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  • सरपंच पत्नी के कामकाज में दखल नहीं देंगे पति, छत्तीसगढ़ पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग का सख्त आदेश

    सरपंच पत्नी के कामकाज में दखल नहीं देंगे पति, छत्तीसगढ़ पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग का सख्त आदेश

    छत्तीसगढ़ पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सख्त आदेश जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि अब सरपंच पत्नी के कामकाज में पति दखल नहीं देंगे। पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया का स्वतंत्र और प्रभावी हिस्सा बनाना है।

    सुनिश्चित की जाएगी उपस्थिति
    जारी निर्देश के अनुसार, अब ग्राम पंचायत, जनपद एवं अन्य पंचायत बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी रिश्तेदार, प्रतिनिधि या अन्य व्यक्ति को उनके स्थान पर बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। वहीं लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। आदेश के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी तकनीकों का उपयोग कर उपस्थिति सत्यापित की जाएगी।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी
    विभाग ने पंचायत बैठकों और ग्राम सभाओं की कार्रवाई को सभासार पोर्टल, निर्णय ऐप तथा अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका दर्ज हो सके। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल निगरानी से प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए जिले में जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम, नेतृत्व प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    बनाई गई नई योजनाएं
    पंचायतों में प्रभावी कार्य करने वाली महिला प्रतिनिधियों की सफलता की कहानियों को सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रचारित करने की भी योजना बनाई गई है, ताकि अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिल सके। पेसा क्षेत्र की पंचायतों में ग्राम सभा से पूर्व महिला सभा आयोजित करना अनिवार्य किया गया है, वहीं सामान्य क्षेत्रों में भी महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के लिए महिला सभाओं के आयोजन के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा।

    इसे पंचायतों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विभाग ने जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व से संबंधित शिकायतों के लिए शिकायत पेटी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

  • निरीक्षक अमित शुक्ला का दुःखद निधन…

    निरीक्षक अमित शुक्ला का दुःखद निधन…

    रायगढ़। पुलिस विभाग से एक बेहद दुखद और हृदय विदारक खबर सामने आई है। 2008 बैच के जांबाज और कर्तव्यनिष्ठ 44 वर्षीय पुलिस निरीक्षक अमित शुक्ला अब हमारे बीच नहीं रहे। ब्रेन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लंबे समय तक पूरी बहादुरी से लडऩे के बाद, आखिरकार नियति के आगे वह जिंदगी की जंग हार गए। रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 17 मई (रविवार) की शाम करीब 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे पुलिस महकमे सहित रायगढ़ और बिलासपुर में शोक की लहर दौड़ गई है। अमित शुक्ला जितने बेहतरीन पुलिस अफसर थे, उतने ही मजबूत इरादों वाले इंसान भी थे।

    जब उन्हें 2023 के अंत में ब्रेन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का पता चला, तो उन्होंने घुटने टेकने के बजाय उसका डटकर मुकाबला किया। इलाज के दौरान मुंबई में उनकी दो बार बड़ी सर्जरी हुई। हर बार डॉक्टरों और करीबियों को लगता था कि अब उनका काम पर लौटना मुश्किल होगा, लेकिन अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर वह न सिर्फ ठीक हुए, बल्कि दोबारा वर्दी पहनकर पूरी ऊर्जा के साथ ड्यूटी भी जॉइन की। उनका यह जज्बा पूरे महकमे के लिए एक मिसाल था। बीमारी के दोबारा उभरने के बाद दिसंबर 2025 से वे रायपुर के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। हर कोई उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा था, लेकिन रविवार की शाम को आई इस मनहूस खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया।

    दिल के साफ और जुबान के खरे थे अमित
    अमित शुक्ला की गिनती छत्तीसगढ़ पुलिस के पढ़े-लिखे और काबिल अफसरों में होती थी। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने एमबीए की उच्च शिक्षा हासिल की थी, लेकिन खाकी के प्रति उनका जुनून उन्हें रायपुर के चंदखुरी (पुलिस अकादमी) ले आया, जहां से उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई। अमित शुक्ला बेहद साफ दिल के इंसान थे, जो कभी किसी के साथ छल-कपट नहीं रखते थे। हालांकि, जो बात गलत होती, उस पर वे सामने वाले के मुंह पर बेबाकी से बोलने में भी नहीं कतराते थे। उनकी इसी बेबाकी और ईमानदारी के कारण मातहत और आला अफसर, दोनों ही उनका बेहद सम्मान करते थे।


    रायगढ़ से रहा गहरा नाता: चक्रधर नगर ही पहला और अन्तिम थाना
    अमित शुक्ला के पुलिस करियर का एक बड़ा और स्वर्णिम हिस्सा रायगढ़ जिले में बीता। वे करीब 8 साल तक रायगढ़ में विभिन्न पदों पर तैनात रहे। एक अद्भुत संयोग यह भी रहा कि रायगढ़ जिला पुलिस में कदम रखते ही उन्हें जो पहला थाना मिला, वह चक्रधर नगर था और अपनी सेवा के अंतिम पड़ाव में भी वे इसी चक्रधर नगर थाने के प्रभारी रहे। रायगढ़ की जनता और यहां के चप्पे-चप्पे से उनका एक आत्मीय जुड़ाव हो गया था।

    पीछे रोता-बिलखता छोड़ गए मासूम परिवार
    मूल रूप से बेमेतरा जिले के रहने वाले अमित शुक्ला का परिवार फिलहाल बिलासपुर में निवास करता है। उनके असमय चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पीछे उनकी पत्नी और दो अत्यंत मासूम बेटियां हैं, जिनकी उम्र महज 7 साल और 10 साल है। पिता के साये से महरूम हुईं इन बच्चियों और बिलखते परिवार को देख हर किसी की आंखें नम हैं।

    खाकी के यारों का छलका दर्द, ‘अमित तुम इतनी जल्दी क्यों चले गए…’
    नियति का क्रूर प्रहार जब होता है, तो केवल एक परिवार नहीं उजड़ता, बल्कि यादों का वो पूरा कारवां बिखर जाता है जिसे सालों-साल सींचा गया हो। पुलिस अकादमी चंदखुरी में जब साल 2008 में खाकी पहनने का सपना लिए युवाओं का काफिला पहुंचा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कंधों पर सितारे सजाने वाली ‘टोली नंबर 8’ का एक जांबाज साथी इतनी जल्दी इस सफर को बीच में ही छोड़ जाएगा। ब्रेन कैंसर से लंबी और बहादुरी भरी जंग लडऩे वाले निरीक्षक अमित शुक्ला के असमय निधन ने जहां पुलिस महकमे को स्तब्ध किया है, वहीं उनके बैच और विशेष रूप से उनकी ट्रेनिंग के दिनों के सबसे अजीज दोस्तों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    ट्रेनिंग के वो दिन, जब कडक़ड़ाती धूप में पसीना बहाने के बाद खोली नंबर 8 में थके-हारे कदम ठहरते थे, तब अमित शुक्ला की बेबाकी और खिलखिलाहट पूरे कमरे की थकान मिटा दिया करती थी। आज उस खोली और उस टोली के उनके साथी – निरीक्षक अभिनवकांत सिंह, युवराज तिवारी, गगन बाजपेयी, रूपक शर्मा, विनय सिंह बघेल, दामोदर मिश्रा, संत राम सोनी और प्रशांत राव आहेर गहरे सन्नाटे और अंतहीन गम में डूबे हुए हैं। निरीक्षक अभिनवकांत सिंह बताते हैं कि कल तक जो दोस्त एक साथ मिलकर प्रदेश की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे थे और आज छत्तीसगढ़ पुलिस के अव्वल दर्जे के कप्तानों (निरीक्षकों) में गिने जाते हैं, वे आज अपने भाई जैसे यार के जाने से भीतर तक टूट चुके हैं। वर्दी के सख्त मिजाज के पीछे छुपा दोस्तों का दिल आज चीख-चीख कर रो रहा है।

    यादों में जिंदा रहेगी वो बेबाकी और हौसला
    रुहांसे भरे निरीक्षक युवराज तिवारी बताते हैं कि अमित शुक्ला केवल एक अफसर नहीं थे, वे अपने दोस्तों के लिए एक हौसला थे। जब मुंबई में उनकी दो बार मेजर सर्जरी हुई, तब भी उनके चेहरे की शिकन और ‘खरी-खरी’ बोलने का वो चिरपरिचित अंदाज गायब नहीं हुआ था। अस्पताल के बिस्तर से उठकर जब वे दोबारा ड्यूटी पर लौटे, तो दोस्तों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। हमें यकीन था कि उनका यार मौत को मात देकर लौट आया है लेकिन 17 मई की शाम 6:30 बजे जैसे ही रायपुर के अस्पताल से उनके अंतिम सांस लेने की खबर आई, खाकी के इन यारों के सब्र का बांध टूट गया।

  • बस्तर से अमित शाह का बड़ा मिशन लॉन्च! अब AI बताएगा खतरे में कौन और कहां, डायल-112 बनी हाईटेक सुरक्षा ढाल…

    बस्तर से अमित शाह का बड़ा मिशन लॉन्च! अब AI बताएगा खतरे में कौन और कहां, डायल-112 बनी हाईटेक सुरक्षा ढाल…


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में सोमवार को बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्तर में जन सुविधा केंद्र का शुभारंभ किया, वहीं रायपुर में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में अत्याधुनिक डायल-112 सेवा और आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल वैन के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के जरिए सरकार ने साफ संदेश दिया कि अब छत्तीसगढ़ में अपराध नियंत्रण और आपातकालीन सहायता प्रणाली पूरी तरह तकनीक आधारित होने जा रही है।

    सबसे बड़ा बदलाव डायल-112 सेवा में किया गया है। वर्ष 2018 में शुरू हुई यह सेवा पहले सिर्फ 16 जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे राज्य के सभी 33 जिलों में लागू कर दिया गया है।

    नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम जोड़ा गया है, जिससे संकट में फंसे व्यक्ति की सटीक लोकेशन तुरंत पता लगाई जा सकेगी।

    यानी अब मदद मांगने वाले व्यक्ति की लोकेशन ट्रेस करने में देरी नहीं होगी और पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड तेजी से मौके पर पहुंचेगी।

    सरकार ने बैकअप सिस्टम भी तैयार किया है। सिविल लाइंस स्थित कंट्रोल रूम के अलावा नया रायपुर पुलिस मुख्यालय में दूसरा हाईटेक कंट्रोल सेंटर शुरू किया गया है, जो किसी तकनीकी खराबी या आपदा की स्थिति में तुरंत काम संभालेगा।

    राज्यभर के लिए 400 नई अत्याधुनिक डायल-112 गाड़ियां, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन रवाना किए गए हैं।

    अब नागरिक सिर्फ फोन कॉल ही नहीं, बल्कि “112 इंडिया ऐप”, SMS, ईमेल, सोशल मीडिया, वेब रिक्वेस्ट और AI आधारित चैट सिस्टम से भी मदद मांग सकेंगे।

    महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैनिक बटन और विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम भी जोड़े गए हैं।

    इधर नए आपराधिक कानूनों के तहत अपराध जांच को और मजबूत करने के लिए सरकार ने 33 जिलों में आधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक लैब शुरू की हैं। इनमें से 32 फॉरेंसिक वैन को सोमवार को मैदानी जांच के लिए रवाना किया गया।

    इन हाईटेक वैन में ब्लड टेस्ट किट, डिजिटल एविडेंस कलेक्शन सिस्टम, CCTV फुटेज एक्सट्रैक्शन डिवाइस, GPS, हाई कैपेसिटी लैपटॉप, जनरेटर और नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं।

    अब फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंचकर मौके पर ही डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा सकेगी, जिससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत सबूत तैयार होंगे और जांच प्रक्रिया तेज होगी।

    सरकार का दावा है कि यह पूरा सिस्टम छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था, वैज्ञानिक जांच और नागरिक सुरक्षा को नई दिशा देगा।

  • शनि देव जयंती पर कलश यात्रा के साथ त्रिदिवसीय कार्यक्रम प्रारम्भ…

    शनि देव जयंती पर कलश यात्रा के साथ त्रिदिवसीय कार्यक्रम प्रारम्भ…



    खरसिया । प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री शनि देव जयंती अवसर पर तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 16 मई से 18 मई तक स्थानीय शनि मंदिर चंदन ताल पार खरसिया में किया गया है।  उक्त धार्मिक कार्यक्रम के तहत पहले दिन अर्थात दिनांक 16 मई 2026 को भव्य कलश यात्रा एवं अखण्ड ज्योति प्रज्जवलित के साथ उक्त धार्मिक कार्यकम प्रारंभ हुआ। कलश यात्रा स्थानीय भगत तालाब डभरा रोड से नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए चंदन ताल पार स्थित शिव मंदिर पहुंची जहां कलश स्थापना एवं भगवान शनिदेव का पूजा अर्चना किया गया। वहीं दुसरे दिन अर्थात 17 मई 2026 को तेलाभिषेक, शति शांति मालाजाप किया जावेगा अंतिम दिन अर्थात 18 मई 2026 को हवन पूर्णाहुति एवं दरिद्रनारायण भोज का आयोजन किया गया है।  श्री शनि देव मंदिर के पंडित राहू शर्मा एवं बबलू शर्मा ने क्षेत्रवासियों अपील किया है वे श्री शनि देव जयंती अवसर पर आयोजित इस तीन दिवसीय  धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें।

  • विला के अंदर चल रहा था सट्टे का साम्राज्य रायगढ़ पुलिस ने गोवा जाकर पकड़ा करोड़ों का सट्टा…

    विला के अंदर चल रहा था सट्टे का साम्राज्य रायगढ़ पुलिस ने गोवा जाकर पकड़ा करोड़ों का सट्टा…

    रायगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के कुशल एवं आक्रामक नेतृत्व में मध्य भारत के अब तक के सबसे बड़े ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और हवाला नेटवर्क को ध्वस्त करने में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस की विशेष टीम ने कुख्यात ‘मन्नू नथानी’ गैंग के आर्थिक साम्राज्य पर सीधा प्रहार करते हुए गोवा के कैंडोलिम बीच क्षेत्र में स्थित एक आलीशान किराए के विला में संगठित छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान पुलिस ने सट्टा सिंडिकेट के छह मुख्य संचालकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकर करोड़ों रुपये का सट्टा बाजार चला रहे थे। पकड़े गए सटोरियों के पास से मौके पर 10 नग मोबाइल फोन, हिसाब-किताब के दस्तावेज और भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इस रैकेट के तार रायगढ़, रायपुर, सक्ती, खरसिया और नागपुर से होते हुए सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई से जुड़े हुए थे, जहां से महादेव सट्टा ऐप की तर्ज पर पूरा आर्थिक चैनल संचालित हो रहा था।

    पुरानी गिरफ्तारियों की कड़ियों से खुला अंतर्राज्यीय हवाला लिंक
    इस व्यापक नेटवर्क के भंडाफोड़ की कहानी हाल ही में रायगढ़ के थाना कोतवाली में दर्ज अपराध क्रमांक 217/2026 एवं 218/2026 के साथ शुरू हुई। पुलिस ने इन मामलों में छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 और 7 के तहत आरोपी करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल, पुष्कर अग्रवाल तथा सुनील अग्रवाल को हिरासत में लिया था। इन आरोपियों से पुलिसिया अंदाज में की गई कड़ाई से पूछताछ के दौरान पहली बार खरसिया निवासी अमित मित्तल के सट्टा सिंडिकेट और करोड़ों रुपये के हवाला लेनदेन के पुख्ता सुराग मिले। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर साइबर थाना और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी निगरानी का एक जाल बुना। इस सर्विलांस के जरिए तकनीकी इनपुट मिले कि पुलिस से बचने के लिए इस गैंग के मुख्य खाईवाल छत्तीसगढ़ से हैदराबाद और मुंबई होते हुए गोवा भाग गए हैं और वहीं से पूरा सट्टा साम्राज्य ऑपरेट कर रहे हैं।

    सबूत नष्ट करने की फिराक में थे आरोपी, गोवा के विला घेरकर दबोचा
    आरोपियों की सटीक लोकेशन मिलते ही एसएसपी शशि मोहन सिंह के कड़े निर्देशन तथा नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) मयंक मिश्रा और डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के जमीनी नेतृत्व में साइबर थाना रायगढ़ की एक विशेष टीम को तुरंत गोवा रवाना किया गया। पुलिस टीम ने कैंडोलिम बीच इलाके के उस विला की घेराबंदी की जहां सट्टा चल रहा था। पुलिस की दबिश के दौरान वहां सट्टे का पूरा सेटअप खुला हुआ था। जैसे ही सटोरियों को पुलिस के आने की भनक लगी, विला के भीतर हड़कंप मच गया। आरोपी आनन-फानन में अपने कॉलिंग फोन, लैपटॉप, हिसाब-किताब की डायरियां और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेजों को नष्ट कर फरार होने की फिराक में थे। लेकिन पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें मौका ही नहीं दिया और मौके से खरसिया के अमित मित्तल सहित रायपुर के मोहित सोमानी, प्रकाश वाधवानी, आकाश मोटवानी, राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू और सुलभ खंडेलवाल उर्फ छोटा बाबू को रंगे हाथों दबोच लिया।

    हाइटेक सट्टेबाजी का खुलासा, समय का एडवांटेज लेने के तीन शातिर तरीके
    पकड़े गए खाईवालों के मोबाइल डेटा और तकनीकी विश्लेषण से यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट क्रिकेट जगत में सट्टेबाजी के लिए बेहद परिष्कृत और हाइटेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। पूछताछ में सट्टा चलाने के तीन प्रमुख तरीके सामने आए। पहले तरीके के तहत सटोरिए ‘अभिनंदन बुक या लाइन’ के माध्यम से सीधे रायपुर से क्रिकेट सेशन का भाव लेते थे, जिसके बाद वे एपीके (APK) आधारित जूम ऐप पर जुड़कर अपने नीचे काम करने वाले छोटे बुकीज और प्लेयर्स तक भाव डिस्ट्रीब्यूट करते थे। दूसरे तरीके में, ये शातिर अपराधी मैच के सीधे प्रसारण में मिलने वाले समय का बेजा फायदा उठाते थे। इन्होंने अपने फोन में एपीके फाइल के जरिए ‘प्रगति टीवी ऐप’ और ‘स्टार लाइव’ जैसे प्रतिबंधित ऐप्स डाउनलोड कर रखे थे, जिन पर सामान्य टीवी प्रसारण की तुलना में लगभग 7 सेकंड पहले मैच लाइव दिखता था। इस 7 सेकंड के एडवांटेज का लाभ लेकर वे कॉलिंग वर्चुअल ऐप पर पहले से जुड़े नीचे के खाईवालों को तुरंत भाव बताकर ठगी करते थे। तीसरे तरीके के रूप में, वे महादेव ऐप की ही तरह ‘ऑल पैनल एक्सचेंज’, ‘ताज 777’ और ‘डायमंड एक्सचेंज’ जैसे बड़े ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स की आईडी ग्राहकों को उपलब्ध कराते थे, जिस पर उन्हें सीधे 10 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन मिलता था।

    सीरियल नंबर वाले नोटों का खेल और मन्नू नथानी गैंग का अप-लिंक
    जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि इस अवैध सट्टा व्यापार को सहारा देने के लिए एक समानांतर हवाला नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपियों के मोबाइल से मिले चैट और साक्ष्यों से साफ हुआ है कि ये सटोरिए रुपयों के भौतिक लेनदेन से बचने के लिए नोटों के सीरियल नंबर एक-दूसरे से साझा करते थे और केवल इसी भरोसे के आधार पर करोड़ों की रकम इधर से उधर ट्रांसफर हो जाती थी। इस नेटवर्क की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले में जुड़े अन्य आरोपियों से पूर्व में ही एक करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम नकदी जब्त की जा चुकी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार सभी छह आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास है।

    गिरोह का मुख्य लीडर मोहित सोमानी है, जिस पर रायपुर के कई थानों में सट्टे के मामले दर्ज हैं और उसके संबंध खाईवाल करन चौधरी से भी रहे हैं। वहीं अमित मित्तल पर भी खरसिया कोतवाली, चक्रधरनगर और घरघोड़ा थानों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के केस दर्ज हैं। ये सभी आरोपी पहले मन्नू नथानी गिरोह से एजेंट के तौर पर जुड़े थे, जो धीरे-धीरे खुद बड़े सट्टा केबल के मालिक बन बैठे। इन्हें दुबई से बड़े खाईवालों के जरिए सट्टा आईडी मिलती थी, जिसे ये मध्य भारत के नागपुर और रायपुर जैसे बड़े शहरों में खपाते थे।


    कप्तान की दोटूक: संगठित अपराधों और माफियाओं का होगा समूल नाश
    इस बेहद कामयाब और साहसिक ऑपरेशन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने जिले के अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रायगढ़ पुलिस संगठित अपराध, ऑनलाइन सट्टा माफिया और हवाला सिंडिकेट के खिलाफ पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाए हुए है। समाज में अवैध कारोबार के जरिए आर्थिक ताना-बाना बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। तकनीक के जरिए अपराध करने वाले अपराधियों से पुलिस और भी ज्यादा आधुनिक होकर निपट रही है और यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक ऑनलाइन सट्टा माफिया के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं कर दिया जाता।

    इन जांबाज अधिकारियों और जवानों की टीम ने गोवा में गाड़े सफलता के झंडे
    इस जटिल और चुनौतीपूर्ण अंतर्राज्यीय ऑपरेशन को एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर तथा डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। गोवा के विला में घुसकर आरोपियों को दबोचने वाली जमीनी टीम में प्रभारी साइबर पुलिस थाना निरीक्षक विजय चेलक, सहायक उप निरीक्षक नन्द कुमार सारथी, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह राणा, बृजलाल गुर्जर, करुणेश राय तथा रूप राम पटेल की मुख्य भूमिका रही। इसके साथ ही पूरी मुस्तैदी से इस केस को सुलझाने में आरक्षक प्रशांत पंडा, महेश पंडा, धनंजय कश्यप, पुष्पेंद्र जाटवर, जगमोहन ओगर, विकास प्रधान, रविन्द्र कुमार गुप्ता, नवीन शुक्ला, मनोज पटनायक, गोविंद पटेल, रोशन एक्का, महिला आरक्षक मेनका चौहान तथा नव आरक्षक उमेश सिदार ने अपनी सराहनीय और अहम भूमिका निभाई है।

    कानून के शिकंजे में आए सटोरियों का पूरा ब्योरा
    रायगढ़ पुलिस ने शिकंजा कसते हुए सभी छह सटोरियों को कोतवाली थाना के अपराधों में विधिवत गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े पकड़े गए आरोपियों की विस्तृत सूची इस प्रकार है:

    अमित मित्तल, पिता अनूप मित्तल, उम्र 30 साल, निवासी स्टेशन रोड खरसिया।
    मोहित सोमानी (गिरोह का मुख्य लीडर), पिता मुरलीधर सोमानी, उम्र 38 साल, निवासी समता कॉलोनी आजाद चौक रायपुर।
    प्रकाश वाधवानी, पिता जगदीश वाधवानी, उम्र 28 साल, निवासी चौबे कॉलोनी आजाद चौक रायपुर।
    आकाश मोटवानी, पिता दीपक मोटवानी, उम्र 31 साल, निवासी कचहरी चौक थाना मौदहापारा जिला रायपुर।
    राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू, पिता स्वर्गीय विनोद खंडेलवाल, उम्र 36 साल, निवासी मेग्नेटो सिग्नेचर होम, तेलीबांधा रायपुर।
    सुलभ खंडेलवाल उर्फ छोटा बाबू, पिता सुनील खंडेलवाल, उम्र 33 साल, निवासी राम सागर पारा आजाद चौक रायपुर।
    बैंक खातों और मोबाइल इनपुट पर पुलिस की पैनी नजर
    रायगढ़ और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम अब इन सभी छह शातिर आरोपियों के सीज किए गए बैंक खातों, जब्त 10 मोबाइल फोनों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और तकनीकी इनपुट्स को खंगाल रही है। पुलिस का दावा है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मध्य भारत के अन्य छोटे एजेंटों, सट्टा खेलने वाले स्थानीय प्लेयर्स और इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने वाले मददगारों की पहचान की जा रही है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें सरगर्मी से जुटी हुई हैं।

  • 14 मई से शुरू हो रहे खरसिया में आर्ट ऑफ लिविंग के विभिन्न कोर्स…

    14 मई से शुरू हो रहे खरसिया में आर्ट ऑफ लिविंग के विभिन्न कोर्स…

    श्री श्री रविशंकर जी के 70 जन्मदिवस  एवँ आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 14 से 17 मई को खरसिया के गोदावरी भवन में 8 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए उत्कर्ष योगा,13 से 17 वर्ष के किशोरों के लिए मेधा योग और 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले व्यक्तियों के लिए हैप्पीनेस् प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है l जिसमें संस्था के सीनियर टीचर श्री मुकेश निहाल जी और श्री आकांक्षा नायक जी लाभार्थियों को जीवन जीने की कला के महत्वपूर्ण बिंदु साझा करेंगे एवँ साथ ही व्यक्तित्व विकास एवँ बच्चों के अंदर छिपी कलाओं को निखारने में सहायता करेंगेlआर्ट ऑफ लिविंग का यह प्रोग्राम व्यक्ति के लिए शारीरिक,मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का एक सम्मिलित कोर्स है,जिसका आयोजन विगत 18- 20 वर्षो से नगर में होता आ रहा है | ध्यान ,योग ,ज्ञान के साथ साथ बहुत से विभिन्न क्रियाएं से शामिल लोगों को जीवन में सुख ,शान्ति , सम्पूर्णता का अनुभव होता है lआर्ट ऑफ लिविंग परिवार के द्वारा पूर्व में खरसिया नगर में पुरानी सब्जी मार्केट रोड में गेम फेस्ट, प्राकृतिक रंगों से होली फेस्ट, एक शाम माँ पा के नाम, वृक्षारोपण,सुमेरु संध्या जैसे कार्यक्रम सफलता से कराए हैं जिसने समूचे नगर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।आर्ट ऑफ लिविंग परिवार की तरफ़ से सभी नगर वासियों से बढ़ चढ़कर कोर्स में भाग लेकर  जीवन में प्रसन्नता और आनंद का लाभ प्राप्त करने हेतु आग्रह किया है।

  • डॉ. राम विजय शर्मा ने हट्टा की बावड़ी पर किया शोध…

    डॉ. राम विजय शर्मा ने हट्टा की बावड़ी पर किया शोध…



    डॉ. राम विजय शर्मा इतिहासकार, पुरातत्ववेता एवं अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ता रायपुर भारत एवं डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहरवार राष्ट्रीय अध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट (मध्यप्रदेश) ने संयुक्त रूप से हट्टा की बावड़ी पर ऐतिहासिक शोध किया। हट्टा गाँव बालाघाट से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हट्टा की बावड़ी 16वीं-17वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक और कलात्मक जलसंरचना है। गोंड राजा हटे सिंह वल्के द्वारा इसका निर्माण किया गया था जिसमे 8 मंजिल है लेकिन 3 तल दिखते है और शेष 5 तल पानी के अन्दर है।

    स्थापत्य कला का यह अद्भुत नमूना है बावड़ी से सुरंग लांजी किला और मंडला किला तक अन्दर अन्दर जाता है। सुरक्षा के कारणों से इसे बंद कर दिया गया है। यह युद्ध के समय जल आपूर्ति के लिए बनायीं गयी थी। इस बावड़ी में जल काहा से आता है इसके स्रोत का आज भी रहस्य बना है। इस बहुमंजिला जलसंरचना पर बेहतरीन नकाशी की गयी है। इस बावड़ी पर 3 राज वंशो प्रभाव रहा है जिनमे हैहय राजवंश, गोंड राजवंश और भोंसले राजवंश प्रमुख है। इसकी वास्तुकला पर इन 3 राजवंशो की शैलियों की झलक मिलती है। राजा हटे सिंह ने इसका निर्माण केवल पानी के लिए ही नही बल्कि सैनिको के छिपने आराम करने तथा पेयजल की सुविधा के लिए किया गया था। यह बावड़ी विशाल चट्टानों को काट कर बनायीं गयी थी। इसके प्रथम तल पर 10 स्तम्भ है। जबकि निचले तल पर 8 अलंकृत स्तंभों पर आधारित बरामदे और कक्ष बने हुए है। बावड़ी के मुख्य द्वार पर 16वीं शताब्दी के चतुर्मुखी शिव और अम्बिकादेवी (हाथ में श्रीफल लिए) की सुन्दर नकाशीदार प्रतिमाये पर्यटकों का स्वागत करती है कुछ लोगो का मानना है की इस बावड़ी की नीव नागपुर शहर को बसाने वाले राजा बुलन्दशाह ने 17वीं शताब्दी में रखी थी बाद में हटे सिंह वल्के ने इसका विस्तार किया जिसके नाम इस गाँव का नाम हट्टा पड़ा ।

    भोंसले राजवंश के शासन के दौरान सामंत अपनी सेनाओ को याहा छिपाते थे। गर्मियों में तापमान कम रखने के लिए और पानी ठंडा रखने के लिए इसे जमीन के अन्दर बहुमंजिला बनाया गया था । इसकी संरचना 22X12 मीटर के घेरे में फैली है स्थानीय आदिवासियों के लिए यह केवल एक स्मारक नही बल्कि आदिवासी विरासत की हिस्सा है इसके निर्माण में पत्थरों को जोड़ने के लिए चुना गुड के घोल और बेल के मिश्रण का उपयोग किया गया था इसी कारण यह संरचना आज तक मजबूती के साथ खड़ी है। भोंसले काल के बाद 1818 ईस्वी में यह बावड़ी लोधी जर्मीदार नागपुरे परिवार के पास आई । जमीनदार परिवार ने 1988 ईस्वी में इसे पुरातत्व विभाग को सौंप दिया। जमीनदार प्रताप सिंह बताते है की आज से 20 25 साल पहले बालाघाट के तहसीलदार इस बावड़ी में पटवारियों की मासिक बैठक लेते थे। शोध कैंप में हट्टा जमीनदार प्रताप सिंह नागपुरे, श्री दिनेश नेमा, श्री राजेंद्र ब्रम्हे (से.नि. ए. एस. आई. नागपुर ) तथा आदिवासी जनता उपस्थित रह कर शोध कैंप को सफल बनाये।

  • छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 42 IAS अफसरों के तबादले, 7 जिलों के कलेक्टर बदले गए, देखें आदेश…

    छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 42 IAS अफसरों के तबादले, 7 जिलों के कलेक्टर बदले गए, देखें आदेश…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। एक साथ 42 IAS और 1 IFS अधिकारियों की पोस्टिंग और अतिरिक्त प्रभारों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक कई महत्वपूर्ण पदों पर नई तैनातियां की गई हैं।

  • साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: संजय पिल्लै, मुकेश गुप्ता, आरके विज का भूपेश सरकार में हुआ डिमोशन रद्द…

    साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: संजय पिल्लै, मुकेश गुप्ता, आरके विज का भूपेश सरकार में हुआ डिमोशन रद्द…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में अहम प्रशासनिक निर्णय लिया गया।


    मंत्रिपरिषद ने वर्ष 1988 बैच के तीन सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों—संजय पिल्लै, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता—की पदावनति से जुड़े पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है।
    यह पदावनति आदेश 26 सितंबर 2019 को तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में जारी किया गया था। साय कैबिनेट ने इस आदेश का पुनर्विलोकन करते हुए इसे रद्द करने का निर्णय लिया।

    इसके साथ ही, मंत्रिपरिषद ने 24 सितंबर 2019 को लिए गए उस मूल निर्णय को भी अपास्त कर दिया, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि उस निर्णय के अनुपालन में जारी सभी आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित माना जाएगा।

  • आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश…

    आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश…

    रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।
    उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।
    उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।
    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज, सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।
    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।