Blog
-

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड मामले की राज्य में चल रही जांच पर रोक, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई, सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा…
रायपुर- छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित कथित सेक्स सीडी कांड मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी है. गौरतलब है कि सीबीआई ने इस मामले की जांच राज्य से बाहर किए जाने की मांग को लेकर याचिका लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है. सीबीआई ने 29 सितंबर को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच में यह अर्जी लगाई थी सेक्स सीडी कांड मामले की जांच के दौरान मामले के अहम किरदार रहे रिंकू खनूजा की खुदकुशी के बाद से ही सीबीआई की जांच प्रभावित हुई थी. सरकार बदलने के बाद से ही यह चर्चा थी की सीबीआई इस मामले को राज्य के बाहर ले जाने की कवायद में जुटी हुई है. सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाने के बाद यह तय हो गया था कि इस मामले में बड़ा डेवलपमेंट आ सकता है. -

केंद्रीय गृह सचिव के छत्तीसगढ़ दौरे को गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने बताया सामान्य प्रक्रिया…
रायपुर। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के छत्तीसगढ़ दौरे को गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सामान्य प्रक्रिया बताया है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव आते हैं बैठक लेते हैं. हमारे अधिकारी भी केंद्र सरकार के पास जाकर अपनी बात रखते हैं. नक्सल समस्या के निदान के लिए सामान्य प्रक्रिया है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच पूरी तरह से समन्वय है. गृहमंत्री ने यह बयान माना स्थित चौथी बटालियन में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर दिया है। नक्सल खात्मे पर रोडमैप होगा तैयारबता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या के खात्मे के लिए नए सिरे से रोडमैप तैयार किया जाएगा. केन्द्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के नेतृत्व में इसके लिए प्लान बनाया जाएगा. केन्द्रीय गृह सचिव भल्ला दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. वे 23 अक्टूबर की सुबह रायपुर पहुंचेंगे. इसके बाद प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों की स्थिति व विकास कार्यों की वो समीक्षा करेंगे. फिर नक्सल समस्या के खात्मे को लेकर चर्चा की जा सकती है.केंद्र सरकार को सौपेंगे रिपोर्टकेन्द्रीय गृह सचिव के साथ पुलिस अफसरों की बैठक मंत्रालय में होगी. बैठक से पहले अफसरों द्वारा नक्सल हिंसा व प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों का डाटा तैयार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में इस बैठक की रिपोर्ट केन्द्रीय गृह सचिव केन्द्र सरकार को देंगे. इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी. -

मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल और विधायकों के नए आवास का भूमिपूजन, नया रायपुर में होगा निर्माण
रायपुर। मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल और विधायकों के नए आवास के लिए धनतेरस को नया रायपुर में भूमि पूजन किया जाएगा. सीएम भूपेश बघेल ने नए आवास को लेकर कहा कि जब तक राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्री वहां नहीं रहेंगे तब तक नया रायपुर नहीं बसेगा
उन्होंने कहा कि 6000 करोड़ की राशि वहां खर्च हो चुकी है इसलिए नवा रायपुर में बसाहट जरूरी है. आपको बता दें नया रायपुर के सेक्टर 19 में सीएम हाउस, राजभवन के साथ ही मंत्री, विधायकों औऱ उच्च अधिकारियों के लिए बंगले बनाए जाएंगे. पीडब्ल्यूडी ने निर्माण के लिए 531 करोड़ का टेंडर जारी किया था. भूमिपूजन के बाद निर्माण कार्य शुरु कर दिये जाएंगे.
-

एक बार फिर छत्तीसगढ़ पुलिस को शर्मसार कर देने वाला कारनामा…
एक बार फिर छत्तीसगढ़ पुलिस को शर्मसार कर देने वाला कारनामा, युवती से दुष्कर्म करने वाला टीआई लाइन अटैच, सवाल… क्या पुलिस विभाग पे सरकार की पकड़ नही है???
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग का चेहरा सामने आया है, मामला दुष्कर्म का है। दुष्कर्म के आरोपी पत्थलगांव थाना प्रभारी ओमप्रकाश ध्रुव के खिलाफ DGP के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन अटैच कर दिया है। पुलिस अधीक्षक जशपुर ने मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह कार्रवाई की है।
मामला ये है:-
एक युवती ने डीजीपी डीएम अवस्थी के सामने न्याय की गुहार लगाते हुए उन्हें आवेदन सौंपा था। जिसमें उसने टीआई ओम प्रकाश ध्रुव केे खिलाफ आरोप लगाया था कि शादी का झांसा देकर दो साल से उसका लगातार शारीरिक शोषण कर रहा। इस दौरान जब युवती गर्भवती हुई तो उसका गर्भपात करवाया था। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया था कि टीआई उसे धमकी देने के साथ ही उस पर समझौता करने का दबाव बना रहा है।मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी डीएम अवस्थी ने युवती को भरोसा दिलाया था कि आरोपी टीआई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में डीजीपी के आदेश के बाद एसपी जशपुर ने इसकी जांच का जिम्मा एएसपी उजमा खातून को दिया था। एएसपी ने मामले की जांच करने के बाद इसकी रिपोर्ट पर एसपी शंकर लाल बघेल को सौंप दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने टीआई के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे लाइन अटैच कर दिया है।
इस पूरे मामले में एसपी शंकर लाल बघेल ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। हर सवाल के जवाब में वे सिर्फ यही कहते रहे कि जांच रिपोर्ट उन्होंने रायगढ़ भेज दिया है। हालांकि उन्होंने टीआई को लाइन अटैच किये जाने की पुष्टि जरुर की है।लेकिन क्या लाइन अटैच कर देने से युवती को इंसाफ मिल गया सवाल ये भी उठता है प्रदेश पुलिस के मुखिया DGP डी एम अवस्थी पुलिस अधिकारियों को बार बार निर्देशित करते रहते है DGP के साथ साथ प्रदेश के गृहमंत्री भी पुलिस विभाग को मानवता की पाठ पढ़ाते रहते है लेकिन ठीक उसके विपरीत पुलिस विभाग कार्य कर रहा है इससे कही न कही सरकार पर सवाल खड़े होते है क्या पुलिस विभाग उनके पकड़ से बाहर है।
-

निलंबित IPS मुकेश गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, बेटियों का फोन टेप कराने पर दाखिल किया रिट पिटीशन, मामले की सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी!
रायपुर। निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए छत्तीसगढ़ में चल रही जांच पर अंतरिम रोक लगाई थी. अब एक बार फिर मुकेश गुप्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. इस बार मामला बेटियों के फोन टेप कराए जाने से जुड़ा है. गुप्ता की ओर से दाखिल रिट पिटिशन में कहा गया है कि अवैध तरीके से छत्तीसगढ़ पुलिस उनकी बेटियों का फोन टेप कर रही है. मामले की सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी. इधर सूबे में इस बात को लेकर हड़कंप मच गया है कि पुलिस महकमे से आखिर कैसे सूचनाएं लीक हो रही हैं? पुलिस महकमे के तमाम आला अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक हाल ही में छह अक्टूबर को रायपुर पुलिस के लेटर क्रमांक IGP/SC/P-5829C के जरिए निलंबित आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता की बेटियों के फोन टेप किए जाने के आदेश जारी किए थे और इस दिन ही गुप्ता की बेटी ने दिल्ली के मालवीय नगर थाना में अवैध तरीके से फोन टेप किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. मुकेश गुप्ता की बेटी देवयानी गुप्ता और मुक्ता गुप्ता ने अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई है.हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीन अलग-अलग मामलों में गुप्ता के खिलाफ चल रही जांच पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई थी. जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस एम आर शाह की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था. गौरतलब है कि मुकेश गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल करते हुए मांग की थी कि छत्तीसगढ़ में उनके खिलाफ चल रही जांच, राज्य के बाहर सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए. उनकी ओर से दलील दी गई थी कि उनके विरूद्ध दर्ज सभी मामले प्रायोजित हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था. मुकेश गुप्ता के खिलाफ अवैध तरीके से फोन टेपिंग कराए जाने के साथ-साथ साडा प्लांट आबंटन में गड़बड़ी और मिक्की मेहता की मौत मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. -

अजय यादव को रायपुर एसएसपी का प्रभार
रायपुर। राजधानी समेत रायपुर जिले की कमान अब डीआईजी अजय यादव के पास होगी। अजय यादव अभी पीएचक्यू में पदस्थ है।
आरिफ शेख के दौरे में जाने से दिया गया उनका प्रभार
एसएसपी आरिफ शेख विदेश दौरे पर गए हैं, जानकारी के मुताबिक आरिफ शेख यूएसए के दौरे पर गए हैं,और उनका दौरा करीब 12 दिनों का रहेगा, ऐसे में उनका चार्ज आईपीएस अजय यादव को दिया गया है।
बता दें कि सामने दीपावली का त्यौहार है, जो 12 अक्टूबर को है। इस दौरान कानून व्यवस्था को लेकर अहम जिम्मेदारी पुलिस के पास रहती है, लोग त्योहार में अधिक खरीदारी करते हैं, इस दौरान शहर में ट्रैफिक बढ़ जाती है, लूट की वारदात भी बढ़ा जाती है, साथ शांति व्यवस्था बनाए रखना अहम जिम्मेदारी का काम होता है, जिसके लिए राज्य सरकार ने अजय यादव पर भरोसा जताया है।
-

शख्स ने बाइक की नंबर प्लेट पर लिखा- ‘आई त लिखाई’, पुलिस ने कहा- ‘जब लिखाई तब थाने से जाई’
पुलिस ने जब बाइक सवार से बाइक के पेपर मांगे तो उसके पास बाइक का कोई पेपर मौजूद नहीं था। पुलिस द्वारा पूछने पर कि यह नंबर प्लेट पर क्या लिखवाया है? उसने कहा कि अभी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला।
वाराणसी: नए मोटर व्हिकल एक्ट में ज्यादा जुर्माना के प्रावधान के बाद से जनता ट्रेफिक नियमों को लेकर और भी ज्यादा सतर्क हो गई है। बावजूद इसके अभी भी काफी लोग ट्रेफिक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप अपनी हंसी शायद ही रोक पाएं।
दरअसल वाराणसी में पुलिस ने एक बुलेट बाइक सवार को रोका, जिसकी नंबर प्लेट पर लिखा था ‘आई त लिखाई’ मतलब जब नंबर आएगा तब लिखवा लेंगे। इसपर पुलिस शख्स और उसकी बाइक को थाने में ले गई और कहा- ‘ठीक हो जब नंबर लिखाई तब थाने से जाई’ मतलब जबतक बाइक की प्लेट पर नंबर नहीं लिखा जाएगा थाने से नहीं जाने दिया जाएगा. बता दें कि वाराणसी में आमतौर पर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, ये भाषा भोजपुरी है।
बता दें कि वाराणसी के एसएसपी के निर्देश पर शहर भर में सुरक्षा के मद्देनज़र वाहनों की कड़ी चेकिंग का अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने जब बाइक सवार से बाइक के पेपर मांगे तो उसके पास बाइक का कोई पेपर मौजूद नहीं था। पुलिस द्वारा पूछने पर कि यह नंबर प्लेट पर क्या लिखवाया है? उसने कहा कि अभी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला। इसलिए यह लिखवाया है, इसके बाद पुलिस ने शख्स की बाइक को जब्त कर लिया।
-

सीडी कांड की सुनवाई छत्तीसगढ़ से बाहर किसी कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए CBI ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल मचाने वाले पूर्व मंत्री राजेश मूणत के कथित अश्लील सीडी कांड मामले में एक नया मोड़ आ गया है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ से बाहर किसी दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए याचिका लगाई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच में यह अर्जी दी गई है। इस महीने की 21 तारीख को पहली सुनवाई होनी है। सीआरपीसी की धारा 406 के तहत सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया है, इस पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का अधिकार है। इसमें सुप्रीम कोर्ट प्रकरण को एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट या हाईकोर्ट के अधीन किसी दूसरे कोर्ट के समान कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर सकता है। बता दें कि 27 अक्टूबर 2017 को कथित अश्लील सीडी का मामला सामने आया था, जिसके बाद राजनीति गरमा गई थी। इस मामले में बीजेपी सरकार ने सीबीआई जांच का ऐलान किया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की थी। बाद में जांच कमजोर पड़ गई थी।
इस मामले में सीबीआई ने
कैलाश मुरारका, विजय भाटिया समेत कई लोगों को प्रतिवादी बनाया है। -

सात नहीं दो दिन में पोर्ट होगा मोबाइल नंबर, 11 नवंबर से लागू होगी नई व्यवस्था
दिल्ली । भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने गुरुवार को कहा कि मोबाइल उपभोक्ता 4 से 10 नवंबर के बीच मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी (एमएनपी) के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। ट्राई के मुताबिक, एमएनपी संशोधित नियमों को लागू करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है।
अब ग्राहक 11 नवंबर से मोबाइल नंबर पोर्ट के लिए आवेदन कर सकेंगे। एमएनपी के तहत ग्राहक उपभोक्ता बिना नंबर बदले अपना नेटवर्क बदल सकते हैं। ट्राई के एक अधिकारी ने बताया कि मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी के लिए आवेदन की प्रक्रिया को दो कार्य दिवस में पूरा कर लिया जाएगा। नई व्यवस्था 11 नवंबर की आधी रात से लागू हो जाएगी। अभी नंबर पोर्ट की प्रक्रिया सात कार्य दिवसों में पूरी होती है।
-

हाईकोर्ट : सास-ससुर की संपत्ति में बहु का कोई अधिकार नहीं, उन्हें बेटा-बेटी ही नहीं बल्कि बहु से भी घर खाली कराने का अधिकार
दिल्ली हाईकोर्ट फैसला दिया है कि सास-ससुर की चल या अचल संपत्ति में बहू का कोई अधिकार नहीं है। फिर चाहे वह संपत्ति पैतृक हो या खुद से अर्जित की गई हो। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी कामेश्वर राव की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी कोई भी चल, अचल, मूर्त, अमूर्त या ऐसी कोई भी संपत्ति जिसमें सास-ससुर का हित जुड़ा हुआ हो, उस पर बहू का कोई अधिकार नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में शांति से रहने का अधिकार है।सास-ससुर को अपने घर में बेटा-बेटी या कानूनी वारिस ही नहीं बल्कि बहू से भी घर खाली कराने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि सास-ससुर की चल या अचल संपत्ति में बहु का कोई अधिकार नहीं है। फिर चाहे वह संपत्ति पैतृक हो या खुद से अर्जित की गई हो। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी कामेश्वर राव की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी कोई भी चल, अचल, मूर्त, अमूर्त या ऐसी कोई भी संपत्ति जिसमें सास-ससुर का हित जुड़ा हुआ हो, उस पर बहु का कोई अधिकार नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में शांति से रहने का अधिकार है। सास-सुर को अपने घर में बेटा-बेटी या कानूनी वारिस ही नहीं बल्कि बहु से भी घर खाली कराने का अधिकार है।
क्या था मामला
मौजूदा मामले में बहु ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक के देखरेख व कल्याण के लिए बने नियमों का हवाला देते हुए कहा था कि वह ससुर से गुजाराभत्ता नहीं मांग ले रही है, इसलिए वह उससे घर खाली नहीं करा सकते। महिला ने दलील दी थी कि ससुर सिर्फ अपने बेटा-बेटी या कानूनी वारिस से ही घर खाली करा सकते हैं। हाईकोर्ट ने महिला की इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। याचिका दायर करने वाली महिला अपने पति और सास-ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज करा चुकी है। महिला का उसके पति से भी तलाक का मुकदमा चल रहा है। सुसर ने महिला पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इसके बादजिलाधिकारी ने महिला को घर खाली करने का आदेश दिया था। महिला ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।जानिए क्या हैं वरिष्ठ माता-पिता के अधिकारमप्र हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता को कानून ने कई अधिकार दिए हैं। कोई भी बच्चा अपने पेरेंट्स को परेशान नहीं कर सकता। कोई भी बेटा अपने पेरेंट्स को उनके घर से नहीं निकाल सकता। यदि घर की रजिस्ट्री बेटे के नाम है तो उस केस में बेटे को पिता को हर माह गुजाराभत्ता देना जरूरी होता है।
जानिए इसमें क्या कहता है कानून।
बुजुर्ग माता-पिता को क्या अधिकार?- बुजुर्ग माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण पाने का अधिकार है।
जिस घर में वे रह रहें, उसकी रजिस्ट्री उन्हीं के नाम पर है तो बच्चा उन्हें घर से बाहर नहीं कर सकता।
बच्चे अपने घर में उन्हें नहीं रखना चाहता तो उसे पेरेंट्स को हर माह गुजाराभत्ता देना होगा।
गुजाराभत्ता पेरेंट्स की जरूरतों और बेटे की कमाई के हिसाब से तय होता है।
बेटा घर से बाहर कर दे तो क्या करें?-
वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत पेरेंट्स ऐसे में कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा-भत्ते की मांग कर सकते हैं।
कलेक्टर को शिकायत की जा सकती है।
बच्चे ने मारपीट की या धमकी है तो पुलिस में भी शिकायत की जा सकती है।
पुलिस मामले को न सुने तो मजिस्ट्रेट या फैमिली कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
धोखे से अपने नाम करवा लिया घर तो मान्य नहीं– यदि किसी बच्चे ने पेरेंट्स को बहला-फुसलाकर धोखे से अपने नाम उनकी प्रॉपर्टी करवाली है तो यह मान्य नहीं होगी।
पेरेंट्स इसकी शिकायत करते हैं तो जिला प्रशासन उन्हें वापस कब्जा दिलवा सकता है।
प्रशासन से सहयोग न मिलने पर पेरेंट्स कोर्ट में केस लगा सकते हैं।
गुजाराभत्ता नही देने की स्थिति में –
ऑर्डर के बाद भी कोई बच्चा अपने पेरेंट्स को गुजाराभत्ता नहीं देता उसे 1 माह का कारावास हो सकता है।बच्चे किसी भी तरह से बुजुर्ग माता-पिता को परेशान नहीं कर सकते।