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  • जिंदल पावर का जनसुनवाई आवेदन वापस लेने का ऐलान: मगर अब भी है संशय की स्थिति.. क्या ऐसा संभव है..?

    जिंदल पावर का जनसुनवाई आवेदन वापस लेने का ऐलान: मगर अब भी है संशय की स्थिति.. क्या ऐसा संभव है..?

    रायगढ़। जिले के तमनार में जिंदल पावर की प्रस्तावित कोल माइंस की हुई जनसुनवाई अब प्रशासन के गले का फांस बन गई है। रायगढ़ जिला प्रशासन की 16 दिन से धरने पर बैठे ग्रामीणों को मनाने की कोशिशें और बैठके हो रही है। इसी बीच मामले में एक बड़ी खबर निकल कर आ रही है। जिंदल पावर प्रबंधन ने जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने की बात कही है। इस संबंध में उनके द्वारा प्रेस रिलीज भी जारी की गई है।

    इस प्रेस रिलीज में 27 दिसंबर की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ग्रामीणों पर पुलिस और उनके लोगों पर जानलेवा हमला और संपत्ति को नुकसान करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा बताया है कि परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने का फैसला लिया है।

    नीचे तस्वीर में देखिए इस प्रेस विज्ञप्ति में क्या लिखा है..

    अब भी है संशय की स्थिति
    जिंदल प्रबंधन के ऐलान के बाद भी इस पूरे मामले में संशय की स्थिति है। कही ये सब जारी आंदोलन और धरने को समाप्त करने के लिए कोई छलावा तो नहीं किया जा रहा..?

    28 दिसम्बर को रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल को पत्र भेजा गया है। जिसमें इस जनसुनवाई की पूरी रिपोर्ट और वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है और जनसुनवाई की प्रक्रिया को होल्ड करने की बात कही गई है। लेकिन जिंदल पावर द्वारा प्रेस रिलीज में बताया गया है कि कलेक्टर रायगढ़ के द्वारा दिनांक 28 दिसंबर 2025 को उक्त जनसुनवाई को निरस्त करने बाबत पत्र लिखा गया..?

    यदि हम रायगढ़ जिला कलेक्टर के पत्र को गौर से पढ़े तो पता चलता है कि उन्होंने 8 दिसंबर को हुई जनसुनवाई और उसके बाद प्रेषित प्रक्रिया के बारे में बताया है। इस पत्र में 27 दिसंबर की आक्रमक घटना और धरने पर बैठे ग्रामीणों की जनसुनवाई को निरस्त करने के मांग का भी जिक्र किया है। देखा जाए तो अपने पत्र में अंतिम में उन्होंने जन सुनवाई की प्रक्रिया की अग्रिम कार्रवाई नहीं किए का निवेदन किया है। इसको निरस्त किए जाने का नहीं!

    इस बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट
    इस बारे में पर्यावरण विशेषज्ञ और गोल्डन ग्रीन मैन अवार्ड से सम्मानित रमेश अग्रवाल बताते हैं कि पर्यावरण जन सुनवाई संपन्न होने के बाद यदि आगे की कार्यवाही के लिए राज्य या केंद्रीय पर्यावरण मंडल के पास चली जाती है। तब जनसुनवाई को निरस्त करना काफी जटिल है। इसका निरस्तीकरण केंद्रीय वन पर्यावरण मंडल भी नहीं कर सकती, जब तक कि कोई ठोस कारण या फिर यह इललीगल ना हो। और रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा लिखे पत्र में ऐसी कोई ठोस कारण या बात दिखाई नहीं देती।

    उन्होंने बताया कि जन सुनवाई की प्रक्रिया हो जाने के बाद कंपनी के द्वारा जनसुनवाई का आवेदन वापिस लेने ऐसा कोई भी प्रावधान EIA नोटिफिकेशन में नहीं है। जब जनसुनवाई प्रक्रिया ही संपन्न हो गई है तो फिर आवेदन किसका का वापस लिया जाएगा..??

  • आज जारी होगी छत्तीसगढ़ की ड्राफ्ट मतदाता सूची,इन तीन तरीकों से चेक करें अपना नाम…

    आज जारी होगी छत्तीसगढ़ की ड्राफ्ट मतदाता सूची,इन तीन तरीकों से चेक करें अपना नाम…

    भारत निर्वाचन आयोग आज मंगलवार को छत्तीसगढ़ की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित करेगा,छत्तीसगढ़ में तैयार किए गए ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स को मुख्य निर्वाचन अधिकारियों  और जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि वे तय समय में आपत्तियां, सुझाव दर्ज करा सकें।

    ड्राफ्ट वोटर सूची के प्रकाशन होने के बाद नोटिस फेज शुरू हो जाएगा, जिसमें चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से एक साथ गणना प्रपत्र पर नोटिस जारी करना, सुनवाई, प्रमाणित और फैसला लेना और दावों और आपत्तियों का निपटारा करना शामिल है। मतदाता 23 दिसंबर से 22 जनवरी तक दावा/आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक और योग्य मतदाताओं को दावे-आपत्तियों की अवधि के दौरान जोड़ा जा सकता है, जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए जाएंगे, उनका नाम केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा. यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने घर-घर जाकर कई बार संपर्क किया. साथ ही ईआरओ ने राजनीतिक दलों के साथ बैठकें कर असंग्रहणीय फॉर्म की अस्थायी सूची साझा की, ताकि बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) फील्ड में सत्यापन कर सकें।

    ऑनलाइन कैसे देख सकेंगे अपना नाम
    सबसे पहले नेशनल वोटर्स सर्विस पोर्टल (NVSP) पर: वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं.
    ‘Search Your Name in Electoral Roll’ विकल्प चुनें।

    EPIC नंबर से: अपना वोटर आईडी नंबर डालें, राज्य चुनें, कैप्चा भरकर सर्च करें.
    पर्सनल डिटेल्स से: राज्य, भाषा चुनें, फिर नाम, जन्मतिथि, उम्र, रिश्तेदार का नाम, लिंग, जिला और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी भरें. कैप्चा डालकर सबमिट करें.
    मोबाइल नंबर से: राज्य और भाषा चुनें, मोबाइल नंबर डालें, कैप्चा भरकर सर्च करें.

    वोटर हेल्पलाइन ऐप : Google Play Store या Apple App Store से ‘Voter Helpline’ ऐप डाउनलोड करें.
    EPIC नंबर या अन्य डिटेल्स से नाम सर्च करें।

  • कौशल्या देवी शर्मा का निधन

    कौशल्या देवी शर्मा का निधन

    खरसिया नगर की प्रतिष्ठित फर्म मुंसी राम श्यामा प्रसाद शर्मा के स्वर्गीय श्यामा प्रसाद शर्मा की धर्मपत्नी कोशल्या देवी का निधन 84 वर्ष की उम्र में आज  सुबह में हो गया। आप दीपक शर्मा और दिलीप शर्मा की माता जी थी जो अपने पिछे  बन्धु बंधुओं नाती पोते सहित भरापुर पूरा परिवार को अपने पीछे  छोड़ गई जिनकी अंतिम यात्रा आज 20 दिसम्बर 2025  दिन शनिवार को  दोपहर 1 बजे  स्थित गुरु द्वारा रोड निवास स्थान से निकलकर  स्थानीय मुक्तिधाम में दाहसंस्कार किया गया। कौशल्या देवी कांग्रेस नेता गोपाल शर्मा (पत्रकार) की चाची थी। परमात्मा से विनम्र प्रार्थना है कि पुण्य  दिव्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देते हुए शांति एवं मोक्ष प्रदान करें।

  • Truecaller का खेल खत्म? CNAP सर्विस भारत में शुरू: अब अनजान कॉल पर दिखेगा कॉलर का असली नाम…

    Truecaller का खेल खत्म? CNAP सर्विस भारत में शुरू: अब अनजान कॉल पर दिखेगा कॉलर का असली नाम…

    जब भी मोबाइल की घंटी किसी अनजान नंबर से बजती है, सबसे पहला सवाल यही होता है—कॉल उठाएं या नहीं? कहीं यह फर्जी कॉल, प्रमोशनल कॉल या साइबर ठग तो नहीं? इसी असमंजस में लाखों लोग जरूरी कॉल भी मिस कर देते हैं। अब टेलीकॉम कंपनियों ने इस समस्या का सीधा और स्थायी समाधान पेश किया है। भारत में Jio, Airtel और Vodafone-Idea (Vi) ने Caller Name Presentation (CNAP) सर्विस की शुरुआत कर दी है, जिसके तहत कॉल आते ही मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का असली और रजिस्टर्ड नाम दिखाई देगा।


    CNAP सर्विस क्या है और क्यों है यह जरूरी?
    CNAP का पूरा नाम Caller Name Presentation है। यह सुविधा भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के निर्देश पर लागू की जा रही है।

    अब तक अनजान कॉल की पहचान के लिए लोग थर्ड पार्टी ऐप्स जैसे Truecaller पर निर्भर थे, जहां:

    नाम यूजर्स खुद अपडेट कर सकते हैं
    गलत या भ्रामक नाम दिखने की संभावना रहती है
    प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं
    CNAP इन सभी समस्याओं का समाधान करता है क्योंकि यह सीधे टेलीकॉम कंपनियों के KYC डेटाबेस से जुड़ा होता है।

    यह सर्विस काम कैसे करती है?
    जब कोई व्यक्ति आपको कॉल करता है:

    सिस्टम कॉलर के सिम कार्ड से जुड़े KYC रिकॉर्ड को चेक करता है
    वही नाम आपकी मोबाइल स्क्रीन पर दिखता है
    यह नाम सरकारी दस्तावेजों में दर्ज वास्तविक नाम होता है
    इससे फर्जी पहचान बनाकर कॉल करने वालों पर बड़ी रोक लगेगी।

    CNAP और Truecaller में क्या है बड़ा अंतर?
    CNAP:

    टेलीकॉम कंपनियों का आधिकारिक डेटा
    KYC आधारित असली नाम
    कोई अलग ऐप इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं
    Truecaller:

    यूजर-जनरेटेड नाम
    गलत टैगिंग की संभावना
    थर्ड पार्टी एक्सेस और डेटा शेयरिंग का जोखिम
    यानी CNAP ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आया है।

    किन राज्यों में शुरू हुई CNAP सर्विस?
    अभी यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से देश के अलग-अलग सर्किल्स में शुरू की जा रही है।

    Reliance Jio:

    पश्चिम बंगाल
    केरल
    बिहार
    यूपी ईस्ट
    राजस्थान
    पंजाब
    असम
    उत्तराखंड
    हिमाचल प्रदेश
    झारखंड
    ओडिशा
    Airtel:

    पश्चिम बंगाल
    गुजरात
    मध्य प्रदेश
    जम्मू-कश्मीर
    Vodafone-Idea (Vi):

    महाराष्ट्र में लाइव
    तमिलनाडु में टेस्टिंग जारी
    BSNL:

    पश्चिम बंगाल में फिलहाल टेस्टिंग फेज में
    आने वाले समय में यह सर्विस पूरे देश में लागू की जाएगी।

    आम यूजर्स को क्या फायदा होगा?
    CNAP सिर्फ एक टेक्निकल फीचर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को सुरक्षित बनाने वाला कदम है।

    फेक और स्कैम कॉल्स की पहचान आसान
    जरूरी कॉल्स मिस होने की समस्या कम
    बुजुर्ग और कम तकनीकी जानकारी वाले लोगों को सुरक्षा
    साइबर ठगों के लिए नकली पहचान बनाना मुश्किल
    फोन कॉलिंग का अनुभव अब बदलेगा
    CNAP सर्विस भारत में डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम है। जैसे-जैसे यह सुविधा पूरे देश में लागू होगी, वैसे-वैसे अनजान कॉल का डर कम होगा और भरोसा बढ़ेगा। आम यूजर्स के लिए यह फीचर न सिर्फ सुविधा है, बल्कि साइबर अपराधों से बचाव का मजबूत हथियार भी साबित होगा। अब सवाल यह नहीं रहेगा कि “कॉल किसका है?”, बल्कि जवाब स्क्रीन पर पहले ही मौजूद होगा।

  • बाबरी मस्जिद विवाद में IAS नियाज खान की एंट्री, बोले- मस्जिद का ऐसा नाम रखना हिंदू धर्म का अपमान…

    बाबरी मस्जिद विवाद में IAS नियाज खान की एंट्री, बोले- मस्जिद का ऐसा नाम रखना हिंदू धर्म का अपमान…

    पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद विवाद मामले में IAS नियाज खान का बयान सामने आया है. नियाज खान अपने बायनों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. उन्होंने मस्जिद का नाम बाबरी रखने पर इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके IAS नियाज खान ने लिखा कि यह एक न्यूसेंस है. बाबर आक्रमणकारी था उसके नाम की मस्जिद बनाना हिंदुओं का अपमान है.

    सोशल मीडिया पोस्ट में आईएएस ने आगे लिखा कि यह देश के फिजा को खराब करेगा. मेरे मजहब के लोगों को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे हिन्दुओं की भावना आहत हो. मस्जिद का कोई और नाम रख लिया जाए. विदेशी का महिमामंडन न हो.

    क्या बाबरी मस्जिद विवाद मामला?
    टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक मस्जिद की नींव रखी. इस मस्जिद का नाम बाबरी रखा गया. इस नाम पर ही विवाद शुरू हो गया. मस्जिद के निर्माण के लिए लोग ईंट लेकर आए. चंदा भी इकट्ठा किया गया. शनिवार (6 दिसंबर) को मुस्लिम धर्मगुरुओं और अन्य लोगों ने इस मस्जिद के लिए प्रार्थना भी की.


    दरअसल, 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहा दिया गया था. जिसके बाद हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों के बीच लंबे समय तक इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दलीलें जारी रहीं. उच्चतम न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को विवादित भूमि पर रामलला जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया और बाद में 2.77 एकड़ जमीन पर राम मंदिर बनाया गया. वहीं बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या से 25 किमी दूर 5 एकड़ की जमीन आवंटित कर दी. इस पर अभी तक कोई काम नहीं हो सका है.

    कौन हैं IAS नियाज खान?
    नियाज खान मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं. वे मध्य प्रदेश राज्य सेवा (MPPSC) के प्रशासनिक अधिकारी थे. साल 2015 में प्रमोट होकर IAS बने. वह अब तक 10 उपन्यास लिख चुके हैं. उनका 10वां उपन्यास ब्राह्मण द ग्रेट पार्ट-2 था. उनके एक उपन्प्यास पर वेब सीरीज भी बन चुकी है. नियाज खान अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं. वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में तैनात हैं.

  • कबाड़ व्यवसायी अशरफ मेमन सहित ट्रिपल मर्डर की सनसनीखेज वारदात से कोरबा में फ़ैली दहशत…पुलिस मौके पर, तीन संदिग्ध हिरासत में…

    कबाड़ व्यवसायी अशरफ मेमन सहित ट्रिपल मर्डर की सनसनीखेज वारदात से कोरबा में फ़ैली दहशत…पुलिस मौके पर, तीन संदिग्ध हिरासत में…

    कोरबा। कोरबा शहर के पास स्थित एक फार्म हाउस में ट्रिपल मर्डर से पूरा जिला दहल उठा है। बीती रात कबाड़ कारोबारी अशरफ मेमन, एक स्थानीय युवक और बिलासपुर के एक युवक की गला घोटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। फार्म हाउस मृतक अशरफ मेमन का बताया जा रहा है।
    मिली जानकारी के मुताबिक घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मौके से मिले सुरागों के आधार पर तीन संदिग्धों को देर रात ही हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ जा रही है। फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।

  • ₹9 करोड़ दें और अमेरिका की नागरिकता लेंः डोनाल्ड ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा आज से शुरू, प्लैटिनम कार्ड भी जल्द शुरू होगा

    ₹9 करोड़ दें और अमेरिका की नागरिकता लेंः डोनाल्ड ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा आज से शुरू, प्लैटिनम कार्ड भी जल्द शुरू होगा

    अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया ट्रंप गोल्ड कार्ड वीजा लॉन्च कर दिया है। इसके तहत ₹9 करोड़ देकर कोई भी अमेरिका की नागरिकता ले सकते है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार (अमेरिकी समयानुसार) को व्हाइट हाउस में व्यापारिक नेताओं की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित “ट्रंप गोल्ड कार्ड” वीजा कार्यक्रम का आधिकारिक रूप से शुभारंभ किया। कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.8 करोड़ रुपए) है। हालांकि कंपनियों को कार्ड के लिए 2 मिलियन डॉलर देना होगा।

    ट्रम्प ने इसी साल फरवरी में ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया था। हालांकि उस वक्त उन्होंने इसकी कीमत 5 मिलियन डॉलर (42 करोड़ रुपए) रखी थी। सितंबर में इसे घटाकर 1 मिलियन डॉलर किया गया।

    कार्ड के लॉन्च की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह “कुछ हद तक ग्रीन कार्ड जैसा है, लेकिन ग्रीन कार्ड की तुलना में इसके कई बड़े फायदे हैं। ट्रंप का कहना है कि यह अमेरिका फर्स्ट एजेंडे का हिस्सा है, जो टॉप टैलेंट (जैसे भारत-चीन से पढ़े स्टूडेंट्स) को रोकने और कंपनियों को अमेरिका लाने के लिए है। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा, “यह दुनिया के सफल उद्यमियों को आकर्षित करेगा।” वहीं ट्रम्प का प्लैटिनम कार्ड भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसकी फीस करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपए) है।

    ट्रम्प बोले- सिर्फ टैलेंटेड लोगों को वीजा देंगे

    गोल्ड कार्ड की अनलिमिटेड रेसीडेंसी में नागरिकों को सिर्फ पासपोर्ट और वोट देने का अधिकार नहीं मिलता, बाकी सारी सुविधाएं एक अमेरिकी नागरिक के जैसी मिलती हैं। यह प्रक्रिया उसी तरह होगी, जैसे ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी निवास मिलता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह वीजा प्रोग्राम खास तौर पर धनी विदेशियों के लिए है, ताकि वे 1 मिलियन डॉलर देकर अमेरिका में रहते हुए काम कर सकें। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका सिर्फ टैलेंटेड लोगों को ही वीजा देगा, न कि ऐसे लोगों को जो अमेरिकियों की नौकरियां छीन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस रकम का इस्तेमाल टैक्स को घटाने और सरकारी कर्ज चुकाने में किया जाएगा।

    सारा पैसा अमेरिकी सरकार के पास जाएगा
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहा कि मेरे और मेरे देश के लिए बेहद खुशी की बात है कि हमने अभी-अभी ट्रंप गोल्ड कार्ड लॉन्च किया है। वेबसाइट लगभग 30 मिनट में खुल जाएगी और सारा पैसा अमेरिकी सरकार के पास जाएगा… यह कुछ हद तक ग्रीन कार्ड जैसा है, लेकिन ग्रीन कार्ड से कहीं ज़्यादा फायदेमंद है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनियां किसी भी संस्थान में जाकर कार्ड खरीद सकेंगी और उस व्यक्ति को अमेरिका में रख सकेंगी… किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति को अपने देश में लाना एक तोहफा है, क्योंकि हमें लगता है कि कुछ ऐसे प्रतिभाशाली लोग होंगे जिन्हें अन्यथा यहां रहने की अनुमति नहीं मिलती। कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्हें भारत, चीन या फ्रांस वापस जाना पड़ता है… कंपनियां बहुत खुश होंगी।

  • रेल हादसे पर बड़ी कार्रवाई : हटाए गए DRM बिलासपुर, इस अधिकारी को बनाया गया नया डीआरएम, अन्य अधिकारी पर भी जल्द गिर सकती है गाज…..

    रेल हादसे पर बड़ी कार्रवाई : हटाए गए DRM बिलासपुर, इस अधिकारी को बनाया गया नया डीआरएम, अन्य अधिकारी पर भी जल्द गिर सकती है गाज…..

    बिलासपुर। बीते दिनों बिलासपुर में हुए रेल हादसे पर बड़ा एक्शन हुआ है। DRM बिलासपुर राजमल खोईवाल हटा दिए गए हैं। अब उनकी जगह उमेश कुमार नए DRM होंगे। उमेश कुमार का तबादला वेस्टर्न रेलवे से SECR में हुआ है रेल हादसे के बाद बड़ा फेरबदल किया गया है। डायरेक्टर रेलवे बोर्ड ने यह आदेश जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक बड़े अधिकारी पर भी जल्द गाज गिर सकती है।

    बता दें कि एक माह पहले चार नवंबर को कोरबा-बिलासपुर लोकल मेमू अप लाइन पर खड़ी कोयला लोड मालगाड़ी से टकराई थी। इस हादसे में 12 यात्रियों की मौत हुई थी और 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे। इस हादसे के कारण रेलवे को भी करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था।

    मामले की जांच करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन दक्षिण पूर्व सर्किल – कोलकाता के रेल सुरक्षा आयुक्त बीके मिश्रा ने रेल हादसे की जांच की। उन्होंने घटना स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण करते हुए तीन दिन तक इलेट्रिकल ओपी, इलेक्ट्रकल, एसएंडटी, मैकेनिकल, सीएंडडब्लू सहित अन्य विभाग के अफसरों व कर्मचारियों से पूछताछ की थी। सीआरएस ने प्रारंभिक रिपोर्ट में रेल हादसे का बड़ा कारण अप्रशिक्षित चालक को बताया है।

    रेल प्रशासन की गलती के कारण हुआ हादसा

    हादसे के 20 दिन बाद सीआरएस मिश्रा ने मामले की मुख्य अभियुक्त मेमू की असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज से केन्द्रीय रेलवे हॉस्पिटल में जाकर घटना के संबंध में दो घंटे तक चर्चा की थी। सोमवार की रात रेल सुरक्षा आयुक्त मिश्रा ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट एसईसीआर जोन मुख्यालय और डिवीजन को भेज दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि लोकल ट्रेन के हादसे की पूरी गलती रेल प्रशासन की है। विभाग ने चालक को साइको टेस्ट में पास नहीं होने के बाद भी यात्री ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। अगर यात्री ट्रेन की कमान किसी को देना था तो उसे सायकोलोजिकल टेस्ट पास चालक को दिया जाना था। रेल प्रशासन की गलती के कारण यह हादसा हुआ है, जिसे सुधार करने की आवश्यकता है।

    रेल सेफ्टी आयुक्त ने अफसरों को दिए सुझाव

    हादेस के लिए रेल सेफ्टी आयुक्त ने रेल प्रशासन के अलावा चालक को जिम्मेदार ठहराया है। आगामी दिनों में इस तरह की कोई घटना न हो सके, इसके लिए विशेष सुझाव भी रेल प्रशासन के अफसरों को दिया है, जिसमें ट्रेन परिचालन सुगम बनाने तथा अन्य उपकरणों द्वारा दर्ज किए गए इवेंट्स से मिलान करने के लिए सभी मानिटरिंग और रिकार्डिंग उपकरणों की घड़ियों को जीपीएस समय से स्वतः समन्वित करने कहा गया है।

  • कैंसर पर आख़िरी वार? शरीर को मिलेगी ‘सुपर पावर’, वैज्ञानिकों की नई वैक्सीन से जगी करोड़ों उम्मीदें…

    कैंसर पर आख़िरी वार? शरीर को मिलेगी ‘सुपर पावर’, वैज्ञानिकों की नई वैक्सीन से जगी करोड़ों उम्मीदें…

    कैंसर… एक ऐसा नाम जो सुनते ही मरीज और परिवार दोनों की सांसें थम जाती हैं। अब तक इस गंभीर बीमारी से लड़ाई का मतलब था कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी कठिन प्रक्रियाएं, जिनमें इलाज के साथ-साथ शरीर को भारी कीमत भी चुकानी पड़ती थी। लेकिन अब मेडिकल साइंस की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कैंसर मरीजों के चेहरे पर नई उम्मीद की मुस्कान ला दी है। वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो बाहर से हमला नहीं करेगी, बल्कि शरीर की अपनी ताकत को ही कैंसर के खिलाफ खड़ा कर देगी।

    यह नई तकनीक mRNA कैंसर वैक्सीन पर आधारित है, जो उसी सिद्धांत पर काम करती है जिस पर कोविड-19 की वैक्सीन बनी थी। अमेरिका की बिंघैमटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर युआन वान और उनकी रिसर्च टीम पिछले कई वर्षों से इस दिशा में काम कर रही है। उनका मानना है कि अगर इम्यून सिस्टम को यह सिखा दिया जाए कि कैंसर कोशिकाएं कैसी दिखती हैं, तो शरीर खुद ही उन्हें दुश्मन समझकर खत्म कर सकता है।

    कोविड वैक्सीन ने हमारे शरीर को वायरस के स्पाइक प्रोटीन से पहचान करवाई थी। ठीक उसी तरह यह mRNA कैंसर वैक्सीन कैंसर कोशिकाओं को मजबूर करती है कि वे अपनी सतह पर एक ऐसा खास प्रोटीन दिखाएं, जिसे इम्यून सिस्टम पहले से ही खतरे के रूप में पहचानता है। जैसे ही यह प्रोटीन कैंसर सेल पर आता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तुरंत सक्रिय हो जाती है और उन कोशिकाओं पर जोरदार हमला शुरू कर देती है।

    कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि ट्यूमर समय के साथ अपना रूप बदलते रहते हैं। इसी वजह से कई बार इलाज बेअसर हो जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि यह नई तकनीक इस समस्या का भी समाधान कर सकती है। चाहे कैंसर कोशिका कितनी भी बदल जाए, उसे अपनी सतह पर वही खास प्रोटीन दिखाना पड़ेगा। इससे इम्यून सिस्टम हमेशा उसे पहचानती रहेगी और हमला जारी रहेगा।

    इस पूरे प्रोसेस में बेहद सूक्ष्म नैनोपार्टिकल्स की अहम भूमिका है। ये कण सीधे ट्यूमर कोशिकाओं तक पहुंचते हैं, खासकर उन कैंसर में जहां HER2 नामक प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। ये नैनोपार्टिकल्स mRNA को सीधे कैंसर सेल के अंदर पहुंचाते हैं, जिससे वह खतरनाक प्रोटीन बनाने लगती है और खुद ही इम्यून सिस्टम के निशाने पर आ जाती है। कोविड महामारी के बाद अधिकतर लोगों के शरीर में स्पाइक प्रोटीन की इम्यून मेमोरी पहले से मौजूद है, जिससे इस वैक्सीन की प्रतिक्रिया और भी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    फिलहाल यह तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है। शुरुआती नतीजे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन आम मरीजों तक पहुंचने से पहले बड़े स्तर पर सुरक्षा परीक्षण और उत्पादन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ सही दिशा में आगे बढ़ा, तो आने वाले वर्षों में कैंसर के इलाज की परिभाषा ही बदल सकती है।

    मेडिकल साइंस से जुड़े जानकार इसे सिर्फ एक नई दवा नहीं, बल्कि इलाज की सोच में क्रांति मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में यही mRNA तकनीक न सिर्फ कैंसर, बल्कि कई अन्य गंभीर और जानलेवा बीमारियों के इलाज में भी नई राह खोलेगी। कैंसर के अंधेरे में यह खबर एक उजली किरण की तरह है, जो बताती है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि जीत के रास्ते अब और साफ दिखने लगे हैं।

  • छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब कृषि भूमि पर घर बनाने के लिए अब नहीं कराना होगा डायवर्सन…

    छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब कृषि भूमि पर घर बनाने के लिए अब नहीं कराना होगा डायवर्सन…

    छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन डायवर्सन प्रक्रिया को लेकर बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब भूमि के उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए एसडीएम से अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद अब जमीन का उपयोग किसी भी प्रयोजन के लिए किया जा सकेगा।

    नए नियमों के तहत कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए अलग से डायवर्सन की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान रूप से लागू होगी। सरकार का यह निर्णय छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नियम पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे लागू करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।