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  • आम आदमी ने जिंदल को लगवाया 1 सौ 54 करोड़ का फटका…

    आम आदमी ने जिंदल को लगवाया 1 सौ 54 करोड़ का फटका…

    दिल्ली। एक आम आदमी की औकात क्या होती है, ये जिंदल को आज एक कॉमन मैन के ताकत का एहसास निश्चित तौर पर हो रहा होगा । रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र  निवासी दुकालू राम ने  जिंदल को इतना बड़ा फटका दिया है कि जिसे भूल पाना उसके बस की बात नहीं  है। दुकालू राम ने  जिंदल की ओर से कोयला उत्खनन के लिए  खोदे गए खदान में नियम कानूनों की उड़ाई जा रही धज्जियों की शिकायत एनजीटी यानी राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल में की थी। इस शिकायत पर पड़ताल हुई और पड़ताल में जेपीएल की ओर से की जा रही गड़बड़ियां उजागर हो गई और तब एनजीटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए दुकालू राम के शिकायत को सही ठहराया और जिंदल पावर लिमिटेड रायगढ़ पर 154 करोड़ ₹8 लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया। जुर्माने की राशि जिंदल को 1 महीने के भीतर ही जमा करनी होगी ।

    इसके अलावा एनजीटी ने सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) पर भी 6.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. दोनों कंपनियों को कुल मिलाकर 160.78 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति एक महीने के भीतर भरने का आदेश दिया गया है.

    जिंदल पावर लिमिटेड के चेयरमैन उद्योगपति और पूर्व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल हैं. एनजीटी ने इसे 2006 से 2015 के बीच रायगढ़ के गारे पाल्मा IV/2 और गारे पाल्मा IV/3 खदान में अवैध खनन और कई पर्यावरण नियमों के गंभीर उल्लंघन का दोषी पाया है.

    खदान के पास के एक गांव के दुकालू राम ने साल 2014 में कंपनी के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी और मांग किया था कि कंपनी तमाम उल्लंघनों को लेकर क्षतिपूर्ति करे. पिछले करीब छह सालों में एनजीटी ने इसे लेकर कई सारे आदेश दिए हैं.

    अधिकरण ने जेपीएल को खनन के लिए वन भूमि का इस्तेमाल करने, रसायन और कोयले का पानी  खेतों में डालकर किसानों की फसल बर्बाद करने, ग्रीन बेल्ट का निर्माण न करने, खुले ट्रक में कोयला ले जाने, पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने, पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना ओपन-कास्ट खदान की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, सड़कों पर पानी का छिड़काव न करना, भूजल का सूखना और प्रदूषण के पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया न कराने का दोषी पाया है.

    JPL को 23 मई 1998 को इस खदान में खनन की मंजूरी मिली थी. बिजली बनाने के लिए कंपनी को कुल 964.65 हेक्टेयर में खनन की मंजूरी मिली थी, जिसमें से 48.20 हेक्टेयर वन भूमि है.

    2006 से 2015 के बीच इस खदान का संचालन जिंदल कोल लिमिटेड द्वारा किया गया था और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था.

    खनन कंपनी पर आरोपों को लेकर एनजीटी ने साल 2016 में पर्यावरण मंत्रालय को आदेश जारी कर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था कि कंपनी ने पर्यावरण मंजूरी का उल्लंघन किया है या नहीं. इस पर मंत्रालय ने 30 जनवरी 2017 को सौंपे अपने रिपोर्ट में कहा कि कंपनी ने पर्यावरण मंजूरी की शर्तों और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया गया है.

    इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने 18 अप्रैल 2017 को पर्यावरण मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिवों की एक समिति बनाई, जिसे सभी पक्षों की सुनवाई कर एक रिपोर्ट सौंपनी थी. इस समिति ने 18 दिसंबर 2017 को सौंपे अपने रिपोर्ट में काफी चिंताजनक खुलासा किया कि किस तरह से कोयला कंपनी द्वारा अवैध खनन से विभिन्न वर्गों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है.

    समिति ने मामले में पूर्व रिपोर्टों को सही पाया और जेपीएल को अवैध खनन, गांव की संपत्ति पर कब्जा, खदान में ब्लास्टिंग के कारण घरों को क्षति, आग की लपटें निकलते रहना, खनन से हवा की गुणवत्ता पर प्रभाव, स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव इत्यादि का दोषी पाया.

    इसके बाद एक ओवरसाइट समिति बनाई गई जिसने 14 जून 2019 को सौंपे अपने रिपोर्ट में कहा कि इन उल्लंघनों को लेकर जेपीएल और एसईसीएल को 160.78 करोड़ रुपये का हर्जाना भरना पड़ेगा. समिति ने खनन कंपनी द्वारा किए गए विभिन्न गंभीर उल्लंघनों की वजह से पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत आंकलन कर ये निष्कर्ष निकाला है.

    एनजीटी ने इसे लेकर जिंदल पावर लिमिटेड द्वारा उठाई गईं सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया है. अधिकरण ने आदेश दिया कि जेपीएल और एसईसीएल एक महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को हर्जाने का भुगतान करें. इसके अलावा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड (सीइसीबी) को कहा गया है कि वे एक्शन प्लान बनाएं कि किस तरह इस राशि को खर्च किया जाएगा.
    इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के स्थानीय ऑफिस, सीपीसीबी, रायपुर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, भोपाल के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट और धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइंस को मिलाकर एक समिति बनाने को कहा गया है.

    इसके अलावा एसईसीएल को कहा गया है वे खनन प्रभावित गांव के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं का उचित इंतजाम करें.

    क्या कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी

    सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व में जिंदल की ओर से इस खदान का संचालन किया जाता था लेकिन बाद में पिछले कुछ सालों से उस खदान को एसईसीएल चला रही है। खदान के प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य कर काफी समस्याएं हैं खदान की ओर से जो पानी छोड़ा जाता था वह दूषित पानी सीधे नदी में मिलता था ऐसी तमाम विसंगतियों को लेकर दुकालू राम सहित कई ग्रामीणों ने एनजीटी में शिकायत की थी जहां यह मामला चल रहा था केंद्रीय स्तर पर भी शिकायत की जांच की गई थी और इस जांच में शिकायत के सभी तथ्य सही पाए गए थे। एनजीटी की ओर से आया यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है और ग्रामीणों के लिए राहत भरा है।

    सुप्रीम कोर्ट से भी निराश होकर लौटे हैं जिंदल और एसईसीएल

    इस संबंध में जानकारी देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी ने बताया कि एनजीटी में फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट का भी जिंदल और एसईसीएल की ओर से दरवाजा खटखटाया गया लेकिन यहां से भी उन्हें ग्रीन ट्रिब्यूनल का ही रास्ता दिखाया गया। ऐसे में अब जिंदल और एसईसीएल को ठोकी गई जुर्माना राशि हर हाल में पटाना ही होगा।

  • 11 से शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे रासायनिक खाद, बीज व कीटनाशक दवा दुकान….

    11 से शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे रासायनिक खाद, बीज व कीटनाशक दवा दुकान….

    रायगढ़। कलेक्टर श्री यशवंत कुमार ने जिले में लॉकडाउन के दौरान रासायनिक खाद, बीज, कीटनाशक दवा दुकान को विकासखण्डवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक कोरोना वायरस से बचाव एवं सुरक्षा के शर्तों के आधार पर खोले जाने हेतु अनुमति प्रदान की है। जिसके तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठान में एक समय में एक ही कृषक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये एवं प्रतिष्ठान को सेनेटाईज किया जाये। दुकान के बाहर साबुन एवं स्वच्छ पानी की व्यवस्था करें तथा प्रत्येक क्रेता को हाथ धोने के बाद ही दुकान में प्रवेश करायें। व्यवसायिक परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, ग्राहक व व्यवसायी तथा उपस्थित सभी व्यक्ति मास्क लगाकर ही सेवा एवं लेनदेन करेंगे।

    विकासखण्ड रायगढ़ अंतर्गत मंगल चन्द्र सत्यनारायण-गद्दी चौक सदर बाजार रायगढ़, मंगल चन्द्र राजेन्द्र कुमार-मोदी बिहार रायगढ़, ए.ई.इन्टरप्राईजेस-बीड़पारा रायगढ़, पुरूषोत्तम दास अग्रवाल-पुरानी हटरी, शंकर टे्रडिंग कंपनी-कोतरा, महामाया कृषि केन्द्र-कबीर चौक, रवि कृषि केन्द्र-कुलबा, चिनी लाल पटेल-तारापुर, कन्हैया कृषि केन्द्र-पंडरीपानी, किशान घर-कबीर चौक, पारस कृषि केन्द्र-सहसपुर, मेसर्स सूरज इन्टरप्राईजेस-रायगढ़, विकास स्मार्ट कृषि केन्द्र-बोईरदादर, मेसर्स राजेन्द्र कुमार अग्रवाल-महापल्ली, बिश्वाल कृषि केन्द्र-महापल्ली, रामअवतार अग्रवाल-महापल्ली, मुकेश अग्रवाल-बरपाली एवं शंकर टे्रडिंग-कोतरा शामिल है।

    विकासखण्ड खरसिया अंतर्गत बहुउद्देशीय कृषक सहकारी समिति मर्या.-ठुसेकेला, जय बालाजी एजेंसी-खरसिया, इंसेम्बल कृषि केन्द्र-खरसिया, जय राधा स्वामी कृषि सेवा केन्द्र-खरसिया, धनेष कृृषि सेवा केन्द्र-खरसिया, नायक एग्रो टेक-कुरूभाठा, पटेल कृषि केन्द्र-खरसिया, मेसर्स हरियाली-खरसिया, गबेल कृषि केन्द्र-खरसिया एवं रामअवतार अग्रवाल कृषि केन्द्र खरसिया शामिल है।

    विकासखण्ड धरमजयगढ़ अंतर्गत प्रधान कृषि सेवा केन्द्र-दर्रीडीह, मुकेश बीज भण्डार-धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ एग्रो प्रा.कंपनी लिमिटेड-धरमजयगढ़, बेहरा कृषि केन्द्र-मुनुन्द, कान्हा कृषि केन्द्र-धरमजयगढ़, भूमि कृषि सेवा केन्द्र-धरमजयगढ़, समुद्री कृषि सेवा केन्द्र-धरमजयगढ़़, महेश्वरी बीज भण्डार-कापू शामिल है।

    विकासखण्ड लैलूंगा अंतर्गत चौधरी कृषि सेवा केन्द्र-लैलूंगा, एग्रो प्रो.कंपनी लिमिटेड-कुंजारा, पटेल कृषि सेवा केन्द्र बगुडेगा, भोय कृषि सेवा केन्द्र-केशला, जितेन्द्र कुमार भोय-केशला, उन्नत कृषि सेवा केन्द्र-लैलूंगा एवं शंकर कृषि सेवा केन्द्र-बहामा शामिल है।

    विकासखण्ड घरघोड़ा अंतर्गत कृषि प्रभा एग्रो.कोआपरेटिव लिमिटेड-भेन्ड्रा, पटेल कृषि सेवा केन्द्र-पानीखेत, अग्रवाल खाद भण्डार-घरघोड़ा, महामाया जनरल स्टोर्स-घरघोड़ा शामिल है।

    विकासखण्ड पुसौर अंतर्गत रानू कृषि केन्द्र-पुसौर, पंडित धनुर्जय दुबे कृषि केन्द्र-पुसौर, नायक कृषि सेवा केन्द्र-पुसौर, बेहरा कृषि केन्द्र-पुसौर, दीपिका कृषि केन्द्र-पुसौर, गोयल कृषि केन्द्र-पुसौर, प्रधान कृषि केन्द्र-पुसौर, ए.के.इण्डस्ट्रीस-पुसौर, किसान कृषि सेवा केन्द्र-पुसौर, सांई बीज भण्डार-कोड़ातराई, चन्द्रहासिनी इन्टरप्राईजेस-कोड़ातराई एवं गुप्ता कृषि केन्द्र-कोड़पल्ली शामिल है।

    विकासखण्ड बरमकेला अंतर्गत मां महामाया कृषि केन्द्र-बरमकेला, संतोषी कृषि केन्द्र-बरमकेला, तुलसी सेवा केन्द्र-बरमकेला, वेदान्ता कृषि केन्द्र-बरमकेला, विवेक कृषि केन्द्र-बरमकेला, मुरारीलाल अग्रवाल-सरिया, न्यू संजय कृषि केन्द्र-सरिया, पवन कुमार अग्रवाल-सरिया, किसान कृषि सेवा केन्द्र-सरिया, शोभाराम कृषि केन्द्र-बरमकेला, यारदार कृषि सेवा केन्द्र-बरमकेला, सेत कृषि केन्द्र-बरमकेला, विद्याश्री कृषि केन्द्र-बरमकेला, पंकज टे्रडर्स-बरमकेला, आस्था टे्रडर्स-बरमकेला, हरिओम टे्रडर्स-बरमकेला, अरूण कृषि सेवा केन्द्र-बरमकेला, श्याम टे्रडर्स-पुजारीपाली, लक्ष्य कृषि सेवा केन्द्र-परसरामपुर, जीएलएस कृषि केन्द्र-बरमकेला, मुरली टे्र्रडर्स-लेन्ध्रा शामिल है।

    विकासखण्ड सारंगढ़ अंतर्गत मुन्ना बीज भण्डार, भावेश टे्रडर्स, साव कृषि केन्द्र, एसएस एग्री क्लिीनक, गणपति कृषि सेवा केन्द्र, परि कृषि केन्द्र, लक्ष्मण कृषि केन्द्र, मितान कृशि सेवा केन्द्र, हरि कृषि केन्द्र, किसान कृषि सेवा केन्द्र, आर्यन बायोकाप केयर, देवी खाद भण्डार, विकास टे्रडर्स, गंगा कृषि सेवा केन्द्र, नरेन्द्र खाद भण्डार, नजी कृषि केन्द्र, कृष्ण कुमार बानी कृषि केन्द्र, राजेश स्टोर्स एवं कुमार बानी-सारंगढ़, राज कृषि केन्द्र-सालर, चित्रसेन नायक-पिपरदा एवं खान टे्रडर्स-कोतरी शामिल है।

  • एनएचएम की एमडी प्रियंका शुक्ला और कोविड हॉस्पिटल टीम एक्शन मोड पर, 12 दिन में 12 जिलों का किया दौरा

    एनएचएम की एमडी प्रियंका शुक्ला और कोविड हॉस्पिटल टीम एक्शन मोड पर, 12 दिन में 12 जिलों का किया दौरा

    इसी जज़्बे को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ की एम डी डॉ.प्रियंका शुक्ला अपनी टीम में साथ लगातार मैदान में डटी हुई हैं।डॉ शुक्ला के नेतृत्व में इस टीम ने पिछले 12 दिनों में लगातार 12 जिलों का दौरा कर इन जिलों में कोविड 19 की रोकथाम और बचाव के इंतजामों का जायज़ा लिया। इस राज्य स्तरीय टीम में डॉ. भीमराव अंबेडकर चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर की अधीक्षक डॉ. विनीत जैन, पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. रविंद्र पाण्डा, एनेस्थीसीया विशेषज्ञ डॉ.ओपी सुंदरानी, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक उरया नाग और ओएसडी डॉ.अभ्युदय तिवारी शामिल हैं।

    इसी कड़ी में डॉ प्रियंका शुक्ला ने आज अपनी टीम के साथ बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के गीदम में कोविड-19 की रोकथाम और बचाव के लिए विशेष रूप से निर्मित अस्पताल का निरीक्षण किया । उल्लेखनीय है कि कोविड 19 के इलाज एवं रोकथाम के लिए गीदम और बीजापुर में 100 बिस्तर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है ताकि आदिवासी अंचल के लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। डॉ शुक्ला और उनकी टीम ने तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया ताकि कोई चूक न रह जाए। निरीक्षण दौरान उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों और व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया।

    सोशल डिस्टेंसिंग पर दिया ज़ोर

    एमडी एनएचएम ने अस्पताल के सभी कमरों और वार्डों में सोशल डिस्टेंसिंग पर विशेष फ़ोकस रखने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान एमडी डॉ. शुक्ला ने बीजापुर और गीदम में अस्पताल के कमरों में बिस्तरों को पर्याप्त दूरी सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया।उन्होंने पूरे अस्पताल में मोबाइल एक्स-रे को तैयार रखने ,ऑक्सीजन सिलेंडर की सुविधा और मॉनिटर के इंतजाम करने को कहा। उन्होंने पूरे परिसर में में साफ सफाई रखने के निर्देश भी दिए।

    कोरोना पॉजिटिव को सुरक्षा चक्र में रखने हेतु बरतें पूरी सावधानी

    डॉ शुक्ला ने कहा कि यदि क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलता है तो उसको सुरक्षा चक्र में रखने के दौरान विशेष रूप से सावधानी बरते ताकि संक्रमण को फैलने से रोक जा सके।इसके अलावा मरीज के परिवार और आस पास के लोगों को अनावश्यक घबराहट से बचाने के लिए उनकी काउन्सलिन्ग करें। उन्होंने निर्देश दिए कि कोरोना पॉजिटिव मरीज के आने और जाने वाले मार्ग को शेष मार्गों से अलग रखें साथ ही अस्पताल क्षेत्र में नियमित रूप से सैनिटाइजेशन की दुरुस्त व्यवस्था रखें।उन्होंने अस्पताल में अनावश्यक भीड़ को कम करने में स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद लेने को कहा । इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि अस्पताल परिसर में जिन लोगों का काम नहीं है उन्हें प्रवेश ना दिया जाए – उन्होंने इन अस्पतालों में भविष्य में काम करने वाले स्वस्थ्यकर्मियों और स्वच्छता कर्मियों हेतु की जा रही रिहायशी व्यवस्थाओं का भी जायज़ा लिया

    अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की सुरक्षा के रखें इंतज़ाम

    डॉ शुक्ला ने कहा कि हमारे डॉक्टर्स और पूरे स्वास्थ्य कर्मी योद्धाओं की तरह दिन रात जूट हुए हैं।सबसे ज़्यादा खतरा इन्हीं लोगों को है। इन योद्धाओं की सुरक्षा सुनिशचित करना हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है क्योंकि इस संकट में ये सबसे बड़े मददगार हैं। इसलिए इनको सुरक्षित रखने हेतु सारे प्रोटोकॉल का पालन करें।इस हेतु विभाग द्वारा जारी किए गए सारे दिशा निर्देशों का पालन सुनिशचित करने पर भी टीम ने ज़ोर दिया!

    कलेक्टरों से की मुलाक़ात

    एमडी डॉ प्रियंका शुक्ला ने इन सभी बारह जिलों के कलेक्टर से मुलाकात कर अस्पताल की तैयारियों की चर्चा की तथा आवश्यक सुधारों के बारे में भी उन्हें विस्तार से बताया। राज्य स्तरीय टीम द्वारा जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक सुझाव भी दिए। इस मुलाकात के दौरान सभी कलेक्टरों ने प्रशासनिक सहयोग करने की बात कही।

    एमडी ने डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स के समर्पण की सराहना की

    अपने निरीक्षण के दौरान एमडी डॉ प्रियंका शुक्ला ने कहा कि हमारे डॉक्टर्स और हेल्थ वर्कर्स का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने सभी
    डॉक्टरों और दूसरे हेल्थ वर्कर्स की हौसला अफजाई की और कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में आपका योगदान विभाग कभी नहीं भूलेगा।आप इसी तरह पूरे साहस के साथ अपने कर्तव्य-पथ पर डटे रहें। उन्होंने कहा कि जिस तरह आप सब अपने परिवार से दूर रह कर मरीजों और मानवता की सेवा में लगे हैं सराहनीय है।

    इन जिलों का कर चुकी हैं दौरा

    अब तक मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छ.ग. व टीम द्वारा अब तक राज्य के बारह जिले बिलासपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग,राजनांदगांव, नारायणपुर, धमतरी,काँकेर, जगदलपुर,दंतेवाड़ा व बीजापुर का दौरा कर चुकी हैं।

  • सिंहदेव की प्रेसवार्ता : लॉक-डाउन अवधि में बड़ी संख्या में रोजगार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, मनरेगा से अभी 13.55 लाख लोगों को रोजगार

    सिंहदेव की प्रेसवार्ता : लॉक-डाउन अवधि में बड़ी संख्या में रोजगार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, मनरेगा से अभी 13.55 लाख लोगों को रोजगार

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 से निपटने पूरी तरह मुस्तैद है और इसकी रोकथाम के लिए पूरी क्षमता से जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके इलाज के लिए विशेषीकृत अस्पताल बनाने के साथ ही कई चिकित्सालयों में बिस्तर और आवश्यक सुविधाएं आरक्षित की जा रही हैं। राज्य भर में कुल साढ़े पांच हजार से अधिक बिस्तरों पर कोविड-19 के उपचार के लिए संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि राजस्थान के कोटा से आने वाले विद्यार्थियों को 14 दिनों के क्वारेंटाइन के बाद ही घर भेजा जाएगा। जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग कोरोना वायरस संक्रमण के नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था के साथ ही नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को भी पटरी पर लाने में लगा हुआ है। टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं कम से कम प्रभावित हो, ऐसी कोशिश की जा रही है। लॉक-डाउन लंबा खींचने की स्थिति में विभाग गांवों तक स्वयं पहुंचकर लोगों को इलाज मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के साथ ही मरीजों को लाने-ले जाने के लिए पांच अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था रखी गई है।

    सिंहदेव ने जानकारी दी कि रैपिड जांच किट के माध्यम से सर्विलांस को पुख्ता किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों को एक-एक हजार किट और सभी जिलों को उनकी आबादी के हिसाब से आरडी किट उपलब्ध कराए गए हैं। कोविड-19 की जांच का दायरा बढ़ाने एम्स और रायपुर मेडिकल कॉलेज लैब में पूल-टेस्टिंग भी की जा रही है। विभाग द्वारा रायगढ़, बिलासपुर, अंबिकापुर और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में भी कोरोना वायरस की जांच के लिए लैब स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सिंहदेव ने कहा कि आकस्मिक जरूरत के हिसाब से सभी ग्राम पंचायतों में दो क्विंटल चावल रखवाए गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों और पुलों के निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों और ठेकेदारों की सहमति ली जा रही है। मनरेगा कार्यों के अंतर्गत अभी गांवों में जल संरक्षण और जल संचय के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। कृषि संबंधी कार्यों को भी इससे जोड़ने और खेती के संसाधनों को मजबूत करने की भी कोशिश की जा रही है।

    सिंहदेव ने भारत सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की शेष राशि जल्द जारी करने की मांग की है। प्रदेश को पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में नवम्बर-2019 तक की ही राशि मिली है। जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदेश को दिसम्बर-2019 से मार्च-2020 के लिए एक हजार 554 करोड़ 43 लाख 50 हजार रूपए और मिलने हैं।

  • PCS अधिकारी का बेटा चोर,हर तरफ हो रही इस बेटे की चर्चा…

    PCS अधिकारी का बेटा चोर,हर तरफ हो रही इस बेटे की चर्चा…

    दरअसल, हाल ही में लखनऊ के प्रतिष्ठित केजीएमसी मेडिकल कालेज के डॉक्टर की कार हाईवे पर लुटेरे छीनकर फरार हो गए। पुलिस कार की तलाश में छापेमारी कर रही थी। इस दौरान उसकी मुठभेड़ दो अपराधियों से हो गई। इनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को जांच में पता चला कि इन आरोपियों ने डॉक्टर से गोली मारकर कार लूटने की घटना को अंजाम दिया था।

    खास बात ये है कि इन लुटेरों में एक राज्य के सीनियर पीसीएस अफसर और एडीएम नरेंद्र सिंह का बेटा यशार्थ उर्फ यश ठाकुर भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, यशार्थ उर्फ यश ठाकुर ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर डॉक्टर के साथ लूटपाट की थी। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान यशार्थ और उसके साथी आयुष रावत को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली भी लगी है। फिलहाल पीसीएस पिता के लुटेरे बेटे की काली करतूत की चर्चा अब हर तरफ हो रही है।

  • अधिकारी ने कहा पत्रकार लोग गुमराह करने वाला काम करते हैं….

    अधिकारी ने कहा पत्रकार लोग गुमराह करने वाला काम करते हैं….

    रायगढ़। इस लॉक डाउन ने कईओं के चेहरों से नकाब हटा दिया है। संकट के समय में जब लोगों को पुकारा जाता है तो कई लोग सहर्ष अपनी सुख-सुविधाओं को भूल कर खुद को तपाते हुए भी दूसरों का ख्याल रखते हैं लेकिन, कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपनी सुख-सुविधाओं के अलावा दूसरों की कोई नहीं दिखाई देती है। जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर भी यदि सहायता पहुंचाने में दिन और रात का भेद करने लग जाए तो इस संकट के समय में आप का सहारा कौन बनेगा आप किस से उम्मीद करेंगे।

    सारंगढ़ में एक प्रशासनिक अधिकारी हैं जिन्होंने बताया कि एक जवान इंसान के दो हाथ पैर होते हैं …। वह इतनी जल्दी नहीं तड़प सकता । लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए वह इतना असहाय नहीं हो सकता…आखिर वह जवान है…।   ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके दो हाथ पैर हैं रात 10 बजे सहायता मांगने का क्या औचित्य है…।
    इस प्रशासनिक अधिकारी ने यह भी ज्ञान दिया कि पत्रकार लोग केवल गुमराह करने का काम करते हैं उनके कहने पर हम गुमराह होते रहें और पत्रकार मजा लेते रहें।

    इस अधिकारी की ओर से एक ज्ञान और दे दिया गया कि वह 17 साल केंद्र सरकार के अधीन काम किए उन्हें पता है कि रायगढ़ जिले में लोगों की क्या मानसिकता है…। इतना ही नहीं बल्कि पत्रकारों को इस अधिकारी की ओर से एक ज्ञान की बात और बताइ गई।  यह कहा गया कि यदि इतना ही सौख है तो खुद मदद करना चाहिए जाइए चाय पानी पिलाइये…। इतनी सब ज्ञान की बातें एक प्रशासनिक अधिकारी की ओर से पत्रकार को महज इसलिए दी गई क्योंकि उसने रात 10:00 बजे 100 किलोमीटर की पदयात्रा कर आए एक युवक के लिए गलती से मदद पहुंचाने की बात उस प्रशासनिक अधिकारी  सिर्फ फोन पर कह दी। यह बात इस प्रशासनिक अधिकारी को इतनी नागवार गुजरी कि उसने अपने केंद्र सरकार के अधीन काम करने का पिछले 17 साल के अनुभव का ज्ञान फोन पर पत्रकार को दे डाला।

    क्या है पूरा मामला

    यह पूरा मामला सारंगढ़ क्षेत्र का है जहां 2 दिन पूर्व एक युवक सरायपाली से शक्ति याने जांजगीर चांपा जाने के लिए पैदल ही निकल पड़ा लेकिन,  सारंगढ़ आकर उसकी हिम्मत ने जवाब दे दिया… शाम को 5:00 बजे से वह युवक 10:00 बजे तक मदद की आस में ग्राम हरदी के समीप भेड़वन मोड़ पर बैठा था। लेकिन शायद उसकी व्यथा किसी ने नहीं सुनी… रात लगभग 10:00 बजे जब इस बात की जानकारी डमरूआ डॉट कॉम के सारंगढ़ प्रतिनिधि संजय चौहान को हुई तो उन्होंने न केवल पत्रकारिता बल्कि मानवता के नाते सारंगढ़ के एक प्रशासनिक अधिकारी को फोन पर इस बात की सूचना देते हुए पस्त हो चुके उस युवक के लिए मदद मांगी। लेकिन यह जनाब न केवल उस दिन आपे से बाहर हुए बल्कि दूसरे दिन भी पत्रकार को फोन कर अपनी विद्वता और प्रशासनिक अधिकारी के रुतबे के साथ रात और दिन का फर्क बताने लगे। रात में उस प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि अभी आप मदद कीजिए हम सुबह मदद करेंगे। और दिन में फोन करके यह कहा कि पत्रकार गुमराह करते हैं। हम गुमराह होते रहे और पत्रकार मजा लेते रहे। वह युवक जवान था और उसके दो हाथ पैर थे वह जब 5:00 बजे से 10:00 बजे तक बैठा हुआ था तो उसके लिए क्या इमरजेंसी हो सकती है।

    प्रशासनिक अधिकारी शायद भूल गए अपनी ड्यूटी और संक्रमण के दौरान कर्तव्य

    देश का बच्चा-बच्चा यह समझ चुका है कि यदि कोई व्यक्ति कहीं बाहर से आता है तो बेहद एहतियात बरतने की जरूरत है। एक तो वह ना आने पाए इसके लिए उपाय करना है और यदि किसी प्रकार से आ जाए तो उसके लिए सबसे पहले मेडिकल टीम की ओर से उसका परीक्षण भी किया जाना है आप किसी को सीधे मदद कैसे पहुंचा सकते हैं। यह काम कौन करेगा पुलिस अथवा प्रशासन। क्योंकि समाजसेवियों के सीधे सहायता करने पर भी पाबंदी लगी हुई है। यदि किसी व्यक्ति को सहायता पहुंचाना है तो आपके पास क्या विकल्प बचता है… पुलिस अथवा प्रशासन…। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही इस प्रकार का गैर जिम्मेदाराना बात करने लगे तो फिर इस सिस्टम का क्या होगा इसे बेहतर समझा जा सकता है।

    जब डायल 112 ने भी दिखाया अपना ऐसा रूप

    यदि आप किसी के लिए सहायता करना चाहते हैं तो यह आपके लिए खतरे की घंटी भी साबित हो सकती है …यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सारंगढ़ में मौजूद डायल 112 की टीम कह रही है। इस मसले पर जब रात में डायल 112 को कांटेक्ट किया गया तो उनका पहला वाक्य ही था कि आप जिस लड़के की बात कर रहे हैं यदि वह हमारे जाते तक वहां से चला गया या नहीं मिल पाया तो आप पर कार्रवाई हो जाएगी। आप किसी व्यक्ति या संस्था को देवदूत समझकर उससे मदद मांगते हैं और उसकी ओर से यदि इस प्रकार का जवाब मिलता है तो आप अपना संयम किस हद तक कायम रख सकते हैं। यद्यपि डायल 112 की टीम पत्रकार की ओर से गारंटी लेते हुए यह कहने पर कि वह मुझ पर कार्रवाई कर दें लेकिन उस युवक की सहायता करें तब 112 की टीम ने पहले पत्रकार को उठा कर अपनी गाड़ी में बैठाया फिर उसके साथ मौके पर गए। यह तो गनीमत थी कि मदद के लिए गुहार लगा रहा युवक अपना सब्र ना खोते हुए उसी स्थल पर बैठा रहा । यदि वह वहां से जरा सा भी इधर-उधर होता और वहां दिखाई नहीं देता तो डायल 112 की टीम पत्रकार पर मामला दर्ज कराने और उसके साथ कुछ भी कर सकने में शायद कोई कोर कसर नहीं छोड़ती। कुछ ऐसे ही कारण है कि कुछ लोगों की वजह से और उल्टी सीधी कार्रवाई होने और कार्रवाई की धमकी देने जैसी बातों से लोग मदद के लिए आगे नहीं आ पाते हैं या यूं कहें कि मदद करने पर भी डरते हैं। जिन लोगों का ऐसा एटीट्यूड रहता है वही लोग जब भाषण के लिए मंच पर रहते हैं तो उनकी बोली से फूल झड़ते हैं लेकिन जब वास्तविकता सामने आती है तो चेहरे से नकाब हट जाते है।

    देवदूत जब पत्रकारों से ऐसा व्यवहार करते हैं तो एक आम इंसान इनसे कैसे मदद ले सकता होगा

    इस संकट की घड़ी में हम आप जिन्हें देवदूत समझते हैं यदि उनका व्यवहार इस प्रकार का एक पत्रकार के साथ हो सकता है तो आम इंसान के लिए क्या हो सकता होगा इस बात की परिकल्पना शायद आप ने कर ली होगी। ऐसे देव दूतों की ओर से वास्तविक देवदूतों की छवि भी धूमिल हो जाती है । बहरहाल पुलिस और प्रशासन के जो लोग वास्तविक तौर पर देवदूत बनकर काम करने हैं उन्हें हमारा सलाम है।

    एसडीएम ने दिखाई संवेदनशीलता, तहसीलदार शतरंज ने दिलाई राहत

    उक्त प्रशासनिक अधिकारी की ओर से निराश होकर जब एसडीएम चंद्रकांत वर्मा को उसी दौरान कॉल किया गया तो उन्होंने अपनी नींद और अपने आराम की प्रवाह  न करते हुए काफी संजीदगी से इस मसले को समझा और तहसीलदार शतरंज को निर्देशित किया। तहसीलदार शतरंज ने उस युवक की मदद कराते हुए उसे जांजगीर चांपा भेजने की व्यवस्था कराई।

  • विवाह आयोजन के लिए लेनी होगी अनुमति, 20 सदस्य ही सम्मिलित हो सकेंगे, ध्वनि विस्तारक यंत्र की अनुमति नहीं होगी….

    विवाह आयोजन के लिए लेनी होगी अनुमति, 20 सदस्य ही सम्मिलित हो सकेंगे, ध्वनि विस्तारक यंत्र की अनुमति नहीं होगी….

    कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जनक प्रसाद पाठक ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अंतर्गत धारा 144 के तहत जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया गया है। आदेश के तहत सार्वजनिक स्थानों में वैवाहिक तथा अन्य सामूहिक आयोजन को प्रतिबंधित किया गया है। वर्तमान में वैवाहिक मुहूर्त को दृष्टिगत रखते हुए विवाह आयोजन की अनुमति देने के लिए कलेक्टर ने संबंधित क्षेत्र के तहसीलदारों को अधिकृत किया है। जिला मजिस्ट्रेट के जारी आदेश के अनुसार तहसीलदार अपने क्षेत्र में विवाह आयोजन की अनुमति सशर्त दे सकेंगे।
    कलेक्टर एवं जिला मजिस्टेट के जारी आदेश के अनुसार वर-वधु एवं पंडित को मिलाकर कुल 20 सदस्य ही सम्मिलित होने की अनुमति होगी। फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। सार्वजनिक आयोजन, बारात निकालने एवं सार्वजनिक भवनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विवाह अपने निवास के प्रांगण में ही करना होगा। एक चार पहिया वाहन में ड्राइवर सहित कुल चार लोगों को आवागमन की अनुमति होगी। ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। यह अनुमति जिले के भीतर के लिए ही प्रवृत्त होगी। जिले से बाहर जाने की अनुमति का अधिकार जिला स्तर पर सुरक्षित रखा गया है। सामूहिक भोज पर प्रतिबंध रहेगा। कार्यक्रम स्थल पर मास्क एवं हाथ धोने की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। समय-समय पर केंद्र राज्य एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।

  • कोरोना संक्रमण को रोकने जारी नियमों का पालन नहीं करने पर होगा जुर्माना…रायगढ़ कलेक्टर ने जारी किया आदेश

    कोरोना संक्रमण को रोकने जारी नियमों का पालन नहीं करने पर होगा जुर्माना…रायगढ़ कलेक्टर ने जारी किया आदेश

    रायगढ़। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने लॉक डाउन जारी है।लेकिन जरूरी सामानों के संस्थानों को एवँ आमजनता को सशर्त अनुमति दी गई है।वहीं आज रायगढ़ कलेक्टर यशवंत कुमार ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम हेतु सोशल व फिजिकल डिस्टेंसिंग के नियमों तथा अन्य निर्देशों के पालन नही करने वालों पर अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किया है।जारी आदेश अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर मास्क या अन्य तरीकों से चेहरा नहीं ढंका पाए जाने पर 100 रुपये, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर 100 रुपये, सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक घूमने अथवा सोशल व फिजिकल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का उल्लंघन करते पाए जाने पर प्रति व्यक्ति 200 रुपये अर्थदण्ड एवँ दुपहिया वाहनों पर एक से ज्यादा सवारी पाए जाने पर 200 रुपये, चार पहिया वाहन में ड्राइवर की पिछली सीट पर एक सवारी हो सकती है, इसके अतिरिक्त पिछली सीट पर अथवा सामने की सीट पर अतिरिक्त सवारी होने पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा…शासन द्वारा छूट प्राप्त दुकानों और संस्थानों के द्वारा मास्क का उपयोग नहीं करने पर या शर्तों का उल्लंघन करने पर प्रथम बार अर्थदण्ड 500 रुपये, द्वितीय बार 1000 रुपये व इसके बाद भी पुनरावृत्ति होने पर दुकान संचालन की छूट समाप्त कर दी जाएगी।उपरोक्त अर्थदण्ड के अतिरिक्त विभिन्न प्रभावी अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत अन्य वैधानिक कार्यवाही भी की जा सकेगी।
  • राज्य सरकार जल्द लेगी निर्णय, कलेक्टर ने कहा- अभी जारी रहेगा प्रतिबंध

    राज्य सरकार जल्द लेगी निर्णय, कलेक्टर ने कहा- अभी जारी रहेगा प्रतिबंध

    रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइन के बाद राज्यों में सभी दुकानों के खुलने पर अभी सस्पेंस बरकरार है. केंद्रीय कैबिनेट सचिव की राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक हुई. जिसके बाद कलेक्टर ने कहा कि राज्य सरकार जल्द निर्णय लेगी, लेकिन अभी पहले की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा।

    • रायपुर कलेक्टर एस भारती दासन ने कहा कि राज्य शासन के अधिकारियों से चर्चा के बाद गाइड लाइन जारी की जाएगी. अभी पूर्व के प्रतिबंध लागू रहेंगे. जरूरत की चीजें जैसे दूध, किराना और अन्य सामान की दुकानों को निर्धारित समय तक ही संचालन की अनुमति है. इसके अलावा दवा की दुकानों पर छूट बरकरार है।

    कलेक्टर ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नया आदेश जारी किया है. राज्य सरकार इसे एडाप्ट करने के बाद ही स्टेट में लागू करेगी. इसके संबंध में एक बैठक होगी, बैठक के बाद क्लियर हो जाएगा. पेट्रोल पंप, मेडिकल शॉप, मिल्क पार्लर और गैस एजेंसी समेत जिन दुकानों को पहले खोलने की अनुमति दी गई है वह पूर्व निर्धारित समय के अनुसार ही खुलेंगे।

    उन्होंने कहा कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन फील्ड में तैनात है उन्हें सख्त हिदायत दी है कि गैर जरूरी सामानों की दुकान अगर खुले मिले, तो सख्त कार्रवाई करें. अभी नया आदेश राज्य सरकार ने लागू नहीं किया है, बैठक के बाद इस पर फैसला किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोई कन्फ्यूजन नहीं है, जो लिस्ट पूर्व में निकाला गया है वही फाइनल है. इसके अलावा यदि कोई भी दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।

    एसएसपी आरिफ शेख ने कहा कि आम जनता शासन के निर्देशों का पालन करें. अब तक जनता ने व्यवस्था बनाने में सहयोग किया है, आगे भी यही अपेक्षा है. इसके अलावा दो पहिया में 2 सवारी और कार में 3 सवारी घूमते पाए जाएंगे, उन गाड़ियों को जब्त किया जाएगा।

  • क्या  आपको  एक्सेप्टेड है, #quarantinepillowchallenge…

    क्या आपको एक्सेप्टेड है, #quarantinepillowchallenge…

    रायपुर। लॉकडाउन के बोरियत से लोगों को दूर करने रोजाना नए-नए चैलेंज ट्रेंड हो रहे है. इसी बीच सोशल मीडिया पर अब #quarantinepillowchallenge छाया हुआ है।

     

     

    इस चैलेंज में लड़कियां कपड़ों की जगह सिर्फ तकिये को शरीर पर बेल्ट के जरिए बांधती और फिर अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं. इस चैलेंज को एक्सैप्ट करने में पुरूष भी पीछे नहीं हट रहे है।

    इस चैलेंज के खातिर लड़कियों ने शरीर से तकिए तो बांधे लेकिन उन्होंने इसे भी स्टाइलिश लुक भी दें रहे है. इस चैलेंज को एक्सैप्ट करने के बाद लड़कियां तो बिल्कुल ऐसे तैयार हुईं जैसे वे किसी पार्टी में जा रही हैं, उन्होंने तो पिलो के साथ हाई हील्स भी पहनीं हुई है।

    इस चैलेंज के तहत सितारों के साथ ही साथ आम सोशल मीडिया यूजर्स पिलो (तकिया) को पहनकर इसके साथ अलग अलग पोज दे रहे हैं. इस चैलेंज की लिस्ट में अब हॉलीवुड एक्ट्रेस ऐनी हैथवे का भी नाम शामिल हो गया है. इसके अलावा नेहा कक्कड़ ने भी इस चैलेंज को एक्सैप्ट किया है।