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  • छत्तीसगढ़ सरकार ने लॉन्च की वेबसाइट cghaat.in, ऑनलाइन ऑर्डर पर फल और सब्जियों की होम डिलीवरी….

    छत्तीसगढ़ सरकार ने लॉन्च की वेबसाइट cghaat.in, ऑनलाइन ऑर्डर पर फल और सब्जियों की होम डिलीवरी….

    कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। लॉकडाउन की अवधि में यह ऑनलाइन सेवा लोगों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो सकती है। वेबसाइट के लॉन्च होने के बाद अब तक लगभग 27 शहरों से 8524 से ज्यादा ग्राहकों, 1047 विक्रेताओं और 183 डिलीवरी करने वालों ने इस वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीयन कराया है और 3 लाख 21 हजार से ज्यादा लोग इसे विजिट कर चुके हैं। इस वेबसाइट पर 39 तरह के फल और 63 तरह की सब्जियां अभी तक उपलब्ध हैं।

    स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने आज यह जानकारी राजधानी रायपुर के सिविल लाइन्स रायपुर स्थित चिप्स कार्यालय के वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल में इस ऑनलाइन पोर्टल के लिए राज्य के सभी जिलों में नियुक्त किये गये डिस्ट्रिक्ट एडमिन और सिटी एडमिन के प्रशिक्षण के दौरान दी। इस अवसर पर रायपुर शहर के 50 से अधिक विक्रेताओं और सिटी एडमिन को भी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला और चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री समीर विश्नोई की उपस्थिति में प्रशिक्षण दिया गया। चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रवि सिंह ने भी प्रशिक्षण दिया।

    चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री समीर विश्नोई ने प्रशिक्षण देते हुए बताया कि डिस्ट्रिक्ट एडमिन लॉग इन कर सिटी एडमिन बना सकते है, इच्छुक वेण्डर स्वयं अपना पंजीयन करेंगे, जिसका अनुमोदन सिटी एडमिन द्वारा किया जायेगा। सिटी एडमिन यह ध्यान रखेगा कि वेण्डर के पास घर पहुंच हेतु पर्याप्त स्टॉक और डिलीवरी बॉय रहें। वेण्डर अपने स्टॉक एवं रेट को प्रतिदिन सुबह नियमित रूप से भरेंगे।

    प्रत्येक सुबह स्टॉक एवं रेट नहीं भरने पर ग्राहक को वह वेण्डर वेब पोर्टल पर नहीं दिखाई देगा। डिलिवरी बॉय का पंजीयन वेण्डर द्वारा किया जायेगा। डिलिवरी के समय ग्राहक को प्राप्त ओटीपी डिलिवरी बॉय द्वारा स्वंय के लॉग इन से भरा जायेगा, जिसके पश्चात् ही आर्डर डिलीवर माना जायेगा।

    फल एवं सब्जी की क्वालिटी अच्छी होने की जिम्मेदारी वेण्डर की होगी। क्वालिटी संबंधी शिकायत होने पर सिटी एडमिन द्वारा उसका निराकरण किया जायेगा. सिटी एडमिन द्वारा प्रतिदिन नियमित रूप से शिकायत पेज का अवलोकन कर उसका निराकरण पश्चात् पोर्टल में दर्ज किया जायेगा।

     

  • रामायण के इन 4 सीन्स को एडिट करने पर मचा बवाल…

    रामायण के इन 4 सीन्स को एडिट करने पर मचा बवाल…

    डीडी नेशनल पर इन दिनों रामायण सीरियल दिखाया जा रहा है। रावण का वध कर श्रीराम अयोध्या वापस जा चुके हैं। लेकिन दर्शन पहले प्रसारित किए गए रामायण के कई सीन्स को एडिट करने का आरोप लगा रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि रामानंद सागर के इस ऐतिहासिक शो के कई सीन्स को नहीं दिखाया गया है।

    इनमें से चार सीन्स प्रमुख हैं। हम आज आपको वो कौन-कौन से सीन्स है जिसे नहीं दिखाया गया उसके बारे में बता रहे हैं।  रामानंद सागर की रामायण के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जीवनी को टीवी पर दिखाने वाला ये पहला सीरियल था। इसीलिए शायद इसे 33 सालों बाद भी लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

     

    रामायण को लॉकडाउन में दोबारा से टेलीकास्ट करना फैंस के लिए बड़ी सौगात बनकर आया। दिन में 2 बार टेलीकास्ट होने वाली रामायण के साथ पुराने और नए दोनों दर्शक जुड़े। शो में राम-रावण का वध कर अयोध्या वापस जा चुके हैं। लेकिन इस दौरान शो के क्लाइमेक्स को लेकर फैंस ने आवाज उठाई है।

    उनका आरोप है कि रामानंद सागर के इस ऐतिहासिक शो के कई सीन्स को नहीं दिखाया गया है। चलिए जानते हैं उन सीन्स के बारे में जिन्हें टीवी पर ना दिखाए जाने से फैंस काफी निराश हैं। बात करते हैं क्लाइमेक्स सीन की। लोगों का आरोप है कि दूरदर्शन के प्रोड्यूसर्स ने राम-रावण के युद्ध के दौरान के कई सीन्स को एडिट किया है।

    एक यूजर ने लिखा कि मेकर्स ने राम-रावण के बीच फिल्माए गए जंग के कई अल्टीमेट सीन्स को एडिट किया। लोगों को ऐसा करने की वजह समझ नहीं आ रही है। एक यूजर ने लिखा- डीडी नेशनल ने रामायण के कई सारे सीन्स काटे, एक सीन में राम-लक्ष्ण को पाताललोक में अहिरावण ने किडनैप कर लिया था। ये सीन नहीं दिखाया गया।

    हनुमान का बेटा मकरद्वज भी नहीं दिखाया। चौथा सीन तब का है जब 14 सालों बाद लक्ष्मण अपनी पत्नी उर्मिला से मिलते हैं। सालों बाद एक-दूजे को देख वे दोनों ही काफी इमोशनल हो जाते हैं। इस इमोशनल सीन को ना दिखाने से फैंस काफी निराश हैं। हालांकि विवादों के तूल पकडऩे के बाद प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने रामायण के सीन्स को एडिट किए जाने पर अपनी सफाई दी है।

    उन्होंने ट्वीट कर लिखा- कोई कट्स नहीं लगाए गए हैं। वे ओरिजनल प्रोड्क्शन का हिस्सा नहीं थे। दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा- हमारे महाकाव्यों की सुंदरता कई कहानियां, साइड स्टोरीज, और व्याख्याएं हैं। हर बारीकियों को सिंगल टेलीविजन स्क्रिप्ट में नहीं दिखाया जा सकता है, लेकिन ये भविष्य के प्रोडक्शन के लिए रास्ता खोल सकते हैं।

  • छत्तीसगढ़ के 270 लोगों को भेजा गया क्वारेंटाईन सेंटर…अलग-अलग जगहों पर रखा गया है…सर्वाधिक 52 लोग सीटीआई गेवरा गेस्ट हाउस में…

    छत्तीसगढ़ के 270 लोगों को भेजा गया क्वारेंटाईन सेंटर…अलग-अलग जगहों पर रखा गया है…सर्वाधिक 52 लोग सीटीआई गेवरा गेस्ट हाउस में…

    कोरबा। कटघोरा के एक सीमित क्षेत्र में ही कोरोना संक्रमण को नियंत्रित रखने और कोर एरिया के अधिक से अधिक लोगों को इस संक्रमण से बचाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्य योजना पर अमल शुरू कर दिया है। हाई रिस्क वाले सभी लोगों को संक्रमित क्षेत्र से निकालकर सुरक्षित चरेंटाईन सेंटरों में रखा जा रहा है।

    जिले में अब तक 270 लोगों को नौ विभिन्न चरेंटाईन सेंटरों में रखा गया है। इन चरेंटाईन सेंटरों में रूकने वाले लोगों के लिए रहने, खाने की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा कर दी गई है। गेवरा के सी टी आई गेस्ट हाउस में तबलीगी जमात से जुड़े 52 लोगों को रखा गया है, वहीं कोरबा के रसियन हॉस्टल में बने अस्थाई चरेंटाईन सेंटर में संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए 26 लोगों को निगरानी में रखा गया है।

    शहर के टाप इन टाउन होटल में बने चरेंटाईन सेंटर में 36 लोगों को रखा गया है। उरगा के रिलेक्स इन होटल में 35, ग्रीन पार्क होटल में 46, प्रगति नगर दीपका में 13, कटघोरा के प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास में तीन लोगों को चरेंटाईन किया गया है। जिला दण्डाधिकारी किरण कौशल ने कोरोना के नियंत्रण के लिए चरेंटाईन सेंटर के रूप में बालाजी ट्रामा सेंटर अस्पताल को भी तत्काल प्रभाव से अधिग्रहित कर लिया है।

    इसमें कटघोरा के संक्रमित एरिया से गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं तथा बीमार बुजुर्गों को लाकर सुरक्षित रखा गया है। ट्रामा सेंटर में वर्तमान में 47 लोग चरेंटाईन किये गये हैं। इसी प्रकार एनटीपीसी के अस्पताल में भी 12 लोगों को चरेंटाईन किया गया है। इनमें से कुछ बुजुर्ग उम्रदराज बीमारियों जैसे लकवा, मधुमेह आदि से पीडि़त हैं और लंबे समय से इनका ईलाज किसी न किसी अन्य अस्पताल में चल रहा है।

    कटघोरा के संक्रमित क्षेत्र को पूरी तरह लॅाक डाउन करने के बाद और इलाके के सभी लोगों को होम आइसोलेशन में रखने के कारण इन बुजुर्गों के सामने अपनी स्वास्थ्यगत देखभाल की समस्या खड़ी हो गई थी जिसे ध्यान में रखते हुए इन बुजुर्गों को जरूरी देखभाल और लगातार चल रहे ईलाज के लिए एनटीपीसी अस्पताल के वार्ड में भर्ती किया गया है। ऐसे बुजुर्ग जिनको लगातार देखभाल की आवश्यकता है उनके साथ एक-एक परिजन को भी सहायक के रूप में अस्पताल में रहने की अनुमति दी गई है।

  •  पिता की मौत के बाद भी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे योगी ‘मां’ को भावुक चिट्ठी लिखकर कहा, कोरोना से जूझते राज्य को छोड़कर नहीं आ सकता ‘मां’…

     पिता की मौत के बाद भी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे योगी ‘मां’ को भावुक चिट्ठी लिखकर कहा, कोरोना से जूझते राज्य को छोड़कर नहीं आ सकता ‘मां’…

    दिल्ली। यूपी के सीएम और भाजपा के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया।

    अब कोरोना से लड़ाई में डटे योगी ने अपने परिवार को खत लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा कि एक बेटा अपने पिता के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं जा रहा है। योगी ने कहा कि कोरोना से लड़ाई बहुत जरूरी है। इसलिए वे पहले इससे निपटेंगे।
    इतना ही नहीं एक जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाते हुए योगी ने घरवालों से अपील की कि अंतिम संस्कार में कम से कम लोग शामिल हों। CM योगी का कर्तव्यबोध कितना अडिग है यह समझने के लिए ये पत्र काफी है। पत्र के वायरल होने के बाद लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।

    योगी आदित्यनाथ के पिता के निधन पर CM भूपेश बघेल ने जताया शोक, ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

    उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  पिता के छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गहरा शोक जताया है. उन्होंने ट्वीट योगी के पिता को श्रद्धांंजलि दी है. भूपेश बघेल ने ट्वीट करते हुए कहा

    उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के पूज्य पिताजी के दिवंगत होने की दुखद ख़बर मिली. इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं योगी आदित्यनाथ जी एवं उनके परिवारजनों के साथ हैं. मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करता हूँ.

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का निधन आज अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ. वे 89 साल के थे. उनका इलाजा दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा था. वे पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे और उन्होंने आज सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर अंतिम सांस ली. उन्हें किडनी और लिवर की समस्या थी. तबीयत खराब होने पर उन्हें 13 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था.

  • राज्य शासन ने जिलों में राहत पर फैसला लेने के लिए कलेक्टरों को दिया अधिकार

    राज्य शासन ने जिलों में राहत पर फैसला लेने के लिए कलेक्टरों को दिया अधिकार

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन को लेकर एक बड़ी खबर है। प्रदेश के कई जिलों में कल से लॉकडाउन में छूट मिलने लगेगी। हालांकि राजधानी में अभी छूट के लिए लोगों को इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार शाम प्रदेश के नाम संदेश में इस बात की तरफ इशारा कर दिया था कि लॉकडाउन में छूट के लिए राज्य सरकार विचार कर रही है। मुख्यमंत्री के संबोधन के 24 घंटे बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों से छूट के मद्देनजर आदेश जारी होना शुरू हो गया है।

    राज्य सरकार ने कलेक्टरों को इस बाबत अधिकृत किया है कि वो अपने जिलों की परिस्थिति और सुविधाओं के अनुरूप फैसला लें। राज्य सरकार के इस निर्देश के बाद सभी जिलों में कलेक्टर की तरफ से आदेश जारी होना शुरू हो गया है। अब तक बस्तर, नारायणपुर, दुर्ग सहित कई जिलों ने आदेश जारी भी कर दिया है। इन आदेशों में गृहमंत्रालय की तरफ से जारी गाइडलाइन के मुताबिक छूट दी गयी है। दुर्ग में मिठाई दुकान खुलेगी, लेकिन वहां सिर्फ दूध से बने सामान की बिक्री की ही इजाजत होगी। उसी तरह इस जिले में बेकरी भी खुलेगी।

    दुकानों में हाथ धोने और सेनेटाइजर का सामान रखना होगा
    कलेक्टर की तरफ से छूट के निर्देश के साथ इस बात की सख्त हिदायत दी गयी है कि जिन दुकानों को खोलने की इजाजत दी जायेगी, वहां साफ सफाई का पूरा ख्याल रखा जायेगा। वहीं दुकान के बाहर हाथ धोने का सामान और सेनेटाइजर को अनिवार्य रूप से रखना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा और एक ही वक्त में ज्यादा लोगों की भीड़ जुटने नहीं दी जायेगी।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक राजधानी के नगरीय क्षेत्रों में फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में नियम के मुताबिक छूट दी जायेगी। प्रशासन की तरफ से अभी इस बात का फैसला लिया गया है कि राजधानी में पूर्व की भांति लॉकडाउन कड़ाई के साथ जारी रहेगी, अगर परिस्थिति बेहतर रही तो आने वाले दिनों में छूट पर विचार किया जा सकता है, नहीं तो 3 मई तक लॉकडाउन को राजधानी में उसी कड़ाई से लागू करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।

    कल से कुछ जिलों में कूलर मैकनिक, एसी मैकनिक, पलंबर और बाइक मैकनिक को भी काम करने की छूट मिलेगी। हालांकि पूर्व के जारी आदेश में इन्हें शामिल नहीं किया गया था, लेकिन अब नयी गाइडलाइन में इन मैकनिक्स को भी शामिल कर दिया गया है।

  • प्रभा मिश्रा नहीं भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण हैं रामायण की असली मंदोदरी, 15 साल बाद सामने आई असलियत

    प्रभा मिश्रा नहीं भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण हैं रामायण की असली मंदोदरी, 15 साल बाद सामने आई असलियत

     

    • बीते 15 वर्षों से लोग ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ीं प्रभा मिश्रा को मानते रहे हैं रामायण में मंदोदरी की भूमिका निभाने वाली एक्ट्रेस
    • वास्तव में मंदोदरी का किरदार महान अभिनेता भारत भूषण की बेटी अपराजिता ने निभाया था, जो वर्तमान में एक लेखिका है
    • वायरस के लॉकडाउन के कारण टीवी पर 34 साल बाद रामानंद सागर की बनाई रामायण का फिर से प्रसारण हो रहा है। दर्शक जहां इस धारावाहिक के बहाने यादों को ताजा कर रहे हैं, वहीं इसके कारण एक सच्चाई का खुलासा भी हुआ जो मंदोदरी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस को लेकर है। दरअसल, बीते 15 वर्षों से लोग और मीडिया प्रभा मिश्रा नाम की जिस महिला को मंदोदरी की पहचान देते आए हैं, उन्होंने वास्तव में मंदोदरी की भूमिका नहीं निभाई थी। सच्चाई यह है कि इस भूमिका को महान अभिनेता भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण ने निभाया था।
    मंदोदरी की भूमिका के लिए मेकअप की यह 35 साल पुरानी यह तस्वीर अपराजिता ने अपने एलबम से साझा की है।

    एक महान किरदार की पहचान खोने के इस पूरे मामले म अपराजिता भूषण का सच अपराजिता के शब्दों में बयां कर रहे हैं-

    मैं अपराजिता भूषण, भारत भूषण जी की बड़ी बेटी हूं और अपने परिवार के साथ पुणे में रहती हूं। मैं करीब 23 साल पहले फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो गई थी और मैंने अपना आगे का करिअर बतौर एक लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में बनाया है।

    ये इसी साल जनवरी के महीने की बात है। जब कुछ शुभचिंतकों ने मेरे ध्यान में यह बात लाई कि इंटरनेट पर ‘मंदोदरी’ शब्द को सर्च करें तो रामानंद जी की रामायण में मंदोदरी की आपकी भूमिका आपके नाम से नहीं, बल्कि बीके प्रभा मिश्रा के नाम से आती है। यह बात तब की है जब न तो कोई कोरोना संकट था और न ही रामायण के दोबारा प्रसारण की कोई योजना थी।

    मंदोदरी की भूमिका में रावण बने अरविंद त्रिवेदी के साथ अपराजिता। 

    मैं शॉक्ड रह गई क्योंकि मेरे नाम और काम पर आघात यह सब पिछले 15 साल से चल रहा था। मैंने गूगल सर्च करके पुराने लिंक खोजे और पाया कि मेरे शुभचिंतक सही कह रहे थे। मैंने पाया कि जिन प्रभा मिश्रा के नाम को रामायण की मंदोदरी बताया जा रहा है वे प्रतिष्ठित संस्था ब्रह्मकुमारीज से जुड़ी हैं।

    इसके बाद मैंने ब्रह्मकुमारीज संस्था से सम्पर्क किया और उन्हें पूरी बात बताते हुए कहा कि इससे तो मेरा काम और मेरी पहचान ही गुम हो गई, या कहें कि चोरी हो गई। उन्होंने मेरी बात बहुत गंभीरता से सुनी और मदद के लिए तुरंत कदम उठाए। उन्हीं के माध्यम से मैंने प्रभा मिश्रा से सम्पर्क किया। उन्होंने सब कुछ सुनकर मुझे कुछ अजीब से तर्क दिए, जो सच्चाई से परे थे।

    सच-झूठ सामने आने के बाद उन्होंने मुझसे माफी मांगी। मैं व्यथित थी और मैंने उनसे आग्रह किया कि वे मेरी पहचान लौटाए और बीते 15 वर्षों में जो भी इंटरव्यू दिए है उन्हें डिलीट करवाएं और जो भी बातें उन्होंने मेरी मंदोदरी वाली भूमिका ओढ़कर की है उसे लेकर अपना स्पष्टीकरण लिखित में दें कि मैंने वह भूमिका नहीं की थी, मैंने तो सिर्फ उसका इस्तेमाल किया था।

    कई बार ध्यान दिलाने के बाद भी दो महीने तक उनकी ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। तभी अचानक कोरोना लॉकडाउन में दूरदर्शन ने रामायण को फिर से दिखाने का फैसला किया। मुझे मीडिया की ओर से कॉल आने लगे और साथ ही प्रभा मिश्रा की भूमिका को लेकर भी मुझसे सवाल किए जाने लगे। जब मैंने सच्चाई बताई तो सभी हैरान थे और मुझे कानूनी कदम उठाने की सलाह भी दी गई, हालांकि मैंने उस सलाह को नजरअंदाज करने का फैसला किया।

    बीके प्रभा मिश्रा की फाइल फोटो, जिन्हें अब तक माना जाता था कि मंदोदरी की भूमिका उन्होंने निभाई थी। 

    मैंने प्रभा जी को फिर से कॉल किया और उनसे कहा कि आप मुझे एक ईमेल करके अपनी सफाई दें और उसमें लिखें कि मैं असली मंदोदरी नहीं हूं, यह भूमिका अपराजिता भूषण ने की थी। उन्हाेंने बीते दिनों मुझे एक ईमेल भेजा और अपनी गलती स्वीकार कर मुझे अपनी मंदोदरी की पहचान लौटाई। आखिरकार, उन्होंने मेरा सहयोग किया और इस तरह सद्भावनापूर्वक इस पूरे मामले में सच की जीत हुई।

    बीते तीन महीने मुझे इस पूरे मामले ने काफी परेशान किया। मेरे परिवारजन भी दुखी हुए, लेकिन हमने हिम्मत और सच्चाई के साथ सहानुभूति से सभी के सामने अपने पक्ष को रखा। मैंने प्रभा जी से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। मेरे पिता ने हमेशा हम बच्चों को रामायण और श्रीमदभगवतगीता के रास्ते पर चलने की सीख दी। बतौर स्प्रिच्युअल राइटर और स्पीकर होने के नाते मेरी शक्ति भी वही गुण हैं। मेरा मानना है कि जीवन में क्षमा और करुणा बहुत आवश्यक है, लेकिन मेरा यह भी मानना है कि जो कुछ भी गलत है और धर्म के विरूद्ध है, उसका मुकाबला करके उसे नष्ट किया जाना चाहिए।

    अंत में, मैं कहूंगी कि ईश्वर की कृपा है कि उन्होंने मेरी सत्यनिष्ठा को स्थापित करने की शक्ति दी और मुझे अंधेरे से उजाले में आने का मार्ग दिखाया।

  • अखबार या चैनल में काम करने वाला “हर शख्स पत्रकार” नहीं होता

    अखबार या चैनल में काम करने वाला “हर शख्स पत्रकार” नहीं होता

    आइये आपको पत्रकारिता जगत की पोस्ट (पद) के बारे में अवगत कराएँ

    मालिक

    पहले सिर्फ एक पत्रकार ही अखबार का मालिक होता था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी भी यंग इंडिया अखबार के मालिक रहे हैं। 7 मार्च 1956 को राजस्थान पत्रिका अखबार की शुरुआत करने वाले श्री कर्पूरचंद क़ुर्लिस जी भी मालिक बनने से पहले एक जाने-माने पत्रकार थे। उज्जैन जिले के स्थानीय तौर पर बात करे तो 51 साल पहले दैनिक अवंतिका अखबार की शुरुआत करने वाले श्री गोवर्धनलाल मेहता जी पत्रकार थे। दैनिक अग्निपथ अखबार की शुरुआत करने वाले ठाकुर शिवप्रताप सिंह चंदेल जी देश के जाने-माने मूर्धन्य पत्रकार थे। 40 साल से अदम्य साहस की पत्रकारिता कर रहे साप्ताहिक अदम्य अखबार के मालिक श्री भूपेंद्र दलाल जी जाने-माने पत्रकार हैं। लेकिन वर्तमान दौर में कोई सटोरिया, भू-माफिया, शराब माफिया, गुटखा किंग, पार्टी नेता या चकलाघर संचालित करने वाला भी अखबार या चैनल का मालिक बन जाता हैं।

    संपादक

    ये मालिक के बाद अखबार की सबसे बड़ी पोस्ट है। इस पोस्ट पर एक सही पत्रकार ही बैठ सकता हैं क्योंकि उसे 10-12 साल मैदान में पत्रकारिता कर सभी बीटों का ज्ञान रहता हैं। कौन सी खबर अखबार में कितनी और कहाँ पर जाएगी। ये सारे अधिकार संपादक के पास रहते हैं। ये बात और है कि अखबार मालिक चाहे तो अपने 8 वी पास चमचे को भी संपादक की कुर्सी पर बैठा सकता है।

    पत्रकार

    ये अखबार की रीढ़ की हड्डी होते है। इनकी खबरों के दम पर अखबार की साख रहती है और बाजार में वह टिका रहता हैं। अखबार में इनकी अलग-अलग बीट होती है। जैसे क्राइम, प्रशासन, खेल, धर्म, नगर निगम, राजनीतिक व अन्य। ऑफिस मीटिंग के बाद सुबह से शाम तक इन्हें अपनी-अपनी बीटों में रहना होता है और शाम को ऑफिस आकर इन्हें खुद अपनी-अपनी खबरें बनाकर देनी होती हैं। ये बात और है कि मीटिंग के बाद कुछ पत्रकार घर जाकर सो जाते है और शाम को ऑफिस आकर टेलीफोनिक पत्रकारिता को अंजाम देते हैं।

    ब्यूरो प्रमुख

    यदि अखबार मालिक किसी शहर या तहसील में खुद के खर्च से ऑफिस मेंटेन कर वहाँ की खबरों के लिए स्थानीय पेज निकालता है तो इस स्थान पर बैठाए गए पत्रकार को ब्यूरो प्रमुख कहते है। ब्यूरो प्रमुख को खबरें भी लिखनी होती हैं।

    कंप्यूटर आपरेटर

    ये पत्रकारों की लिखी खबर या संपादक द्वारा लिखी संपादकीय या फिर विज्ञापन को सही डिजाइन देकर संपादक द्वारा अखबार में बताए स्थान पर लगाते हैं।

    मार्केटिंग

    इन्हें अखबार के लिए विज्ञापन लाना होता हैं। खबरें लिखने की वजह से पत्रकार सरस्वती पुत्र कहलाता है; लेकिन ये अखबार के लिए विज्ञापन के तौर पर धन लाते हैं इसलिए ये लक्ष्मीपुत्र कहलाते हैं। चूंकि लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू होता हैं। जिस पर किसी मार्केटिंग वाले के उल्लू रहने पर भी ये मालिक के लाड़ले के रहते है।

    फोटो-वीडियो ग्राफर

    अखबार व चैनल मालिक की ओर से इन्हें किसी भी प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछने के कोई अधिकार नहीं रहते हैं। सवाल पूछने का अधिकार उनके साथ आए सिर्फ पत्रकारों को ही रहता हैं। इनका मूल कार्य घटना-दुर्घटना, मेले-ठेले व अन्य सभी कार्यक्रमों को अपने कैमरे में कैद कर संबंधित बीट के पत्रकारों को जानकारी देना भर रहती हैं। इनके फ़ोटो तक पर केपशन पत्रकार ही देते हैं।

    हॉकर

    इनकी अखबार के लिए विशेष भूमिका होती हैं। ये कड़कती सर्दी हो, भीषण गर्मी हो या फिर मूसलाधार बारिश हो कि सारी बाधाओं को चीरते हुए सही समय पर पाठकों तक अखबार पहुचाते हैं।

    एजेंट

     (पत्रकारों में अपनी गिनती करने वाले सबसे खतरनाक प्रजाति) ये राजधानी या बाहर के किसी शहर के 100-50 अखबार की एजेंसी ले आते हैं। इनका मूल काम कुछ और होता है। लेकिन अपने धंधे की छतरी के तौर पर ये अखबार या चैनल की एजेंसी ले आते हैं। चूंकि मालिक को इनसे धन प्राप्त होता है इसलिए इनके अनुरोध पर वे इन्हें एजेंट का नहीं बल्कि ब्यूरो प्रमुख का कार्ड बनाकर दे देते हैं जबकि ज्यादातर एजेंटों को पत्रकारिता के प शब्द की जानकारी भी नहीं होती हैं।

    प्रेसक्लब अध्यक्ष व उसकी पूरी कार्यकारिणी

    इसके लिए पत्रकार होना जरूरी नहीं हैं लेकिन इसके लिए प्रेसक्लब के सदस्य व मतदाता होना बहुत जरूरी हैं। भले ही वह सदस्य व मतदाता शराब कारोबारी हो या फिर अन्य किसी धंधे में लिप्त हो। मतदान के बाद यदि वह चुन लिया जाता है तो वह अध्यक्ष व कार्यकारिणी सदस्य बन जाता हैं।

    अधिमान्य पत्रकार शासन के नियमानुसार एक सही पत्रकार ही अधिमान्य पत्रकार बन सकता हैं। मतलब उसका पत्रकारिता के अलावा कोई पेशा न हो, उसकी शिक्षा कम से कम ग्रेजुएट हो, आपराधिक रिकार्ड न हो, पत्रकारिता के रिकॉर्ड के तौर पर उसकी कम से कम 5-6 साल की खबरों की कतरने हो। वे ही अधिमान्य पत्रकार बनने के पात्र होते हैं। ये बात और है कि जनसंपर्क/मंत्री अपने अधिकारों का प्रयोग कर किसी को भी अधिमान्य पत्रकार का कार्ड जारी कर सकते हैं। इसके पहले प्रदेश में 15 साल तक भाजपा की सरकार रही थी। जिस पर प्रदेश के सैकड़ों चाटुकार / दलालों के पास भी अधिमान्य पत्रकार के कार्ड हैं।

  • सरकार का आदेश बस इन 17 सेवाओं पर ही मिलेगी छूट … जानिये कौन-कौन सी सेवा रहेगी आपके लिए उपलब्ध

    सरकार का आदेश बस इन 17 सेवाओं पर ही मिलेगी छूट … जानिये कौन-कौन सी सेवा रहेगी आपके लिए उपलब्ध

    क्या-क्या कर सकेंगे आप ,किस कार्य के लिए मिलेगी छूट

    1. स्वास्थ्य सेवाएं। इसमें AYUSH सेवाएं फँक्शनल रहेंगी।
    2. सभी तरह की कृषि, हॉर्टिकल्टर गतिविधियां की जा सकेंगी।
    3. मछलीपालन से जुड़ी गतिविधियों (मरीन या इनलैंड) का संचालन किया जा सकेगा।
    4. चाय, कॉफी, रबड़ आदि का प्लांटेशन किया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए 50 फीसदी वर्करों के साथ काम की इजाजत।
    5. पशुपालन किया जा सकेगा।
    6. वित्तीय क्षेत्र का कामकाज जारी रहेगा।
    7. सोशल सेक्टर का कामकाज जारी रहेगा।
    8. पेट्रोल पंप जैसी पब्लिक यूटिलिटीज सेवाओं को छूट
    9. सामान की ढुलाई का काम चलता रहेगा।
    10. मनरेगा से जुड़ी गतिविधियों को इजाजत। लेकिन सोशल डिस्टैंसिंग और फेस मास्क के साथ होगा काम।
    11. जरूरी सामान की सप्लाई को छूट
    12. कमर्शल व प्राइवेट कंपनियों को काम करने की छूट
    13. इंडस्ट्रीज/औद्योगिक इकाइयां(सरकारी व निजी) को काम की इजाजत।
    14. कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम किए जा सकेंगे।
    15. मेडिकल व वेटिनरी केयर और जरूरी सामान की खरीदारी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए प्राइवेट वीइकल का इस्तामल किया जा सकेगा। इसके अलावा, जो लोग छूट प्राप्त कैटिगरी में काम के सिलसिले में बाहर जा रहे हैं उनको इजाजत होगी।
    16. केंद्र, राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों के सभी दफ्तर खुले रहेंगे।

    17. ऑनलाइन टीचिंग, डिस्टेंस लर्निंग की बढ़ावा देने की बात कही गई. ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का नियम सही से पालन हो।

  • इंदौर में कोरोना से पुलिस इंस्पेक्टर ने तोड़ा दम, अरविंदो अस्पताल में चल रहा था इलाज

    इंदौर में कोरोना से पुलिस इंस्पेक्टर ने तोड़ा दम, अरविंदो अस्पताल में चल रहा था इलाज

     मध्यप्रदेश। इंदौर में कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमित पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई। देवेंद्र चंद्रवंशी जूनी इंदौर थाना प्रभारी भी रहे।

    कोरोना पॉजीटिव रिपोर्ट आने के बाद अरविंदो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अरविंदो अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार देर रात उन्होंने दम तोड़ा है।

    कोरोना से थाना प्रभारी की मौत से पुलिस कर्मियों को बड़ा सदमा लगा है। बता दें मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा इंदौर जिला कोरोना से प्रभावित है। यहां संक्रमित मरीजों की संख्या 891 पहुंच गई है।

    वहीं इंदौर में 48 लोगों ने दम तोड़ा है। मध्यप्रदेश में संक्रमितों की संख्या 1400 के पार पहुंच गया है।

  • ई- कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं, केवल जरूरी सामान कर सकती हैं डिलीवर

    ई- कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं, केवल जरूरी सामान कर सकती हैं डिलीवर

    दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनियों को तीन मई तक लॉकडाउन से छूट नहीं मिलेगी. कंपनियां केवल जरूरी सामान डिलीवर कर सकती हैं।

    गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा गैर-जरूरी सामान की सप्लाई पर रोक लगा दी है।