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  • जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने बना डाली सोलर कार, आनंद महिंद्रा भी देखकर रह गए दंग….

    जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने बना डाली सोलर कार, आनंद महिंद्रा भी देखकर रह गए दंग….

    भारत में धुरंधरों की कमी नहीं है, यहां आए दिन आप कुछ न कुछ ऐसा देखते या सुनते होंगे, जिसका भरोसा कर पाना नामुमकीन सा लगता है। ठीक ऐसा ही जम्मू-कश्मीर के एक मैथ टीचर ने किया, जिसको देख महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी खुद को रोक नहीं पाये। आनंद महिंद्रा ने जितना हो सकता था उतनी उस मैथ टीचर की तारीफ की। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।

    इसलिए आनंद महिंद्रा ने की तारीफ

    दरअसल, जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने सोलर से चलने वाली कार को बनाया है, जो धूप से चार्ज होता है और बिना ईंधन के चलता है। दिखने स्टाइलिश लगने वाली इस कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तब वायरल हुआ जब आनंद महिंद्रा ने गाड़ी का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते मैथ टीचर की तारीफ की।

    धूप से चलती है ये सोलर कार

    जम्मू और कश्मीर के बिलाल अहमद ने एक इलेक्ट्रिक कार का आविष्कार किया है, जो एक किफायती विकल्प हो सकता है। अहमद की इलेक्ट्रिक कार, जो 11 साल के शोध और कड़ी मेहनत का नतीजा है, वह सौर ऊर्जा से चलती है। जहां परिवहन के हरित तरीकों को अपनाने की बात आती है तो उनके नवाचार को सही दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है

    आनंद महिंद्रा ने बढ़ाया बिलाल का हौसला

    मैं बिलाल के अकेले ही इस प्रोटोटाइप को विकसित करने की सराहना करता हूं। इस डिजाइन को अमल में लाने की जरूरत है और ऐसे कारों का उत्पादन होना चाहिए।

    उद्योगपति आनंद महिंद्रा प्रौद्योगिकी और नवाचार में गहरी रुचि रखने के लिए जाने जाते हैं। वो आए दिए अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से लोगों को मोटिवेट करते रहते हैं। उन्होंने बिलाल अहमद के इस अविष्कार की  सराहना की। 67 वर्षीय अरबपति ने कहा कि अहमद का जुनून काफी सराहनीय है। 

  • छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अफसरों की लूटपाट से परेशान केंद्र सरकार ने फंड का भुगतान लिया अपने हाथो, ‘प्रसाद’ योजना से शुरुआत, केंद्रीय योजनाओं में भ्रष्टाचार की CBI जांच से पहले फंड कंट्रोल का झटका…

    दिल्ली : केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में लोकहित की योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार और गुणवत्ता विहीन कार्यो को लेकर बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार अब फंड कंट्रोल नीति लागू कर केंद्रीय आर्थिक मदद को नौकरशाहों और नेताओं की तिजोरी में जाने से रोकने की मुहिम में जुट गया है। यह रकम अब डिजिटल माध्यमों से सही व्यक्ति के हाथों में पहुंचेगी। इससे कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार थमेगा जबकि सरकारी रकम के बेहतर इस्तेमाल से जनता को लाभ होगा।

    राज्य में IT – ED के छापों में नौकरशाहों के ठिकानों से करोड़ो की काली कमाई सामने आने के बाद भारत सरकार सतर्क हो गई है। सूत्र बताते है कि केंद्र सरकार अखिल भारतीय सेवाओं के छत्तीसगढ़ में तैनात अफसरों की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच CBI के हवाले करने पर विचार कर रही है। 

    केंद्र ने एक ताजा फैसले में छत्तीसगढ़ की धार्मिक योजना के 45 करोड़ रूपए के भुगतान के तौर – तरीके पर डिजिटल अटैक किया है।  धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली प्रसाद योजना में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ का चयन किया गया था। इसके लिए लगभग 45 करोड़ रुपए का फंड जारी कर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई थी।

    लेकिन अब केंद्र ने फंड का कंट्रोल राज्य सरकार के बजाय अपने हाथ में ले लिया है। राज्य सरकार इस योजना की सिर्फ वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट देगी। लेकिन ठेकेदार को केंद्र सरकार अपनी एजेंसी के माध्यम से भुगतान करेगी।

    भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के तहत वर्ष 2014-2015 में पीआरएएसएडी (प्रसाद) योजना शुरू की गई थी। इसके तहत  ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन अभियान’ चलाया गया था। इससे राज्यों में धार्मिक पर्यटन अनुभव को समृद्ध करने के लिए पूरे भारत में तीर्थ स्थलों को विकसित करने और पहचान करने में मदद मिली थी।

    ऐसी ही कई लोक कल्याणकारी प्रदेश में संचालित हो रही है। इनमे से एक जल – जीवन मिशन भी है। इसके तहत करीब 22 हजार करोड़ रूपए खर्च कर लोगो के घर – घर तक वर्ष  2024 तक जल पहुंचाने का लक्ष्य है। यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।

    इसके शुरुआती दौर में ही कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार हावी हो गया था। नतीजतन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को करीब 10 हजार करोड़ के टेंडर – निविदा रद्द करना पड़ा था।

     हालांकि उनके निर्देशों के बावजूद PHE में पदस्थ अफसर भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी में शामिल रहे। इस मामले में विभागीय मंत्री की कार्यप्रणाली ने भी आग में घी का काम किया। फिलहाल, दर्जनों ऐसी योजनाएं है जो भ्रष्टाचार के चलते दम तोड़ रही है। ऐसे में आर्थिक भुगतान के तौर तरीको पर डिजीटल अटैक कारगर साबित हो रहा है।  

  • छत्तीसगढ़ में सौम्या का रिमोट चर्चा में, लाखों की भीड़ में स्मृति ईरानी का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर कटाक्ष, पूछा – रिमोट कंट्रोल सोनिया के या फिर सौम्या के पास ? अब भूपेश भी चुप और कांग्रेस की भी चुप्पी

    बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में भाजपा महिला मंडल ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोला है। प्रदेश में महिला उत्पीड़न के खिलाफ महतारी हुंकार रैली के जरिये पहला निशाना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बेहद करीबी सौम्या चौरसिया पर साधा गया है। भूपेश बघेल और सौम्या को लेकर बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने सीधा सवाल किया है। बिलासपुर में एक बड़ी रैली में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछा है कि छत्तीसगढ़ में राज किसका है ? आखिर रिमोट कंट्रोल किसके पास है। सोनिया जी या सौम्या। स्मृति ईरानी के इस सवाल पर भीड़ ने जमकर तालियां बजाई।  

    स्मृति ईरानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह जानना जरुरी है कि आखिर राज किसका है, उन्होंने कहा कि एक वक्त ऐसा था जब हिंदुस्तान में केंद्र सरकार कांग्रेस पार्टी चला रही थी। उन्होंने कहा कि इस दौर में जब हम जनता से पूछते थे कि राज किसका है, तो जनता बोलती थी, सोनिया जी का। आज वक्त कांग्रेस का छत्तीसगढ़ में है, तो मैं भूपेश जी से पूछना चाहती हूँ, रिमोट कंट्रोल किसके हाथ में है भूपेश जी। सोनिया जी के हाथ में है या सौम्या जी के हाथ में है ? केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के इस सवाल को सुनकर जनता ने जमकर तालियां ठोकी। 

    सवाल किया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार कौन चला रहा है सोनिया जी या सौम्या? उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछा कि रिमोट कंट्रोल किसके पास है। सौम्या के या सोनिया जी के पास। स्मृति ईरानी के इस तंज से साफ़ नजर आ रहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया के चर्चे मुख्यमंत्री कार्यालय और बंगले से बाहर निकलकर गांव – कस्बों, गली – चौराहो, नुक्क्ड़ों और पान के ठेलो तक लोगों की जुबान पर है।

    स्मृति ईरानी के इस कटाक्ष से छत्तीसगढ़ में सौम्या चौरसिया के कारनामे एक बार फिर सुर्खियों में आ गए है। दिलचस्प बात यह है कि जनता की अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सौम्या चौरसिया का दंश लोग झेल रहे है। छत्तीसगढ़ शासन की छवि धूमिल हो रही है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सौम्या पर वरदहस्त बना हुआ है। 

    सूत्र बताते है कि सौम्या के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्यावाही की लम्बी फहरिस्त शासन के पास है। उसकी कार्यप्रणाली को लेकर अदालती फैसलों से शासन की भद्द पिटी है।IT – ED करोड़ों के भ्रष्टाचार गब्बर सिंह टैक्स की वसूली और आय से अधिक संपत्ति के मामलो को लेकर सौम्या से लगातार पूछताछ कर रही है। IT डिपार्टमेंट ने तो सौम्या और उसके गिरोह के खिलाफ दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है।

    IT ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भी सौम्या चौरसिया की काली करतूतों को संज्ञान में लाया है।  उसने आखिर कैसे डिजिटल सबूत नष्ट करने के लिए सिंगापुर से मोबाईल चैट डिलीट करवाई, इसे लेकर भी केंद्रीय एजेंसिया उससे पूछताछ कर रही है। सूर्यकान्त तिवारी, बिट्टू, क्षितिज (चिप्स वाले), IAS रानू साहू, जेल में बंद IAS समीर विश्नोई और अनिल टुटेजा के साथ अंजाम दिए गए कई आर्थिक अपराधों को लेकर सौम्या सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री से करीबी संबंधों के चलते उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही से जुडी कायदे कानूनों की किताबे रद्दी की टोकरी में डाली जा रही है। कानून के रखवाले कानून तोड़ने वाले के शिकंजे में है।

    इन सभी तथ्यों को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाये जाने के बावजूद भूपेश बघेल का कार्यवाही को लेकर हाथ पीछे खींच लेना किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रहा है। दिल्ली से आई स्मृति ईरानी के साथ – साथ राज्य की जनता भी पूछने लगी है कि आखिर माजरा क्या है ? क्यों एक मुख्यमंत्री एक सामान्य डिप्टी कलेक्टर स्तर की महिला अफसर के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने से पीछे हट रहे है।    

    राज्य के दो मुख्यमंत्री पहले स्वर्गीय अजीत जोगी और उसके बाद रमन सिंह कभी भी अपने अधीनस्थ किसी महिला कर्मचारी को लेकर इतने चर्चित नहीं हुए। उनके कार्यालय में भी दर्जनों महिलाएं अपनी सरकारी सेवाएं देती थी। लेकिन उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कभी भी गतिरोध नहीं देखा गया।

    जूनियर और सीनियर अफसरों के बीच अनुशासन और आपसी संबंधों को लेकर एक दायरा देखा जाता था। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रुख से सौम्या को प्राप्त सरंक्षण सरकारी कायदे कानूनों के निर्वाहन पर भी भारी पड़ रहा है। सौम्या के खिलाफ शिकायतों पर कार्यवाही के लिए ना तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हरी झंडी दे रहे है, और ना ही मुख्यसचिव कार्यालय वैधानिक कार्यवाही के लिए हिम्मत जुटा रहा है।

    उधर सौम्या चौरसिया पर निशाना साध कर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राजनीति गरमा दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि पर यह एक चर्चित हमले के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसका जवाब ना तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और ना ही कांग्रेस पार्टी दे रही है। अलबत्ता सौम्या को छोड़ बीजेपी और उसके नेताओं के तमाम आरोपों पर कांग्रेस हमलावर है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री बघेल स्मृति ईरानी के इस सवाल का जवाब देकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। 

  • नए जज साहब की अग्रिम जमानत रद्द करने की गुहार, ”लुक एट दिश मैटर मायलॉड” नान घोटाले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा के ताजा कारनामों से मुख्यमंत्री बघेल के अरमानों पर भी फिरा पानी, लैटरबाजी से राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारे में खलबली, हाईकोर्ट से संज्ञान लेने की अपील….

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारे में नान घोटाले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बिलासपुर हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल होने के बाद अनिल टुटेजा की कार्यप्रणाली कई विवादों से घिरती नजर आ रही है। IT – ED  ने भी टुटेजा और उनके करीबियों से पूछताछ शुरू कर दी है।

    दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में अनिल टुटेजा समेत आधा दर्जन से ज्यादा अफसरों और कारोबारियों के खिलाफ IT डिपार्टमेंट ने चालान पेश कर कई गंभीर आरोप लगाए है। इसमें सिंगापुर से मोबाईल चैट डिलीट कराने को लेकर भी सबूत नष्ट करने की IPC की धाराओं के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया है। यही नहीं सरगुजा इलाके में अडानी की कम्पनी की सहायता के लिए वन विभाग द्वारा हजारो पेड़ कटवाए जाने का मामला भी अनिल टुटेजा से जुड़ा बताया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा ED को लिखा गया पत्र : –

     सूत्रों का दावा है कि जब – जब सुप्रीम कोर्ट में नान घोटाले की सुनवाई करीब आती है, सरगुजा में अडानी की सहायता के लिए इंड्रस्टी विभाग के संयुक्त सचिव अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मैदान में कूद जाते है। यहाँ आदिवासियों को खदेड़ने और जंगलो की अंधाधुंध कटाई समेत कई विभागीय कार्यो की फाइल तेजी से विभिन्न दफ्तरों में दौड़ने लगती है। लेकिन जैसे ही सुप्रीम कोर्ट में घोटाले की सुनवाई खिसकती है, वैसे ही ये तमाम फाइलें आलमारियों में कैद हो जाती है।

    सूत्रों के मुताबिक अग्रिम जमानत पर रिहा होने के बाद नान घोटाले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा के सरकारी और गैर सरकारी कारनामों से छत्तीसगढ़ शासन को भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 

    ताजा मामला नान घोटाले के आरोपी का पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को पत्र लिखने से जुड़ा है। रमन सिंह ना तो जज है और ना ही किसी जाँच एजेंसी से जुड़े है। ऐसे में टुटेजा का यह पत्र रमन सिंह पर हथियार के रूप में फेंका जाना चर्चा में है। जबकि नान घोटाले की जाँच के लिए SIT का गठन आरोपी टुटेजा और मुख्यमंत्री बघेल की सहमति से हुआ है।

    टुटेजा का मौजूदा  मुख्यमंत्री के बजाय पूर्व मुख्यमंत्री को पत्र लिखना किसी षड्यंत्र का हिस्सा बताया जा रहा है। इस पत्र में टुटेजा ने कोर्ट में विचाराधीन नान घोटाले मामले की सुनवाई पूरी होने से पूर्व एक जज के हैसियत से फैसला लिखा है। 15 पन्नो में अदालती दास्तान लिखकर टुटेजा ने जहां खुद को पाक साफ़ बताया है, वही मुख्यमंत्री रमन सिंह को क्लीन चिट भी दी है। टुटेजा ने नान घोटाले के सारे आरोपों को नकारते हुए लिखा है कि नागरिक आपूर्ति निगम में कोई घोटाला हुआ ही नहीं है।

    नान घोटाले के सारे आरोप काल्पनिक, अटकलों और राजनीति से प्रेरित बताते हुए टुटेजा का आरोप है कि ACB ने उनके खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज किया था। टुटेजा ने इस पत्र में अदालती साक्ष्यों और प्रकरण से संबंधित कई तथ्यों का खुलासा किया गया है। अब यह पत्र सार्जनिक होने के बाद आम जनता, राजनेताओं, प्रशासनिक गलियारे से होता हुआ उन लोगो तक पंहुचा है, जो नान घोटाले के प्रमुख गवाह थे। ये गवाह सरकारी संरक्षण प्राप्त आरोपी टुटेजा के प्रभाव से पहले ही होस्टाइल हो चुके है।

    मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच इन गवाहों में सच्चाई का साथ देने की आस जगी थी। लेकिन अग्रिम जमानत पर रिहा अनिल टुटेजा के सरकार की गोद में बैठकर अदालत के दिशा निर्देशों की धज्जिया उड़ाने से वे काफी सहम गए है। मुख्यमंत्री बघेल और टुटेजा के बीच मधुर संबंधो का खामियाजा इन गवाहों को भोगना पड़ रहा है। 

    टुटेजा के इस पत्र से राजनैतिक उफान भी मचा है। दरअसल राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में ED को पत्र लिखकर 15 दिनों के भीतर नान घोटाले की जांच करने की मांग की गई है। अन्यथा बघेल ने चेतावनी दी है कि वे कोर्ट जायेंगे। भूपेश बघेल के इस दावे की पोल टुटेजा के पत्र से ही खुलती प्रतीत हो रही है। एक ओर सरकार की गोद में बैठकर टुटेजा अपने पत्रो के जरिये नान घोटाले से ही इंकार कर रहा है। वही प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल ED से 15 दिनों के भीतर जाँच की मांग कर कोर्ट जाने का एलान कर रहे है।

    टुटेजा के पत्र से सरकार और आरोपी के बीच ही भ्रम की स्थिति निर्मित होने से जनता भी हैरत में है। उन्हें लगने लगा है कि नान घोटाले की असलियत पर पर्दा डालने के लिए मुख्यमंत्री और अनिल टुटेजा की ”अपनी ढपली अपना राग” की रणनीति कोई नए समीकरण का गेम तो नहीं। उधर नान घोटाले में खुद को निर्दोष बताने वाले टुटेजा के पत्र से सरकार में भी खलबली है। 

  • रायगढ़ में लंबी हुई कार्रवाई, दो और ठिकानों में पहुंची आयकर विभाग की टीम…

    रायगढ़ में लंबी हुई कार्रवाई, दो और ठिकानों में पहुंची आयकर विभाग की टीम…

    रायगढ़। आयकर विभाग ने प्रदेश के पांच जिलों में छापेमारी की है। रायगढ़ में तो कार्रवाई लंबी हो गई है।  यहां की कार्रवाई शनिवार शाम तक पूरी होने की संभावना है। इन्कम टैक्स विभाग की टीम ने बुधवार को प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। बिलासपुर, रायगढ़, सक्ती, कवर्धा और रायपुर में छापे मारे गए हैं। रायगढ़ में जहां कार्रवाई लंबी हो गई है। दो-तीन ठिकानों में कार्रवाई पूरी करने के बाद टीमें अब मुख्य ठिकाने पर दस्तावेजों का एनालिसिस करने में जुटी है। रायगढ़ में जो भी दस्तावेज, नकदी, घोषित-अघोषित संपत्ति मिली है, उसकी पड़ताल की जा रही है। शुक्रवार को भी टीमों की कार्रवाई जारी रही। इस बीच दो और ठिकानों पर भी कार्रवाई की जानकारी मिल रही है।  


    कोयला कारोबार और जमीनों की खरीदी-बिक्री में आयकर विभाग को रायगढ़ के कुछ कारोबारियों का तगड़ा इनपुट हाथ लगा था। इसका एनालिसिस किया गया तो संदेहास्पद गतिविधियां नजर आईं। रायगढ़ के करीब 13 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। बुधवार तडके से शुरू हुई कार्रवाई तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। रायगढ़ में एनआर इस्पात के मालिक संजय अग्रवाल के करीब छह ठिकानों समेत करीब 12 जगहों पर कार्रवाई की गई। गोपाल शर्मा सत्तीगुड़ी चैक, जिंदल टेक्सटाइल के सुनील जिंदल, सतीश जिंदल, बाबा ट्रांसपोर्ट संचालक राकेश शर्मा, विशाल अग्रवाल रुक्मणी विहार के मकानों और दफ्तरों में भी जांच की गई। इसके साथ ही सुमन अग्रवाल और अर्जुन मालाकार बोईरदादर के मकान में भी छापेमारी की गई है। दोनों का संबंध भी एनआर इस्पात से बताया जा रहा है। जमीन खरीदी के बाद हुए भुगतान के तरीके को आयकर विभाग ट्रेस कर रहा है।  


    रायगढ़ में सौ लोगों की टीम 

    छापेमारी के दौरान  रायगढ़ में नकदी के अलावा कोयले के कई बोगस बिल भी मिले हैं। किसके पास से यह बिल मिले हैं, इसका खुलासा नहीं किया गया है। आयकर विभाग ने शुक्रवार को भी सारे ठिकानों में सक्रियता जारी रखी है। बताया जा रहा है कि आज भी कार्रवाई चलेगी। इसके जल्दी पूरा होने के आसार नहीं हैं। कार्रवाई में मप्र और छग के अफसरों के साथ सीआरपीएफ के जवान भी है। करीब सौ लोग तीन दिनों से कार्रवाई में लगे हैं।


    कड़िया जोड़ने में लग रहा समय


    इसके पहले बाबा ट्र्रांसपोर्ट के संचालक राकेश शर्मा इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड में भी गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके पहले 2019 में आयकर विभाग ने छापा मारा था। एक बार फिर यह फर्म केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजर में है। छापे में कोयले के बिलों से बड़ा रैकेट पकड़ में आया है। पिछले छापे से इस छापे का लिंक है। इसकी कडियां जोडने में आयकर विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसी में ज्यादा समय लग रहा है।

  • आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया स्व.कुमार दिलीप सिंह जुदेव की प्रतिमा का अनावरण,इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बना लाखों की संख्या में उमडा भारी जन सैलाब,प्रतिमा अनावरण होते ही जय जुदेव के नारे से गुंजा जशपुरांचल….

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया स्व.कुमार दिलीप सिंह जुदेव की प्रतिमा का अनावरण,इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बना लाखों की संख्या में उमडा भारी जन सैलाब,प्रतिमा अनावरण होते ही जय जुदेव के नारे से गुंजा जशपुरांचल….

    जशपुर। दो दिवसीय जशपुर जिला प्रवास के दौरान स्व.कुमार दिलीप सिंह जुदेव की प्रतिमा का अनावरण संघ प्रमुख मोहन भागवत के कर कमलों से किया गया इस दौरान जुदेव समर्थकों के नारा जय जुदेव से समूचा कार्यक्रम स्थल गुंजयमान हुआ। इस अवसर पर भारी संख्या में व्ही आई पी, संघ व भाजपा के कार्यकर्ता सहित ऐतिहासिक भीड़ अनावरण का साक्षी बने। 

    ज्ञात हो कि जशपुर के रणजीता स्टेडियम के पास स्थापित स्व कुमार दिलीप सिंह की प्रतिमा का आज अनावरण किया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कार्यक्रम में मौजूद रहे,जिनके द्वारा रिमोर्ट का बटन दबा प्रतिमा का अनावरण किया गया। जिसके बाद यहाँ मौजूद भीड़ ने जय जुदेव का नारा लगा समूचे क्षेत्र को गुंजयमान किया साथ ही जय श्री राम का नारा लगा हिंदुत्व का उद्घोष किया गया। 

    इस अवसर पर श्रीमती मध्य देवी,प्रबल प्रताप सिंह जुदेव,श्रीमती प्रियंवदा सिंह जुदेव,श्रीमती हिना सिंह जुदेव, श्रीमती संयोजिता सिंह जुदेव,राजा रणविजय सिंह जुदेव, शत्रुंजय प्रताप सिंह जुदेव,जशपुर राजपरिवार के समस्त सदस्य,डॉ.रमन सिंह,शर्मलाल कौशिक,ओपी चौधरी, नारायण चंदेल,बृजमोहन अग्रवाल,अरुण साव,नंदकुमार साय,श्रीमती गोमती साय,विष्णुदेव साय,कृष्ण कुमार राय सहित व्हीआईपी जनप्रतिनिधि व भाजपा के कार्यकर्तागण मौजूद रहे।

  • एन आई ए के मामले में दिल्ली की अदालत ने कहा- केवल जिहादी साहित्य रखना कोई अपराध नहीं…

    एन आई ए के मामले में दिल्ली की अदालत ने कहा- केवल जिहादी साहित्य रखना कोई अपराध नहीं…

    दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत का कहना है कि ‘केवल एक विशेष धार्मिक दर्शन वाले जिहादी साहित्य रखना’ अपराध नहीं होगा, जब तक कि आतंकवादी कृत्यों को करने के लिए इस तरह के दर्शन (फिलॉसफी) के अमल को दिखाने के लिए कोई सामग्री मौजूद न हो.
    रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख जिला और सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने 31 अक्टूबर को एक आदेश में कहा, ‘यह मानना कि केवल एक विशेष धार्मिक दर्शन वाले जिहादी साहित्य को रखना एक अपराध है, जब इस तरह के साहित्य को कानून के किसी प्रावधान के तहत स्पष्ट रूप से या विशेष रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, कानून से परे है, जब तक कि इस तरह की सामग्री सामने नहीं रखी जाती जो बताए कि इस तरह के दर्शन (फिलॉसफी) का इस्तेमाल किसी आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने में किया गया.’
    आदेश में कहा गया, ‘इस तरह का प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा गारंटीकृत स्वतंत्रता और अधिकारों के विपरीत है. भले ही वे उक्त दर्शन और विचारधारा से प्रभावित हों, फिर भी उन्हें उक्त संगठन के सदस्य नहीं कहा जा सकता है.’

    बार और बेंच के अनुसार, अदालत ने यह टिप्पणियां अगस्त 2021 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा कथित रूप से आईएसआईएस विचारधारा का प्रचार करने और नए सदस्यों की भर्ती करने के आरोप में गिरफ्तार 11 लोगों के खिलाफ आरोप तय करते समय कीं.

    आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 121ए (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 17 (आतंकवादी कृत्य के लिए धन जुटाना), 18 (साजिश), 18बी (आतंकवादी कृत्य के लये किसी की भर्ती करना) 20 (किसी आतंकवादी संगठन का सदस्य होना) और 38, 39 और 40 के तहत मुकदमा चलाया गया है.

    हालांकि, अदालत ने कहा कि जिहादी साहित्य रखना यूएपीए की धारा 20 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा.

    रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आईपीसी की धारा 121ए और यूएपीए की धारा 18, 18बी, 17 और 40 के तहत आरोप तय करने के लिए प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनता है.

    इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, न्यायाधीश ने कहा कि ‘ऐसी कोई सामग्री एकत्र नहीं की गई है जिससे मालूम चले कि किसी भी आरोपी ने हथियार या गोला-बारूद या विस्फोटक पदार्थ खरीदे या उसे हासिल करने का प्रयास किया, या कोई आतंकवादी कृत्य करने की योजना बनाई ताकि आम जनता के मन में बड़े पैमाने पर अशांति या भय पैदा हो सके.’

    आदेश में आगे कहा गया, ‘संक्षेप में कहें तो यह मानने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि कोई भी आरोपी व्यक्ति भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश कर रहा था. यह दोहराया जाता है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने किसी भी आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी और/या योजना बनाने के लिए कोई हथियार, गोला-बारूद या विस्फोटक या अन्य हानिकारक उपकरण एकत्र किए.’

    हालांकि, जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष की इस कहानी कि आरोपी व्यक्तियों का ‘गुप्त सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने का एक सामान्य एजेंडा था’ और उन्होंने ‘एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत कमजोर मुस्लिम युवाओं को आईएसआईएस में शामिल करने के लिए प्रभाव में लेकर, उकसाकर और कट्टर बनाने के लिए समान विचारधारा वाले लोगों का समर्थन हासिल करने का प्रयास किया’ को प्रथमदृष्टया प्रमाणित करने के लिए सामग्री है.

    11 आरोपियों में से अदालत ने नौ लोगों: मुशाब अनवर, रीस रशीद, मुंडादिगुट्टू सदानंद, मारला दीप्ति, मोहम्मद वकार लोन, मिज़ा सिद्दीकी, शिफ़ा हारिस, ओबैद हामिद मट्टा और अम्मार अब्दुल रहमान के खिलाफ आरोप तय किए हैं.

    अदालत के आदेश में उल्लेख किया गया है कि आरोपी व्यक्तियों में से एक इरशाद थेके कोलेथ कथित तौर पर फरार होकर विदेश चला गया है. कोर्ट ने एक अन्य आरोपी मुज़मिल हसन भट को यह कहते हुए कि सभी आरोपों से मुक्त कर दिया कि उसने कभी भी आईएसआईएस का सदस्य होने का दावा नहीं किया और संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया.

    अदालत ने कहा कि हामिद मट्टा ने प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होने का दावा नहीं किया बल्कि वह अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त था. इसलिए उन पर यूएपीए की धारा 2 (ओ) और 13 के तहत आरोप लगाए गए हैं.

  • गौरव द्विवेदी बने प्रसार भारती के CEO, छत्तीसगढ़ कैडर के अफसर की प्रतिनियुक्ति को हरी झंडी….

    गौरव द्विवेदी बने प्रसार भारती के CEO, छत्तीसगढ़ कैडर के अफसर की प्रतिनियुक्ति को हरी झंडी….

     भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आदेश जारी किया है। आईएएस गौरव द्विवेदी को प्रसार भारती में मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। 1995 बैच के आईएएस गौरव द्विवेदी फिलहाल छत्तीसगढ़ में जीएसटी, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव हैं।

    छत्तीसगढ़ के सीनियर आईएएस अधिकारी गौरव द्विवेदी की प्रतिनियुक्ति को हरी झंडी मिल गई है। इससे पहले उनकी पत्नी डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी भी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चली गई थीं। केंद्रीय कृषि विभाग के अंतर्गत स्माल फार्मर्स एग्री बिजनेस कंसॉर्टियम में वे एमडी हैं। 95 बैच के अफसर गौरव द्विवेदी सीएम भूपेश बघेल के प्रमुख सचिव भी रहे हैं।

  • एसईसीएल के लात खदान अंदर से लोहे के पाईप की चोरी,आरोपी गिरफ्तार, छाल पुलिस आरोपी से बरामद की 2 क्विंटल वजनी लोहे का पानी निकासी पाईप…

    एसईसीएल के लात खदान अंदर से लोहे के पाईप की चोरी,आरोपी गिरफ्तार, छाल पुलिस आरोपी से बरामद की 2 क्विंटल वजनी लोहे का पानी निकासी पाईप…

    रायगढ़ छाल पुलिस द्वारा एसईसीएल लात खदान अंदर से पानी ‍निकासी के लिये लगाये गये लोहे का पाईप चोरी करने वाले आरोपी को पकड़ा गया है जिससे चोरी किया हुआ 2 क्विंटल वजनी पाईप बरामद कर आरोपी को चोरी के अपराध में ज्युडिसियल रिमांड पर भेजा गया है । जानकारी के मुताबिक कल थाना छाल में एसईसीएल छाल में सहायक सुरक्षा उप निरीक्षक के पद पर कार्यरत रामनिवास भारद्वाज (उम्र 60 वर्ष) निवासी ग्राम नवापारा छाल एक लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें दिनांक 03.11.22 के रात्रि लगभग 11.00 बजे SECL लात खदान के अंदर से कोई अज्ञात व्यक्ति खदान में लगे लोहे का पानी निकासी पाईप लगभग 02 क्विंटल को चोरी कर लिये जाने उल्‍लेख है । आवेदन पत्र पर थाना छाल में अज्ञात आरोपी के विरूद्ध अप.क्र. 216/2022 धारा 379 भादवि का अपराध पंजीबद्ध किया गया । थाना प्रभारी छाल निरीक्षक जितेन्द्र एसैया के नेतृत्व में माल मुल्‍जिम पतासाजी दौरान संदेही उमेश अगरिया निवासी ग्राम कोटमेर थाना करतला को हिरासत में लिया गया जिसे घटना दिनांक को संदिग्ध अवस्था में घूमते देखा गया था । छाल पुलिस की पूछताछ में संदेही उमेश अगरिया खदान अंदर से लोहे का पाईप चोरी कर खदान के पीछे जंगल झाड़ी में छिपा कर रखना बताया जिसे बरामद किया गया ।

    आरोपी उमेश अगरिया पिता स्व. सुखसाय अगरिया उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम कोटमेर थाना करतला जिला कोरबा से चोरी का 02 क्विंटल लोहे का पाईप कीमती 6,000 रूपये का जप्त कर आरोपी को चोरी के अपराध में गिरफ्तार कर आज जेएमएफसी धरमजयगढ़ के न्यायालय रिमांड पर भेजा गया है ।

  • रिश्वत लेते डिप्टी कलेक्टर रंगेहाथ गिरफ्तार….

    गरियाबंद। जनपद पंचायत CEO डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए ACB की टीम ने रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को ACB रायपुर (Anti-Corruption Bureau) की टीम गरियाबंद जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची, जहां डिप्टी कलेक्टर को बोरवेल का बिल पास कराने के एवज में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
    ग्राम पंचायत चिखली, मालगांव और मजरकटा में 15वें वित्त से 4 बोरवेल खनन के लिए पहली किस्त 3 लाख निकलवाना था। इसके लिए 20 हजार रुपए की मांग करुण डहरिया ने की थी। कांग्रेस नेता शफीक खान से जनपद पंचायत सीईओ करुण डहरिया ने 30 अक्टूबर ये रकम मांगी थी।

    एसीबी की टीम ने अधिकारी को रंगेहाथों पकड़ा।

    4 नवंबर को कांग्रेस नेता शफीक खान ने पैसा देने की बात कही थी। शफीक खान ने ACB से इस बात की शिकायत की। जिसके बाद ACB ने उसे 20 हजार रुपए देकर जनपद पंचायत CEO करुण डहरिया के पास भेजा। जब शफीक ने अधिकारी को पैसा दिया, तो तुरंत एसीबी अधिकारी वहां पहुंचे और पैसे को जब्त कर करुण डहरिया को रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।

    जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची ACB की टीम।

    जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची ACB की टीम।

    एसीबी के 20 अधिकारी 4 गाड़ियों में आज गरियाबंद पहुंचे थे। डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया ने 7 महीने पहले ही जनपद पंचायत सीईओ के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनके खिलाफ पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

    डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया।

    डिप्टी कलेक्टर करुण डहरिया।

    करुण डहरिया मूल रूप से कोरबा जिले के रहने वाले हैं। वे 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग जांजगीर-चांपा में SDM के रूप में हुई थी। इसके बाद उनका ट्रांसफर पामगढ़ SDM के तौर पर हुआ था। तीसरी पोस्टिंग के तौर पर वे गरियाबंद आए, जहां वे जनपद पंचायत CEO के रूप में कार्यरत हैं।

    पहले भी विवादों में रहे हैं करुण डहरिया
    राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी करुण डहरिया पहले भी विवादों में रह चुके हैं। जब वे जांजगीर-चांपा के पामगढ़ में SDM थे, तब उन्होंने छात्रों का ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया था और उन्हें पुलिस बुलाने की धमकी दी थी। यहां तक कि उन पर छात्रों को थप्पड़ मारने की धमकी देने का भी आरोप लगा था। ये छात्र पामगढ़ के सबसे पुराने स्कूल के हिंदी माध्यम को बंद नहीं करने की मांग कर रहे थे। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पामगढ़ में हिंदी मीडियम को बंद कर यहां स्वामी आत्मानंद स्कूल खोले जाने को लेकर यहां के छात्र एसडीएम करुण डहरिया के पास आए थे।

    इससे पहले जब चंडीपारा हल्का के पटवारी को बिना किसी शिकायत के हटाने पर सरपंच, उपसरपंच व पंचगण सहित गांववाले ज्ञापन सौंपने गए थे, तो उन्होंने अड़ियल रवैया अपनाया था। सभी पटवारी को नहीं हटाए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपने गए थे, लेकिन तत्कालीन SDM रहे करुण डहरिया ने उसे लेने से ही इनकार कर दिया था।