नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया नीति का पूरी दुनिया में डंका बजने लगा है। तेजस फाइटर के बाद अब वंदे भारत ट्रेन पर दुनियाभर के देशों की नजर है। देश में वंदे भारत एक्सप्रेस तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और कई रूट्स पर इसे चलाने की मांग बढ़ रही है। चिली, कनाडा और मलेशिया जैसे देशों ने वंदे भारत को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। सूत्रों के मुताबिक, वंदे भारत को खरीदने में दिखाई गई दिलचस्पी के कई कारण हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ा कारण वंदे भारत ट्रेन की लागत है, जहां अन्य देशों में निर्मित समान सुविधाओं वाली ट्रेनों की लागत 160-180 करोड़ रुपये के बीच होती है, वहीं भारत वंदे भारत का निर्माण बहुत कम कीमत पर हुआ है। भारत की वंदे भारत ट्रेन की कीमत 120 से 130 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा, वंदे भारत गति पकड़ने के मामले में भी दूसरे देशों को मात दे रही है। सूत्रों की माने तो वंदे भारत को 0 से 100 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने में सिर्फ 52 सेकंड लगते हैं, जो जापान की बुलेट ट्रेन से भी अधिक है। बता दें, जापान की बुलेट ट्रेन को 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में 54 सेकंड का समय लगता है।
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दुनियाभर में बज रहा Vande Bharat का डंका, Canada और मलेशिया समेत इन देशों ने खरीदने में दिखाई दिलचस्पी…
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ईरान एक ‘अभिशाप’ और भारत है ‘आशीर्वाद’, UN में बेंजामिन नेतन्याहू ने मैप दिखाते हुए क्यों कहा ऐसा?
नई दिल्ली। गाजा युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना पहला संबोधन दिया। इस दौरान बेंजामिन नेतन्याहू ने मध्य पूर्व में संघर्ष के लिए ईरान को मुख्य किरदार के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है। उन्होंने संबोधन में दो मैप दर्शाए, जिसमें ईरान को ‘ अभिशाप’ और भारत को ‘आशीर्वाद’ के रूप में दिखाया गया।
नेतन्याहू की तरफ से रखे गए ‘आशीर्वाद’ मानचित्र में हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच एक भूमि पुल के माध्यम से एशिया और यूरोप से जुड़ने वाले इजरायल और उसके अरब भागीदारों के बीच एकता की दृष्टि को रेखांकित किया गया है।आतंक का नक्शा है यह’
नेतन्याहू के अनुसार ‘अभिशाप’ दिखाया गया नक्शा ‘आतंक के एक छाप का नक्शा है जिसे ईरान ने हिंद महासागर से भूमध्य सागर तक बनाया और लगाया है।
मानचित्रों में वेस्ट बैंक, गाजा और सीरिया के गोलान हाइट्स के फिलिस्तीनी क्षेत्रों को भी इजराइल के हिस्से के रूप में चिह्नित किया गया है। ये मानचित्र नेतन्याहू की तरफ से देशों से ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने और उनके परमाणु हथियार कार्यक्रम को अवरुद्ध करने में इजरायल में शामिल होने की एक बड़ी अपील का केवल एक प्रदर्शन थे।अपने भाषण के दौरान, नेतन्याहू ने कहा, ‘बहुत लंबे समय से दुनिया ने ईरान का तुष्टीकरण किया है, उसने अपने आंतरिक दमन पर आंखें मूंद ली हैं, उसने बाहरी आक्रामकता पर आंखें मूंद ली हैं। उन्होंने आगे कहा, तुष्टिकरण अब खत्म होना चाहिए।’
‘तेहरान के अत्याचारियों के लिए मेरे पास है एक संदेश’
हिजबुल्लाह के प्रति ईरान के समर्थन और लेबनान में उन्हें निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमलों को संबोधित करते हुए, नेतन्याहू ने एक भयावह संदेश भेजा, जिसमें लिखा था, ‘मेरे पास तेहरान के अत्याचारियों के लिए एक संदेश है। यदि आप हम पर हमला करते हैं, तो हम आप पर हमला करेंगे। ईरान में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पर हमला किया जाए।’बता दें कि जुलाई में तेहरान में हमास प्रमुख इस्माइल हानियेह की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हो गया और ईरान द्वारा लेबनान में इजरायली हमलों को “घोर युद्ध अपराध” कहने के बाद यह और भी बढ़ गया।
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दवाओं की क्वालिटी कैसे चेक की जाती है? पैरासिटामॉल समेत 53 दवाएं टेस्ट में हुई फेल…
पैरासिटामॉल समेत 53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई हैं. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने इन दवाओं की लिस्ट जारी की है. यह दवाओं की रेग्युलेटरी बॉडी है. जो क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई हैं उसमें कैल्शियम, विटामिन-डी3, एंटी डायबिटीज और ब्लड प्रेशर समेत कई तरह की दवाएं हैं. क्या दवा वाकई में काम कर रही है? यह ड्रग अथॉरिटी के मानकों पर फिट बैठ रही है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए क्वालिटी टेस्ट किया गया.
अबसवाल उठता है कि आखिर दवाओं की क्वालिटी का टेस्ट कैसे किया जाता है? यह किन-किन मानकों से होती हुई गुजरती हैं और दवाओं को लेकर अमेरिकन ड्रग रेगुलेटर FDA और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक क्या हैं?

दवाओं की क्वालिटी कैसे चेक होती है?
दवाओं की गुणवत्ता जानने के लिए ड्र्रग अथॉरिटी क्वालिटी टेस्ट करती है. जांच के जरिए दवा की सेफ्टी और उसके असर को समझा जाता है. इसके लिए CDSCO के विशेषज्ञों की टीम कई तरह के टेस्ट करती है. पहला है विजुअल इंस्पेक्शन. इसके जरिए दवाओं से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, एक्सपायरी और लेबलिंग को जांचा जाता है. किसी भी तरह की झूठी जानकारी को क्राॅस चेक किया जाता है. जानकारी गलत मिलने पर उनकी लेबलिंग बदली जाती है.सैम्पलिंग एनालिसिस के जरिए दवाओं को जांचा जाता है. CDSCO के अलग-अलग ऑफिस से दवाओं के सैम्पल लैब में भेजे जाते हैं. इन्हें मानकों पर परखा जाता है. जांच का मकसद होता है कि जो दवाएं मार्केट में पहुंचाई जा रही हैं वो सुरक्षित हैं या नहीं. FDA और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मानकों पर खरी उतरें.
जांच के दौरान यह भी देखा जाता है कि इनमें बैक्टीरिया, फंगस या दूसरे सूक्ष्मजीव तो नहीं हैं. क्वालिटी में यह कितनी खरी उतरी, इसका रिव्यू क्वालिटी एश्योरेंस टीम करती है. यह देखती है कि दवा मानकों के खरी उतर रही है या नहीं.स्टेबिलिटी स्टडी
दवाओं पर लम्बे तक वातावरण का क्या असर पड़ता है? वो कैसे इसकी क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है? इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं की एक बड़ी टीम स्टेबिलिटी स्टडी करती है. स्टडी से सामने आने वाले परिणामाें से सबक लेते हुए उसे गाइडलाइन का हिस्सा बनाया जाता है.
क्या हैं FDA के WHO के मानक?
अमेरिकी ड्रग रेग्युलेटर ने दवाओं के लिए जो गाइडलाइन तय की है उसे करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस कहा जाता है. इसमें टेस्टिंग और दवा के प्रभाव की जांच की जाती है. इसके अलावा जेनेरिक ड्र्रग टेस्ट करने की बात कही गई है. जिसमें दवा में मौजूद केमिकल, उनका डोज और उसकी पावर को चेक किया जाता है. यह भी देखा जाता है कि कंपनी किस तरह से उसकी लेबलिंग कर रही है. जैसे- उसे कौन-कौन खा सकता है और दुर्लभ स्थिति में कौन-कौन से साइड इफेक्ट हो सकते हैं. यह बताना भी जरूरी होता है.
इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने अंतरराष्ट्रीय मानक जारी किए हुए हैं. इसमें पहला टेस्ट है स्टेबिलिटी. इसका मतलब है, दवा में जो कम्पाउंड हैं वो उसकी पैकिंग और स्टोरेज प्रभावित नहीं होनी चाहिए. पैकिंंग ऐसी होनी चाहिए जो दवा को प्रभावित होने से बचाएं. दवा को कैसे स्टोर किया जाए कि उसका असर खत्म न हो, कंपनी के लिए यह बताना भी अनिवार्य है. इसके अलावा गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के तहत दवाओं का निर्माण होना चाहिए. इसके मामले FDA जैसे ही हैं.
ये दवाएं फेल हुई
जो दवाएं फेल हुई हैं उनमें दर्द निवारक डिक्लोफेनेक, बुखार उतारने वाली पैरासिटामोल, एंटीफंगल मेडिसिन फ्लुकोनाजोल के अलावा सनफार्मा की पैन्टोसिड टैबलेट भी है. इसके अलावाकैल्शियम और विटामिन-डी की टेबलेट शेल्कल और पल्मोसिल इंजेक्शन, एल्केम हेल्थ साइंस की एंटीबायोटिक्स क्लैवम 625 शामिल हैं. -

न टूट रहा, न थक रहा… इजराइल के पास कौन सा अलादीन का चिराग है?
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब रुकने वाले नहीं. उन्होंने अमेरिका-फ्रांस के 21 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करके अपना रुख साफ कर दिया है. इसके साथ ही इजराइल की सेना को पूरे दमखम के साथ आगे बढ़ने का निर्देश दिया है. 1 करोड़ से भी कम आबादी वाला इजराइल लगातार दुश्मनों को जवाब दे रहा है. यह देश लेबनान के हिजबुल्लाह की कमर तोड़ रहा है. ठीक उसी अंदाज में जैसे गाजा में हमास को बर्बाद किया था. सिर्फ चार दिन चली जंग ने इजराइल ने हिजबुल्लाह के 90 फीसदी नेताओं को ठिकाने लगा दिया है. इजराइल ने हमलों को भी झेला. दुश्मनों को जवाब भी दिया और आज पूरी ताकत के साथ खड़ा हुआ है. न तो देश के आर्थिक हालात बहुत बिगड़े हैं और न ही उसकी हिम्मत और जज्बे में कमी आई है. सवाल उठता है कि आखिर इजराइल के पास ऐसा कौन सा अलादीन का चिराग है जो उसे मजबूती दे रहा है.
इस सवाल का जवाब मिलता है इजराइल के आर्थिक ढांचे से. इजराइल में डायमंड एक्सपोर्ट का कारोबार उसकी रीढ़ से कम नहीं है. डायमंड का कारोबार उसे दुनियाभर से मोटी रकम दिला रहे हैं. यह रकम इतनी ज्यादा है कि जंग के बाद भी यह मजबूती से खड़ा है.
खजाने पर बैठा है इजराइल
इजराइल कई चीजों से कमाई कर रहा है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल, माइनिंग, हथियार और लेबर फोर्स शामिल हैं. इजराइल अपनी जीडीपी का 40 फीसदी कमाई सामान निर्यात करके कमाता है. एक्सपोर्ट में सबसे ऊपर है डायमंड. अमेरिका, चीन, आयरलैंड और ब्रिटेन उन देशों में शामिल हैं जो इजराइल से चीजें खरीदते हैं और एक मोटी कीमत चुकाते हैं.इजराइल में दुनिया की सबसे बड़ी डायमंड कठिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री है. यही इसकी कमाई का सबसे बड़ा सोर्स है जो इसकी ताकत बना हुआ है. जंग के दौर में भी इजराइल ने हमास और हिजबुल्लाह के हमलों से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने की पूरी कोशिश में जुटा हुआ है और सफल रहा है. इजराइल की ताकत और हिम्मत को बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान से समझा जा सकता है, जिसमें उन्होंने युद्धविराम के प्रस्ताव पर ठुकरा दिया है.
इजराइल की सबसे ज्यादा कमाई होती है हीरों के एक्सपोर्ट से. इजराइल से एक्सपोर्ट होने वाली कुल चीजों में 25 फीसदी हिस्सा डायमंड है. इजराइल वो देश है जो पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात करने में सबसे अव्वल है. इसके अलावा कच्चे हीरे यानी राॅ डायमंड के व्यापार का केंद्र है. हर साल दुनियाभर में कच्चे हीरे के उत्पादन का करीब एक-तिहाई हिस्सा इजराइल डायमंड एक्सचेंज में आयात किया जाता है. इसके बाद इसे पॉलिश करके दुनियाभर में एक्सपोर्ट किया जाता हैइजराइल सिर्फ हीरा उद्योग से 6,693 करोड़ रुपए सालाना कमाता है.
सिर्फ हीरों से कितनी क्रांति ला रहा इजराइल?
साल 2020 में 7.5 अरब डॉलर के हीरों का निर्यात करके इजरायल दुनिया का छठा सबसे बड़ा डायमंड एक्सपोर्टर बना. इजराइल डायमंड एक्सचेंज (IDE), दुनिया के सबसे बड़े हीरा केंद्र में से एक है. इसकी स्थापना 1937 में हुई थी और इसके लगभग 3,000 सदस्य कच्चे और पॉलिश किए गए हीरों के निर्माण, आयात और निर्यात के लिए काम कर रहे हैं.
इजराइल सिर्फ हीरा उद्योग से 6,693 करोड़ रुपए सालाना कमाता है. हीरा व्यापार यहां के लाखों युवाओं को रोजगार दे रहा है. हीरा उद्योग यूरोप में यहूदी लोगों के इतिहास से जुड़ा रहा है. मध्यकालीन युग में, कानूनी प्रतिबंधों ने यहूदियों को कुछ खास व्यवसायों तक सीमित कर दिया था. हीरे का व्यापार यहूदियों के लिए बेहतर विकल्प था. धीरे-धीरे हीरे का व्यापार यहूदियों के बीच एक लोकप्रिय व्यवसाय बन गया.
एक कमरे में बैठक से शुरू हुआ था हीरे का कारोबार
इज़राइल का उद्योग 1930 के दशक में उद्यमी अप्रवासियों के साथ शुरू हुआ, जो बेल्जियम से व्यापार की सूझबूझ और स्किल लेकर आए थे. 1940 तक नेतन्या और तेल अवीव में मुट्ठीभर कारखाने चल रहे थे और 1937 में पहले “फिलिस्तीन डायमंड क्लब” और फिर नाम से “इज़राइल डायमंड एक्सचेंज” का गठन किया गया. डायमंड क्लब की पहली बैठक एक निजी घर के कमरे में हुई और बाद में तेल अवीव के एक कैफ़े में होने लगी.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जब पारंपरिक यूरोपीय केंद्र जर्मन कब्जे में आ गए, तो इज़राइल पॉलिश किए गए हीरों का एक प्रमुख केंद्र बन गया. 1948 में इज़राइल राज्य की स्थापना के साथ ही नए अप्रवासी पहुंचे, इनकी भर्ती हीरा उद्योग में कामगारों के रूप में की गई. कुछ ही महीनों ये ये प्रशिक्षित हो गए. सालों-साल विकास हुआ और फिर इजरइाल ने डायमंड के व्यापर में तकनीक को शामिल किया. इस कदम ने इजराइल की अर्थव्यवस्था को और रफ्तार दी. आज इजराइल मजबूती से डटा हुआ है. -

Smart Meter क्या स्मार्ट मीटर लगाने से हैं नुकसान?
सामना-प्रत्येक घर में स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी जोर शोर से चल रही है।इसी बीच लोगों के मन में भी अनेक प्रकार की दुविधाएं हैं.. जिनमें से बड़ा सवाल यह है कि क्या स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली का बिल अधिक आएगा,क्या स्मार्ट मीटर लगाने से उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ेगा..तो आज हम जानेंगे स्मार्ट मीटर लगाने के क्या हैं फायदे
प्रीपेड स्मार्ट मीटर की खासियत
प्रीपेड स्मार्ट मीटर में कई खासियतें हैं… जिनमें शून्य लागत पर स्मार्ट मीटर लगाना, रिचार्ज में 3 प्रतिशत का लाभ, पूर्व की भांति सरकार द्वारा घोषित सब्सिडी का लाभ, दैनिक खपत का आंकलन, बिजली बिल न मिलने की शिकायत नहीं, ऑफलाइन व ऑनलाइन रिचार्ज की सुविधा।
2000 रुपए से ज्यादा बैलेंस रखने पर इतना मिलेगा ब्याज
स्मार्ट मीटर लगाने से पूर्व विद्युत बकाया राशि को 300 दिनों में भुगतान करने की व्यवस्था की गई है. जिससे उपभोक्ताओं को बकाये राशि एक साथ जमा करने की वित्तीय भार से मुक्ति मिलेगी, उपभोक्ता यदि 2000 या इससे अधिक राशि अपने खाते में लगातार बरकरार रखते हैं तो उन्हें इन दोनों पर ब्याज देय होगा।
साल में 3 महीने तक यह राशि बरकरार रखने पर बैंक दर से ब्याज देय है।
3 महीने से 6 महीने तक रखने पर बैंक दर से प्लस 0. 25 प्रतिशत की दर से देय है।
6 माह से अधिक समय तक रखने पर बैंक दर से प्लस 0.5 प्रतिशत की दर से देय है।
नहीं देनी पड़ेगी सुरक्षा राशि
स्मार्ट मीटर के माध्यम से नया बिजली कनेक्शन स्थापित करने के समय कोई सुरक्षा राशि नहीं ली जाती है। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पहले से ली गई सुरक्षा राशि भी वापस कर दी जाती है। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद यदि स्वीकृत लोड से अधिकतम मांग बढ़ जाती है तो उपभोक्ता को 6 माह तक अधिकतम मांग शुल्क से राहत दी जाती है।स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में सोलर पैनल लगाने के बाद स्मार्ट मीटर को नेट मीटर से बदल दिया जाता है,जिससे उपभोक्ताओं को अलग से नेट मीटर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है।
मोबाइल पर मिलेगा बिल,नहीं लगाने पड़ेंगे कार्यालय के चक्कर
स्मार्ट मीटर से प्राप्त सटीक और विस्तृत डेटा समस्याओं के त्वरित समाधान में सहायक होता है।उपभोक्ताओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से बिल प्राप्त होता है। वे कार्यालय जाए बिना भी अपने स्मार्ट मीटर को रिचार्ज कर सकते हैं। त्रुटि रहित बिलिंग के कारण उपभोक्ताओं को बिजली कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। -

डिप्टी कमिश्नर के बेटे पर छात्रा ने लगाया गंभीर आरोप, पीड़िता बोली- प्रपोज किया, मना की तो कर दी ये घटिया हरकत…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा की फोटो को एडिट कर वायरल करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि फोटो वायरल करने वाले छात्र की मां डिप्टी कमिश्नर और पिता प्रिंसिपल है। मामले में पीड़िता ने इसकी शिकायत भी थाना टिकरापारा में दर्ज कराई। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस ने घटना के संबंध में जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
दरअसल, ये पूरा मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की शिकायत के मुताबिक, वो जब स्कूल में थी। इस दौरान डिप्टी कमिश्नर के बेटे ने कई बार उसे प्रपोज किया। लेकिन उसने मना कर दिया था। इसके बाद भी कई बार उसने ऐसी ही हरकत की। आखिर में उसने पीड़िता की एक पुरानी फोटो सोशल मीडिया से निकालकर उसे एडिट किया और फिर वायरल कर दिया।
पीड़िता को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने इसकी शिकायत टिकरापारा थाने में दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शिकायत की जानकारी मिलते ही आरोपी युवक की डिप्टी कमीश्नर मां और प्रिंसिपल पिता ने पीड़िता से माफी भ मांगी थी। आरोपी के परिजनों ने कहा था कि उनका बेटा साइको है और आये दिन उसकी हरकतों से वे लोग परेशान रहते हैं।फिलहाल, पीड़ित युवती ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने पुलिस से गुहार लगाई है कि आरोपी युवक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाये। पुलिस मामले में आरोपी की पहचान होने के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
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नाइजीरिया को भारत से मिलेंगे प्रंचड लड़ाकू हेलीकॉप्टर, बदल जाएगी अफ्रीकी देश की सेना की किस्मत, जानें खासियत…
अबुजा। नाइजीरिया की सरकार बेंगलुरू स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से चार लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) खरीदने की योजना बना रही है। नाइजीरिया सॉफ्ट क्रेडिट व्यवस्था के जरिए एलसीएच खरीदने वाला पहला देश बनने जा रहा है, जो उसकी सैन्य क्षमताओं में अहम बढ़ोतरी करेगा। यह अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी के लिहाज से एक अहम कदम है। साथ ही नाइजीरिया की अपनी हवाई रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश को भी दिखाता है। नाइजीरियाई सरकार की पहल के साथ-साथ ये एचएएल की रणनीतिक पहुंच भी इस समझौते से दिखती है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरियाई सेना के अधिकारियों ने रोटरी विंग अकादमी में एचएएल के ध्रुव हेलीकॉप्टरों के लिए ट्रेनिंग पूरी कर ली है। फिलहाल एचएएल और नाइजीरियाई अधिकारियों के बीच चर्चा चल रही है और जल्द ही इससे जुड़े समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। एलसीएच, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का एक वेरिएंट है। इसमें स्टील्थ तकनीक, बख्तरबंद सुरक्षा प्रणाली और क्रैश-योग्य लैंडिंग गियर जैसी कई मॉर्डन फैसिलिटी हैं।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) और भारतीय सेना ने पहले ही एलसीएच को अपने बेड़े में इंटीग्रेट कर लिया है। फिलहाल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और एचएएल के साथ चल रहे सहयोग का उद्देश्य हेलीकॉप्टर की हथियार और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाना है। एलसीएच का समुद्र तल, रेगिस्तानी क्षेत्रों और सियाचिन के कठोर वातावरण सहित विभिन्न परिस्थितियों में कठोर परीक्षण किया गया है। इसे आधिकारिक तौर पर फरवरी 2020 में उत्पादन के लिए तैयार घोषित किया गया था।नाइजीरिया ने क्यों दिखाई एलसीएच में दिलचस्पी
एलसीएच के लिए नाइजीरियाई सेना की रुचि उसकी मारक क्षमता और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं की वजह से है। नाइजीरिया अपने सैन्य अभियानों के लिए 12 जुड़वां इंजन वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की मांग कर रहा है। नाइजीरिया ने एचएएल, एयरबस और तुर्की के टीएआई सहित कई वैश्विक निर्माताओं से इसके लिए संपर्क किया। एचएएल का एलसीएच अपनी खूबियों की वजह से नाइजारिया को लुभा रहा है। हेलीकॉप्टरों की खरीद के अलावा एचएएल ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए भी नाइजीरियाई सेना को मदद कर रहा है। -

आधी रात SSP ने की बड़ी रेड कार्रवाई: पुलिसकर्मियों के साथ कई कैफे एवं रेस्टॉरेंट में बोला धावा, रात्रि 1 बजे ग्राहक बनकर पहुंचे, फिर जो हुआ, मचा हड़कंप….
रायपुर। बीती देर रात्रि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह द्वारा देर रात्रि स्वयं निकल कर व्हीआईपी रोड क्षेत्र में शिकायत प्राप्त हो रहे कई कैफे एवं रेस्टॉरेंट पर रेड कर कार्यवाही कराया गया। वह लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों के मद्देनजर सादी ड्रेस में रात्रि एक बजे ग्राहक बनकर कई रेस्टोरेंट में पहुंचे, आर्डर पर शराब सर्व करने पर पीछे इंतजार कर रही टीम से कार्यवाही कराया। निर्धारित अवधि से अधिक समय तक संचालित कैफे एवं रेस्टॉरेंट पर भी कार्यवाही हुई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर लखन पटले एवं नगर पुलिस अधीक्षक उरला मणीशंकर चंद्रा द्वारा भी अन्य टीम बनाकर व्ही.आई.पी रोड स्थित रेस्टॉरेंट एवं कैैफे का मुआयना किया गया। इस दौरान थाना तेलीबांधा क्षेत्रांतर्गत द लिविंग रूम कैफे एवं थाना माना क्षेत्रंातर्गत एरिया 36 रेस्टॉरेंट एवं कैफे तथा द बर्न हाउस कैफे में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक कैफे संचालित करते एवं शराब बिक्री करते पाये जाने पर संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही के निर्देश वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा दिये गये। मैनेजर के साथ मालिकों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज किया गया है।थाना माना में –
01. एरिया 36 रेस्टॉरेंट कैफे से आरोपी कामता कश्यप को अवैध रूप से शराब के साथ पकड़े जाने पर आरोपी के विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही किया गया।
02. द बर्न हाउस रेस्टॉरेंट एवं कैफे से आरोपी सूरज जाटवार पिता दयाराम जाटवार उम्र 24 साल निवासी सरसींवा सारंगढ़ को अवैध रूप से शराब एवं तम्बाकू उत्पाद हुक्का एवं हुक्का का तम्बाकू के साथ गिरफ्तार कर आरोपी के विरूद्ध कोटपा एक्ट एवं आबकारी एक्ट के तहत की गई कार्यवाही।
थाना तेलीबांधा –
01. होटल द लिविंग रूम कैफे के संचालक आरोपी राहुल धुप्पड़ पिता विनोद धुप्पड़ उम्र 21 साल निवासी प्रियदर्शनी नगर थाना न्यू राजेन्द्र नगर रायपुर को अवैध रूप से शराब के साथ गिरफ्तार कर उसके विरूद्ध थाना तेलीबांधा में आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही की गई।
साथ ही थाना तेलीबांधा क्षेत्रंातर्गत बबलू ढ़ाबा पास आरोपी अमनदीप पिता जितेन्द्र सिंह उम्र 28 साल निवाीस महावीर नगर थाना न्यू राजेन्द्र नगर को गिरफ्तार कर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्यवाही की गई है।
थाना मंदिर हसौद –
01. पिन्टू ढ़ाबा होटल से आरोपी जतेेंन्रद सिंग पिता हरवंश सिंग उम्र 45 साल निवासी शंकर नगर थाना सिविल लाईन रायपुर को अवैध रूप से शराब के साथ गिरफ्तार कर आरोपी के विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही किया गया।
02. थाना मंदिर हसौद क्षेत्रांतर्गत सार्वजनिक स्थान पर शराब पिते आरोपी अभिषेक अग्रवाल पिता विनोद अग्रवाल उम्र 33 वर्ष साकिन सफ़ायर ग्रीन फेस 1 थाना विधानसभा जिला रायपुर को गिरफ्तार कर उसके विरूद्ध धारा 36(सी) आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही की गई।
03. होटल पाजी द पिण्ड संचालक आरोपी मंजीत सिंह पिता त्रिलोचन सिंह उम्र 40 साल निवासी महावीर नगर थाना न्यू राजेन्द्र नगर रायपुर को अवैध रूप से शराब के साथ गिरफ्तार कर उसके विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही किया गया।
थाना न्यू राजेन्द्र नगर–
होटल सरदार द किचन के पास विवाद करते कुल 05 आरोपी आकाश धु्रव, प्रफुल्ल भोयर, अनिल खुटे, मुकेश दास एवं पी.शिवा राव निवासी न्यू राजेन्द्र नगर के विरूद्ध थाना न्यू राजेन्द्र नगर में प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्यवाही किया गया है। रायपुर पुलिस का चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। -

पहली बार भारत में ऐसा होगा, टाटा विदेश में लगा रही है डिफेंस फैक्ट्री, जानिए क्या बनेगा…
नई दिल्ली। डिफेंस सेक्टर (Defense Sector) बड़ा ही स्पेशलाइज्ड सेक्टर है। इसमें अधिकतर विदेशी कंपनियों का दबदबा रहा है। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई भारतीय कंपनी विदश में डिफेंस मैन्यूफैक्चिरंग लाइन (Defense Manufacturing Line) बनाएगी। जी हां, यह खबर टाटा ग्रुप (Tata Group) की तरफ से आई है। ग्रुप की एक कंपनी विदेश में एक मेजर डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने की राह पर है।
टाटा ग्रुप की कौन सी कंपनी है
टाटा ग्रुप की एक कंपनी है टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Ltd)। टीएएसल की तैयारी कैसाब्लांका (Casablanca) में यह प्लांट बनाने की है। यह प्लांट शुरू में रॉयल मोरक्कन सशस्त्र बलों (Royal Moroccan Armed Forces) के लिए बख्तरबंद वाहन (Armoured vehicles) बनाएगा। यह कंपनी लंबे समय में अफ्रीकी बाजार के बड़े हिस्से को सर्व करने की योजना बना रही है।
डिफेंस सेक्टर बड़ा ही स्पेशलाइज्ड सेक्टर है। इसमें अधिकतर विदेशी कंपनियों का दबदबा रहा है। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई भारतीय कंपनी विदश में डिफेंस मैन्यूफैक्चिरंग लाइन बनाएगी।
टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड कैसाब्लांका में कारखाना लगाने जा रही है
वहा लगने वाले इस प्लांट में बख्तरबंद गाड़ियां बनाई जाएंगी
इन बख्तरबंद गाड़ियों की सप्लाई मोरक्कन आर्म्ड फोर्सेज को की जाएगी
यह कंपनी लंबे समय में अफ्रीकी बाजार के बड़े हिस्से को सर्व करने की योजना बना रही है।
टाटा ग्रुप की एक कंपनी है टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड। टीएएसल की तैयारी कैसाब्लांक में यह प्लांट बनाने की है। यह प्लांट शुरू में रॉयल मोरक्कन सशस्त्र बलों के लिए बख्तरबंद वाहन बनाएगा।
■ टाटा ग्रुप की इस यूनिट में व्हील्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (WhAP) का उत्पादन होगा। यह प्लेटफार्म एक उभयचर पैदल सेना लड़ाकू वाहन (Amphibious infantry combat vehicle) होता है। यह सभी प्रकार के इलाकों में नेविगेट करने में सक्षम होता है।
■ उस कारखाने में हर साल 100 कैम्बेट व्हीकल्स का उत्पादन करने में सक्षम होगा। प्लांट एक साल के भीतर काम करना शुरू कर देगा, जिसमें पहला WhAP 18 महीनों के भीतर शुरू होने का अनुमान है।
■ टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड इस तरह के कैम्बेट व्हीकल की सप्लाई भारतीय सेना को भी करती है। ये वाहन सीमित संख्या में भारतीय सेना के साथ सेवा में हैं। इन वाहनों को लद्दाख सीमा पर तैनात किए गए हैं।
■ व्हील्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म को TASL और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। मोरक्को द्वारा चुने जाने से पहले अफ्रीका के रेगिस्तानों में इसके कई गहन परीक्षण किए गए हैं।
■ टाटा व्हैप में Amphibious Drive Mode (एम्फीबियम ड्राइव मोड) दिया गया है, जिससे यह जमीन और पानी दोनों जगहों पर आसानी से चलाए जा सकते हैं। इसके साथ ही इसमें हाइड्रो-न्यूमैटिक स्ट्रट्स और स्वतंत्र सस्पेंशन मिलता है।
■ टाटा व्हैप में 10 से 12 लोग सफर कर सकते हैं। इसे टोही वाहन, पैदल सेना वाहक, या रसद वाहक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
■ टाटा व्हैप की खासियत ये है कि ये दलदली इलाकों में भी चल सकता है और मजबूत इतना है कि लैंड माइन के विस्फोट को भी झेल सकता है।
भारत ने अतीत में प्रमुख रक्षा प्लेटफार्मों का निर्यात किया है और घरेलू स्तर पर वैश्विक खिलाड़ियों के साथ उत्पादों का निर्माण कर रहा है। लेकिन, किसी भारतीय कंपनी ने अब तक विदेशों में ऐसा नहीं किया है। यह मोरक्को में एक पूर्ण प्रमुख प्लेटफॉर्म का निर्माण करने में सक्षम पहला रक्षा संयंत्र भी होगा। इस संयंत्र में लगभग 350 लोग कार्यरत होंगे और काम का एक बड़ा हिस्सा भारत में भी किया जाएगा। -

जिला अस्पताल से कुआकोंडा सीएससी तक दवाओं व अन्य सामग्री को ड्रोन के माध्यम से पहुंचाने का किया गया ट्रायल…
दंतेवाड़ा। जिला अस्पताल और कुआकोंडा सीएससी के बीच दवाओं व अन्य सामग्री को ड्रोन के माध्यम से पहुंचाने का ट्रायल किया जा रहा है। कुआकोंडा सीएससी से 8 ब्लड सेंपल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजकर स्वास्थ्य विभाग को दो ड्रोन का डेमो दिखाया गया, जिसमें आरएफटीएलएफटी, थाइराइड जैसे खून के नमूने कुआकोंडा सीएससी से जिला अस्पताल भेजे गए। जिले में इसकी कितनी जरूरत है अब इसका आंकलन अधिकारी करेंगे। दरअसल जिले में ऐसे कई अस्पताल हैं जहां से मरीज को जिला अस्पताल पहुंचाने में डेढ़ से 2 घंटे लगते हैं, तब तक मरीज की हालत बिगड़ जाती है, कई बार नक्सल क्षेत्र के अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल पाने से भी कई लोगों की जान चली जाती है, खासकर सर्पदंश के मामलों में, ऐसे केस में दवाओं को पहुंचाने में ड्रोन कारगर साबित होगा, अभी हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ड्रोन का इस्तेमाल करता है, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश जैसे और राज्यों में भी इसका ट्रायल किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को दो ड्रोन का डेमो दिखाया गया एक 50 किलोमीटर रेंज और दूसरा 120 किलोमीटर रेंज, 50 किलोमीटर रेंज वाले ड्रोन से पूरे जिले भर के अस्पतालों तक दवा पहुंच सकेगी, जरूरी और एमरजेंसी जांच के लिए मेडिकल कालेज जगदलपुर भी ब्लड सेंपल जांच के लिए जगदलपुर भेजे जा सकेंगे। ड्रोन की 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है, जमीन से 300 मीटर ऊंचाई तक यह उड़ान भर सकता है।
डॉ देश दीपक ने बताया ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में एमरजेंसी में जरूरी दवा भेज सकेंगे, काफी कारगर साबित होगा, ड्रोन का अभी सिर्फ इसका ट्रायल किया जा रहा है। जिला अस्पताल के सामने हाईस्कूल ग्राउंड से कुआकोंडा सीएससी के सामने हाईस्कूल ग्राउंड में ड्रोन दवा लेकर 15 मिनट में 23 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचा।
ड्रोन ऑपरेट कर रहे मिलन, यूसुफ ने बताया पहली बार यहां इसका डेमो किया जा रहा है, इसलिए कुछ समय ज्यादा लग रहा है। पूरे समय चाहे 10 किलोमीटर हो या 120 किलोमीटर हम ड्रोन पर नजर रखते हैं।