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  • ‘माधवप्रिया प्रसादम’ रेस्टोरेंट का भव्य शुभारंभ, बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिक…

    ‘माधवप्रिया प्रसादम’ रेस्टोरेंट का भव्य शुभारंभ, बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिक…

     

    खरसिया। रायगढ़ चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक के सामने स्थित ‘माधवप्रिया प्रसादम’ रेस्टोरेंट का मंगलवार शाम भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, व्यापारी, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे और लजीज व्यंजनों का आनंद लिया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री गणेश एवं भगवान जगन्नाथ के पूजन-अर्चन के साथ हुआ। नगर की प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रेमा षाड़ंगी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर रेस्टोरेंट का शुभारंभ किया तथा संचालकों को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। रेस्टोरेंट के संचालकों गुलाब गुप्ता, विपिन गुप्ता एवं सचिन गुप्ता ने बताया कि माधवप्रिया के नए प्रतिष्ठान प्रसादम में ग्राहकों को शुद्ध शाकाहारी भोजन, स्वादिष्ट स्वीट्स, बेकरी उत्पाद एवं फैमिली डाइनिंग की उत्कृष्ट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, स्वच्छता और आत्मीय सेवा उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी।

    उद्घाटन समारोह में उपस्थित अतिथियों ने रेस्टोरेंट की आधुनिक साज-सज्जा एवं आकर्षक वातावरण की सराहना करते हुए इसे खरसिया के लोगों के लिए एक बेहतरीन सौगात बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया गया तथा उन्हें रेस्टोरेंट के विशेष व्यंजनों का स्वाद कराया गया। इस अवसर पर गुप्ता परिवार के साथ नगर के वरिष्ठ तथा गणमान्य नागरिक भारी संख्या में मौजूद रहे और संचालकों को बधाइयाँ एवम शुभकामनाएं दी।

  • सड़क दुर्घटना में खरसिया पुलिस की सख्त कार्रवाई, दुघटनाकारित करने वाले स्कॉर्पियो चालक पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज…

    सड़क दुर्घटना में खरसिया पुलिस की सख्त कार्रवाई, दुघटनाकारित करने वाले स्कॉर्पियो चालक पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज…

     

    खरसिया। सड़क दुर्घटना के एक मामले में चौकी खरसिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्कॉर्पियो चालक के विरुद्ध अपराधिक मानव वध का प्रयास की श्रेणी का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

    एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर सड़क दुर्घटना के मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है । इसीड़ी में चौकी खरसिया पुलिस ने सड़क दुर्घटना के एक गंभीर मामले में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करते हुए स्कॉर्पियो चालक के विरुद्ध अपराधिक मानव वध का प्रयास की श्रेणी का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

    जानकारी के अनुसार प्रार्थी योगेश गर्ग निवासी टी.आई.टी. कॉलोनी, खरसिया ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 06 जुलाई 2026 की शाम लगभग 5:45 बजे उनके बड़े पिता कैलाश गर्ग (73 वर्ष) अपनी मोटरसाइकिल से मंगल बाजार से राठौर चौक की ओर जा रहे थे। राठौर चौक के समीप पीछे से तेज गति एवं लापरवाही से आ रही स्कार्पियो वाहन क्रमांक CG 13 AY 6539 के चालक ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन चालक मोटरसाइकिल को लगभग 200 से 250 फीट तक घसीटते हुए ले गया, जिससे कैलाश गर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, वर्तमान में गंभीर अवस्था में ईलाजरत हैं ।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के दिशा निर्देशन, मार्गदर्शन पर चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी द्वारा आरोपी स्कार्पियो वाहन चालक भीष्म कुमार यादव (34 वर्ष) निवासी ग्राम उपनी, थाना डभरा, जिला सक्ती को 21 जुलाई 2026 को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने घटना कारित करना स्वीकार किया। पुलिस ने दुर्घटना में प्रयुक्त स्कार्पियो वाहन क्रमांक CG 13 AY 6539 को जब्त किया गया । गौरतलब है कि घटना समय आरोपी वाहन चालक शराब के नशे में थाना जिस पर साक्ष्य एवं विवेचना के आधार पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 MV Act बढाई गई तथा आरोपी को गिरफ्तार किया तथा प्रकरण में साक्ष्य अनुरूप अपराधिक मानव वध का प्रयास सहित प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

    एसडीओपी खरसिया श्री प्रभात पटेल के मार्गदर्शन पर संपूर्ण कार्रवाई में चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी, एएसआई मनोज पटेल एवं चौकी खरसिया टीम की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से प्रकरण में आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।

    एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का संदेश

    “सड़क पर लापरवाही और तेज रफ्तार किसी की जान छीन सकती है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस कठोर वैधानिक कार्रवाई करेगी। वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं और दूसरों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें।”

  • नितिन गडकरी बोले-नहीं चाहिए एथेनॉल तो खरीदें शुद्ध पेट्रोल, लेकिन देना होगा ज्यादा पैसा…

    नितिन गडकरी बोले-नहीं चाहिए एथेनॉल तो खरीदें शुद्ध पेट्रोल, लेकिन देना होगा ज्यादा पैसा…

    नई दिल्ली। देश में E20 (एथेनॉल) मिले हुए पेट्रोल को लेकर चर्चाओं के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान सामने आया है। नितिन गडकरी ने कहा है कि यदि किसी को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नहीं चाहिए, तो वह शुद्ध पेट्रोल खरीद सकता है, लेकिन उसके लिए उसे अधिक कीमत चुकानी होगी। यह बात गडकरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान कही है। बता दें कि नितिन गडकरी कह चुके है कि एथेनॉल मिले हुए ईंधन के चलते वाहन खराब होने की समस्या नहीं आई है।

    बदनामी के पीछे सोची-समझी साजिश: गडकरी

    सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक बताते हुए गडकरी ने कहा कि यह पूरी तरह से एक दुष्प्रचार है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर मुझे और सरकार को निशाना बना रहे हैं। E20 ईंधन को लेकर यह डर फैलाया जा रहा है कि इससे गाड़ियों के इंजन खराब हो जाएंगे, जबकि सच्चाई यह है कि सभी E10 गाड़ियां E20 ईंधन के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि E20 ईंधन को उचित परीक्षण के बाद लॉन्च किया गया है। माइलेज की बात करें तो, दिल्ली या मुंबई के शहरी यातायात में काई खास बदलाव नहीं दिखेगा, हालांकि हाईवे पर तेज गति से गाड़ी चलाते समय थोड़ा माइलेज कम हो सकता है।

    परिवार पर लगे आरोपों पर क्या बोले गडकरी

    गडकरी ने खुद पर और सरकार पर लग रहे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग आज का फैसला नहीं है। वाजपेयी सरकार से शुरू होकर यूपीए सरकार के दौरान मणिशंकर अय्यर तक ने इसका नीतिगत समर्थन किया था। खुद पर लगे आरोपों पर गडकरी ने कहा कि उनके बेटों के व्यवसाय में एथेनॉल का हिस्सा सिर्फ 10 प्रतिशत है और देश के कुल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी मात्र 0.5 प्रतिशत से भी कम है। इस व्यवसाय के प्रबंधन, एथेनॉल की कीमतें तय करने या इसकी खरीद प्रक्रिया से मेरा कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं है। कीमतें कैबिनेट तय करती है।

    क्या प्रदूषण कम करने के उपायों का समर्थन नहीं करना चाहिए?

    गडकरी ने कहा कि मैं वैकल्पिक ईंधनों का प्रबल समर्थक हूं। चाहे वह एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल हो, इलेक्ट्रिक वाहन हों, मेथनॉल हो या हाइड्रोजन। दिल्ली जैसे महानगरों में सबसे ज्यादा वायु प्रदुषण वाहनों से फैलता है। ऐसे में क्या सड़क परिवहन मंत्रालय को प्रदूषण कम करने वाले कदमों का समर्थन नहीं करना चाहिए? इससे भारत की महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होगी। उन्होंने दुनिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जब ब्राजील दशकों से एथेनॉल का इस्तेमाल कर रहा है और वहां की गाड़ियों को कोई दिक्कत नहीं हुई, तो भारत में भ्रम क्यों फैलाया जा रहा है? इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी अब जैव ईंधन की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।

  • बिलासपुर में इतना पानी की कॉलोनी में चलने लगी नाव, कलेक्टर बंगला समेत कई इलाके डूबे, ट्रेनें रद्द…

    बिलासपुर में इतना पानी की कॉलोनी में चलने लगी नाव, कलेक्टर बंगला समेत कई इलाके डूबे, ट्रेनें रद्द…

     छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लगातार हो रही बारिश से शहर में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। SDRF की टीम लगातार पानी में फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने में जुटी हुई है। सरकंडा और चांटीडीह के नीचले इलाके से 40 से अधिक लोगों का बचाया गया है। भारी बारिश से कलेक्टर बंगले में भी पानी भर गया। जहां नगर निगम की टीम जल निकासी में जुटी हुई है।

    Chhattisgarh Rainfall: कई प्रमुख सड़कें डूबी

    गुरुवार दोपहर से जारी लगातार बारिश से शहर की जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रात में मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को तरबतर कर दिया। लगातार तेज बारिश के कारण कई प्रमुख सड़के डूब गई। इधर कई मोहल्लों, कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर पानी भर गया। कई जगह सड़क और नाले का अंतर खत्म हो गया, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप होने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। कई ट्रांसफॉर्मर जलमग्न हो गए हैं।

    कई ट्रेनें प्रभावित

    बारिश के कारण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल रेलवे स्टेशन और ट्रैक पर पानी भर गया। जिसके चलते कई ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई है। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पांच मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जबकि तीन ट्रेनों का संचालन आंशिक रूप से किया जा रहा है। इनमें ट्रेन नंबर 68734 बिलासपुर-कोरबा मेमू, ट्रेन नंबर 68733 कोरबा-बिलासपुर मेमू, ट्रेन नंबर 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू, ट्रेन नंबर 68746 रायपुर-बिलासपुर मेमू, ट्रेन नंबर 68745 बिलासपुर-रायपुर मेमू है।

    3 ट्रेनों का बदला संचालन

    68735 रायगढ़-बिलासपुर मेमू को चांपा स्टेशन पर ही समाप्त कर दिया गया।
    68738 बिलासपुर-रायगढ़ मेमू अब चांपा स्टेशन से रायगढ़ के लिए रवाना होगी।
    68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू को दाधापारा स्टेशन से ही वापस रायपुर के लिए रवाना किया गया।

    स्कूलों में छुट्टियां

    जिला प्रशासन ने बारिश बारिश के चलते बिगड़े हालात को देखते हुए बिलासपुर के कई स्कूलों में आज छुट्टी कर दी गई है। घरों, इलाकों के अलावा नेशनल हाइवे में भी सड़क के उपर से पानी बह रहा है। नेशनल हाइवे Nh-49 मस्तूरी बिलासपुर के पास पानी अधिक होने से कई वाहन सड़क पर फंस गए हैं। बारिश के चलते हाइवे पर लंबा जाम लगने से यातायात प्रभावित हो गया है।

    लीलागर नदी का कुटीघाट पुल खतरे के निशान से ऊपर, आवागमन प्रभावित

    लगातार हो रही बारिश के कारण लीलागर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी पर स्थित कुटीघाट पुल खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हो गया है। यह पुल बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। जलस्तर बढ़ने के कारण पुल के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है।

    स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा पुल पार करने का प्रयास न करने की सलाह दी गई है। जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है।

    यातायात पुलिस ने किया अलर्ट

    भारी बारिश के चलते बिगड़े हालात पर बिलासपुर यातायात पुलिस ने सफर करने से बचने की अपील की है। पुलिस ने जलभराव वाले जगहों को लेकर एक पोस्टर जारी किया है। जिसके चलते लोगों को अलर्ट किया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक बिलासपुर जिले में 325.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत का 92.4 प्रतिशत है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने

    और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।

  • प्रदेश के सभी अस्पतालों के कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन, बीजेपी विधायक की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री ने की घोषणा…

    प्रदेश के सभी अस्पतालों के कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन, बीजेपी विधायक की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री ने की घोषणा…

    रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू हो चुकी है। आज सदन की कार्यवाही का तीसरा दिन है। विधानसभा के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा में लापरवाही का मामला गूंजा। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री सत्ता पक्ष के ही विधायकों के सवालों से घिरते नजर आएं। बीजेपी विधायक धरम लाल कौशिक ने अस्पताल मेकाहारा में बड़ी लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि यहां कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन का प्रावधान ही नहीं है।

    विधायक कौशिक का कहना है कि बिना सत्यापन कर्मचारियों की भर्ती से मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अस्पताल में चोरी की घटनाएं हो रही है। गार्डों द्वारा पत्रकारों से मारपीट किया जाता है। क्योंकि बिना वेरिफिकेशन के लोगों को रख लिया गया है, विधायक ने आरोप लगते हुए कहा कि जानबूझ कर एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए नियम तोड़ा गया है।

    मंत्री जायसवाल ने की बड़ी घोषणा

    वहीं सदन में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि मेकाहारा और डीकेएस के कर्मचारियों का वेरिफिकेशन करा लिया गया है। मंत्री जायसवाल ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब से सारे अस्पतालों के प्लेसमेंट कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा। जिस हॉस्पिटल में पहले से ही टेंडर हो चुका वहां भी वेरिफिकेशन की जाएगी।

  • जज के साथ विस्तारा एयरलाइंस ने धोखाधड़ी की, 1 लाख का जुर्माना…

    जज के साथ विस्तारा एयरलाइंस ने धोखाधड़ी की, 1 लाख का जुर्माना…

    छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने विस्तारा एयरलाइंस को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें से 10 हजार रुपये मुकदमे में लगा खर्च है। यह राशि शिकायतकर्ता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) भूपेंद्र कुमार वासनीकर को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। आयोग ने यह भी साफ किया कि अगर निर्धारित समय सीमा यानी 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो एयरलाइंस को इस राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।पूरा मामला कांकेर में पदस्थ एडीजे भूपेंद्र कुमार वासनीकर से जुड़ा है।

    जज अपने परिवार के साथ कश्मीर में छुट्टियां बिताने के बाद 28 मई 2023 को दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। उन्होंने नौ मई को ही 23,156 रुपये का भुगतान कर विस्तारा फ्लाइट के चार कन्फर्म टिकट बुक करा लिए थे। 28 मई को उड़ान के समय से चार घंटे पहले (दोपहर दो बजे) वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए थे। इसके बावजूद विस्तारा के कर्मचारियों ने उन्हें तीन घंटे तक बोर्डिंग पास जारी नहीं किया। अंत में उड़ान से एक घंटे पहले ओवरबुकिंग का हवाला देकर जज का कन्फर्म टिकट रद कर दिया गया और केवल उनकी पत्नी व बेटे-बेटी को रायपुर भेजा गया। एडीजे को मजबूरी में दिल्ली में ही रुकना पड़ा और अगले दिन उन्हें इंडिगो एयरलाइंस की 18,823 रुपये का टिकट खरीदकर रायपुर आना पड़ा।

    आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीस की पीठ ने सुनवाई के दौरान एयरलाइन कंपनी के रवैये पर बेहद तीखी टिप्पणी की। आयोग ने पाया कि जज ने जो टिकट नौ मई को 7,204 रुपये में खरीदा था, उसे एयरलाइन ने 28 मई को किसी अन्य यात्री को 40 हजार रुपये में बेच दिया। एयरलाइन का दावा था कि कोई वैकल्पिक फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने किराए का चार गुना रिफंड कर दिया। आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जज ने अगले ही दिन खुद इंडिगो की फ्लाइट से टिकट बुक कर यात्रा की, जिससे साफ है कि विकल्प मौजूद थे।

  • छत्तीसगढ़ PWD टेंडर घोटाला! ‘लिफाफा मत खोलो’ लिखकर बंटे करोड़ों के ठेके, तत्कालीन SE कुंजाम पर सिंडिकेट चलाने का आरोप….

    छत्तीसगढ़ PWD टेंडर घोटाला! ‘लिफाफा मत खोलो’ लिखकर बंटे करोड़ों के ठेके, तत्कालीन SE कुंजाम पर सिंडिकेट चलाने का आरोप….

    लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत यांत्रिकी शाखा में टेंडर आवंटन में भारी गड़बड़ी और राजस्व को चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान करीब 4 करोड़ 22 लाख रुपए के 8 अलग-अलग टेंडरों में चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। पूरे मामले की लिखित शिकायत राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रमुख अभियंता से करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

    Corruption News: ठेकेदारों का सिंडिकेट

    पत्रिका के हाथ लगे आधिकारिक और आरटीआई दस्तावेजों के मुताबिक, 8 महत्वपूर्ण टेंडरों में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। ठेकेदारों ने एक सुनियोजित सिंडिकेट (कर्टेल) बनाकर विभाग के आला अधिकारियों की साठगांठ से इन कामों को हथियाया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान बकायदा लिखित आवेदन दिए गए कि हमारा वित्तीय लिफाफा न खोला जाए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सिंडिकेट के पसंदीदा ठेकेदार को ही न्यूनतम दर पर काम मिल सके और बाकी प्रतिस्पर्धी दौड़ से बाहर हो जाएं।

    शिकायत पत्रों में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता टीआर कुंजाम को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि कुंजाम ने अपने परिचितों के नाम पर कांट्रेक्टरों की एक फेहरिस्त तैयार कर रखी है, जिन्हें उपकृत किया जाता रहा। इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें विभाग का मुख्य अभियंता बना दिया गया।

    क्या है नियम?

    नियमानुसार यदि कोई टेंडरकर्ता 120 दिनों की तय अवधि से पहले अपने प्रस्ताव से पीछे हटता है या लिफाफा न खोलने का आवेदन देता है, तो उसकी अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट जब्त कर ली जाती है। बार-बार ऐसा करने पर ठेकेदार का पंजीयन दो वर्ष के लिए निलंबित करने का प्रावधान है। लेकिन इन मामलों में न तो ईएमडी जब्त हुई और न ही किसी पर प्रतिबंध लगा, बल्कि उन्हें राशि लौटाकर वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए।

    PWD Tender Irregularities: ये ठेकेदार और कार्य रहे रडार पर

    दस्तावेजों के मुताबिक संदीप भोंसले, पी एंड वॉय एसोसिएट, सागर शर्मा, अंकिता इलेक्ट्रिकल्स, भारत कंस्ट्रक्शन, डीएम झा, सुपरटेक सॉल्यूशन्स, पराग इंफ्रा और एनके ट्रेडर्स ने बार-बार वित्तीय लिफाफा न खोलने के आवेदन दिए।

    हेराफेरी के शिकार हुए प्रमुख कार्यों में रायपुर सब-डिवीजन का इलेक्ट्रिफिकेशन वर्क (45.04 लाख), कबीर नगर-हीरापुर का डिपॉजिट वर्क (65 लाख), विधानसभा सब-डिवीजन में एचटी-एलटी लाइन शिफ्टिंग (93.36 लाख), और रविशंकर शुक्ल विवि का ऑडियो-वीडियो सिस्टम रिनोवेशन (41.87 लाख) समेत बलौदाबाजार और पंचशील नगर के कुल 8 कार्य शामिल हैं।

    मैं इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी और फाइलें तलब की जाएंगी-मुकेश बंसल, सचिव, लोक निर्माण विभाग

    मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है। आरटीआई से क्या जानकारी मिली है और उसमें क्या दावे हैं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता-टी.आर. कुंजाम, मुख्य अभियंता, विद्युत यांत्रिकी मंडल

  • स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमी दूर, बिजली विभाग ने बताई बिल बढ़ने की वजह….

    स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमी दूर, बिजली विभाग ने बताई बिल बढ़ने की वजह….

    स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही शंकाओं और भ्रम को दूर करने के लिए बिजली विभाग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने साफ कहा है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि यह केवल उपभोक्ता द्वारा उपयोग की गई वास्तविक बिजली खपत का सटीक रिकॉर्ड तैयार करता है। यदि किसी उपभोक्ता का बिल पहले की तुलना में अधिक आया है तो इसका मुख्य कारण बिजली की बढ़ी हुई खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।

    उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर

    स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि केवल वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है तो उसका प्रमुख कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर। स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उपभोक्ता को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध कराता है। मोर बिजली ऐप के माध्यम से उपभोक्ता हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन-से विद्युत उपकरण सबसे अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और किन उपायों से खपत कम की जा सकती है।

    पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर

    पहले उपभोक्ताओं को केवल महीने के अंत में बिजली बिल मिलने पर ही खपत का पता चलता था, जबकि स्मार्ट मीटर में उपभोक्ता पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग पर नियंत्रण संभव होता है और बिल भी कम किया जा सकता है।बिजली विभाग ने बताया कि प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के अनुसार लागू होती हैं। शून्य से 100 यूनिट तक 4.40रुपये प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये प्रति यूनिट 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये,601 यूनिट से अधिक पर 8.80रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित हैं। जैसे ही बिजली खपत बढ़कर अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।

    400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना

    विभाग के अनुसार इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी के कारण अधिकांश घरों में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा। इसी वजह से बिजली की खपत बढ़ी और कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह स्थिति मौसम और खपत से जुड़ी है, न कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली से। स्मार्ट मीटर का एक बड़ा लाभ यह भी है कि उपभोक्ता अपनी मासिक खपत को 400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना पहले से बना सकते हैं। इससे उन्हें राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहता है। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो योजना का लाभ प्रभावित होता है और बिल बढ़ जाता है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता को समय रहते ऐसी स्थिति से बचने का अवसर देता है।

    बिजली विभाग ने बताया

    बिजली विभाग ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच में अधिकांश मामलों में मीटर सही पाया गया। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर संबंधी कोई शिकायत हो तो वह 1912 पर संपर्क कर सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करें, बिजली की खपत पर नियमित निगरानी रखें तथा ऊर्जा संरक्षण अपनाकर बिजली बिल कम करें। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल को और कम अथवा शून्य करने का लाभ भी लिया जा सकता है।

  • हो जाइए तैयार, बदले जाएंगे भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ये नोट; आरबीआई ने कर दिया बड़ा एलान…

    हो जाइए तैयार, बदले जाएंगे भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ये नोट; आरबीआई ने कर दिया बड़ा एलान…

    UPI का जमाना है. लोग कैश कम ही रखते हैं. वजह सही है, क्योंकि कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं और आसानी से फट जाते हैं. हालांकि, यह प्रॉब्लम अब सॉल्व होने वाली है, क्योंकि भविष्य में आपकी जेब में जो नोट होगा वह प्लास्टिक का हो सकता है.

    RBNNMPL, जो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की नोट प्रिंटिंग विंग है, ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है. कंपनी ने दुनिया भर की कंपनियों से पॉलीमर शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (EOI) मंगाए हैं, जिसका मतलब है कि पहली बार नोट छापने के लिए ज़रूरी प्लास्टिक मटीरियल खरीदने का प्रोसेस ऑफिशियली शुरू होता दिख रहा है. शुरुआती दौर में, 10 और 20 रुपये के नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किए जा सकते हैं.

    प्लास्टिक नोट असल में क्या होते हैं?

    प्लास्टिक नोटों को पॉलीमर नोट कहा जाता है. ये आम प्लास्टिक पर नहीं, बल्कि एक खास, मज़बूत प्लास्टिक फिल्म पर प्रिंट होते हैं. इस फिल्म पर प्रिंटिंग के लिए सफेद कोटिंग की जाती है. नोट में एक ट्रांसपेरेंट विंडो भी होती है, जिसे इसका सबसे ज़रूरी सिक्योरिटी फीचर माना जाता है. यही वजह है कि ऐसे नोटों की नकली बनाना बहुत मुश्किल होता है.

    कौन से नोट सबसे पहले बदले जा सकते हैं?

    एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो 10 और 20 रुपये के नोट पॉलीमर से बनने वाले पहले नोट हो सकते हैं. वजह साफ़ है: ये सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं और सबसे जल्दी खराब होते हैं.

    RBI का यह कदम कितना अहम है?

    BRBNMPL वही कंपनी है जो मैसूर और सालबोनी में अपने प्रेस में इंडियन करेंसी प्रिंट करती है. यह कंपनी पॉलीमर शीट खरीदने के लिए ग्लोबल कंपनियों से प्रपोज़ल मांग रही है, यह सिर्फ़ एक आइडिया नहीं है, बल्कि तैयारी का एक पक्का संकेत है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अगले महीने मार्केट में प्लास्टिक के नोट मिल जाएंगे. यह प्रोसेस अभी शुरुआती स्टेज में है.

    5 जून, 2026 को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि पॉलीमर नोट के प्रपोज़ल पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने साफ़ किया कि कोई आखिरी फ़ैसला नहीं हुआ है और सेंट्रल बैंक इसके फ़ायदे और नुकसान देख रहा है.

    भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया

    भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया लगभग 14 साल पुराना है. इस पर पहली बार 2009 के आसपास चर्चा हुई थी. 2012 में,  सरकार ने 10 रुपये के 1 बिलियन पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंज़ूरी दी.
    2014 में, कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में अलग-अलग मौसम में इनका टेस्ट करने का फ़ैसला किया गया. 2016 में, सरकार ने घोषणा की कि सामान खरीदने का प्रोसेस शुरू हो गया है, लेकिन टेक्निकल और ऑपरेशनल कारणों से प्लान आगे नहीं बढ़ सका और प्रोजेक्ट को रोक दिया गया.

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    रायपुर : व्यापार की चकाचौंध भरी दुनिया में एक बार फिर धोखे का जाल बिछा दिया गया। रायपुर के थोक शक्कर कारोबारी राजेश अग्रवाल (सिंघल प्रोविजन स्टोर्स, श्रीनगर रोड) को 500 टन चीनी सप्लाई करने के बड़े सौदे ने रातोंरात उनकी नींद उड़ा दी। फरवरी 2025 में शुरू हुआ यह सिलसिला अंत में 1 करोड़ 87 लाख 48 हजार 667 रुपये की भारी ठगी में बदल गया।

    कैसे रचा गया धोखे का जाल?
    सब कुछ शुरू हुआ जब राजेश अग्रवाल की मुलाकात राजीव मोरे नाम के व्यक्ति से हुई। मोरे ने खुद को पुणे स्थित नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिनिधि बताया। शुरुआत छोटे ऑर्डर से हुई — पहले 35 टन, फिर 70 टन चीनी समय पर सप्लाई हो गई। भरोसा जम गया।

    फिर आया बड़ा धमाका — 500 टन चीनी का सौदा। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है। एडवांस मांगा गया। राजेश अग्रवाल ने 17 से 21 फरवरी 2025 के बीच RTGS के जरिए कुल 1.87 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। भुगतान होते ही कंपनी ने GST इनवॉयस और E-Way बिल भेजे। बताया गया कि ट्रक रवाना हो चुके हैं। राजेश अग्रवाल इंतजार करते रहे… लेकिन चीनी का एक दाना भी रायपुर नहीं पहुंचा।

    धोखे का पर्दाफाश
    जब शक हुआ तो राजेश ने जांच कराई। पता चला कि जिन ट्रकों के नंबर दिए गए थे, उनमें उनके नाम का कोई माल लोड ही नहीं किया गया था। बाद में उसी वाहनों के नाम पर क्रेडिट नोट जारी कर कागजी खेल खेला गया। कई बार फॉलो-अप करने पर कंपनी के संचालक रफीक बाबा शेख ने व्हाट्सएप पर मैसेज किया कि “राजीव मोरे तो सिर्फ ब्रोकर था”। इसके बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख समेत पूरा गिरोह गायब है।

    पुलिस एक्शन
    शिकायत पर खमतराई थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड, राजीव मोरे, रफीक बाबा शेख, मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420, 406 आदि) का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, ई-वे बिल, GST रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। मामले में अंतरराज्यीय ठगी का पहलू भी सामने आ रहा है। राजेश अग्रवाल ने कहा, “छोटे-छोटे ऑर्डर समय पर पूरा करके भरोसा जीता गया। बड़े सौदे में पूरा खेल रचा गया।”पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस तरह की कंपनियां छोटे सौदों से भरोसा बनाकर बड़े एडवांस हड़पने का रैकेट चलाती हैं। जांच जारी है, जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं।