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  • शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टर और DEO को जारी किया निर्देश, कहा- स्कूलों में ना दिया जाए प्रवेश…

    शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टर और DEO को जारी किया निर्देश, कहा- स्कूलों में ना दिया जाए प्रवेश…

    रायपुर। प्रदेश में स्कूल खुलने के बाद बच्चे और शिक्षक कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं. जिसे शिक्षा विभाग के डीपीआई ने संज्ञान में लेते हुए सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है. जिसमें कहा गया है कि कोरोना नियमों का सख्ती से पालन किया जाए. जिन छात्रों, शिक्षकों को सर्दी, खांसी और बुखार है, उनको स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाए. साथ ही संक्रमित मिले छात्र और शिक्षकों के इलाकों को कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाए।

    लोक शिक्षण संचालक जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि कोरोना काल में बच्चों को शिक्षा देना एक चुनौती है. इसके साथ ही प्रदेश के कई शासकीय और अशासकीय स्कूलों को खोले जाने के संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी किए गए हैं. आदेश के तहत कोरोना गाईडलाइन की सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी विभाग को दी गई है. साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि स्कूलों को उचित तरीके से सेनेटाइज कर लिया जाए, सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन किया जाए।

    बता दें कि राजनांदगांव के युगांतर पब्लिक स्कूल में 24 शिक्षक सहित उनके परिजन कोरोना संक्रमित पाए गए है. इसके अलावा सूरजपुर जिले के पंछीडांड शासकीय विद्यालय में गुरुवार को दो छात्र कोरोना संक्रमित पाए. जिसके बाद स्कूल को 14 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. इसके अलावा अंबिकापुर के सैनिक स्कूल कैम्पस में 8 शिक्षक की रिपोर्ट पोजिटिव आई है. जिसके बाद कैंपस में सेनेटाइज किया गया है।

  • बिलासपुर स्मार्ट सिटी द्वारा आमंत्रित निविदा को लेकर चल रहे विवाद का हाईकोर्ट ने किया खात्मा…

    बिलासपुर स्मार्ट सिटी द्वारा आमंत्रित निविदा को लेकर चल रहे विवाद का हाईकोर्ट ने किया खात्मा…

    बिलासपुर। अरपा नदी के किनारे रोड निर्माण के लिए बिलासपुर स्मार्ट सिटी द्वारा आमंत्रित निविदा को लेकर चल रहे विवाद का हाईकोर्ट ने खात्मा कर दिया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में प्रकाश एस्फाल्टिंग की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कंपनी को गलत तरीके के डिसक्वालिफाई कर नए सिरे से निविदा निकाली गई है. इससे प्रकाश एसफाल्टिंग को टंडर मिलना तय हो गया है।

    अरपा नदी के किनारे रोड निर्माण के लिए जारी टेंडर पर पनपे विवाद पर चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की युगल खंडपीठ में सुनवाई हुई. मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने पूर्व में फैसला सुरक्षित रखा था. शुक्रवार को जारी फैसले में हाईकोर्ट ने रायपुर कंस्ट्रक्शन की याचिकाओं को खारिज कर दिया, वहीं प्रकाश एस्फाल्टिंग की याचिकाएं स्वीकार कर ली।

    हाईकोर्ट ने रायपुर कंस्ट्रक्शन को स्मार्ट सिटी द्वारा अपात्र करने के निर्णय को सही पाया. कंपनी का मानना था कि कंपनी ने जो आवश्यक तथ्य छुपाए थे, उसे बताना चाहिए था. टेंडर के नियम में ठेका कंपनियों को अपने चल रहे काम को बताना शामिल था, लेकिन रायपुर कंस्ट्रक्शन रायपुर ने स्मार्ट सिटी के अंतर्गत लिए काम की जानकारी नहीं दी थी।

    इंदिरा सेतु से शनिचरी रपटा तक होगा सड़क निर्माण

    अरपा के दोनों किनारे इंदिरा सेतु से शनिचरी रपटा तक 1800-1800 मीटर सड़क और नाली निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना के लिए टेंडर जारी हुआ था। हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद इसमें टेंडर के एल-1 और एल-2 की समीक्षा के बाद टेंडर कमेटी टेंडर फाइनल करने से पीछे हट गई. नदी किनारे सड़क निर्माण के लिए तिलकनगर से गोंड़पारा, शनिचरी तक 500 परिवारों को बेदखल किया जा चुका है।

    शीघ्र शुरू होगा नाली और सड़क का निर्माण

    स्मार्ट सिटी के अधिकारी ने बताया कि इंदिरा सेतु से शनिचरी रपटा तक नदी के दोनों किनारे 1800-1800 मीटर सड़क एवं नाली निर्माण शीघ्र प्रारंभ होगा. सरकंडा की ओर फोरलेन रोड के लिए 45.16 करोड़ तथा इंदिरा सेतु से शनिचरी रपटा तक सिक्सलेन रोड के लिए 49.44 करोड़ का.टेंडर बुलाया गया. कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रकाश एस्फाल्टिंग का दोनों टेंडर मान्य हो गया है।

  • एस पी ने किया निलम्बित, थाने में शराब पीकर हंगामा कर रहा था प्रधान आरक्षक….

    एस पी ने किया निलम्बित, थाने में शराब पीकर हंगामा कर रहा था प्रधान आरक्षक….

    बिलासपुर। तखतपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक रामकुमार साहू ने ड्यूटी के दौरान शराब पीकर जमकर हंगामा मचाया था. थाने में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे आम लोगों से भी उन्होंने बदतमीजी की थी. इसकी शिकायत एसपी प्रशांत अग्रवाल से की गई थी. शिकायत सही पाए जाने के बाद तत्काल प्रधान आरक्षक को निलबिंत कर दिया गया है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रधान आरक्षक सुबह से ही शराब पीकर थाने में बैठा था. उन्होंने इतना शराब का सेवन कर लिया था कि उनको भी नहीं पता था कि किससे कैसी बात करनी है. इसी दौरान एक व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया. इसके बाद इसकी शिकायत एसपी के पास पहुंची थी।

    मामले को संज्ञान में लेते हुए एसपी प्रशांत अग्रवाल ने पहले आरक्षक का मेडिकल कराया. जांच में शराब की पुष्टि होने के बाद आरक्षक को निलबिंत कर लाइन अटैच कर दिया गया।

    एसपी प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक के खिलाफ ड्यूटी के दौरान शराब पीकर आने की शिकायत मिली थी, उनका मेडिकल कराया गया, शिकायत सही पाए जाने के बाद उनको निलंबित किया गया है. थाने में आये लोगों के साथ दुर्व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस आम लोगों की सुरक्षा के लिए है।

  • नहीं रहे मामन चन्द छपारिया…

    नहीं रहे मामन चन्द छपारिया…

    खरसिया। नगर के प्रतिष्ठित फर्म डभरा रोड निवासी मामन चंद विजय छपारिया के संचालक विजय छपारिया के पिता श्री मामन चन्द छपारिया का दुखद निधन 18 फरवरी की रात्रि उनके निवास स्थान में हो गया। मामन चन्द छपारिया 92 वर्श के थे, उनके निधन के समाचार से नगर में शोक की लहर दौड़ गई स्वर्गीय मामन चन्द छपारिया धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में हमेशा अग्रणी रहते थे वे अपने पीछे 4 पुत्र विजय कुमार, बजरंग लाल, भीम छपारिया, राजू छपारिया, एवं 2 पुत्री पोता पोती सहित भरा पूरा परिवार रोता बिलखते छोड़ गये। उनकी अंतिम यात्रा डभरा रोड स्थित निवास स्थान से निकाली गयी, मौहापाली रोड़ स्थित स्थानीय मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

  • कोविड-19 नियमों का उल्लंघन किया लड़की ने, तो पुलिसवाले ने Kiss करके छोड़ा,पुलिसकर्मी सस्पेंड…

    कोविड-19 नियमों का उल्लंघन किया लड़की ने, तो पुलिसवाले ने Kiss करके छोड़ा,पुलिसकर्मी सस्पेंड…

    पेरू की राजधानी लीमा में एक लड़की ने कोविड-19 नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद पुलिसकर्मी ने जुर्माना लगाने के बजाय किस करके उसे छोड़ दिया.पुलिसकर्मी की यह हरकत पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसे एक टीवी चैनल ने शेयर किया है।

    वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी लड़की की जानकारी अपने नोटपेड पर लिखता नजर आता है और वह अज्ञात लड़की सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोविड नियमों का उल्लंघन कर रही थी और पुलिसकर्मी ने उसे ऐसा करने की इजाजत दिया।

    इतना ही नहीं, उसने अपना मास्क उतारकर उसे किस भी किया. मामला सामने आने के बाद पुलिसकर्मी को बर्खास्त कर दिया गया है. पेरू की राजधानी लीमा के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी, घायल बिलासपुर में भर्ती…

    कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी, घायल बिलासपुर में भर्ती…

    बिलासपुर। गेवरा कोयला खदान में भाग रहे अज्ञात संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ द्वारा की गई गोलीबारी की गई, लेकिन गाड़ी में सवार लोग जंगलों से होते हुए भाग निकले. घटना के बाद बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में गोली लगने से उपचार के लिए कोरबा के युवक के भर्ती होने की सूचना पर दीपका पुलिस पूछताछ के लिए रवाना हो गई है।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात गेवरा कोयला खदान में संदिग्ध वाहन दिखने पर सीआईएसएफ क्यूआरटी के गस्ती दल ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वाहन रुकने की वजह सीआईएसएफ के वाहन को टक्कर मारकर भागने लगे. इस पर जवानों ने फायरिंग की, लेकिन वाहन में सवार लोग जंगल के रास्ते से भाग निकले।

    इसके बाद बिलासपुर के सरकण्डा थाना से सूचना मिली की अपोलो हास्पिटल बिलासपुर में सालिक राम गोंड पिता बिरन सिंह गोंड (32 साल) निवासी खल्लारी पारा, ग्राम नोनबिर्रा, थाना पाली, जिला कोरबा गोली लगने से घायल होकर इलाज के लिये भर्ती है. युवक की हालत खतरे से बाहर है. युवक ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि रात्रि में गेवरा खदान में गाड़ी लेकर घुसने के दौरान सीआईएसएफ गस्ती दल की फायरिंग से उसे चोट लगी है।

    इस घटना के संबंध थाना दीपका में अपराध क्रमांक 52/2021 धारा 186, 353, 447, 427, 34 भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है. साथ ही दीपका थाना की पुलिस टीम घायल सालिक राम गोंड से पूछताछ करने अपोलो हास्पिटल बिलासपुर रवाना किया गया है।


    चार पहिया में गए थे मवेशी चराने
    पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय लोगों का कहना है कि घायल युवक मवेशी खोजने के लिए गया था, जिस पर सीआईएसएफ के गस्ती दल ने गोलिया चलाईं है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि रात में चार पहिया वाहन में कोई कैसे मवेशी खोजने के लिए जा सकता है. हालांकि, इस पूरे मामले पर एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर का कहना है कि ग्रामीणों की बात को सिरे से नकारते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है ये लोग खदान में क्या करने के लिए गए थे।

  • पूर्व सांसद की गिरफ्तारी कभी भी…सीजेएम कोर्ट ने जारी किया वारंट….

    पूर्व सांसद की गिरफ्तारी कभी भी…सीजेएम कोर्ट ने जारी किया वारंट….

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 6 जनवरी को हुए गैंगवार में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या मामले में लखनऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की गई है. पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. पुलिस ने धनंजय को हत्या की साजिश रचने का आरोपी बनाया है।

    लखनऊ की सीजेएम कोर्ट ने धनंजय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है. इससे पहले भी इस केस में पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह का नाम सामने आया था. गैंगवार में घायल शूटर का इलाज करने वाले सुल्तानपुर के डॉ. एके सिंह ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि धनंजय सिंह ने ही उन्हें फोनकर घायल शूटर के इलाज के लिए कहा था।

  • क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    क्या आपके क्रेडिट /डेबिट कार्ड में wi fi का निशान है…

    सुरक्षित उपयोग कैसे करें

    दोस्तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से wifi क्रडिट ,डेबिट कार्ड अथवा कॉन्टेक्टलेस कार्ड को मार्केट में लाया गया था ।इस कार्ड को स्वैप करने की जरूरत नही होती है ,बिना पिन के आप इस कार्ड से पेमेंट कर सकते है ।जैसे ही आप इस कार्ड को pos मशीन के 4 cm के दायरे में लाते है ।आपका पैसा ऑटोमैटिकली निकल जाता है।इसे है #कार्ड टेपिंग कहते है ।। कार्ड में wifi का निशान बना होता है। यह कार्ड नियर फील्ड कम्युनिकेशन रेडियो फ्रीक्वेंसी ऑथेंटिकेशन तकनीक पर काम करती है ।।इसमें एक छोटी सी चीप लग होती है एक छोटी सी एंटीना लगा होता है ।जिससे सिग्नल निकलता है ।

    दोस्तो इस कार्ड की लिमिट 2000 की होती है।उससे ज्यादा इस कार्ड से एक बार मे रुपये नही निकाल सकते । हालांकि अभी इसकी लिमिट 5000 कर दी गई है ।यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सही है ।लेकिन साइबर ठगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है।
    दिल्ली पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा था ,जो हाथ मे पॉश मशीन लेकर चलते थे ,भीड़ भाड़ वाले इलाके में ,लोगों के पॉकेट के किनारे 4 cm की दूरी पर मशीन लगाकर 2 हजार निकाल लिया करते थे।

    जाने कार्ड को सुरक्षित कैसे रख सकते है

    बील पेमेंट करना हो तो स्वयं कार्ड को pos मशीन के पास ले जाये ,टेप करे। जब रकम आपका निकल जायेगा ,वैसे ही आपके मोबाइल में अलर्ट मेसेज आएगा।

    pos मशीन के 4 cm के दायरे में आने के बाद ही इस कार्ड से पैसे निकल जाते है ।इसके लिए कार्ड को एलुमिनियम के फॉइल पेपर पर लपेट कर रख सकते है।

    RFID ब्लॉकिंग वालेट्स जो फ्रीक्वेंसी को रोकता है ।का उपयोग कर सकते है। यह वालेट्स मार्किट में उपलब्ध है।

  • 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए श्रम कानून बनाए गए….

    29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए श्रम कानून बनाए गए….

    मोदी सरकार चौंकाने वाले निर्णयों के लिए जानी जाती है। एक बार फिर उसने नौकरीपेशा लोगों को चौंकाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने सैलरी के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जिससे आपकी टेक होम सैलरी कम हो जाएगी।

    नौकरीपेशा लोगों के लिए देश में अभी तक 29 श्रम कानून थे। केंद्र सरकार ने बदलाव करते हुए इनकी संख्या 29 से 4 कर दी है। ये कानून हैं- व्यावसायिक सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य और कार्य की स्थितियां, औद्योगिक संबंध और सामाजिक सुरक्षा कानून। एक अप्रैल से नए कानून लागू हो जाएंगे और एक मई की सैलरी पर इनका असर भी दिखना शुरू हो जाएगा।

    सबसे पहले सैलरी का गणित समझना जरूरी

    नौकरी करने वाले लोग दो शब्दों से परिचित होते हैं, पहला CTC यानी कॉस्ट टु कंपनी और दूसरा टेक होम सैलरी, जिसे इन-हैंड सैलरी भी कहा जाता है।

    1. CTC: CTC यानी आपके काम के ऐवज में कंपनी का कुल खर्च, यह आपकी कुल सैलरी होती है। इस सैलरी में आपकी बेसिक सैलरी तो होती ही है, इसके अलावा हाउस अलाउंस, मेडिकल अलाउंस, ट्रैवल अलाउंस, फूड अलाउंस और इंसेंटिव भी होता है। इन सबको मिलाकर आपकी टोटल सैलरी तय होती है, जिसे CTC कहा जाता है।

    2. टेक होम सैलरी: जब आपके हाथ में सैलरी आती है तो वह आपकी CTC से कम होती है। वजह- कंपनी आपकी CTC यानी कुल सैलरी से कुछ पैसा प्रोविडेंट फंड यानी PF के लिए काटती है, कुछ मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम के तौर पर काटती है और इसके अलावा भी कुछ मदों में कटौती की जाती है। इन सभी के बाद जो पैसा आपके हाथ में आता है, वह आपकी इन-हैंड सैलरी होती है।

    कैसे कम हो जाएगी आपकी सैलरी?

    जिसकी बेसिक सैलरी CTC की 50% है, उसे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन जिसकी बेसिक सैलरी CTC की 50% नहीं है उसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि इन नियमों के तहत अब किसी की भी बेसिक सैलरी CTC के 50% से कम नहीं हो सकती।

    दरअसल PF का पैसा आपकी बेसिक सैलरी से कटता है, जो बेसिक सैलरी का 12% होता है। यानी बेसिक सैलरी ‍जितनी ज्यादा होगी PF उतना ज्यादा कटेगा। पहले लोग टोटल CTC से बेसिक सैलरी कम कराकर अलाउंस बढ़वा लेते थे, जिससे टैक्स में छूट भी मिल जाती थी और PF भी कम कटता था। इससे इन-हैंड सैलरी बढ़ जाती थी।

    नोट- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और अन्य कटौतियां को 1 हजार माना गया है, जबकि यह हर कंपनी में अलग-अलग होता है। यह कंपनी की सैलरी पॉलिसी और एंप्लॉय क्लास पर निर्भर करता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की, जब सत्यापित करने वाले दोनों गवाहों की मौत हो गई हो तो वसीयत के निष्पादन को कैसे साबित किया जाए ?

    सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की, जब सत्यापित करने वाले दोनों गवाहों की मौत हो गई हो तो वसीयत के निष्पादन को कैसे साबित किया जाए ?

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में कहा है कि ऐसी स्थिति में जहां वसीयत में गवाही देने वाले दोनों गवाहों की मौत हो जाती है, यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि गवाही देने वाले कम से कम एक गवाह की लिखावट उसकी ही है। इस मामले में, प्रासंगिक समय पर, प्रश्न में वसीयत में गवाही देने वाले दोनों व्यक्ति जीवित नहीं थे। सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कार्यवाही में गवाहों को एक गवाह द्वारा दिए गए सत्यापित बयान की प्रति प्रस्तुत करके वसीयत को साबित करने की मांग की गई थी।

    हालांकि, उच्च न्यायालय ने माना कि वसीयत को सत्यापित करने वाले गवाहों में से एक की गवाही ने वसीयत के उचित निष्पादन को स्थापित नहीं किया है, इसमें उसने दूसरे कथित गवाह द्वारा वसीयत को सत्यापित करने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष अपील में मुद्दा यह था कि जबकि दोनों साक्षी गवाह मर चुके हैं तो क्या अभी भी साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत, सत्यापन कानून की आवश्यकता है और भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 के तहत, दो गवाहों द्वारा सत्यापन को प्रमाणित किया जाना है? या यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि गवाही देने वाले कम से कम एक गवाह की लिखावट उसकी ही है, जो उसको साबित करने के अलावा साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 की शाब्दिक कमान है?

    न्यायमूर्ति जोसेफ द्वारा लिखित निर्णय में वसीहत के निष्पादन के प्रमाण से संबंधित कानून को सफलतापूर्वक निपटाया गया है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 अप्राधिकृत वसीयत के निष्पादन से संबंधित है, इस आदेश में कि न केवल एक वैध वसीयत बनाई जाएगी, यह आवश्यक है कि वसीयतकर्ता को दस्तावेज़ को निष्पादित करना चाहिए, बल्कि निष्पादन को कम से कम दो गवाहों द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 68, कानून द्वारा सत्यापित किए जाने वाले दस्तावेज के निष्पादन के प्रमाण से संबंधित है। इस प्रावधान के अनुसार, वसीहत के मामले में, यदि कोई गवाह जीवित है और अदालत की प्रक्रिया के अधीन है और सबूत देने में सक्षम है, तो, वसीयत तभी साबित की जा सकती है, जब इसके निष्पादन को साबित करने को लिए गवाह में से किसी एक को गवाही के लिए बुलाया जाए।इसके अलावा, यह भी एक सुलझा हुआ कानून है, ऐसे मामलों में, कम से कम एक गवाह को न केवल उसके द्वारा जांच को प्रमाणित करने के लिए छानबीन की जानी चाहिए, बल्कि उसे अन्य गवाह [[1995 (6) SCC 213]) द्वारा सत्यापन भी साबित करना होगा।

    इस मुद्दे का जवाब देते हुए अदालत ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 69, साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 में सन्निहित आवश्यकता से प्रस्थान को दर्शाती है। बेंच द्वारा इस संबंध में की गई प्रासंगिक टिप्पणियों को नीचे उद्धृत किया गया है “वसीयत के मामले में, जिसे भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 में प्रदान किए गए मोड में निष्पादित किया जाना आवश्यक है, जब कोई गवाह उपलब्ध है, तो वसीयत को उसकी जांच करके साबित किया जाना चाहिए। उसे न केवल साबित करना होगा कि साक्षत्कार उसके द्वारा किया गया था, बल्कि उसे दूसरे गवाह द्वारा भी सत्यापित गवाही को साबित करना चाहिए। यह, कोई संदेह नहीं है, इस स्थिति के अधीन जो साक्ष्य अधिनियम की धारा 71 में चिंतन किया गया है जो अन्य दस्तावेज़ों के बीच में, अन्य साक्ष्य को सबूत में जोड़ने की अनुमति देता है, जहां उपस्थित गवाह ने वसीयत या अन्य दस्तावेज़ के क्रियान्वयन से इंकार किया है या याद नहीं किया है। दूसरे शब्दों में, दस्तावेज़ के तहत वसीयत करने वाले या वसीयत के उत्तराधिकारी का भाग्य, जिसे कानून द्वारा सत्यापित किया जाना आवश्यक है, सत्यापित गवाह की गवाही पर ही आधारित नहीं रखा गया है और कानून गवाह द्वारा दस्तावेज के निष्पादन से इनकार करने के बावजूद दस्तावेज़ को प्रभावित करने में सक्षम बनाता है। ” (पैरा 70)

    अदालत ने आगे कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए मामले में, जहां तक साबित हो रहा है कि जहां तक साक्षी गवाह का संबंध है, यह है कि साक्षी में से किसी एक की गवाही उसकी लिखावट में है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 पर वापस लौटते हुए, हमारा विचार है कि इसमें आवश्यकता यह होगी कि यदि दस्तावेज को निष्पादित करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर उसकी लिखावट में साबित होते हैं, तो एक गवाह की गवाही को साबित करना है। दूसरे शब्दों में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए एक मामले में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 के अनुसार आवश्यक है कि दोनों गवाहों द्वारा किए गए सत्यापन को कम से कम एक गवाह की जांच करके साबित किया जाए, जिसके साथ विवाद किया गया है। ऐसा हो सकता है कि साक्ष्य के गवाह द्वारा दिए गए सबूत, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के अर्थ के भीतर, अन्य गवाह द्वारा सत्यापन से संबंधित सबूत हो सकते हैं, लेकिन यह वैसा नहीं है, जैसा कि इसे कानूनी आवश्यकता बताया गया है। धारा के तहत दोनों गवाहों द्वारा सत्यापन को साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 द्वारा कवर किए गए मामले में साबित किया जाना है। संक्षेप में, साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 के तहत कवर किए गए एक मामले में, जहां तक साबित हो रहा है कि जहां तक साक्षी गवाह का संबंध है, वह यह है कि उपस्थित गवाह में से एक का सत्यापन उसकी लिखावट में है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 68 धारा की भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध है जैसा कि अदालत ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों गवाहों के सत्यापन को साबित करना होगा लेकिन साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 में इसकी आवश्यकता नहीं है। (पैरा 71)