3. टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक मेन्यूफैक्चरिंग जैसा काम करने वाली बड़ी कंपनियों को सिंगल शिफ्ट में काम करने की इजाजत दी जा सकती है। बशर्ते उनके पास सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की पूरी व्यवस्था हो।
4. एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों और लघु उद्योगों को मिनिमम मैनपॉवर के साथ काम करने की इजाजत दी जाएगी। ऐसे उद्योगों का माल ले जाने का पास इश्यू करते समय संबंधित अधिकारी उसकी जांच कर सकेंगे और निर्यात की इजाजत दे सकेंगे।
5. इन उद्योगों को सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और सुरक्षा के इंतजाम करने पर न्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करने की इजाजत दी जा सकती है।
भारी इलेक्ट्रिकल आइटम जैसे ट्रांसफार्मर और सर्किट व्हीकल्स
ऑप्टिक फाइबर केबल सहित टेलीकॉम इक्विपमेंट और पुर्जे
कंप्रेसर और कंडेनसर यूनिट
स्टील और फेरस अलाय मिल
स्पिनिंग और जिनिंग मिल, पावर लूम
रक्षा और संबंधित उत्पाद बनाने वाले यूनिट
सीमेंट प्लांट (सीमेंट का उत्पादन एक निरंतर प्रक्रिया होती है और इसे तीन शिफ्ट में संचालित किया जाता है। इसे सुरक्षा सैनिटेशन और डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने पर अनुमति दी जा सकती है)
लकड़ी का पल्प और कागज निर्माण इकाइयां (ऐसे स्थानों पर उत्पादन शुरू किया जा सकता है जहां कोरोनावायरस के मामले कम आए हो इसके लिए राज्य सरकारों के डाटा को आधार बनाया जा सकता है)
उर्वरक प्लांट
पेंट और डाई उत्पादन की इकाइयां
सभी प्रकार के खाने-पीने की वस्तुएं
प्लास्टिक उत्पादन इकाइयां
बीज प्रोसेसिंग इकाइयां
ऑटो मोबाइल इकाइयां
रत्न और आभूषण निर्माण की इकाइयां (बड़े और संगठित क्षेत्र में)
सभी एसईजेड और विशेष आर्थिक जोन में उत्पादन की इजाजत रहेगी, लेकिन उन्हें सैनिटाइजेशन और डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा)
6. निरंतर उत्पादन करने वाले उद्योग जैसे कि स्टील, पावर और माइनिंग को गृह मंत्रालय ने पहले ही लॉकडाउन से बाहर रखा है। ये उद्योग निरंतर काम करते रहेंगे।
7. सभी बड़े उद्योगों में शिफ्ट को इस तरह संचालित किया जाए कि उसकी शुरुआत और आखिर में एकदम भीड़ इकट्ठी ना हो।
8. हाउसिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को काम करने की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए उन्हें मजदूरों को साइट पर ही रहने का इंतजाम करना होगा। साथ ही ठेकेदार को सैनिटाइजेशन और डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा।
9. छोटे और बड़े सभी तरह के मालवाहक वाहनों को कहीं भी आने-जाने की छूट होगी। संबंधित अधिकारी इन्हें राज्य के अंदर या बाहर, एक शहर से दूसरे शहर तक जाने से नहीं रोकेंगे। ऐसे वाहन खाली हो या भरे इसके बारे में अधिकारी कोई सवाल नहीं करेंगे।
10. ऐसे सभी उद्योग जिन्हें संचालित करने की अनुमति दी गई है वह कामगारों को ड्यूटी पर बुला सकेंगे। अगर कोई मजदूर काम पर नहीं आता है, तो कंपनी या व्यक्ति उसे बिना काम के तनख्वाह देने के लिए बाध्य नहीं होगा। यह श्रम मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट किया जाएगा।
11. फल और सब्जी विक्रेता जैसे सभी स्ट्रीट वेंडर्स को काम करने की इजाजत दी जाएगी, ताकि लोगों के घर तक सामान पहुंचाया जा सके और इस वर्ग के सामने आने वाली नकदी की समस्या दूर की जा सके।
12. चुनिंदा मरम्मत यूनिट को ऑपरेट करने की इजाजत होगी। इनमें छोटी इकाइयां जैसे मोबाइल , रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, टेलीविजन, प्लंबिंग, चर्मकार, प्रेस वाले, इलेक्ट्रीशियन, ऑटोमोबाइल मैकेनिक, साइकिल रिपेयर मैकेनिक को काम करने की इजाजत दी जाएगी। इन लोगों को अपने साथ आईडी कार्ड रखना होगा और वे पहले से जहां काम कर रहे थे, उसी जगह पर काम करेंगे। इससे लोगों को लॉक डाउन के दौरान जरूरी सुविधाएं मिल पाएंगी और काम करने वालों के पास से भी नकदी की समस्या दूर होगी। इन सेवाओं से किसी प्रकार की भीड़ इकट्ठी नहीं होती है ,इसलिए इन्हें काम करने दिया जा सकता है। इस तरह की मरम्मत का काम करने वाली ई कॉमर्स सेवाओं को भी ऑपरेट करने की इजाजत दी जा सकती है।
13. रबर: रबर से बनी कई चीजें मेडिकल और हेल्थ केयर के साथ ही घरेलू कामों में इस्तेमाल होती हैं। लिहाजा, इनके उत्पादन को मंजूरी दी गई है। मैन्यूफैक्चिरिंग के दौरान सेफ्टी, सैनिटेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के मापदंडों का पालन जरूरी होगा।
1) प्रेशर कुकर में इस्तेमाल की जाने वाली रबर (गास्केट्स)
2) एलपीजी यानी घरेलू गैर में इस्तेमाल होना वाला होज पाइप
3) सर्जिकल ग्लव्स
4) एड्हेसिव यानी चिपकाने वाली चीजें
5) हॉस्पिटल में उपयोग की जाने वाली रबर शीट्स
6) मेडिकल सिलिकॉन
7) फार्मास्युटिकल स्टॉपर्स (दवाएं सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होते हैं)
8) लेटेक्स गुड्स यानी रबर से बनी चीजें
9) हॉस्पिटल्स में इस्तेमाल की जाने वाली ट्रॉलियों के रबर से बने पहिए
10) एप्रॉन्स जो रबर कोटेड हों
11) फेस मास्क बनाने में इस्तेमाल होने वाले एड्हेसिव्स
12) रबर के जूते और सेफ्टी शूज
13) कैथेटर्स
14) मेडिकल डिवाइसेज यानी उपकरण
15) आईव्ही ट्यूब्स
16) एनेसथेसिया बैग्स (बेहोश करने के लिए डॉक्टर इस्तेमाल करते हैं)
17) वेंटीलेटर बेलोस (वेंटीलेटर में उपयोग किए जाने वाले स्पेशल रबर बेल्ट)
18) रबर स्टॉपर्स (मरीज को बॉटल लगाने में उपयोग होते हैं)
19) डेंटल सप्लाइज (रबर डैम्स, ग्लव्स, रबर थ्रेड और डेंटल बैंड्स)
14. लकड़ी या प्लायवुड के वो जरूरी सामान जो फार्मा कंपनी और एफएमसीजी कंपनियां पैकेजिंग में इस्तेमाल करती है। इनके लिए राज्य की संबंधित संस्थाओं की मंजूरी भी जरूरी होगी।
15. कांच और मेटल इंडस्ट्रीज को कम से कम कर्मचारियों के साथ मैन्यूफैक्चिरिंग की मंजूरी। इनमें रिसाइक्लिंग प्रोसेस शामिल होगा।
16. बैंक और कस्टम डिजिटल डॉक्यूमेंट्स बॉन्ड्स के साथ स्वीकार कर सकेंगे। मूल दस्तावेज यानी ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स लॉकडाउन खत्म होने के बाद पेश किए जा सकेंगे।
17. खेती यानी एग्रीकल्चर से जरूरी सभी गतिविधियों को मंजूरी। इनमें एग्रो कैमिकल (खाद या कीटनाशक आदि) प्रोडक्शन, डिस्ट्रब्यूशन और सेल (बिक्री) शामिल हैं।
लगभग साफ हो गया है कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा। इसका ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है, लेकिन इस बार आम जनता को पहले जितनी परेशानी नहीं होगी। केंद्र सरकार ने तमाम पक्षों के साथ वार्ता करते एक प्लान तैयार किया है, जिसमें शर्तों के साथ जरूरी उद्योगों और दूकानो को खुला रहने पर सहमति बनी है। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआईटी) ने Lockdown बढ़ाने जाने की स्थिति में प्लान के तौर पर गृह मंत्रालय को 15 उद्योगों की सूची सौंपते हुए इन्हें कुछ शर्तों के साथ संचालन की अनुमति देने की सिफारिश की है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम जनता के साथ गरीब वर्ग को होगा। साथ ही अर्थव्यवस्था भी चलेती रहेगी। जानिए क्या है पूरा प्लान –
यहां मिल सकती है अनुमति
– न्यूनतम कर्मचारियों के साथ एक शिफ्ट में काम कर सकेंगे कई अहम उद्योग
– सीमेंट उद्योग में सुरक्षा के मानकों के साथ तीनों शिफ्ट में काम की अनुमति
– निर्माण स्थल पर ही मजदूरों के रहने की व्यवस्था के साथ कंस्ट्रक्शन को मंजूरी
– गलियों में ठेले लगाने वालों को अनुमति ताकि घर-घर फल-सब्जी की आपूर्ति हो
– फ्रिज, टीवी, एसी रिपेयर करने वाले भी सुरक्षा के प्रबंध करते हुए कर सकेंगे काम
– जरूरत को देखते हुए धोबी, बढ़ई और इलेक्ट्रीशियन के काम पर नहीं रहेगी रोक
इसलिए जरूरी है कुछ उद्योगों का काम करना
गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को लिखी चिट्ठी में पत्र में डीपीआइआईटी ने कहा है कि आर्थिक स्थिति में सुधार और लोगों के हाथ में नकदी पहुंचाने के लिए कुछ आर्थिक गतिविधियों को शुरू करना जरूरी है। लॉकडाउन की अवधि और उसके नियमों पर आखिरी फैसला लेते समय इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
टीम मोदी भी यही चाहती है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम के साथी मंत्रियों की राय भी कुछ इसी तर्ज पर आई है। कुछ दिन पहले ही कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक में पीएम ने कहा था कि वे इसकी समीक्षा करें कि कैसे धीरे-धीरे लॉकडाउन से बाहर आया जा सकता है। उन्होंने इस दौरान शुरू किए जा सकने वाली औद्योगिक गतिविधियों की पहचान करने को भी कहा था।
..ताकि मजदूरों का चलता रहे काम
– अगर कोई उद्योग कोरोना वायरस प्रसार से बचते हुए औद्योगिक गतिविधि को शुरू करने का ब्लू प्रिंट देता है तो उसे भी मंजूरी दी जा सकती है। लेकिन उसे यह बताना होगा कि बीमारी से बचने और किसी संक्रमण की स्थिति में इलाज के लिए क्या प्रबंध है। मसलन उसके पास संक्रमण रोकने के लिए डिसइंफेक्टेंट हो, पास में अस्पताल हो, कम से कम लोगों की मौजूदगी में कार्य हो सके।