिशत डॉक्टर बहुत लेट पहुंचते हैं और एक दो घंटा जल्दी निकल जाते हैं. ओपीडी़ का समय शासन द्वारा निर्धारित होता है. इसके समय बढ़ाने की जरूरत है, नहीं तो गरीब मरीज भी प्रायवेट हॉस्पिटल में मोटी रकम देकर इलाज कराने को मजबूर होंगे. ऐसे में घर का जमीन बेचते हैं. घर के सामान जेवर बेचते हैं. जमीन जायदाद नहीं होने पर कर्ज में दब जाते हैं, ये राज्य के लिए गंभीर समस्या है और इसमें गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

  • सड़क खराबी के कारण हुईं दुर्घटना तो एनएच पर दर्ज कराएं एफआईआर- कलेक्टर….

    सड़क खराबी के कारण हुईं दुर्घटना तो एनएच पर दर्ज कराएं एफआईआर- कलेक्टर….

    अंबिकापुर। नेशनल हाइवे की खराबी के कारण अगर दुर्घटना होती है तो सीधे अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं. यह बात सरगुजा कलेक्टर संजीव कुमार झा ने की है. दरअसल, कलेक्टर ने मंगलवार को साप्ताहिक समय सीमा की ऑनलाईंन बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने अम्बिकापुर-शिवनगर एनएच में लखनपुर के पास जारी निर्माण कार्य की धीमी प्रगति तथा अब तक पैच रिपेरिंग कार्य पूरा नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की।

    कलेक्टर संजीव कुमार झा ने कहा कि एनएच निर्माण कार्य में ठेकेदार की लेट लतीफी कार्य और एनएच के अधिकारियों के लापरवाही से प्रगति नहीं आ रही है. सड़क खराब होने के कारण उदयपुर के पास यात्री बस की भी दुर्घटना हुई है. इसकी जिम्मेदारी एनएच के अधिकारियों की है. उन्होंने आरटीओ को इस दुर्घटना के लिए खुद प्रार्थी बनकर एनएच के अधिकारियों पर नामजद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने एनएच के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देशित किया कि लखनपुर में एनएच निर्माण कार्य बरसात से पहले पूरा कराये. सड़क के किनारे नाली का निर्माण भी कराये. यदि पक्का नाली तत्काल नहीं बन सकता तो कच्चा नाली ही बनाए, ताकि बारिश का पानी निकल जाए और कही पर जल भराव की समस्या न हो।

    उन्होंने सांड़बार से उदयपुर तक पैच रिपैरिंग में ठेकेदार द्वारा लेट-लतीफी करने पर एनएच के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि शीघ्र पैच रिपेरिंग पूरा कराये अन्यथा सख्त कार्यवाही के लिए तैयार रहे. उन्होंने एनएच के ठेकेदार को कार्यालय में शीघ्र हाजिर करने के निर्देश एनएच के अधिकारियों को दिए।

  • हाईकोर्ट द्वारा टूलकिट मामले में डॉ रमन सिंह और संबित पात्रा की याचिका पर सुनवाई पूरी….

    हाईकोर्ट द्वारा टूलकिट मामले में डॉ रमन सिंह और संबित पात्रा की याचिका पर सुनवाई पूरी….

    रायपुर। टूलकिट मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट में डॉ रमन सिंह और संबित पात्रा की याचिका पर बहस पूरी हो गई है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।

    बता दें कि टूलकिट मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने याचिका दाखिल की थी।

    इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट जनरल सतीशचंद्र वर्मा और डॉ रमन और संबित पात्रा की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और वकील बर्मन ने इस मामले में पैरवी की है।

  • रिश्वत लेते फंसे 3 पटवारी और एक जनपद CEO,सचिव की शिकायत पर एन्टी करप्शन ब्यूरो ने की कार्रवाई….

    रिश्वत लेते फंसे 3 पटवारी और एक जनपद CEO,सचिव की शिकायत पर एन्टी करप्शन ब्यूरो ने की कार्रवाई….

    बलौदाबाजार जिला स्थित बिलाईगढ़ जनपद पंचायत के सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। टीम ने सीईओ को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत सचिव की शिकायत पर हुई है।

    जानकारी के अनुसार, बिलाईगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जमगहन के सचिव राजेन्द्र कुमार यदु ने एसीबी से शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत भवन के बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए स्वीकृत की गई राशि के आहरण के एवज में जनपद पंचायत के सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ 20 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं, इसी शिकायत के आधार पर एसीबी की टीम ने सुनियोजित तरीके से आज कार्रवाई की, जिसमें सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ के 20 हजार रूपए रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की खबर है। एसीबी मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

    ईओडब्ल्यू/एसीबी के निदेशक आरिफ एच. शेख के निर्देशन एवं पंकज चंद्रा, पुलिस अधीक्षक, ईओडब्ल्यू/एसीबी के नेतृत्व एवं अमृता सोरी ध्रुव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी के हमराह में एसीबी यूनिट रायपुर, जगदलपुर एवं अंबिकापुर की टीम ने ये कार्रवाई की है।

    ये है तीन रिश्वतखोर पटवारी

    एक प्रार्थी ने शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 13, उंगारपाल, भनपुरी, जिला बस्तर द्वारा प्रार्थी से नामांतरण करवाने के एवज में 8000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है. शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की जगदलपुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्रवाई कर आरोपी मुकेश कुमार बिसाई, उम्र 27 वर्ष, पटवारी, उंगारपाल, भनपुरी, जिला बस्तर को उसके कार्यालय से 8000 रू. नगद का रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।


    वहीं एक अन्य प्रार्थी ने एसीबी में शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 26, भेसकी, रा.नि.म. बरियों, तहसील राजपुर, जिला बलरामपुर द्वारा प्रार्थी से बी-1, नक्शा, खसरा की नकल देने के एवज में 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है.  शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की अंबिकापुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्रवाई कर आरोपी अमित गुप्ता, उम्र 30 वर्ष, पटवारी, हल्का नं. 26, भेसकी, रा.नि.म. बरियों, तहसील राजपुर, जिला बलरामपुर को आम जगह से 40,000 रू. नगद का पहला किश्त रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।


    इसके अलावा एक अन्य प्रार्थी ने एसीबी में शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 22,23, ग्राम मानपुर, तहसील सहसपुर लोहारा,  जिला कवर्धा द्वारा प्रार्थी से ऋण पुस्तिका बनाकर देने के एवज में 11,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है. शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की रायपुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्यवाही कर आरोपी गजेन्द्र चंद्रवंशी, उम्र 37 वर्ष, पटवारी, हल्का नं. 22,23, सहसपुर, लोहारा, जिला कवर्धा को उनके कार्यालय में 11,000 रू. नगद रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।
     

  • रिश्वत लेते फंसे 3 पटवारी और एक जनपद CEO,सचिव की शिकायत पर एन्टी करप्शन ब्यूरो ने की कार्रवाई….

    रिश्वत लेते फंसे 3 पटवारी और एक जनपद CEO,सचिव की शिकायत पर एन्टी करप्शन ब्यूरो ने की कार्रवाई….

    बलौदाबाजार जिला स्थित बिलाईगढ़ जनपद पंचायत के सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। टीम ने सीईओ को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत सचिव की शिकायत पर हुई है।

    जानकारी के अनुसार, बिलाईगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जमगहन के सचिव राजेन्द्र कुमार यदु ने एसीबी से शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत भवन के बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए स्वीकृत की गई राशि के आहरण के एवज में जनपद पंचायत के सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ 20 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं, इसी शिकायत के आधार पर एसीबी की टीम ने सुनियोजित तरीके से आज कार्रवाई की, जिसमें सीईओ कुलेश्वर गायकवाड़ के 20 हजार रूपए रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की खबर है। एसीबी मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

    ईओडब्ल्यू/एसीबी के निदेशक आरिफ एच. शेख के निर्देशन एवं पंकज चंद्रा, पुलिस अधीक्षक, ईओडब्ल्यू/एसीबी के नेतृत्व एवं अमृता सोरी ध्रुव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी के हमराह में एसीबी यूनिट रायपुर, जगदलपुर एवं अंबिकापुर की टीम ने ये कार्रवाई की है।

    ये है तीन रिश्वतखोर पटवारी

    एक प्रार्थी ने शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 13, उंगारपाल, भनपुरी, जिला बस्तर द्वारा प्रार्थी से नामांतरण करवाने के एवज में 8000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है. शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की जगदलपुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्रवाई कर आरोपी मुकेश कुमार बिसाई, उम्र 27 वर्ष, पटवारी, उंगारपाल, भनपुरी, जिला बस्तर को उसके कार्यालय से 8000 रू. नगद का रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।


    वहीं एक अन्य प्रार्थी ने एसीबी में शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 26, भेसकी, रा.नि.म. बरियों, तहसील राजपुर, जिला बलरामपुर द्वारा प्रार्थी से बी-1, नक्शा, खसरा की नकल देने के एवज में 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है.  शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की अंबिकापुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्रवाई कर आरोपी अमित गुप्ता, उम्र 30 वर्ष, पटवारी, हल्का नं. 26, भेसकी, रा.नि.म. बरियों, तहसील राजपुर, जिला बलरामपुर को आम जगह से 40,000 रू. नगद का पहला किश्त रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।


    इसके अलावा एक अन्य प्रार्थी ने एसीबी में शिकायत की थी कि पटवारी, हल्का नं. 22,23, ग्राम मानपुर, तहसील सहसपुर लोहारा,  जिला कवर्धा द्वारा प्रार्थी से ऋण पुस्तिका बनाकर देने के एवज में 11,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है. शिकायत का सत्यापन कर एसीबी की रायपुर यूनिट द्वारा आज ट्रेप कार्यवाही कर आरोपी गजेन्द्र चंद्रवंशी, उम्र 37 वर्ष, पटवारी, हल्का नं. 22,23, सहसपुर, लोहारा, जिला कवर्धा को उनके कार्यालय में 11,000 रू. नगद रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।
     

  • रायपुर से चलने वाली इन ट्रेनों का परिचालन 30 जून तक रद्द…

    रायपुर से चलने वाली इन ट्रेनों का परिचालन 30 जून तक रद्द…

    रायपुर। कोविड-19 के सेकेंड वेव के कारण कई ट्रेनों को पर्याप्त संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं. वहीं कोरोना संक्रमण के बीच भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते ट्रेनों के फेरों में कटौती कर रहा है. रेलवे ने अब कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसकी रोकथाम के मद्देनजर रायपुर से होकर चलने वाली मेमू /पैसेंजर स्पेशल ट्रेनों का परिचालन को 30 जून तक रद्द कर दिया है।

    बता दें कि रायपुर-डोंगरगढ़-बिलासपुर एवं छिंदवाड़ा-इतवारी, झारसुगुड़ा-गोंदिया के मध्य चलने वाली 4 जोड़ी मेमू/ पैसेंजर स्पेशल ट्रेनों का परिचालन रद्द किया गया है।

    देखिए, सूची
    (1) 08119 इतवारी-छिंदवाड़ा, दैनिक पैसेंजर स्पेशल 3 जून से 30 जून 2021 तक रद्द रहेगी.
    (2) 08120 छिंदवाड़ा-इतवारी, दैनिक पैसेंजर स्पेशल 3 जून से 30 जून 2021 तक रद्द रहेगी.
    (3)08705रायपुर-डोंगरगढ़-दैनिक मेमू स्पेशल 03 से 30 जून तक रद्द रहेगी.
    (4) 08706डोंगरगढ़-बिलासपुर दैनिक मेमू स्पेशल 03 से 30 जून तक रद्द रहेगी.
    (5) 08709 रायपुर-डोंगरगढ़-दैनिक मेमू स्पेशल 3 जून से 29 जून 2021 तक रद्द रहेगी.
    (6)08710 डोंगरगढ़-रायपुर दैनिक मेमू स्पेशल 04 जून से 30 जून 2021 तक रद्द रहेगी.
    (7) 08861गोंदिया-झारसुगुड़ा, मेमू स्पेशल दिनांक 3 से 29 जून, 2021 तक इस गाड़ी का परिचालन रद्द रहेगी.
    (8) 08862 झारसुगुड़ा-गोंदिया, मेमू स्पेशल दिनांक 4 से 30 जून, 2021 तक इस गाड़ी का परिचालन रद्द रहेगी.
    इसके अलावा रेलवे ने अब मुंबई सेंट्रल और अहमदाबाद के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस का संचालन एक महीने के लिए बंद कर दिया है. इसकी जानकारी रेलवे ने आधिकारिक ट्वीट के जरिए की है.

    रेलवे ने ट्वीट के जरिए जानकारी दी है कि महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना महामारी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए IRCTC के अनुरोध पर अहमदाबाद व मुंबई सेंट्रल के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 82901/82902 अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल तेजस एक्सप्रेस को 30 जून 2021 तक की अवधि के लिए निरस्त किया गया है।

    डीआरएम अहमदाबाद ने ट्वीट करते हुए लिखा- महाराष्ट्र व गुजरात में कोरोना महामारी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आईआरसीटीसी के अनुरोध पर अहमदाबाद व मुंबई सेंट्रल के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 82901/82902 अहमदाबाद – मुंबई सेंट्रल तेजस एक्सप्रेस को 30 जून 2021 तक की अवधि के लिए निरस्त किया गया है।