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  • छत्तीसगढ़ में 10 में से 3 युवा ब्रेन संबंधी बीमारी की चपेट में, रिपोर्ट में खुलासा, सामने आई ये वजह…

    छत्तीसगढ़ में 10 में से 3 युवा ब्रेन संबंधी बीमारी की चपेट में, रिपोर्ट में खुलासा, सामने आई ये वजह…

    प्रदेश में युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। 22 जुलाई को मनाए जाने वाले ‘विश्व ब्रेन दिवस’ के अवसर पर न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जनों से बातचीत में खुलासा हुआ कि राज्य के 20 से 40 वर्ष के लगभग 30% (10 में से 3) युवा किसी न किसी प्रकार की ब्रेन संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले जहां स्ट्रोक, माइग्रेन और ब्रेन फॉगिंग जैसी समस्याएं बुजुर्गों या अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थीं, वहीं अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत अन्य निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

     ये 5 मुख्य कारण

    अत्यधिक स्क्रीन टाइम: रोजाना 8 से 10 घंटे मोबाइल या लैपटॉप पर बिताना

    अधूरी नींद: देर रात तक रील्स देखना और 6 घंटे से कम सोना

    लाइफस्टाइल का तनाव: नौकरी, ईएमआई और सोशल मीडिया

    असंतुलित खानपान: जंक फूड का अत्यधिक सेवन, पानी कम पीना

    नशे की लत: कैफीन, सिगरेट, एनर्जी ड्रिंक्स और शराब का सेवन

    स्वस्थ रखने के 5 आसान उपाय

    20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
    नींद का समय तय करें: रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक की नियमित नींद लें।

    भरपूर पानी और सही डाइट: कम से कम 3 लीटर पानी पिएं और नाश्ता न छोड़ें।
    तनाव प्रबंधन: सप्ताह में 3 दिन 30 मिनट व्यायाम, मेडिटेशन या दोस्तों से बात करें।

    खुद से दवा न लें: डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से दवा लेने से बचें।

    टॉपिक एक्सपर्ट

    सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. अभिजीत कोहट ने बताया कि युवाओं में स्ट्रोक और ब्रेन फॉगिंग के मामले तेजी से बढ़ना एक बड़ा अलर्ट है। इसका सबसे बड़ा कारण खराब जीवनशैली, तनाव और नशा है। अगर समय रहते आदतों में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

    सीनियर न्यूरो सर्जन, डॉ. लवलेश राठौर ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट (हेड इंजुरी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने से ब्रेन का फोकस घटता है। बिना हेलमेट बाइक चलाने से होने वाली ब्रेन इंजुरी को ठीक होने में काफी लंबा समय लगता है।

  • नकली नोट लेकर शराब खरीदने पहुंचा युवक: पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक ही सीरियल नंबर वाले 500 के 4 नोट जब्त…

    नकली नोट लेकर शराब खरीदने पहुंचा युवक: पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक ही सीरियल नंबर वाले 500 के 4 नोट जब्त…

    जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आरोपी नकली नोट से शराब खरीदने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। साथ ही आगे की कार्रवाई भी शुरु कर दी है।

    यह पूरा मामला अकलतरा थाना क्षेत्र का है। 20 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक देशी मदिरा दुकान अकलतरा में 500 रुपए का नकली नोट देकर शराब खरीदने का प्रयास कर रहा है। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।

    पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सत्येन्द्र कुमार कुर्रे उर्फ सत्यम कुर्रे बताया, जो कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दोमुहानी गांव का रहने वाला है। पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 500 के चार नोट बरामद किए।

    सीरियल नंबर भी निकले एक

    बरामद नोटों का तत्काल स्टेट बैंक, अकलतरा में परीक्षण कराया गया, जहां सभी नोट नकली पाए गए। साथ ही चारों नोटों का सीरियल नंबर भी एक ही मिला। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह नकली नोट रायपुर से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 180 बीएनएस के तहत अपराध क्रमांक 423/2026 दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड में ले लिया।

  • जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट : परिवार में वैध प्रमाण पत्र होने पर 1950 के दस्तावेज जरूरी नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश….

    जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट : परिवार में वैध प्रमाण पत्र होने पर 1950 के दस्तावेज जरूरी नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी परिवार के सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, तो केवल वर्ष 1950 के दस्तावेजों के अभाव में उसी परिवार के अन्य पात्र सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

    हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्देश

    जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध है और ग्राम सभा या ग्राम स्तरीय समिति यह प्रमाणित करती है कि आवेदक उसी परिवार और उसी जाति से संबंधित है, तो संबंधित अधिकारी विधि अनुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी करें।

    1950 के दस्तावेजों की अनिवार्यता पर राहत

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. प्राची दीवान ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश में कई भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पास वर्ष 1950 के राजस्व या अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनके बच्चों को शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रवेश और रोजगार के लिए आवश्यक जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    60 दिनों के भीतर जारी करें प्रमाण पत्र

    हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन के साथ प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेजों की समयबद्ध जांच कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाए और 60 दिनों के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पात्र आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगवाए जाएं।

    कई परिवारों को मिलेगा लाभ

    इस आदेश से उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र है, लेकिन अन्य सदस्यों को 1950 के दस्तावेजों के अभाव में प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा था।

  • 53 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, 9.54 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में कारोबारी गिरफ्तार…

    53 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, 9.54 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में कारोबारी गिरफ्तार…

    रायपुर। स्टेट जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बिलिंग के मामले में मुख्य आरोपी विजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 9.54 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने का आरोप है। न्यायालय के आदेश पर उसे 3 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

    दो फर्मों के जरिए किया फर्जी बिलिंग का कारोबार

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विजय कुमार यादव मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज और मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज के नाम से दो फर्मों का संचालन कर रहा था। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से करीब 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग कर 9.54 करोड़ रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विभिन्न फर्मों को ट्रांसफर किया गया।

    बंद और फर्जी फर्मों से लिया बोगस ITC का लाभ

    स्टेट जीएसटी के अनुसार आरोपी ने बंद और फर्जी फर्मों के माध्यम से प्राप्त फर्जी आईटीसी का दावा कर अपनी टैक्स देनदारी का भुगतान किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के केवल बिलों के आधार पर लेन-देन दिखाकर बोगस आईटीसी का लाभ लिया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

    जांच जारी, नेटवर्क की हो रही पड़ताल

    स्टेट जीएसटी विभाग फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी के खिलाफ विशेष अभियान चला रहा है। विभाग का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • रायगढ़ IPL सट्टा केस: 1 करोड़ की जब्ती वाले मामले में आरोपी करण चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज…

    रायगढ़ IPL सट्टा केस: 1 करोड़ की जब्ती वाले मामले में आरोपी करण चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज…

    रायगढ़। ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का संचालन करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी करण चौधरी उर्फ करण अग्रवाल को बिलासपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। माननीय न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने मामले की गंभीरता और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए आरोपी की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत 26 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब सिटी कोतवाली पुलिस ने गद्दी चौक स्थित A-1 कैफे के संचालक हर्षित देवांगन को “लाइन गुरु” (Line Guru) सट्टा ऐप के जरिए चेन्नई सुपर किंग्स, गुजरात टाइटंस जैसी टीमों के मैचों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाते पकड़ा था।

    पुलिस पूछताछ में हर्षित ने खुलासा किया था कि वह जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार और करण चौधरी के इशारे पर सट्टेबाजी के इस नेटवर्क में शामिल हुआ था। इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस ने 12 मई 2026 को करण चौधरी को गिरफ्तार किया था। मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 4 और 7, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और आईटी एक्ट (IT Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

    पुलिस की केस डायरी और जांच के दौरान दर्ज किए गए 7 प्रमुख गवाहों के बयानों के अनुसार, आरोपी करण चौधरी सीधे अपने बैंक खाते से लेन-देन करने के बजाय दूसरों के खातों (जैसे दुर्गा फ्यूल्स और एम.डी. फ्यूल्स) का इस्तेमाल कर सट्टे का पैसा कलेक्ट करता था। पुलिस जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब करण चौधरी के मेमोरेंडम (बयान) के आधार पर ही सह-आरोपी पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल के ठिकाने से पुलिस ने 1 करोड़ 2 लाख 60 हजार 300 रुपये (1,02,60,300 रुपये) की भारी-भरकम नकदी और नोट गिनने की मशीन जब्त की थी। इसके अलावा करण के पास से 21 हजार रुपये नकद और मोबाइल भी बरामद हुआ था, जिसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में उसकी गुड्डा सरदार से लगातार बातचीत की पुष्टि हुई है।

    आरोपी जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार

    दलीले..

    जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मोबाइल या नकदी की जब्ती मात्र से यह साबित नहीं होता कि आवेदक सट्टेबाजी में शामिल है। हालांकि, राज्य शासन के अधिवक्ता ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि आरोपी करण चौधरी के खिलाफ पूर्व में भी जुआ एक्ट सहित कुल 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

    दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपी की संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी के नेटवर्क में सक्रिय भूमिका नजर आती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है, मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) खंगाले जा रहे हैं और चार्जशीट भी पेश नहीं की गई है, इसलिए आरोपी को फिलहाल जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

  • बिलासपुर में जलभराव और बिजली कटौती पर High Court’ सख्त, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को दिखना चाहिए परिणाम…

    बिलासपुर में जलभराव और बिजली कटौती पर High Court’ सख्त, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को दिखना चाहिए परिणाम…

     आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान बिलासपुर शहर में होने वाले जलभराव और लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल कार्ययोजना तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर आम नागरिकों को जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम, बिजली वितरण कंपनी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।

    बारिश में शहर की व्यवस्था फिर हुई बेपटरी

    हाल के दिनों में हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में घंटों पानी भरा रहा। सड़कों, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवा और बारिश के दौरान कई इलाकों में बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आईं।

     

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी काम नहीं हो रहा है।

    कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और बिजली लाइनों के रखरखाव को लेकर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि जिन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया गया था, वहां अब तक क्या सुधार कार्य पूरे हुए हैं।

    कोर्ट ने कहा कि अगर योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रहें और जनता को राहत न मिले, तो ऐसी योजनाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

    “जमीनी असर दिखना चाहिए”

    न्यायालय की टिप्पणी काफी सख्त रही। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन बार-बार कार्ययोजना और बैठकों का हवाला देता है, लेकिन नागरिकों को न तो जलभराव से राहत मिल रही है और न ही निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है।

    अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसून के दौरान नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो।

    हाईकोर्ट ने नगर निगम को जल निकासी व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली विभाग से कहा गया है कि बार-बार होने वाली कटौती के कारणों और उन्हें रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के साथ प्रस्तुत की जाए।

  • नारायणपुर: एक करोड़ के बीमा दावे में हेराफेरी और धमकी का मामला; तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव गिरफ्तार….

    नारायणपुर: एक करोड़ के बीमा दावे में हेराफेरी और धमकी का मामला; तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव गिरफ्तार….

    नारायणपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर जिले में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ (DSF) आरक्षक की पत्नी को मिले 1 करोड़ रुपये के बीमा दावे में कथित अवैध वसूली और धमकी देने के आरोप में पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। इस मामले में एक अधिवक्ता की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसकी तलाश जारी है।

    क्या है पूरा मामला?

    दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व. धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के सैलरी पैकेज के तहत 1 करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी।
    शिकायत के अनुसार:

    • तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा क्लेम दिलाने के नाम पर परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।
    • आरोपी इतने पर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने शेष बीमा राशि में से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी (अवैध वसूली) की मांग शुरू कर दी।
      • जब परिजनों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

      पुलिस की त्वरित कार्रवाई

      परिजनों द्वारा लगातार दी जा रही प्रताड़ना से तंग आकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल एक्शन लिया और थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया।
      मुख्य आरोपी और तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं, सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

      प्रशासन का सख्त संदेश

      प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार या अवैध वसूली में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • “CG पुलिस में बड़ा ट्रांसफर” 92″ASP-DSP के तबादले,,, सारंगढ़ बिलाईगढ़ के 3 अधिकारी भी शामिल,,,,देखे सूची…

    “CG पुलिस में बड़ा ट्रांसफर” 92″ASP-DSP के तबादले,,, सारंगढ़ बिलाईगढ़ के 3 अधिकारी भी शामिल,,,,देखे सूची…

    छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार के पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह (पुलिस) विभाग ने आदेश जारी कर राज्यभर के कई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) और पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) के तबादले किए हैं। आदेश के अनुसार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

    20 जुलाई 2026 को जारी गृह विभाग के आदेश में विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। जिसमे लगभग 92 अधिकारीयों का तबादला हुआ है तबादला सूची में पुलिस मुख्यालय, बटालियन, जिला पुलिस और विशेष इकाइयों में पदस्थ ASP एवं DSP स्तर के अधिकारी शामिल हैं। शासन का कहना है कि यह प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

    वही सारंगढ़ के 3 पुलिस अधिकारी का भी तबदला हुआ है जिसमे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पांडे का तबादला हुआ है और उन्हें स्थान पर धीरेन्द्र पटेल को मिली जिम्मेदारी और sdop बिलाईगढ़ विजय ठाकुर शामिल है और उनके स्थान पर दीपिका मिंज को जिम्मेदारी मिली है और वही sdop सारंगढ़ स्नेहिल साहू को बदला गया उनके स्थान पर गोविन्द सिँह दीवान को जिम्मेदारी मिली है

  • फर्जी ED अफसर के खिलाफ बिलासपुर में FIR दर्ज, 7 लाख की ठगी का आरोप …

    फर्जी ED अफसर के खिलाफ बिलासपुर में FIR दर्ज, 7 लाख की ठगी का आरोप …

    बिलासपुर। खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर कैंटीन का ठेका और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक परिवार से सिम्स अस्पताल में कैंटीन का ठेका दिलाने और उसके बेटे सहित एक अन्य युवक को ईडी में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 6.82 लाख रुपए ऐंठ लिए। कानून प्रवर्तन शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक रेलवे महाराष्ट्र मंडल, टिकरापारा निवासी देवेन्द्र ठक्कर की मुलाकात सिम्स अस्पताल में राहुल मिश्रा और उसकी पत्नी पदमा जनार्दन, निवासी ठठारी (जिला जांजगीर-चांपा) से हुई थी। बातचीत के दौरान राहुल ने खुद को ईडी का प्रभावशाली अधिकारी बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह सिम्स अस्पताल, कोनी में कैंटीन का ठेका दिला सकता है। साथ ही उसने पीड़ित के बेटे और उसके दोस्त को ईडी में नौकरी लगवाने का भी आश्वासन दिया।

    आरोप है कि राहुल और उसकी पत्नी ने इस काम के एवज में अलग-अलग किस्तों में बैंक खातों और कैश के माध्यम से कुल 6.82 लाख रुपए ले लिए। काफी समय बीतने के बाद भी न तो कैंटीन का ठेका मिला और न ही नौकरी लग सकी। संदेह होने पर देवेन्द्र ठक्कर ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे। पीड़ित का कहना है कि, दबाव बनाने पर आरोपियों ने कुछ राशि लौटा दी, लेकिन 1.62 लाख रुपए अब तक वापस नहीं किए। खुद के साथ धोखाधड़ी होने का अहसास होने पर उन्होंने शनिवार को कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी राहुल मिश्रा और उसकी पत्नी पदमा जनार्दन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

  • फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा: बिलासपुर की जलसाज महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी गिरफ्तार….

    फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा: बिलासपुर की जलसाज महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी गिरफ्तार….

    बिलासपुर। स्नेक बाइट (सर्पदंश) से मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा दिलाने के बहुचर्चित फर्जीवाड़े में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर दो मामलों में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शाने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

    यह कार्रवाई तोरवा थाना क्षेत्र में दर्ज मामले की जांच के दौरान हुई। पुलिस के अनुसार तहसील कार्यालय के नायब नाजीर की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत की जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था और कथित तौर पर सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसके आधार पर मुआवजा लेने की प्रक्रिया अपनाई गई।

    पहले ही जेल जा चुके हैं रिश्तेदार और वकील

    इस मामले में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी तथा अधिवक्ता रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अब भी फरार हैं। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है।

    सिविल लाइन थाने में भी दर्ज है एक और मामला

    डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी एक अलग मामला दर्ज है। आरोप है कि तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश बताया गया था, जबकि जांच में वास्तविक कारण हार्ट अटैक सामने आया। इस मामले में मृतक की पत्नी सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। अब सिविल लाइन पुलिस डॉक्टर को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।

    दो दिन पहले चार और आरोपी गिरफ्तार

    इससे पहले 16 जुलाई को सरकंडा थाना पुलिस ने फर्जी स्नेक बाइट के पांच मामलों में कार्रवाई करते हुए अधिवक्ता हीराप्रसाद खाण्डेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेन्द्र कुमार तथा तहसीलदार कार्यालय के दैनिक वेतनभोगी चालक गोविंद विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

    2025 में भी सामने आया था ऐसा मामला

    यह पहली बार नहीं है जब डॉ. प्रियंका सोनी का नाम ऐसे मामले में सामने आया हो। वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के मामले में भी उन्हें, मृतक के परिजनों और एक वकील के साथ गिरफ्तार किया गया था।

    15 मामलों की जांच, कई डॉक्टरों पर संदेह

    पुलिस के अनुसार जिले में सर्पदंश से फर्जी मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा लेने के 15 मामलों की जांच जारी है। सभी मामलों की समीक्षा कर दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। जांच के दायरे में सिम्स के 4 से 5 डॉक्टर भी हैं, जिन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का संदेह है। कुछ चिकित्सकों से पूछताछ हो चुकी है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित घोटाले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    इस पूरे मामले ने सरकारी मुआवजा व्यवस्था, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।