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  • 41 IAS अधिकारियों का तबादला..मयंक चतुर्वेदी होंगे रायगढ़ कलेक्टर…

    41 IAS अधिकारियों का तबादला..
    मयंक चतुर्वेदी होंगे रायगढ़ कलेक्टर…

    राज्य सरकार ने राज्य के IAS अधिकारियों की जंबो ट्रांसफर लिस्ट जारी की है। इस सूची में दस जिलों में नए कलेक्टर पदस्थ किए गए हैं। सचिव स्तर के IAS अधिकारियों के प्रभार में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है।

    ये है सूची

    जनक पाठक को विशेष सचिव वन विभाग, शिखा राजपूत तिवारी को आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, डॉ प्रियंका शुक्ला को आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ प्रबंध संचालक राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, श्रीमती किरण कौशल को प्रबंध संचालक मार्कफेड और प्रबंध संचालक नान, अवनीश शरण को आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश तथा आयुक्त गृह निर्माण मंडल, सुनील जैन कमिश्नर बिलासपुर संभाग, के डी कुंजाम सदस्य राजस्व मंडल, कार्तिकय गोयल संचालक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा एम डी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन, सारांश मित्तर आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, पदुम एल्मा संचालक महिला बाल विकास, रमेश शर्मा विशेष सचिव गृह विभाग, धर्मेश साहू विशेष सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जितेंद्र शुक्ला मिशन संचालक जल जीवन मिशन, रिमिजियुस एक्का संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, रजत बंसल एमडी राज्य खनिज विकास निगम तथा विशेष सचिव सुशासन एवं अभिसरण, तारन प्रकाश सिन्हा आयुक्त मनरेगा तथा संचालक प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण, इफ्फत आरा अपर संभागीय आयुक्त रायपुर के साथ अपर संभागीय आयुक्त दुर्ग, जगदीश सोनकर प्रबंध संचालक अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के साथ संचालक आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान का अतिरिक्त प्रभार, संतोष देवांगन आयुक्त उच्च शिक्षा के साथ प्रबंध संचालक राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, ऋतुराज रघुवंशी संचालक लोक शिक्षण तथा संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद और राज्य साक्षरता मिशन का अतिरिक्त प्रभार, विजय के दयाराम संचालक तकनीकी शिक्षा रोजगार एवं प्रशिक्षण और सीईओ राज्य कौशल विकास अभिकरण, राहुल देव संचालक कृषि तथा संयुक्त सचिव कृषि, दीपक अग्रवाल नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन, अरविंद एक्का को संयुक्त सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा संचालक मुद्रण एवं लेखन सामग्री, संतन देवी जांगड़े संयुक्त सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सुखनाथ अहिरवार सचिव राज्य निर्वाचन और संयुक्त सचिव खेल एवं युवा कल्याण, आकाश छिकारा उप सचिव आवास पर्यावरण और सीईओ रायपुर विकास प्राधिकरण, चंद्रकांत वर्मा संचालक पशु चिकित्सा और जल ग्रहण प्रबंधन और अजय अग्रवाल प्रबंध संचालक राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम ।

    इन जिलों में नए कलेक्टर

    सर्वेश्वर भूरे कलेक्टर राजनांदगाँव, जन्मेजय महोबे कलेक्टर जांजगीर चांपा, दिव्या उमेश मिश्रा कलेक्टर बालोद, संजय अग्रवाल कलेक्टर बिलासपुर, इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल कलेक्टर खैरागढ़, कुंदन कुमार कलेक्टर मुंगेली, नुपुर राशि पन्ना कलेक्टर कोंडागांव, संजय कन्नौजे कलेक्टर सारंगढ़ बिलाईगढ, भगवान सिंह उईके कलेक्टर गरियाबंद, मयंक चतुर्वेदी कलेक्टर रायगढ़, कुणाल दुधावत कलेक्टर दंतेवाड़ा,

  • पुलिसिया जुल्म के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ साहू ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु..? CSP और SDM के खिलाफ जांच की मांग! हाईप्रोफाइल पत्र से मचा हड़कंप!

    पुलिसिया जुल्म के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ साहू ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु..? CSP और SDM के खिलाफ जांच की मांग! हाईप्रोफाइल पत्र से मचा हड़कंप!

    रायगढ़। शहर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ साहू ने राष्ट्रपति को भेजे एक सनसनीखेज पत्र में आरोप लगाया है कि प्रशासन से संवाद की पहल करने पर उन्हें पुलिसिया जुल्म का शिकार होना पड़ा। उन्होंने पत्र में दो प्रमुख अधिकारियों—नगर पुलिस अधीक्षक आकाश शुक्ला और अनुविभागीय दंडाधिकारी प्रवीण तिवारी—पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है। कार्रवाई न होने की स्थिति में उन्होंने इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग भी की है।

    आंदोलन को सुलझाने पहुंचे, बने निशाना

    पत्र में नीलकंठ साहू ने 9 और 10 मार्च 2025 को ऐश्वर्यम कॉलोनी और गोवर्धनपुर ग्रामवासियों द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण, कृषि भूमि पर कच्ची सड़क और धूल से निजात पाने के लिए आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि वे आंदोलन को सुलझाने हेतु प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच सेतु बनने की कोशिश कर रहे थे। बातचीत की पहल भी की गई, लेकिन प्रशासन की ओर से संवाद में रुकावट और बाद में पुलिस की कार्रवाई ने मामले को और भी जटिल बना दिया।

    अधिकारियों पर मनमानी और अभद्रता का आरोप

    साहू के अनुसार, 10 मार्च को जब वे दोबारा प्रदर्शनकारियों की मांग प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस बल ने टेंट उखाड़ दिए और बिना कोई संवाद किए धरना स्थल खाली करवा दिया। इसी दौरान नगर पुलिस अधीक्षक आकाश शुक्ला द्वारा उन्हें जबरन खींचकर थाने ले जाया गया। आरोप है कि वहां उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके जबड़े के दांत टूट गए और रक्तस्त्राव भी हुआ।

    हिरासत में रात भर रखा गया, बिना परिवार को सूचना

    नीलकंठ साहू का कहना है कि उन्हें न तो अपने परिवार को सूचना देने दी गई, न ही डॉक्टर से अपनी चोटों के बारे में खुलकर बात करने का मौका मिला। बाद में उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया। यह सब तब हुआ जब वे प्रशासन द्वारा आयोजित शांति समिति की बैठकों में सालों से सक्रिय सहयोगी के रूप में काम करते आए हैं।

    संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

    पत्र में उन्होंने इस पूरी घटना को उनके संवैधानिक अधिकारों का घोर उल्लंघन बताते हुए लिखा है कि प्रशासन ने न केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता की गरिमा को ठेस पहुँचाई, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अनदेखी की है।

    मांग की निष्पक्ष जांच या इच्छा मृत्यु की अनुमति

    उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कहा है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए। यह पत्र उन्होंने मुख्य न्यायाधीश, मुख्य सचिव, डीजीपी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और कई अन्य अधिकारियों को भी भेजा है।

    प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

    अब तक इस पत्र पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मामले ने रायगढ़ समेत राज्य भर में सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

  • रशियन गर्ल को मिली जमानत, वीआईपी रोड एक्सीडेंट मामले में गई थी जेल…

    रशियन गर्ल को मिली जमानत, वीआईपी रोड एक्सीडेंट मामले में गई थी जेल…

    रशियन गर्ल का केस वकील अनुराग गुप्ता ने लड़ा। वकील ने कहा कि एक टूरिस्ट के तौर पर नोरा भारत आयी थी, लेकिन उसे टेटरिस्ट की तरह पेश किया गया।

    रायपुर के वीआईपी रोड में हुए एक्सीडेंट के मामले में जेल गई उज्बेकिस्तान रशियन गर्ल को जमानत मिल गयी है। नोरा नाम की ये लड़की उज्बेकिस्तान की रहने वाली है। आरोप है कि वो कथित तौर पर सेक्स रैकेट का भी हिस्सा है। इस मामले में पुलिस की जांच चल रही है।

    युवती जिस कार में सवार थी, उस कार से 6 फरवरी 2025 को आधी एक एक्सीडेंट हो गया था। एक सरकारी वकील के साथ बैठी रशियन युवती की कार ने स्कूटी सवार को जोरदार टक्कर मार दी थी, इस घटना में एक युवक की जान चली गयी थी। इस घटना के बाद आधी रात सड़क पर रशियन गर्ल ने खूब बबाल काटा था।

    कोर्ट में वकील ने दलील दी, कि रशियन गर्ल को ड्राइविंग नहीं आती, बावजूद गलत तरीके से फंसाकर पुलिस ने उस पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर दिया। इस मामले को हाईकोर्ट में भी चुनौती देने की बात कही जा रही है। इधर रशियन गर्ल नोरा पासपोर्ट अभी पुलिस के पास ही रहेगा।

    रशियन गर्ल का केस वकील अनुराग गुप्ता ने लड़ा। वकील ने कहा कि एक टूरिस्ट के तौर पर नोरा भारत आयी थी, लेकिन उसे टेटरिस्ट की तरह पेश किया गया। पुलिस की कार्यशैली पर भी वकील ने सवाल खड़े किये।

    कोर्ट को बताया गया कि नोरा की गिरफ्तारी के बाद भारतीय दूतावास को इसकी सूचना काफी देर से दी गयी। वहीं जो कार्रवाई की गयी, वो भाषा के प्राब्लम्स की वजह से युवती समझ भी नहीं पा रही थी। कोर्ट ने वकील के तर्को को सुना और फिर उसे जमानत दे दी।

  • Cibil Score New Rule : सिबिल स्कोर को लेकर आरबीआई ने जारी किए 6 नए नियम, अब लोन लेना होगा आसान…

    Cibil Score New Rule : सिबिल स्कोर को लेकर आरबीआई ने जारी किए 6 नए नियम, अब लोन लेना होगा आसान…

    अगर आप लोन लेने की योजना बना रहे हैं या भविष्य में किसी भी तरह का कर्ज लेना चाहते हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लागू किए गए क्रेडिट स्कोर (सिबिल स्कोर) से जुड़े नए नियम आपके लिए बेहद ज़रूरी हैं। ये नियम 1 जनवरी 2025 से लागू हो चुके हैं और हर आम नागरिक को इनके बारे में जानकारी होना चाहिए। आइए जानते हैं इन 6 नए नियमों के बारे में विस्तार से, जो आपके क्रेडिट स्कोर और लोन प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बना देंगे।

    . अब हर 15 दिन में मिलेगा अपडेटेड क्रेडिट स्कोर

    पहले ग्राहक को अपना क्रेडिट स्कोर अपडेट होने में कई हफ्ते लग जाते थे, जिससे लोन प्रोसेस में देरी होती थी। लेकिन नए नियमों के अनुसार अब हर 15 दिनों में आपका क्रेडिट स्कोर अपडेट हो जाएगा। इससे आपको समय-समय पर अपने स्कोर की जानकारी मिलती रहेगी और आप सही समय पर फाइनेंशियल फैसले ले पाएंगे।

    2. जब भी बैंक स्कोर चेक करेगी – आपको मिलेगा मैसेज या ईमेल

    अब जब कोई बैंक या वित्तीय संस्था आपका क्रेडिट स्कोर चेक करेगी, तो आपको उसकी जानकारी तुरंत SMS या ईमेल के जरिए दी जाएगी। इससे आपको पता चलता रहेगा कि कौन आपकी क्रेडिट जानकारी देख रहा है। यह नियम पारदर्शिता लाने के साथ-साथ गोपनीयता और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

    3. साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट देखने की सुविधा

    हर ग्राहक को अब साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट मिलेगी। क्रेडिट कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर ऐसा लिंक देना होगा, जिससे ग्राहक मोबाइल या कंप्यूटर से खुद की रिपोर्ट देख सकें। इससे ग्राहक अपने वित्तीय स्वास्थ्य की सही जानकारी ले पाएंगे और समय रहते सुधार कर सकेंगे।

    4. शिकायतों का समाधान 30 दिनों के अंदर अनिवार्य

    अगर किसी ग्राहक की क्रेडिट स्कोर से जुड़ी शिकायत है और उसका समाधान 30 दिनों के अंदर नहीं होता, तो संबंधित क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी को ₹100 प्रति दिन का जुर्माना देना होगा। इसके साथ-साथ अगर कोई बैंक या लोन संस्था 21 दिनों के भीतर जरूरी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को नहीं देती, तो उस पर भी जुर्माना लगेगा। इससे ग्राहकों की समस्याओं को समय पर हल किया जाएगा।

    5. लोन डिफॉल्ट से पहले मिलेगी चेतावनी

    अगर आपके लोन में डिफॉल्ट होने की संभावना है, तो बैंक को आपको पहले ही इसकी जानकारी देनी होगी। यह जानकारी SMS या ईमेल से दी जाएगी ताकि आप समय रहते जरूरी कदम उठा सकें और डिफॉल्ट से बच सकें। इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री सुरक्षित रहेगी।

    6. स्कोर की सुरक्षा और पारदर्शिता में सुधार

    RBI ने इन नियमों के जरिए क्रेडिट स्कोर की सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। अब गलत एंट्री, फर्जी रिपोर्ट या स्कोर में बिना वजह बदलाव की संभावना काफी कम हो जाएगी। इससे ग्राहकों को फायदा होगा क्योंकि सही स्कोर होने पर उन्हें लोन लेना भी आसान और सस्ते ब्याज पर मिलेगा।

    निष्कर्ष: ग्राहकों के लिए फायदेमंद है नया सिस्टम

    RBI द्वारा 1 जनवरी 2025 से लागू किए गए ये नए नियम लोन लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और ग्राहक हितैषी बना रहे हैं। अब न सिर्फ स्कोर जल्दी अपडेट होगा, बल्कि रिपोर्ट तक मुफ्त पहुंच, शिकायतों का समय पर समाधान और स्कोर की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है।

    अगर आप भी कभी लोन लेने की सोच रहे हैं, तो इन नियमों को समझना और इनके अनुसार अपने क्रेडिट स्कोर को सही रखना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। समय पर EMI भरें, खर्चों का संतुलन रखें और अपने स्कोर पर नजर बनाए रखें – यही स्मार्ट वित्तीय भविष्य की शुरुआत है।

  • कोर्ट ने एनटीपीसी कोरबा अस्पताल को पाया मरीजों से भेदभाव करने का दोषी, दी चेतावनी…

    कोर्ट ने एनटीपीसी कोरबा अस्पताल को पाया मरीजों से भेदभाव करने का दोषी, दी चेतावनी…

    कोरबा। एनटीपीसी, कोरबा अस्पताल (NTPC Korba Hospital) अब इलाज के मामले में मरीजों के साथ भेदभाव नहीं कर सकेगा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक प्रकरण में सुनवाई करते हुए इस आशय का आदेश पारित किया है।

    17 अप्रेल, 2025 को पारित अपने आदेश (प्रकरण क्र. सीसी/24/110) में आयोग ने लिखा है कि, एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया जाता है कि वे भविष्य में संविधान में आम नागरिक को अनुच्छेद 14 एवं 21 में प्रदत्त समानता एवं त्वरित उपचार के मौलिक अधिकार के उल्लंघन में कोई कार्य न करें। मरीजों के उपचार के संबंध में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। विरोधी पक्षकार अपने अस्पताल में नीतियों एवं प्रक्रियाओं को स्वास्थ्य सेवा में स्थापित नैतिक एवं कानूनी मानकों के अनुरूप तैयार करें।

    आयोग ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि अस्पताल प्रबंधन ने परिवादी के प्रति सेवा में कमी एवं व्यवसायिक कदाचरण का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया जाता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया गया कृत्य असंवैधानिक तथा सेवा में कमी का घोर कदाचरण के श्रेणी का कृत्य है।

    गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान एनटीपीसी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं डा. धमेन्द्र प्रसाद द्वारा आयोग को बताया गया था कि अस्पताल के प्रोटोकॉल के तहत एनटीपीसी कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को इलाज में प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रोटोकॉल का कोई लिखित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

    परिवादी की ओर से अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने मजबूती के साथ आयोग के समक्ष पैरवी की और प्रकरण को परिणाम तक पहुंचाया। केस में विरोधीपक्षकार यानी एनटीपीसी, कोरबा अस्पताल के सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर, शल्य चिकित्सक धमेन्द्र प्रसाद के अधिवक्ता आरएन राठौर ने पैरवी की। प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रंजना दत्ता एवं सदस्य पंकज कुमार देवड़ा की बेंच द्वारा सुनवाई करते हुए अंतिम आदेश पारित किया गया।

    यह था पूरा मामला

    एनटीपीसी, जमनीपाली निवासी मोहम्मद सादिक शेख द्वारा एनटीपीसी, कोरबा के शल्य चिकित्सक धमेन्द्र प्रसाद एवं सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर के विरूद्ध इलाज में भेदभाव करने संबंधी परिवाद अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। इसमें बताया गया था कि 2 अगस्त, 2024 को घर की छत पर कार्य करने के दौर फिसलकर गिर जाने से बायें पसली में चोट आ गई थी।

    इलाज के लिए संध्या को निर्धारित शुल्क जमा कर एनटीपीसी, कोरबा के विभागीय अस्पताल में शल्य चिकित्सक धमेन्द्र प्रसाद को दिखाया गया था। डॉक्टर ने एनटीपीसी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बाद मोहम्मद सादिक शेख को बुलाया तथा दवाइयां लिखते हुए एक्सरे के लिए कहा, लेकिन देर हो जाने के कारण एक्सरे कक्ष बंद हो चुका था। डाक्टर ने दूसरे दिवस आकर एक्सरे कराने कहा।

    3 अगस्त, 2024 को मोहम्मद सादिक शेख ने शुल्क जमा कर एक्सरे करवाया तथा इसकी रिपोर्ट दिखाने डा. धमेन्द्र प्रसाद के पास गए। श्री शेख का दूसरा क्रम था, लेकिन इस बीच एक के बाद एक एनटीपीसी कर्मचारी इलाज के लिए आने लगे और डा. धमेन्द्र प्रसाद द्वारा उन्हें देखा जाने लगा। इस पर मोहम्मद सादिक शेख द्वारा आपत्ति जताई गई और कहा गया कि उनका दूसरा नम्बर और उनका नम्बर लगाने के बाद चार एनटीपीसी कर्मचारी को देखा गया। इस पर डा. धमेन्द्र प्रसाद ने कहा कि यह उनका प्रोटोकॉल है कि एनटीपीसी के कर्मचारी और उनके परिवार का इलाज पहले किया जाएगा।

    मोहम्मद सादिक शेख ने प्रोटोकॉल का लिखित आदेश दिखाने की बात कही तो इस पर डा. धमेन्द्र प्रसाद भड़क गए और दुर्व्यवहार करते हुए सीएमओ से बात करने कहा गया। सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर ने भी कहा कि अस्पताल का प्रोटोकाल है कि एनटीपीसी कर्मचारी को इलाज में प्राथमिकता दी जाएगी। सीएमओ से भी प्रोटोकॉल का कोई आदेश है तो दिखाने कहा गया तो उन्होंने भी परिवादी के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया तथा इलाज करने से मना कर दिया गया।

    मोहम्मद सादिक शेख ने मामले की शिकायत पहले दर्री थाने में की। थाने से एक माह बाद लिखित में, प्रकरण हस्तक्षेप योग्य नहीं है, का जवाब दिया गया। इसके बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया गया।

  • अब विधायकों के पाई पाई खर्च पर रखी जाएगी नजर, छत्तीसगढ़ में MLA LADDS पोर्टल हुआ लांच

    अब विधायकों के पाई पाई खर्च पर रखी जाएगी नजर, छत्तीसगढ़ में MLA LADDS पोर्टल हुआ लांच

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विधायक निधि के पारदर्शी और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एमएलए लैड्स (MLA LADDS) नामक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब विधायकों द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों और निधि खर्च का हर विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा, जिसे आम जनता भी देख सकेगी।

    रायपुर से हुई शुरुआत
    पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस पोर्टल को सबसे पहले रायपुर जिले में लागू किया गया है। यहां से मिलने वाले अनुभव के आधार पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

    व्यवस्था समझाने के लिए हुआ प्रशिक्षण
    रेडक्रास भवन, कलेक्टोरेट रायपुर में गुरुवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने पोर्टल की कार्यप्रणाली, आवेदन से लेकर स्वीकृति तक की प्रक्रिया, निगरानी तंत्र और फंड रिलीज प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

    डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम
    योजना एवं सांख्यिकी विभाग के अपर संचालक नारायण बुलीवाल ने कहा कि यह पोर्टल डिजिटल इंडिया अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो विधायक निधि के सदुपयोग को सुनिश्चित करेगा।

    MP LADDS की तर्ज पर MLA LADDS
    यह पोर्टल संसद के MP LADDS पोर्टल की तर्ज पर विकसित किया गया है। जैसे एमपी पोर्टल में सांसद निधि से जुड़े कार्यों, व्यय विवरण, स्वीकृत परियोजनाओं और प्रगति की जानकारी होती है, वैसे ही अब विधायकों के लिए भी यही सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    पब्लिक के लिए खुला पोर्टल
    MLA LADDS पोर्टल पब्लिक डोमेन में है, यानी अब राज्य के नागरिक यह जान सकेंगे कि उनके क्षेत्र में विधायक निधि से कौन-कौन से कार्यों की सिफारिश हुई है, कितने कार्य स्वीकृत हुए हैं, किस पर कितना खर्च हुआ है और कौन-से कार्य पूरे हुए हैं।

    फंड रिलीज होगी चार किस्तों में
    सूत्रों के अनुसार, पोर्टल के माध्यम से फंड रिलीज की प्रक्रिया भी पारदर्शी बनाई गई है। किसी परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद एजेंसी को चार चरणों में भुगतान किया जाएगा—पहली किस्त 25%, दूसरी 50% कार्य पूर्ण होने पर, तीसरी 75% कार्य पर, और अंतिम किस्त कार्य पूर्ण होने के बाद जारी की जाएगी। इससे कार्यों की समय पर पूर्णता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    प्रगति रिपोर्ट भी होगी ऑनलाइन
    हर कार्य की प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि निधि का दुरुपयोग नहीं हो और जनता को विकास कार्यों की सटीक जानकारी मिलती रहे।

    निष्कर्ष
    छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल न केवल विधायक निधि के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर नजर रखने का अवसर देगी। यह पारदर्शिता की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।

  • छाल खदान में कोयला स्टॉक में लगी आग, बुझाने में नाकाम प्रबंधन…

    छाल खदान में कोयला स्टॉक में लगी आग, बुझाने में नाकाम प्रबंधन…

    रायगढ़। एसईसीएल की छाल खदान में बड़ी लापरवाही सामने आई है। महीनों से रखे हुए कोयले के स्टॉक में आग लग गई है। कोयला समय पर डिस्पैच नहीं करने की वजह से ऐसा हुआ है। अब वहीं जला हुआ कोयला कंपनियों को दिया जा रहा है। सब एरिया मैनेजर की मनमानी से यह गड़बड़ी हुई है। गर्मी के सीजन में तापमान बढ़ने के साथ कोयला खदानों में एहतियात बढ़ जाती है। एसईसीएल की छाल खदान में सब एरिया मैनेजर की मनमानी से कोयले का स्टॉक राख होता जा रहा है। यहां महीनों से डंप पड़े स्टॉक में आग लग गई है। करीब 3 लाख टन कोयला स्टॉक में रखा हुआ है।

    अब जिन कंपनियों का डीओ है, उनको यही जला हुआ कोयला दिया जा रहा है। लोडिंग के समय भी गाड़ी में खराब कोयला डाला जा रहा है। कंपनी में जब कोयला डिलीवर हो रहा है तो गुणवत्ता खराब होने का कारण बताकर ट्रांसपोर्टर का पेमेंट काटा जा रहा है। एसईसीएल छाल खदान में यही कोयला उपलब्ध है। जी-12 और जी-16 ग्रेड का कोयला कई महीनों से डंप पड़ा हुआ है। पिछले दो-तीन दिनों में आग तेज हो गई है। अभी करीब एक लाख टन के डीओ पेडिंग हैं। कहा जा रहा है जो कंपनी कोयला लेने से इंकार कर रही है, उसके डीओ लैप्स हो रहे हैं

    नया स्टॉक 100 रुपए में दिया

    सूत्रों के मुताबिक बीच में खदान से नया स्टॉक निकालकर पुराने के ऊपर डाल दिया गया। 100 रुपए प्रति टन में कंपनियों को नया स्टॉक दे दिया गया। पुराने स्टॉक को छोड़ दिया गया। जी-12 के इस स्टॉक में आग लग गई है। धीरे-धीरे सैकड़ों टन कोयला राख होता जा रहा है। एक अप्रैल से आई नई ग्रेडिंग पॉलिसी में जी-12 ग्रेड अब जी-8 हो गया है। इसलिए अब इस कोयले को पुराने सिस्टम में उठवाना मुश्किल हो रहा है।

    डेढ़ लाख टन के डीओ लैप्स

    मिली जानकारी के मुताबिक छाल खदान में व्यवस्था चरमरा गई है। कोयले के स्टॉक में आग लगने के बाद उसे बुझाने की कोशिश नाकाम हो रही है। कई कंपनियां समयावधि में कोयला नहीं उठा सकी क्योंकि उनको अच्छा कोयला नहीं मिला। इस वजह से करीब डेढ़ लाख टन के डीओ लैप्स हो गए हैं।

  • दरोगा ने आरोपी की जगह जज को ही बना दिया आरोपी, कोर्ट में पढ़ी गई रिपोर्ट तो सब हो गए हैरान…

    दरोगा ने आरोपी की जगह जज को ही बना दिया आरोपी, कोर्ट में पढ़ी गई रिपोर्ट तो सब हो गए हैरान…

    फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस की ऐसी लापरवाही देखने को मिली, जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है. दरअसल एक चोरी के मामले में आरोपी की तलाश करते हुए पुलिस आरोपी की जगह जज को ही ढूंढने पहुंच गई. 

    मामला जुड़ा है अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नगमा खान की अदालत से, जहां सरकार बनाम राजकुमार उर्फ पप्पू नामक केस की सुनवाई चल रही थी. आरोपी राजकुमार लंबे समय से फरार है. कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी और कुर्की का आदेश जारी किया था. आदेश के पालन में थाना उत्तर के उपनिरीक्षक बनवारी लाल ने रिपोर्ट सौंपी. लेकिन उस रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया. पुलिस रिपोर्ट में लिखा गया- ‘आरोपी नगमा खान को उसके पते पर तलाशा गया, लेकिन वह वहां नहीं मिलीं!’ जी हां, पुलिस ने आरोपी के बजाय जज नगमा खान का ही नाम रिपोर्ट में डाल दिया. 

    कोर्ट में ये रिपोर्ट पढ़ी गई और खुद जज नगमा खान भी हैरान रह गईं. उन्होंने इस रिपोर्ट को ड्यूटी में घोर लापरवाही बताया और तत्काल उच्च अधिकारियों से जवाब तलब कर लिया. कोर्ट ने आईजी रेंज आगरा और एसएसपी फिरोजाबाद को पत्र भेजकर जवाब मांगा है. एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने स्वीकार किया कि रिपोर्टिंग में भारी चूक हुई है. आरोपी के नाम की जगह गलती से जज का नाम डाल दिया गया. विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है. 

    फिरोजाबाद के थाना उत्तर के सब इंस्पेक्टर बनवारी लाल को लाइन हाजिर कर दिया गया है. यह घटना सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि उस लापरवाही को दर्शाती है, जो हमारी न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है. अब देखना ये होगा कि 26 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में क्या कार्रवाई होती है और इस भारी चूक के लिए जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई होती है.

  • रूस के S-400 से ही तबाह हो गया अमेरिका F-16 जेट, S-500 मिसाइल सिस्टम तो क्या ही हाल करेगा!

    रूस के S-400 से ही तबाह हो गया अमेरिका F-16 जेट, S-500 मिसाइल सिस्टम तो क्या ही हाल करेगा!

    रूस ने अपने यूक्रेन का F-16 फाइटर जेट मार गिराया है. ये अमेरिका निर्मित जेट है, जो यूक्रेन को निर्यात किया गया था. F-16 दुनिया के ताकतवर जेट्स में गिना जाता है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि आखिरकार इस जेट को रूस ने मारा कैसे. इस पर यूक्रेन की रिपोर्ट्स कहती हैं कि रूस ने F-16 को संभवतः S-400 मिसाइल सिस्टम से मारा होगा. इसके बाद से ही S-400 की खूबियां चर्चा में आ गई हैं, लेकिन रूस के पास इससे भी खतरनाक मिसाइल सिस्टम है, जिसका नाम S-500 है. आइए, जान लेते हैं कि S-400 से S-500 कितना अलग और खतरनाक है.

    S-500 मिसाइल सिस्टम क्या है?
    रूस ने हाल ही में S-500 ‘Prometey’ या S-500 ‘Samoderzhets’ की वायु रक्षा प्रणाली को विकसित किया है. यह मिसाइल सिस्टम S-400 से ज्यादा आधुनिक है. ये नई पीढ़ी की एंटी-बैलिस्टिक और एंटी-एयरोस्पेस मिसाइल सिस्टम है. यदि ये मिसाइल सिस्टम F-16 से टकराता तो अमेरिकी जेट का और बुरा हाल होता.

    S-400 और S-500 की रेंज में फर्क
    S-400 सिस्टम 400 किमी तक की रेंज और 30 किमी की ऊंचाई तक लक्ष्य भेद सकता है. जबकि S-500 मिसाइल सिस्टम 600 किमी तक की रेंज और 200 किमी तक की ऊंचाई के टारगेट को नष्ट करने में सक्षम है. 

    S-400 से ज्यादा खतरनाक है S-500
    S-400 खासकर लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाता है. जबकि S-500 तो निचले उपग्रहों और हाइपरसोनिक मिसाइलों को निशाना बनाने में भी सक्षम है. इससे आप इसकी ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं.

    S-500 में आधुनिक रडार लगे हैं
    S-400 में उन्नत रडार सिस्टम हैं जैसे- 91N6E और 92N6E, जो कई टारगेट ट्रैक कर सकते हैं. जबकि S-500 में मिसाइल सिस्टम अधिक शक्तिशाली और लंबी दूरी के रडार जैसे- 77T6 और 76T6 हैं. ये स्टील्थ तकनीक और हाइपरसोनिक तकनीक से लैस हथियारों को बेहतरी से पहचान सकते हैं.

  • एसबीआई एटीएम ट्रांजैक्शन नियमों में बदलाव….

    एसबीआई एटीएम ट्रांजैक्शन नियमों में बदलाव….


    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने अपने ग्राहकों के लिए एटीएम से निकासी के नियमों में बदलाव किया है। बैंक ने एटीएम ट्रांजैक्शन चार्जेस और एटीएम से फ्री निकासी करने की लिमिट को बढ़ा दिया है।

    नए नियम

    • मुफ्त लेनदेन: सभी ग्राहकों को हर महीने एसबीआई के एटीएम पर 10 मुफ्त लेनदेन और अन्य बैंकों के एटीएम पर 5 मुफ्त लेनदेन करने का अधिकार होगा।
    • चार्जेस: 1 मई, 2025 से, एसबीआई ग्राहकों को अपनी निःशुल्क मासिक सीमा पार करने के बाद एटीएम से प्रति लेनदेन पर 23 रुपए निकासी शुल्क देना होगा।
    • लेनदेन फेल होने पर जुर्माना: अगर आपके बचत खाते में पैसा नहीं होने के कारण एटीएम लेनदेन फेल हो जाता है, तो 20 रुपए + जीएसटी जुर्माना देना होगा।

    एवरेज मंथली बैलेंस के आधार पर छूट

    • 25,000 से 50,000 रुपए: खाते में 25,000 रुपए से 50,000 रुपए के बीच एवरेज मंथली बैलेंस रखने वाले ग्राहकों को अन्य बैंक एटीएम पर 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलेंगे।
    • एक लाख रुपए से अधिक: खाते में एक लाख रुपए से ज्यादा का एवरेज मंथली बैलेंस रखने वालों को एसबीआई और अन्य बैंक के एटीएम, दोनों से अनलिमिटेड फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलेगी।