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  • शहीद पुलिस अधिकारी / कर्मचारी का पुत्र इच्छानुसार ASI (M) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति का पात्र….

    शहीद पुलिस अधिकारी / कर्मचारी का पुत्र इच्छानुसार ASI (M) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति का पात्र….


    बिलासपुर। हाई कोर्ट ने शहीद पुलिस कर्मी के पुत्र को एएसआई एम के पद में अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार माना है। कोर्ट ने डीजीपी को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन को 4 सप्ताह में निराकृत करने व उक्त पद में नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
    अलबेलापारा, कांकेर निवासी मुरलीधर सिन्हा, जिला-नारायणपुर में पुलिस विभाग में आरक्षक (कांस्टेबल) के पद पर पदस्थ थे। चूंकि जिला – नारायणपुर घोर अनुसूचित एवं नक्सली जिला है। वर्ष 2007 में हुए एक नक्सलाईड ऑपरेशन में मुरलीधर सिन्हा की मृत्यु हो गई एवं पुलिस विभाग द्वारा उन्हें शहीद का दर्जा दिया गया।

    स्व. मुरलीधर सिन्हा के पुत्र पंकज सिन्हा नाबालिक होने के कारण उन्हें बाल आरक्षक के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई। पंकज सिन्हा द्वारा 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने एवं बालिग होने पर सचिव, गृह विभाग एवं डीजीपी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर पंकज सिन्हा को ASI (M) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दिये जाने एवं उक्त पद पर नियमित किये जाने की मांग की गई परंतु पंकज सिन्हा को उक्त पद पर नियुक्ति ना दिये जाने से क्षुब्ध होकर पंकज सिन्हा द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं पी.एस. निकिता के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई। अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं पी. एस. निकिता द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि दिनांक 13.11.2020 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रायपुर द्वारा जारी सर्कुलर के तहत् पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारी / कर्मचारियों द्वारा अनुसूचित / नक्सली जिलों में मुठभेड़ के दौरान मृत्यु हो जाने पर उन अधिकारी / कर्मचारियों को शहीद का दर्जा प्रदान किया जाएगा एवं शहीद अधिकारी/कर्मचारियों के विधिक वारिसों को इच्छानुसार पद ASI (M)/ आरक्षक के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाएगी परंतु आवेदक द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत किये जाने के बाद भी सर्कुलर दिनांक 13.11.2020 का उल्लंघन करते हुए उसे ASI (M) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान नहीं की जा रही है।

    उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् रिट याचिका को स्वीकार कर सचिव, गृह विभाग एवं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को यह निर्देशित किया गया कि वे दिनांक 13.11.2020 को डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर के तहत् याचिकाकर्ता पंकज सिन्हा को ASI (M) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान किये जाने हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदन का तत्काल 04 (चार) सप्ताह के भीतर निराकरण करें।

  • मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने सांसारिक जीवन त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया…

    मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने सांसारिक जीवन त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया…

    90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने सांसारिक जीवन त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपना लिया है. खबरों के अनुसार, ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े में संन्यासी बन गई हैं और वे किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनने जा रही हैं.उन्होंने अपना पिंडदान कर दिया है और अब वे एक वैरागी का जीवन व्यतीत करेंगी.

    श्री यामाई ममता नंद गिरि होगा नया नाम

    दीक्षा के बाद ममता कुलकर्णी को नया नाम दिया गया है – श्री यामाई ममता नंद गिरि. किन्नर अखाड़े की अध्यक्ष और जूना अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उन्हें दीक्षा दी है.
    यह ध्यान देने योग्य है कि किन्नर अखाड़े को अभी तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, इसलिए यह वर्तमान में जूना अखाड़े से जुड़ा हुआ है.कैसे बनते हैं महामंडलेश्वर?

    महामंडलेश्वर की दीक्षा एक कठिन प्रक्रिया है जिसमें तपस्या और समय लगता है. इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

    गुरु के सानिध्य में शिक्षा: सबसे पहले, व्यक्ति को किसी गुरु के साथ जुड़कर आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करनी होती है. इस दौरान, व्यक्ति का आचरण, पारिवारिक मोह का त्याग और साधना गुरु की देखरेख में होती है.

    परीक्षा और सेवा: जब गुरु को लगता है कि आवेदक इस पद के योग्य हो गया है, तो उसे दरबान से लेकर भंडारे और रसोई जैसे कार्यों में लगाया जाता है. सालों की सेवा और त्याग के बाद, जब व्यक्ति पूरी तरह से अध्यात्म में लीन हो जाता है, तब गुरु उसे संत बनने के लिए तैयार मानते हैं.

    अखाड़े में दीक्षा: गुरु, जिस अखाड़े से जुड़े होते हैं, उसमें आवेदक को उसकी योग्यता के अनुसार महामंडलेश्वर की दीक्षा दिलाई जाती है.

    पृष्ठभूमि का सत्यापन (वेरिफिकेशन): आवेदन के बाद, अखाड़ा परिषद आवेदक के गुरु पर भरोसा करती है. इसलिए, गुरु जिन शिष्यों को लेकर आते हैं, उनसे ही पृष्ठभूमि की जानकारी मांगी जाती है. यदि किसी पर कोई संदेह होता है, तो अखाड़ा परिषद स्वयं आवेदक के घर, परिवार, गांव, तहसील और पुलिस स्टेशन का सत्यापन करवाती है. आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जाती है. यदि कोई किसी भी जानकारी में अयोग्य पाया जाता है, तो उसे दीक्षा नहीं दी जाती है और आवेदन रद्द कर दिया जाता है.दीक्षा की पूरी प्रक्रिया

    महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:

    अखाड़े में आवेदन: सबसे पहले, व्यक्ति को संबंधित अखाड़े में आवेदन देना होता है.

    दीक्षा और संत बनना: इसके बाद, दीक्षा देकर संत बनाया जाता है. संन्यास काल के दौरान, आवेदक को अपनी जमा पूंजी जनहित के लिए देनी होती है.

    मुंडन और स्नान: फिर, नदी के किनारे मुंडन और स्नान होता है.

    तर्पण और पिंडदान: परिवार और स्वयं का तर्पण करवाया जाता है. पत्नी, बच्चों समेत परिवार का पिंडदान करके संन्यास परंपरा के अनुसार विजय हवन संस्कार किया जाता है.

    गुरु दीक्षा और चोटी काटना: गुरु दीक्षा दी जाती है और आवेदक की चोटी काट दी जाती है.

    पट्टाभिषेक: अखाड़े में दूध, घी, शहद, दही और शक्कर से बने पंचामृत से पट्टाभिषेक होता है और अखाड़े की ओर से चादर भेंट की जाती है.

    अखाड़े में प्रवेश और भोज: जिस अखाड़े का महामंडलेश्वर बना है, उसमें उसका प्रवेश होता है. फिर साधु-संत, आम लोग और अखाड़े के पदाधिकारियों को भोजन करवाकर दक्षिणा भी देनी होती है.

    अन्य दायित्व: इसके अलावा, स्वयं का आश्रम, संस्कृत विद्यालय स्थापित करना और ब्राह्मणों को नि:शुल्क वेद की शिक्षा देना भी दायित्वों में शामिल है.

    इस प्रकार, महामंडलेश्वर की पदवी प्राप्त करना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया है जिसमें त्याग, तपस्या और समर्पण की आवश्यकता होती है.

  • पेपरलेस कोर्ट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम,उच्च न्यायालय में दस्तावेजों का डिजिटाईजेशन सेंटर का शुभारंभ…

    पेपरलेस कोर्ट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम,उच्च न्यायालय में दस्तावेजों का डिजिटाईजेशन सेंटर का शुभारंभ…


    तकनीकी संसाधनों का उपयोग न्यायपालिका को प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए करना होगा-चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा


    बिलासपुर। आज 25 जनवरी को छत्तीसगढ राज्य में पेपरलेस कोर्ट की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण व ठोस कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दस्तावेजों को डिजिटाईज करने के लिए “डिजिटाईजेशन सेंटर” का शुभारंभ किया गया। “डिजिटाईजेशन सेंटर” का शुभारंभ मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, के द्वारा फीता काटकर किया गया।
    इस अवसर पर मुख्य न्यायाधिपति द्वारा व्यक्त किया गया कि आज का समय तकनीकी व वर्चुअल सुनवाई का समय है और हम लोगों ने कोविड के दौरान् वर्चुअल माध्यम से सफलतापूर्वक केसेस की सुनवाई की है और पेपरलेस कोर्ट की दिशा में आज महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “डिजिटाईजेशन सेंटर” का शुभारंभ किया जा रहा है, जिसमें लंबित मामलों के दस्तावेजों का डिजिटाईजेशन किया जाएगा जिसके माध्यम से हम पेपरलेस कोर्ट की अवधारणा को तेजी से साकार कर सकेंगे। मुख्य न्यायाधिपति ने इस अवसर पर व्यक्त किया कि दस्तावेजों को डिजिटाईज़ करना एक महत्वपूर्ण व संवेदनशील कार्य है। दस्तावेजों को डिजिटाईज़ करते समय हमें सावधानी बरतनी होगी और ध्यान रखना होगा कि कोई भी दस्तावेज डिजिटाईज़ करते समय छूट न जाए और एक प्रकरण के दस्तावेज दूसरे प्रकरण में न संलग्न हों जाएं अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे।
    उन्होंने इस अवसर पर व्यक्त किया कि दस्तावेजों के डिजिटाईजेशन की प्रक्रिया को हमें बहुत तेजी से पूर्ण करना है। इसके लिए हमें बहुत ही परिश्रम और मनोयोग से कार्य करना होगा ताकि हम समय पर दस्तावेजों के डिजिटाईजेशन को पूर्ण कर सकें । मुख्य न्यायाधिपति ने इस अवसर पर यह भी कहा कि टेक्नालाजी के बहुत फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी हैं लेकिन हमेंतकनीकी का फायदा उठाते हुए इसका उपयोग न्यायपालिका के बेहतरी के लिए, पारदर्शिता के लिए व शीघ्र परिणाम देने के लिए करना होगा ।
    “डिजिटाईजेशन सेंटर” का शुभारंभ कार्यक्रम श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे, श्री न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास, श्री न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, श्री न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, श्री न्यायमूर्ति रविन्द्र अग्रवाल, श्री न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, श्री न्यायमूर्ति बी.डी.गुरू, श्री न्यायमूर्ति ए. के. प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर माननीय रजिस्ट्रार जनरल श्री के. विनोद कुजूर, रजिस्ट्री के अधिकारीगण तथा राज्य न्यायिक अकादमी के अधिकारीगण तथा उच्च न्यायालय के कर्मचारीगण उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ के इस जिले मे 5 आरोपियों को फांसी की सजा..युवती की आबरू लूटकर उतार दिया था मौत के घाट…

    छत्तीसगढ़ के इस जिले मे 5 आरोपियों को फांसी की सजा..युवती की आबरू लूटकर उतार दिया था मौत के घाट…

    कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक विशेष अदालत ने 4 साल पुराने मामले में 5 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। यह फैसला पहाड़ी कोरवा समुदाय के पिता, बेटी और भतीजी की हत्या के संबंध में लिया गया है। यह घटना 29 जनवरी 2021 को लेमरु थाना क्षेत्र में हुई थी।


    आरोपियों ने किशोरी की हत्या से पहले उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस जघन्य अपराध ने इलाके में सनसनी मचा दी थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को कड़ी सजा दी है, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों का सख्त संदेश जाए और न्याय की प्रक्रिया को बढ़ावा मिले।

    विशेष अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस दर्दनाक घटना ने समाज को आहत किया है।

  • 13 राज्यों के 200 टोल नाकों में फ्रॉड करने साफ्टवेयर किया इंस्टॉल, दो साल में चुराया 120 करोड़ रूपए का टैक्स…

    13 राज्यों के 200 टोल नाकों में फ्रॉड करने साफ्टवेयर किया इंस्टॉल, दो साल में चुराया 120 करोड़ रूपए का टैक्स…

    मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात समेत 13 राज्यों के लगभग 200 टोल प्लाजा के कंप्यूटरों में एनएचएआई के सॉफ्टवेयर की तरह एक और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करके बिना फास्ट टैग वाली गाड़ियों से करोड़ों की टोल टैक्स चोरी की गई है।

    उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सॉफ्टवेयर बनाने वाले इंजीनियर और टोल प्लाजा के दो मैनेजरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी आलोक सिंह से पूछताछ में सामने आया कि यह घोटाला पिछले दो वर्षों से चल रहा था, जिससे एनएचएआई को करीब 120 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस मामले में रीजनल ऑफिस ने सभी अधिकारियों को अलर्ट किया है और जांच के निर्देश जारी किए हैं।

    पंजाब के खरड़-लुधियाना हाईवे स्थित घुलाल और बठिंडा-अमृतसर हाईवे स्थित जीदा टोल प्लाजा भी इस घोटाले में शामिल हैं। साथ ही टोल टैक्स के ठेकेदारों की मिलीभगत की जानकारी भी मिली है। एसटीएफ ने घोटाले के मास्टरमाइंड आलोक सिंह के साथ तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य फरार हैं।

    क्या हैं नियमः
    टोल से गुजरने वाले फास्ट टैग रहित वाहनों से दोगुना टोल लिया जाता है। इसका 50 प्रतिशत एनएचएआई और 50 प्रतिशत निजी कंपनी या ठेकेदार को मिलता है। लेकिन आलोक द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर से जब टोल वसूला गया, तो एनएचएआई को उसका हिस्सा नहीं मिला, बल्कि पूरा पैसा वो और उसके बनाए गए सिंडिकेट ने गबन किया।

    एसटीएफ के एसएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा और मीर्जापुर में इस सॉफ्टवेयर से रोजाना औसतन 45 हजार रुपये की टोल चोरी हो रही थी।

    आलोक सिंह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जो पहले एनएचएआई के सॉफ्टवेयर बनाने और इंस्टॉल करने का काम करता था। टोल प्लाजा पर काम करते हुए ही उसने ठेकेदारों से संपर्क किया और सॉफ्टवेयर के जरिए धोखाधड़ी शुरू कर दी।

    नकली सॉफ्टवेयर से निकाली गई टोल टैक्स की पर्ची एनएचएआई जैसी दिखती थी, ताकि किसी को शक न हो। बिना फास्ट टैग के गुजरने वाले वाहनों में से 5 प्रतिशत को एनएचएआई के सॉफ्टवेयर पर दर्ज किया जाता था, जबकि बाकी वाहनों से दोगुना टोल लिया जाता और उन्हें टोल फ्री श्रेणी में रखा जाता था।एसटीएफ के मुताबिक, आलोक सिंह ने 42 टोल प्लाजा पर नकली सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए हैं, जिनमें 9 उत्तर प्रदेश, 6 मध्य प्रदेश, 4-4 राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, 3 झारखंड, 2-2 पंजाब, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, और 1-1 ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और तेलंगाना में हैं। यानी यह घोटाला 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैला हुआ है। आलोक ने बताया कि उसके साथियों सावन्त और सुखान्तु ने करीब 200 टोल प्लाजा पर ऐसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए हैं।

  • जवान ने कहा-हम लोग मारते गए, डेडबॉडी का हिसाब नहीं:छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर 27 नक्सलियों के एनकाउंटर की खबर; नारायणपुर में 8 का सरेंडर

    जवान ने कहा-हम लोग मारते गए, डेडबॉडी का हिसाब नहीं:छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर 27 नक्सलियों के एनकाउंटर की खबर; नारायणपुर में 8 का सरेंडर

    छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में नक्सलियों के खिलाफ सबसे लंबा ऑपरेशन चल रहा है। 3 दिन से कुल्हाड़ी घाट स्थित भालू डिग्गी के जंगल में रुक-रुककर फायरिंग हो रही है। फोर्स के मुताबिक 1 करोड़ का इनामी CCM मेंबर बालकृष्ण 25 साथियों के साथ छिपा है।

    27 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। इससे पहले बुधवार सुबह 14 नक्सलियों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए रायपुर के मेकाहारा लाए गए। इनमें 6 महिला और 8 पुरुष हैं। कोबरा जवान ने कहा कि, डेडबॉडी का हिसाब नहीं है, हम लोग मारते गए हैं पीछे एक टीम डेडबॉडी रिकवर कर रही है।

    रविवार रात को छत्तीसगढ़ और ओडिशा की ओर से जॉइंट ऑपरेशन चलाया गया था। सोमवार सुबह से फायरिंग शुरू हुई जो मंगलवार और अब बुधवार को भी जारी है। ऑपरेशन में करीब 1000 जवान निकले हैं।

  • निकाय चुनावों के लिए भाजपा की घोषणा पत्र समिति बनी, अमर संयोजक और सोनी सह संयोजक बनाए गए…

    निकाय चुनावों के लिए भाजपा की घोषणा पत्र समिति बनी, अमर संयोजक और सोनी सह संयोजक बनाए गए…

    रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की सहमति से आगामी नगरीय निकाय चुनाव-2025 के परिप्रेक्ष्य में मंगलवार को पार्टी की घोषणा पत्र समिति की घोषणा की गई है। भाजपा प्रदेश महामंत्री जगदीश (रामू) रोहरा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि वरिष्ठ विधायक अमर अग्रवाल समिति के संयोजक और विधायक सुनील सोनी सह संयोजक बनाए गए हैं। श्री रोहरा ने बताया कि पुन्नूलाल मोहले, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत, प्रेमप्रकाश पाण्डेय, चन्द्रशेखर साहू, मोतीलाल साहू, प्रबोध मिंज, नीलकंठ टेकाम, रिकेश सेन, राजेश अग्रवाल, मधुसूदन यादव, संजय श्रीवास्तव, अनुराग सिंह देव, पंकज झा, राकेश पाण्डेय, दीपक म्हस्के,श्रीमती सफिरा साहू, श्रीमती अंबिका यदु, शशांक शर्मा, उज्जवल दीपक और हेमंत पाणिग्राही घोषणा पत्र समिति के सदस्य बनाए गए हैं।

  • RBI की नई गाइडलाइन, अब सिर्फ इन दो नंबरों से आएंगे बैंकिंग कॉल…

    RBI की नई गाइडलाइन, अब सिर्फ इन दो नंबरों से आएंगे बैंकिंग कॉल…

    अगर आप भी बैंकिंग के नाम पर हो रही धोखाधड़ी और प्रमोशनल कॉल्स से परेशान हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है. दरअसल, इन दिनों फ्रॉड कॉल्स की समस्या आम हो गई है. आप भी अक्सर सुनते होंगे कि किसी अन्य शख्स के साथ बैंक के नाम पर फ्रॉड हो गया. ऐसे में आपकी इस समस्या पर अब रिजर्व बैंक ने पूर्ण विराम लगा दिया है. जी हां, बैंकिंग कॉल्स के लिए RBI ने नंबरों पर बड़ा फैसला लिया है.



    RBI के लेटेस्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, बैंकों को अब सभी लेनदेन-संबंधी कॉल के लिए केवल 1600 से शुरू होने वाले फोन नंबर का ही इस्तेमाल करना होगा। आसान शब्दों में कहें तो, अगर आपने कोई ट्रांजेक्शन किया है और आपको इसके लिए कोई कॉल आना है तो वो सिर्फ 1600 सीरीज से शुरू होने वाले नंबरों से ही आयेगा। ऐसे में ग्राहक को ध्यान होगा इस सीरीज का नंबर बैंकिंग के लिए ही है। वहीं, मार्केटिंग SMS से मिलने वाली जानकारी के लिए बैंकों को केवल 140 सीरीज से शुरू होने वाले नंबरों का इस्तेमाल करना होगा। 140 सीरीज से शुरू होने वाले नंबर से आपको पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड या बीमा जैसी सेवाओं के लिए कॉल आ सकते हैं

    धोखेबाजों से बचाने में मिलेगी मदद



    RBI New Guidline माना जा रहा है कि, यह कदम लोगों को धोखाधड़ी वाले कॉल से दूर रहने में मदद करेगा। ये कदम यूजर्स को उन धोखेबाजों से बचाने में मदद करेगा, जो बैंकों की तरफ से लोन, क्रेडिट कार्ड देने का झूठा दावा करते हैं। बता दें क‍ि प‍िछले कुछ समय में ऑनलाइन और कॉल्‍स पर फ्राॅड करने वाली घटनाएं काफी ज्यादा बढी हैं। धोखेबाज अक्सर बैंक का एजेंट बनकर ग्राहकों से मोटी वसूली कर लेते हैं। ऐसे में ये कदम कारगर साबित हो सकता है।

  • लखमा रिमांड पर, ED बेटे को फिर किया तबल, जानिए..शराब घोटाला में अब किसका नंबर

    लखमा रिमांड पर, ED बेटे को फिर किया तबल, जानिए..शराब घोटाला में अब किसका नंबर

    रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला में गिरफ्तारी कोंटा विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को जेल दाखिल कर दिया गया है। सात दिन की रिमांड पूरी होने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लखमा को स्‍पेशल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने लखमा को 14 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया है।

    इस बीच ईडी ने लखमा के पुत्र हरीश लखमा को पूछताछ के लिए फिर तलब किया है। हरीश से पहले तीन बार पूछताछ हो चुकी है। हरीश को तलब किए जाने के साथ ही बात की चर्चा तेज हो गई है कि शराब घोटाला में गिरफ्तारी का अगला नंबर किसका है।

    पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी तलब कर सकती है ईडी
    सूत्रों के अनुसार शराब घोटाला में ईडी पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी तलब कर सकती है। पूर्व सीएम को शराब नीति के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। बात दें कि कांग्रेस सरकार के दौरान शराब नीति में बदलाव किया गया था, जिसकी वजह से कथिततौर पर दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी हुई। शराब नीति पर तत्‍कालीन आबकारी मंत्री लखमा के साथ ही भूपेश बघेल का भी हस्‍ताक्षर है। ईडी की पूछताछ में लखमा पूर ठिकरा अफसरों पर फोड़ चुके हैं। लखमा ने कहा है कि वे अनपढ़ हैं, अफसर पढ़कर सुनते थे और जहां कहते थे, वहां साईन कर देता था।

    शराब घोटाला में अब तक कई गिरफ्तार शराब घोटाला में आईएएस अफसरों के साथ अब तक कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। शराब घोटाला में गिरफ्तार होने वालों में अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, निरंजन दास और एपी त्रिपाठी के साथ कुछ कारोबारी शामिल हैं। एपी त्रिपाठी टेलीकॉम सेवा के अधिकारी है, जो केंद्र सरकार के अधीन है। इसलिए त्रिपाठी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सीबीआई को सौंपा गया है। 

  • अमर अग्रवाल को मिली अहम जिम्मेदारी:भाजपा ने घोषणा पत्र बनाने का दिया जिम्मा, नैरेटिव-कंटेंट टीम भी बनी; कांग्रेस ने बनाई समन्वय समिति…

    अमर अग्रवाल को मिली अहम जिम्मेदारी:भाजपा ने घोषणा पत्र बनाने का दिया जिम्मा, नैरेटिव-कंटेंट टीम भी बनी; कांग्रेस ने बनाई समन्वय समिति…

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों ही दल निकाय चुनाव के लिए तैयारी में जुट गए हैं। मंगलवार को भाजपा ने घोषणा पत्र और लोगों के बीच नैरेटिव सेट करने, राजनीतिक कंटेंट तैयार करने की टीम बनाई है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने समन्वय समिति तैयार की है। इस टीम पर उम्मीदवार चुनने का जिम्मा होगा। मंत्री मंडल में जगह मिलने की चर्चाओं के बीच अमर अग्रवाल को संगठन ने अहम मोर्चा संभालने को दिया है। घोषणा पत्र समिति के अमर अग्रवाल संयोजक और सुनील सोनी सह संयोजक बनाए गए हैं।

    भाजपा प्रदेश महामंत्री जगदीश (रामू) रोहरा ने बताया कि वरिष्ठ विधायक अमर अग्रवाल वाली समिति में पुन्नूलाल मोहले, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत, प्रेमप्रकाश पांडेय, चन्द्रशेखर साहू, मोतीलाल साहू, प्रबोध मिंज, नीलकंठ टेकाम, रिकेश सेन, राजेश अग्रवाल, मधुसूदन यादव, संजय श्रीवास्तव, अनुराग सिंह देव, पंकज झा, राकेश पांडेय, दीपक म्हस्के, सफिरा साहू, अंबिका यदु, शशांक शर्मा, उज्जवल दीपक और हेमंत पाणिग्राही को शामिल किया गया है। ये तैयार करेंगे नरेटिव भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने नगरीय निकाय चुनाव-2025 के लिए पार्टी की नैरेटिव और कंटेंट टीम की घोषणा की है। इसमें मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा इस टीम के संयोजक बनाए गए हैं। टीम में प्रदेश प्रवक्ता दीपक म्हस्के, प्रदेश मीडिया प्रभारी अमित चिमनानी, शशांक शर्मा, सोमेश पांडेय सदस्य होंगे। नगरीय निकाय चुनाव प्रभारी भूपेंद्र सिंह सवन्नी और त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव प्रभारी सौरभ सिंह टीम के पदेन सदस्य होंगे। कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट ये देंगे वहीं कांग्रेस पार्टी ने अपनी समन्वय समिति घोषित कर दी है। इस समिति पर ही प्रत्याशियों के चयन का जिम्मा भी है।

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर एक आदेश जारी किया गया है। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने बताया कि यह टीम नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र में आपसी समन्वय और सहमति बनाकर जीतने के योग्य दावेदारों की लिस्ट बनाएगी। 23 जनवरी को सीलबंद लिफाफे में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में इसे जमा किया जाएगा। जिलों के कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष को इसका संयोजक बनाया गया है। जिलों के प्रभारी प्रदेश पदाधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा सांसद, पूर्व सांसद, पूर्व प्रत्याशी, क्षेत्रीय विधायक, पूर्व विधायक स्थानीय प्रदेश पदाधिकारी, नगर निगम के पूर्व महापौर, पूर्व सभापति, नगर पालिक परिषद के पूर्व अध्यक्ष जिला शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्षों को इस समन्वय समिति में शामिल किया गया है।