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  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तगड़ा झटका देते हुए तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगाई…

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तगड़ा झटका देते हुए तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगाई…

    दिल्ली। उच्चतम न्यायालय केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को तगड़ा झटका देते हुए तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही इस कानून से संबंधित विवाद को हल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक कमेटी के गठन का भी निर्देश दिया है जो संबंधित पक्षों के विवादित मामलों की सुनवाई करेगी।

    इससे पहले, केंद्नेर सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है। उसने किसानों के प्रदर्शन पर कहा, हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।

    न्यायालय ने साथ ही किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर ‘जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे’। उसने किसान संगठनों से कहा, ‘यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।’

    CJI ने जताई नाराजगी

    प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है।

    न्यायालय ने कहा कि कोई ताकत हमें नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा हमें समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है ।

  • सियासी जगत में बड़ा सेक्स स्कैंडल, मंत्री पर बलात्कार का मामला दर्ज…

    सियासी जगत में बड़ा सेक्स स्कैंडल, मंत्री पर बलात्कार का मामला दर्ज…

    मुंबई महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में एक सिंगर ने बलात्कार की शिकायत दर्ज करवाई है। सिंगर का आरोप है कि पहले उसने मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को पत्र लिखकर इस बात की शिकायत की थी। लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    पुलिस थाने में दर्ज हुई शिकायत
    मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में एक महिला ने मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि ओशिवारा पुलिस स्टेशन ने भी उसकी शिकायत को दर्ज नहीं किया गायिका ने कहा कि उसकी जान खतरे में है।

    दस जनवरी को दर्ज हुई शिकायत
    जानकारी के मुताबिक यह शिकायत दस जनवरी को की गई थी। जिसे मुंबई पुलिस ने 11 जनवरी को दर्ज किया है। इस बाबत पीड़िता ने सोशल मीडिया पर शिकायत के बाद जानकारी साझा की थी। सिंगर ने ट्वीट किया था कि मैंने बलात्कार की शिकायत मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ मुंबई पुलिस में की है लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार का एक्शन नहीं लिया गया।

  • डीओपीटी ने जारी किया नोटिफिकेशन,राज्य प्रशासनिक सेवा के इन सात अधिकारियों को IAS अवार्ड…

    डीओपीटी ने जारी किया नोटिफिकेशन,राज्य प्रशासनिक सेवा के इन सात अधिकारियों को IAS अवार्ड…

    दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सात डिप्टी कलेक्टरों को आईएएस अवार्ड कर दिया गया है. केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है. जिन सात अधिकारियों को आईएएस अवार्ड हुआ है, उनमें जयश्री जैन, प्रियंका महोबिया, डाॅ.फरिहा आलम, दीपक कुमार अग्रवाल, तुलिका प्रजापति, चंदन त्रिपाठी और रोक्तिमा यादव के नाम शामिल हैं. यह सभी अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के 2005 बैच के अधिकारी हैं। 

    राज्य सरकार ने 21 नामों का पैनल केंद्र सरकार को भेजा था. राज्य सरकार ने जिन नामों का पैनल भेजा था, उनमें से 2003 बैच के अधिकारियों के नाम भी शामिल थे, यह वही बैच है, जिनकी मेरिट सूची को कोर्ट में चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने मेरिट सूची में सुधार किए जाने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे दिया था. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. वर्षा डोंगरे ने नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी थी. केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने भी आईएएस अवार्ड के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उसमें नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दिए जाने का भी जिक्र किया गया है. यानी भविष्य में कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसे प्रभावी माना जाएगा।

    अन्य संवर्ग के एक पद के लिए जल्द होगी बैठक

    इधर अन्य संवर्ग (नान कैडर) से प्रमोटी आईएएस के लिए भी जल्द ही डीओपीटी नोटिफिकेशन जारी कर सकती है. पिछले दिनों चीफसेक्रेटरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सात नामों पर चर्चा हुई थी, जिनमें जीएसटी विभाग से गोपाल वर्मा, वित्त से अल्पना घोष, ट्राइबल से संजय गौर, पंचायत से विनय गुप्ता महिला बाल विकास से राजेश सिंगी, फूड से गजपाल सिंह सिकरवार, पीएचई से राकेश पोयाम और जनसंपर्क से उमेश मिश्रा का नाम शामिल थे. इनमें से पांच नामों का पैनल दिल्ली भेजा गया था।

  • ड्रैगन को बड़ा झटका, अमेरिका शेयर बाजार से बाहर होंगी तीन चीनी टेलीकॉम कंपनी…

    ड्रैगन को बड़ा झटका, अमेरिका शेयर बाजार से बाहर होंगी तीन चीनी टेलीकॉम कंपनी…

    दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच चल रहा तनाव अपने चरम पर है। अब अमेरिका ने चीन को एक और झटका दिया है।

    दरअसल, अमेरिका ने अपने शेयर बाजार से चीन की तीन प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों को बाहर करने का फैसला लिया है। अब इन कंपनियों को अमेरिकी शेयर बाजार से डीलिस्ट किया जाएगा। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी शेयर बाजार से बाहर होने वाली कंपनियों में चाइना मोबाइल लिमिटेड, चाइना टेलीकॉम कॉर्पोरेशन, चाइना यूनिकॉम हॉन्गकॉन्ग लिमिटेड शामिल है। इन कंपनियों के संबंध चाइनीज आर्मी के साथ पाए गए हैं। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक, इन कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग सस्पेंड रहेगी। इसके साथ ही इन कंपनियों को डिलिस्ट करना शुरू कर दिया जाएगा।

    उधर, अमेरिका की इस कार्रवाई से बौखलाया चीन अब जवाबी कार्रवाई में जुट गया है। अब चीन ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज द्वारा अपनी तीन बड़ी दूरसंचार कंपनियों को एक्सचेंज से हटाने की घोषणा पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे अमेरिकी व चीन के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। चीन के वाणिज्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इससे अमेरिकी पूंजी बाजार के प्रति सभी पक्षों का भरोसा कमजोर होगा।

  • कांग्रेस ने जारी की तीन सौ से अधिक ब्लाक अध्यक्षों की सूची…

    कांग्रेस ने जारी की तीन सौ से अधिक ब्लाक अध्यक्षों की सूची…

    रायपुर। प्रदेश कांग्रेस ने तीन सौ से अधिक ब्लाक अध्यक्षों की सूची जारी कर दिया है। बताया गया कि प्रदेश प्रभारी पी एल पुनिया की अनुमति के बाद सूची जारी कर दी गई है।

  • सुप्रीम कोर्ट के 2020 के वो अहम फैसले जिससे बदली हमारी दुनिया…

    सुप्रीम कोर्ट के 2020 के वो अहम फैसले जिससे बदली हमारी दुनिया…

    निर्भया के दोषियों की अर्जी खारिज..फांसी पर लटकाया गया

    फांसी से बचने के लिए आखिरी वक्त तक निर्भया के गुनाहगारों ने प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुनाहगार पवन की याचिका 20 मार्च को तड़के साढ़े तीन बजे खारिज की और सुबह साढ़े पांच बजे चारों मुजरिमों को फांसी के तख्त पर चढ़ा दिया गया। मुजरिमों ने गुरुवार को लगातार पटियाला हाउस कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अलग-अलग अर्जियां दाखिल की और एक-एक कर तमाम अर्जियां खारिज होती गई। देखा जाए तो आखिरी सांस तक निर्भया के गुनाहगारों ने तमाम तिकड़म और कानूनी दांव पेंच का सहारा लिया लेकिन फिर भी वह अपने आखिरी अंजाम तक पहुंच गए।

    महिलाओं को परमानेंट कमीशन

    17 फरवरी को दिए महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्ड फोर्स में महिलाओं के साथ भेदभाव को खत्म कर दिया। और कहा है कि सभी महिला ऑफिसरों को परमानेंट कमिशन मिलेगा और उनके लिए कमांड पोजिशन का रास्ता भी साफ कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह महिला ऑफिसरों को तीन महीने के भीतर परमानेंट कमिशन प्रदान करें। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि महिलाओं ने अतीत में तमाम बहादुरी के कारनामे किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने लिंग समानता के मामले में मील का पत्थर साबित करने वाले फैसले में कहा है कि सरकार को मामले में अपनी विचारधारा और माइंडसेट बदलने की जरूरत है।

    सुशांत केस में सीबीआई जांच पर मुहर

    सुशांत सिंह राजपूत केस में सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त को अपना फैसला दिया कि मामले में सीबीआई जांच हो और कहा है कि महाराष्ट्र सरकार सीबीआी को सहयोग करे। महाराष्ट्र सरकार तमाम जांच संबंधित दस्तावेज में मदद करे। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह भविष्य में सुशांत केस से संबंधित मामले को अपने हाथों में ले। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई न सिर्फ पटना के एफआईआर मामले की जांच के लिए सक्षम है बल्कि आगे भी कोई केस दर्ज होता है इस मामले में तो वह सीबीआई देखेगी।

    कोरोना काल में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई का आदेश

    6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि देश भर की अदालतों में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई किया जाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के हाई कोर्ट से कहा है कि वह इसके लिए उपाय करें ताकि विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई सुनिश्चित हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोरोना के कारण कोर्ट में भीड से बचना होगा ताकि महामारी न फैले।

    देश भर के थानों में सीसीटीवी लगाए जाएं

    2 दिसंबर 2020 देश भर के थानों में सीसीटीवी लगाने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि सही भावना से कोर्ट के आदेश को लागू कराया जाए। थाने का एसएचओ तमाम डाटा और सीसीटीवी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा और एसएचओ इस बात को सुनिश्चित करेगा कि सीसीटीवी वर्किंग कंडिशन में रहे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सीबीआई, ईडी, एनआईए, एनसीबी, डीआरआई, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन आदि के दफ्तर में भी सीसीटीवी लगाए जाएं।

    प्रशांत भूषण अवमानना के दोषी करार

    14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जानेमाने एडवोकेट प्रशांत भूषण को कंटेप्ट ऑफ कोर्ट में दोषी करार दिया है। भूषण ने दो टि्वट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वहीं 31 अगस्त को भूषण को कंटेप्ट ऑफ कोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर एक रुपये का जुर्माना लगाया और कहा है कि अगर वह जुर्माने की रकम जमा नहीं करते तो उन्हें तीन महीने की जेल होगी और प्रैक्टिस पर तीन साल के लिए बैन लग जाएगा।

    बेटे के बराबर बेटी को अधिकार

    11 अगस्त को दिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि बेटी को अपने पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर का अधिकार है और हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के वक्त चाहे बेटी के पिता जिंदा रहे हों या नहीं बेटी को हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) में बेटे के बराबर संपत्ति में अधिकार मिलेगा। बेटी को पैदा होते ही जीवनभर बेटे के बराबर का अधिकार मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005 की धारा-6 के तहत प्रावधान है कि बेटी पैदा होते ही कोपार्सनर (हम वारिस या सहदायिकी) हो जाती है। हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005 के बाद बेटी पैदा हुई हो या पहले पैदा हुई हो उसका बेटे के बराबर हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) के संपत्ति में अधिकार होगा।

    बहू को ससुराल में रहने का अधिकार

    15 अक्टूबर 2020 को दिए अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संपत्ति मालिक अगर डोमेस्टिक रिलेशनशिप में हो तो बहू को संपत्ति में रहने का अधिकार है। यानी सास-ससुर अगर डोमेस्टिक रिलेशनशिप में हैं तो बहू शेयर्ड हाउस होल्ड प्रॉपर्टी में रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में बहू को ससुराल में रहने का अधिकार दिया गया। दरअसल डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट के तहत दिए गए प्रावधान की सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की है और कहा कि डोमेस्टिक रिलेशन में बहू अगर रह चुकी है या रह रही है तो उसे डीवी एक्ट के तहत वहां रहने का अधिकार है।

    राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार

    18 दिसंबर को दिए अपने महत्वपूर्ण आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद-21 इसकी गारंटी करता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों के सस्ते इलाज की व्यवस्था करे। अपने अहम फैसले में कहा है कि राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जो जीवन का अधिकार है उसी में राइट टु हेल्थ शामिल है। इसके तहत सस्ते इलाज की व्यस्था होनी चाहिए। राइट टु हेल्थ में इलाज आम लोगों के जेब के दायरे में होना चाहिए। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आम लोगों के लिए सस्ते इलाज की व्यवस्था करे। राज्य की ये भी जिम्मेदारी है कि सरकार और स्थानीय एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा चलाए जाने वाले अस्पतालों की संख्या ज्यादा से ज्यादा बनाई जाए और इसकी व्यवस्था की जाए।

    लोगों की लिबर्टी सर्वोपरि

    27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल केस में निष्पक्ष जांच जरूरी है लेकिन अदालतों को सुनिश्चित करना होगा कि किसी नागरिक को प्रताड़ित करने के लिए क्रिमिनल लॉ का इस्तेमाल हथियार के तौर पर न हो। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मानवीय लिबर्टी बहुमूल्य संंवैधानिक अधिकार है। हाई कोर्ट को असीम अधिकार मिले हुए हैं ताकि लोगों के संवैधानिक मूल्यों और स्वच्छंदता (लिबर्टी) संरक्षित रहे। मानवीय लिबर्टी महत्वपूर्ण और बहुमूल्य अधिकार है। इसमें संदेह नहीं है कि ये कानून के दायरे में है। आजादी के बाद संसद ने हाई कोर्ट के असीम अधिकार को मान्यता दे रखी है ताकि लोगों के संवैधानिक मूल्य और लिबर्टी संरक्षित रहे। संवैधानिक तानेबाने के जरिये लिबर्टी का रिट मिला हुआ है।

  • अभियुक्त को जमानत देना जज को पड़ा महंगा,हाईकोर्ट ने किया सस्पेंड…

    अभियुक्त को जमानत देना जज को पड़ा महंगा,हाईकोर्ट ने किया सस्पेंड…

    बिहार। एक अभियुक्त को जमानत देना बिहार के एक जज को महंगा पड़ गया। विवादस्पद रुप से जमानत देने के इस मामले में पटना हाइकोर्ट ने मोतिहारी के सीजेएम पर एक्शन लिया है,वहीं बगैर अनुमति उन्हें मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे का भी आदेश दिया गया है।
    मोतिहारी के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सुधीर कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पटना हाइकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक सीजेएम श्री सिन्हा के विरुद्ध यह कार्रवाई बिहार ज्यूडिशियल सर्विस (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल और अपील) रूल्स, 2020 के रूल 6 के सब – रूल में दी गयी अधिकारों का प्रयोग करते हुए न्यायालय द्वारा की गयी है।


    आदेश में कहा गया है कि इस आदेश के प्रभाव में रहने तक सिन्हा बगैर पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।निलंबन की अवधि के दौरान वे बिहार सर्विस कोड के रूल 96 के तहत सब्सस्टिेंस अलाउंस यानी जीवन निर्वाह भत्ता लेने के हकदार होंगे।
    सीजेएम,मोतिहारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई अभी लंबित है।हाईकोर्ट की कमेटी इस बात की भी अब जांच करेगी कि अभियुक्त को जमानत देना कहां तक न्यायोचित था।

  • राजधानी में जनवरी से कार चालकों के लिए सीट बेल्ट और दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य होगा….

    राजधानी में जनवरी से कार चालकों के लिए सीट बेल्ट और दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य होगा….

    मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली इसमें सभी विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई। इस बैठक के तत्काल बाद पुलिस अधिकारियों ने मंत्रालय की पार्किंग में सभी ड्राइवरों को इस फैसले की जानकारी दी 10 दिन बाद बाकी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी इसके बाद राजधानी में कार्रवाई शुरू होगी फिर पूरे प्रदेश भर में कार्रवाई की जाएगी।

    राज्य सड़क सुरक्षा समिति के बैठक के दौरान जब मुख्य सचिव अमिताभ जैन के सामने दुर्घटनाओं की जानकारी रखी गई, तो बिना हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से हुए हादसों की संख्या देख कर चौक गए, उन्होंने इसके लिए पूरी गंभीरता से प्रदेश भर में अभियान चलाने को कहा कि शुरुआत पहले खुद से ही होनी चाहिए। यही वजह है कि उन्होंने लीड एजेंसी के अध्यक्ष संजय शर्मा और डीएसपी सतीश ठाकुर को निर्देश दिए कि वे मंत्रालय के ड्राइवरों को अभियान के बारे में बताएं। अधिकारियों ने समझाया कि बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने पर ड्राइवर को जुर्माना देना पड़ेगा, सामने बैठने वाले गनमैन को भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होगा, इस दौरान सीएस जैन ने सभी विभागों के लिए जिम्मेदारियां तय की है पीडब्ल्यूडी विभाग बैंक की सपोर्ट पर सुधार करेगा, परिवहन विभाग कार्रवाई करेगा, स्वास्थ्य विभाग ट्रामा सेंटर की व्यवस्था ठीक करेंगे वहीं शिक्षा विभाग बच्चों में जागरूकता लाएंगे।

  • ओपी जिंदल स्कूल तराईमाल के प्रिंसिपल के खिलाफ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में मिली शिकायत…

    ओपी जिंदल स्कूल तराईमाल के प्रिंसिपल के खिलाफ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में मिली शिकायत…

    24 दिसम्बर को राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई रायगढ़ जिले में आयोजित की गई थी,आयोग में एक शिकायत ओपी जिंदल स्कूल ताराईमाल की प्रिंसिपल के खिलाफ एक शिकायत आई थी जिसमे पूर्णिमा गायकवाड़ ने अपनी 6वीं कक्षा में पढ़ने वाली 11 वर्षीय पुत्री के साथ स्कूल में हुई मारपीट के सम्बन्ध में शिकायत की थी,राज्य महिला आयोग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच टीम को 24 जनवरी तक अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे,  आयोग के निर्देशानुसार रेस्ट हाउस में बैठक का आयोजन किया गया, आयोग के निर्देशानुसार ओपी जिंदल स्कूल प्रबंधन समिति के सभी सदस्यों को बैठक के लिए सूचित किया गया था परन्तु

    ओपी जिंदल स्कूल के प्रचार्य आर के त्रिवेदी ने पत्र के माध्यम से सूचना दी कि उन्हें उक्त प्रकरण के सम्बंध में कोई जानकारी नही है,जबकि स्कूल समिति से बैठक में उपस्थित रहे स्कूल प्रिंसिपल सहित अन्य सदस्यों ने भी लिखित में यह जानकारी दी कि आर के त्रिवेदी सहित स्कूल समिति के सभी सदस्यों को इस प्रकरण के विषय मे पूरी जानकारी है,इससे यह तो तय हो गया कि स्कूल प्रबंधन समिति पूरे मामले में लीपापोती कर रही है,आवेदिका को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का क्रम लगातार जारी है आयोग की सुनवाई 24 दिसम्बर को हुई और 31 दिसम्बर को पूर्णिमा गायकवाड़ को स्कल से टर्मिनेट कर दिया गया,  पूर्णिमा गायकवाड़ ओपी जिंदल स्कूल ताराइमाल में विगत कई वर्षों से शिक्षिका के पद पर है और जब उनकी 11 वर्षीय बेटी के साथ स्कूल प्रिंसिपल द्वारा मारपीट की गई जिससे बच्ची के कान का पर्दा डेमेज हो गया लगातार पूर्णिमा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा जिससे परेशान हो कर पूर्णिमा गायकवाड़ ने इसकी शिकायत राज्य महिला आयोग से की,आयोग छठवीं कक्षा की नाबालिग बच्ची के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर सख्त हुआ और इसकी जांच के लिए टीम गठित की।दोपहर 12 बजके से शाम 5 बजे तक चली बैठक बेनतीजा निकली और जांच समिति ने स्कूल प्रबंधन को कुछ समय दिया ताकि इस मामले का सुखद पटाक्षेप हो सके,बैठक में शिकायतकर्ता,अनावेदिका, महिला आयोग अध्यक्ष की तरफ से प्रतिनिधि के तौर पर तपन घोष और अधिवक्ता  दीपक शर्मा, स्थानीय पत्रकार सुरजीत कौर,समाजसेवी और स्कूल समिति के सदस्य आर एन प्रसाद, राम कुमार त्रिपाठी, प्रिंसिपल अलका गोडबोले व अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।

  • WhatsApp और Facebook की पॉलिसी के खिलाफ उतरे व्यापारी, ऐप्स पर बैन लगाने की उठी मांग, जानें पूरा मामला….

    WhatsApp और Facebook की पॉलिसी के खिलाफ उतरे व्यापारी, ऐप्स पर बैन लगाने की उठी मांग, जानें पूरा मामला….

    व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वॉट्सऐप की नई गोपनीयता नीति पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसके माध्यम से वॉट्सऐप का उपयोग करने वाले व्यक्ति के सभी प्रकार के डेटा, भुगतान लेनदेन, संपर्क, स्थान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को वॉट्सऐप नई नीति के जरिए हासिल कर उसे अपने किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकता है।

    इस मुद्दे पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद को भेजे गए एक पत्र में कैट ने मांग की है कि सरकार को वॉट्सऐप को नई गोपनीयता नीति को लागू करने से तुरंत रोकना चाहिए तथा वॉट्सऐप और उसकी मूल कंपनी फेसबुक पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए. भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और कंपनी द्वारा प्रत्येक उपयोगकर्ता के डेटा को अपनी नीति के माध्यम से जबरन प्राप्त करने से न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

    बताया ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा व्यवहार

    एक बयान में कैट ने कहा, यह हमें ईस्ट इंडिया कंपनी के उन दिनों की याद दिलाता है जब इस कम्पनी ने केवल नमक का व्यापार करने के लिए भारत में प्रवेश किया और देश गुलाम हुआ, लेकिन वर्तमान समय में डेटा ही अर्थव्यवस्था एवं देश की सामाजिक संरचना के लिए महतवपूर्ण है. बिना किसी शुल्क के फेसबुक और वॉट्सऐप का उपयोग करने के लिए भारतीयों को पहले सुविधा देने के पीछे उनका असली मकसद अब सामने आ रहा है. उनका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय के डाटा को हासिल करना है और अपने छिपे हुए एजेंडे के साथ भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करना है।

    कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि, वॉट्सऐप की बदली हुई निजता नीति एक व्यक्ति की निजता का अतिक्रमण है और भारत के संविधान के मूल बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है और इसलिए कैट ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि अपनी नई गोपनीयता नीति में, वॉट्सऐप उपयोगकर्ता को नई शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर रहा है और यह अक्सर देखा जाता है कि बिना शर्तों को पढ़े ज्यादातर लोग बिना जाने केवल सामान्य व्यवस्था मानकर उन शर्तों को स्वीकार कर लेते हैं और उन्हें मालूम ही नहीं होता कि उन्होंने अपने लिए क्या मुसीबत मोल ले ही है. अगर कोई व्यक्ति संशोधित शर्तों को स्वीकार नहीं करता तो उस स्थिति में वो वॉट्सऐप का उपयोग नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण भी है. भारत में काम करने वाली कंपनी उपयोगकर्ताओं को अपनी मनमानी और एकतरफा शर्तों को स्वीकार करने के लिए कैसे बाध्य कर सकती है? दोनों व्यापारी नेताओ ने ये सवाल उठाया. नए नियम अगले महीने से लागू किए जाएंगे।

    यूजर्स के हर एक्शन पर होगी वॉट्सऐप की नजर

    उन्होंने कहा की वॉट्सऐप किसी भी यूजर की लोकेशन, यूसेज और फोन के मॉडल की जानकारी आसानी से ले सकता है यही नही नई नीतियों के माध्यम से वॉट्सऐप उपयोगकर्ता के बैंक खाते को भी एक्सेस कर पायेगा. इतना ही नहीं बल्कि वॉट्सऐप को यह भी पता होगा कि यूजर किसको और कितना भुगतान कर रहा है, साथ ही दूसरी जानकारियां जैसे कि यूजर ने क्या खरीदा और उसकी डिलीवरी कहां हो रही है, इसकी भी जानकारी वो आसानी से हासिल कर पायेगा. यह प्रत्येक उपयोगकर्ता को ट्रैक कर सकता है. ऐसे विशाल डेटा को प्राप्त करने के बाद, वे उपयोगकतार्ओं की खरीद और खर्च करने के व्यवहार के साथ साथ, वे क्या खाते हैं, विभिन्न वस्तुओं की आवश्यकताओं की मात्रा, यात्रा और गंतव्य, उड़ानों का उपयोग, रेलवे, टैक्सी, सड़क परिवहन आदि की सटीक जानकारी हासिल कर पायेगा।